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अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों ने अंतरिक्ष में भारत की वाणिज्यिक संभावनाओं को बढ़ा दिया है”

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि, “अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े सुधारों ने अंतरिक्ष में भारत की वाणिज्यिक संभावनाओं को बढ़ा दिया है।”

अंतरिक्ष विभाग और मार्च 2019 के दौरान गठित इसरो की वाणिज्यिक शाखा के अंतर्गत आने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (पीएसई) न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) मांग आधारित दृष्टिकोण पर एंड-टू-एंड वाणिज्यिक अंतरिक्ष व्यवसाय करने के लिए जिम्मेदार है और इसका काम अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों में भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।

एनएसआईएल की उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • एनएसआईएल ने डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जीएसएटी-एन1 [जीएसएटी-24] नाम से अपना पहला मांग आधारित संचार (डिमांड ड्रिवेन कम्युनिकेशन) उपग्रह मिशन शुरू किया। इस उपग्रह को 23 जून 2022 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया और इसने अपनी परिचालन सेवाएं शुरू कर दी हैं।
  • एनएसआईएल ने ब्रॉडबैंड सेवा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपना दूसरा मांग आधारित संचार उपग्रह मिशन, जीएसएटी-एन2 [जीएसएटी-20] शुरू किया। इस उपग्रह को 19 नवंबर 2024 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया और यह सैटेलाइट वर्तमान में इन-ऑर्बिट (कक्षीय) परीक्षण और स्थापित होने की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
  • आज तक, एनएसआईएल ने पीएसएलवी, एलवीएम3 और एसएसएलवी पर 124 अंतर्राष्ट्रीय और 3 भारतीय ग्राहकों के उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है।
  • एनएसआईएल वर्तमान में 15 इन-ऑर्बिट संचार उपग्रहों का स्वामित्व/संचालन कर रहा है और विभिन्न भारतीय उपयोगकर्ताओं को उनकी डीटीएच, वीसैट, टीवी, डीएसएनजी, आईएफएमसी, ब्रॉडबैंड और अन्य अनुप्रयोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष-आधारित सेवाएं प्रदान कर रहा है।
  • एनएसआईएल मई 2023 से वैश्विक ग्राहकों को पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन) उपग्रह डेटा प्रसारित कर रहा है।
  • मिशन सहायता सेवाओं के भाग के रूप में, एनएसआईएल ने भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को ग्यारह (11) लॉन्च व्हीकल ट्रैकिंग सपोर्ट और नौ (9) लॉन्च और अर्ली ऑर्बिट फेज (एलईओपी) और टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड (टीटीसी) समर्थन प्रदान किया है, जिसमें एक डीप स्पेस मिशन सपोर्ट भी शामिल है।
  • इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को भारतीय उद्योग को हस्तांतरित करने की दिशा में, एनएसआईएल ने 75 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • एनएसआईएल भारतीय और वैश्विक ग्राहकों की सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का निर्माण करने के लिए उनके साथ मिलकर काम कर रहा है ।
  • एनएसआईएल एक लाभकारी कंपनी है। स्थापना के बाद से एनएसआईएल का राजस्व नीचे दर्शाया गया है:

(करोड़ रुपये में)

विवरण वित्त वर्ष

2019-20

वित्त वर्ष

2020-21

वित्त वर्ष

2021-22

वित्त वर्ष

2022-23

वित्त वर्ष

2023-24

परिचालन से राजस्व 314.52 513.31 1674.77 2842.26 2116.12
अन्य आय 7.25 12.40 57.08 98.16 279.08
कुल राजस्व 321.77 525.71 1731.84 2940.42 2395.20
कुल व्यय 253.20 312.87 1272.69 2324.07 1591.60
कर पूर्व लाभ 68.57 212.84 459.15 616.35 803.59

 

डॉ. सिंह ने बताया कि एनएसआईएल भारतीय सरकारी उपयोगकर्ताओं की एस-बैंड संचार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपना तीसरा मांग आधारित संचार उपग्रह मिशन, जीएसएटी-एन3 शुरू करेगा। जीसैट-एन3 उपग्रह को 2026 की पहली तिमाही के दौरान प्रक्षेपित करने का प्रस्ताव है।

एनएसआईएल ने 5 ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के एंड-टू-एंड उत्पादन के लिए मेसर्स एचएएल [मेसर्स एचएएल और एलएंडटी कंसोर्टिया के प्रमुख भागीदार] के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। पहला पूर्ण रूप से भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पीएसएलवी 2025 की दूसरी तिमाही के दौरान प्रक्षेपित किए जाने की परिकल्पना की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि आने वाले वर्षों में, एनएसआईएल उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के निर्माण, प्रक्षेपण सेवाएं प्रदान करने, ग्राउंड सेगमेंट की स्थापना, संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का उपयोग करके अंतरिक्ष-आधारित सेवाएं प्रदान करने, मिशन सहायता सेवाएं और भारतीय उद्योगों को इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण सहित सभी क्षेत्रों में अपने वाणिज्यिक अंतरिक्ष व्यवसाय का और विस्तार करने का प्रयास करेगा। एनएसआईएल द्वारा परिकल्पित कुछ प्रमुख व्यावसायिक परियोजनाओं में मांग आधारित मॉडल पर कई संचार उपग्रहों का निर्माण, उभरते वैश्विक प्रक्षेपण सेवा बाजार का व्यावसायिक रूप से दोहन करने के लिए पीपीपी मोड की साझेदारी के तहत भारतीय उद्योग के माध्यम से एलवीएम3 रॉकेट को साकार करने की रणनीतियों की खोज, कई पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के निर्माण में निजी भारतीय उद्योगों को सक्षम बनाना आदि शामिल हैं।

“अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता को बढ़ाने” के तहत जून 2020 के दौरान सरकार द्वारा घोषित अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों की सराहना करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा, “इसने एनएसआईएल को प्रभावी वाणिज्यिक दोहन के लिए मांग आधारित मॉडल में मिशन शुरू करने में सक्षम बनाया है। इसके अलावा, भारतीय उद्योग के माध्यम से पीएसएलवी, एलवीएम3 और एसएसएलवी जैसे इसरो के परिचालन प्रक्षेपण यानों के निर्माण के लिए एनएसआईएल के प्रयासों से भारतीय औद्योगिक क्षेत्र को उस स्तर तक बढ़ने में मदद मिलेगी, जहां भारतीय उद्योग एंड-टू-एंड रॉकेट का निर्माण कर सके। अंतरिक्ष राज्य मंत्री ने कहा कि इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने के एनएसआईएल के प्रयासों से देश में अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध करने और वाणिज्यिक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

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दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाएं

सरकार ने 2023-24 तक दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत 10 करोड़ ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करने का लक्ष्य रखा था। मार्च 2024 में 10 करोड़ परिवारों को संगठित करने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया।

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार लक्ष्य और संगठित परिवारों की संख्या अनुलग्नक में दी गई है।

नेल्लोर जिले में 37 ग्रामीण ब्लॉक हैं। सभी 37 ब्लॉक डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत आते हैं।

. पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंध्र प्रदेश के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत केन्‍द्रीय आवंटन 756 करोड़ रुपये था। हालांकि, केवल 377 करोड़ रुपये ही जारी किए गए, पूरी राशि जारी न किए जाने का कारण सरकारी खजाने से धन प्राप्ति में देरी के कारण राज्य द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत न करना है।

चालू वित्त वर्ष के लिए, आंध्र प्रदेश के लिए डीएवाई-एनआरएलएम के तहत स्वीकृत केन्‍द्रीय हिस्सा 307.69 करोड़ रुपये है, जिसमें से अब तक 76.92 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (एमकेएसपी), डीएवाई-एनआरएलएम के तहत एक प्रमुख उप-योजना है जिसका उद्देश्य महिला किसानों की आजीविका और आय को बढ़ाना है। मंत्रालय ने 2011 में एमकेएसपी के तहत 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसमें आंध्र प्रदेश का नेल्लोर जिला भी शामिल है। दो बार विस्तार दिए जाने के बाद, ये परियोजनाएं वित्त वर्ष 2019 में बंद कर दी गईं।

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए, मंत्रालय ने एमकेएसपी के लिए 64 करोड़ रुपये की राशि के लिए वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी, जिसमें केन्‍द्रीय हिस्सा 38.40 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 25.60 करोड़ रुपये है। वर्ष के विशेष लक्ष्य में एमकेएसपी के तहत 160 एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) का निर्माण शामिल था। हालांकि, आंध्र प्रदेश एसआरएलएम ने वित्त वर्ष 2023-24 में एमकेएसपी के लिए योजना के लिए बजट नहीं खोला है। इसके अलावा, एमकेएसपी बजट प्रावधान वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) टीआरएसवाई-07 रिपोर्ट में परिलक्षित नहीं हुआ, जो व्यय विभाग के मानदंडों के अनुसार केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत धन जारी करने के लिए अनिवार्य है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 15 करोड़ रुपये (9 करोड़ रुपये केन्द्रीय हिस्सा + 6 करोड़ रुपये राज्य हिस्सा) में से, केन्द्रीय हिस्से के एक हिस्से के रूप में 2.25 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।

स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के संबंध में, जो एक मांग-संचालित योजना है, राज्य से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत करने के आधार पर धनराशि जारी की जाती है। हालांकि, आंध्र प्रदेश एसआरएलएम ने एसवीईपी घटकों के लिए आवश्यक डीपीआर और वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने में देरी की है, जिससे कार्यक्रम के लिए समय पर धनराशि जारी करने में भी देरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 13.33 करोड़ रुपये (8 करोड़ रुपये केन्‍द्रीय हिस्सा + 5.33 करोड़ रुपये राज्य हिस्सा) के कुल आवंटन में से, 2 करोड़ रुपये की राशि केन्‍द्रीय हिस्से के रूप में जारी की गई है।

राज्‍य एचएच संगठित करने का लक्ष्य 24 मार्च तक संगठित किए गए
अंडमान 15000 13194
आंध्र प्रदेश 8310437 9075289
अरूणाचल 84623 86937
असम 3593756 4111020
बिहार 12332493 12713428
छत्‍तीसगढ़ 3193288 3068427
दमन दीव और एनएच 12469 12695
गोवा 45947 50298
गुजरात 3031245 2783006
हरियाणा 730806 629094
हिमाचल प्रदेश 338103 378542
जम्‍मू और कश्‍मीर 950000 797805
झारखंड 3446912 3589607
कर्नाटक 3239273 4207374
केरल 3644669 4002478
लद्दाख 13315 11710
लक्षद्वीप 3692 4363
मध्‍य प्रदेश 6549384 5829972
महाराष्‍ट्र 7109774 6525549
मणिपुर 207481 99810
मेघालय 418254 444264
मिजोरम 73765 85934
नगालैंड 121260 135261
ओडिशा 6610605 5757107
पुदुच्‍चेरी 45931 59714
पंजाब 657609 543246
राजस्‍थान 4600000 3804161
सिक्किम 58557 56675
तमिलनाडु 3675989 4023939
तेलंगाना 4593482 4820573
त्रिपुरा 460061 494675
उत्‍तर प्रदेश 11807911 9507884
उत्‍तराखंड 491114 497777
पश्चिम बंगाल 11593207 12251533
कुल 102060412 100473341

 

यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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भारतीय डाक भुगतान बैंक ने डाकघर बचत खाते (पीओएसए) को अपने खातों से जोड़ने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की देश भर में 650 शाखाएं और 1.63 लाख से अधिक एक्सेस प्वाइंट हैं, जिनमें विशेषकर कुशीनगर जिले में 01 शाखा और 224 एक्सेस प्वाइंट हैं।

आईपीपीबी कई प्रकार की सेवाएं और उत्पाद प्रदान कर रहा है, जैसे बचत और चालू खाते, वर्चुअल डेबिट कार्ड, घरेलू धन हस्तांतरण सेवाएं, बिल और उपयोगिता भुगतान, आईपीपीबी ग्राहकों के लिए बीमा सेवाएं, आईपीपीबी खातों के साथ डाकघर बचत खाता (पीओएसए) लिंकेज, डाकघर बचत योजनाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस), किसी भी नागरिक के लिए आधार में मोबाइल नंबर अपडेट और 0-5 वर्ष की आयु के किसी भी बच्चे के लिए बाल नामांकन सेवाएं।

आईपीपीबी ने डाकघर बचत खाता (पीओएसए) को आईपीपीबी खातों से जोड़ने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं, जिनमें सभी प्रमुख डाकघरों में ब्रांडिंग सामग्री का प्रदर्शन और डाकघरों के अंदर और बाहर 25000 से अधिक वित्तीय साक्षरता और ग्राहक जागरूकता शिविरों का आयोजन शामिल है, ताकि ग्राहकों को पीओएसए-आईपीपीबी खाता जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

आईपीपीबी डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और बाल नामांकन सहित आधार से संबंधित सेवाओं तक घर-घर पहुंच प्रदान करता है। इसने आम जनता, पेंशनभोगियों और बच्चों को ये सेवाएं प्रदान करने के लिए केंद्र/राज्य स्तर पर विभिन्न विभागों के साथ गठजोड़ किया है। 31.12.2024 तक बैंक ने 7.03 करोड़ आधार से जुड़े खाते खोले हैं, 7.68 करोड़ ग्राहकों के आधार में मोबाइल नंबर अपडेट किए हैं, 81.17 लाख ग्राहकों को बाल नामांकन सेवाएं प्रदान की हैं और पेंशनभोगियों को 24 लाख से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जारी किए हैं।

संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासनी चंद्रशेखर ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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आस्था की यात्रा पर 40 करोड़ श्रद्धालु

वर्ष 2025 का महाकुंभ एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रदर्शनी बन गया है। इसमें  9 फरवरी, 2025 तक कुल 35 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र स्नान अनुष्ठानों में भाग ले चुके हैं। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर , 2.33 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई , जो इस महाकुंभ का एक महत्वपूर्ण पल था। इस अवसर पर वहां का वातावरण श्रद्धा, उत्साह और एकता की भावना से भरा दिखा क्योंकि जीवन में एक बार होने वाले इस आयोजन में विभिन्न राज्यों, समुदायों और देशों से श्रद्धालु आए थे।

बसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है और हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के महत्व का सम्मान करने के लिए कल्पवासी चमकीले पीले रंग के परिधान पहनते हैं, जो इस शुभ अवसर के महत्व को दर्शाते हैं।

बसंत पंचमी पर पवित्र संगम का नजारा असाधारण था। संगम के तट श्रद्धालुओं से भरे हुए थे, और नदी की पवित्र रेत मुश्किल से दिखाई दे रही थी, मानवता के सागर में डूबी हुई थी। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने विदेशी मेहमानों के साथ हाथ मिलाया और वैश्विक एकता की भावना में योगदान दिया, जिसके लिए महाकुंभ जाना जाता है। श्रद्धालुओं के भक्ति में डूबे नारों से हवा सामूहिक उत्साह से गूंज उठी, जो गंगा, सरस्वती और यमुना के तेज प्रवाह के साथ मिल गईं।

इस साल महाकुंभ के कई अनोखे पहलुओं में से एक इटली, ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया और इज़राइल जैसे देशों से आए विदेशी भक्तों की उल्लेखनीय भागीदारी थी। कई लोगों ने इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने के अवसर पर अपनी विस्मय और खुशी व्यक्त की। एक इतालवी भक्त ने कहा,

मैंने कुछ मिनट पहले ही पवित्र स्नान किया है, ऐसा लगता है कि यह जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है। लोग इस क्षण का 144 वर्षों से इंतजार कर रहे थे और मैं इसका गवाह बनकर सचमुच धन्य महसूस कर रहा हूं।”

भारतीय आतिथ्य की गर्मजोशी से अभिभूत अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालु इस अनुभव में डूब गए। क्रोएशिया से आए एक पर्यटक एंड्रो ने कहा,

यह सचमुच एक अद्भुत अनुभव है। महाकुंभ का माहौल शब्दों से परे है। यहां की व्यवस्थाएं और सुविधाएं बेहतरीन हैं।”

ऑस्ट्रिया की एक अन्य श्रद्धालु एविगेल अपनी खुशी रोक नहीं सकीं, उन्होंने कहा,

यह महाकुंभ अविश्वसनीय और असाधारण है। जीवन में एक बार होने वाला अनुभव! इसके जरिए मैंने भारत की आत्मा को समझना शुरू कर दिया है।”

महाकुंभ 2025 के सबसे आकर्षक नजारों में से एक नागा साधुओं की उपस्थिति रही, जो अमृत स्नान के दौरान आकर्षण का केंद्र बन गए थे। इसके अलावा, बसंत पंचमी के दौरान अमृत स्नान के लिए शोभा यात्रा एक आनंद से भरा दृश्य था। कुछ नागा साधु राजसी घोड़ों पर सवार थे, तो कुछ अपने विशिष्ट परिधान और पवित्र आभूषणों से सजे हुए नंगे पैर चल रहे थे। फूलों और मालाओं से सजे उनके जटाजूट और उनके त्रिशूल ने महाकुंभ की पवित्रता को और बढ़ा दिया। अपने उग्र और स्वतंत्र स्वभाव के बावजूद, उन्होंने अपने अखाड़े के नेताओं के आदेशों का अत्यधिक अनुशासन के साथ पालन किया, जो विविधता में एकता का प्रतीक था। उनकी जीवंत ऊर्जा और भक्ति संक्रामक थी।

यह समानता और सद्भाव के मूल्यों का सच्चा प्रतीक है जो सदियों से भारत की सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। संगम पर पवित्र तटों ने सभी का स्वागत किया – चाहे उनकी भाषा, क्षेत्र या पृष्ठभूमि कुछ भी हो। एकता की यह भावना उन असंख्य भोजन रसोई (अन्नक्षेत्र) में भी परिलक्षित होती है, जो श्रद्धालुओं को एक साथ बैठाकर भोजन कराने के लिए चलाई जा रही है। इससे सभी सामाजिक और आर्थिक बाधाएं टूट गईं।

हाथ में मोमबत्ती पकड़े एक व्यक्तिविवरण स्वचालित रूप से उत्पन्न होता है

महाकुंभ सिर्फ एक उत्सव नहीं है; यह लाखों लोगों को भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने वाला एक अटूट धागा है। संगम के तट पर, शैवशाक्तवैष्णवउदासीनाथकबीर पंथीरैदास जैसी विभिन्न विचारधाराओं के तपस्वी एक साथ आए और भक्ति भाव से अपने अनूठे अनुष्ठान किए। तपस्वियों ने महाकुंभ का का स्पष्ट संदेश दिया: आध्यात्मिकता जाति, पंथ और भूगोल की सभी सीमाओं से परे है । आगे बढ़ता महाकुंभ 2025 सिर्फ़ धार्मिक समागम नहीं बल्कि उससे भी कहीं बढ़कर बनता जा रहा है। यह मानवीय एकता, प्रकृति और ईश्वर का जीवंत उत्सव है, जिसका अनुभव दुनिया भर के लाखों लोग कर रहे हैं। इसमें अब तक 35 करोड़ से ज़्यादा श्रद्धालु भाग ले चुके हैं और आने वाले दिनों में हज़ारों और श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। महाकुंभ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में चमकता रहेगा।

 

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत भुगतान

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा) के अंतर्गत 29.01.2025 तक सामग्री घटकों हेतु लंबित देनदारियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार ब्यौरा अनुलग्नक-I में दिया गया है।
29.01.2025 तक सामग्री घटकों के लिए लंबित देनदारियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार ब्यौरा (करोड़ रुपए में)
क्रम संख्‍या राज्‍य/संघ शासित प्रदेश सामग्री घटकों के लिए लंबित देनदारियां
1 आंध्र प्रदेश 661.50
2 अरूणाचल प्रदेश 60.34
3 बिहार 802.12
4 गुजरात 11.79
5 हरियाणा 38.27
6 हिमाचल प्रदेश 24.07
7 जम्‍मू और कश्‍मीर 117.46
9 झारखंड 204.59
10 मध्‍य प्रदेश 290.93
11 महाराष्‍ट्र 1321.58
12 मणिपुर 131.51
13 मेघालय 71.66
14 राजस्‍थान 494.34
15 सिक्किम 10.11
16 तमिलनाडु 496.70
17 तेलंगाना 282.74
18 उत्‍तर प्रदेश 1010.49
19 उत्‍तराखंड 100.42
  कुल 6130.61
लद्दाख पीएफएमएस डेटा उपलब्ध नहीं है।

वित्त वर्ष 2008-09 से 2009-10 एवं 2022-23 से 2023-24 के दौरान राजस्थान राज्य में महात्मा गांधी नरेगा के तहत श्रमिकों को उपलब्ध कराए गए रोजगार का जिलेवार विवरण (आंकड़ा लाख में) अनुबंध- II में दिया गया है।

 

 

वित्त वर्ष 2008-09 से 2009-10 एवं 2022-23 से 2023-24 के दौरान राजस्थान राज्य में महात्मा गांधी नरेगा के तहत

श्रमिकों को उपलब्ध कराए गए रोजगार का जिलेवार विवरण (आंकड़ा लाख में)

क्रम संख्‍या जिला 2008-09 2009-10 2022-23 2023-24
1 अजमेर 3.84 4.25 4.29 4.35
2 अलवर 3.26 2.78 1.59 1.39
3 बांसवाड़ा 5.06 4.11 5.89 5.98
4 बारन 2.36 1.74 2.15 2.00
5 बाडमेर 6.00 5.69 7.00 7.52
6 भरतपुर 3.33 3.09 1.31 1.12
7 भीलवाड़ा 5.00 6.40 5.18 5.46
8 बीकानेर 4.03 4.31 3.29 3.67
9 बूंदी 2.22 2.14 1.60 1.42
10 चित्‍तौड़गढ़ 3.36 3.72 1.64 1.55
11 चुरू 2.82 3.12 2.43 2.47
12 दौसा 3.32 2.42 1.02 0.78
13 धौलपुर 2.24 1.65 1.14 1.10
14 डूंगरपुर 4.72 4.05 4.66 4.82
15 हनुमानगढ़ 2.17 3.18 2.03 2.08
16 जयपुर 4.15 2.28 1.80 1.52
17 जैसलमेर 1.36 5.03 1.63 1.82
18 जालौर 2.41 1.41 2.12 1.77
19 झालावाड़ 2.87 2.38 4.11 4.38
20 झुंझनू 0.92 2.81 0.67 0.51
21 जोधपुर 4.40 1.19 4.35 4.20
22 करौली 2.64 4.64 2.00 1.69
23 कोटा 1.44 2.56 1.40 1.25
24 नागौर 4.65 1.25 5.29 5.39
25 पाली 3.24 5.27 2.55 2.17
26 प्रतापगढ़ 0.00 4.56 2.95 2.94
27 राजसमंद 2.05 0.00 1.86 1.81
28 सवाई माधोपुर 2.04 2.21 1.63 1.23
29 सीकर 1.94 2.99 0.91 0.88
30 सिरोही 1.51 2.15 1.38 1.28
31 श्रीगंगानगर 3.89 1.44 2.51 2.79
32 टोंक 3.37 2.86 1.82 1.73
33 उदयपुर 6.17 5.39 3.88 3.90
  कुल 102.81 103.05 88.08 86.97

 

यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज की एनएसएस ईकाई के स्वयंसेवकों द्वारा बस्ती छेत्र में गंदगी से होने वाले कीड़ों की समस्या के निवारण के लिए जागरूक किया

कानपुर 6 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की एनएसएस ईकाई द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वार जूही परंपुरवा बस्ती छेत्र में गंदगी से होने वाले कीड़ों की समस्या के निवारण के लिए आज प्रकृति से मिलने वाली साम्रगी का उपयोग कर स्वयंसेवकों ने कीटनाशक बनाया और पूरी बस्ती के गली मोहले और तालाब में स्वयंसेवकों द्वारा छिड़काव किया गया | जिसके बाद लंच ब्रेक लिया गया जिसमें स्वयंसेवकों द्वारा स्वयं पोहा बनाया और आनंद से खाया गया इसके पश्चात अब इन समस्याओं के समाधान के लिए स्वयंसेवकों में विचार विमर्श हुआ जिससे अब आने वाले दिनों में इसका समाधान निकाला जाएगा और इसी के साथ एक दिवसीय शिविर का समापन हुआ | प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अंकिता जैस्मीन लाल ,जॉय रसकिन वनस्पति विभाग और मोनिका डेनियल कार्यालय सहायक की उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ| हेड आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती का अहम योगदान रहा |

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दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार के मद्देनजर, जीआरएपी से संबंधित सीएक्यूएम की उप-समिति ने पूरे एनसीआर में जीआरएपी के चरण-III को तत्काल प्रभाव से रद्द किया

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप, एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) से संबंधित उप-समिति ने अपने आदेश दिनांक 29 जनवरी 2025 के तहत जीआरएपी चरण-III को लागू किया, जब दिल्ली का औसत एक्यूआई तेजी से बढ़ने लगा और उसी दिन यह 350 के अंक को पार कर गया।

आज, दिल्ली के औसत एक्यूआई में उल्लेखनीय सुधार हुआ है क्योंकि आज केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा उपलब्ध कराए गए एक्यूआई बुलेटिन के अनुसार दिन का एक्यूआई 286 दर्ज किया गया, जो स्पष्ट रूप से गिरावट का संकेत देता है। दिल्ली के एक्यूआई स्तरों में गिरावट के रुझान को देखते हुए, जीआरएपी से संबंधित सीएक्यूएम की  उप-समिति ने आज इस क्षेत्र में वर्तमान वायु गुणवत्ता परिदृश्य की समीक्षा करने के लिए बैठक की और साथ ही आईएमडी/आईआईटीएम द्वारा उपलब्ध कराई गई मौसम संबंधी स्थितियों और वायु गुणवत्ता सूचकांक के पूर्वानुमानों की समीक्षा की और तदनुसार 29 जनवरी 2025 से पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में जीआरएपी के चरण-III के तहत निवारक/प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों पर उचित निर्णय लिया।

दिल्ली-एनसीआर के समग्र वायु गुणवत्ता मानकों की व्यापक समीक्षा करते हुए उप-समिति ने निम्नलिखित टिप्पणियां कीं:

  • मिक्सिंग हाइट व वेंटिलेशन गुणांक में सुधार और प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल मौसम संबंधी स्थितियों के कारण, दिल्ली के एक्यूआई में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
  • 03 फरवरी 2025 को दिल्ली का एक्यूआई 286 दर्ज किया गया जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा निर्देशों के अनुसार चरण-III को लागू करने के लिए 350 अंक से 64 अंक कम है। इसके अलावा, आईएमडी के पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में बहुत हल्की बारिश/बूंदाबांदी और अनुकूल हवा की स्थिति की भविष्यवाणी की गई है।

इसलिए, जीआरएपी के चरण-III के तहत प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, बड़ी संख्या में हितधारकों और जनता को प्रभावित करने के साथ-साथ दिल्ली के औसत एक्यूआई में सुधार की प्रवृत्ति व आईएमडी/आईआईटीएम द्वारा आने वाले दिनों में दिल्ली के औसत एक्यूआई के ‘खराब’/‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना का संकेत देने वाले पूर्वानुमानों पर विचार करते हुए, जीआरएपी से संबंधित सीएक्यूएम की उप-समिति ने आज सर्वसम्मति से पूरे एनसीआर में जीआरएपी की मौजूदा अनुसूची के चरण-III के तहत सभी कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया।

इसके अलावा, जीआरएपी की मौजूदा अनुसूची के चरण II और I के तहत सभी कार्रवाइयां जारी रहेंगी और पूरे एनसीआर में संबंधित सभी एजेंसियों द्वारा उनका क्रियान्वयन, निगरानी और समीक्षा की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले दिनों में एक्यूआई का स्तर और न बढ़े। एजेंसियों को सख्त निगरानी रखनी होगी और एनसीआर में जीआरएपी की मौजूदा अनुसूची के चरण II और I के तहत उपायों को विशेष रूप से तेज करना होगा ताकि जीआरएपी की कार्रवाई के चरण-III को फिर से लागू करने की स्थिति न बने।

कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलेशन परियोजना स्थल आदि, जिन्हें विभिन्न वैधानिक निर्देशों, नियमों, दिशा-निर्देशों आदि के उल्लंघन/गैर-अनुपालन के कारण बंद करने के विशिष्ट आदेश जारी किए गए हैं,  किसी भी परिस्थिति में आयोग से इस संबंध में कोई विशिष्ट आदेश प्राप्त किए बिना अपना परिचालन पुनः आरंभ नहीं करेंगे।

हालांकि जीआरएपी चरण-III को रद्द किया जा रहा है, लेकिन सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए, जब मौसम की स्थिति हमेशा अनुकूल नहीं रहती है, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर और अधिक न गिरे, नागरिकों से अनुरोध है कि वे जीआरएपी की वर्तमान अनुसूची के चरण II एवं I के अंतर्गत नागरिक चार्टर का सख्ती से पालन करें।

उप-समिति वायु गुणवत्ता परिदृश्य पर कड़ी नजर रखेगी तथा दिल्ली में वायु गुणवत्ता और आईएमडी/आईआईटीएम द्वारा उपलब्ध कराई गई मौसम संबंधी स्थितियों एवं वायु गुणवत्ता सूचकांक के पूर्वानुमान के आधार पर आगे उचित निर्णय लेने के लिए समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करेगी।

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बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने ग्रीन हाइड्रोजन के कुशल उत्पादन के लिए एक नया मिश्र धातु-आधारित उत्प्रेरक विकसित किया

पानी के इलेक्ट्रोलिसिस  द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में रूपांतरण के जरिए बेहतर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित एक नया, कुशल मिश्र धातु-आधारित उत्प्रेरक, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए एक समाधान की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

उच्च-एंट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) का उपयोग करने वाला यह नवोन्मेषी दृष्टिकोण, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए प्लेटिनम जैसी महंगी सामग्रियों पर निर्भरता को कम कर सकता है।

आमतौर पर, मिश्र धातुएं दो या दो से अधिक तत्वों से बनी धातु पदार्थ होती हैं, जिन्हें एक प्राथमिक धातु में अपेक्षाकृत कम मात्रा में द्वितीयक तत्वों को मिलाकर तैयार किया जाता है। दूसरी ओर, उच्च एंट्रॉपी मिश्र धातुएं (एचईए), उन्नत सामग्री हैं जिनमें लगभग समान सांद्रता में कई तत्व (आमतौर पर पांच या अधिक) होते हैं। यहां, कुल मुक्त ऊर्जा में एन्ट्रापिक (डिसआर्डर की स्थिति) का योगदान एन्ट्रापिक (आंतरिक ऊर्जा का योग और इसके प्रैशर व वाल्यूम का गुणनफल) योगदान को दूर करता है, और इस प्रकार, मिश्र धातु के गठन को स्थिर करता है। इन एचईए को पानी को विभाजित करने वाले अनुप्रयोगों में वाणिज्यिक उत्प्रेरक को बदलने की उनकी बहुमुखी प्रतिभा और क्षमता के लिए जाना जाता है। इस संदर्भ में, नीचे से ऊपर की रासायनिक सिंथेटिक विधियों द्वारा किसी भी अशुद्धता फेज से रहित एकल फेज एचईए नैनोकणों की तैयारी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है।

सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, के शोधकर्ताओं ने एक नया उच्च-एंट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) उत्प्रेरक विकसित किया है, जिसे PtPdCoNiMn (प्लैटिनम, पैलेडियम, कोबाल्ट, निकल और मैंगनीज का मिश्रण) कहा जाता है। इन घटक धातुओं का चयन अमेरिका के एएमईएस नेशनल लेबोरेटरी के स्टाफ वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत सिंह द्वारा डिज़ाइन और विकसित किए गए दिशानिर्देशों के आधार पर किया गया था। एक बार अंतिम संरचना की पहचान हो जाने के बाद, सीईएनएस शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग तरीकों से एचईए तैयार किया – कमरे के तापमान और वायुमंडलीय दबाव पर इलेक्ट्रोडपोजिशन और (दिए गए साल्वेंट में उच्च तापमान और दबाव के तहत रासायनिक संश्लेषण जिसे सॉल्वोथर्मल प्रक्रियाएं कहा जाता है।

इलेक्ट्रोडपोजिशन के लिए, एचईए को विकसित करने के लिए साल्वेंट का चयन और डिपोजिशन क्षमता को अनुकूलित किया गया था। सॉल्वोथर्मल विधि में, अनुकूलन चरणों की एक श्रृंखला के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने प्रतिक्रिया दर और संश्लेषण प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए सटीक अनुपात में सही साल्वेंट और कम करने वाले एजेंट का सावधानीपूर्वक चयन किया। इन विधियों ने एकल-चरण या बहु-चरण रूपों में दो, तीन, चार, या सभी पांच तत्वों वाले मिश्र धातुओं के उत्पादन की अनुमति दी। प्लैटिनम (Pt), पैलेडियम (Pd), कोबाल्ट (Co), निकल (Ni), और मैंगनीज (Mn) को मिलाकर बनाए गए PtPdCoNiMn HEA उत्प्रेरक, न्यूनतम ऊर्जा हानि, उच्च स्थायित्व और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ कुशल हाइड्रोजन उत्पादन का नतीजा दिया। सैद्धांतिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि उत्प्रेरक सतह पर प्रतिक्रिया मध्यवर्ती के इष्टतम बंधन ही हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित एचईए की वाणिज्यिक उत्प्रेरक पर श्रेष्ठता का कारण है।

चूंकि एचईए उत्प्रेरक ने वाणिज्यिक उत्प्रेरक की तुलना में सात गुना कम प्लैटिनम का उपयोग किया और शुद्ध प्लैटिनम की तुलना में बेहतर उत्प्रेरक दक्षता प्रदान की, इसलिए यह पारंपरिक उत्प्रेरकों का एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है। इन एचईए ने क्षारीय समुद्री जल सहित व्यावहारिक सेटिंग्स में भी अच्छा प्रदर्शन दिखाया व 100 घंटे से अधिक समय तक बिना क्षरण के स्थिरता और दक्षता बनाए रखी।

यह प्रगति स्वच्छ, अधिक किफायती हाइड्रोजन उत्पादन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जिससे उद्योगों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को लाभ होगा। अनुसंधान को भारत के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) प्रशासनिक विभाग है। अनुसंधान से दो पेपर हाल ही में जर्नल एडवांस्ड फंक्शनल मटेरियल और स्मॉल में प्रकाशित हुए थे।

चित्र ए) एक तीन-इलेक्ट्रोड प्रणाली में कार्बन पेपर पर इलेक्ट्रोडपोजिटेड एचईए से हाइड्रोजन का उत्पादन।

चित्र बी) इलेक्ट्रोडपोजिटेड एचईए (एचईए-ईडी), सॉल्वोथर्मल विधि (एचईए-एसटी) का उपयोग करके तैयार किए गए एचईए और वाणिज्यिक Pt/C के हाइड्रोजन उत्पादन प्रदर्शन का एक तुलनात्मक प्लॉट।

बाएँ से दाएँ: डॉ. आशुतोष सिंह, प्रो. बी. एल. वी. प्रसाद और सुश्री अथीरा चंद्रन।

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होटल प्रबंधन संस्थानों में पीपीपी मॉडल

पर्यटन मंत्रालय आतिथ्य क्षेत्र में कौशल विकास चुनौतियों के समाधान में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) की क्षमता को स्वीकार करता है तथा उसने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
  1. पर्यटन मंत्रालय ने आतिथ्य संस्थानों के पाठ्यक्रम और आतिथ्य पाठ्यक्रमों की ब्रांडिंग और विपणन से संबंधित अन्य मामलों की समीक्षा के लिए उद्योग जगत के नेताओं और आईएचएम शिक्षाविदों को शामिल करते हुए एक टास्क फोर्स का गठन किया।
  2. आतिथ्य, सेवा और देखभाल के उच्चतम मानकों के व्यवसायी बनने वाले व्यक्तियों और पेशेवरों को विकसित करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, 21 केंद्रीय होटल प्रबंधन संस्थानों और 08 अग्रणी आतिथ्य समूहों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, इन समूहों में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड, आईएचजी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स, मैरियट होटल्स, ललित होटल ग्रुप, आईटीसी ग्रुप ऑफ होटल्स, लेमन ट्री होटल्स, एपीजे सुरेंदर पार्क होटल्स और रेडिसन होटल ग्रुप शामिल थे।

उद्योग-अकादमिक सहयोग एक पायलट परियोजना है जिसका उद्देश्य एमओयू के हिस्से के रूप में अधिक आतिथ्य श्रृंखलाओं को शामिल करके इसे और विस्तारित करना है। एमओयू में संस्थानों के भीतर नवाचार और उद्यमिता पहलों का समर्थन करने का घटक शामिल है।

यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत एन एस एस स्वयंसेवकों द्वारा स्वास्थ विषय पे कार्य किया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की एनएसएस ईकाई द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वार आज जूही टायर मंडी परंपुरवा में स्वयंसेवकों ने निजी स्वास्थ विषय पे कार्य किया जिसमें स्वयंसेवकों द्वार मासिक धर्म विषय पे महिलाओ को जागरुक किया और मुफ्त सैनिटरी पैड का वितरण किया और स्वच्छता को लेके सर्वे हुआ स्वयंसेवकों ने मुख्यता आयुष्मान कार्ड बनवाने पे जोर किया जिसमें हमने उनकी जानकारी प्राप्त करी और कई प्रकार की समस्याओं को लेकर निवासी लोगो से सर्वे किया और उनकी समस्याएं सुनी जिसमें अधिक समस्या स्वास्थ संबंधी सफाई और पानी को लेकर रही जिसको स्वयंसेवकों ने हर व्यक्ति से अच्छे से समझा इसके बाद लंच ब्रेक लिया गया जिसमें स्वयंसेवकों द्वारा स्वयं तहरी बनाया और आनंद से खाया गया इसके पश्चात अब इन समस्याओं के समाधान के लिए स्वयंसेवकों में विचार विमर्श हुआ जिससे अब आने वाले दिनों में इसका समाधान निकाला जाएगा और इसी के साथ एक दिवसीय शिविर का समापन हुआ। प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अंकिता जैस्मीन लाल के साथ जॉय रसकिन वनस्पति विभाग की उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। हेड आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती का अहम योगदान रहा।

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