Breaking News

महिला जगत

एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान,वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया ।महाविद्यालय की मुख्य प्रॉक्टर कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो गार्गी यादव,डॉ प्रीति सिंह तथा डॉ शैल बाजपेयी ने माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस अवसर पर इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाओं का योगदान “ तथा अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर पोस्टर एवं मॉडल बनाकर छात्राओं ने प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया । छात्राओं ने ५० पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किये और उनके विषय में बताया ।इस प्रदर्शनी का मूल्यांकन कैप्ट ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे और प्रो मीनाक्षी व्यास ने किया ।

परिणाम इस प्रकार रहा –बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर प्रथम कीर्ति गुप्ता, द्वितीय- सृष्टि पाल तथा अंजलि सिंह, तृतीय-आयना ,सांत्वना-इशिता 

बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर –प्रथम-काजोल गौतम, द्वितीय-ज़िया, तृतीय-सदा 

बी एस सी षष्ठ सेमेस्टर –प्रथम समरीन अनवर, द्वितीय मुस्कान, तृतीय एकता तथा लक्ष्मी सभी विजेता छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागी छात्राओं को उत्साह वर्धन करते हुए अल्प पुरस्कार दिए गए। 

कार्यक्रम में डॉ प्रीता अवस्थी ,डॉ प्रीति यादव, डॉ अनामिका डॉ समीक्षा डॉ श्वेता आदि उपस्थित रहे  अवधेश तथा रेखा ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

Read More »

राष्ट्रपति ने पीडी हिंदुजा अस्पताल के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुंबई के लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं कि सभी नागरिक स्वस्थ रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। देश भर में 180,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्राप्त होती है। मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को बीमारियों से बचाने में योगदान दे रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हालांकि, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। “जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ” अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि उचित चिकित्सा देखभाल समय-सीमा के भीतर प्रदान करने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए, प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटरों के साथ-साथ, गंभीर दुर्घटनाओं और चिकित्सा आपात स्थितियों में जीवन बचाने के लिए जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और समुचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना उन्हें स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। नागरिकों का स्वास्थ्य एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सबसे गरीब लोगों को भी समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल मिले। ‘सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराना हम सभी का मिशन होना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इनकी भूमिका और भी बढ़ेगी और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। भारत सरकार नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। इंडियाएआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है। हमारे देश में निर्मित दवाएं विश्व भर के लोगों के इलाज में योगदान दे रही हैं। हालांकि, हम अभी भी कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। ये आयातित उपकरण और दवाएं आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए देश में दवाओं और उपकरणों का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने चिकित्सा जगत और व्यापार जगत से इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नागरिक एक मूलभूत आवश्यकता हैं। नागरिक तभी स्वस्थ रह पाएंगे जब उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हमारे नागरिकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में अधिक मान्यता प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

Read More »

“स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण देना राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेश है: शिवराज सिंह चौहान

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को हैदराबाद में वित्तीय साक्षरता और लचीलेपन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में  नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया और ग्रामीण भारत में वित्तीय जागरूकता को मजबूत करने, घरेलू लचीलेपन को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

इस सम्मेलन में वित्तीय साक्षरता, घरेलू स्तर पर वित्तीय सुदृढ़ता और आजीविका एवं उद्यमों के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों के दौरान  निरंतर वित्तीय शिक्षा, व्यापक वित्तीय समावेशन और मजबूत संस्थागत समन्वय के महत्व पर बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों जैसी सामुदायिक संस्थाओं को वित्तीय सेवाएं और वित्तीय साक्षरता संबंधी हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए विश्वसनीय और विस्तार योग्य मंच के रूप में मान्यता दी गई।

21 फरवरी 2026 को हैदराबाद में 25वीं केंद्रीय स्तरीय समन्वय समिति (सीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री और सीएलसीसी के अध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इसमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और तेलंगाना सरकार की माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने भी भाग लिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा भी शामिल थे। तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव श्री एन. श्रीधर और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं एसईआरपी तेलंगाना की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती दिव्या देवराजन शामिल थीं, साथ ही नाबार्ड, आरबीआई, बैंकों, एशियाई विकास बैंक और विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख जानकारियों के सारांश के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण द्वारा “डेय-एनआरएलएम की रणनीतिक अंतर्दृष्टि और आगे का रोडमैप” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, जिनमें बैंक सखी, बीसी सखी, वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और बीमा सखी शामिल हैं, के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, स्वयं सहायता समूहों के लिए बैंक संपर्क को मजबूत करने और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण देना जोखिम नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से, “दीदी” लखपति से करोड़पति बन सकती हैं, जिससे महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन में तेजी आएगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय पहुंच को मजबूत करने, उद्यम वित्तपोषण का विस्तार करने और ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिम संरक्षण तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन के दौरान तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया:

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत उद्यम बैंक ऋण प्रणाली*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए यूपीआई आधारित क्रेडिट लाइनें*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता पर डिजिटल मॉड्यूल*

इन पहलों का उद्देश्य ऋण वितरण को सरल बनाना, डिजिटल वित्त को अपनाने को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के बीच वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने वित्तीय समावेशन, उद्यम विकास और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देने में सामुदायिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब उद्यम-नेतृत्व वाली सशक्तिकरण की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें वित्त तक पहुंच से ध्यान हटाकर उत्पादक ऋण, उद्यम प्रोत्साहन और सतत वित्तीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने कहा कि हालांकि तेलंगाना देश का सबसे युवा राज्य है, लेकिन यहां सबसे पुराना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) है, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिशन के नेतृत्व में किए गए हस्तक्षेप तेलंगाना की महिलाओं को उद्यम निर्माण के अगले चरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

इस कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकिंग संस्थानों को पुरस्कार देकर वित्तीय संस्थानों के योगदान को भी मान्यता दी गई।

बैठक का समापन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

Read More »

बाल विवाह: भारतीय समाज की स्थानिक-सामाजिक चुनौती

भारत में बाल विवाह एक ऐसी सामाजिक और भौगोलिक चुनौती है, जो आधुनिक विकास और शिक्षा विस्तार के बावजूद आज भी अनेक समुदायों में गहराई तक जड़ें जमाए हुए है। यह प्रथा विशेष रूप से लड़कियों के जीवन को प्रभावित करती है—उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अवसर, क्षमता और आत्मनिर्भर भविष्य, सभी पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) के अनुसार 20–24 वर्ष आयु-वर्ग की 23.3% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले ही हो चुका था। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि कानूनी निषेध और नीति-हस्तक्षेपों के बावजूद सामाजिक-जड़ता, परंपरा और असमान विकास के कारण बाल विवाह अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। इसके स्थानिक पैटर्न भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्य, जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़, अभी भी बाल विवाह की उच्चतम दर वाले क्षेत्रों में आते हैं। इन राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य अवसंरचना का कमजोर होना, ग्रामीण निर्धनता का व्यापक होना, सामाजिक-पितृसत्तात्मक मान्यताओं का प्रबल होना और महिलाओं की निम्न साक्षरता दर जैसे कारक इस कुप्रथा को बनाए रखते हैं। कम आयु में विवाह लड़कियों को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अनेक जोखिमों के सामने ला देता है—कम उम्र में गर्भधारण से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर बढ़ती है, कुपोषण और एनीमिया की समस्याएँ गंभीर रूप ले लेती हैं और प्रजनन स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है। शिक्षा रुक जाने से लड़कियों के कौशल-विकास, रोजगार और आजीविका के अवसर भी सीमित हो जाते हैं, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति बाधित होती है। भारतीय न्याय संहिता (2023) ने 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी में रखा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी विभिन्न याचिकाओं में राज्यों को बाल विवाह पर कड़ा नियंत्रण लागू करने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार द्वारा 2025 तक बाल विवाह की दर को 23.3% से घटाकर 10% तक लाने और 2030 तक देश को बाल विवाह-मुक्त बनाने का लक्ष्य भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विवाह पंजीकरण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देना, समुदायों और धार्मिक संस्थानों को जागरूकता अभियानों में शामिल करना, महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाओं में सक्षम बनाना, तथा बाल संरक्षण एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना जैसे बहुआयामी उपाय लागू किए जा रहे हैं। समग्रतः, बाल विवाह केवल एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी एक गहरी सामाजिक-संरचनात्मक समस्या है, जिसका समाधान तभी संभव है जब सरकार, समाज और परिवार—तीनों स्तरों पर सतत और सामूहिक प्रयास किए जाएँ।~डॉ रश्मि गोयल 

Read More »

छात्राओं को शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. सुमन के पर्यवेक्षण में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य छात्राओं का शैक्षिक एवं व्यवसायिक निर्देशन करना था। कार्यक्रम में सी. एस. जे. एम. यूनिवर्सिटी के बी. एड. विभाग की प्रवक्ता डॉ. स्नेह पाण्डेय एवं डॉ. प्रिया तिवारी ने छात्राओं को विश्वविद्यालय में चलाए जा रहे बी. एड. एवं अन्य कोर्सेज की जानकारी प्रदान की एवं छात्राओं की जिज्ञासा का निवारण किया।
कार्यक्रम का संयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग प्रभारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाशास्त्र विभाग की असि. प्रो. ऋचा सिंह, डॉ. अनामिका राजपूत, डॉ. रेनू शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहे।

Read More »

एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित ल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में एमएसएमई–टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम(Entrepreneurship Awareness Program) का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुमन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युवाओं के लिए उद्यमिता आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो. प्रीति पांडेय ने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा एमएसएमई द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हृदयनारायण पांडेय, तनमय तिवारी, सपना रॉय एवं आदित्य निगम उपस्थित रहे।
सह-आयोजक मंडल में डॉ. शैल बाजपेयी, डॉ. रोली मिश्रा एवं डॉ. कोमल सरोज का विशेष योगदान रहा। मुख्य वक्ताओं ने उद्यमिता के महत्व, स्टार्टअप की संभावनाओं, व्यवसाय स्थापना की प्रक्रिया तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रो.अलका टंडन प्रोफेसर रेखा चौबे, प्रो.मीनाक्षी व्यास प्रो.निशा वर्मा। प्रो. गार्गी यादव,पूजा गुप्ता डॉ रेशमा, डॉ प्रीत अवस्थी डॉक्टर शुभा बाजपेई आदि उपस्थित रहे।

Read More »

एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन, पोषण एवं खाद्य सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन समारोह दिनांक 17 फ़रवरी 2026 को महाविद्यालय प्राचार्या प्रोफेसर वन्दना निगम के के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। समापन दिवस का मुख्य विषय “पोषण एवं खाद्य सुरक्षा अभियान” रहा, जिसमें स्वयंसेविकाओं ने बस्ती की महिलाओं एवं बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छ भोजन, एनीमिया से बचाव तथा कुपोषण के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक और संवाद सत्र आयोजित किए गए। स्वयंसेविकाओं ने बताया कि हरी सब्ज़ियाँ, दालें, दूध, फल और स्वच्छ पानी का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। साथ ही खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के उपाय भी बताए गए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना समिति की वरिष्ठ सदस्या डॉ अंजना श्रीवास्तव ने कहा कि सही पोषण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है और युवाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान और प्रभावी बनता है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने बताया कि शिविर के दौरान की गई गतिविधियों स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ए आई/ डिजिटल लिटरेसी, साइबर सिक्योरिटी, नशामुक्त युवा – नशा मुक्त भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए।समापन अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयंसेविकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अंत में सभी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की शिक्षिकाओं डॉ . साधना सिंह, डॉ . दीप्ति शुक्ला, डॉ . ज्योत्सना पाण्डेय, बसंत कुमार समस्त स्वयंसेविकाओं, क्षेत्रीय नागरिकों तथा मीडिया बंधुओं का विशेष योगदान रहा।कार्यक्रम अधिकारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

Read More »

एनएसएस विशेष शिविर एआई उपयोग शपथ एवं मतदाता जागरूकता अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 16 फरवरी दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर के षष्टम् दिवस पर एआई जिम्मेदार उपयोग की शपथ तथा मतदाता जागरूकता से संबंधित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रथम सत्र का शुभारंभ प्रातः व्यायाम एवं योगाभ्यास से हुआ। इसके उपरांत इंडिया ए आई मिशन द्वारा आयोजित ए आई समिट के अंतर्गत जिम्मेदार एआई उपयोग हेतु अधिकतम प्रतिज्ञाओं का रिकॉर्ड बनाने के प्रयास में एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने “AI for All” की शपथ ली। स्वयंसेविकाओं ने डिजिटल तकनीक के सुरक्षित, नैतिक एवं सकारात्मक उपयोग का संकल्प लिया।

स्वल्पाहार के उपरांत द्वितीय सत्र में स्वयंसेविकाओं ने बस्ती क्षेत्र में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। लोगों को मतदान के महत्व, मतदाता पहचान पत्र बनवाने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। रैली के माध्यम से “हर वोट की कीमत”, “मतदान ज़रूरी–लोकतंत्र मज़बूत” जैसे नारों से लोगों को प्रेरित किया गया।इस अवसर पर पोस्टर एवं स्लोगन प्रदर्शनी आयोजित की गई तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बालिका शिक्षा, महिला सम्मान और एआई के जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। स्वयंसेविकाओं ने बस्तीवासियों से संवाद कर प्रत्येक निर्वाचन में मतदान करने की अपील एवं शपथ भी दिलाई।कार्यक्रम में 50 स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बस्तीवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए महिला सम्मान, डिजिटल जिम्मेदारी और मतदान जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। शिविर को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. साधना सिंह, बसंत कुमार तथा ग्रुप लीडर्स वैष्णवी, सिमरन, वासु, वंशिका एवं शीतल का विशेष सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान के साथ षष्टम् दिवस का समापन किया गया।

Read More »

डी.ए-वी. कॉलेज में प्राथमिक उपचार एवं सीपीआर विषयक ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। डी ए वी कॉलेज में रीजेंसी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग (रीजेंसी हेल्थकेयर लिमिटेड की इकाई) के सहयोग से प्राथमिक उपचार (First Aid), सीपीआर (CPR) एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर परामर्श विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक कौशलों के प्रति जागरूक करना तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार दीक्षित ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक दक्षताओं से भी सशक्त करते हैं।

कार्यक्रम में विशिष्ट वक्तव्य प्रोफेसर अनुराग सक्सेना द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने प्राथमिक उपचार एवं सीपीआर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर दी गई उचित सहायता किसी भी व्यक्ति के जीवन की रक्षा कर सकती है।

कार्यक्रम की विषय-वस्तु का प्रस्तुतीकरण डॉ. सरस द्वारा किया गया। रीजेंसी संस्थान के नर्सिंग विशेषज्ञ श्रीधर एवं ज्योति ने सीपीआर तथा प्राथमिक उपचार की प्रक्रियाओं का विस्तृत एवं व्यवहारिक विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही, करियर विशेषज्ञ जीशान ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध विविध अवसरों की जानकारी दी।  इस अवसर पर डॉ. भावना श्रीवास्तव, डॉ. सुनीत कुमार सक्सेना, डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी एवं डॉ. अरुण कुमार तिवारी सहित विभिन्न संकायों के अनेक शिक्षक ऑनलाइन रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन नीतू पाण्डेय, कोमल यादव एवं विशाल कुमार द्वारा किया गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशुतोष कुमार झा ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की तथा कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Read More »

नए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने हेतु एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में तीन दिवसीय शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने हेतु जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा निर्गत आदेश के परिपालन में एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, कानपुर में प्राचार्या प्रो. सुमन के पर्यवेक्षण में दिनांक 12/02/2026 से 14/02/2026 तक तीन दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया।
दिनांक 12/02/2026 को शिविर के उद्घाटन सत्र में प्राचार्या द्वारा महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग की प्रभारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर को मतदाता जागरूकता अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया साथ ही नोडल अधिकारी सहित छः सदस्यीय ‘ चुनाव साक्षरता क्लब (ELC) का गठन किया गया।
प्रथम दिवस प्राचार्या ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करने के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम में नए मतदाताओं के पंजीकरण हेतु फॉर्म 6 वितरित किए गए। नोडल अधिकारी ने सर्वप्रथम फॉर्म -6 को भरने एवं पहचान पत्र तथा हाईस्कूल की मार्कशीट की छायाप्रति के साथ फार्म 6 को जमा करने के सम्बंधित जानकारी प्रदान की।
दिनांक 13/02/2026 को भी मतदाता जागरूकता शिविर में छात्राओं ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया। शिविर के दूसरे दिन फॉर्म 6 जमा करने के साथ साथ नए पंजीकरण हेतु फॉर्म वितरित भी किए गए।
शिविर के समापन सत्र में दिनांक 14/02/2026 को भी शिविर में छात्राओं ने सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। प्राचार्या प्रो. सुमन ने नोडल अधिकारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर एवं अन्य ELC सदस्यों डॉ. रश्मि गुप्ता ( सहप्रभारी), असि. प्रो. ऋचा सिंह, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ संगीता सिंह एवं असि. प्रो. प्रीति यादव को शिविर के सफल संचालन हेतु बधाई दी।
मतदता जागरूकता हेतु आयोजित तीन दिवसीय शिविर का उद्देश्य नववयस्क नागरिकों को एक परिपक्व मतदाता बनाकर निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना था।

Read More »