Breaking News

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सूरत में 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के सूरत में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गुजरात की जनता को उनके अटूट समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद मैं पहली बार सूरत आया हूं। सूरत से मैं पूरे गुजरात की जनता को सलाम करता हूं और बधाई देता हूं।

कार्यक्रम में उपस्थित सूरत और नवसारी के अनेक निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों को याद दिलाया कि गुजरात की जनता ने सेवा भावना का समर्थन किया है। इस विशाल विजय को सेवा के मिशन को और आगे बढ़ाने का जनादेश बताते हुए उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों से और भी अधिक मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने इस दृष्टिकोण को साकार करने में सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा कि हमारा संकल्प  एक विकसित गुजरात और एक विकसित भारत का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकल्प देश के प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिले, प्रत्येक शहर के विकास से ही पूरा होगा।

पर्यावरण दिवस के अवसर पर इस कार्यक्रम के शुभ संयोग की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने आज 5 जून को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक सूरत में उपस्थित होने पर गर्व व्यक्त किया। एक समय प्लेग महामारी से प्रभावित शहर से आज स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले सूरत के बदलाव को याद करते हुए उन्होंने नागरिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों द्वारा पिछले ढाई दशकों में किए गए निरंतर प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा कि ेयह अत्यंत गर्व की बात है कि प्लेग महामारी से प्रभावित यही सूरत आज स्वच्छता के लिए पहचाना जा रहा है

हरित भविष्य की ओर वैश्विक बदलाव में गुजरात की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक चारंका सोलर पार्क के साथ-साथ 2009 में भारत के पहले जलवायु परिवर्तन विभाग की स्थापना में राज्य की दूरदर्शिता को याद किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि सूरत किस प्रकार अपनी नवोन्मेषी ‘चक्रीय जल अर्थव्यवस्था’, औद्योगिक उपयोग के लिए अपशिष्ट जल के उपचार और पिछले बारह वर्षों के राष्ट्रव्यापी ‘अपशिष्ट से धन’ आंदोलन के माध्यम से प्रकृति के साथ प्रगति के संतुलन के राष्ट्रीय मंत्र का पूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। भविष्य में पेयजल और जल निकासी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्होंने तापी बैराज परियोजना की मंजूरी का उल्लेख किया और साथ ही सूरत के तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में विस्तार, बढ़ते मेट्रो नेटवर्क और हजीरा औद्योगिक क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने वाले आगामी हरित इस्पात उत्पादन की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि हमारी बसों को इलेक्ट्रिक बनाने से लेकर हरित ऊर्जा का उपयोग करके इस्पात उत्पादन तक, ये सभी कदम सूरत को एक सच्चे हरित शहर के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेंगे।

प्रधानमंत्री ने महामारी, वैश्विक संघर्षों और अस्थिर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित अभूतपूर्व चुनौतियों को संबोधित करते हुए, जिसे उन्होंने ‘आपदाओं का दशक’ कहा, 140 करोड़ भारतीयों की इन विशाल वैश्विक झटकों का दृढ़ता से सामना करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में गुजरात के भारी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य देश की 250 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का पांचवां हिस्सा (50 गीगावाट) उत्पादन करता है और हरित हाइड्रोजन और हरित अमोनिया जैसे उभरते क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पिछले बारह वर्षों में निर्मित ऊर्जा क्षमताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने  सौर ऊर्जा, इथेनॉल मिश्रण, रेलवे विद्युतीकरण, परमाणु ऊर्जा, आधुनिक विद्युत पारेषण नेटवर्क और गैस पाइपलाइनों और बंदरगाह भंडारण क्षमताओं के व्यापक विस्तार में किए गए ऐतिहासिक निवेशों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि जारी  वैश्विक संकट दर्शाता है कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता कितनी आवश्यक है और पिछले बारह वर्षों में देश द्वारा निर्मित विशाल क्षमता आज अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

कार्यक्रम से पहले हजीरा की अपनी यात्रा पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं बल्कि ऊर्जा, इस्पात, रक्षा उत्पादन और वैश्विक समुद्री व्यापार को समाहित करने वाले एक व्यापक, समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इस समुद्री-औद्योगिक केंद्र को ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का जीवंत प्रमाण बताया और देश के उन निराशावादी गुटों की कड़ी निंदा की जो आत्मनिर्भरता अभियान का उपहास करते हैं और जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से देश को विदेशी संस्थाओं पर निर्भर रखा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जो लोग लगातार देश के संकल्प को कमतर आंकते हैं वे यह भूल जाते हैं कि दूसरों पर निर्भर देश कभी भी विकास की उन ऊंचाइयों को प्राप्त नहीं कर सकता जिनका वह हकदार है।

आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी पर सरकार के रुख को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने समर्पित माल गलियारा, बुलेट ट्रेन और वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के नव-उद्घाटित खंड जैसी मेगा परियोजनाओं को औद्योगिक और व्यापारिक विकास के लिए महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवसंरचना अभियान समावेशी है, जो दाहोद-बोदेली-वापी गलियारे जैसी पहलों के माध्यम से पहले से उपेक्षित आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। छोटा उदेपुर, नर्मदा, भरूच और तापी के आदिवासी क्षेत्रों में चार लेन के राजमार्ग बनाकर, सरकार यात्रा के समय और माल ढुलाई लागत को कम कर रही है तथा साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सपूतारा जैसे स्थलों पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान कर रही है। श्री मोदी ने कहा कि हमारे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कनेक्टिविटी लाकर, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें शिक्षा, चिकित्सा और बेहतर आय के अवसरों के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं प्राप्त हों।

सूरत में आधुनिक ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए, जो अन्य राज्यों से आए श्रमिकों और प्रवासी परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा, प्रधानमंत्री ने इन विकास उपलब्धियों को सरकार पर राष्ट्र के अटूट चुनावी विश्वास से जोड़ा। अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने भारतीय नागरिकों के असीम आशावाद की सराहना की और एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए जनता की सामूहिक शक्ति पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा कि भारत अविश्वसनीय आकांक्षाओं और असीम आशावाद से परिपूर्ण देश है और जब राष्ट्र की पूरी शक्ति पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित होती है, तो ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते।

Read More »

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में देश के सातवें क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारम्भ किया

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि भारत के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान नेटवर्क के विस्तार के लिए जल्द ही लखनऊ में भी इसी प्रकार का एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।

जम्मू स्थित यह केंद्र देश का सातवां क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र बन गया है और यह जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश के लिए काम करेगा। इसके साथ ही यह हिमालयी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से तैयार की गई मौसम सेवाएं, आपदा चेतावनी और जलवायु सहायता प्रदान करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह नया केंद्र मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पर्वतों तक फैले विविध भूभाग वाले क्षेत्र में मौसम की निगरानी, ​​पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा। यह जिला स्तरीय पूर्वानुमान, पर्वतीय मौसम पूर्वानुमान, पर्यटक सलाह, शहर-विशिष्ट मौसम सेवाएं और अचानक बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी हिमपात, आंधी-तूफान और भूस्खलन की चेतावनी प्रदान करेगा। इन सेवाओं से अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों, किसानों, परिवहन संचालकों, पनबिजली परियोजनाओं, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और दुर्गम भूभाग में कार्यरत सुरक्षा बलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले एक दशक में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं थालेकिन अब जम्मूश्रीनगरलेह और बनिहाल टॉप पर चार डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत हैं। मिशन मौसम के तहत अनंतनागराजौरीबारामूलाकिश्तवार और डोडा के लिए पांच अतिरिक्त डॉप्लर मौसम रडार प्रस्तावित किए गए हैं।

अवलोकन नेटवर्क का भी काफी विस्तार हुआ है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 56 वेधशालाएं हैंजिनमें 15 मैनुअल वेधशालाएं, 25 स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और 16 स्वचालित वर्षामापी (एआरजीशामिल हैंजबकि 2014 में 13 एडब्ल्यूएस और 14 एआरजी थी। हाल ही मेंकरगिलरामबन जिले के उखराल और माता वैष्णो देवी भवन में एडब्ल्यूएस स्थापित किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष में लगभग आठ और एडब्ल्यूएस तथा पांच एआरजी स्थापित किए जाने की उम्मीद है। दैनिक वर्षा निगरानी योजना के अंतर्गत स्टेशनों की संख्या 2014 में 30 से बढ़कर वर्तमान में 85 हो गई हैजिससे वर्षा की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आरएमसी जम्मू की स्थापना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय संचालन का एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन है। अब तक, दिल्ली स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मौसम और जलवायु सेवाएं प्रदान करता था। जम्मू केंद्र की स्थापना के साथ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लिए मौसम सेवाओं का प्रबंधन जम्मू से किया जाएगा, जबकि प्रस्तावित लखनऊ केंद्र उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सेवाएं प्रदान करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्र में शुरू की गई कई वैज्ञानिक और संस्थागत पहलों पर भी प्रकाश डाला। श्रीनगर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने मौसम और जलवायु विज्ञान में अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी)-जम्मू, एसकेयूएएसटी-कश्मीर और इस्लामिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बादलों और एरोसोल के अध्ययन के लिए स्विस वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से पटनीटॉप में स्थापित काफी ऊंचाई वाले बादल भौतिकी प्रयोगशाला का भी उल्लेख किया।

भूकंप निगरानी पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय नेटवर्क का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। जम्मू और कश्मीर के भूकंपीय स्टेशनों को डिजिटल सिस्टम में अपग्रेड किया गया है और उधमपुर में एक अतिरिक्त वेधशाला स्थापित की गई है। किश्तवार में भी एक नई भूकंपीय वेधशाला प्रस्तावित है। वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में पांच भूकंपीय स्टेशन कार्यरत हैं, जो राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को लगभग वास्तविक समय का डेटा भेजते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि पिछले वर्ष की आपदा के मद्देनजर किश्तवार में एक स्वचालित मौसम केंद्र और एक भूकंप विज्ञान केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि एक सदी से अधिक समय से कार्यरत श्रीनगर मौसम विज्ञान वेधशाला को विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा शताब्दी वेधशाला के रूप में मान्यता दी गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब क्षेत्रीय पूर्वानुमानजिलावार पूर्वानुमानपर्यटकों के लिए अलग पूर्वानुमान और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग पूर्वानुमान उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि अनुकूलित पूर्वानुमान हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा।

आपदा प्रबंधन में मौसम सेवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन, भारी बर्फबारी, आंधी-तूफान और भूस्खलन – इन सभी का समय पर पूर्वानुमान लगाया जाएगा।

 

Read More »

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने की अपील की

उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

 

Read More »

माय भारत 6 जून को त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- माय भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा

प्रधानमंत्री मोदी के युवाओं को 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में प्रेरक शक्ति के रूप में सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अधीन ‘ मेरा युवा भारत (एमवाई भारत)’ 6 जून 2026 को दोपहर 12:00 बजे नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- एमवाई भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागी एकत्रित होंगे, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, इनोवेटर्स, उभरते नेताओं और उपलब्धि अर्जित करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात नेता, विशिष्ट अतिथि और युवा व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम भारत के भविष्य निर्माताओं को वर्तमान में उपलब्धि हासिल करने वालों को एकजुट करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास और सार्वजनिक नेतृत्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा।

इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद होगा, जिनमें बीओएटी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उद्यमी अमन गुप्ता, ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावतयूपीएससी अचीवर्स और राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी कंटेंट क्रिएटर जैसे मल्हार कलांबे , आरजे रौनक आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रभावशाली युवा भी होंगे, जिन्होंने अपने काम और सामाजिक प्रभाव से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। यह कार्यक्रम देश भर के उन उभरते युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित करेगा जिन्होंने खेल, उद्यमिता, शासन और कंटेंट निर्माण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है ।

इस गति को और मजबूत करते हुए, मा भारत हाल ही में “एक सप्ताह में ऑनलाइन क्विज में भाग लेने वाले सबसे अधिक उपयोगकर्ता” के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मिली मान्यता के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) क्विज के माध्यम से हासिल की गई थी। इस पहल में सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 5 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आधिकारिक मूल्यांकन अवधि के दौरान 390,812 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक क्विज़ पूरी की, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बना। यह उपलब्धि विकसित भारत @2047 के विजन में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी को दर्शाती है और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सार्थक भागीदारी के लिए एक मंच के रूप में माई भारत में युवा नागरिकों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करती है।

भारत के 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ , ‘माई भारत’ युवा सम्मेलन देश के युवाओं की आकांक्षाओं, उपलब्धियों और परिवर्तनकारी क्षमता का उत्सव मनाएगा। भारत भर से हजारों युवा परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाकर, यह सम्मेलन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए अमृत पीठी के सामूहिक संकल्प की पुष्टि करेगा और प्रधानमंत्री के विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगा।

Read More »

टीडीबी-डीएसटी ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को स्वदेशी द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए सहयोग प्रदान किया है

भारत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था-संचालित औद्योगिक विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इसी क्रम में, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने पुणे के मेसर्स ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड को “द्वितीय पीढ़ी के डीजल समतुल्य जैव ईंधन का निर्माण” परियोजना के लिए सहयोग प्रदान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट और कृषि-प्रसंस्करण अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक स्तर की सुविधा स्थापित करना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से धन सृजन के मिशन और शुद्ध शून्य ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।

प्रस्तावित परियोजना में अभिलाषा बायोफ्यूल्स (एबीएफ) के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड विनिर्माण केंद्र स्थापित करना शामिल है। एबीएफ अगली पीढ़ी का नवीकरणीय डीजल और नेफ्था विकल्प है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। “ड्रॉप-इन” ईंधन के रूप में डिज़ाइन किया गया, एबीएफ मौजूदा इंजनों, ईंधन प्रणालियों या वितरण बुनियादी ढांचे में किसी भी संशोधन की आवश्यकता के बिना पारंपरिक जीवाश्म-आधारित डीजल को सीधे प्रतिस्थापित कर सकता है, जिससे यह परिवहन और औद्योगिक ऊर्जा खपत को कार्बनमुक्त करने के लिए एक व्यावहारिक और बडे पैमाने पर समाधान बन जाता है।

पूरी तरह से भारत में विकसित, यह तकनीक नवीन थर्मो-केमिकल रूपांतरण प्रक्रियाओं को एकीकृत करती है जो कृषि अवशेषों और कृषि-औद्योगिक अपशिष्ट को उच्च गुणवत्ता वाले नवीकरणीय ईंधन में परिवर्तित करती है। यह प्रक्रिया थर्मल क्रैकिंग, उत्प्रेरक उन्नयन और डाउनस्ट्रीम शोधन तकनीकों को मिलाकर ऐसे जैव ईंधन का उत्पादन करती है जो जीवाश्म-आधारित समकक्षों के समान स्थापित गुणवत्ता विनिर्देशों को पूरा करती हैं। इस ईंधन का उत्पादन पहले ही लगभग चालीस विभिन्न फीडस्टॉक से सफलतापूर्वक किया जा चुका है, जो भारत के विविध जैव अवशेष संसाधनों के लिए उल्लेखनीय आसानी और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।

इस तकनीक की एक प्रमुख विशेषता ग्रीनजूल्स की अधिकतम जैव अवशेष मिश्रणों की पहचान करने और ईंधन उत्पादन और दक्षता को अधिकतम करने के लिए उन्हें अनुकूलित उत्प्रेरक प्रणालियों के साथ मिलाने की उसकी प्रमुख विशेषज्ञता में निहित है। यद्यपि प्रक्रिया के अलग-अलग चरण ज्ञात औद्योगिक पद्धतियाँ हैं, कंपनी द्वारा फीडस्टॉक चयन, उत्प्रेरक अनुकूलन और प्रक्रिया अभियांत्रिकी का अनूठा एकीकरण इसकी मुख्य बौद्धिक संपदा है और यह कम मूल्य वाले कृषि अपशिष्ट से उन्नत जैव ईंधन का व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन संभव बनाता है।

यह परियोजना नवीकरणीय डीजल, नवीकरणीय नेफ्था, जैव कचरा और गैसीय ईंधन के उत्पादन में कंपनी की क्षमताओं को और बढ़ाएगी, जिससे अपशिष्ट से ऊर्जा का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार होगा। कृषि अवशेषों को, जिन्हें अक्सर जला दिया जाता है या फेंक दिया जाता है, मूल्यवान ऊर्जा उत्पादों में परिवर्तित करके, यह तकनीक एक साथ कई राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करती है, जिनमें पराली जलाने में कमी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, ग्रामीण मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना शामिल है।

यह पहल भारत सरकार की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, पुनः उपयोग की अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। यह उन्नत जैव ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों में मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करने के देश के दृष्टिकोण का भी समर्थन करती है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “कृषि अवशेषों से प्राप्त उन्नत जैव ईंधन ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और ग्रामीण आर्थिक विकास प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रशस्त करते हैं। कचरे को उच्च मूल्य वाले ईंधन में परिवर्तित करने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियां न केवल जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती हैं, बल्कि पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था के भीतर नए अवसर भी पैदा करती हैं। ऐसे नवाचार देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आयातित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीडीबी भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही ठोस आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लाभ भी प्रदान करती है।”

समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए, ग्रीनजूल्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि यह सहायता उनकी स्वदेशी जैव ईंधन प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और विस्तार में तेजी लाने में सहायता करेगी, जिससे औद्योगिक और परिवहन क्षेत्रों में टिकाऊ ईंधन समाधानों का व्यापक उपयोग संभव होगा। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना भारत के लिए एक स्वच्छ, आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

Read More »

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) ने रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान को मजबूत कर रहा है

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के तहत रोकथाम, जागरूकता सृजन, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण पर केंद्रित एक व्यापक और जन-केंद्रित रणनीति के माध्यम से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को मजबूत कर रहा है।

मादक द्रव्यों का सेवन, जिसे अधिक उपयुक्त रूप से मादक द्रव्यों के उपयोग विकार के रूप में समझा जाता है, एक प्रमुख मनोसामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जो व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को प्रभावित करती है, साथ ही उत्पादकता, सामाजिक सामंजस्य और मानवीय क्षमता को भी कमजोर करती है।

भारत में मादक पदार्थों के सेवन की व्यापकता पर मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी किए गए पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित किया, जिसमें पाया गया कि 7 करोड़ से अधिक व्यक्ति मादक पदार्थों के सेवन विकार से प्रभावित थे, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएं शामिल थीं। इसके जवाब में, मादक पदार्थों की मांग में कमी लाने वाली नोडल एजेंसी के रूप में मंत्रालय ने रोकथाम, जागरूकता, क्षमता निर्माण, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण को शामिल करते हुए एक व्यापक ढांचा के रूप में एनएपीडीडीआर की शुरुआत की।

2020 में शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) ने जागरूकता अभियान का विस्तार करके और समुदायों को मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ लामबंद करके इन प्रयासों को और मजबूत किया है।

मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो केवल कानून प्रवर्तन तक सीमित न हो। इसलिए, मादक द्रव्यों की मांग में कमी लाना मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय लड़ाई का एक अभिन्न अंग बन गया है, जिसमें साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप, मजबूत रोकथाम रणनीतियाँ और सतत जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।

इन प्रयासों का प्रभाव उन व्यक्तियों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जो समय पर सहायता मिलने से उबरने और अपना जीवन पुनर्निर्माण करने में सक्षम हुए हैं। इसका एक उदाहरण जम्मू और कश्मीर के बडगाम के 25 वर्षीय क्षेत्रीय क्रिकेटर हैं, जिन्हें नशामुक्ति केंद्र के माध्यम से निःशुल्क उपचार, नशामुक्ति सेवाएं, परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहायता और अनुवर्ती देखभाल प्राप्त हुई, जिससे उन्हें आत्मविश्वास हासिल करने, स्वास्थ्य सुधारने और खेल गतिविधियों में लौटने में मदद मिली, साथ ही वे नशामुक्त भारत अभियान के लिए स्वयंसेवा भी कर रहे हैं।

एक और सशक्त उदाहरण मणिपुर के इम्फाल पश्चिम से आता है, जहाँ 37 वर्षीय एक महिला गंभीर भावनात्मक संकट के दौरान मादक पदार्थों की लत में पड़ गई थी। उसे महिला-केंद्रित नशामुक्ति केंद्र से सहायता मिली। निःशुल्क उपचार, परामर्श, पुनर्वास और 

पारिवारिक सहयोग के माध्यम से उसने नशा मुक्त जीवन व्यतीत किया, नर्सिंग लेक्चरर के रूप में अपना कार्यभार पुनः ग्रहण किया और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गई। यह महिलाओं के लिए 

सुलभ और भेदभाव-मुक्त सेवाओं के महत्व को दर्शाता है। हाल के वर्षों में मंत्रालय ने उपचार और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच का काफी विस्तार किया है, जिसके तहत देश भर में 768 नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं। इन सेवाओं पर जनता का भरोसा उपचार चाहने वाले व्यक्तियों की संख्या में 294 प्रतिशत की वृद्धि से परिलक्षित होता है, जो 2020 में 2.08 लाख से बढ़कर 2025 में 8.20 लाख से अधिक हो गई है।
टोल-फ्री नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 के माध्यम से सहायता प्रणालियों को भी मजबूत किया गया है, जिस पर 4.69 लाख कॉल आ चुकी हैं और यह सहायता चाहने वाले व्यक्तियों और परिवारों के लिए संपर्क का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक बिंदु है। एनएमबीए ऐप 2.0 के माध्यम से प्रौद्योगिकी इस अभियान को और भी सशक्त

 बना रही है, जो राज्यों, जिलों, आध्यात्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों को एनएमबीए के तहत जमीनी गतिविधियों का डेटा अपलोड करने की सुविधा 

देती है, जिसमें वास्तविक समय की दृश्यता और नागरिक-केंद्रित विशेषताएं शामिल हैं।

भविष्य को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय ने चार व्यापक स्तंभों पर आधारित एक कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की है: समस्या की गंभीरता का आकलन करना, उपचार अवसंरचना को मजबूत करना, क्षमता निर्माण करना और जागरूकता पैदा करना। जैसे-जैसे भारत नशामुक्त भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, यह अभियान नागरिकों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और नागरिक समाज से सहानुभूति, समन्वय और साझा जिम्मेदारी पर आधारित जन आंदोलन के माध्यम से सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करता है।

नागरिकों को आधिकारिक एनएमबीए प्लेटफॉर्म के माध्यम से नशा मुक्त भारत की प्रतिज्ञा लेने और एक स्वस्थ, मजबूत और अधिक उत्पादक राष्ट्र के लिए आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत।

Read More »

कानपुर में 1 जून से 31 अगस्त तक सभी नदियाँ एवं बहती जलधाराएँ ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर, 05 जून 2026।** मछलियों के प्रजनन काल की सुरक्षा तथा मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन कानपुर नगर द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी  जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद की समस्त नदियों एवं बहती जलधाराओं को 01 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक ‘नो फिशिंग जोन’ घोषित किया है।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी नदी अथवा बहती जलधारा में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ना) तथा बाड़े (घेराबंदी) लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध मछलियों के प्रजनन एवं संवर्धन को सुरक्षित रखने तथा प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया है।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए मत्स्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने तथा सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सहायक निदेशक मत्स्य, कानपुर नगर डॉ. जितेंद्र कुमार ने सभी मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के सदस्यों एवं जनपदवासियों से अपील की है कि वे मत्स्य संरक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें तथा प्रतिबंध अवधि के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संसाधनों एवं मत्स्य संपदा का प्रभावी संरक्षण संभव है।

Read More »

ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना के तहत लेदर और होजरी ट्रेड में निःशुल्क प्रशिक्षण हेतु आवेदन आमंत्रित

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर अंजनीश प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में “एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रशिक्षण एवं टूलकिट योजना” संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत जनपद के इच्छुक अभ्यर्थियों को लेदर एवं होजरी टेक्सटाइल उत्पाद ट्रेड में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट http://msme.up.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 जून 2026 निर्धारित की गई है।

योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु अभ्यर्थी कार्यालय दिवसों में जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र, कानपुर नगर में संपर्क कर सकते हैं।

Read More »

विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर रहा, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम के द्वारा पौधारोपण कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता हेतु सक्रिय योगदान देने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ दिलवायी।
इस अवसर पर एनएसएस वॉलंटियर्स के द्वारा वृक्षारोपण अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता तथा पर्यावरण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। छात्राओं ने जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, स्वच्छता तथा हरित पर्यावरण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं के द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ विनीता श्रीवास्तव , डॉ अलका त्रिपाठी, डॉ. शिखा, श्वेता गोंड, एनसीसी एवं रेंजर्स छात्राओं एवं शिक्षिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

Read More »

नाबालिगों को वाहन न दें, गंगा बैराज पर स्टंटबाजों पर होगी कार्रवाई: डीएम

दैनिक भारतीय स्वरूप “जिला सूचना कार्यालय कानपुर” जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए विभिन्न विभागों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है और जनजागरूकता के बिना दुर्घटनाओं में कमी लाना संभव नहीं है।

जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी स्थिति में वाहन न चलाने दें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 12 ऐसे चालान किए जा चुके हैं जिनमें नाबालिग बच्चे वाहन चलाते हुए पाए गए। साथ ही गंगा बैराज क्षेत्र में स्टंट करने वाले बाइक सवारों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में सर्वाधिक दुर्घटना वाले स्थलों पर पांच मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने, ऐसे मार्गों पर स्थित राजकीय चिकित्सालयों की आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा बड़ी सड़क दुर्घटनाओं से निपटने के लिए जनपद स्तरीय आकस्मिक मेडिकल एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोड सेफ्टी क्लब स्थापित कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रधानमंत्री राहत जन आरोग्य योजना के अंतर्गत जनपद के नौ अस्पताल चिन्हित हैं, जिनमें वेदांता हॉस्पिटल, डेल्टा हॉस्पिटल, आशिर्य हॉस्पिटल, चांदनी हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस कुलवंती हॉस्पिटल, नारायणा हॉस्पिटल, रामादेवी मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, रामा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर तथा रामा हॉस्पिटल शामिल हैं। ये सभी अस्पताल हाईवे के निकट स्थित हैं। दुर्घटना की स्थिति में पात्र घायलों का डेढ़ लाख रुपये तक उपचार निःशुल्क किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने राहवीर योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि राहवीर योजना के अंतर्गत घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है तथा पुलिस द्वारा उससे अनावश्यक पूछताछ भी नहीं की जाती।

बैठक में अप्रैल 2026 के प्रवर्तन कार्यों की समीक्षा भी की गई। यातायात पुलिस द्वारा बिना हेल्मेट वाहन चलाने पर 24,885, बिना सीट बेल्ट 572, रेड लाइट जंपिंग के 493, शराब पीकर वाहन चलाने के 90 तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने के 175 मामलों में कार्रवाई की गई। वहीं परिवहन विभाग द्वारा 38 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए, जिनमें 31 ओवरलोडिंग, चार वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के प्रयोग तथा तीन शराब पीकर वाहन चलाने से संबंधित थे।

बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. विवेक चतुर्वेदी, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी अखंडेश्वर, एआरटीओ आलोक कुमार सिंह, बीएसए सुरजीत कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


 

Read More »