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भारत के शुभांकर प्रकाश के निर्देशन में फ़्रांस में चल रहा देश की कलात्मक विरासत का जश्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जाएगी भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत कला क्षेत्र में वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित आर्ट संस्थान के निदेशक ऑपरेशन हैं सुल्तानपुर के शुभांकर प्रकाश  
लखनऊ/ नई दिल्ली। भारत की अमित विरासत को दुनियां से रूबरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी शुभांकर प्रकाश भारती (संचालन निदेशक) ने भारतीय कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित करने वाली एक कला प्रदर्शनी आयोजित की है।फ़रवरी प्रथम सप्ताह से आगामी 22 मार्च चलने वाली यह प्रदर्शनी पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत का जश्न मनाना है, जिसमें देश की जीवंत संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली शानदार कलाकृतियों का संग्रह एक साथ लाया जाएगा। प्रदर्शनी में पारंपरिक पेंटिंग, समकालीन कृतियाँ और मिश्रित मीडिया कृतियां सहित विभिन्न प्रकार की कलाएं प्रदर्शित की जाएँगी। आगंतुकों को भारतीय कलाकारों की अनूठी शैलियों और तकनीकों को जानने, उनकी रचनात्मक प्रक्रियाओं और उनकी उत्कृष्ट कृतियों के पीछे की कहानियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली 193 आर्ट गैलरी इस प्रदर्शनी के लिए एकदम सही जगह है। पेरिस के केंद्र में स्थित, गैलरी कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं को भारतीय कला की सुंदरता और गहराई की सराहना करने के लिए एक परिष्कृत और स्वागत योग्य स्थान प्रदान करती है।
*साहित्य प्रसारक राजेश कुमार के बेटे हैं शुभांकर प्रकाश
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के भारतीय साहित्य के प्रसारक और व्यवसायी राजेश कुमार के एक बेटी और दो बेटों में से एक शुभांकर प्रकाश भारती हैं।  जेएनवी  नवोदय विद्यालय  सुल्तानपुर से शुभांकर ने बारहवीं कक्षा तक टॉप किया था। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में तीसरी रैंक हासिल की थी इसी क्रम में शुभंकर ने प्रवेश के लिए शांतिनिकेतन चुना।फिर वहां से अपनी प्रतिभा के दम पर स्कॉलरशिप पर फ्रांस चले गए। जहां आगे की पढ़ाई की और अब वहां की प्रतिष्ठित आर्ट गैलरी में डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशन है। शुभांकर के भाई रविंद्र प्रकाश बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर हैं।

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पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार

भारतीय स्वरूप संवाददाता डॉ योगेंद्र और डॉ दीक्षा को पीडब्ल्यूए ने किया सम्मानित पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार  >  निःशुल्क कंसल्टेंसी और औषधियों के वितरण में जनहितकारी योगदान के लिए सराहा, बोले डॉक्टर समाज में जीवन रक्षक डॉक्टर समाज में लोगों के लिए जीवन रक्षक के रूप में देखे जाते हैं। समाज में अपने कर्तव्यों और निस्वार्थ सेवा के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले दो चिकित्सकों को  वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश(पीडब्ल्यूए) के लोकहित में चले एक माह निशुल्क सेवा ड्राइव में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सम्मानित किया  है। पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश द्वारा वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह यादव और डॉ दीक्षा कटियार को लोकसेवा के लिए सम्मान पत्र  प्रदान किया। पीडब्ल्यूए की ओर से वरिष्ठ  सामाजिक कार्यकर्ता संजय कटियार ने डॉक्टर्स को सम्मान पत्र भेंट किया और लोकहित में उनकी सेवा और सहयोग की सराहना की गई। पीडब्ल्यूए के महासचिव पंकज कुमार सिंह ने बताया कि समाज में असहाय और निर्धनों के लिए मदद में डॉक्टर्स ने अहम भूमिका निभाई है,साथ ही इनके द्वारा निशुल्क औषधीय वितरण में सहयोग भी दिया गया है। डॉक्टर्स ने अपने चिकित्सकीय पेशे के एक हिस्से में पीडब्ल्यूए के साथ जुड़कर लोकहित में गरीब असहायों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।  उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में गायत्रीपुरम गली नम्बर 3 कल्याणपुर में एक स्थाई निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा क्लिनिक भी संचालित किया जा रहा है जहाँ असहाय और निर्धनों के स्वास्थ्य सेवा के लिए मदद दी जाती है। वार्ता में विपिन पटेल, अजय सिंह, प्रदीप सिंह, सुमित शर्मा आदि रहे।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में बसंत पर्व पर सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापित

कानपुर 26 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में बसंत पर्व पर सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापना तथा हवन पूजन का विधिवत् निर्वहन धूमधाम से किया गया कार्यक्रम के शुभारंभ में महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव पी. के. सेन, प्राचार्या प्रो. सुमन, प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन द्वारा सरस्वती पूजा पर परम्परागत हवन – पूजा-अर्चना द्वारा सरस्वती प्रतिमा की विधिवत् स्थापना की गयी|

डॉ. शुभा वाजपई के संयोजन में, प्रो. मीनाक्षी व्यास, डॉ. शैल वाजपई, डॉ. प्रीता अवस्थी, डॉ. सपना रॉय, डॉ. मोनिका शुक्ला के द्वारा बसंत उत्सव की तैयारियां पूर्ण मनोयोग से की गई। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की डॉ. रचना निगम के निर्देशन में कला विभाग की छात्राओं अनुष्का, ओमाक्षी, वर्षा, संस्कृति, विधि, अनीता, अफरोज, स्नेहा, श्रेया, अमीषा, वैष्णवी, ने महाविद्यालय सभागार में वृहत तथा अद्भुत रंगोली का निर्माण किया। । महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने बसंत उत्सव संस्कृति निर्वहन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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सोशल रिसर्च फाउंडेशन के 15 वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर समसामयिक विषय “उच्च शिक्षा : दशा और दिशा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता किदवई नगर स्थित सोशल रिसर्च फाउंडेशन के 15 वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर आज बहुत ही समसामयिक विषय “उच्च शिक्षा : दशा और दिशा” पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होटल मन्दाकिनी रॉयल, साकेत नगर, कानपुर में किया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के लिए दिल्ली, पंजाब राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, उन्नाव, प्रयागराज, कानपुर आदि से आए लगभग 30 विद्वतजनों को सम्मानित भी किया गया।

संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश माननीय श्री योगेंद्र उपाध्याय जी के कर कमलो से हुआ। मुख्य अतिथि ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं– नई शिक्षा नीति ऐसे प्रयासों का प्रमाण है। हमारे प्रयासों से शीघ्र ही सकारात्मक परिणाम आने लगेंगे। उन्होंने शिक्षकों से सकारात्मक सहयोग का आवाहन भी किया।
सोशल रिसर्च फाउंडेशन की उपाध्यक्ष, महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ० आशा त्रिपाठी ने सभी सम्मानित अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उच्च शिक्षा में व्याप्त प्रदूषण की ओर नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह एक चिंतनीय यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर हमें खोजना होगा।
संस्था के संस्थापक सचिव राजीव मिश्रा ने संस्था की 15 वर्षों की गौरवमयी यात्रा का विस्तृत परिचय दिया और बताया कि संस्थान के साथ जुड़कर इस देश के लाखों शिक्षक गण लाभान्वित हो रहे हैं। संस्थान के 6 रिसर्च जर्नल विश्व के 25000 जनरल्स के मध्य स्थान रखते हैं जो कानपुर के लिए भी एक गौरवपूर्ण बात है।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार जी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को और ज्यादा समावेशी, प्रभावी और बेहतर बनाना है। यह 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है। इस नीति का उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।
संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि और श्री कामतानाथ मंदिर चित्रकूट के पीठाधीश्वर डॉ० मदन गोपाल दास ने कहा
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के स्टेटीशियन डॉ० संदीप मिश्रा ने कहा
एम० एल० सी० अरुण पाठक ने कहा कि नई शिक्षा नीति ऐसी शिक्षा प्रणाली की आधारशिला है जो विज्ञान के साथ-साथ ज्ञान से भी परिपूर्ण है।
सेमिनार की अध्यक्षता जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित के ए दुबे ‘पद्मेश’ जी ने की। उन्होंने नई शिक्षा नीति का भविष्य उज्जवल बताते हुए सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर भी काम करने की आवश्यकता पर बल दिया ।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ० निर्विकार कटियार, मध्य प्रदेश के डॉ० सी० एम० मेहता, राजस्थान से आए डॉ० राजेश कुमार शर्मा और भोपाल के डॉ० प्रभात पांडे जी ने नई शिक्षा नीति की विभिन्न संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए अपनी शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित परिवर्तन और सुधार लाने पर जोर दिया जिससे भारत शिक्षा के क्षेत्र में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
तकनीकी सभा में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए जिनमें उच्च शिक्षा की दशा और संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। यह संगोष्ठी उच्च शिक्षा और नई शिक्षा नीति के संदर्भ में एक मील का पत्थर साबित हुई।
सोशल रिसर्च फाउंडेशन के संरक्षक और डीबीएस कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ० शिव कुमार दीक्षित द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। गोष्ठी का कुशल संचालन महिला महाविद्यालय की हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ० ज्योति किरण द्वारा किया गया। इस सेमिनार का संयोजन संस्थान की जनरल मैनेजर और जर्नल्स की उपसंपादक कुमारी भावना निगम द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में संस्थान की कोषाध्यक्ष दीप्ति मिश्रा, तेजस्वी मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना दीक्षित, डॉक्टर मीत कमल द्विवेदी, अतुल दीक्षित, दिलीप कुमार मिश्रा, डॉ प्रदीप अवस्थी, अमन निगम, रचना गुप्ता, विनीशा मिश्रा, डॉ पी एन शर्मा, डॉ अनुराग सिंह, डॉ क्षमा त्रिपाठी, कार्तिकेय अवस्थी, शुभम तिवारी, कृष्ण गोपाल तिवारी, प्रकाश शुक्ला, राम द्विवेदी, अंजली शुक्ला, डॉ अक्षय शुक्ल, संगीता सिरोही सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहें।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वार्षिक एनसीसी पीएम रैली को संबोधित किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में वार्षिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पीएम रैली को संबोधित किया। श्री मोदी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवलोकन किया और सर्वश्रेष्ठ कैडेट पुरस्कार प्रदान किये। एनसीसी दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 18 मित्र देशों के लगभग 150 कैडेट यहां उपस्थित हैं और उन्होंने उनका स्वागत किया। उन्होंने मेरा युवा भारत (माई भारत) पोर्टल के माध्यम से वर्चुअली जुड़ने वाले देश भर के युवाओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा, “गणतंत्र दिवस परेड के लिए चुना जाना अपने आप में एक उपलब्धि है।” उन्होंने कहा कि इस वर्ष का गणतंत्र दिवस विशेष है क्योंकि एक गणतंत्र के रूप में भारत ने 75 वर्ष पूरे कर लिये हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये यादें जीवन भर  साथ रहेंगी और कैडेट इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करेंगे। उन्होंने पुरस्कार जीतने वाले कैडेटों को बधाई दी। यह बताते हुए कि आज उन्हें एनसीसी के कई अभियानों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अभियान भारत की विरासत को युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ते हैं। उन्होंने इन अभियानों में शामिल सभी कैडेटों को शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने कहा कि एनसीसी की स्थापना लगभग भारत की आजादी के समय ही हुई थी। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि एनसीसी की यात्रा देश के संविधान से भी पहले शुरू हो गयी थी। श्री मोदी ने कहा कि गणतंत्र के 75 वर्षों की अवधि में, संविधान ने लोकतंत्र को प्रेरित किया है और नागरिक कर्तव्यों के महत्व पर जोर दिया है। इसी तरह, एनसीसी ने भी भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी है और उन्हें अनुशासन का महत्व सिखाया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सरकार ने हाल के वर्षों में एनसीसी के दायरे और जिम्मेदारियों का विस्तार करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। उन्होंने कहा कि एनसीसी का विस्तार सीमावर्ती क्षेत्रों और तटीय जिलों तक कर दिया गया है और 170 से अधिक सीमावर्ती तालुकाओं तथा लगभग 100 तटीय तालुकाओं में अब एनसीसी की उपस्थिति है। श्री मोदी ने इन जिलों में युवा एनसीसी कैडेटों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तीनों सशस्त्र बलों को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों युवाओं को लाभ हुआ है। यह बताते हुए कि एनसीसी में किए गये सुधारों का प्रभाव कैडेटों की बढ़ी हुई संख्या से स्पष्ट है, श्री मोदी ने कहा कि 2014 में लगभग 14 लाख एनसीसी कैडेट थे और आज यह संख्या 20 लाख तक पहुंच गई है। इनमें बालिका कैडेटों की संख्या 8 लाख से अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीसी कैडेट आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और खेल की दुनिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि एनसीसी दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा 21वीं सदी में देश और दुनिया के विकास का निर्धारण करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “भारत के युवा सिर्फ भारत के विकास में ही योगदान नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे वैश्विक कल्याण की एक शक्ति भी हैं”। समाचार पत्रों में हाल ही में प्रकाशित इस आशय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि पिछले दशक में भारतीय युवाओं ने 1.5 लाख स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न बनाए हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि 200 से अधिक उन प्रमुख वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के लोग कर रहे हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में खरबों रुपये का योगदान दे रहीं हैं और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षक वैश्विक प्रगति को गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में, भारत के युवाओं की प्रतिभा एवं उनके सामर्थ्य के बिना दुनिया के भविष्य की कल्पना करना कठिन है और यही कारण है कि वह उन्हें ‘वैश्विक कल्याण की एक शक्ति’ के रूप में संदर्भित करते हैं।

इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि किसी व्यक्ति या देश की ताकत तभी बढ़ती है जब अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं, प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले 10 वर्षों में, भारत में युवाओं के सामने आने वाली कई बाधाएं दूर की गईं हैं, जिससे युवाओं और देश, दोनों की क्षमताओं में वृद्धि हुई है।. उन्होंने कहा कि 2014 में, कई युवा लगभग 10-12 वर्ष के रहे होंगे और उन्हें अपने परिवार से उस समय की स्थितियों के बारे में पूछना चाहिए। प्रधानमंत्री ने दस्तावेज़ सत्यापन का एक उदाहरण दिया, जहां पहले प्रवेश, परीक्षा और भर्तियों के लिए दस्तावेज़ों को एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित करना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने अब दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की अनुमति देकर इस समस्या का हल कर दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने एवं उसे हासिल करने में युवाओं के सामने आने वाली कठिनाइयों और छात्रवृत्ति निधि के वितरण में आने वाली कई समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकल-खिड़की प्रणाली की शुरूआत ने इन पुरानी समस्याओं को समाप्त कर दिया है। विषय चयन से संबंधित एक अन्य प्रमुख समस्या की ओर इशारा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षा के बाद एक बार विषय चुन लेने के बाद उसे बदलना कठिन होता था, लेकिन अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अनुसार विषय बदलने की सुविधा प्रदान की है।

यह बताते हुए कि एक दशक पहले युवाओं के लिए बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त करना कठिन  था क्योंकि बैंक ऋण देने से पहले गारंटी मांगते थे, श्री मोदी ने कहा कि जब वह 2014 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि वह देश के युवाओं के लिए इसकी जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा योजना शुरू की, जो बिना बैंक गारंटी के ऋण प्रदान करती है। इस योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि शुरुआत में, 10 लाख रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाता था और सरकार के तीसरे कार्यकाल में, यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 10 वर्षों में, मुद्रा योजना के तहत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है, जिससे लाखों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है।

युवाओं के भविष्य के लिए चुनावी प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि दो दिन पहले राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया और कई युवा पहली बार मतदाता बने। उन्होंने कहा कि मतदाता दिवस का उद्देश्य मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव कराया जाता है, लेकिन हर कुछ महीनों में होने वाले निरंतर चुनाव चुनौतियां पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन यह पैटर्न बदल गया, जिससे देश के लिए महत्वपूर्ण समस्याएं पैदा हो गईं। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लगातार चुनावों के लिए मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की आवश्यकता होती है और इसमें कई कार्य शामिल होते हैं, जिससे अक्सर शिक्षकों के कर्तव्य, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावों से शासन संबंधी कठिनाइयां भी पैदा होती हैं और इसलिए, देश में वर्तमान में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को लेकर बहस चल रही है।  प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवाओं से इस बहस में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में नई सरकार बनाने की तारीख नियत होती है और हर चार साल में चुनाव होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह कॉलेजों या स्कूलों में छात्र परिषद के चुनाव एक ही बार में पूरे हो जाते हैं। उन्होंने युवाओं को हर कुछ महीनों में होने वाले चुनाव से उनकी पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोचने और “एक राष्ट्र, एक चुनाव” को लेकर चल रही बहस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह बताते हुए कि 21वीं सदी की दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के साथ सामंजस्य बनाए रखना आवश्यक है, श्री मोदी ने इस परिवर्तन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में, चाहे वह कला हो, अनुसंधान हो या फिर नवाचार, युवाओं को अपने अभिनव विचारों एवं रचनात्मकता के माध्यम से नई ऊर्जा का समावेश करना चाहिए।  प्रधानमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में राजनीति के महत्व पर प्रकाश डाला और युवाओं को नए सुझावों एवं नवीन विचारों के साथ राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है। उन्होंने लाल किले से एक लाख युवाओं को राजनीति में शामिल होने के अपने आह्वान को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं की शक्ति का उल्लेख किया, जैसा कि “विकसित भारत: युवा नेता संवाद” के दौरान देखा गया। उन्होंने कहा कि देश भर के लाखों युवाओं ने विकसित भारत के निर्माण के संबंध में बहुमूल्य सुझाव दिए हैं और अपने विचार व्यक्त किए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, हर पेशे के लोगों का एक ही लक्ष्य था – भारत की आजादी। उन्होंने कहा कि इसी तरह इस अमृत काल में ‘विकसित  भारत’ ही हमारा एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर निर्णय एवं कार्य को इस लक्ष्य की कसौटी पर कसना चाहिए। प्रधानमंत्री ने पंच प्रण को याद रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। ये प्रण हैं: विकसित भारत का निर्माण करना, गुलामी की मानसिकता से खुद को मुक्त करना, अपनी विरासत पर गर्व करना, भारत की एकता के लिए काम करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रण हर भारतीय का मार्गदर्शन करेंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम के दौरान पेश की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा की और कहा कि ये प्रस्तुतियां “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाती हैं, जो देश की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने प्रयाग में चल रहे महाकुंभ को “एकता का कुंभ” बताते हुए कहा कि यह भी देश की एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रगति के लिए यह एकता आवश्यक है।

अपने कर्तव्यों को सदैव याद रखने के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भव्य एवं दिव्य विकसित भारत की नींव कर्तव्यों के आधार पर ही रखी जायेगी। अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश के कैडेटों एवं युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपनी लिखी कुछ पंक्तियों को याद किया और सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर, केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह और रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

इस वर्ष गणतंत्र दिवस शिविर में कुल 2361 एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया, जिसमें 917 बालिका कैडेट शामिल थीं। यह बालिका कैडेटों की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी थी। पीएम रैली में इन कैडेटों की भागीदारी नई दिल्ली में एक महीने तक चलने वाले एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2025 के सफल समापन का प्रतीक है। इस वर्ष की एनसीसी पीएम रैली की थीम ‘युवा शक्ति, विकसित भारत’ थी।

इस दिन 800 से अधिक कैडेटों द्वारा राष्ट्र निर्माण के प्रति एनसीसी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। 18 मित्र देशों के 144 युवा कैडेटों की भागीदारी ने इस वर्ष की रैली से संबंधित उत्साह में वृद्धि की।

एनसीसी पीएम रैली में देश भर से मेरा युवा (माई) भारत, शिक्षा मंत्रालय और जनजातीय कार्य के 650 से अधिक स्वयंसेवक भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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130 किमी प्रति घंटे की गति के लिए 23,000 किलोमीटर से अधिक ट्रैक को उन्नत किया गया

भारतीय रेलवे ने 130 किलोमीटर प्रति घंटे (किमी प्रति घंटे) तक की ट्रेन गति को संभालने के लिए भारतीय रेलवे नेटवर्क के 23,000 से अधिक ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) को अपग्रेड करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उल्लेखनीय प्रगति रेलवे के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, कनेक्टिविटी में सुधार और देश भर में लाखों यात्रियों के लिए यात्रा के समय को कम करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करती है। भारत के रेलवे नेटवर्क का लगभग पाँचवाँ हिस्सा अब उच्च गति के लिए सुसज्जित है, ये प्रगति आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम और रणनीतिक बाड़ लगाने जैसे मजबूत सुरक्षा उपायों से संभव हुई है, यह ट्रेन यात्रा में दक्षता और विश्वसनीयता के एक नए युग की शुरुआत दिखाती है।

ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण में व्यापक उन्नयन शामिल है, जिसमें उच्च गति के संचालन के लिए स्थिरता और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए पटरियों को मजबूत करना, सटीक संचार और सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम का कार्यान्वयन और सुरक्षा बढ़ाने और जोखिमों को कम करने के लिए कमजोर स्थानों पर बाड़ लगाने जैसे सुरक्षा उपायों की स्थापना शामिल है। ये प्रयास भारतीय रेलवे के के लक्ष्य सुरक्षित और कुशल रेलवे नेटवर्क को बढ़ावा देने के अनुरूप है, जो यात्री और माल ढुलाई दोनों की जरूरतों को पूरा करता है।

उन्नयन में स्वर्णिम चतुर्भुज और स्वर्णिम विकर्ण नेटवर्क के खंड प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण गलियारे हैं। ये मार्ग, जिससे भारत का यात्री और माल यातायात का महत्तवपूर्ण हिस्सा संचालित होता है, तेज़ पारगमन और बेहतर रसद को सुनिश्चित करते हुए अब उच्च गति को संभालने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं।

इसके अतिरिक्त, लगभग 54,337 टीकेएम पटरियों को 110 किमी प्रति घंटे तक की गति का समर्थन करने के लिए अपग्रेड किया गया है । यह व्यवस्थित वृद्धि विभिन्न क्षेत्रों में निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है और भारतीय रेलवे की समग्र परिचालन दक्षता को बढ़ाती है।

भारतीय रेलवे की प्रमुख सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनवंदे भारत एक्सप्रेस, इन बुनियादी ढाँचे में सुधार की सफलता का उदाहरण है। 160 किमी प्रति घंटे तक की गति प्राप्त करने में सक्षम, वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल यात्रा में एक नए युग का प्रतीक है , जो यात्रियों को तेज़, अधिक आरामदायक और प्रीमियम यात्रा का अनुभव प्रदान करती है। ऐसी गति को सुरक्षित रूप से समायोजित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने हाई-स्पीड ट्रैक सेक्शन के साथ सुरक्षा बाड़ लगाने को प्राथमिकता दी है। ये उपाय न केवल ट्रेनों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करते हैं बल्कि दुर्घटनाओं के जोखिम को भी कम करते हैं। पिछले वर्ष की तुलना में, पीक डिमांड की अवधि के दौरान विशेष ट्रेन सेवाओं में 54% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो 57,169 सेवाओं तक पहुँच गई ।

पहलू विवरण
राजस्व में वृद्धि चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से दिसंबर के बीच आय में 4 % की वृद्धि हुई है, जिससे माल ढुलाई से 1.26 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। यात्री खंड की आय में 6% की वृद्धि हुई है, जो 55,988 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
उच्चतर पूंजीगत व्यय 2024-25 में 2% अधिक पूंजीगत व्यय, जहां चालू वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पूंजी निवेश बढ़कर 1.92 लाख करोड़ रुपए हो गया, यह बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्नत माल ढुलाई दक्षता जनवरी 24 से नवम्बर 24 की अवधि के दौरान भारतीय रेलवे पर राजस्व अर्जित करने वाली माल ढुलाई 1473.05 मीट्रिक टन रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.86% की वृद्धि दर्ज करती है ।

भारतीय रेलवे का चल रहा आधुनिकीकरण अभियान ट्रैक अपग्रेड से कहीं आगे तक फैला हुआ है। अत्याधुनिक तकनीकों को अपनानेबुनियादी ढांचे को मजबूत करने और यात्री सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारतीय रेलवे एक परिवर्तनकारी यात्रा अनुभव के लिए मंच तैयार कर रहा है। इन पहलों का उद्देश्य ट्रेन सेवाओं की विश्वसनीयता और दक्षता में सुधार करना, माल और यात्रियों की तेज़ आवाजाही को सक्षम करके आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और आबादी की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने वाली एक समावेशी और सुलभ रेलवे प्रणाली सुनिश्चित करना है।

इन उन्नयनों के सफलतापूर्वक पूरा होने के साथ, भारतीय रेलवे गति, सुरक्षा और सेवा में नए मानक स्थापित कर रहा है। ये प्रयास न केवल लाखों यात्रियों के लिए यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाते हैं, बल्कि राष्ट्र की जीवन रेखा के रूप में भारतीय रेलवे की भूमिका की भी पुष्टि करते हैं। आधुनिकीकरण की यात्रा में आगे बढ़ने के साथ ही भारतीय रेलवे प्रगति और नवाचार का प्रतीक बन रही है, जो भारत को एक उज्जवल और अधिक परस्पर जुड़े भविष्य की ओर ले जा रही है। यह प्रगति संगठन की देश के विकास में सहायक और अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली रेलवे नेटवर्क के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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विश्व कुष्ठ रोग दिवस के मौके पर, सीसीपीडी द्वारा कुष्ठ रोग से जूझ रहे विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने, मिथकों को तोड़ने और इससे जुड़े कलंक को मिटाने के लिए वर्चुअल सेमिनार आयोजित

मुख्य आयुक्त (सीसीपीडी), दिव्यांगजन, के कार्यालय ने विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर एक वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभवों का आदान-प्रदान करना, मंथन करना और कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, साथ ही समाज की मुख्यधारा में प्रभावित व्यक्तियों को शामिल करने की वकालत करके मिथकों को तोड़ना और कलंक को मिटाना था। राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) एवं मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन (सीसीपीडी), ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। एस. गोविन्दराज, आयुक्त, विशिष्ट अतिथि थे। पैनल में डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम, वरिष्ठ वैज्ञानिक; डॉ. शिवकुमार, कुष्ठ रोग विशेषज्ञ; सुश्री निकिता सारा, द लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया में वकालत और संचार प्रमुख; और अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ संघ के अध्यक्ष डॉ. पी. नरसिम्हा राव शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत माधव साब्ले द्वारा मराठी में गाए गए एक प्रार्थना से हुई, जिसका बाद में श्री प्रवीण प्रकाश अंबस्था, डिप्टी सीसीपीडी द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। श्री विकास त्रिवेदी, डिप्टी सीसीपीडी, ने सेमिनार में पैनलिस्टों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. गोविन्दराज ने उद्घाटन भाषण दिया। राजेश अग्रवाल ने तीन दशक पहले एक युवा अधिकारी के रूप में महाराष्ट्र के जलगाँव में एक कुष्ठ रोग कॉलोनी का दौरा करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के कारण होने वाला अस्पृश्यता जाति आधारित भेदभाव से भी बदतर है, क्योंकि इसमें अपने परिवार के सदस्य भी प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने कानूनी सुधारों के महत्व और मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उपचार के बाद पुनर्वास उपायों के महत्व पर भी बल दिया।एस. गोविन्दराज ने कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव को तोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी 750 कुष्ठ रोग कॉलोनियाँ हैं जो समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग हैं। उन्होंने इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी चुनौतियों का भी जिक्र किया और व्यापक समाधान का आह्वान किया। डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम ने कुष्ठ रोग का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत किया और खुलासा किया कि भारत में वैश्विक कुष्ठ रोग के 53% मामले हैं। उन्होंने भेदभाव को खत्म करने और प्रभावित व्यक्तियों का समर्थन करने के लिए समुदाय-आधारित पुनर्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शिवकुमार ने कुष्ठ रोग के हाल के ट्रेंड पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सबसे कम संक्रामक बीमारियों में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत में 700 से अधिक जिलों में से 125 जिलों में अभी भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ये जिले 14 राज्यों में फैले हुए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 24 जिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक शून्य घरेलू स्वदेशी केस दर्ज करना है। निकिता सारा ने पीड़ितों को समाज से फिर से जोड़ने में मदद करने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग से मुकाबला करने में अज्ञानता सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि समय पर पता चल जाए तो कुष्ठ रोग सबसे आसानी से ठीक होने वाली बीमारियों में से एक है और स्पष्ट किया कि यह कोई विकृति या विकलांगता नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुष्ठ रोग से जुड़ा कलंक जागरूकता की कमी के कारण उत्पन्न होता है। डॉ. पी. नरसिम्हा राव ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन में चिकित्सीय पहलुओं और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बीमारी को जैविक रूप से अनूठी बताया और कहा कि यह दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दुर्लभ है, लेकिन ब्राजील, भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में यह अभी भी चिंता का विषय है। कुष्ठ रोग से जूझने में अग्रणी सुश्री शबनम खान ने अपनी यात्रा साझा की जो कि दृढ़ता का प्रमाण है। कुष्ठ रोग और सामाजिक अस्वीकृति से जूझने के बावजूद, उन्होंने बाधाओं को पार कर अपने परिवार की पहली स्नातक बनने और एक स्वतंत्र जीवन जीने का लक्ष्य प्राप्त किया। सेमिनार का समापन कुष्ठ रोग को मिटाने और इससे प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए अधिक जागरूकता, शीघ्र पता लगाने और पुनर्वास के व्यापक प्रयासों के आह्वान के साथ हुआ।

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पीएम सूर्याघर का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनने के लिए सशक्त बनाना है: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री सौरघर-मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनाकर उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही डिस्कॉम को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। मंत्री महोदय नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 750 विशेष अतिथियों को संबोधित कर रहे थे।केंद्रीय मंत्री ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आम लोग अब भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति के केंद्र में हैं। उनका काम, समर्पण और सफलता इस बात का सबूत है कि हम एक राष्ट्र के रूप में क्या हासिल कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम के लाभार्थी भारत के अक्षय ऊर्जा आंदोलन के असली राजदूत हैं।” उन्होंने देश की अक्षय ऊर्जा यात्रा में नेतृत्व करने के लिए उनकी सराहना भी की।

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देश के विभिन्न भागों से पीएम सूर्याघर और पीएम कुसुम के लाभार्थियों ने इस अवसर पर बात की। उन्होंने समय पर प्राप्त होने वाली सब्सिडी, बिना किसी हस्तक्षेप के पीएम सूर्याघर पोर्टल पर आसानी से पंजीकरण कराने और इसके कारण बिजली बिल शून्य होने और भारी बचत की सराहना की।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कर्नाटक के धारवाड़ में, पीएम सूर्य घर के एक लाभार्थी ने सौर ऊर्जा अपनाकर शून्य बिजली बिल प्राप्त किया। केंद्र सरकार से ₹78,000 की सब्सिडी के साथ, यह सफलता की कहानी पूरे देश में टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल समाधानों को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को उजागर करती है।”उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पीएम कुसुम लाभार्थी राकेश रोही ने बताया कि पीएम कुसुम योजना से लाभान्वित होने के बाद उन्होंने अपने खेत में सोलर पंप लगवाए हैं। इससे उनकी उपज में काफी सुधार हुआ है।

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एमएनआरई के विशेष अतिथियों ने पीएम संग्रहालय का दौरा किया और गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव निधि खरे ने कहा कि मंत्रालय योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए लाभार्थियों से सीखने और उन्हें सुनने के लिए हमेशा तत्पर है। इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव ललित बोहरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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एस. एन, सेन, बा, वि.पी. जी. कॉलेज के चित्रकला विभाग द्वारा कला प्रदर्शनी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन.सेन.बा.वि.पी.जी. कॉलेज के चित्रकला विभाग द्वारा एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें 1953 से लेकर अभी तक की सभी छात्राओ की कृतियों का प्रदर्शन किया गया। डॉक्टर सचिव गौतम (सहायक आचार्य) स्कूल का क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट,छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर द्वारा लाइव डेमोंसट्रेशन दिया गया साथ ही अंतर महाविद्यालय प्रकृति चित्रण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोबीर कुमार सेन, सचिव प्रबंध समिति तथा अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा , संयुक्त सचिव शुभो् सेन, दीपाश्री सेन , प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने दीप प्रज्वलित कर किया

 कार्यक्रम संयोजिका डॉ. रचना निगम विभागाध्यक्ष चित्रकला विभाग ने सभी सम्मानित सदस्यों का स्वागत व अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में चित्रकला विभाग की पूर्व छात्राओं और वर्तमान छात्रों की कलाकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया इसके उपरांत सीएसजेएमयू ललित कला विभाग से आए सहायक प्रवक्ता डॉ सचिव गौतम जी के द्वारा एक लाइव डेमोंसट्रेशन दिया गया जिससे छात्राओं ने अनेक कला की बारीकियां को देखा और सीखा। कार्यक्रम में अंतर-महाविद्यालीय प्रकृति चित्रण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया इसमें प्रो ज्योति अग्निहोत्री, प्रो राज किशोरी ,प्रो कुमुद बाला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इसमें सभी महाविद्यालयों से छात्राओं ने प्रतिभागिता की और सुंदर चित्रण और प्रकृति से सभी को परिचित कराया ।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो (डॉ.) सुमन ने कार्यक्रम मे विभाग की पूर्व और वर्तमान छात्राओं के चित्रों को देखा और सराहा आपने कहा कि लाइव डेमोंसट्रेशन से छात्रों को कला के विविध आयामों से अवगत होने का अवसर मिलता है ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए जिससे छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो सके।

 कार्यक्रम में सभी महाविद्यालय की प्रवक्ता, महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ता प्रो. निशि प्रकाश, प्रो रेखा चौबे, प्रो अलका टंडन,प्रो गार्गी यादव, कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे, प्रो मीनाक्षी व्यास, प्रचार प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह व सभी प्रवक्ता गण , लिपिक वर्ग ने उपस्थित होकर अपनी रुचि दिखाई, तथा छात्राओं के कार्य को सराहा व प्रोत्साहित किया।              

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ग़णतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर प्रज्ञा परिवार द्वारा IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी ग़णतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर प्रज्ञा परिवार द्वारा कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि, कानपुर पूर्व भाग एवं IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन IMA, कानपुर के सहयोग से प्रज्ञा परिवार (संबद्ध अखिल विश्व गायत्री परिवार) श्याम नगर कानपुर द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में कुल 66 यूनिट रक्तदान हुआ। 18अगस्त 2024 को हुए रक्तदान शिविर में 56 यूनिट रक्त दान हुआ था। सर्वप्रथम भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवम दीपक प्रज्वलन कर प्रज्ञा परिवार के चेयरमैन अशोक पाण्डेय जी ने रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। पांडे जी ने रक्तदान के फायदे बताकर लोगों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया। प्रज्ञा परिवार ने सभी रक्तदानियों को “रक्तदानी कर्ण” की उपाधि वाला प्रमाण पत्र दिया। कर्ण ने कभी भी अपने दरवाजे से किसी को खाली हाथ नहीं जाने दिया। प्रज्ञा परिवार भी जरूरत पड़ने पर जरूरतमंद के लिए रक्तदान की व्यवस्था करता है।

IMA की ओर से सभी रक्तदानियों को उपहार स्वरूप मिल्टन की बोतल एवं प्रमाण पत्र दिया गया।राष्ट्र सेवा के अंतर्गत प्रज्ञा परिवार प्रत्येक 15 अगस्त एवं 26 जनवरी या पास के रविवार को रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहता है।रक्तदान शिविर में सहयोग करने वालों में प्रमुख रूप से अध्यक्ष आर जे मिश्रा, अजय अग्रवाल, सुनील विश्वकर्मा, दिवाकर दीक्षित, शिवानंद गुप्ता, अच्छेलाल, सी एम मिश्रा, दीपक मिश्रा, निर्भय कुमार, सुरेश चंद्र जोशी, मुकेश आदि थे।

परिणय गेस्ट हाउस के मालिक भुवन अवस्थी,  ठंडो जी एवं पांडे जी को रक्तदान शिविर हेतु निशुल्क स्थान देने पर धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

 

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