भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज, मालरोड में छात्राओं को जागरूक करने हेतु साइबर सिक्योरिटी विषय से संबंधित एक सेमिनार का आयोजन किया गया ,जिसमें कानपुर महानगर से साइबर सेल के थाना फीलखाना से एस आई दीपक कुमार शर्मा ,एस आई रमन कुमार और एस आई पूजा सिंह ने छात्रों को साइबर फ्रॉड से कैसे बचा जाए से संबंधित प्रैक्टिकल बातें बताई। साइबर सिक्योरिटी वक्त की मांग है क्यूंकि साइबर ठग नए तरीक़े अपना कर आम नागरिकों को ठगने का कार्य करते है जिससे कभी अज्ञानता से, कभी भूल वाश और कभी किसी भय के कारण ठगी का शिकार होते हैं । पुलिस टीम ने छात्राओं को पोस्टर भी दिए जिनमें किसी भी तरह से दिक्कत में होने पर वे कैसे स्वयं को सुरक्षित कर सकती हैं, कैसे दूसरों की मदद कर सकती हैं ,के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी गई ।कार्यक्रम की प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया और साइबर सिक्योरिटी की महत्ता से छात्राओं को अवगत कराया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो सुमन , रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो गार्गी यादव तथा महाविद्यालय की अन्य शिक्षिकायें, उपस्थिति रही ।छात्राओं ने धैर्य पूर्वक इस गूढ़ विषय को समझा और स्वयं को सुरक्षित रखने की कोशिश करते रहने की आवश्यकता को समझा ।
एस आई पूजा सिंह ने मिशन शक्ति के छठे अध्याय के विषय में जानकारी दी और कहा स्वयं को शशक्त बनाने की चाह हर महिला में होनी चाहिए और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए । कार्यक्रम की उपयोगिता देखते हुए छात्राओं ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया और लगभग २०० छात्राओं ने लाभ उठाया ।
पर्यटन
रेलवे समपार संख्या-80 पर 10 घंटे आवागमन रहेगा बंद
रेलवे समपार संख्या-80 पर 10 घंटे आवागमन रहेगा बन्द
*घाटमपुर-जाहानाबाद मार्ग पर 15 अगस्त की रात से 16 अगस्त की सुबह तक रहेगा अस्थायी बंद*
वरिष्ठ अनुभाग अभियंता/घाटमपुर, उत्तर मध्य रेलवे, झांसी उपेन्द्र कुमार ने अवगत कराया है कि घाटमपुर से जहानाबाद जाने वाली सड़क पर हमीरपुर-घाटमपुर सेक्शन के मध्य स्थित रेलवे समपार संख्या-80, रेलवे किमी 1393/17-18 पर रेलवे यातायात की सुरक्षा के दृष्टिगत रेल मरम्मत कार्य कराया जाना सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने बताया कि मरम्मत कार्य दिनांक 15 अगस्त 2026 की रात्रि 09:00 बजे से 16 अगस्त 2026 को प्रातः 07:00 बजे तक किया जाएगा। इसके दृष्टिगत समपार संख्या-80 को उक्त अवधि में अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। इस दौरान इस मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों एवं आमजन को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा।
उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्ग से किया जा सकेगा आवागमन घाटमपुर से जहानाबाद जाने वाले यात्रियों एवं वाहन चालकों के लिए आनूपुर मोड़ से परास होते हुए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध रहेगा। आमजन से अपील है कि निर्धारित अवधि में असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग करें।
रेलवे द्वारा बताया गया है कि रेल पटरियों की सुरक्षा एवं सुचारु रेल यातायात की दृष्टि से यह मरम्मत कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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गगनयान मिशन के लिए विकास संबंधी गतिविधियां संचालित की गई
- मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (एचएलवीएम3): सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा उनके जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं।
- ऑर्बिटल मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण पूरा कर लिया गया है। पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ईसीएलएसएस) का इंजीनियरिंग मॉडल विकसित कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, डेसीलरेशन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग प्रणाली, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम तथा एंड-टू-एंड एवियोनिक्स का विकास एवं सफल परीक्षण भी पूरा कर लिया गया है।
- क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस): पांच प्रकार की मोटरों का विकास कर उनका स्थिर परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। क्रू एस्केप सिस्टम की सभी संरचनाओं का निर्माण और प्रमाणीकरण भी पूरा कर लिया गया है।
- बुनियादी ढांचे की स्थापना: ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केन्द्र, गगनयान नियंत्रण सुविधा, क्रू प्रशिक्षण सुविधा तथा दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक संशोधनों का कार्य पूरा कर लिया गया है।
- परीक्षण मिशन: क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) के उड़ान के दौरान प्रमाणीकरण के लिए पहला टेस्ट व्हीकल मिशन (टीवी-डी1) सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अतिरिक्त, डेसीलरेशन प्रणाली के प्रमाणीकरण के लिए सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल के साथ इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 (आईएडीटी-01) और इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-02 (आईएडीटी-02) भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। टीवी-डी2 मिशन को पूरा करने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं।
- उड़ान संचालन एवं संचार नेटवर्क : ग्राउंड नेटवर्क का विन्यास अंतिम रूप से तैयार कर लिया गया है। आईडीआरएसएस-1 के फीडर स्टेशन और स्थलीय संचार लिंक स्थापित किए जा चुके हैं। पारस्परिक सहयोग के लिए अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
- क्रू रिकवरी संचालन: रिकवरी के लिए आवश्यक संसाधनों को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा क्रू रिकवरी की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
इसके समानांतर, गगनयान मिशन के लिए विकसित नई प्रणालियों के प्रदर्शन और प्रमाणीकरण हेतु विभिन्न ग्राउंड क्वालिफिकेशन परीक्षण किए जा रहे हैं।
गगनयात्रियों ने रूस के ग्लावकोसमोस में सामान्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वर्तमान में बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में गगनयान मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण जारी है।
पहले मानव रहित मिशन जी-1 को पूरा करने की दिशा में विभिन्न गतिविधियां प्रगति पर हैं। एचएलवीएम3 के सभी चरण—एचएस200, एल110 और सी32—तथा क्रू एस्केप सिस्टम की मोटरें उड़ान के लिए तैयार हैं। क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की सभी प्रणालियां विकसित की जा चुकी हैं। इन दोनों मॉड्यूलों का संयोजन, एकीकरण और परीक्षण अंतिम चरण में है तथा समेकित सिमुलेशन भी किए जा रहे हैं।
गगनयान मिशनों का प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र एसएचएआर के द्वितीय प्रक्षेपण परिसर से किया जाएगा। इसके लिए एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न अवयवों, सुविधाओं और प्रणालियों की योजना बनाकर उनका विकास एवं स्थापना की गई है। ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा (ओएमपीएफ) का निर्माण किया गया है, जहां क्रू मॉड्यूल (सीएम), सर्विस मॉड्यूल (एसएम) तथा क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस), जिसमें सीईएस के ठोस मोटर भी शामिल हैं, की तैयारी की जाएगी। एकीकरण, पहुंच तथा परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए द्वितीय वाहन संयोजन भवन (एसवीएबी) में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। एसवीएबी टर्मिनल कक्ष (एसवीटीआर) तथा लॉन्च पैड टर्मिनल कक्ष–गगनयान (एलटीआर-जी) में परीक्षण सुविधाओं और इंटरफेस को उन्नत बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, उप-संयोजन एवं चरण तैयारी सुविधाओं (एचएस200, एल110-जी, सी25-जी और ईबी) के लिए परीक्षण प्रणालियों का भी विस्तार किया गया है। मानवयुक्त मिशनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए द्वितीय प्रक्षेपण परिसर के अम्बिलिकल टॉवर पर क्रू एक्सेस आर्म, बबल लिफ्ट तथा जिप लाइन प्रणाली भी स्थापित की गई हैं।
पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस) अनेक परस्पर जुड़ी प्रणालियों का एक समेकित तंत्र है और मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी है। इसका उपयोग पूरे मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल के भीतर तापमान, आर्द्रता, वायुदाब तथा कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित रखते हुए रहने योग्य वातावरण बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली का विकास इसरो द्वारा स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। वर्तमान में यह प्रणाली विकासात्मक परीक्षणों के चरण में है। इसके सीमित संस्करण का उड़ान प्रदर्शन मानव रहित गगनयान मिशनों में किए जाने की योजना है।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी
वर्ष 2026 में कुल 187 मिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश की जानकारी मिली है। अब तक इन-स्पेस द्वारा गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को विभिन्न अंतरिक्ष कार्यों के लिए कुल 108 आधिकारिक अनुमतियां प्रदान की जा चुकी हैं। इनमें उपग्रह/पेलोड की स्थापना एवं संचालन, अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों का प्रक्षेपण आदि शामिल हैं।
इन-स्पेस द्वारा जारी “अंतरिक्ष गतिविधियों की मंजूरी (एनजीपी) के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के कार्यान्वयन के लिए मानदंड, दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाओं” के अंतर्गत अनुमति के लिए प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन इस दृष्टि से किया जाता है कि निजी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देते समय रणनीतिक, सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों सहित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त, इन-स्पेस हितधारकों के परामर्श से “भारतीय संस्थाओं द्वारा भारत में संचालित अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए सुरक्षा एवं संरक्षा दिशानिर्देश” तैयार करने पर भी कार्य कर रहा है।
सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए विभिन्न पहल और योजनाएं शुरू की हैं। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए निम्नलिखित पहल और नीतियां लागू की गई हैं:
- भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 लागू की गई है, जिसमें सभी हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति उदार बनाई गई है।
- इन-स्पेस से अनुमति प्राप्त करने के लिए मानदंड, दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाएं लागू की गई हैं।
- इसरो की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एनजीई के लिए रियायती मूल्य नीति लागू की गई है।
- 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की गई है।
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और उसके व्यावसायीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष की स्थापना की गई है।
- विचारों को उत्पाद में विकसित करने के लिए इन-स्पेस सीड फंड योजना शुरू की गई है।
- निजी क्षेत्र को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच तथा मार्गदर्शन (मेंटरशिप) उपलब्ध कराया जा रहा है।
- कौशल संबंधी आवश्यकताओं की कमी को दूर करने के लिए स्किल पहल शुरू की गई है।
- अंतरिक्ष प्रणालियों के परीक्षण और सिमुलेशन की सुविधाएं किफायती लागत पर उपलब्ध कराने के लिए एक तकनीकी केन्द्र की स्थापना की गई है।
- इसरो से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाया गया है।
- पीओईएम प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष उपयोगिता का परीक्षण करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
- स्पेस एडॉप्शन अवेयरनेस वर्कशॉप (एसएएडब्ल्यू), इंडस्ट्री मीट्स तथा अन्य प्रचारात्मक आयोजनों के माध्यम से व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके अलावा, 17 स्टार्ट-अप्स को अंतरिक्ष से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां करने की मंज़ूरी दी गई है।
स्पेस टेक्नोलॉजी के कमर्शियल इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने ये योजनाएं/पहल शुरू करने की घोषणा की है:
- अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति लागू की गई है।
- गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए रियायती मूल्य निर्धारण नीति लागू की गई है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की गई है।
- स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष (टीएएफ) की शुरुआत की गई है।
- निजी क्षेत्र के विकास को समर्थन देने के लिए इसरो के अवसंरचना, तकनीकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र की बदलती कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास संबंधी पहलें शुरू की गई हैं।
- अंतरिक्ष प्रणालियों के किफायती परीक्षण, सत्यापन और सिमुलेशन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक तकनीकी केन्द्र की स्थापना की गई है।
- ii. व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के उद्योगों को हस्तांतरण की व्यवस्था की गई है।
- पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के सत्यापन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- स्वदेशी उपग्रह प्लेटफॉर्म क्षमताओं के विकास तथा उपग्रह निर्माण में तेजी लाने के लिए “सैटेलाइट बस ऐज़ अ सर्विस (एसबीएएएस) “ पहल शुरू की गई है।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने, निवेश आकर्षित करने तथा एकीकृत अंतरिक्ष औद्योगिक इकोसिस्टम के विकास के लिए राज्य सरकारों को समर्पित अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टरों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के माध्यम से कई सक्रिय कदम उठाए हैं, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इस दिशा में उठाए गए विभिन्न कदम निम्नलिखित हैं:
नीतिगत एवं नियामक सुधार:
- भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 का कार्यान्वयन.
- उदारीकृत एफडीआई नीति और अनुकूल नियामकों, दिशानिर्देशों का विकास।
बुनियादी ढांचा विकास:
- गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को पहुंच प्रदान करते हुए इसरो की सुविधाओं का विस्तार।
- साझा अवसंरचना सहायता के साथ इन-स्पेस तकनीकी केन्द्र तथा अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टरों की स्थापना।
कौशल विकास:
- उद्योगोन्मुख अंतरिक्ष पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए इमर्शन कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण संबंधी पहलें।
- अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रत्येक प्रमुख पहलू को शामिल करते हुए 14 अल्पकालिक कौशल विकास पाठ्यक्रमों का डिजाइन और विकास।
पूंजी तक पहुंच:
- 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड।
- प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष।
- स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण तथा अनुसंधान एवं विकास सहायता को प्रोत्साहन।
प्रौद्योगिकी एवं क्षमता विकास:
- एसएसएलवी सहित इसरो की प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को बढ़ावा।
- स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को प्रोत्साहन।
मांग सृजन :
- पृथ्वी अवलोकन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट कार्यक्रम।
- विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को अपनाने को बढ़ावा देना।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं वैश्विक बाजार तक पहुंच:
- द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से अग्रणी अंतरिक्ष देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ बनाना।
- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष आयोजनों, व्यावसायिक मंचों तथा बिजनेस-टू-बिजनेस सहभागिताओं में भागीदारी को समर्थन देकर वैश्विक बाजार तक पहुंच को सुगम बनाना।
- निर्यात, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उभरते हुए अंतरिक्ष बाजारों के साथ सहयोग का विस्तार करना।
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
अनुलग्नक – I
परिणाम
परिपक्व होती निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
जून 2020 में किए गए सुधारों के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के छह वर्ष बाद इसके परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सक्रिय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2014 में केवल 1 से बढ़कर आज 400 से अधिक हो गई है। निजी निवेश 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने प्रक्षेपण तथा कक्षा (ऑर्बिटल) संचालन क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। दो कंपनियों ने उप-कक्षीय (सब-ऑर्बिटल) प्रक्षेपण यान का सफल प्रक्षेपण किया है (नवम्बर 2022 और मई 2024 में)। एनजीई ने 30 से अधिक उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया है तथा पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लगभग 45 पेलोड अंतरिक्ष में संचालित किए जा रहे हैं।
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: निवेश में वृद्धि, निवेशकों का व्यापक आधार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
निजी पूंजी में न केवल उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि निवेशकों का आधार भी व्यापक हुआ है। संचयी वित्तपोषण वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, वर्ष 2023-24 में बढ़कर 348.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया और 31 मार्च 2026 तक यह 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। साथ ही, निवेश का स्वरूप शुरुआती चरण के सीड निवेश से आगे बढ़कर विकास चरण की ओर स्थानांतरित हुआ है।
भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम को गति देने वाले निवेशकों का आधार अब सम्पन्न निवेशकों तक सीमित नहीं रहा है। अब संप्रभु संपदा कोष, वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधक और रणनीतिक कॉर्पोरेट निवेशक भी निवेशकों की सूची में प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस परिपक्व होते निवेश परिदृश्य के परिणामस्वरूप स्काईरूट एयरोस्पेस, जीआईसी और ब्लैकरॉक के निवेश सहयोग के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र की पहली यूनिकॉर्न कंपनी बनी। वहीं, दिगंतारा ने जापान की एसबीआई इन्वेस्टमेंट की भागीदारी के साथ 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हासिल किया, जबकि पिक्सेल को वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी अल्फाबेट का समर्थन प्राप्त हुआ।
यह गति वर्ष 2026 में और तेज हुई। अग्निकुल कॉसमॉस ने इक्विटी निवेश के रूप में 2.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार से ऐतिहासिक 25 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त किया। गैलेक्सआई ने वर्ष की शुरुआत में कई निवेश चरणों के माध्यम से 11 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाई, जबकि ध्रुव स्पेस ने मई में 105 करोड़ रुपये (12.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश प्राप्त कर अपनी उपग्रह समूह क्षमताओं के तीव्र विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। हालांकि, ये चर्चित सफलता की कहानियां अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक संभावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन वे देश के कहीं अधिक व्यापक, जीवंत और तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष इकोसिस्टम की केवल एक छोटी-सी झलक भर हैं।
निजी अंतरिक्ष मिशनों का एक वर्ष: देश और विदेश में सहयोग तथा बढ़ता विश्वास
पिछले एक वर्ष के दौरान भारतीय कंपनियों ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी प्रदर्शन किया है और अनेक अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर सफल मिशन संचालित किए हैं। जनवरी 2025 में पिक्सेल, दिगांतारा और एक्सडीलिंक्स स्पेसलैब्स ने एक साथ सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश किया। इसके बाद अगस्त 2025 में पिक्सेल ने फाल्कन-9 के माध्यम से तीन और उपग्रह प्रक्षेपित कर अपने छह-उपग्रहों वाले फायरफ्लाई उपग्रह समूह के प्रथम चरण को पूरा किया, जो वर्तमान में सेवा में उपलब्ध सर्वाधिक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाला वाणिज्यिक हाइपरस्पेक्ट्रल प्रणाली है। ध्रुव स्पेस ने अपने थायबोल्ट-3 और लीप-1 मिशनों का सफल संचालन किया तथा एमओआई-1 और लाचित जैसे सहयोगात्मक मिशनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त बेलाट्रिक्स, गैलेक्सआई, ग्रहा स्पेस, हेक्स-20, टेकमी2स्पेस, ऑर्बिटएड सहित अनेक अन्य कंपनियों ने भी निजी क्षेत्र की ऑर्बिटल क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया। प्रक्षेपण यान और प्रणोदन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्निकुल कॉसमॉस ने अपने 3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया, जबकि स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसरो की एक सुविधा में अपने विक्रम रॉकेट के लिए ठोस ईंधन मोटर का सफल परीक्षण किया।
पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष में अपने पेलोड और प्रौद्योगिकियों के सत्यापन के लिए एक अत्यधिक सुलभ और कम लागत वाला मंच उपलब्ध कराया है। पीओईएम-4 मॉड्यूल में इसरो तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रयोगों के साथ-साथ गैलेक्सआई, बेलाट्रिक्स, टेकमी2स्पेस, पियरसाइट स्पेस, मनस्तु स्पेस और एनस्पेस टेक के पेलोड भी शामिल थे।
भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की व्यावसायिक पहुंच भी लगातार बढ़ रही है। दिगंतारा अमेरिका और यूरोप में अपने कार्यालय स्थापित कर रही है तथा सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम की अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ कार्य कर रही है। वहीं पिक्सेल विभिन्न महाद्वीपों के ग्राहकों को हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा उपलब्ध करा रही है। इन-स्पेस ने 45 से अधिक देशों के साथ कार्य संबंध स्थापित किए हैं और विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ तीन सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। देश में, इन-स्पेस की अर्थ ऑब्जर्वेशन–पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (ईओ-पीपीपी) पहल के तहत पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, सैटश्योर और पियरसाइट स्पेस ने एलाइड ऑर्बिट्स के रूप में साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निजी निवेश से पांच वर्षों में 12 बहु-मोडल उपग्रहों वाला भारत का पहला निजी स्वामित्व वाला पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह विकसित किया जाएगा, जो देश को उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाला कानून के अधीन डेटा उपलब्ध कराएगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भारत सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन के संबंध में त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते से तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण और खनिज के खनन की संभावना बनेगी, साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा पूर्वोत्तर सहित पूरे देश के सामने रखी गई समृद्ध उत्तर-पूर्व की संकल्पना की राह में बहुत बड़ी बाधा दूर हुई है। श्री शाह ने कहा कि आज पूरा पूर्वोत्तर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से यह समझौता करके आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि असम और नगालैंड परस्पर सहयोग के जरिए भारत के तेल उत्खनन में कोई बाधा नहीं बनेंगे, क्योंकि यह राष्ट्रीय संपदा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नगालैंड के मुख्यमंत्री ने बताया है कि छह फील्ड्स के अलावा पूरे नगालैंड में तेल की खोज के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सहमत है। उन्होंने कहा कि असम सरकार भी इससे सहमत है, क्योंकि यह सभी के लिए ‘विन-विन सिचुएशन’ है। गृह मंत्री ने कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते से पूरे नॉर्थ-ईस्ट में खनिजों के खनन का रास्ता साफ होगा।
अमित शाह ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में न केवल तेल और गैस, बल्कि खनिजों का असीम भंडार है। उन्होंने कहा कि आज इस MoU से हमारी 1,000-1,500 बैरल प्रतिदिन की दोहन क्षमता के दस गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि नगालैंड में उपलब्ध तेल और गैस का उत्खनन होने पर इस क्षेत्र में विदेशों पर हमारी निर्भरता काफी हद तक कम हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अभाव और कुछ चुनौतियों के कारण लंबे समय तक दोनों राज्यों का आर्थिक विकास प्रभावित हुआ था। लेकिन आज हुआ यह समझौता असम और नगालैंड के आर्थिक विकास के लिए बड़ा राजमार्ग खोलेगा। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद का इस त्रिपक्षीय समझौते से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं हो सकता।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से नॉर्थ-ईस्ट को अपने फोकस में रखा है। वे आजादी के बाद सबसे अधिक बार नॉर्थ-ईस्ट का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि लिए मोदी जी ने नॉर्थ-ईस्ट को शांत और विकसित बनाने के जो प्रयास किए हैं, आजाद भारत के इतिहास में उनकी तुलना बमुश्किल मिलेगी। श्री शाह ने कहा कि 2019 के बाद अलग-अलग प्रकार के 12 समझौते हुए हैं, जिससे पूर्वोत्तर में शांति सुनिश्चित हुई और हिंसा में करीब 80% की कमी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर जिस गति से बढ़ा है, वह इन समझौतों के बिना संभव नहीं था
गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार में नॉर्थ-ईस्ट में पर्यटन एवं निवेश बढ़ा है और औद्योगिक शांति के कारण निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में 80% से अधिक क्षेत्र सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) से मुक्त हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि एक-दो राज्यों को छोड़कर अगले साल पूरे नॉर्थ-ईस्ट से AFSPA को समाप्त कर दिया जाएगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि देश के विकास, नॉर्थ-ईस्ट की समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूत करने के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के बिना किसी देश का विकास संभव नहीं है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के संघर्षों के कारण हम और पूरी दुनिया गहरे संकट से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता इस वैश्विक संकट में भारत के लिए कितनी जल्दी मददगार साबित होगा यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन समय आने पर इससे भारत को काफी सुकून मिलेगा और हम अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि इस समझौते से खनिजों के खनन की संभावनाएँ बढ़ी हैं और छह फील्ड्स के अलावा नगालैंड में हर जगह एक्सप्लोरेशन की संभावना में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे दोनों राज्य न केवल समृद्ध होंगे, बल्कि आपसी सद्भाव भी बढ़ेगा और विकास को नई गति मिलेगी।
गृह मंत्री ने उम्मीद जताई कि नॉर्थ ईस्ट के सारे विवाद, चाहे वह सीमा से जुड़ा हो या कानून-व्यवस्था से, धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समूहों के साथ समझौते हो चुके हैं। 50% से अधिक सीमा विवाद हम सुलझा चुके हैं और आज एक नई शुरुआत हो रही है। श्री शाह ने कहा कि यह उत्तर-पूर्व के स्वर्णिम भविष्य के लिए आशा और विश्वास को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
आज हुआ त्रिपक्षीय समझौता भारत सरकार और असम व नगालैंड राज्य सरकारों की पहचाने गए रुचि वाले क्षेत्र (Area of Interest) में पेट्रोलियम की खोज और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक स्थिर, सुरक्षित और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस MoU के माध्यम से क्षेत्र में खनिज तेल से जुड़े कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए एक समन्वित ढांचा स्थापित किया गया है, जिसमें परिचालन संबंधी निरंतरता (operational continuity), कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा तथा सभी हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यह ढांचा खोज और उत्पादन (exploration and production) गतिविधियों को सहायता प्रदान करेगा, अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र (upstream petroleum sector) में निवेश को प्रोत्साहित करेगा तथा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्यों में योगदान देगा।
गृह मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा असम और नगालैंड की सरकारों के साथ मिलकर MoU पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाया। इस समझौते से इलाके में चल रहे और भविष्य के हाइड्रोकार्बन ऑपरेशन्स के लिए ज़्यादा निश्चितता और स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
यह MoU सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए हाइड्रोकार्बन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों के बीच सहकारी संघवाद (cooperative federalism) और रचनात्मक जुड़ाव की भावना को रेखांकित करता है।
भारत सरकार सहयोगी और पारदर्शी तरीकों से खोज और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में योगदान मिलता है।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर शैक्षिक जागरूकता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया
कार्यक्रम की शुरुआत प्राणी उद्यान के एक निर्देशित शैक्षिक भ्रमण के साथ हुई, जिसमें भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न पशु बाड़ों तथा उनके पारिस्थितिक महत्व के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
इस पहल का उद्देश्य वन पारितंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वन्यजीव संरक्षण की भूमिका को रेखांकित करना था। भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के 60 विद्यार्थियों ने प्राणी उद्यान भ्रमण के उपरांत एक रोचक प्रस्तुति सत्र में भाग लिया। इस सत्र में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा जैव विविधता के संरक्षण में प्राणी उद्यानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का समापन प्राणी उद्यान के निदेशक के साथ एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने चल रहे संरक्षण प्रयासों तथा राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कार्यप्रणाली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
इस अवसर को चिह्नित करते हुए प्राणी उद्यान परिसर में वृक्षारोपण गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। बीट संख्या 11 के नवीनीकृत पक्षी बाड़े में बीट कीपर तथा प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न प्रजातियों के कुल 58 पौधे लगाए गए, जिससे आवास समृद्धि तथा हरित आवरण को सुदृढ़ करने में योगदान मिला।
ईद-उल-फ़ित्र के उत्सव के अवसर पर प्राणी उद्यान में लगभग 18,000 आगंतुकों की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं जीवंत रहा। लगभग 1,500 आगंतुकों ने विशेष रूप से आयोजित चित्रांकन गतिविधि में सक्रिय भागीदारी की, जिसमें उन्होंने वन संरक्षण तथा जैव विविधता पर अपने विचारों एवं अभिव्यक्तियों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।
इस आयोजन ने आगंतुकों एवं विद्यार्थियों के बीच वनों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यावरणीय प्रथाओं के प्रति जागरूकता को प्रभावी रूप से सुदृढ़ किया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में 6969.04 करोड़ रुपये के परिव्यय से बाराबंकी से बहराइच तक 101.515 किलोमीटर की 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग-927 निर्माण की सरकारी निजी भागीदारी वार्षिकी मोड परियोजना को मंजूरी दी
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी-बहराइच खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बाराबंकी और बहराइच जिलों के शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की बड़ी ज्यामितीय खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। सेवा सड़कों के साथ नियंत्रित पहुंच वाले 4-लेन राजमार्ग के रूप में तैयार यह परियोजना प्रमुख रिहायशी क्षेत्रों को बाह्यमार्ग प्रदान करेगी, औसत यात्रा गति बढ़ाएगी, यात्रा समय में लगभग एक घंटे की कमी लाएगी और समग्र सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार करेगी। इससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और प्रचालन केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी है। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर 3 आर्थिक केंद्रों, 2 सामाजिक केंद्रों और 12 प्रचालन केंद्रों से जुड़कर विभिन्न परिवहन साधनों के निर्बाध समन्वय और एकीकरण को बढ़ावा देगी, जिससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट और हवाई अड्डों के साथ बेहतर बहु परिवहन सुविधा मिलेगी और समूचे क्षेत्र में माल और यात्री आवाजाही तेज होगी। परियोजना पूर्ण होने पर, यह नेपालगंज सीमा द्वारा भारत और नेपाल के बीच महत्वपूर्ण सीमा पार व्यापार और पारगमन कॉरिडोर स्थापित करेगी, जिससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह सड़क बहराइच और श्रावस्ती जैसे दूरस्थ जिलों को भी जोड़ेगी, प्रधानमंत्री गतिशक्ति आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के साथ संपर्क प्रदान करेगी और कृषि व्यापार, पर्यटन, सीमा पार वाणिज्य और क्षेत्रीय निवेश को प्रोत्साहित करेगी।
गलियारे का नक्शा

परियोजना विवरण:
| विशेषता | विवरण |
| परियोजना का नाम | बाराबंकी से बहराइच तक चार लेन वाला एक्सेस-नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्ग-927 |
| गलियारे | लखनऊ – रूपईडीहा |
| लंबाई (किलोमीटर) | 101.515 |
| कुल सिविल लागत (करोड़ रुपये में) | 3485.49 |
| भूमि अधिग्रहण लागत (करोड़ रुपये में) | 1574.85 |
| कुल पूंजीगत लागत (करोड़ रुपये में) | 6969.04 |
| मोड | हाइब्रिड वार्षिकी मोड |
| बाईपास | 48.28 किलोमीटर |
| प्रमुख सड़कों का जुड़ाव | राष्ट्रीय राजमार्ग 27, 330बी और 730
राज्य राजमार्ग 13 और 30बी |
| आर्थिक / सामाजिक / परिवहन केंद्र जुड़ाव | हवाई अड्डे: लखनऊ और श्रावस्ती
रेलवे स्टेशन: बाराबंकी, रसौली, जंगीराबाद, रफीनगर, बिंदौरा, बुढ़वल, चौकाघाट, घाघराघाट, जरवल और बहराईच लैंड पोर्ट: रूपईडीहा आर्थिक केंद्र: 01 विशेष आर्थिक क्षेत्र और 02 मेगा फूड पार्क सामाजिक केंद्र: 02 आकांक्षी जिले। |
| प्रमुख शहर/कस्बों का जुड़ाव | बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराईच |
| रोजगार सृजन क्षमता | 36.54 लाख व्यक्ति-दिवस (प्रत्यक्ष) और 43.04 लाख व्यक्ति-दिवस (अप्रत्यक्ष) |
| वित्त वर्ष 28 में वार्षिक औसत दैनिक यातायात | अनुमानित यात्री कार यूनिट 28,557 (पैकेज-1) और 21,270 (पैकेज-2) हैं। |
भारतीय रेलवे ने अतिक्रमण रोकने और सुरक्षित ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जोन में 16,398 किमी रेल पटरियों के किनारे सुरक्षा घेराबंदी (फेंसिंग) की
पूरे लोनावला-पुणे-दौंड मार्ग पर सुरक्षा घेराबंदी प्रदान करने के लिए ₹209.38 करोड़ की लागत का कार्य स्वीकृत किया गया है। इस कार्य में पैदल यात्री सबवे के साथ लगभग 290 किमी फेंसिंग का निर्माण शामिल है। खंड की पूरी लंबाई के लिए निविदा आवंटित कर दी गई है और अभी तक लगभग 150 किमी फेंसिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
अब तक विभिन्न रेलवे जोनों में की गई सुरक्षा फेंसिंग का विवरण इस प्रकार है (किमी में):
| क्षेत्रीय रेलवे | लगाई गई बाड़ की लंबाई (किलोमीटर में) |
| केंद्रीय | 966 |
| पूर्वी | 754 |
| पूर्वी मध्य | 730 |
| पूर्वी तट | 533 |
| उत्तरी | 736 |
| उत्तर मध्य | 2721 |
| उत्तर पूर्वी | 613 |
| पूर्वोत्तर सीमा | 153 |
| उत्तर पश्चिमी | 1539 |
| दक्षिण | 827 |
| दक्षिण मध्य | 2326 |
| दक्षिण पूर्वी | 209 |
| दक्षिण पूर्व मध्य | 365 |
| दक्षिण पश्चिमी | 255 |
| वेस्टर्न | 2257 |
| पश्चिम मध्य | 1415 |
| कुल | 16398 |
यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में प्रश्नों का उत्तर देते हुए दी।
राष्ट्रपति 19 से 21 मार्च तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगी
19 मार्च को राष्ट्रपति अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाएंगी। वे राम जन्मभूमि मंदिर के विभिन्न स्थानों पर दर्शन और आरती करेंगी तथा श्री राम यंत्र स्थापना कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगी।
20 मार्च को राष्ट्रपति वृंदावन में रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के नंद किशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन करेंगी।
21 मार्च को, दिल्ली लौटने से पहले राष्ट्रपति का गोवर्धन परिक्रमा का भी कार्यक्रम हैं।
असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग से 299 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में प्राप्त हुई
केंद्र सरकार ने असम के पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15वीं वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी की है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त, यानी 256.60 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह धनराशि असम राज्य की सभी पात्र 27 जिला पंचायतों (डीपी), सभी पात्र 182 ब्लॉक पंचायतों (बीपी), सभी पात्र 2192 ग्राम पंचायतों (जीपी) और सभी पात्र 3 स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) यानी बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी), कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (केएएसी) और दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद (डीएचएसी) के लिए है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना शर्त अनुदान की पहली किस्त के रोके गए 42.70 करोड़ रुपये भी अतिरिक्त पात्र 3 एडीसी (बीटीसी, केएएसी और डीएचएसी) को जारी कर दिए गए हैं।
भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों, के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान को जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं। अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस विषयों के अंतर्गत स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए, अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर किया जाएगा। वेतन प्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है जिनमें (क) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना, जिसमें घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव मल एवं मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए; और (ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।
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