भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर के श्यामनगर क्षेत्र स्थित होटल गोविन्दम इलाइट में सुर सारथी परिवार ने नए पुराने गीतों की सुमधुर महफिल सजाई, ऐसे संगीतमय वातावरण में बरबस लोग झूमने को मजबूर हो गए, अवसर था सुर सारथी संगीत परिवार की ओर से आयोजित म्यूजिकल मीट 2026 का,
सभी कलाकारों (जिनमें से अधिकांश का शौक है गायन) की एक से बढ़कर एक धमाकेदार संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ साथ वहां का शालीन ,पारिवारिक और अनुशासित वातावरण देख के लगा कि यही सुर सारथी परिवार की खासियत है और यही उसे अन्य सांस्कृतिक आयोजनों से अलग छवि प्रदान करती है। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी के द्वारा माता सरस्वती जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन और उनका आशीष ग्रहण करके हुआ। उसके उपरांत कानपुर और लखनऊ से आए गायक/गायिकाओं की एक से बढ़ कर एक प्रस्तुतियों से सुबह १० बजे प्रारंभ हुआ कार्यक्रम की समाप्ति शाम 6.15 तक का था समय कैसे निकल गया किसी को पता ही नहीं चला। आयोजकों सर्व श्री आशीष अवस्थी, राजेंद्र श्रीवास्तव और अतुल दीक्षित ने बताया कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य संगीत प्रेमी लोगों को तनाव से दूर अपने गायकी के शौक पूरा करना के लिए एक मंच प्रदान करना है। पूरे दिन तक चले इस कार्यक्रम में सर्व श्री राजेंद्र श्रीवास्तव, सुषमा श्रीवास्तव, आशीष अवस्थी, अंजना अवस्थी, संध्या श्रीवास्तव, अतुल दीक्षित, भारती दीक्षित, आरती त्रिपाठी, रेनू अवस्थी, रेनू अग्रवाल, मोनिका दिवाकर, नीलम दीक्षित, आलोक वर्मा, गोविन्द सिंह, वैभव, अलका सिंह, बॉबी खान, जितेंद्र कुमार, दिवाकर शुक्ल, जितेंद्र श्रीवास्तव, प्रीति श्रीवास्तव, स्मिता श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, संध्या मिश्रा, डी के निगम, सौरभ सिंह, विजय प्रजापति आदि की एक से बढ़कर एक धमाकेदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।
मनोरंजन
पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय का वार्षिकोत्सव “अभिव्यंजना” संपन्न
छात्र-छात्राओं ने नाटक के माध्यम से सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और कुटुंब प्रबोधन का दिया संदेश
भारतीय संस्कृति और देश प्रेम का प्रतीक बना वार्षिकोत्सव*
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय नवाबगंज में चल रहे त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या “अभिव्यंजना” हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें पंच परिवर्तन – स्व का बोध, नागरिक कर्त्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, और सामाजिक समरसता पर आधारित विविध कार्यक्रम विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर उपस्थित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कानपुर नगर महेंद्र सिंह तँवर और विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ० संजीव गुप्त तथा ए डी एम सिटी सौरभ सिंह, ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्री वीरेंद्रजीत सिंह (अध्यक्ष, श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल), विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष योगेंद्र नाथ भार्गव, विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती नीतू सिंह, सह प्रबंधक श्रीमती उर्षमीना खेर तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राकेश राम त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया।
वार्षिकोत्सव ‘अभिव्यंजना’ के इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा स्तुति से हुई। यह नृत्य मां दुर्गा के दिव्य स्वरुप को समर्पित है जो शक्ति, साहस, करुणा और संरक्षण की प्रतीक हैं। बहुत ही भावपूर्ण मुद्राओं और सशक्त अभिनय से मां के तेजस्वी एवं करुणामई स्वरूप की प्रस्तुति ने सभी दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी श्री महेंद्र सिंह तँवर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीनदयाल जी का चिंतन, उनकी तपस्या, त्याग और साधना की खुशबू हमें इस विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देखने को मिली। दीनदयाल जी के दो दर्शन- अंत्योदय और समग्र विकास मुझे आकर्षित करते हैं। उनमें से अंत्योदय दर्शन जिस पर दीनदयाल जी का विचार था कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाए। उनका दूसरा दर्शन समग्र विकास है जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक विकास की बात की गई है। समग्र विकास को पूर्ण करने के लिए वर्तमान सरकार प्रयत्न शील है। सन 2047 तक विकसित भारत और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को पूरा करने में हम सभी योगदान दें। हम सब अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग होकर राष्ट्र निर्माण तथा विकास में सहयोग दें। हम सब मिलकर अपने कानपुर शहर को भी श्रेष्ठता के शिखर पर पहुंचाएं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ० संजीव गुप्त जी ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह विद्यालय अनूठा है यहां शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाते हैं। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि मैंने और मेरे भाई ने यहां से पढ़ाई की है। यहां पर प्रवेश पाना मुश्किल था। विद्यालय का ध्येय वाक्य ‘वयं राष्ट्र जागृयाम’ है। हम स्वयं जागें और राष्ट्र को जगाएं। इस विद्यालय में अष्टधातु की हनुमान जी की प्रतिमा है। हनुमान जी अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हैं, और अत्यंत गुणीहैं। उनकी भक्ति करके आप सभी छात्रों को श्रेष्ठ छात्र बनकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग करना चाहिए। गीता के आठवें श्लोक का प्रसंग लेते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान पवित्र होना चाहिए और पवित्र ज्ञान और विनम्रता से ही सब कुछ पाया जा सकता है। आप सभी ज्ञान के साथ विनम्रता प्राप्त करें।
विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती नीतू सिंह जी ने विद्यालय की वार्षिक प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारा विद्यालय उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर अग्रसर है और अनेक उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक दीनदयाल विद्यालय के विद्यार्थियों ने जो कीर्तिमान इस वर्ष स्थापित किए हैं उनका उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हमारे विद्यालय के अनेक छात्र अपनी प्रतिभा, परिश्रम और कुशल मार्गदर्शन से देश विदेश के अनेक विभागों में सेवाएं देते हुए हमारे विद्यालय और कानपुर का नाम रोशन कर रहे हैं।
इस वर्ष की प्रतियोगी परीक्षाओं में कई छात्र चयनित हुए हैं, जिनमें चिरंजीव कुणाल गुप्त जो 2021 बैच के छात्र रहे हैं इन्होंने सी. ए. की परीक्षा में कानपुर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। 2021 बैच के चिरंजीव रोहन कुशवाहा तथा 2018 बैच के चिरंजीव कार्तिकेय तिवारी ने भी सी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। चिरंजीव श्रेष्ठ वर्मा तथा चिरंजीव सूर्यांश यादव का नीट परीक्षा में चयन हुआ। कानपुर सहोदय विद्यालय संगठन (KSS) में हमारे विद्यालय का प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
कक्षा 6 से 12 तक की बालक वर्ग की खो-खो प्रतियोगिता में विद्यालय को प्रथम स्थान और कक्षा 6 से 8 तक के बालक वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में भी विद्यालय को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। कक्षा 6 से 8 तक बालिका वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में आठवीं कक्षा की कुमारी छवि बोर्ड विनर रहीं और कक्षा 9 से 12 तक बालक वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में 11वीं कक्षा के चिरंजीव अरिहंत राजपूत बोर्ड विनर रहे। कक्षा 9 से 12 तक बालिका वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में नवीं कक्षा की कुमारी नव्या राठौर बोर्ड विनर रहीं। कक्षा 9 से 12 तक हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यालय की छात्रा कुमारी आकृति सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। गया। सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी में विद्यालय को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसी प्रकार से हमारे विद्यालय ने अन्य अनेक प्रतियोगिताओं जैसे -अमर उजाला द्वारा आयोजित शतरंज प्रतियोगिता में, लखनऊ में ताइक्वांडो एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में, ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा दिल्ली में आयोजित ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में, जिला भारोत्तोलन संघ द्वारा आयोजित भारोत्तोलन प्रतियोगिता में, सीबीएसई द्वारा आयोजित क्लस्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में, प्रताप इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित विज्ञान प्रतियोगिता में तथा अन्य अनेक प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करते हुए अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ पर आधारित विद्यालय में एक नाटक वटवृक्ष प्रस्तुत किया गया। यह नाटक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने सन् 1925 में विजयदशमी के दिन की थी। प्रारंभ में इस संगठन की स्थापना का उद्देश्य अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध आवाज उठानी और संगठन खड़ा करना था। कालांतर में आजादी के बाद समाज में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण की सुरक्षा, नागरिक कर्त्तव्य और स्वदेशी का बोध इन पांच संकल्पों के प्रति जागरूक करना है। उनकी इस विचारधारा को किस प्रकार से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक माधव सदा शिवराव गोलवलकर (गुरुजी), बालासाहेब जी, के सी सुदर्शन जी, रज्जू भैया जी, दीनदयाल उपाध्याय जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, अटल बिहारी वाजपेई जी, अशोक सिंघल जी, बालाजी देशमुख और मोहन भागवत जी ने आगे बढ़ाया तथा आत्मनिर्भर भारत के लिए एक जिम्मेदार नागरिक की भावना एक ही विचार, एक ही प्रेरणा, अनेक रूप और एक ही लक्ष्य ‘राष्ट्र प्रथम’ की होनी चाहिए यह दर्शाना नाटक का मुख्य उद्देश्य रहा।
पर्यावरण संरक्षण के संकल्प पर आधारित कथक नृत्य की प्रस्तुति द्वारा यह संदेश दिया गया कि जहां प्रकृति है वहां जीवन है। प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की रक्षा है। पेड़ लगाने, जल को बचाने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, प्रत्येक जीव -जंतुओं की रक्षा करने और अपने पर्यावरण का संरक्षण करके प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेवारी है।
भावपूर्ण मुद्राओं, जटिल पदचाप, लयबद्ध संरचनाओं और गतिशील सामूहिक विन्यासों के माध्यम से इस प्रस्तुति ने हरे – भरे वनों, बहते जल और प्रवाहित होने वाली हवा तथा पृथ्वी पर विद्यमान जीत की जीवंतता को साकार करते हुए इस अद्भुत प्रस्तुति नै पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
दशावतार नृत्य नाटिका भाव विभोर कर देने वाली प्रस्तुति द्वारा भगवान विष्णु के दस अवतारों मत्स्य, कूर्म, वाराह, नरसिंह, दामोदर, मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम, भगवान श्री कृष्ण, भगवान बुद्ध, और कल्कि की मनमोहक प्रस्तुतियों द्वारा यह संदेश दिया गया कि सत्य, धर्म, करुणा और न्याय की शक्ति हमेशा झूठ, अधर्म, अहंकार और अन्याय पर विजय प्राप्त करती है।
नुक्कड़ नाटक “टूटता संसार” की प्रस्तुति के द्वारा मोबाइल के बढ़ते प्रभाव, संवाद की कमी और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण टूटते संयुक्त परिवारों को पुनः जोड़ने, मिलकर रहने, आपसी संवाद बनाए रखने और पारिवारिक मूल्यों को जगाने (कुटुंब प्रबोधन) का प्रयास किया गया।
आर्केस्ट्रा नाद – निनाद : भारतीय शास्त्रीय संगीत के अत्यंत लोकप्रिय राग यमन पर आधारित शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं एवं वाद्य यंत्रों – हारमोनियम, तबला, नाल, बांसुरी, घूंघररू और गिटार के सुंदर समन्वय की अद्भुत प्रस्तुति ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
राग ध्रुपद गायन यह भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम एवं गंभीर गायन शैलियों में से एक है, जिसका विकास मुख्यतः मार्गी संगीत के साधकों तथा राजदरबारों की संगीत परंपरा में हुआ। ध्रुपद गायन में स्वर की शुद्धता, गंभीरता चार खंड की आलापचारी और लय का विशेष महत्त्व होता है। छात्रों ने दोनों प्राचीन शास्त्री परंपरा की गायन शैलियों की अद्भुत प्रस्तुति से सबको भावविभोर कर दिया।
समूह गान सीनियर वर्ग के छात्रों द्वारा स्वदेशी थीम पर आधारित ‘आत्मनिर्भर भारत होगा’ गीत के माध्यम से स्वदेशी को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
विद्यालय के छात्र समिष्ठ अग्रवाल ने शास्त्रीय एकल गायन की प्रस्तुति देकर गायन कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। चरैवेति -चरैवेति गीत के माध्यम से मिलकर चलने का संदेश दिया।
समूहगान ‘सर पर हिमालय का छत्र है’ इस भावपूर्ण संघ गीत की प्रस्तुति के माध्यम से एकता, अनुशासन, समर्पण, राष्ट्र-प्रेम और निःस्वार्थ सेवा की भावना को अभिव्यक्ति करते हुए यह संदेश दिया गया कि जब हम एक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं तो हमारा प्रत्येक प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन जाता है।
नागरिकों के कर्त्तव्य पर आधारित नृत्य-नाटकः ‘हम भारत के नागरिक हैं” प्रस्तुत किया गया जो आज के समय में नागरिक होने के असली मायने समझाता है। नाटक में यह दिखाया गया कि देश की समस्याएँ सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं बल्कि उन समस्याओं और समाज की व्यवस्था की जिम्मेदारी लेना असली नागरिकता है। नागरिक चेतना, सामाजिक संवेदनशीलता तथा मानवीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना इस नाटक का मुख्य संदेश रहा।
इंग्लिश प्ले- Legacy of India (भारत की विरासत) की प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत की असली विरासत सिर्फ़ पुरानी इमारतों या राजनीतिक उपलब्धियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हज़ारों साल पुरानी एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जो यहाँ के लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और उनकी आत्मा में रची-बसी है। ईमानदारी से की गई मेहनत और इंसान का सम्मान ऐसी दौलत है जिसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। आत्म सम्मान की भावना, कुशल कारीगरी और हुनर को महत्व देना सर्वोपरि बताया गया। भारत की असली विरासत को एक सक्रिय जीवन शक्ति और ऐतिहासिक घावों को भरने तथा दुनिया में सद्भाव को बढ़ावा देने के रूप में दर्शाया गया।
अभिव्यंजना सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय के सैकड़ो छात्र-छात्राओं ने विविध कार्यक्रमों की अद्भुत प्रस्तुति द्वारा सभी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया और उपस्थित सैकड़ों दर्शकों ने उपर्युक्त सभी कार्यक्रमों की खूब सराहना की। इस अवसर पर मोहित यादव जी अध्यक्ष ग्रुप ऑफ सीएचएस, माननीय ब्रजमोहन जी प्रधानाचार्य बी एन एस डी इंटर कॉलेज, प्रांत प्रचारक श्री राम जी, विभाग प्रचारक बैरिस्टर जी, माननीय श्री नारायण जी नगर संघचालक दीनदयाल नगर, माननीय मोहन तिवारी जी जिला संघ चालक कानपुर, श्याम बाबू गुप्ता जी विभाग संघ चालक, आदित्य शंकर उपाध्यक्ष महामंडल आदि अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य जी राकेश राम त्रिपाठी जी ने समस्त छात्र-छात्राओं की विभिन्न प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कार्यक्रम में पधारे समस्त अतिथियों अभिभावकों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का प्रबंध समिति में स्वागत किया।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज में थिएटर क्लब का ऑडिशन आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 25 सितंबर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में कॉलेज के थिएटर क्लब द्वारा प्रिज़्म क्रिएशंस प्रोडक्शन हाउस के सहयोग से थिएटर ऑडिशन का आयोजन 25 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अभिनय, रंगमंच एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करना था।
ऑडिशन में 20 से 25 वर्ष की आयु के पुरुष एवं महिला कलाकारों के लिए अवसर प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि यह एक मानदेय आधारित परियोजना है तथा इसकी शूटिंग अक्टूबर माह से प्रारंभ होने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्रिज़्म क्रिएशंस प्रोडक्शन हाउस के संस्थापक श्री कृष्णा चौधरी एवं निर्णायक श्री प्रवीण अरोड़ा उपस्थित रहे। कॉलेज की ओर से प्रो. मीत कमल, समन्वयक, ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में डॉ. एरिक विल्सन एवं डॉ. अंकिता पांडेय की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में छात्र स्वयंसेवकों के रूप में जागृति गुप्ता, इल्मा तबस्सुम, अलीशा नाज़, आदर्श चौहान, ऐश सोनकर एवं देवांश गौरव उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम के सुचारु संचालन में अपना योगदान दिया। ऑडिशन के माध्यम से प्रतिभागियों को अभिनय एवं रंगमंच के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने तथा आगामी परियोजना से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में “अन्वेषण, अभिव्यक्ति और जुड़ाव” अर्थात “एक्सप्लोर, एक्सप्रेस, बिलॉन्ग” की भावना को प्रोत्साहित करना और उन्हें अपनी रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त करने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ऑडिशन के दौरान विद्यार्थियों में थिएटर, अभिनय एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति उत्साह देखने को मिला। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, उसे प्रस्तुत करने तथा रंगमंच एवं अभिनय के क्षेत्र में नए अवसरों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
Read More »सबसे बड़ा भ्रम दो शब्द—“सरकारी पैसा”!
एक गरीब पिता का बच्चा बाज़ार में खिलौना देखकर जिद करता है। पिता कीमत पूछता है, जेब टटोलता है, फिर बच्चे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ जाता है। बच्चा सोचता है कि शायद पिताजी उसे खिलौना नहीं दिलाना चाहते। लेकिन पिता जानता है कि महीने की तनख्वाह अभी आधी भी नहीं बची और घर में राशन, बिजली का बिल, स्कूल की फीस और दवा के खर्च अभी बाकी हैं। उसी शहर में कोई माँ अपनी बेटी की कोचिंग का सपना टाल रही है, कोई बुज़ुर्ग डॉक्टर की पूरी पर्ची नहीं खरीद पा रहा, कोई परिवार बरसों से अपने घर की टूटी छत को प्लास्टिक से ढँककर मानसून निकाल रहा है। भारत के करोड़ों घरों में हर दिन इच्छाओं की हत्या होती है ताकि बजट जीवित रह सके।
लेकिन इसी कहानी का एक दूसरा पात्र भी है, जिसके बारे में बहुत कम बात होती है।
वही पिता जब पेट्रोल भरवाता है, टैक्स देता है। वही मजदूर जब मोबाइल रिचार्ज कराता है, टैक्स देता है। वही किसान जब डीज़ल खरीदता है, टैक्स देता है। वही गृहिणी जब साबुन, तेल, कपड़ा, दवा या बच्चों की कॉपी खरीदती है, तब भी टैक्स देती है। भारत में करोड़ों लोग आयकर न देते हों, लेकिन कर-मुक्त जीवन लगभग कोई नहीं जीता। वस्तु एवं सेवा कर, ईंधन कर, शुल्क, उपकर और अनेक अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से हर दिन जनता का पैसा सरकारी खजाने तक पहुँचता है। यानी जो परिवार अपने घर का हर रुपया बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वही परिवार हर दिन सरकार की तिजोरी भी भर रहा है।
यहीं से लोकतंत्र का सबसे बड़ा विरोधाभास शुरू होता है।
हम अपने घर में सौ रुपये के अतिरिक्त खर्च पर बहस कर लेते हैं। बच्चा महंगा खिलौना मांग ले तो उसे समझा देते हैं। घर में पुताई टाल देते हैं। पुरानी बाइक कुछ साल और चलाते हैं। शादी-ब्याह में खर्च काट देते हैं। लेकिन उसी समय लाखों करोड़ रुपये के सार्वजनिक खर्च पर लगभग मौन रहते हैं। जिस देश में एक परिवार पंखा बदलने से पहले दस बार सोचता है, उसी देश में सार्वजनिक धन के उपयोग पर नागरिक बहस कितनी होती है? शायद उतनी नहीं जितनी किसी क्रिकेट मैच, फिल्म या चुनावी नारे पर होती है।
सबसे बड़ा भ्रम दो शब्दों में छिपा है—“सरकारी पैसा”।
यह शब्द सुनते ही नागरिक और धन के बीच का रिश्ता टूट जाता है। जैसे वह पैसा किसी और का हो। जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। सरकार का अपना कोई खेत नहीं है जहाँ से फसल उगती हो। उसका कोई निजी कारखाना नहीं है जहाँ से मुनाफा आता हो। सरकार की तिजोरी में रखा लगभग हर रुपया किसी न किसी नागरिक की जेब से आया है। लेकिन जैसे ही वह रुपया सरकारी खजाने में पहुँचता है, जनता उससे अपना भावनात्मक और नैतिक स्वामित्व छोड़ देती है।
यही लोकतंत्र की सबसे महंगी भूल है।
भारत का केंद्रीय बजट अब दर्जनों लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच चुका है। राज्यों के बजट जोड़ दिए जाएँ तो सार्वजनिक धन का आकार और भी विशाल हो जाता है। यह राशि इतनी बड़ी है कि सामान्य नागरिक उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता। लेकिन समस्या राशि की विशालता नहीं है। समस्या यह है कि जिन लोगों की मेहनत से यह धन एकत्र होता है, वे ही अक्सर उसके उपयोग पर सबसे कम निगरानी रखते हैं।
ज़रा सोचिए, एक परिवार पाँच लोगों के साथ एक मोटरसाइकिल पर बैठकर बाज़ार जा रहा है। बच्चे बीच में दबे हुए हैं, माँ पीछे किसी तरह संतुलन बनाए हुए है। उसी सड़क पर एक चमचमाती सरकारी गाड़ी निकलती है। गाड़ी में एक बड़ा अधिकारी बैठा है, अपने पालतू कुत्ते को सेहला रहा है। गाड़ी गलत नहीं है। सरकारी कामकाज के लिए वाहन आवश्यक हैं। प्रश्न वाहन का नहीं है। प्रश्न उस मानसिक दूरी का है जो धीरे-धीरे नागरिक और व्यवस्था के बीच पैदा हो गई है। जिस व्यवस्था का खर्च नागरिक उठा रहा है, क्या वह व्यवस्था नागरिक के जीवन की कठिनाइयों को उसी गंभीरता से महसूस करती है?
कबीर ने लिखा था—“साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय।” यह केवल व्यक्ति का नहीं, शासन का भी आदर्श हो सकता है। किसी भी सभ्य शासन की महानता उसके खर्च की मात्रा से नहीं, बल्कि उसके खर्च की नैतिकता और उपयोगिता से मापी जानी चाहिए। क्योंकि सार्वजनिक धन केवल लेखांकन की इकाई नहीं होता; वह किसी की अधूरी पढ़ाई, किसी की छूटी हुई दवा, किसी का टला हुआ इलाज, किसी की स्थगित शादी और किसी बच्चे के अधूरे सपनों का संचित रूप होता है।
यहीं एक और असुविधाजनक प्रश्न सामने आता है। यदि जनता अपने पैसे की रखवाली नहीं करेगी, तो कौन करेगा?
सूचना का अधिकार कानून इसी प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास था। RTI केवल कागज़ देखने का अधिकार नहीं है। वह लोकतंत्र का स्मरणपत्र है। वह नागरिक को याद दिलाता है कि वह केवल मतदाता नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों का संरक्षक भी है। जब कोई व्यक्ति पूछता है कि सड़क निर्माण के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ, अस्पताल के लिए कितना धन आया, स्कूल की मरम्मत पर कितना खर्च हुआ, तब वह केवल सूचना नहीं मांग रहा होता; वह लोकतंत्र को उसकी मूल स्थिति में वापस लाने की कोशिश कर रहा होता है।
लेकिन यहाँ एक और विडंबना है। हम अपने बच्चों को बचत सिखाते हैं, पर नागरिकता नहीं। हम उन्हें गुल्लक देते हैं, पर यह नहीं बताते कि देश का बजट भी एक राष्ट्रीय गुल्लक है। हम उन्हें कमाना सिखाते हैं, पर यह नहीं सिखाते कि उनके नाम पर खर्च होने वाले धन का हिसाब मांगना भी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। हम उन्हें अधिकार बताते हैं, लेकिन अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक सजगता नहीं सिखाते।
कहावत है—“बूंद-बूंद से घड़ा भरता है।” लेकिन लोकतंत्र में एक और सच्चाई है—बूंद-बूंद से भरा घड़ा चुप्पी से खाली भी हो सकता है। सार्वजनिक धन हमेशा किसी एक बड़े घोटाले से नष्ट नहीं होता। वह कई बार नागरिक उदासीनता, कमजोर निगरानी, अधूरी परियोजनाओं, अनुत्तरदायी प्रशासन और उस सामूहिक मानसिकता से क्षीण होता है जो मान बैठती है कि यह सब उसका विषय नहीं है।
शायद इसलिए आज भारत के सामने सबसे बड़ा आर्थिक प्रश्न यह नहीं है कि सरकार कितना खर्च कर रही है, और न ही यह कि नागरिक कितना कमा रहा है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस देश का नागरिक अपने नाम पर खर्च होने वाले धन को वास्तव में अपना मानता भी है या नहीं।
क्योंकि जिस दिन जनता यह समझ जाएगी कि सरकारी खजाना वास्तव में जनता की सामूहिक तिजोरी है, उस दिन लोकतंत्र केवल चुनावों की व्यवस्था नहीं रहेगा। वह वास्तविक जन-स्वामित्व की व्यवस्था बन जाएगा। उस दिन परिवर्तन किसी नए नेता, नई योजना या नए नारे से नहीं आएगा। वह उस साधारण नागरिक से आएगा जो पहली बार यह तय करेगा कि जैसे वह अपने घर के खर्च पर नज़र रखता है, वैसे ही अपने देश के खर्च पर भी रखेगा।
और तब इतिहास शायद हमसे यह नहीं पूछेगा कि हमने कितना कमाया।
वह यह पूछेगा कि हमने अपने बच्चों को कमाई की कला तो सिखा दी, लेकिन क्या हमने उन्हें यह भी सिखाया कि उनकी मेहनत से बनने वाले राष्ट्रीय खजाने का प्रहरी कौन होगा?
लेखक : सी एम जैन
संपर्क : +91 9408887777
“थिएटर बनाम फिल्म एक्टिंग” विषय पर वेबिनार आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 23 अगस्त: क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर द्वारा द इंडी फिल्म स्कूल, नोएडा के सहयोग से अभिनय की विभिन्न विधाओं एवं तकनीकों को समझने के उद्देश्य से “Theatre vs Film Acting – Understanding the Difference” विषय पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का मुख्य उद्देश्य थिएटर और फिल्म अभिनय के बीच के अंतर को समझना तथा दोनों माध्यमों में अभिनय की तकनीक, अभिव्यक्ति, भावनाओं और प्रदर्शन की आवश्यकताओं पर प्रकाश डालना था। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को मंच और कैमरे के सामने अभिनय करते समय अपनाई जाने वाली विभिन्न तकनीकों एवं दृष्टिकोणों की जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर सुनील राज ने मुख्य वक्ता एवं मार्गदर्शक के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया। वे एक अनुभवी निर्देशक, लेखक एवं थिएटर प्रैक्टिशनर हैं तथा उन्हें टेलीविजन, थिएटर और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लगभग 1,000 टेलीविजन एपिसोड का निर्देशन किया है, जिनमें ETV’s Sooroma Bhopale और Maahaul Garam Hai जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वेब सीरीज़ Main Bhi Maa Ban Gaya का लेखन एवं निर्देशन किया है तथा 25 से अधिक डॉक्यूमेंट्री और 35 से अधिक फिल्मों/प्रोजेक्ट्स पर भी कार्य किया है।
कार्यक्रम में थिएटर एवं फिल्म अभिनय के बीच के अंतर, अभिनय की तकनीकों, भावनात्मक अभिव्यक्ति, प्रदर्शन शैली तथा कैमरे और मंच के लिए कलाकारों की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। वेबिनार ने अभिनय के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से सीखने और अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन, प्रधानाचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में प्रो. मीत कमल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कॉलेज की ओर से डॉ. रुक्मिणी देवी एवं डॉ. एरिक विल्सन सह-समन्वयक रहे।
वहीं, द इंडी फिल्म स्कूल, नोएडा की ओर से इसके संस्थापक श्री संक्षय बाब्बर तथा सह-संस्थापक शिवेंद्र त्रिवेदी का भी सहयोग रहा।
यह वेबिनार विद्यार्थियों एवं उभरते कलाकारों के लिए एक उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक पहल रहा, जिसने उन्हें “From Stage to Screen” अभिनय की यात्रा को समझने तथा अपने अभिनय कौशल को निखारने की दिशा में प्रेरित किया।
वालंटियर के रूप में – आदर्श चौहान, जागृति गुप्ता, इल्मा तबस्सुम, खुशबू गौतम, ऐश सोनकर, आद्या गुप्ता, मरियम फातिमा, अलीशा नाज, शुभंकित दुबे, श्वेता सिंह, दीपसी श्रीवास्तव उपस्थित रहेंl
Read More »वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (अकादमी रत्न) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) तथा वर्ष 2024 और 2025 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की घोषणा
जनरल काउंसिल ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) के लिए संगीत, नृत्य, थिएटर, पारंपरिक/लोक/आदिवासी संगीत/नृत्य/थिएटर/कठपुतली कला, और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में समग्र योगदान/स्कॉलरशिप क्षेत्रों से 108 कलाकारों का चयन भी किया।
चुने गए फेलो और पुरस्कार विजेता पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं। इसके अलावा ये प्रतिष्ठित कलाकार संगीत, नृत्य, नाटक, लोक और आदिवासी कला, कठपुतली कला और संबद्ध थिएटर कला रूपों के माध्यम से व्यक्त की जाने वाली प्रदर्शन कला की विविध विधाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अकादमी की जनरल काउंसिल ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ के लिए 106 युवा कलाकारों का भी चयन किया है। ये पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष द्वारा एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
अकादमी पुरस्कार 1952 से प्रदान किए जा रहे हैं। ये सम्मान केवल उत्कृष्टता और उपलब्धि के उच्चतम मानक का प्रतीक हैं, बल्कि निरंतर व्यक्तिगत कार्य और योगदान को भी मान्यता देते हैं। अकादमी फेलो के सम्मान के साथ तीन लाख रुपये का नकद और अकादमी पुरस्कार में एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। साथ ही एक ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम भी दिया जाता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार में पच्चीस हजार रुपये की पुरस्कार राशि के अलावा एक ताम्रपत्र और एक अंगवस्त्रम दिया जाता है।
संगीत नाटक अकादमी फ़ेलोशिप और पुरस्कार माननीय राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
संगीत को जीने वालों ने सजाई सुरों की शानदार महफिल
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर , गीत संगीत सुनने और जीने का शौक रखने वालों के लिए रविवार का दिन अत्यंत खूबसूरत रहा कार्यक्रम में कानपुर और आस पास के शहरों के संगीत में रुचि रखने वालों के लिए खुशनुमा त्यौहार जैसा था। कार्यक्रम के आयोजन का विचार रेलबाजार निवासी गोविंद सिंह का था, जिसे अति अल्प समय में बेहद खूबसूरत तरीके से क्रियान्वित करने का कार्य उनकी टीम खासकर बॉबी खान, टेक्निकल टीम के चौधरी भाई आदि ने बखूबी निभाया, मंच संचालन कर रहे बॉबी खान की फुलझड़ियों और माही के अंदाज ने सबका मन मोह लिया
माँ शारदे का आशीर्वाद लेकर और विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की कृपा पाकर कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर बांसुरी वादन और गोविंद जी के गायन से हुआ,
समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे समाजसेवा, मीडिया आदि से भी लोगों की सहभागिता रही। म्यूजिकल किसी भी कार्यक्रम की सफलता के दो मुख्य घटक गायक/गायिका और श्रोता होते है, और कहना पड़ेगा कि इस मामले में सारे श्रोता बेहद शालीन और अनुशासित दिखे । पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रोताओं ने गायक गायिकाओं का जोरदार उत्साहवर्धन किया।. इस मंच के तत्वावधान में पहला आयोजन होने के कारण आयोजकों में पहले जो असमंजस और डर था , थोड़ी ही देर में सभी के परफॉर्मेंस और सहयोग से दूर हो गया। पूरे दिन एक से बढ़कर एक नए और पुराने गीतों की वो स्वर लहरी बही कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह गया।
कार्यक्रम में राजेंद्र श्रीवास्तव , आशीष अवस्थी , दिवाकर शुक्ला, अतुल दीक्षित , गिरीश मारवाह ,आरती त्रिपाठी , अंजना अवस्थी , रेनू अग्रवाल , रेनू अवस्थी ,सुषमा श्रीवास्तव , प्रीति श्रीवास्तव, भारती दीक्षित, नीलम दीक्षित, स्मिता श्रीवास्तव आदि की धमाकेदार गीतों की प्रस्तुति को सबने खूब सराहा।
Read More »राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर शैक्षिक जागरूकता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया
कार्यक्रम की शुरुआत प्राणी उद्यान के एक निर्देशित शैक्षिक भ्रमण के साथ हुई, जिसमें भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न पशु बाड़ों तथा उनके पारिस्थितिक महत्व के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
इस पहल का उद्देश्य वन पारितंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वन्यजीव संरक्षण की भूमिका को रेखांकित करना था। भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के 60 विद्यार्थियों ने प्राणी उद्यान भ्रमण के उपरांत एक रोचक प्रस्तुति सत्र में भाग लिया। इस सत्र में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा जैव विविधता के संरक्षण में प्राणी उद्यानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का समापन प्राणी उद्यान के निदेशक के साथ एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने चल रहे संरक्षण प्रयासों तथा राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कार्यप्रणाली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
इस अवसर को चिह्नित करते हुए प्राणी उद्यान परिसर में वृक्षारोपण गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। बीट संख्या 11 के नवीनीकृत पक्षी बाड़े में बीट कीपर तथा प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न प्रजातियों के कुल 58 पौधे लगाए गए, जिससे आवास समृद्धि तथा हरित आवरण को सुदृढ़ करने में योगदान मिला।
ईद-उल-फ़ित्र के उत्सव के अवसर पर प्राणी उद्यान में लगभग 18,000 आगंतुकों की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं जीवंत रहा। लगभग 1,500 आगंतुकों ने विशेष रूप से आयोजित चित्रांकन गतिविधि में सक्रिय भागीदारी की, जिसमें उन्होंने वन संरक्षण तथा जैव विविधता पर अपने विचारों एवं अभिव्यक्तियों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।
इस आयोजन ने आगंतुकों एवं विद्यार्थियों के बीच वनों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यावरणीय प्रथाओं के प्रति जागरूकता को प्रभावी रूप से सुदृढ़ किया।
पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन अवसंरचना और अनुभवों के उन्नयन सहित गंतव्य आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 (स्वदेश दर्शन योजना का संशोधित संस्करण) पर्यटन गंतव्यों के सतत विकास पर केंद्रित है और इस योजना के तहत मंत्रालय ने 53 परियोजनाओं को 2208.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अलावा, स्वदेश दर्शन योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के अंतर्गत पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 38 परियोजनाओं को 697.94 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
‘तीर्थ यात्रा पुनरुज्जीवन एवं आध्यात्मिक धरोहर संवर्धन अभियान (प्राशाद)’ योजना के तहत मंत्रालय ने 54 परियोजनाओं को 1726.74 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद योजनाओं के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति देते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाता है, जबकि परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा योजना दिशानिर्देशों, सरकारी निर्देशों, बजट उपलब्धता, परस्पर प्राथमिकता आदि के अनुरूप परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के अधीन प्रदान की जाती है।
इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन, संचालन और प्रबंधन भी संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। उपरोक्त योजनाओं के तहत स्वीकृत घटक मुख्य रूप से पर्यटकों और आगंतुकों की सुविधा से संबंधित हैं, जिनमें डिजिटल हस्तक्षेप शामिल हैं।
ये घटक परियोजना आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति के लिए विचार किए जाते हैं और पर्यटन मुख्य उत्पादों से संबंधित हो सकते हैं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, व्याख्या केंद्र, पर्यटन गतिविधियां, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पार्किंग, सामान्य स्थल विकास, सॉफ्ट हस्तक्षेप आदि।
पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 के योजना दिशानिर्देशों में पर्यटन क्षमता बढ़ाने वाले घटकों की एक उदाहरणात्मक सूची भी शामिल की है।
एसडी2.0, सीबीडीडी और प्राशाद के तहत परियोजनाएं पूरे भारत स्तर पर स्वीकृत की गई हैं और ये स्थानीय रोजगार के अवसरों के सृजन तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं और साधनों के सृजन में सहायता प्रदान करती हैं, जिससे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि होती है। चूंकि इन योजनाओं के माध्यम से सृजित संपत्तियां राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन की जाती हैं, इसलिए मंत्रालय ने उन्हें फुटफॉल, रोजगार, उत्पन्न राजस्व और अन्य मापदंडों के संबंध में डेटा कैप्चर करने की सलाह दी है।मंत्रालय अपनी चल रही प्रचार गतिविधियों के हिस्से के रूप में अपनी वेबसाइट, सोशल मीडिया गतिविधियों, आयोजनों आदि के माध्यम से देश के विभिन्न पर्यटन गंतव्यों और उत्पादों का भी प्रचार करता है।
यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।
Read More »छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में दो दिवसीय अंतर महाविद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज कानपुर ने अंतर महाविधालयी ताइक्वांडो प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन विश्व विद्यालय के बहु उद्देशयीय सभागार में आयोजित किया गया। यह प्रतियोगिता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक एवं प्राचार्या प्रो सुमन के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में सम्पन्न हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पूमसे खिलाड़ी राम गोपाल एवं बलराम यादव उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों को तकनीकी दक्षता, आत्मसंयम और निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग के खेल सचिव डॉ. निमिषा सिंह कुशवाहा, सह-प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडे, की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय से संबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और क्योरुगी एवं पूमसे दोनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता परिणाम इस प्रकार रहे — पूमसे (व्यक्तिगत) वर्ग में श्वेता तिवारी (CSJMU) ने प्रथम, ऋषिका (DAV) ने द्वितीय, दुर्गा त्रिवेदी (BND) ने तृतीय तथा शालिनी गुप्ता (DGPG) ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। टीम पूमसे में CSJMU की श्रृष्टि वर्मा, श्वेता तिवारी एवं सानिया गौतम की टीम ने प्रथम स्थान अर्जित किया, जबकि दुर्गा त्रिवेदी (BND), दिव्या मौर्य (DAV) एवं रिया सुदर्शन (BND) की टीम द्वितीय रही। क्योरुगी के अंडर 46 किग्रा वर्ग में प्रभा सिंह (KSDDD PG) प्रथम एवं पायल (PD महिला) द्वितीय रहीं; अंडर 49 किग्रा वर्ग में सानिया गौतम (CSJMU) प्रथम एवं अर्चिता बिरहा (PPN) द्वितीय रहीं; तथा अंडर 53 किग्रा वर्ग में शिमरन कनौजिया ( बाबू सिंह) प्रथम एवं ऋषिका (DAV) द्वितीय स्थान पर रहीं। समग्र प्रदर्शन के आधार पर CSJMU को ओवरऑल चैंपियन तथा बाबू सिंह महाविद्यालय को रनर-अप घोषित किया गया।
प्रतियोगिता अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सम्पन्न हुई। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।
सम्पूर्ण कार्यक्रम की आयोजन सचिव प्रो प्रीती पाण्डेय ने सभी ‘ अतिथियो, खिलाडियो, मिर्णायक मण्डल का आभार व्यक्त किया ।
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