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ट्राई ने बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754A) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

ट्राई ने बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754A) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने जनवरी 2026 के दौरान राजस्थान लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) के बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है।

इस स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट के दौरान, ट्राई सभी सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क के लाइव प्रदर्शन डेटा को कॉल सेटअप सफलता दर, डेटा डाउनलोड और अपलोड गति, ध्वनि की गुणवत्ता जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर एकत्रित करता है। इसके लिए कई उन्नत परीक्षण वाले हैंडसेट का उपयोग किया जाता है। इनकी निगरानी उसी समय की जाती है और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके उनका विश्लेषण किया जाता है। आईडीटी के परिणाम ट्राई की वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को सूचित किया जा सके और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

ट्राई क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से राजस्थान के बीकानेर जिले में विस्तृत ड्राइव टेस्ट आयोजित किए। इन टेस्टों में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों में 293.8 किलोमीटर, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग पर 41.1 किलोमीटर और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर 104.2 किलोमीटर की दूरी शामिल थी।  ये टेस्ट 13 जनवरी 2026 से 16 जनवरी 2026 के बीच किए गए। मोबाइल सेवाओं के आईडीटी (आईडीटी) निष्कर्षों का सारांश नीचे दिया गया है:

  • बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बे शामिल हैं।

(i) वॉयस सेवाएं

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 100.00 95.61 99.78 99.55
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 0.92 0.00 0.45
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 1.82 1.71 0.57 1.10
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.46 3.54 0.23 6.73
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 4.05 3.38 4.55 4.53

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट 5जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 225.02 अनुपलब्ध 337.31 अनुपलब्ध
2 औसत अपलोड थ्रूपुट 5जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 33.60 अनुपलब्ध 42.24 अनुपलब्ध
3 औसत डाउनलोड थ्रूपुट 4जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 42.17 14.41 54.68 33.96
4 औसत अपलोड थ्रूपुट 4जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 13.41 4.33 21.46 12.61
5 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 25.17 39.96 24.12 33.64

ख. बीकानेर जिले में देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का भाग):

(i) वॉयस सेवाएं

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी))
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 100.00 74.07 100.00 95.83
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 0.00 0.00 4.35
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 1.89 2.19 0.86 1.76
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.00 6.25 9.09 23.81
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 3.78 3.03 3.58 3.60

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई
 
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 55.22 10.63 147.24 11.43
2 औसत अपलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 7.27 2.63 9.83 5.71
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 35.29 231.04 26.51 39.88

ग. बीकानेर जिले में पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) :

(i) ध्वनि सेवाएँ

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 88.64 64.91 100.00 18.82
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 12.82 24.32 2.50 31.25
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 2.10 3.20 1.63 5.39
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 7.69 4.35 5.00 अनुपलब्ध
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 3.90 3.38 4.25 2.26

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी))
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 70.17 9.53 91.80 0.04
2 औसत अपलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 12.16 1.73 6.61 0.14
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 30.61 42.90 37.14 860.39

इस ड्राइव परीक्षण में बीकानेर शहर, नोखा और  डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का हिस्सा) और पूगल से रणजीतपुरा एनएच-911 राजमार्ग शहर के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर किया गया, जिसमें नोखा, बीकासर, बूढ़रों की ढाणी, रासीसर, पलाना, उदयरामसागर, गंगाशहर, सारा काजानी, मुक्ता प्रसाद नगर, नोरंगदेसर, सेरूणा, जोधासर शामिल हैं। गंगाजली, दंतौर, मीरांवाला, करणीसर, मियावाला, कंधारली और गौर आदि से गुजरते हुए श्री डूंगरगढ़, पूगल से रणजीतपुरा तक के क्षेत्र इसमें शामिल किए गए।

इस आईडीटी रिपोर्ट के निष्कर्ष संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाता के साथ साझा किए गए हैं ताकि वे आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई कर सकें। आईडीटी की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी के लिए, जयपुर स्थित ट्राई के क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल आईडी adv.jaipur@trai.gov.in पर ईमेल भेजा जा सकता है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सिविल एन्क्लेव के बृहत् विस्तार को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रस्तावित 1,677 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सिविल एन्क्लेव के विकास को मंजूरी दे दी है। यह कश्मीर घाटी में विमानन अवसंरचना और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। परियोजना के दायरे में सुरक्षा कर्मियों के लिए बैरकों का निर्माण भी शामिल है। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के बडगाम एयरबेस के तहत भारतीय विमानन प्राधिकरण द्वारा प्रचालित, 2005 में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में नामित यह हवाई अड्डा श्रीनगर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है।

73.18 एकड़ में फैले नई सिविल एन्क्लेव परियोजना में 71,500 वर्ग मीटर (विद्यमान ढांचे के 20,659 वर्ग मीटर सहित) में फैला एक अत्याधुनिक टर्मिनल भवन होगा, जिसे व्यस्ततम समय में 2,900 यात्रियों की सेवा और प्रति वर्ष 10 मिलियन यात्रियों (एमपीपीए) की वार्षिक क्षमता के लिए डिज़ाइन किया गया है। विस्तारित एप्रॉन में 15 विमान पार्किंग बे होंगे, जिनमें 1 वाइडबॉडी (कोड ई) विमान (9 विद्यमान और 6 प्रस्तावित) शामिल हैं, जबकि 3,658 मीटर x 45 मीटर का रनवे भारतीय वायु सेना द्वारा प्रचालित किया जाता रहेगा। इस परियोजना में 1,000 कारों के लिए मल्‍टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का निर्माण भी शामिल होगा।

वास्तुशिल्प की दृष्टि से, नया टर्मिनल आधुनिक डिजाइन और कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक सामंजस्यपूर्ण मिश्रण दर्शाएगा, जिसमें लकड़ी की जटिल कारीगरी और स्थानीय रूप से प्रेरित शिल्प कौशल जैसे पारंपरिक तत्वों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ-साथ ही सुव्यवस्थित यात्री प्रसंस्करण क्षेत्रों, विशाल लाउंज और उन्नत सुरक्षा एवं चेक-इन सुविधाओं के माध्यम से प्रचालनगत दक्षता को बनाए रखा जाएगा।

स्‍थायित्‍व इस परियोजना का एक प्रमुख आधार है, जिसमें उन्नत जल संचयन प्रणाली, ऊर्जा खपत कम करने के लिए प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम उपयोग और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इस परियोजना का लक्ष्य प्रतिष्ठित 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग प्राप्त करना है।

अवसंरचना में सुधार के अतिरिक्‍त, इस परियोजना से डल झील, शंकरचार्य मंदिर और मुगल गार्डन जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से बेहतर संपर्क स्थापित करके पर्यटन और आर्थिक विकास को उल्‍लेखनीय रूप से प्रोत्‍साहन मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और श्रीनगर एक प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। इस प्रकार, सिविल एन्क्लेव का विकास विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण, यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं और बढ़े हुए संपर्क की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है, जो कश्मीर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता को विश्व के सामने प्रदर्शित करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित ‘पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में ‘संकला फाउंडेशन’ के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए आयोजकों की सराहना की, जो न केवल पर्यटन की संभावनाओं का जश्न मनाता है, बल्कि यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र में भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप भी तैयार करता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि पर्यटन मात्र एक उद्योग नहीं है, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का एक चालक और सॉफ्ट कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बताया।

उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पर्यटन लोगों के बीच गहरे संबंधों, साझा मूल्यों, उद्यमशीलता की भावना और भारतीय प्रवासी समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है।

भारत की दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में सुदृढ़ अवसंरचना और वैश्विक आतिथ्य मानकों के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता डिजिटल एकीकरण और समृद्ध आगंतुक अनुभवों सहित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम पर केंद्रित है।

भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध भूदृश्यों और युवा जनसांख्यिकी लाभांश को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर पर्यटन को पुनर्परिभाषित करने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के सरंक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, जिसमें बेहतर आगंतुक सुविधाएं, व्याख्या केन्द्र, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, सतत प्रथाएं औऱ डिजिटल कहानी-वाचन शामिल हों।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि पर्यटन विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जलवायु-सचेत अवसंरचना, समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की वकालत की।

उन्होंने अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले नए युग के पर्यटन स्थलों के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर भी बल दिया।

पर्यटन को रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने समावेशी और समुदाय-संचालित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में अधिक निवेश करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के समापन में सी.पी. राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि यह शिखर सम्मेलन सततता, नवाचार, समावेशिता और साझा समृद्धि पर आधारित भारत-अमेरिका सहयोग के एक नए अध्याय की शुरूआत करेगा।

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केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्त रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी। इनमें

गोंडिया – जबलपुर लाइन दोहरीकरण

पुनारख-किऊल तीसरी और चौथी लाइन

गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्‍त इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 5,407 गांवों में संपर्क में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 98 लाख है।

बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार आएगा और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव से परिचालन सुव्यवस्थित बनाने और यात्री तथा माल भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के भविष्‍य दृष्टि अनुरूप इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास द्वारा रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर वहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श द्वारा बहु-मार्गीय संपर्क और परिवहन दक्षता बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें जबलपुर के कचनार शिव मंदिर, बालाघाट में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी, दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य आदि शामिल हैं।

ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी और पत्थर के टुकड़े, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न, सार्वजनिक तेल और उत्पाद पीओएल जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन रेल मार्गों के क्षमता वर्धन से प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी। पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने से रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की प्रचालन लागत कम करने में सहायक होगा। साथ ही इससे तेल आयात में 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 करोड़ किलोग्राम घटेगा, जो एक करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

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पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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भारतीय रेलवे ने 2026 की समय सारणी में 549 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जिससे यात्रा समय में कमी आई और कार्यकुशलता बढ़ी

भारतीय रेलवे ने ट्रेन समय सारणी 2026 के अंतर्गत अनेक नई ट्रेनें शुरू करने के अलावा मौजूदा सेवाओं का विस्तार किया और ट्रेनों के फेरे बढ़ाए। इसके साथ ही कई ट्रेनों को सुपरफास्ट में तब्दील किया और विभिन्न रेलवे जोन में सेवाओं की गति बढ़ाई गई। मध्य रेलवे जोन में 4 नई ट्रेनें चलाई गईं, 6 का विस्तार किया गया और 30 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई गई। इसी तरह पूर्व तटीय रेलवे में 4 नई ट्रेनों चलाई गईं, 4 का विस्तार किया गया और 3 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई। पूर्व मध्य रेलवे में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए 20 नई ट्रेनें चलाई गईं, 20 का विस्तार किया गया और 12 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई। पूर्व रेलवे में भी 6 नई ट्रेनें चलाई गईं, 4 का विस्तार किया गया और 32 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई।

उत्तर मध्य रेलवे ने 2 नई ट्रेनों शुरू कीं, 4 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 1 ट्रेन की गति बढ़ाई। उत्तर पूर्व रेलवे ने 8 नई ट्रेनें जोड़ीं, 4 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 12 ट्रेनों की गति में इजाफा किया। उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे ने 10 नई ट्रेनें शुरू कीं और 36 ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई। इसी तरह, उत्तर रेलवे ने 20 नई ट्रेनें शुरू कीं, 10 का विस्तार किया और 24 ट्रेनों की गति बढ़ाई। उत्तर पश्चिम रेलवे ने अपनी सेवा में 12 नई ट्रेनें जोड़ीं, 6 का विस्तार किया, 2 के फेरे बढ़ाए और 89 ट्रेनों की गति में वृद्धि की।

दक्षिण रेलवे ने 6 नई ट्रेनें शुरू कीं, 4 का विस्तार किया, 2 को सुपरफास्ट में परिवर्तित किया और 75 ट्रेनों की गति बढ़ाई। दक्षिण पश्चिम रेलवे ने 8 नई ट्रेनें शुरू कीं, 6 का विस्तार किया, 8 को सुपरफास्ट में तब्दील किया और 117 ट्रेनों की गति बढ़ाई जो सभी जोनों में सबसे ज्यादा है।

पश्चिम मध्य रेलवे ने 8 नई ट्रेनें शुरू कीं और 27 ट्रेनों की गति बढ़ाई। वहीं, पश्चिम रेलवे  ने 10 नई ट्रेनें शुरू कीं, 10 ट्रेनों का विस्तार किया, 2 ट्रेनों के फेरे बढ़ाए और 80 ट्रेनों की गति में सुधार किया।

कुल मिलाकर, ट्रेनों की समय सारिणी 2026 के तहत, 122 नई ट्रेनें शुरू की गईं, 86 ट्रेनों का विस्तार किया गया, 8 ट्रेनों के फेरे बढ़ाये गए, 10 ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेनों में बदला गया और 549 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई।

नई ट्रेनों की शुरुआत का विवरण

ट्रेन समय सारणी 2026 के तहत प्रीमियम, एक्सप्रेस और पैसेंजर सभी तरह की सेवाओं मेंमेंq मिलाजुला कर 122 नई ट्रेनों को शामिल किया गया। इनमें से 26 ‘अमृत भारत’ ट्रेनें शुरू की गईं, जिनमें 4 ट्रेनें टीएजी-टीओडी  के माध्यम से शुरू की गईं हैं। सबसे अधिक हिस्सेदारी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की है जिनकी 60 सेवाएँ शुरू की गईं, जिनमें से 8 सेवाएँ टीएजी-टीओडी के माध्यम से शुरू हुईं। इसके अतिरिक्त 2 हमसफर ट्रेनें, 2 जन शताब्दी ट्रेनें, 2 नमो भारत रैपिड रेल सेवाएँ और 2 राजधानी ट्रेनें शुरू की गईं।

इसके अतिरिक्त, सेमी-हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 28 वंदे भारत ट्रेनें जोड़ी गईं। कुल मिलाकर, इन श्रेणियों में इस अवधि के दौरान शुरू की गई कुल 122 नई ट्रेनें शामिल हैं।

ट्रेनों की गति बढ़ाई गई

समय की पाबंदी में सुधार और यात्रा के समय को कम करने के लिए ट्रेनों की समय सारिणी 2026 के तहत कुल 549 ट्रेनों की गति बढ़ा दी गई है। इनमें से 376 ट्रेनों की गति 5 से 15 मिनट तक, 105 ट्रेनों की गति 16 से 30 मिनट तक, 48 ट्रेनों की गति 31 से 59 मिनट तक और 20 ट्रेनों की गति 60 मिनट या उससे अधिक बढ़ा दी गई।

दक्षिण पश्चिम रेलवे ने इसमें प्रमुख योगदान दिया, जिन ट्रेनों की गति बढ़ाई गई उनमें  66 ट्रेनों की गति 5-15 मिनट, 29 ट्रेनों की गति 16-30 मिनट, 12 ट्रेनों की गति 31-59 मिनट और 10 की 60 मिनट या उससे अधिक की गति वाली 10 ट्रेनें शामिल हैं। मध्य रेलवे ने 13 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 13 ट्रेनों में 16–30 मिनट और 4 ट्रेनों में 31–59 मिनट का सुधार किया। पूर्व तटीय रेलवे  ने 2 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 1 ट्रेन की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। पूर्व मध्य रेलवे  ने 7 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट, 2 ट्रेनों की 16–30 मिनट, 2 ट्रेनों की 31–59 मिनट और 1 ट्रेन की गति में 60 मिनट या उससे अधिक का सुधार किया। पूर्व रेलवे ने भी 29 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट और 3 ट्रेनों में 16–30 मिनट की वृद्धि की।

उत्तर मध्य रेलवे ने 1 ट्रेन की गति में 5–15 मिनट का सुधार किया। पूर्वोत्तर रेलवे ने 9 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 3 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने 20 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 10 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 3 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 3 ट्रेनों में 60 मिनट या उससे अधिक का सुधार किया। उत्तर रेलवे ने 22 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 2 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। उत्तर पश्चिम रेलवे ने 67 ट्रेनों की गति को 5–15 मिनट, 14 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 7 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 1 ट्रेन की गति को 60 मिनट से अधिक बढ़ाया।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 9 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट और 2 ट्रेनों की गति 16–30 मिनट बढ़ाई। दक्षिण रेलवे ने 53 ट्रेनों की गति में 5–15 मिनट, 10 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 9 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 3 ट्रेनों में 60 मिनट से अधिक का सुधार किया। पश्चिम मध्य रेलवे ने 25 ट्रेनों की गति 5–15 मिनट, 1 ट्रेन की गति 16–30 मिनट और 1 ट्रेन की गति 31–59 मिनट बढ़ाई। पश्चिम रेलवे ने 53 ट्रेनों की गति को 5–15 मिनट, 15 ट्रेनों में 16–30 मिनट, 10 ट्रेनों में 31–59 मिनट और 2 ट्रेनों की गति को 60 मिनट या उससे अधिक बढ़ाया।

कुल मिलाकर, ट्रेनों की समय सारणी 2026, यात्रा के समय और यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए इंडियन रेलवे के मज़बूत इरादे को दिखाती है। सभी ज़ोन में 549 ट्रेनों की गति बढ़ाने की इस पहल से समयपालन, परिचालन दक्षता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा जिससे देश भर में तेज़ और अधिक विश्वसनीय रेल सेवाएँ सुनिश्चित होंगी।

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पर्यटन मंत्रालय ने 2015 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना के तहत 75 परियोजनाएं पूरी कीं

पर्यटन संबंधी आंकड़े

• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 20.57 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (आईटीए)।

• वर्ष 2024 के दौरान पर्यटन से 2,93,033 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित (एफईई)।

• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 2948.19 मिलियन घरेलू पर्यटक यात्राएं (डीटीवी)।

बुनियादी ढांचे का विकास

पर्यटन मंत्रालय ने थीम-आधारित पर्यटन सर्किट के विकास हेतु जनवरी 2015 में स्वदेश दर्शन योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत कुल 5290.33 करोड़ रुपये की लागत से कुल 76 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक एवं गंतव्य केन्द्रित दृष्टिकोण को अपनाते हुए स्थायी एवं जिम्मेदार गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी2.0) के तौर पर नया रूप दिया है। एसडी2.0 योजना के तहत 2208.27 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु स्वदेश दर्शन 2.0 योजना की उप-योजना के तौर पर ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) के लिए दिशा-निर्देश तैयार की है। चार थीम वाली श्रेणी – (i) आध्यात्मिक पर्यटन, (ii) संस्कृति एवं विरासत, (iii) वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, (iv) इकोटूरिज्म एवं अमृत धरोहर स्थल – के तहत 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने हेतु प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (पीएम-जेयूजीए) को मंजूरी दे दी है। पर्यटन मंत्रालय पीएम-जेयूजीए योजना के तहत 1,000 जनजातीय होमस्टे विकसित करेगा। इन कदमों को स्वदेश दर्शन की उप-योजना के तौर पर लागू किया जाएगा। जनजातीय होमस्टे के विकास हेतु दिशानिर्देश बनाई और जारी कर दी गई हैं।

वर्ष 2024-25 की बजट घोषणाओं के फॉलो-अप के तौर पर, देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों के पूर्ण विकास और वैश्विक स्तर पर उनकी ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के लिए राज्यों को 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण देने हेतु, पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने की योजना के तहत 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की लागत से कुल 40 परियोजनाएं मंजूर  की गई हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने देश में चुने हुए तीर्थ स्थलों के समग्र विकास हेतु तीर्थयात्रा कायाकल्प एवं  आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) से संबंधित राष्ट्रीय मिशन योजना का शुभारंभ  किया है। इस योजना के तहत 1726.74 करोड़ रुपये की लागत से कुल 54 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 31 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के तहत, पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु  आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, आईटीडीसी, रेल मंत्रालय आदि जैसी केन्द्रीय  एजेंसियों को वित्तीय मदद प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 948.78 करोड़ रुपये की लागत से कुल 66 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 10 परियोजनाएं बंद कर दी गई हैं।

प्रचार एवं विपणन

पर्यटन मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के तौर पर 26 से 31 जनवरी 2025 के दौरान दिल्ली के लाल किले के मैदान में “भारत पर्व” कार्यक्रम का आयोजन किया। देश के अलग-अलग पर्यटन संबंधी आकर्षणों को प्रदर्शित करने हेतु विभिन्न राज्यों/केन्द्र- शासित प्रदेशों के थीम वाले पवेलियन स्थापित किए गए थे। विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भारत पर्व की थीम ‘देखो अपना देश’ थी।

पर्यटन मंत्रालय ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के उपलक्ष्य में 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 40 सांस्कृतिक एवं  प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए। ये कार्यक्रम वैश्विक थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” के अनुरूप थे और इनमें समग्र स्वास्थ्य, सांस्कृतिक विरासत और स्थायी पर्यटन पर जोर दिया गया।

चलो भारत वैश्विक प्रवासी अभियान: चलो भारत पहल के तहत एक लाख मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा की घोषणा की गई। यह 31 मार्च 2025 तक मान्य है ताकि भारतीय प्रवासी अपने 5 गैर-भारतीय दोस्तों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करके अतुल्य भारत के दूत बन सकें।

पर्यटन मंत्रालय भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने हेतु उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) का आयोजन कर रहा है। 13वां इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) 13 से 16 नवंबर 2025 के दौरान सिक्किम के गंगटोक में आयोजित किया गया था। इस चार-दिवसीय कार्यक्रम में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारक एक साथ आए।

मंत्रालय ने मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन (माइस) के लिए भारत को एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के तौर पर पेश करने हेतु एक समग्र डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया है। इस कैटलॉग में 60 शहरों में भारत की माइस संबंधी अवसंरचना की जानकारी दी गई है, जिसमें बड़े कन्वेंशन सेंटर, कनेक्टिविटी, सुविधाएं और आस-पास के आकर्षण शामिल हैं। यह पहल घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय इवेंट प्लानर्स के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का काम करती है, जिससे भारत की दृश्यता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता बढ़ती है।

कौशल विकास

पर्यटन मंत्रालय ने सामाजिक समावेशन, रोजगार और आर्थिक प्रगति के लिए पर्यटन को एक जरिया बनाने के साथ-साथ पर्यटकों को ‘पर्यटकों के अनुकूल’ लोगों से मिलवाकर गंतव्य पर उनके समग्र अनुभव को बेहतर बनाने हेतु ‘पर्यटन मित्र एवं पर्यटन दीदी’ नाम की एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल शुरू की थी। ये लोग अपने गंतव्य के गौरवान्वित दूत और कहानीकार हैं। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 4382 पर्यटन सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण दी गई है।

माइस पर्यटन

पर्यटन मंत्रालय ने माइस उद्योग के लिए राष्ट्रीय रणनीति एवं रोडमैप तैयार की है और भारत को बड़ी कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनी के केन्द्र के तौर पर बढ़ावा देने हेतु ‘मीट इन इंडिया’ सब-ब्रांड लॉन्च किया है। घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय प्लानर्स को सहायता प्रदान करने हेतु 60 से अधिक शहरों – जिसमें जी20 के आयोजक शहर भी शामिल हैं – में बुनियादी ढांचे एवं सुविधाओं को कवर करने वाला एक पूरा डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया गया है। 4-6 मई को जयपुर में संपन्न मीट इन इंडिया कॉन्क्लेव 2025 भारत के माइस एजेंडा को आगे बढ़ाने और माइस सेक्टर में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने का एक अहम प्लेटफॉर्म साबित हुआ।

चिकित्सा पर्यटन

अपनी उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा और इलाज की किफायती लागत का लाभ उठाकर, भारत दुनिया भर में किफायती चिकित्सा एवं कल्याण पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के तौर पर उभर रहा है। भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ उच्च-गुणवत्ता वाली तृतीयक स्तर की देखभाल की सुविधा – जैसे कि हृदय की शल्य चिकित्सा, घुटने का ट्रांसप्लांट, कॉस्मेटिक सर्जरी और डेंटल केयर – प्रदान करने में निहित है। भारत आधुनिक स्वास्थ्य सेवा को आयुष प्रणाली (पारंपरिक भारतीय चिकित्सा) के साथ आसानी से जोड़ता है। वर्ष 2024 में, भारत में चिकित्सा के उद्देश्य से 6,44,387 विदेशी पर्यटक आए, जो 2020 की तुलना में लगभग 252 प्रतिशत अधिक है। चिकित्सा एवं कल्याण के उद्देश्य से की जाने वाली यात्रा को आसान बनाने हेतु भारत सरकार ने ई-मेडिकल वीजा और ई-आयुष वीजा शुरू किए हैं। यह सुविधा 171 देशों के यात्रियों के लिए उपलब्ध है।

अपने पोर्टल http://www.indiahealthcaretourism.com के जरिए चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पर्यटन मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत सर्विस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ सहयोग भी किया है।

बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन:

बजट घोषणा 2023-24: देश घरेलू और विदेशी, दोनों प्रकार के पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक पेशकश करता है। पर्यटन में बहुत अधिक संभावनाएं हैं, जिनका सदुपयोग किया जा सकता है। यह क्षेत्र, विशेष तौर पर युवाओं को, नौकरियों और उद्यमिता के बड़े अवसर प्रदान करता  है। पर्यटन को बढ़ावा देने का काम मिशन मोड पर किया जाएगा, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी, सरकारी कार्यक्रमों का तालमेल और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप शामिल होगी।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने विभिन्न गंतव्यों के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन के तहत एक उप-योजना, चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के लिए दिशानिर्देश तैयार की हैं। चुनौती आधारित गंतव्य विकास योजना राज्यों की सक्रिय भागीदारी, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और सरकारी कार्यक्रमों के तालमेल से मिशन मोड में पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के विजन का हिस्सा है।

इस योजना का उद्देश्य पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है। सीबीडीडी पहल के तहत, 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।

बजट घोषणा 2023-24: ‘देखो अपना देश’ पहल के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु क्षेत्र विशिष्ट  कौशल एवं उद्यमिता के विकास को जोड़ा जाएगा। इसे प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने की अपील के तौर पर शुरू किया था। थीम-आधारित पर्यटक सर्किट के एकीकृत विकास हेतु, ‘स्वदेश दर्शन योजना’ भी शुरू की गई थी। वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत, सीमावर्ती गांवों में पर्यटन संबंधी अवसंरचना एवं सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने ‘पर्यटन मित्र/पर्यटन दीदी’ नाम से एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल की शुरुआत की है। इस पहल को प्रायोगिक परियोजना के तौर पर शुरू करने हेतु कुल 7 पर्यटक गंतव्य – ओरछा (मध्य प्रदेश), गांडिकोटा (आंध्र प्रदेश), बोधगया (बिहार), आइजोल (मिजोरम), जोधपुर (राजस्थान), श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) और श्री विजय पुरम (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – चुने गए थे। विश्व पर्यटन दिवस 2024 के अवसर पर, पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 50 पर्यटक गंतव्यों पर पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी कार्यक्रम का विस्तार किया। अब तक, इस पहल के तहत लगभग 4382 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।

इसके अलावा, पर्यटन मंत्रालय अपनी ‘सेवा प्रदाता का क्षमता विकास (सीबीएसपी)’ योजना के तहत, हुनर ​​से रोजगार तक, कौशल जांच प्रमाण-पत्र  आदि जैसे विभिन्न अल्पकालिक आतिथ्य  और पर्यटन से संबंधित कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है। पर्यटन मंत्रालय ‘इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट फैसिलिटेटर (आईआईटीएफ) और इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट गाइड (आईआईटीजी) सर्टिफिकेशन’ कार्यक्रम भी चला रहा है – जिसका उद्देश्य पूरे देश में, पर्यटन क्षमता वाले दूरदराज के इलाकों सहित, अच्छी तरह से प्रशिक्षित और पेशेवर टूरिस्ट फैसिलिटेटर/गाइड का एक पूल बनाना है। ये नियमित पाठ्यक्रम हैं जो ऑनलाइन आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पंजीकरण पूरे साल खुली रहती है और परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है।

पर्यटन मंत्रालय ने देश में स्थायी एवं जिम्मेदार पर्यटक गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नया रूप दिया है और 2208.27 करोड़ रुपये की लागत से 53 परियोजनाएं मजूर की हैं।

पर्यटन मंत्रालय ने ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) पहल के तहत वाइब्रेंट विलेजेस को एक थीम वाली श्रेणी के रूप में शामिल किया है, जो स्वदेश दर्शन योजना की एक उप-योजना है और इस श्रेणी के तहत पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 5 गांवों की पहचान की है। सीबीडीडी योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश (किबिथो), हिमाचल प्रदेश (रक्षम-छितकुल), सिक्किम (ग्राथांग) और उत्तराखंड (जादुंग एवं माना) राज्यों में वाइब्रेंट विलेजेस थीम के तहत 24.90 करोड़ रुपये की लागत से 5 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।

बजट घोषणा 2024-25 / अंतरिम बजट: राज्यों को प्रसिद्ध पर्यटन केन्द्रों के पूर्ण विकास, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर इन केन्द्रों की रेटिंग के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। इस प्रकार के विकास का वित्त पोषण करने हेतु राज्यों को मिलान के आधार पर दीर्घकालिक अवधि के लिए बिना ब्याज वाले ऋण दिए जाएंगे।

अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने के लिए कार्यात्मक दिशानिर्देश जारी की हैं। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों को देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को पूरी तरह से विकसित करने, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग के लिए 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान करना है। पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना की दिशानिर्देशों के अनुरूप 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं का चयन किया है, जिनके लिए व्यय विभाग द्वारा 3295.76 करोड़ रुपये मजूर किए गए हैं।

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केंद्र ने तमिलनाडु में 235 करोड़ रुपये की पत्तन परियोजनाएं शुरू कीं

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग के केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और कामराजार पत्तन लिमिटेड में 235 करोड़ रुपये की पत्तन अवसंरचना तथा डिजिटल शासन परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह पहल तमिलनाडु की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने और भारत के समुद्री क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चेन्नई में आयोजित “विकसित भारत, विकसित पोर्ट्स” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, जलवायु-सहिष्णु तथा डिजिटल रूप से सक्षम पत्तनों के निर्माण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। साथ ही, ये पहल व्यवसाय करने में सुगमता और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी सहायक होंगी।

 सर्बानंद सोनोवाल ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वह विज़न और नेतृत्व प्रदान करते हैं जो भारत के समुद्री क्षेत्र के रूपांतरण को गति देता है। “मोदी जी का विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत पर स्पष्ट ध्यान हमारे द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक सुधार का मार्गदर्शन करता है। हम पत्तनों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं, तटीय लचीलापन सुदृढ़ कर रहे हैं, परिचालनों का डिजिटलीकरण कर रहे हैं तथा व्यापार सुगमता का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारतीय पत्तन विकास के इंजन, राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के आधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के केंद्र के रूप में उभर सकें।”

कुल व्यय में से 129.36 करोड़ रुपये चेन्नई पत्तन प्राधिकरण में परियोजनाओं के लिए तथा 105.64 करोड़ रुपये कामराजार पत्तन लिमिटेड में पहलों के समर्थन हेतु निर्धारित किए गए हैं।

चेन्नई पत्तन प्राधिकरण के लिए केंद्रीय मंत्री ने लचीलापन, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा प्रदाय पर केंद्रित तीन परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में लगभग 850 मीटर लम्‍बी तटीय बर्थ के पीछे स्थित तटीय संरक्षण तटबंध की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण शामिल है। यह कार्य 33.28 करोड़ रुपये की लागत से जलवायु-सहिष्णु अभिकल्पों के साथ किया जाएगा। मंत्री ने तेल गोदी क्षेत्र में तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय के सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए 43 करोड़ रुपये के निवेश से एक नए अग्निशमन पंप गृह के निर्माण का भी शिलान्यास किया। इससे महत्वपूर्ण ऊर्जा-सुरक्षा परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा मानकों के पूर्ण अनुपालन वाली समर्पित, उच्च-क्षमता अग्निशमन अवसंरचना स्थापित होगी। इसके अतिरिक्त, 8.08 करोड़ रुपये के निवेश से चेन्नई पत्तन अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए भी शिलान्यास किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य वार्डों, शल्य चिकित्सा कक्षों, निदान सुविधाओं तथा सहायक सेवाओं का उन्नयन करने के साथ-साथ निर्बाध चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना है।

 सोनोवाल ने एंटरप्राइज बिजनेस सिस्टम (ईबीएस) का भी उद्घाटन किया, जो एक सैप-आधारित (एसएपी- आधारित) एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है और यह वित्त, पत्तन संचालन, मानव संसाधन, परिसंपत्तियों, खरीद एवं ग्राहक सेवाओं को एक इकहरे आधार पर लाता है। इस प्रणाली का विकास 45 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके माध्यम से पारदर्शिता, अनुपालन और संचालन दक्षता में वृद्धि होने की अपेक्षा है, जिससे व्यवसाय की सुगमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

कामराजार पत्तन लिमिटेड के लिए, मंत्री ने उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर नई सीमा दीवार का शिलान्यास किया, जो उत्तरी पत्तन पहुँच मार्ग (एनपीएआर) से जुड़ती है, और इसकी लागत 1.39 करोड़ रुपये है। इससे पहुँच नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा। केंद्रीय मंत्री ने 105 करोड़ रुपये के निवेश से पुनर्वासित उत्तरी ब्रेकवॉटर हेड का उद्घाटन भी किया, जिसे चक्रवात से हुए नुकसान के बाद सुदृढ़ किया गया है, जिससे नौवहन सुरक्षा और पत्तन संचालन में निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना भारत के पूर्वी समुद्री गलियारे में पत्तन की भूमिका को मजबूत करती है। पुनर्वास में 202 मीटर क्षेत्र शामिल है, जिसमें 3035 नए 25 मीट्रिक टन के टेट्रापॉड लगाए गए हैं। यह क्षेत्र पहले चक्रवात थाने और नीलम के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था।

भारत के समुद्री क्षेत्र में इन परियोजनाओं की भूमिका के महत्व पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ये परियोजनाएं भारत को विश्व के अग्रणी समुद्री देशों में स्थापित करने के लिए एक बड़े, एकीकृत प्रयास का हिस्सा हैं। पत्तनों का आधुनिकीकरण, लचीलापन सुदृढ़ करना, परिचालनों का डिजिटलीकरण और व्यवसाय की सुगमता में सुधार करके, हम वह समुद्री आधार तैयार कर रहे हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के विज़न की दिशा में अग्रसर करने के लिए आवश्यक है।”

एक राष्ट्रीय स्तर की व्यापार-सुगमता पहल के तहत, जो “एक राष्ट्र–एक पत्तन प्रक्रिया” (ओएनओपी) के अनुरूप है, सोनोवाल ने ई-पोर्ट क्लियरेंस पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र, जिसमें अग्रिम मंजूरी भी शामिल है, ऑनलाइन प्रस्तुत और जारी किए जा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और पूरे भारत में समुद्री संचालन के लिए पूर्वानुमान क्षमता में सुधार लाना है। पोर्टल शिपिंग लाइन/स्टीमर एजेंटों को ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने और अपने यूज़र लॉगिन के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा देगा—इससे समुद्री संचालन में पारदर्शिता, गति और पूर्वानुमान क्षमता मजबूत होगी। माननीय केंद्रीय मंत्री ने चेन्नई पत्तन विद्यालय के 20 छात्रों के नौकायन प्रशिक्षण के लिए रॉयल मद्रास यॉट क्लब (आरएमवाईसी) को 18 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया।

श्री सोनोवाल ने कहा कि इन संयुक्त निवेशों से एक समुद्री शक्ति के रूप में तमिलनाडु की स्थिति उन्नत होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी। उन्‍होंने कहा, “सागरमाला के तहत निरंतर निवेश और सुधार भारत के पत्तनों को वैश्विक मानकों वाले केंद्रों में बदल रहे हैं, जो विकास, रोजगार और राष्ट्रीय गौरव को समर्थन देते हैं।”

इस कार्यक्रम ने “वन्दे मातरम् @150” की राष्ट्रीय भावना को भी प्रतिबिंबित किया, जो इस प्रतिष्ठित गीत के 150वें वर्ष का प्रतीक है और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि करता है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशेष आवश्‍यकता वाले बच्चों के लिए शहर के टोंडियारपेट इलाके में स्थित स्वबोधिनी विद्यालय एवं व्यावसायिक केंद्र का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकगण के साथ संवाद किया और समावेशी विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। सोनोवाल ने स्वबोधिनी के एकीकृत मॉडल की समीक्षा की, जिसमें विशेष शिक्षा को व्यावसायिक, वाक् और संवेदी चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, खेल, योग और व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ जोड़ा गया है। इसमें मुद्रण, मोमबत्ती एवं साबुन बनाना और कम्प्यूटर शिक्षा जैसे कौशल विकास कार्यक्रम भी शामिल हैं। माननीय मंत्री को मापनीय परिणामों की जानकारी दी गई, जिनमें बच्चों की गतिशीलता, संचार कौशल में सुधार और सफल नियुक्तियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, स्‍थायित्‍व के मूल्यों को सुदृढ़ करते हुए श्री सोनोवाल ने “एक-पेड-माँ-के-नाम” अभियान के तहत एक पौधा भी रोपा।

इस कार्यक्रम में डॉ. मालिनी वी. शंकर, कुलपति, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (आईएमयू), एस. विश्वनाथन, अध्यक्ष, चेन्नई पत्तन प्राधिकरण, जे.पी. आइरीन सिंथिया, प्रबंध निदेशक, कामराजार पत्तन लिमिटेड सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया। इसके अलावा भी 450 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें पत्तन हितधारक, समुद्री पेशेवर, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के छात्र और अधिकारी शामिल थे, ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

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भारतीय रेलवे ने 2025 में त्योहारों और यात्राओं के दौरान सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 43,000 से अधिक विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित कीं

भारतीय रेलवे ने प्रमुख धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के पीक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन सेवाएँ संचालित कर यात्रियों की सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए। ये पहल बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने और देशभर में निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराने के प्रति रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया, जो बेहतर योजना और यात्रियों की सुविधा पर पहले से अधिक मजबूत फोकस को रेखांकित करता है।

वर्ष 2025 के दौरान भारतीय रेलवे ने महा कुंभ के लिए अपने सबसे बड़े विशेष ट्रेन अभियानों में से एक का संचालन किया। 13 जनवरी से 28 फरवरी 2025 के बीच तीर्थयात्रियों की अत्यधिक संख्या की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 17,340 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं। इसी तरह, होली 2025 के अवसर पर 1 मार्च से 22 मार्च 2025 के बीच 1,144 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं, जो होली 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थीं। इससे यात्रियों को बेहतर उपलब्धता मिली और त्योहार के दौरान यात्रा अधिक सहज और सुव्यवस्थित रही।

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समर ट्रैवल सीज़न, 2025 यानि गर्मी की छुट्टियों के दौरान, जो 1 अप्रैल से 30 जून तक रहा, यात्रियों की बढ़ी हुई आवाजाही को ध्यान में रखते हुए 12,417 समर स्पेशल ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया, जिससे छुट्टियों के पीक महीनों में भी उच्च स्तर की सेवा बनाए रखी जा सकी। इसके अलावा, छठ पूजा 2025 के लिए विशेष इंतज़ामों को और मज़बूत किया गया। 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 के बीच 12,383 विशेष ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

साल 2025 में किए गए ये विस्तारित इंतज़ाम 2024 में तैयार किए गए मज़बूत परिचालन आधार पर आधारित थे। 30 जनवरी से 11 मार्च 2024 के बीच संचालित आस्था स्पेशल सेवाओं के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 326 विशेष सर्कुलर ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं थी। इसी तरह, होली 2024 के अवसर पर 12 मार्च से 2 अप्रैल 2024 के बीच त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने 604 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया था।

गर्मियों की छुट्टियों 2024 के दौरान 12,919 समर स्पेशल ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं थी। वहीं, छठ पूजा 2024 के लिए 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2024 के बीच 7,990 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया था।

वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा, प्रभावी भीड़ प्रबंधन और अधिक मांग वाले समय में विश्वसनीय तथा सुचारु यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति लगातार प्रतिबद्ध है।

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कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो की फेज V (A) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी है: 1. आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी), 2. एरोसिटी से आई.जी.डी. एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और 3. तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)। यह 16.076 किलोमीटर लंबी परियोजना राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी। दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) की कुल लागत 12014.91 करोड़ रुपये है, जिसे भारत सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।

सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर सभी कर्तव्य भवनों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे इस क्षेत्र के कार्यालय जाने वालों और आगंतुकों को सीधे ऑफिस तक पहुंचने में आसानी होगी। इस कनेक्टिविटी से दैनिक आधार पर लगभग 60,000 कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और 2 लाख आगंतुकों को लाभ होगा। ये कॉरिडोर प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को और कम करेंगे, जिससे जीवन जीने की सुगमता में वृद्धि होगी।

विवरण:

आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन, बॉटनिकल गार्डन – आर.के. आश्रम मार्ग कॉरिडोर का विस्तार होगा। यह सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिसका वर्तमान में पुनर्विकास किया जा रहा है। एयरोसिटी – आईजीडी एयरपोर्ट टर्मिनल 1 और तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन, एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर का विस्तार होंगे। यह विस्तार हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिणी हिस्सों जैसे तुगलकाबाद, साकेत, कालिंदी कुंज आदि क्षेत्रों के साथ मजबूत करेगा। इन विस्तारों में कुल 13 स्टेशन शामिल होंगे, जिनमें से 10 स्टेशन भूमिगत और 03 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।

पूरा होने के बाद, कॉरिडोर-1 यानी आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी) पश्चिमी, उत्तरी और पुरानी दिल्ली की सेंट्रल दिल्ली के साथ कनेक्टिविटी में सुधार करेगा। वहीं अन्य दो कॉरिडोर— एयरोसिटी से आईजीडी एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)— दक्षिण दिल्ली को साकेत, छतरपुर आदि के माध्यम से घरेलू हवाई अड्डे टर्मिनल-1 से जोड़ेंगे, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी में जबरदस्त वृद्धि होगी।

फेज-V (ए) परियोजना के ये मेट्रो विस्तार मध्य दिल्ली और घरेलू हवाई अड्डे तक दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की पहुंच बढ़ाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। मजेंटा लाइन और गोल्डन लाइन के ये विस्तार सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करेंगे। इस प्रकार, मोटर वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

आरके आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन पर जो स्टेशन बनेंगे, वे हैं: आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल – हाई कोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम, और इंद्रप्रस्थ।

तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन के स्टेशन सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज होंगे, जबकि एयरोसिटी स्टेशन को आगे आईजीडी टी-1 स्टेशन से जोड़ा जाएगा।

फेज-IV का निर्माण कार्य, जिसमें 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशन शामिल हैं, वर्तमान में प्रगति पर है। आज की स्थिति के अनुसार, फेज-IV के (3 प्राथमिकता वाले) कॉरिडोर का लगभग 80.43 प्रतिशत सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फेज-IV के इन तीनों प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के दिसंबर 2026 तक चरणों में पूरा होने की संभावना है।

आज, दिल्ली मेट्रो प्रतिदिन औसतन 65 लाख यात्रियों को सर्विस देती है। अब तक की सर्वाधिक यात्रा का रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को 81.87 लाख दर्ज किया गया है। दिल्ली मेट्रो समयपालन, विश्वसनीयता और सुरक्षा जैसे एमआरटीएस के मुख्य मानकों में उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर शहर की जीवनरेखा बन गई है।

वर्तमान में दिल्ली और एनसीआर में डीएमआरसी द्वारा लगभग 395 किमी लंबाई वाली कुल 12 मेट्रो लाइनों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 289 स्टेशन शामिल हैं। आज, दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है और दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में से भी एक है।

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