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राजनीति

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने की अपील की

उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

 

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उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं केएफसीएल प्रबंधन का असहयोगात्मक रवैया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 30 मई अतिरिक्त श्रम आयुक्त के आदेश के अनुपालन में श्रमिक श्रम कार्यालय एवं तत्पश्चात केएफसीएल परिसर में उपस्थित हुए। हमारा उद्देश्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त राहत के अनुरूप नौकरी बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।

कई घंटों की प्रतीक्षा एवं वार्ता के उपरांत श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री सुरेश सिंह एवं श्री हेमंत कुमार द्वारा हमें अवगत कराया गया कि केएफसीएल प्रबंधन के विधिक सलाहकार एस. एल. मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि “ये मेरे श्रमिक नहीं हैं, मैं इन्हें नहीं रखूंगा।”

यदि यह कथन सही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि यह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश एवं श्रमिकों को प्रदान किए गए वैधानिक संरक्षण की भावना के प्रतिकूल प्रतीत होता है। हम पिछले लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की अपेक्षा कर रहे हैं, किंतु प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत निराशाजनक एवं चिंताजनक है।

आज की बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि प्रबंधन हमारी नौकरी बहाली के संबंध में सकारात्मक कदम उठाने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहा है। हम सभी श्रमिक कई घंटों तक भीषण गर्मी में प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन अंततः हमें यह जानकारी दी गई कि प्रबंधन हमें कर्मचारी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हम माननीय उच्च न्यायालय, श्रम विभाग तथा समस्त सक्षम प्राधिकारियों से मांग करते हैं कि इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

हम मीडिया जगत से भी अनुरोध करते हैं कि श्रमिकों के इस न्यायसंगत संघर्ष को जनता तक पहुंचाएं, ताकि सत्य सामने आए और श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और अपने वैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है।

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धर्मेन्द्र प्रधान ने नई दिल्ली में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए। इस अवसर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद; छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव; स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव  संजय कुमार; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव  अशोक कुमार मीणा तथा डीओएसईएल की अतिरिक्त सचिव अर्चना एस. अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में  धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश–2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विज़न को देश के लगभग 15 लाख विद्यालयों में कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में एसएमसी को विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा में साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

 

श्री प्रधान ने इस बात पर बल दिया कि जहाँ एक ओर  सरकार बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समर्थन सुनिश्चित करने के प्रति वचनबद्ध है, वहीं एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने में सहयोग, मार्गदर्शन और सामुदायिक स्वामित्व के महत्व को भी मान्यता देते हैं। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एसएमसी को शैक्षिक परिणामों में सुधार की एक स्‍थायी संस्कृति और जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना है। विद्यांजलि जैसी पहलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से सामुदायिक नेतृत्व के अंतर्गत फली-फूली है, और नए एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को पुनः सामाजिक सहभागिता के केंद्र में स्थापित कर उसी भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं। अपने संबोधन में  आशीष सूद ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल नए दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे गहन और परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो उसका मार्ग देश की कक्षाओं से होकर ही गुजरेगा।

सूद ने नवप्रारंभित एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 को इस परिवर्तनकारी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद प्रारंभ किया गया पूर्ववर्ती एसएमसी ढाँचा मुख्यतः अनुदान निगरानी, अवसंरचना पर्यवेक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित था। किंतु आज की चुनौतियाँ और अपेक्षाएँ काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), डिजिटल पारदर्शिता, अधिगम (लर्निंग) परिणाम तथा सामुदायिक भागीदारी जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। नए एसएमसी दिशा-निर्देशों को इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मंत्री महोदय ने बल देते हुए कहा कि ये दिशा-निर्देश एसएमसी को मात्र निगरानी निकाय से आगे बढ़ाकर वास्तविक “विद्यालय समुदाय प्रशासनिक संस्थान” में परिवर्तित करते हैं। अब एसएमसी समग्र बाल विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता, छात्र कल्याण, सुरक्षा, समावेशन, डिजिटल प्रशासन तथा पारदर्शिता में सक्रिय योगदान देंगी। अपने संबोधन के अंत में श्री सूद ने विश्वास व्यक्त किया कि एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

अपने संबोधन में श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के नेतृत्व में प्रस्तुत किए गए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश विद्यालय प्रबंधन और संचालन में स्थानीय अभिभावकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित कर अभिभावकों और विद्यालयों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होंगे।

बैठक में हरियाणा के स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा; महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा एवं मराठी भाषा मंत्री श्री दादाजी भुसे; मिजोरम के स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना; त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री किशोर बर्मन; उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत; तथा नागालैंड के उच्च शिक्षा मंत्री श्री तेमजेन इम्ना आलोंग सहित कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया

स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देशों हेतु जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

https://dsel.education.gov.in/sites/default/files/guidelines/School_Management_Committee_Guidelines.pdf

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भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन क्षमता चालू की

भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन-एनजीएचएम को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण नीचे दिया गया है:

निधि आवंटन (करोड़ रुपये में)

(संशोधित अनुमान)

उपयोग

(करोड़ रुपये में)

वित्तीय वर्ष 2023-24 100 0.11
वित्तीय वर्ष 2024-25 300 46.26
वित्तीय वर्ष 2025-26

( 19 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार )

300 203.75

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से खोजी गई हरित हाइड्रोजन की लागत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को आपूर्ति के लिए  397 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरियों को आपूर्ति के लिए 387 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है।

विश्व बैंक समूह की “हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत, यानी लगभग 235 रुपये प्रति किलोग्राम, हिस्सा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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कश्मीरी प्रवासी परिवारों के लिए कल्याण और आवास सहायता उपाय

सुरक्षा-संबंधी व्यय (एसआरई) ढांचे और प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के अंतर्गत कश्मीरी प्रवासी परिवारों को वर्तमान में प्रदान किए जा रहे कल्याणकारी उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  1. राहत श्रेणी के अंतर्गत पंजीकृत प्रवासी परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 3250 रुपये की नकद सहायता प्रदान की जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार प्रति माह 13 हजार रुपये है।
  2. कश्मीरी प्रवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 9 किलो चावल, प्रति व्यक्ति प्रति माह 2 किलो आटा और प्रति परिवार प्रति माह 1 किलो चीनी के हिसाब से मुफ्त राशन दिया जा रहा है। जम्मू से आए प्रवासियों के मामले में, प्रति व्यक्ति प्रति माह 9 किलो आटा, प्रति व्यक्ति प्रति माह 2 किलो चावल और प्रति परिवार प्रति माह 1 किलो चीनी के हिसाब से राशन दिया जा रहा है।
  3. जम्मू में विभिन्न शिविरों में कश्मीरी प्रवासी परिवारों के लिए बने प्रवासी आवासीय शिविरों/फ्लैटों का रखरखाव और देखभाल।
  4. कश्मीरी प्रवासी युवाओं के लिए 6 हजार पद आरक्षित किए गए हैं। उक्त पदों के लिए अब तक 5,896 (98.26 प्रतिशत) उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।
  5. अन्य पहलें:
  • कश्मीरी प्रवासियों की सुविधा के लिए, पंजीकरण और ऑनलाइन सेवाएं शुरू की गई हैं, जिनमें अधिवास प्रमाण पत्र, पिछड़ा क्षेत्र निवासी (आरबीए) प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से कमजोर समूह के रूप में प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और प्रवासी प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है।
  • आधार सीडिंग – प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण – राहत (नकद सहायता) के पारदर्शी और कुशल हस्तांतरण के लिए, जिसने वास्तविक लाभार्थियों को बिना किसी देरी के वास्तविक समय के आधार पर कुशलतापूर्वक राहत हस्तांतरण को सक्षम बनाया है।
  • देश भर में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम और शिकायत निवारण शिविर शुरू किए गए हैं।
  • सांस्कृतिक, भाषाई, स्वास्थ्य और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों/शिविरों का आयोजन किया।
  • भारत सरकार द्वारा प्रवासी राशन कार्डों को स्मार्ट सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पोर्टल के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) डेटाबेस में एकीकृत करना।

सरकार ने कश्मीर घाटी में विभिन्न विभागों में कार्यरत या कार्यरत होने वाले कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए घाटी के 20 अलग-अलग स्थानों पर 6 हजार अस्थायी आवासों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 6 हजार अस्थायी आवास इकाइयों में से 4112 इकाइयों का निर्माण हो चुका है और 3257 इकाइयों का आवंटन किया जा चुका है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा, आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक ऐसा मील का पत्थर हासिल किया है, जिसकी नींव सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर टिकी है।

X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट्स में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर आधारित एक मील का पत्थर हासिल करते हुए आज, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए, भारत में किसी भी सरकार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रमुख बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 8,931 दिन—पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और अब प्रधानमंत्री के रूप में—’राष्ट्र-प्रथम’ शासन, कार्यों में ईमानदारी और प्रत्येक नागरिक की अथक सेवा के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाते हैं। यह एक ऐसी दुर्लभ विरासत है, जो अभूतपूर्व विश्वास और बेजोड़ सेवा पर निर्मित है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की दशकों की सेवा ने अपने आप में एक युग का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि चाहे गरीबों को उनके अधिकार दिलाना हो, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करना हो, या वैश्विक मंचों पर राष्ट्र का गौरव बढ़ाना हो—मोदी युग ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। श्री शाह ने कहा कि ‘नए भारत’ को गढ़ने के लिए जीवन भर प्रयास करने की ज़रूरत थी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वह कर दिखाया। उन्होंने कहा कि 24 वर्षों से भी अधिक समय तक बिना अवकाश लिए राष्ट्र और लोगों की सेवा करना, प्रधानमंत्री मोदी जी के अटूट समर्पण का ही एक प्रमाण है। श्री शाह ने कहा कि इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी जी को लोगों से अभूतपूर्व स्नेह प्राप्त हुआ—तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति लोगों का विश्वास, स्नेह और समर्थन, हर दिन बढ़ रहा है।

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं और मतदाता सहायता प्रदान की जाएगी

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।
  1. निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी किए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि 2,18,807 मतदान केंद्रों में से प्रत्येक मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और मतदाता सहायता से सुसज्जित हो।
  2. एएमएफ में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत शामिल हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।
  1. मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, स्वीकृत पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।
  1. प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ)/कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या खोजने में सहायता करेगी । वीएबी पर प्रमुख चिह्न लगे होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।
  1. मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कई कदमों में से एक के तहत, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाताओं के लिए मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मतदाता स्टेशन में प्रवेश करने से पहले अपना फोन (बंद करके) एक नामित स्वयंसेवक को सौंप सकते हैं और मतदान के बाद उसे वापस ले सकते हैं।
  2. आयोग दोहराता है कि मतदान केंद्रों पर ज़रूरी सुविधाएं और संबंधित सुगम्यता उपाय उपलब्ध कराना अनिवार्य है और सभी मतदान केंद्रों पर इनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा । सभी फील्ड कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान की तारीखों से काफी पहले आवश्यक कार्य पूरे कर लें ताकि सभी मतदाताओं को सुचारू और सुखद मतदान का अनुभव मिल सके।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में लगभग ₹33,500 करोड़ की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने दिल्ली में लगभग ₹33,500 करोड़ की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सभा को संबोधित करते हुए  मोदी ने कहा, “आज हम सभी यहाँ दिल्ली के विकास को एक नई गति देने के लिए एकत्र हुए हैं।”

इन परियोजनाओं का दायरा व्यापक है, जो मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से लेकर हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए आधुनिक आवासीय परिसरों की स्थापना तक फैला हुआ है। मोदी ने जोर देते हुए कहा, “दिल्ली के लोगों ने नई आशा और नए संकल्प के साथ एक वर्ष पहले यहाँ डबल-इंजन की सरकार का गठन किया था और उसका परिणाम आज इन विकास कार्यों में दिखाई दे रहा है।”

इस आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं की व्यापक उपस्थिति की सराहना की और यह रेखांकित किया कि उनकी शक्ति और आत्मविश्वास, राज्य सरकार के सफल नेतृत्व में, राजनीति, विज्ञान और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में सशक्त भारत के कथानक को आगे बढ़ा रहे हैं। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “चाहे राजनीति हो, प्रशासन हो, विज्ञान हो, खेल हो या सामाजिक सेवा, भारत की नारी शक्ति प्रत्येक क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।”

इस बात पर बल देते हुए कि दिल्ली भारतीय लोकतंत्र की वैश्विक पहचान और ऊर्जा का प्रतीक है, प्रधानमंत्री ने कहा कि राजधानी के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और कनेक्टिविटी का आधुनिकीकरण, जैसे नमो भारत ट्रेन और मेट्रो नेटवर्क का 375 किलोमीटर तक ऐतिहासिक विस्तार, विश्व के समक्ष भारत के आत्मविश्वास को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक है। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली जितनी अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर रूप से कनेक्‍टेड होगी, उतनी ही दृढ़ता से भारत का आत्मविश्वास विश्व के सामने दिखाई देगा।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि डबल-इंजन शासन मॉडल के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी में प्रत्येक परिवहन सुविधा का व्यवस्थित रूप से उन्नयन किया जा रहा है, जिससे प्रतिदिन बस सेवाओं पर निर्भर रहने वाले लाखों नागरिकों को स्वच्छ, आधुनिक और आरामदायक सफ़र उपलब्ध हो सके। श्री मोदी ने कहा, “हालांकि, केंद्र द्वारा उपलब्‍ध कराई गई चार हजार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें पहले से ही संचालित हो रही हैं,  केवल पिछले एक वर्ष में ही अतिरिक्त 1,800 नई बसें चलाई गई हैं, जिनमें सैकड़ों ‘देवी बसें’ भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली की कॉलोनियों और मोहल्लों में अंतिम छोर तक संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के समक्ष उपस्थित विविध चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार वर्तमान में मिशन मोड में कार्य कर रही है और विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि किस तरह पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने उन लाखों वाहनों को सफलतापूर्वक दूसरे मार्ग की ओर मोड़ दिया है जिन्हें पहले शहर में प्रवेश करना पड़ता था। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक व्यापक पहल प्रारंभ की गई है और इसकी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।”

प्रधानमंत्री ने बल दिया कि सरकार राजधानी में जीवन की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने के लिए समर्पित है और विशेष रूप से पिछले एक वर्ष के दौरान कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन के साथ अब गरीब और मध्यम वर्ग, दोनों को निःशुल्क उपचार तथा महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो रहे हैं। दक्षता के एक नए युग को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा, “वर्तमान विकास मॉडल त्वरित कार्रवाई और ठोस परिणामों पर केंद्रित है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि परियोजनाएँ शीघ्र ही नियोजन से क्रियान्‍वयन के बुनियादी स्तर पर पहुँचें।”

कार्यक्रम से पूर्व सरोजिनी नगर के अपने दौरे का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन किए गए आधुनिक आवासीय परिसरों के उद्घाटन को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बल देते हुए कहा, “जो लोग राष्ट्र के संकल्पों को पूरा करने के लिए निरंतर परिश्रम करते हैं, वे सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक आवासीय परिस्थितियों के अधिकारी हैं, और यही इन नई अवसंरचना परियोजनाओं के पीछे प्रेरक शक्ति है।” आज हजारों फ्लैट लाभार्थियों को सौंपे जाने के साथ श्री मोदी ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि ये आधुनिक आवास राष्ट्र के “कर्मयोगियों” के लिए सुख और आकांक्षाओं के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि कल्याणकारी योजनाएँ बीहड़ गाँवों से लेकर शहरी केंद्रों तक, प्रत्येक परिवार तक पहुँच रही हैं, जिससे विशेष रूप से गरीब परिवारों, किसानों और श्रमिकों को लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पीएम स्वनिधि योजना’ के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि अकेले दिल्ली में ही लगभग 2 लाख रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को ₹350 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है, जिससे वे ऊँचे ब्याज वाले अनौपचारिक ऋणों से हटकर औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था की ओर अग्रसर हुए हैं। वित्तीय समावेशन में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो क्रेडिट कार्ड सुविधाएँ पहले केवल संपन्न वर्ग के लिए उपलब्ध थीं, अब उन्हें रेहड़ी-पटरी वालों तक भी विस्‍तृत किया जा रहा है, जिससे उनके छोटे व्यवसाय सशक्त हो सकें। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “स्वनिधि क्रेडिट कार्ड गरीबों के लिए आत्मसम्मान का एक नया माध्यम बन रहा है, जिससे जो लोग कभी हाशिए पर थे, वे अब आधुनिक वित्तीय साधनों के साथ सशक्त हो रहे हैं।”

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने 3 करोड़ “लखपति दीदी” बनाने के राष्ट्रीय संकल्प की ऐतिहासिक उपलब्धि साझा की और बताया कि अब 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से सशक्त हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन महिलाओं को पूंजी, बैंकिंग व्यवस्था तथा विशेष प्रशिक्षण तक पहुँच उपलब्ध करवा कर सरकार ने उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाया है। श्री मोदी ने कहा “हमारी बहनों की सफलता ने 3 करोड़ और लखपति दीदी बनाने के एक नए संकल्प के लिए प्रेरित किया है और मुझे विश्वास है कि हमारी नारी शक्ति के आशीर्वाद से यह लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।”

पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने एक शिकायत साझा की कि राज्य सरकार द्वारा पारंपरिक संथाल जनजातीय उत्सव के दौरान भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के दौरे के समय कथित रूप से अनादर दिखाया गया। अहंकार के पतन के संबंध में प्राचीन ज्ञान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार की ऐसी राजनीति को अंततः राज्य के नागरिक अस्वीकार कर देंगे। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “राष्ट्रपति के कार्यक्रम का बहिष्कार और कुप्रबंधन संविधान तथा इस देश की प्रत्येक बेटी का अपमान है और जनता सत्ता के इस अहंकार को कभी क्षमा नहीं करेगी।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने दिल्ली को एक ऐतिहासिक शहर बताया, जो वर्तमान में “न्यू इंडिया” के आत्मविश्वास से परिभाषित एक परिवर्तनकारी दौर का साक्षी बन रहा है, जो विकसित भविष्य की आधारशिला बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी नागरिकों से राष्ट्रीय संकल्पों की पूर्ति के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। नई प्रारंभ की गई परियोजनाओं के लिए लोगों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव की भावना का आह्वान किया। श्री मोदी ने रेखांकित किया,  “न्यू इंडिया का आत्मविश्वास हमें विकसित भविष्य की ओर ले जाएगा और मुझे विश्वास है कि दिल्ली का प्रत्येक परिवार बेहतर और अधिक समृद्ध जीवन देखेगा।”

हम आधुनिक और विकसित दिल्ली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज प्रारंभ की गई परियोजनाएँ अवसंरचना को सुदृढ़ करेंगी, संपर्क में सुधार लाएंगी और शहर के लोगों के जीवन में सुगमता बढ़ाएँगी।

 

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कैबिनेट ने महारत्न सीपीएसई को शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों से पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने को मंजूरी दी, जिसके तहत प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की सीमा को 5000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये किया गया

कैबिनेट ने महारत्न सीपीएसई को शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों से पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने को मंजूरी दी, जिसके तहत प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की सीमा को 5000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये किया गया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज महारत्न सीपीएसई पर लागू शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के 4 फरवरी, 2010 के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी से पावरग्रिड की प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की अनुमत सीमा वर्तमान 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,500 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि कंपनी की कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा बरकरार रखी गई है।

इस मंजूरी से देश के सबसे बड़े और सबसे अनुभवी ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता, पावरग्रिड को अपने मुख्य व्यवसाय में निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, जिससे गैर-जीवाश्म-आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

अब पावरग्रिड अधिक पूंजी वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं, जैसे अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (यूएचवीएसी) और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए बोलियों में भाग ले सकता है। इसके अतिरिक्त, यह महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए बोलीदाताओं के चयन हेतु टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। इससे बेहतर मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

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मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ राज्य के नाम को बदलकर “केरलम” करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। केरल राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया, जो इस प्रकार है:

मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम केरलम‘ है। नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी नवंबर को ही मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की प्रबल मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल‘ ही दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद के अनुसार तत्काल कदम उठाकर राज्य का नाम बदलकर केरलम‘ करने की अपील करती है।”

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 3 में आगे प्रावधान है कि इस उद्देश्य से कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, और यदि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल को निर्दिष्ट अवधि के भीतर या राष्ट्रपति द्वारा अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए संदर्भित किया जाना चाहिए और इस प्रकार निर्दिष्ट या अनुमत अवधि समाप्त हो जानी चाहिए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के विषय पर विचार किया गया और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों और विधायी विभाग को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि और विधायी विभाग ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है।

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