Breaking News

विविधा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील व्यापार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सहयोग पर का उल्लेख किया। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने वर्तमान स्तर को अपर्याप्त बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।

श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।

भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का  लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।

श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।

Read More »

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में श्री विजय गोयल द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को सम्मानजनक और भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि यह पुस्तक भारत के एक महानतम नेताओं में से एक, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को अर्पित उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे राजनेता का उत्सव है, जिनका जीवन और विरासत राष्ट्र को निरन्तर प्रेरणा देती है।

श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 12वें और 13वें लोकसभा के सदस्य के रूप में सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि 1974 में कोयंबटूर में उन्होंने एक जनसभा का आयोजन किया था, जिसे श्री वाजपेयी ने संबोधित किया था, इस स्मरण को साझा करते हुए उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों का अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद सदस्य से प्रधानमंत्री तक श्री वाजपेयी की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को प्रतिबिंबित करती है। तीव्र राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान भी, उन्होंने अपनी निष्ठा, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमापूर्ण आचरण के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान अर्जित किया।

श्री वाजपेयी के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो जैसी दूरदर्शी अवसंरचना पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी ने यह दिखाया कि ताकत और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं और वे हमेशा संवाद, लोकतंत्र और विकास को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते थे।

श्री वाजपेयी को एक उत्कृष्ट कवि, दूरदर्शी और संसद सदस्य के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके भाषण संसद और देश दोनों को प्रभावित करते थे और उनमें बिना अप्रिय हुए असहमति जताने की दुर्लभ क्षमता थी — एक ऐसा गुण, जो सार्वजनिक जीवन में आवश्यक है।

कॉफी टेबल बुक की रचना के लिए श्री विजय गोयल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्य दुर्लभ तस्वीरों, व्यक्तिगत किस्सों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से इतिहास को जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक देशभर में घरों और संस्थानों तक पहुंचेगी, विशेष रूप से नई पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी।

इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान; हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष; राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े; पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी; और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

Read More »

वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) में क्षमता में वृद्धि 50,000 मेगावाट से अधिक हो गई है

चालू वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान, सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52,537 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें से 39,657 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जोड़ी गई है जिसमें 34,955 मेगावाट सौर ऊर्जा और 4,613 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल हैं।

यह एक वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि को दर्शाता है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान प्राप्‍त किए गए 34,054 मेगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है।

इसके अलावा, इसका यह भी तात्पर्य है कि 2025-26 (31.1.2026 तक) के दौरान देश की कुल स्थापित क्षमता में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

31 जनवरी 2026 तक, भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 520,510.95 मेगावाट है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: 248,541.62 मेगावाट
  • गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता: 271,969.33 मेगावाट
    • परमाणु ऊर्जा: 8,780 मेगावाट
    • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: 263,189.33 मेगावाट

Read More »

मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम

दोस्तों ! महकता हुआ मखमली गुलाब कुदरत की दी हुई बेहतरीन सौग़ात हमें फूल के रूप में मिली है जिसे वेलेंटाइन के मौक़े पर बहुत से चाहने वाले अपने प्यार का इज़हार करने के लिये ढेरों,

लाल गुलाब देंगे और लेंगे,और बहुत कुछ कहा भी जाएगा जैसे कि “मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम..,एक नाज़ुक सा एहसास ,महकता हुआ जज़्बात हो तुम “🌺…. और कुछ लोग ऐसा भी कहेंगे । “ज़िन्दगी की मेरी ज़रूरत हो तुम ,गुलाब तो खूबसूरत हैं ही मगर गुलाब से भी हसीन हो तुम”… 🌺 और कुछ तो प्रेमी को खुदा का ही ख़िताब दे डालेंगे।

“ सोचते हैं गुलाब दे कर दिल का हाल दिखा दें उन्हें..तुम ख़ुदा हो हमारे लिए ,ये भी बता दें उन्हें…

🌺 वगैरह वगैरह ….!!ढेरों कविताएँ, ढेरों शायरी कही जायेगी…मेरी शुभकामनाएँ है उन के लिए जो अपने अपने पार्टनर या प्रेम की तालाश में है .. कुछ का इंतज़ार आज ख़त्म होगा ,कईयो की तालाश अभी जारी रहने वाली होगी।ये सिलसिला तो सालों से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा…. पर दोस्तों ! गुलाब उसी को देना ,जिसको आप दिल से चाहते है..जिसके साथ आप हर दुख सुख बाँटना चाहते है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण, संवेदनशील नाजुक पल होता है .. इसकी मर्यादा को बनाए रखना ज़रूरी है.. ये फ़ैसला कुछ पलों का नहीं बल्कि उम्र का होना चाहिए । पर अफ़सोस तो ये है !!असल में हमें पता ही नहीं कि प्रेम क्या है। चलिए पहले समझते है प्रेम को …प्रेम जीवन में बहुतो से होता है जैसे कि मांबाप बहन भाई.. अपने दोस्त ,सहेलियों ,अपने सहयोगियों से ,पड़ोसियों से ..रिश्तेदारों से ,देश से ,यहाँ तक की कथा कहानियों से प्रेम हो जाता है ,और तो और भगवान से भी सभी प्रेम ही करते हैं इश्क़ नही ।

🌺प्रेम का मतलब है (लगाव )

…याद रखे अगर एक से ज़्यादा लोगों से आप इश्क़ का दावा करते है समझ जाईये …ये सिर्फ़ लगाव या प्रेम हो सकता है “इश्क़ नही।” इश्क़ तो किसी विरले के हिस्से में आता है। इश्क़ अलग अहसास है .. वो सिर्फ़ एक से ही होगा ,दूसरे से नही .. जब इश्क़ मिलता है तो किसी दूसरे का कोई स्थान रह ही नही जाता। न ही उसकी जगह कोई ओर ले सकता है। इश्क़ तो वो शय है ,वो मिले न मिले पर हम उसी के हो कर रह जाते है अपनी ही मर्ज़ी से। उसे हासिल करना कोई मायने नहीं रखता।वो पास न होकर भी करीब ही महसूस होता है।जहाँ आशिक़ की सिर्फ़ इक झलक पर ही अपनी सारी ज़िंदगी गुज़ार दी जाती है। इसका उदाहरण कृष्ण दीवानी मीरा बाई जी थी.. “जहाँ रूह कह उठती है कि हम उसके बग़ैर संसार को विरान लिखते है ,”और हम कितनी आसानी से कह देते है कि हमें इश्क़ हुआ है ,मगर सच यही है कि हम सब अभी प्रेम में ही है। कोई विरला आशिक ही इस इश्क़ की पाकीज़ा गली से गुज़रता हैं ।आमतौर पर होता क्या है .. बस जवान हुए ,कालेज मे कोई लड़की या लड़का अच्छा लगा तो सोच लिया कि हमे प्रेम हो गया है .. बस गुलाब दे दो और अपने मन की बात कह दो .. और फिर कुछ देर के बाद शादी… और दूसरी ओर इश्क़ जो इतना सस्ता नहीं कि हर किसी को,और किसी से भी हो जाए..न ही इतना आसान है कि इसे हर कोई पा सके।ये मिलेगा उसे ही जिसमे शिद्दत होगी ,गहराई होगी ,सब्र होगा,..इश्क़ खुद तुमसे तुमको माँगता है। क्या कर सकते हो खुद को किसी के हवाले ? दोस्तों!! ये कोई टाइम पास या मस्ती करना नहीं होता।इश्क़ नाईट क्लबों या चकाचौंध से भरी दुनिया में नहीं मिल सकता। इश्क़ गहरा इसीलिए है क्योंकि वो मर्यादित है ,सीमाबद्ध है ,उसके अपने दायरे है और वो दायरों को तोड़ना नही जानता,अपनी या सामाज की खींची हुई लकीर में ही रहता है। इश्क़ आनन्दमय भी हो सकता है और उदासी,बैचेनी बिछोह का भी रूप हो सकता है। प्रेम अगर आसानी से मिल जाये, तो

उसमें गहराई नहीं होगी। मुश्किल से मिला प्रेम मूल्यवान होगा और वही प्रेम धीरे धीरे इश्क़ का रूप होने लगता है….

“इश्क़ बँधता नहीं, न ही इसे

बांधने की कोशिश ही नही करनी चाहिए …जो बाँधा जाये वो इश्क़ नही .…वो तो क़ैद होगी ..इश्क़ तो खुद ब ख़ुद बंध जाता है और खुद को किसी से बांधें रखना

ही इश्क़ है “इश्क़ बिल्कुल भगवान और भक्त जैसा है भगवान चाहे दिखे न दिखे.. बात करे न करे .. मिले ना मिले..चाहे जो भी दे दे .. भक्त उसकी हर रज़ा में राज़ी रहता है। ऐसी इश्क़ की अवस्था में भगवान के देह स्वरूप की भक्त को कोई ज़रूरत महसूस नही होती।वो उसे अपना मान चुका होता है..भक्त कहता है कि आप कहीं भी हो ..दुनिया के किसी भी कोने मे हो …हे भगवन ! मैं तुम्हारा हूँ ।हर इंसान जो प्रेम की तलाश मे है उसे सोचना होगा कि क्या वो ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार है,क्योंकि प्रेम अकेला नहीं आता ..बहुत कुछ अपने साथ लेकर आता है।हमारी माँ बाप की जब शादी हुई थी उन लोगों ने प्रेम को निभाया .. संसार को आगे बढ़ाया …संस्कारों को बांटा …क्या हम संस्कारों को आगे बढ़ा पाएंगे .. नई जनरेशन से मैं यही कहूँगी अगर शादी करनी है तो पहले सोचिये।

लडकियों से भी कह रही हूँ कि शादी सिर्फ़ लाखों का लहंगा पहनना नहीं होता ,महंगा मेकअप करवाना नहीं होता ..शादी के साथ बहुत सी ज़िम्मेदारियाँ आती हैं जो हमें निभानी होती हैं।पहले उसके लिए खुद को तैयार करे .. फिर गुलाब का फूल देने और लेने की सोचे।आज की जनरेशन को अगर आज प्यार होता है तो दो चार दिनों में अपनी सहूलियत के हिसाब से एक दूसरे को बलोक भी कर देते है .. ये कैसा प्रेम है जो मात्र बलोक करने से सब ख़त्म हो जाता है..जो लड़को की जेब को पहले देखता है..उसकी कौन सी गाड़ी है .. उसका कामकाज क्या है …उसका क्या कोई अपना घर है भी या नहीं …ये प्रेम कैसे हो सकता है।

ये तो एक व्यापार ही कह सकते है और हम कह देते है कि हम प्यार मे है ।

हमारे बुजुर्गों ने भी शादी के बाद मिल कर घर बनाये थे।पहले इस तरह के सवाल नहीं हुआ करते थे।अगर पहले ही आप को बना बनाया सब कुछ मिल जाएगा तो आप क्या करेंगे। ..

लड़के भी लड़की की ब्यूटी को ही देखते है ,गोरे रंग पर मर मिटते है चाहे लड़की मे घर सँभालने का कोई भी गुण न हो …चेहरे से ज़्यादा सीरत पर ध्यान देना ज़रूरी है

अंतर्मन को पढ़ना ज़रूरी है

रूप आज है कल नहीं रहेगा…

तो फिर क्या होगा.प्रेम भी दो चार महीने ..सालो में हवा में कहीं उड़ जायेगा..नई जनरेशन को जरा सोच विचार करना होगा।

जब लड़कियां आजकल कमा रही है तो क्यों आप लड़कों से इतनी अपेक्षाएँ रखती है..क्यों लड़को पर इतना बोझ डालती है।अगर प्रेम करे तो तैयार भी रहे, मिल जुल कर जीवन जीने के लिये।

गुलाब देने से या लेने से पहले सोचिये ज़रूर…,

पहचाने खुद को ,परखें अपने प्रेम को …क्या वाक़ई में आप प्रेम में हैं ? क्या सामने वाले में भी आप के लिए वही चाहत है जो आप उसके लिए महसूस करते है ?क्या सच में आप उम्र भर प्रेम निभा पाएंगे ?

या फिर आप सिर्फ़ ट्रेंड के साथ चल रहे है। सोचियेगा ज़रूर …..आप की दोस्त ✍️ स्मिता

Read More »

दिल्ली के केली बॉयज बनाएंगे इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’ में अपनी खास पहचान

भारतीय स्वरूप संवाददाता दिल्ली  देश के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित टैलेंट रियलिटी शो ‘इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’ में इस बार दिल्ली से आए दमदार कंटेस्टेंट केली बॉयज अपने अनोखे अंदाज़ और जबरदस्त परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सवाल यही है कि क्या केली बॉयज शो के स्पॉटलाइट में अपनी जगह बना पाएंगे या नहीं—इसका जवाब जानने के लिए दर्शकों को देखना होगा सोनी पल, रोज़ाना रात 8 बजे, सोमवार से शनिवार।

दिल्ली से ताल्लुक रखने वाले केली बॉयज अपने अलग कॉन्सेप्ट, फ्यूज़न स्टाइल और ग्रुप केमिस्ट्री के लिए जाने जाते हैं। उनकी परफॉर्मेंस युवाओं के बीच खासा क्रेज़ पैदा कर रही है और यही वजह है कि दर्शक बेसब्री से उनके अगले परफॉर्मेंस का इंतज़ार कर रहे हैं।

इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न देश का सबसे बड़ा टैलेंट हंट शो है, जिसने सालों से सिंगिंग, डांसिंग, म्यूज़िक, स्टंट्स और अनोखी प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच दिया है। सीज़न 11 में भी नए जोश, नए जुनून और बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ शो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है।

सोनी पल भारत का लोकप्रिय फ्री-टू-एयर एंटरटेनमेंट चैनल है, जो हर वर्ग के दर्शकों के लिए मनोरंजक और पारिवारिक कंटेंट प्रस्तुत करता है। सोनी पल पर प्रसारित होने वाला इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11’दर्शकों को प्राइम टाइम में बेहतरीन एंटरटेनमेंट का अनुभव दे रहा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली के केली बॉयज , इंडियाज़ गॉट टैलेंट सीज़न 11के मंच पर अपनी अलग पहचान बनाकर Spotlight में जगह बना पाते हैं या नहीं।

देखते रहिए सोनी पल, रोज़ रात 8 बजे, सोमवार से शनिवार—सिर्फ सोनी पल चैनल पर।

Read More »

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में सोमनाथ धाम की शाश्वत भूमिका को एक सुभाषित के माध्यम से रेखांकित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पावन सोमनाथ धाम में श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में इसकी शाश्वत भूमिका को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पावन सोमनाथ धाम ने सदियों से अपनी दिव्य ऊर्जा के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह ऊर्जा आज भी आस्था, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग को आलोकित करती हुई युगों से सभी भारतवासियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य कर रही है।

एक संस्कृत श्लोक को एक्स पर उद्धृत करते हुए मोदी ने लिखा:

“पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।

आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।

प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”

Read More »

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने हेतु अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का नया मानक जारी किया

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का भारतीय मानक आईएस 19412:2025 – अगरबत्ती – विनिर्देशन जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी किया गया।

नए अधिसूचित मानक में अगरबत्तियों में कुछ कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम सुगंधित पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है , जो मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, आईएस 19412:2025 में अगरबत्तियों में उपयोग के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की सूची दी गई है। इसमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन , साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन जैसे कृत्रिम सुगंधित पदार्थ शामिल हैं। इनमें से कई पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित यौगिकों और रसायनों पर लगे प्रतिबंधों को देखते हुए—अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह मानक अगरबत्ती को मशीन से बनी, हाथ से बनी और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है, और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक मापदंडों के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद बीआईएस मानक चिह्न प्राप्त करने के पात्र होंगे , जिससे उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे। आईएस 19412:2025 की अधिसूचना से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ने, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

यह मानक बीआईएस की सुगंध एवं स्वाद अनुभागीय समिति (पीसीडी 18) द्वारा हितधारक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमएपी), सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआर), कन्नौज स्थित सुगंध एवं स्वाद विकास केंद्र (एफएफडीसी) और अखिल भारतीय अगरबत्ती निर्माता संघ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस मानक को तैयार करने में योगदान दिया है।

भारत विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस उद्योग का वार्षिक अनुमानित मूल्य लगभग 8,000 करोड़ रुपये है और लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निर्यात 150 से अधिक देशों को किया जाता है। यह क्षेत्र कारीगरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमियों के एक बड़े समूह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्ती भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग है और घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में इसका उपयोग किया जाता है। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अगरबत्ती उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Read More »

जलवायु परिवर्तन: पिघलते हिमनद और डूबता भविष्य

धरती का तापमान धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक गति से बढ़ रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बीसवीं सदी में भूमंडलीय औसत तापमान में लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यदि तापमान वृद्धि की यही प्रवृत्ति जारी रही, तो 21वीं सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह परिवर्तन केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानव जीवन, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन का सबसे गंभीर प्रभाव हिमालयी हिमनदों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो सन् 2040 तक हिमाचल प्रदेश की अधिकांश हिमनदियाँ पिघलकर समाप्त हो सकती हैं। गंगोत्री हिमनद, जो गंगा नदी का प्रमुख स्रोत है, प्रतिवर्ष लगभग 23 मीटर की दर से संकुचित हो रही है। इस हिमनद का तीव्र क्षरण भविष्य में गंगा नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं है। ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघलकर नदियों के माध्यम से समुद्र तक पहुँच रही है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, 2100 तक समुद्र का जलस्तर 9 से 88 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। यह वृद्धि कई तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।

समुद्री जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण अनेक द्वीपीय और तटीय क्षेत्र जलमग्न होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। मॉरीशस, मालदीव, अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप समूह इस संकट के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यदि समय रहते प्रभावी नीतियाँ और पर्यावरणीय संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए, तो इन क्षेत्रों की भौगोलिक पहचान और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, सतत विकास, और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की तत्काल आवश्यकता है। जब तक मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित नहीं किया जाता, तब तक पिघलते हिमनद और बढ़ता समुद्री जलस्तर हमारे भविष्य के लिए निरंतर खतरा बने रहेंगे। ~रश्मि गोयल

Read More »

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने पीएम-सेतु योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने देश में कार्यबल को आधुनिक बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और प्रशिक्षण महानिदेशालय के माध्यम से उद्योग जगत को पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री-औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन द्वारा कौशल एवं रोजगार क्षमता उन्नयन कार्यक्रम) योजना में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यह पहल व्यावसायिक प्रशिक्षण के तौर-तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव है, जो सरकार संचालित नीति से विस्तारित होकर एक ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर है, जिसमें प्रशिक्षण के प्रबंधन और क्रियान्वयन में उद्योग अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

मंत्रालय ने राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए मुख्य उद्योग साझेदारों -एआईपी की तलाश हेतु रुचि की अभिव्यक्ति- ईओआई जारी की है। इसके साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने भी चुने हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत बनाने में सहयोग के लिए साझेदारों की पहचान हेतु ईओआई जारी करना आरंभ कर दिया है। इस सिलसिले में अब तक कर्नाटक, गुजरात, असम और चंडीगढ़ ने ईओआई जारी की है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2025 में प्रधानमंत्री-सेतु योजना को 60 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ स्वीकृति दी थी। प्रधानमंत्री ने आधुनिक रोजगार बाजार के अनुरूप प्रशिक्षण और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों-आईटीआई को अधिक प्रासंगिक बनाने और उनकी मौजूदा कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 4 अक्टूबर, 2025 को इस योजना का शुभारंभ किया था। सरकार की योजना हब-एंड-स्पोक मॉडल का उपयोग कर एक हजार सरकारी आईटीआई को उन्नत बनाना है। इस केन्द्रीकृत मॉडल में 200 मुख्य (हब) आईटीआई लगभग चार स्पोक आईटीआई को अत्याधुनिक मशीनरी और उपकरण सहायता प्रदान करेंगे। इसके अलावा इस योजना के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पीएम-एसईटीयू की विशेषता इसका उद्योग-नेतृत्व में संचालन है। प्रत्येक उन्नत आईटीआई का प्रबंधन एक विशेष प्रयोजन वाहन-एसपीवी द्वारा किया जाएगा। इसमें उद्योग जगत की 51 प्रतिशत और सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस सह-निवेश मॉडल में सरकार की 83 प्रतिशत तक सह-वित्तपोषण से कंपनियों पर व्यापक उन्नयन का दायित्व होगा। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है, जिससे उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिकी, गतिशीलता और प्रचालन क्षेत्रों में भागीदारी के द्वार खुल गए हैं।

प्रमुख उद्योग साझेदार के तौर पर कंपनियां रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार करने और उन्नत प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कंपनियां उद्योग अनुभवों के आधार पर प्रशिक्षकों के कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी और संस्थान परिसर में नवाचार केंद्र भी स्थापित करेंगी। इससे उद्योगों को व्यवसाय में कुशल श्रमिकों और प्रशिक्षुओं की विश्वसनीय और मापनीय प्रतिभा प्राप्त होगी, जो उनके व्यवसाय प्रगति रणनीति के प्रतिभावर्धन से सीधे तौर पर जुड़ेंगे। इसके साथ ही उद्योगों को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व-सीएसआर संबंधी लाभ भी मिलेंगे। इस संरचनात्मक सुधार का उद्देश्य भारत के कौशल विकास तंत्र को उन्नत बनाकर देश की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करना है।

आवेदन करने के लिए लिंक: https://linktr.ee/Skill_India

Read More »

कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो की फेज V (A) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी है: 1. आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी), 2. एरोसिटी से आई.जी.डी. एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और 3. तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)। यह 16.076 किलोमीटर लंबी परियोजना राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी। दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) की कुल लागत 12014.91 करोड़ रुपये है, जिसे भारत सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।

सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर सभी कर्तव्य भवनों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे इस क्षेत्र के कार्यालय जाने वालों और आगंतुकों को सीधे ऑफिस तक पहुंचने में आसानी होगी। इस कनेक्टिविटी से दैनिक आधार पर लगभग 60,000 कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और 2 लाख आगंतुकों को लाभ होगा। ये कॉरिडोर प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को और कम करेंगे, जिससे जीवन जीने की सुगमता में वृद्धि होगी।

विवरण:

आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन, बॉटनिकल गार्डन – आर.के. आश्रम मार्ग कॉरिडोर का विस्तार होगा। यह सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिसका वर्तमान में पुनर्विकास किया जा रहा है। एयरोसिटी – आईजीडी एयरपोर्ट टर्मिनल 1 और तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन, एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर का विस्तार होंगे। यह विस्तार हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिणी हिस्सों जैसे तुगलकाबाद, साकेत, कालिंदी कुंज आदि क्षेत्रों के साथ मजबूत करेगा। इन विस्तारों में कुल 13 स्टेशन शामिल होंगे, जिनमें से 10 स्टेशन भूमिगत और 03 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।

पूरा होने के बाद, कॉरिडोर-1 यानी आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी) पश्चिमी, उत्तरी और पुरानी दिल्ली की सेंट्रल दिल्ली के साथ कनेक्टिविटी में सुधार करेगा। वहीं अन्य दो कॉरिडोर— एयरोसिटी से आईजीडी एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)— दक्षिण दिल्ली को साकेत, छतरपुर आदि के माध्यम से घरेलू हवाई अड्डे टर्मिनल-1 से जोड़ेंगे, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी में जबरदस्त वृद्धि होगी।

फेज-V (ए) परियोजना के ये मेट्रो विस्तार मध्य दिल्ली और घरेलू हवाई अड्डे तक दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की पहुंच बढ़ाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। मजेंटा लाइन और गोल्डन लाइन के ये विस्तार सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करेंगे। इस प्रकार, मोटर वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

आरके आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन पर जो स्टेशन बनेंगे, वे हैं: आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल – हाई कोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम, और इंद्रप्रस्थ।

तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन के स्टेशन सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज होंगे, जबकि एयरोसिटी स्टेशन को आगे आईजीडी टी-1 स्टेशन से जोड़ा जाएगा।

फेज-IV का निर्माण कार्य, जिसमें 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशन शामिल हैं, वर्तमान में प्रगति पर है। आज की स्थिति के अनुसार, फेज-IV के (3 प्राथमिकता वाले) कॉरिडोर का लगभग 80.43 प्रतिशत सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फेज-IV के इन तीनों प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के दिसंबर 2026 तक चरणों में पूरा होने की संभावना है।

आज, दिल्ली मेट्रो प्रतिदिन औसतन 65 लाख यात्रियों को सर्विस देती है। अब तक की सर्वाधिक यात्रा का रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को 81.87 लाख दर्ज किया गया है। दिल्ली मेट्रो समयपालन, विश्वसनीयता और सुरक्षा जैसे एमआरटीएस के मुख्य मानकों में उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर शहर की जीवनरेखा बन गई है।

वर्तमान में दिल्ली और एनसीआर में डीएमआरसी द्वारा लगभग 395 किमी लंबाई वाली कुल 12 मेट्रो लाइनों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 289 स्टेशन शामिल हैं। आज, दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है और दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में से भी एक है।

Read More »