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पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।

इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।

ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।

पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।

एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज कानपुर ने अंतर महाविधालयी ताइक्वांडो प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन विश्व विद्यालय के बहु उद्देशयीय सभागार में आयोजित किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्राचार्या प्रो सुमन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में सम्पन्न हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पूमसे खिलाड़ी राम गोपाल एवं बलराम यादव उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी दक्षता, आत्मसंयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के खेल सचिव डॉ. निमिषा सिंह कुशवाहा, सह-प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे, की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और क्योरुगी एवं पूमसे दोनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे — पूमसे (व्यक्तिगत) वर्ग में श्वेता तिवारी (CSJMU) ने प्रथम, ऋषिका (DAV) ने द्वितीय, दुर्गा त्रिवेदी (BND) ने तृतीय तथा शालिनी गुप्ता (DGPG) ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। टीम पूमसे में CSJMU की श्रृष्टि वर्मा, श्वेता तिवारी एवं सानिया गौतम की टीम ने प्रथम स्थान अर्जित किया, जबकि दुर्गा त्रिवेदी (BND), दिव्या मौर्य (DAV) एवं रिया सुदर्शन (BND) की टीम द्वितीय रही। क्योरुगी के अंडर 46 किग्रा वर्ग में प्रभा सिंह (KSDDD PG) प्रथम एवं पायल (PD महिला) द्वितीय रहीं; अंडर 49 किग्रा वर्ग में सानिया गौतम (CSJMU) प्रथम एवं अर्चिता बिरहा (PPN) द्वितीय रहीं; तथा अंडर 53 किग्रा वर्ग में शिमरन कनौजिया ( बाबू सिंह) प्रथम एवं ऋषिका (DAV) द्वितीय स्थान पर रहीं। समग्र प्रदर्शन के आधार पर CSJMU को ओवरऑल चैंपियन तथा बाबू सिंह महाविद्यालय को रनर-अप घोषित किया गया।

प्रतियोगिता अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।

सम्पूर्ण कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रीती पाण्डेय ने सभी ‘ अतिथियो, खिलाडियो, मिर्णायक मण्डल का आभार व्यक्त किया ।

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युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के खेल पेशेवरों को तैयार करने हेतु व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) ने आज युवा प्रतिभाओं को निखारने और   भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने हेतु एक व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने का प्लेटफॉर्म बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की।

‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और उसके स्वायत्त निकायों के लिए व्यापक इंटर्नशिप नीति’ कॉलेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मंत्रालय और उसके स्वायत्त निकायों में सार्थक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी, जिससे उन्हें खेलों से जुड़े शासन एवं  प्रशासन और संबंधित पेशेवर क्षेत्रों का सीधा अनुभव हासिल हो सकेगा।

केन्द्रीय  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यह पहल युवा प्रतिभाओं  को भारत की खेल यात्रा में सार्थक योगदान देने हेतु सशक्त बनाएगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “भारत के खेल इकोसिस्टम को बदलने के लिए कुशल पेशेवरों और युवा प्रतिभाओं के साथ-साथ मजबूत संस्थागत समर्थन की जरूरत है। इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के जरिए, हम अपने युवाओं के लिए खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन के दरवाजे खोल रहे हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके और वे खेल के जरिए राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक असर डाल पायें।”

नई नीति के तहत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) जैसे इसके मुख्य संस्थानों में हर वर्ष 452 इंटर्नशिप प्रदान की जायेंगी।

इस पहल का उद्देश्य खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन, खेल विज्ञान, डोपिंग-रोधी, प्रतियोगिता  प्रबंधन और एथलीट खेल सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिभाओं का एक मजबूत समूह तैयार करना है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति 2025 के उद्देश्यों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें युवा सशक्तिकरण, क्षमता विकास और खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने पर जोर दिया गया है।

यह नीति भारत के उस दीर्घकालिक विजन का भी समर्थन करती है, जिसमें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक ऐसा खेल इकोसिस्टम विकसित करना है जो बेहतरीन प्रदर्शन को बनाए रख सके और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सके।

डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि यह कार्यक्रम पेशेवर रूप से प्रशिक्षित जनशक्ति की बढ़ती जरूरत को पूरा करता है, क्योंकि भारत अपने खेल अवसंरचना का विस्तार कर रहा है, शासन संबंधी सुधारों को मजबूत कर रहा है और वैश्विक स्तर पर खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ा रहा है।

प्रशिक्षुओं को व्यवस्थित ऑनबोर्डिंग, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और नीतियां  बनाने एवं उन्हें लागू करने का वास्तविक अनुभव मिलेगा। वे खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप (टैग) जैसी प्रमुख पहलों में सीधे योगदान देंगे और साई स्टेडियम, क्षेत्रीय केन्द्रों (आरसी) और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों (एनसीओई) में अनुभव प्राप्त करेंगे।

ये इंटर्नशिप खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, प्रतियोगिता संचालन, मीडिया एवं संचार, कानूनी मामले, आईटी प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन और डोपिंग-रोधी सहित 20 कार्यात्मक क्षेत्रों में होंगी। खेल विज्ञान अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, आंकड़ों के विश्लेषण और एथलीटों को वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नाडा में रखे गए इंटर्न डोपिंग-रोधी  जागरूकता, कानूनी अनुपालन, मामलों का प्रबंधन और नीतिगत सहायता में सहयोग करेंगे, जबकि एनडीटीएल में काम करने वालों को नमूनों का विश्लेषण एवं शोध सहित उन्नत प्रयोगशाला-आधारित डोपिंग-रोधी प्रक्रियाओं का अनुभव मिलेगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी, डिजिटल जानकारी, रचनात्मकता और उद्यमिता  को बढ़ावा देना है। साथ ही, ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम तैयार करना है जो नीति, अवसंरचना विकास, मीडिया संपर्क, वैधानिक ढांचे, खेल विज्ञान और खेल प्रबंधन में योगदान दे सकें।

एक केन्द्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर वर्ष भर्ती के दो चक्र होंगे; जनवरी और जुलाई में, जिससे पारदर्शिता, समावेशन और योग्यता पर आधारित चयन सुनिश्चित होगा।

यह व्यापक इंटर्नशिप कार्यक्रम स्वच्छ खेल, पारदर्शी शासन और वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो निष्पक्ष खेल, एथलीटों के कल्याण और खेल प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

इस व्यापक इंटर्नशिप नीति के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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प्यार की महक

प्यार की महक कुछ भीनी-सी, गहरी-सी,

जो हृदय को दे अद्भुत स्पंदन।

ऐसा स्पर्श, जो पूरे जीवन को

नव-सृजन की ओर ले जाए।

कार्य की नई लय से

जीवन महके—बिखरे नहीं।

महकते कदमों के संग

उच्च दिशाओं की ओर बढ़ते हुए,

पूरा करने के दृढ़ संकल्प में

रास्ता अपना बनता है।

पथ पर आगे बढ़ते हुए

प्यार का उजाला फैलता है,

राहें सरल होती जाती हैं।

बाधाओं के बीच उभरता एक सरोवर,

जो सुन्दर कर्मों से

और गहरी आशाओं से भर जाता है।

मन की कल्पनाओं को मिलता है आकार,

कल्पना—जो भीतर की शाश्वत ज्योति है।

यही है प्यार का रंग।

और इस रंग को संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी।

~डॉ रश्मि गोयल

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भारत और सऊदी अरब ने सांस्कृतिक सहयोग समझौता पर हस्ताक्षर किए

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और सऊदी अरब के संस्कृति मंत्री प्रिंस बद्र बिन अब्दुल्ला बिन फरहान अल सऊद ने 9 नवंबर 2025 को रियाद में सांस्कृतिक सहयोग पर द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य कला, विरासत, संगीत और साहित्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देकर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करना है। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, नियामक और नीतिगत अनुभवों को साझा करने और त्योहारों एवं आयोजनों में भागीदारी को सुगम बनाने पर आधारित है। यह समझौता सांस्कृतिक संस्थानों के बीच संचार को भी प्रोत्साहित करता है और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से संबंधित ज्ञान और व्यवहार के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

दोनों मंत्रियों ने, हस्ताक्षर समारोह से पहले द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने और सांस्कृतिक क्षेत्र में संयुक्त सहयोग गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। भारत और सऊदी अरब के बीच दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी संपर्क पर आधारित गहरे ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान करते हुए दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों में बढ़ती गति को और बल मिलेगा।

दोनों संस्कृति मंत्री भारत-सऊदी अरब सामरिक भागीदारी परिषद (एसपीसी) के अंतर्गत पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग की नवगठित मंत्रिस्तरीय समिति के सह-अध्यक्ष भी हैं। इस समिति की घोषणा अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सऊदी अरब के जेद्दा की राजकीय यात्रा के दौरान की गई थी। ध्यान रहे, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग पर मंत्रिस्तरीय समिति के गठन के बाद से दोनों संस्कृति मंत्रियों की यह पहली द्विपक्षीय बैठक है।

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इफ्फी 2025 में भारत और दुनिया भर से सात निर्देशकों की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्में दिखाई जाएंगी

अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में बेहतरीन नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव  (इफ्फी) 2025 में निर्देशक के बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म अवॉर्ड के लिए विशेष रूप से चुनी गई पांच अंतरराष्ट्रीय और दो भारतीय फ़िल्में दिखाई जाएंगी।

विजेता को प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक, ₹10 लाख का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।

सिनेमा के दिग्गजों की जानी-मानी जूरी विजेता का फैसला करेगी। जूरी की अध्यक्षता मशहूर भारतीय फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा करेंगे। उनके साथ ग्रीम क्लिफर्ड (संपादक और निर्देशक, ऑस्ट्रेलिया), कैथरीना शटलर (एक्टर, जर्मनी), चंद्रन रत्नम (फिल्म निर्माता, श्रीलंका) और रेमी एडेफरासिन (सिनेमैटोग्राफर, इंग्लैंड) भी होंगे।

हर साल की तरह, इस वर्ष के फिल्मोत्सव में भी पहली बार फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माताओं के बेहतरीन काम को दिखाया जायेगा और दुनिया भर के अगली पीढ़ी के कहानीकारों के सिनेमैटिक विज़न को पेश किया जाएगा।

फ्रैंक

एस्टोनियाई फिल्म निर्माता टोनिस पिल इस मार्मिक कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा के साथ फीचर फिल्म में डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म का प्रीमियर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड यंग ऑडियंस – श्लिंगेल 2025 में हुआ, जहाँ इसे FIPRESCI जूरी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों के लिए नामित किया गया था।

घरेलू हिंसा की क्रूर घटना के बाद, 13 वर्ष का पॉल अपनी जगह से उजड़ जाता है और खुद को नए शहर में पाता है। वहाँ अपनेपन की भावना की तलाश उसे गलत फैसलों की श्रृंखला में ले जाती है। जैसे ही उसका भविष्य बिगड़ने लगता है, एक सनकी, दिव्यांग अजनबी के साथ अप्रत्याशित रिश्ता उसके जीवन की दिशा बदल देता है।

यह फिल्म टूटे परिवारों, बचपन के ज़ख्मों के शांत दर्द और अप्रत्याशित दोस्ती की परिवर्तनकारी शक्ति को कोमलता से दिखाती है।

फ्यूरी (मूल नामला फुरिया)

स्पैनिश फिल्ममेकर जेम्मा ब्लास्को की पावरफुल डेब्यू फीचर फिल्म फ्यूरी एक ब्रूटल ड्रामा है जो बोल्ड नई आवाज़ के आने का संकेत देती है। यह फिल्म SXSW फिल्म फेस्टिवल 2025 और सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में प्रीमियर हुई।

अभिनेत्री एलेक्जेंड्रा ने फिल्म में मेडिया की भूमिका निभाई है। नए साल की शाम को रेप होने के बाद वह मेडिया के किरदार के ज़रिए अपने दर्द को बाहर निकालती है, जबकि उसका भाई एड्रियन उसे बचाने में नाकाम रहने के लिए शर्मिंदगी और गुस्से से जूझता है।

यह फिल्म महिलावादी नजरिए से  उस डर, शर्म, घृणा और गिल्ट की पड़ताल पेश करती है जिसका सामना हिंसक, पितृसत्तात्मक समाज में यौन शोषण से बचे लोगों को करना पड़ता है।

कार्ला

जर्मन फिल्ममेकर क्रिस्टीना टूर्नाट्ज़ेस का डेब्यू ड्रामा कार्ला का प्रीमियर म्यूनिख फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहाँ इसने बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट स्क्रीनराइटर के दोअवॉर्ड जीते।

1962 में म्यूनिख में सेट, यह फिल्म 12 वर्ष की कार्ला की सच्ची कहानी बताती है, जो वर्षों के दुर्व्यवहार से सुरक्षा पाने के लिए अपने पिता के खिलाफ केस दर्ज कराती है।

बहुत ज़्यादा संवेदनशीलता और एटमॉस्फेरिक सिनेमैटोग्राफी के साथ बनाई गई, यह फिल्म बच्चे की अपनी ही ज़ुबान में बताई गई कहानी का सशक्त वर्णन है। कार्ला के साथ, टूर्नाट्ज़ेस एक ऐसी सिनेमैटिक भाषा बनाती हैं जो अनकही बातों को कहने में सक्षम है – जो कोमलता, स्पष्टता और ज़बरदस्त सुरक्षा से बनी है।

माई  डॉटर्स हेयर (ओरिजिनल टाइटल – राहा)

ईरानी निर्देशक हेसाम फराहमंद अपनी मशहूर लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज़ के बाद राहा के साथ एक ज़बरदस्त सोशल ड्रामा लेकर आए हैं।

फिल्म तोहिद पर आधारित है, जो अपने परिवार के लिए थोड़ी खुशी लाने के लिए अपनी छोटी बेटी के बाल बेचकर सेकंड हैंड लैपटॉप खरीदता है। लेकिन जब एक अमीर परिवार लैपटॉप की ओनरशिप पर सवाल उठाता है, तो झगड़ों की एक चेन गहरे क्लास डिवीज़न को सामने लाती है।

असल ज़िंदगी की सच्चाइयों से प्रेरित होकर, फराहमंद एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जहाँ नैतिकता धुंधली हो जाती है और न्याय कमज़ोर होता है। बिना किसी लाग-लपेट के ऑब्ज़र्वेशन के साथ, राहा गरिमा, संघर्ष और ज़िंदा रहने की खामोश कीमत के बारे में सार्वभौमिक कहानी बन जाती है।

  डेविल स्मोक्स (एंड सेव्स द बर्न्ट मैचेस इन द सेम बॉक्स)

(ओरिजिनल टाइटल – एल डियाब्लो फुमा (वाई गार्डस लास कैबेज़ास डे लॉस सेरिलोस क्वेमाडोस एन ला मिस्मा काजा))

मैक्सिकन फिल्ममेकर अर्नेस्टो मार्टिनेज़ बूसियो की विशेष पहली फीचर फिल्म ने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में पहला पर्सपेक्टिव्स कॉम्पिटिशन जीता।

यह पाँच भाई-बहनों की कहानी है जिन्हें उनके माता-पिता छोड़कर चले जाते हैं और वे खुद ही अपना ख्याल रखते हैं। जैसे-जैसे वे अकेलेपन से गुज़रते हैं, वे अपनी चिंताओं को अपनी सिज़ोफ्रेनिक दादी के अस्थिर दिमाग के ज़रिए दिखाते हैं, और एक-दूसरे का साथ बनाए रखने की लड़ाई में कल्पना और हकीकत के बीच की लाइन को धुंधला कर देते हैं।

एलिप्टिकल नैरेटिव के ज़रिए बनाई गई यह फिल्म बचपन के डर और इंस्टिंक्ट्स के बारे में तीखी, परेशान करने वाली बातें बताती है। यह जानी-पहचानी “होम अलोन” कहानी को डर, कल्पना और ज़िंदा रहने की परत दर परत मनोवैज्ञानिक खोज में बदल देती है।

शेप ऑफ़ मोमो

भारतीय  फिल्म निर्माता त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म शेप ऑफ़ मोमो ने शानदार फेस्टिवल जर्नी के बाद डेब्यू कॉम्पिटिशन में अच्छी एंट्री की है। यह कान 2025 में “HAF गोज़ टू कान” शोकेस के लिए पांच एशियन वर्क्स-इन-प्रोग्रेस में से एक के तौर पर चुनी गई थी। इस फिल्म का प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ और सैन सेबेस्टियन में भी दिखाई गई, जहाँ इसे न्यू डायरेक्टर्स अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था।

सिक्किम में सेट और नेपाली में फिल्माई गई, यह कहानी बिष्णु के बारे में है। वह अपने कई पीढ़ियों वाले महिलाओं के घर लौटती है, जो अब सुस्ती में डूबा हुआ है। खुद के लिए और उनके लिए आज़ादी वापस पाने के लिए दृढ़, वह पितृसत्ता द्वारा बनाए गए रूटीन को तोड़ती है। हर उस महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है कि वह विरासत में मिली सीमाओं को स्वीकार करे या उनका विरोध करे।

शेप ऑफ़ मोमो परंपरा, आज़ादी और परिवारों के अंदर पैदा होने वाली शांत क्रांतियों पर भावपूर्ण विचार है।

आता थांबायचा नाय! (इंग्लिश टाइटल – नाउ,  देयर इज नो शॉपिंग!)

एक्टर शिवराज वायचल की यह पहली फीचर फिल्म है। यह मराठी भाषा का ड्रामा है जो मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के क्लास IV सफाई  कर्मियों के एक समूह की सच्ची कहानी पर आधारित है। ये लोग एक समर्पित अधिकारी से प्रेरित होकर अपनी 10वीं कक्षा की परीक्षा पूरी करने के लिए स्कूल वापस जाने का फैसला करते हैं।

हास्य और भावनाओं का मेल यह फिल्म हिम्मत, काम की गरिमा और शिक्षा की बदलने वाली ताकत का सम्मान करती है – यह साबित करती है कि सीखने, सपने देखने या फिर से शुरू करने में कभी देर नहीं होती।

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बुलबुले फेस्टिवल 2025 – लखनऊ का प्रथम कला एवं सांस्कृतिक बाल महोत्सव (तीसरा संस्करण)

भारतीय स्वरूप संवाददाता लखनऊ, नवंबर 2025: लखनऊ में बच्चों के लिए समर्पित कला एवं संस्कृति का अद्वितीय उत्सव ‘बुलबुले फेस्टिवल 2025’ 7 और 8 नवम्बर 2025 को इंडिया लिटरेसी हाउस, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा किया जा रहा हैl एक ऐसी संस्था जो कला और ‘मेकिंग’ के माध्यम से बच्चों में कल्पनाशक्ति, रचनात्मक आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है। बुलबुले फेस्टिवल बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और कलाकारों सभी को एक ही मंच पर लाता है, जहाँ कला, खेल और सीख एक साथ मिलकर एक जीवंत अनुभव का रूप लेते हैं। कहानी-कथन से लेकर कठपुतली नाट्य तक, कार्यशालाओं से लेकर खेलों तक, संगीत से लेकर विविध कलाओं तक, यह महोत्सव हर बच्चे के लिए खोज, आनंद और सृजन का एक अद्भुत अवसर प्रदान करेगाl इस वर्ष, कई संस्थाएँ, सरकारी अधिकारी, शिक्षकों, अभिभावकों और स्वयं बच्चों ने मिलकर इस उत्सव को साकार करने में योगदान दिया है। सभी का साझा विश्वास यही है कि “बच्चे सबसे गहराई से और स्वाभाविक रूप से आनंद और खेल के माध्यम से सीखते हैं।”

स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन की को-फाउंडर ऋद्धि ने कहा, “‘बुलबुले’ इस विश्वास से जन्मा है कि हर बच्चे के भीतर एक अद्भुत और जादुई दुनिया होती है, और जब उन्हें खुलकर सोचने की आज़ादी मिलती है, तो उनके विचार रंग-बिरंगी, जीवंत बुलबुलों की तरह उड़ने लगते हैं। यह उत्सव हर उस बच्चे की असीम संभावनाओं को उजागर करने का वादा करता है जो इस रंगीन माहौल में कदम रखता है। हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चा कला, खेल और रचनात्मक सोच के ज़रिए अपनी आवाज़ और पसंद को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त कर सके,” ऐसा कहना है।”

बुलबुले फेस्टिवल 2025 में आकर्षक प्रस्तुतियों, सहभागिता-आधारित कार्यशालाओं और खोजपरक गतिविधियों की विविध श्रृंखला शामिल होगी जिनका उद्देश्य बच्चों की जिज्ञासा, कल्पना और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन सभी के लिए खुला है, विशेषकर उन बच्चों के लिए जो सामान्यतः खेल और अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसरों से वंचित रहते हैं। इस वर्ष, स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन ने ‘बचपन मनाओ’, जो कि एकस्टेप फाउंडेशन की पहल है, के साथ साझेदारी की है। ‘बचपन मनाओ’ पहल का उद्देश्य हर बच्चे के जीवन में पहले आठ वर्षों के दौरान खेल और आनंद के माध्यम से सीखने के अवसरों को बढ़ाना है। यह एक ऐसा समुदाय है जिसमें 100 से अधिक “कोलैब-एक्टर्स” सक्रिय रूप से बच्चों के चारों ओर सहयोगी माहौल तैयार करने में जुटे हैं।

आयोजकों के अनुसार, इस फेस्टिवल में लगभग 500 बच्चे (10 वर्ष तक आयु वर्ग) अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों के साथ भाग लेंगे। यह दो दिवसीय आयोजन कल्पना, सीख और उल्लास का सामूहिक उत्सव बनेगा जहाँ बच्चे और बड़ों, दोनों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा।

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सांसद खेल महोत्सव-2025 के अंतर्गत वॉकथॉन रैली आयोजित, उमड़े युवा

खेल से आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना होती है मजबूत:रमेश अवस्थी

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर, 17 अक्टूबर। सांसद खेल महोत्सव-2025 का आगाज शुक्रवार सुबह ग्रीन पार्क स्टेडियम से भव्य वॉकथॉन रैली के साथ हुआ। रैली को सांसद रमेश अवस्थी और इंग्लैंड के वेलिंगबरो शहर के मेयर राज मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली सरसैया घाट चौराहा होते हुए नानाराव पार्क में संपन्न हुई।

करीब पाँच हजार प्रतिभागियों ने इस वॉकथॉन में हिस्सा लिया। इसमें एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, युवक व महिला मंगल दल, पुलिस विभाग, सिविल डिफेंस, स्कूली छात्र-छात्राएं और विभिन्न खेल संघों के खिलाड़ी शामिल रहे। शहर में खेलों के प्रति जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश इस रैली के माध्यम से दिया गया।

सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि महोत्सव के तहत एक नवम्बर से 25 दिसम्बर तक विधानसभा स्तर पर कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स सहित कई प्रतियोगिताएं होंगी। सब जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्गों में होने वाले मुकाबलों के विजेता खिलाड़ी आगे सांसद खेल स्पर्धा, फिर जोन स्तर और अंततः राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे।

सांसद ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम हैं बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस, खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, खिलाड़ियों, नागरिकों, एनसीसी, सिविल डिफेंस और पुलिस रिक्रूट्स के सहयोग के लिए आभार जताया। रैली के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि “मा० सांसद खेल महोत्सव-2025” के शुभारंभ के उपरांत विधानसभा स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन 1 नवम्बर से 25 दिसम्बर 2025 तक किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों—सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर—के खिलाड़ियों के बीच कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन, एथलेटिक्स आदि विधाओं में प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। विधानसभा स्तर पर विजयी खिलाड़ी सांसद खेल स्पर्धा में प्रतिभाग करेंगे, वहीं सांसद खेल स्पर्धा में विजयी प्रतिभागी जोन स्तर पर तथा उसके उपरांत राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। रैली में विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, विधायक महेश त्रिवेदी, मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, अन्य जनप्रतिनिधि और खेल संघों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार, डीसीपी सेंट्रल, डीसीपी रवीन्द्र कुमार, नगर आयुक्त, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी भानु प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को राष्ट्रमंडल संघ द्वारा मंजूरी दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को राष्ट्रमंडल संघ द्वारा मंजूरी दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज भारत के लिए अपार हर्ष और गौरव का दिन है। उन्होंने राष्ट्रमंडल संघ द्वारा अहमदाबाद में 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी को मंज़ूरी दिए जाने पर भारत के प्रत्येक नागरिक को हार्दिक बधाई दी। श्री शाह ने कहा कि यह भारत को विश्व खेल मानचित्र पर स्थापित करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के अथक प्रयासों का एक शानदार प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे का निर्माण और देशभर में खेल प्रतिभाओं का एक विशाल पूल तैयार कर, प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत को एक अद्भुत खेल डेस्टिनेशन बना दिया है।

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भारत के महाकाव्य महाभारत का राष्ट्रीय टेलीविजन पर नवीन स्‍वरूप में प्रसारण

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Mahabharat12QCI.JPGकलेक्टिव मीडिया नेटवर्क ने भारत के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य ‘महाभारत’ के एक अभूतपूर्व एआई-आधारित पुनर्कल्पना के प्रसारण की घोषणा की है। इस श्रृंखला का विशेष डिजिटल प्रीमियर 25 अक्टूबर 2025 को वेव्स ओटीटी पर होगा। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से हर रविवार सुबह 11:00 बजे दूरदर्शन पर इसका प्रसारण होगा। यह श्रृंखला भारत और दुनिया भर के डिजिटल दर्शकों के लिए वेव्स ओटीटी के माध्यम से एक साथ उपलब्ध होगी।

अपनी तरह का यह पहला सहयोग भारत के सार्वजनिक प्रसारक की विरासत और देशव्यापी पहुंच को अगली पीढ़ी के मीडिया नेटवर्क के रचनात्मक नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए, इस श्रृंखला में महाभारत महाकाव्‍य के व्‍यापक स्‍वरूप, उसके पात्रों, युद्धक्षेत्रों, भावनाओं और नैतिक दुविधाओं को सिनेमा के पैमाने और अद्भुत यथार्थवाद के साथ फिर से तैयार किया गया है। यह परियोजना मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की भावना को मूर्त रूप देती है और यह दर्शाती है कि कैसे विरासत और नवाचार एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी इस सहयोग पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि प्रसार भारती हमेशा से ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व की गाथाओं को हर भारतीय घर तक पहुंचाता रहा है। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के पुनः प्रसारण ने हमें याद दिलाया कि ये कथाएं परिवारों और पीढ़ियों को कितनी गहराई से एक साथ जोड़ती हैं। यह एआई-आधारित पुनर्कल्पना में भागीदारी दर्शकों को भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक का नए सिरे से अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही इसमें परंपरा का सम्मान करते हुए कहानी बताने की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। यह आधुनिक प्रसारण में विकास और विरासत के एक साथ आने की अभिव्यक्ति है।

कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक और समूह सीईओ, विजय सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि लाखों भारतीयों की तरह, वह भी हर रविवार को टेलीविजन पर क्लासिक महाभारत देखकर बड़े हुए हैं। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारी कल्पना और संस्कृति से हमारे जुड़ाव को आकार दिया। महाभारत के साथ, हमारी आशा है कि आज की पीढ़ी को इसके माध्‍यम से एक ऐसा भावपूर्ण अनुभव दिलाना है जो उनके लिए गहन और एकीकृत भाव से परिपूर्ण हो और इसे आज की तकनीक की संभावनाओं के माध्यम से दिखाया गया है। यह भक्ति और प्रगति के साथ मिलकर कुछ ऐसा तैयार करने के संदर्भ में है जो न सिर्फ गहराई से परंपरा में निहित हो अपितु साहसपूर्वक दूरदर्शी भी हो।

प्रसार भारती का आधिकारिक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, वेव्स, भारत की संस्कृति, समाचार और मनोरंजन के समृद्ध ताने-बाने को एक डिजिटल मंच पर लाता है। वीडियो-ऑन-डिमांड, लाइव इवेंट और टीवी, रेडियो, ऑडियो और पत्रिका सामग्री के व्यापक संग्रह के साथ, वेव्स ने अपनी विश्वसनीय, परिवार-अनुकूल और बहुभाषी पेशकशों के साथ तेज़ी से लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया है। समावेशिता, नवाचार और विरासत के स्तंभों पर निर्मित, यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक कहानी कहने की कला के साथ भारत की कालातीत विरासत को जोड़ता है। कलेक्टिव एआई महाभारत के साथ इसका सहयोग इस बात का उदाहरण है कैसे तकनीक और परंपरा मिलकर शक्तिशाली, समकालीन आख्यान रच सकते हैं जो भारत और दुनिया भर के दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित होते हैं

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