भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज के प्रांगण में योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने किया। योग शिविर का संचालन रेंजर प्रभारी प्रोफेसर स्वाति सक्सेना ने किया तथा बताया योग शरीर और मस्तिष्क को जोड़ने की एक सफल विधि है यदि स्वस्थ शरीर होगा तो मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा और आम जीवन शैली में व्यक्ति बेहतर जीवन की पाएगा। विषय प्रवर्तन डॉ दीपाली सक्सेना ने किया की स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग कितना आवश्यक है और थीम के विशिष्ट पहलुओं चर्चा कीl योगा फॉर ऑल और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग विषय पर कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक योग संस्थान हरिद्वार के प्रोफेसर सीडी यादव सर . ने छात्राओं को योग के महत्व को बताया कि कैसे योग को वर्तमान जीवन शैली में शामिल करके हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं छात्राओं को बताया कि अपने परिवार तथा आस पास पड़ोस में स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग की थीम के अनुसार छात्राएं कैसे जागरूकता कर सकती हैं योग को हमें आम जनमानस तक कैसे पहुंचlना है.. छात्रों को प्राणायाम अनुलोम विलोम भ्रामरी उत्तानपादासन पद्मासन जैसे अनिवार्य आसनों के माध्यम से बताया गया शरीर के सभी अंगों को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है सर्वप्रथम प्रार्थना कराई गई और अंत में लाफिंग थेरेपी की गई की कैसे शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति पाई जा सकती है l धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनीत श्रीवास्तव ने दिया l
विविधा
एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया की राष्ट्रीय परिषद की बैठक दिल्ली के यूपी भवन में संपन्न
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय परिषद की बैठक यूपी भवन मीटिंग रुम में बड़े उत्साह पूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। बैठक में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा और अतिरिक्त पंजीयक संतोश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहें तथा सदस्यों की समस्याओं को सुना और संतोष जनक कार्यवाही का आश्वासन भी दिया। सदस्यों ने पीआरजीआइ के पोर्टल संबधी समस्याएं उठाइ तथा एडिट का आप्शन देने की मांग की। जिसे समाचार पत्र पंजीयक ने स्वीकार कर लिया। बैठक में यूपी, उत्तराखण्ड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तैलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान महाराष्ट्र, गुजरात उडीसा से आए राष्ट्रीय पार्षदों ने भाग लिया और अपने विचार तथा छोटे समाचार पत्रों की समस्याएं उठाई। बैठक का संचालन महामंत्री शंकर कतीरा ने किया तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चंदोला ने किया। बैठक में भगवती चन्दोला, निशा रस्तोगी, श्याम सिंह पंवार, अतुल दीक्षित, प्रवीण पाटिल, आलोक अग्निहोत्री, गोपाल गुप्ता, कुंडलराव सेंडी रेड्डी, के स्वयं प्रकाश, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए बैठक के प्रारम्भ में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा, अपर प्रेम पंजीयक संतोष कुमार, गौहाटी के सुरेश गारोदिया, और दिल्ली के सुरेश अग्रवाल को शाल उढ़ा कर उनका स्वागत सम्मान किया गया।
संगीत को जीने वालों ने सजाई सुरों की शानदार महफिल
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर , गीत संगीत सुनने और जीने का शौक रखने वालों के लिए रविवार का दिन अत्यंत खूबसूरत रहा कार्यक्रम में कानपुर और आस पास के शहरों के संगीत में रुचि रखने वालों के लिए खुशनुमा त्यौहार जैसा था। कार्यक्रम के आयोजन का विचार रेलबाजार निवासी गोविंद सिंह का था, जिसे अति अल्प समय में बेहद खूबसूरत तरीके से क्रियान्वित करने का कार्य उनकी टीम खासकर बॉबी खान, टेक्निकल टीम के चौधरी भाई आदि ने बखूबी निभाया, मंच संचालन कर रहे बॉबी खान की फुलझड़ियों और माही के अंदाज ने सबका मन मोह लिया
माँ शारदे का आशीर्वाद लेकर और विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की कृपा पाकर कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर बांसुरी वादन और गोविंद जी के गायन से हुआ,
समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे समाजसेवा, मीडिया आदि से भी लोगों की सहभागिता रही। म्यूजिकल किसी भी कार्यक्रम की सफलता के दो मुख्य घटक गायक/गायिका और श्रोता होते है, और कहना पड़ेगा कि इस मामले में सारे श्रोता बेहद शालीन और अनुशासित दिखे । पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रोताओं ने गायक गायिकाओं का जोरदार उत्साहवर्धन किया।. इस मंच के तत्वावधान में पहला आयोजन होने के कारण आयोजकों में पहले जो असमंजस और डर था , थोड़ी ही देर में सभी के परफॉर्मेंस और सहयोग से दूर हो गया। पूरे दिन एक से बढ़कर एक नए और पुराने गीतों की वो स्वर लहरी बही कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह गया।
कार्यक्रम में राजेंद्र श्रीवास्तव , आशीष अवस्थी , दिवाकर शुक्ला, अतुल दीक्षित , गिरीश मारवाह ,आरती त्रिपाठी , अंजना अवस्थी , रेनू अग्रवाल , रेनू अवस्थी ,सुषमा श्रीवास्तव , प्रीति श्रीवास्तव, भारती दीक्षित, नीलम दीक्षित, स्मिता श्रीवास्तव आदि की धमाकेदार गीतों की प्रस्तुति को सबने खूब सराहा।
Read More »माय भारत 6 जून को त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- माय भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा

इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागी एकत्रित होंगे, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, इनोवेटर्स, उभरते नेताओं और उपलब्धि अर्जित करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात नेता, विशिष्ट अतिथि और युवा व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम भारत के भविष्य निर्माताओं को वर्तमान में उपलब्धि हासिल करने वालों को एकजुट करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास और सार्वजनिक नेतृत्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा।
इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद होगा, जिनमें बीओएटी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उद्यमी अमन गुप्ता, ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत, यूपीएससी अचीवर्स और राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी कंटेंट क्रिएटर जैसे मल्हार कलांबे , आरजे रौनक आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रभावशाली युवा भी होंगे, जिन्होंने अपने काम और सामाजिक प्रभाव से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। यह कार्यक्रम देश भर के उन उभरते युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित करेगा जिन्होंने खेल, उद्यमिता, शासन और कंटेंट निर्माण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है ।
इस गति को और मजबूत करते हुए, माय भारत हाल ही में “एक सप्ताह में ऑनलाइन क्विज में भाग लेने वाले सबसे अधिक उपयोगकर्ता” के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मिली मान्यता के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) क्विज के माध्यम से हासिल की गई थी। इस पहल में सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 5 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आधिकारिक मूल्यांकन अवधि के दौरान 390,812 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक क्विज़ पूरी की, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बना। यह उपलब्धि विकसित भारत @2047 के विजन में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी को दर्शाती है और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सार्थक भागीदारी के लिए एक मंच के रूप में माई भारत में युवा नागरिकों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करती है।
भारत के 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ , ‘माई भारत’ युवा सम्मेलन देश के युवाओं की आकांक्षाओं, उपलब्धियों और परिवर्तनकारी क्षमता का उत्सव मनाएगा। भारत भर से हजारों युवा परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाकर, यह सम्मेलन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए अमृत पीठी के सामूहिक संकल्प की पुष्टि करेगा और प्रधानमंत्री के विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगा।
सीएसए में आयोजित तीन दिवसीय उद्यमिता कॉनक्लेव में पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर में गोल्डन जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में कृषि विश्वविद्यालय एवं एमएसएमई विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कॉनक्लेव एवं क्षेत्रीय ट्रेड शो में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे।
पूर्व राष्ट्रपति के आगमन पर प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सचान ने उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके उपरांत उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने ओडीओपी/ओडीओसी, टेक्सटाइल, मुख्यमंत्री युवा योजना, एग्रीटेक, मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस सेक्टर से संबंधित विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर प्रदर्शित नवाचारों एवं उत्पादों की जानकारी प्राप्त की तथा उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया।
पूर्व राष्ट्रपति ने स्टार्टअप्स, स्थानीय उद्योगों एवं नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुलपति के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि इस क्षेत्रीय ट्रेड शो के माध्यम से युवाओं को उद्योगों के विकास की दिशा में नई प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में विधायक सुरेंद्र मैथानी, अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. कौशल कुमार, निदेशक प्रसार डॉ. वी. के. त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
Read More »भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने लखनऊ में अपने पहले रणनीतिक संचार सम्मेलन का आयोजन किया
अपने उद्घाटन भाषण में, सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने युद्ध की प्रकृति में आए मूलभूत बदलावों को रेखांकित किया, जिसमें अब सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी शामिल हैं। धारणा के प्रबंधन की बड़ी भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि धारणा वैधता को आकार देती है, वैधता असर पैदा करती है और असर से परिणाम तय होते हैं। उन्होंने नैरेटिव को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने और युद्ध की सीमा से नीचे के संघर्षों से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि रणनीतिक संचार प्रतिक्रियात्मक, छिटपुट या निजी असर पर आधारित नहीं रह सकता, बल्कि इसे संस्थागत, सिद्धांत-सहयोगी और क्षमता वाला होना चाहिए।
इस सम्मेलन में ‘उभरते संचार क्षेत्र में भविष्य की तैयारियों के लिए एक क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का संस्थागतकरण‘ विषय पर संस्थागत और राष्ट्रीय सुरक्षा आयामों पर एक विशेषज्ञ नीति-स्तर के सत्र का आयोजन किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज (सेवानिवृत्त), राजदूत यशवर्धन सिन्हा (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने सत्र को संबोधित किया।
‘उभरते बहु–क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार: रणनीतियां, संरचनाएं, प्रक्रियाएं और तैयारी’ विषयवस्तु पर एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें नीतिगत और कार्यान्वयन संबंधी दृष्टिकोणों को जोड़ा गया। राजदूत दिलीप सिन्हा, डॉ. शांतनु मुखर्जी, श्रीमती वीणा जैन और लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय के साथ सेवानिवृत्त नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने सत्र के दौरान महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि साझा कीं। ‘मन के क्षेत्र को आकार देना: रणनीतिक क्षेत्र में धारणा प्रबंधन’ और ‘सूचना की शक्ति और रणनीतिक संचार’ विषयवस्तु पर मीडिया के साथ पैनल चर्चा में धारणा प्रबंधन और सूचना की शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना के भीतर एक संस्थागत क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का परीक्षण करना और उभरते सूचना क्षेत्र में सिद्धांत, संरचनाओं, प्रक्रियाओं और तैयारियों पर कार्रवाही के लिए अंतर्दृष्टि पैदा करना था।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया
राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।
श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।
भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।
उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।
श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।
केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।
श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में श्री विजय गोयल द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को सम्मानजनक और भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि यह पुस्तक भारत के एक महानतम नेताओं में से एक, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को अर्पित उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे राजनेता का उत्सव है, जिनका जीवन और विरासत राष्ट्र को निरन्तर प्रेरणा देती है।
श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 12वें और 13वें लोकसभा के सदस्य के रूप में सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि 1974 में कोयंबटूर में उन्होंने एक जनसभा का आयोजन किया था, जिसे श्री वाजपेयी ने संबोधित किया था, इस स्मरण को साझा करते हुए उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों का अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद सदस्य से प्रधानमंत्री तक श्री वाजपेयी की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को प्रतिबिंबित करती है। तीव्र राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान भी, उन्होंने अपनी निष्ठा, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमापूर्ण आचरण के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान अर्जित किया।
श्री वाजपेयी के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो जैसी दूरदर्शी अवसंरचना पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी ने यह दिखाया कि ताकत और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं और वे हमेशा संवाद, लोकतंत्र और विकास को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते थे।
श्री वाजपेयी को एक उत्कृष्ट कवि, दूरदर्शी और संसद सदस्य के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके भाषण संसद और देश दोनों को प्रभावित करते थे और उनमें बिना अप्रिय हुए असहमति जताने की दुर्लभ क्षमता थी — एक ऐसा गुण, जो सार्वजनिक जीवन में आवश्यक है।
कॉफी टेबल बुक की रचना के लिए श्री विजय गोयल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्य दुर्लभ तस्वीरों, व्यक्तिगत किस्सों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से इतिहास को जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक देशभर में घरों और संस्थानों तक पहुंचेगी, विशेष रूप से नई पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी।
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान; हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष; राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े; पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी; और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) में क्षमता में वृद्धि 50,000 मेगावाट से अधिक हो गई है
चालू वित्त वर्ष 2025-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान, सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52,537 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें से 39,657 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से जोड़ी गई है जिसमें 34,955 मेगावाट सौर ऊर्जा और 4,613 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल हैं।
यह एक वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि को दर्शाता है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान प्राप्त किए गए 34,054 मेगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है।
इसके अलावा, इसका यह भी तात्पर्य है कि 2025-26 (31.1.2026 तक) के दौरान देश की कुल स्थापित क्षमता में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
31 जनवरी 2026 तक, भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 520,510.95 मेगावाट है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: 248,541.62 मेगावाट
- गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता: 271,969.33 मेगावाट
- परमाणु ऊर्जा: 8,780 मेगावाट
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: 263,189.33 मेगावाट
मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम
दोस्तों ! महकता हुआ मखमली गुलाब कुदरत की दी हुई बेहतरीन सौग़ात हमें फूल के रूप में मिली है जिसे वेलेंटाइन के मौक़े पर बहुत से चाहने वाले अपने प्यार का इज़हार करने के लिये ढेरों,
लाल गुलाब देंगे और लेंगे,और बहुत कुछ कहा भी जाएगा जैसे कि “मेरी ज़िंदगी का खूबसूरत गुलाब हो तुम..,एक नाज़ुक सा एहसास ,महकता हुआ जज़्बात हो तुम “🌺…. और कुछ लोग ऐसा भी कहेंगे । “ज़िन्दगी की मेरी ज़रूरत हो तुम ,गुलाब तो खूबसूरत हैं ही मगर गुलाब से भी हसीन हो तुम”… 🌺 और कुछ तो प्रेमी को खुदा का ही ख़िताब दे डालेंगे।
“ सोचते हैं गुलाब दे कर दिल का हाल दिखा दें उन्हें..तुम ख़ुदा हो हमारे लिए ,ये भी बता दें उन्हें…
🌺 वगैरह वगैरह ….!!ढेरों कविताएँ, ढेरों शायरी कही जायेगी…मेरी शुभकामनाएँ है उन के लिए जो अपने अपने पार्टनर या प्रेम की तालाश में है .. कुछ का इंतज़ार आज ख़त्म होगा ,कईयो की तालाश अभी जारी रहने वाली होगी।ये सिलसिला तो सालों से चलता आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा…. पर दोस्तों ! गुलाब उसी को देना ,जिसको आप दिल से चाहते है..जिसके साथ आप हर दुख सुख बाँटना चाहते है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण, संवेदनशील नाजुक पल होता है .. इसकी मर्यादा को बनाए रखना ज़रूरी है.. ये फ़ैसला कुछ पलों का नहीं बल्कि उम्र का होना चाहिए । पर अफ़सोस तो ये है !!असल में हमें पता ही नहीं कि प्रेम क्या है। चलिए पहले समझते है प्रेम को …प्रेम जीवन में बहुतो से होता है जैसे कि मांबाप बहन भाई.. अपने दोस्त ,सहेलियों ,अपने सहयोगियों से ,पड़ोसियों से ..रिश्तेदारों से ,देश से ,यहाँ तक की कथा कहानियों से प्रेम हो जाता है ,और तो और भगवान से भी सभी प्रेम ही करते हैं इश्क़ नही ।
🌺प्रेम का मतलब है (लगाव )
…याद रखे अगर एक से ज़्यादा लोगों से आप इश्क़ का दावा करते है समझ जाईये …ये सिर्फ़ लगाव या प्रेम हो सकता है “इश्क़ नही।” इश्क़ तो किसी विरले के हिस्से में आता है। इश्क़ अलग अहसास है .. वो सिर्फ़ एक से ही होगा ,दूसरे से नही .. जब इश्क़ मिलता है तो किसी दूसरे का कोई स्थान रह ही नही जाता। न ही उसकी जगह कोई ओर ले सकता है। इश्क़ तो वो शय है ,वो मिले न मिले पर हम उसी के हो कर रह जाते है अपनी ही मर्ज़ी से। उसे हासिल करना कोई मायने नहीं रखता।वो पास न होकर भी करीब ही महसूस होता है।जहाँ आशिक़ की सिर्फ़ इक झलक पर ही अपनी सारी ज़िंदगी गुज़ार दी जाती है। इसका उदाहरण कृष्ण दीवानी मीरा बाई जी थी.. “जहाँ रूह कह उठती है कि हम उसके बग़ैर संसार को विरान लिखते है ,”और हम कितनी आसानी से कह देते है कि हमें इश्क़ हुआ है ,मगर सच यही है कि हम सब अभी प्रेम में ही है। कोई विरला आशिक ही इस इश्क़ की पाकीज़ा गली से गुज़रता हैं ।आमतौर पर होता क्या है .. बस जवान हुए ,कालेज मे कोई लड़की या लड़का अच्छा लगा तो सोच लिया कि हमे प्रेम हो गया है .. बस गुलाब दे दो और अपने मन की बात कह दो .. और फिर कुछ देर के बाद शादी… और दूसरी ओर इश्क़ जो इतना सस्ता नहीं कि हर किसी को,और किसी से भी हो जाए..न ही इतना आसान है कि इसे हर कोई पा सके।ये मिलेगा उसे ही जिसमे शिद्दत होगी ,गहराई होगी ,सब्र होगा,..इश्क़ खुद तुमसे तुमको माँगता है। क्या कर सकते हो खुद को किसी के हवाले ? दोस्तों!! ये कोई टाइम पास या मस्ती करना नहीं होता।इश्क़ नाईट क्लबों या चकाचौंध से भरी दुनिया में नहीं मिल सकता। इश्क़ गहरा इसीलिए है क्योंकि वो मर्यादित है ,सीमाबद्ध है ,उसके अपने दायरे है और वो दायरों को तोड़ना नही जानता,अपनी या सामाज की खींची हुई लकीर में ही रहता है। इश्क़ आनन्दमय भी हो सकता है और उदासी,बैचेनी बिछोह का भी रूप हो सकता है। प्रेम अगर आसानी से मिल जाये, तो
उसमें गहराई नहीं होगी। मुश्किल से मिला प्रेम मूल्यवान होगा और वही प्रेम धीरे धीरे इश्क़ का रूप होने लगता है….
“इश्क़ बँधता नहीं, न ही इसे
बांधने की कोशिश ही नही करनी चाहिए …जो बाँधा जाये वो इश्क़ नही .…वो तो क़ैद होगी ..इश्क़ तो खुद ब ख़ुद बंध जाता है और खुद को किसी से बांधें रखना
ही इश्क़ है “इश्क़ बिल्कुल भगवान और भक्त जैसा है भगवान चाहे दिखे न दिखे.. बात करे न करे .. मिले ना मिले..चाहे जो भी दे दे .. भक्त उसकी हर रज़ा में राज़ी रहता है। ऐसी इश्क़ की अवस्था में भगवान के देह स्वरूप की भक्त को कोई ज़रूरत महसूस नही होती।वो उसे अपना मान चुका होता है..भक्त कहता है कि आप कहीं भी हो ..दुनिया के किसी भी कोने मे हो …हे भगवन ! मैं तुम्हारा हूँ ।हर इंसान जो प्रेम की तलाश मे है उसे सोचना होगा कि क्या वो ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार है,क्योंकि प्रेम अकेला नहीं आता ..बहुत कुछ अपने साथ लेकर आता है।हमारी माँ बाप की जब शादी हुई थी उन लोगों ने प्रेम को निभाया .. संसार को आगे बढ़ाया …संस्कारों को बांटा …क्या हम संस्कारों को आगे बढ़ा पाएंगे .. नई जनरेशन से मैं यही कहूँगी अगर शादी करनी है तो पहले सोचिये।
लडकियों से भी कह रही हूँ कि शादी सिर्फ़ लाखों का लहंगा पहनना नहीं होता ,महंगा मेकअप करवाना नहीं होता ..शादी के साथ बहुत सी ज़िम्मेदारियाँ आती हैं जो हमें निभानी होती हैं।पहले उसके लिए खुद को तैयार करे .. फिर गुलाब का फूल देने और लेने की सोचे।आज की जनरेशन को अगर आज प्यार होता है तो दो चार दिनों में अपनी सहूलियत के हिसाब से एक दूसरे को बलोक भी कर देते है .. ये कैसा प्रेम है जो मात्र बलोक करने से सब ख़त्म हो जाता है..जो लड़को की जेब को पहले देखता है..उसकी कौन सी गाड़ी है .. उसका कामकाज क्या है …उसका क्या कोई अपना घर है भी या नहीं …ये प्रेम कैसे हो सकता है।
ये तो एक व्यापार ही कह सकते है और हम कह देते है कि हम प्यार मे है ।
हमारे बुजुर्गों ने भी शादी के बाद मिल कर घर बनाये थे।पहले इस तरह के सवाल नहीं हुआ करते थे।अगर पहले ही आप को बना बनाया सब कुछ मिल जाएगा तो आप क्या करेंगे। ..
लड़के भी लड़की की ब्यूटी को ही देखते है ,गोरे रंग पर मर मिटते है चाहे लड़की मे घर सँभालने का कोई भी गुण न हो …चेहरे से ज़्यादा सीरत पर ध्यान देना ज़रूरी है
अंतर्मन को पढ़ना ज़रूरी है
रूप आज है कल नहीं रहेगा…
तो फिर क्या होगा.प्रेम भी दो चार महीने ..सालो में हवा में कहीं उड़ जायेगा..नई जनरेशन को जरा सोच विचार करना होगा।
जब लड़कियां आजकल कमा रही है तो क्यों आप लड़कों से इतनी अपेक्षाएँ रखती है..क्यों लड़को पर इतना बोझ डालती है।अगर प्रेम करे तो तैयार भी रहे, मिल जुल कर जीवन जीने के लिये।
गुलाब देने से या लेने से पहले सोचिये ज़रूर…,
पहचाने खुद को ,परखें अपने प्रेम को …क्या वाक़ई में आप प्रेम में हैं ? क्या सामने वाले में भी आप के लिए वही चाहत है जो आप उसके लिए महसूस करते है ?क्या सच में आप उम्र भर प्रेम निभा पाएंगे ?
या फिर आप सिर्फ़ ट्रेंड के साथ चल रहे है। सोचियेगा ज़रूर …..आप की दोस्त ✍️ स्मिता
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