Breaking News

राजनीति

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव और भारत सरकार और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा।

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के जल के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गई Team Bharat की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके। श्री शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र,  किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज के समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया!

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

गृह मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।
07 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है
29 जून, 2026 को श्री अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

Read More »

एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आज बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन-एससीओ से इतर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई।

बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष के हाल के घटनाक्रमों पर भी बातचीत की और बदलती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। श्री मोदी ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और भारत का रुख फिर दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीतिक उपायों से ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने नौवहन और वाणिज्यक स्वतंत्रता की रक्षा का आह्वान करते हुए इस बात पर बल दिया कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों सहित नागरिक और असैन्य ढांचे को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ सहित बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की तत्परता दोहराते हुए कहा कि वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेज़ेशकियान का भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं।

Read More »

देश में संचालित फर्जी विश्वविद्यालय

शिक्षा समवर्ती सूची में है, और भारत में शिक्षा के विकास के लिए केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें दोनों मिलकर काम करती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) समय-समय पर भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची प्रकाशित करता है। फरवरी 2026 में प्रकाशित नवीनतम सूची के अनुसार, 32 संस्थानों की पहचान फर्जी विश्वविद्यालयों के रूप में की गई है।

इन फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) की वेबसाइट पर उपलब्ध है:

https://www.ugc.gov.in/universitydetails/Fakeuniversity.

इन स्वयं को विश्वविद्यालय घोषित करने वाले अथवा फर्जी विश्वविद्यालयों के संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) द्वारा निम्नलिखित कार्रवाई की गई है:

  1. फर्जी संस्थानों को स्पष्टीकरण/अनुपालन पत्र/कारण बताओ/चेतावनी नोटिस जारी किया गया।
  2. ऐसे स्वघोषित(फर्जी) संस्थानों के प्रति छात्रों और आम जनता को आगाह करने के लिए यूजीसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक सूचनाएं जारी की गई।
  3. संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, शिक्षा सचिवों तथा प्रधान सचिवों को पत्र भेजकर ऐसे स्वघोषित फर्जी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन कर संचालित हो रहे इन संस्थानों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट(एफआईआर) दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश(यूटी) प्रशासनों के मुख्य सचिवों से अनुरोध किया है कि वे इन संस्थानों को बंद करने के लिए कानूनी कार्रवाई करें, और खुद को “विश्वविद्यालय” के रूप में गलत तरीके से पेश करके, डिग्रियां बांटकर और अपने नाम के साथ “विश्वविद्यालय” शब्द का उपयोग करके छात्रों को ठगने और धोखा देने में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। उनसे यह भी अनुरोध किया गया कि वे अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे किसी भी अन्य फर्जी विश्वविद्यालय के बारे में केंद्र सरकार/यूजीसी को सूचित करें जो यूजीसी की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल नहीं भी हैं।  यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Read More »

सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचा और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, पुलिस और लोक व्यवस्था के विषय राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालाकि, भारत सरकार वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित रहे राज्यों के प्रयासों में सहायता करती रही है। एलडब्ल्यूई के खतरे से समग्र रूप से निपटने हेतु, 2015 में “एलडब्ल्यूई से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना” को मंज़ूरी दी गई थी और इसमें ‘संपूर्ण सरकार’ वाले दृष्टिकोण पर जोर दिया गया था। इसमें सुरक्षा संबंधी उपाय, विकास के कदम और स्थानीय समुदायों के अधिकारों व सुविधाओं को सुनिश्चित करने जैसी विविध प्रकार की रणनीतियां शामिल हैं। इस नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप देश से वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन हुआ है।

लगभग छह दशकों की हिंसा के बाद, देश वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है। वामपंथी उग्रवाद को कभी देश की आंतरिक सुरक्षा के सबसे बड़े खतरों में से एक माना जाता था। यह सफलता “वामपंथी उग्रवाद से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना” 2015 को दृढ़ता  से कार्यान्वित करने और केन्द्र व राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से हासिल हुई है। वर्तमान में, छत्तीसगढ़ या किसी अन्य राज्य का कोई भी जिला वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं है। अभी देश के 38 जिलों (जिनमें छत्तीसगढ़ के 13 जिले शामिल हैं) को ‘विरासत एवं जोर (लिगेसी एंड थ्रस्ट)’ वाले जिलों की श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं हैं, लेकिन स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखने तथा इनके दोबारा उग्रवाद की चपेट में आने की किसी भी संभावना को रोकने हेतु सुरक्षा एवं विकास के उपायों के तहत कुछ और समय तक निरंतर सहयोग जारी रखने की आवश्यकता है।

सरकार ने जनजातीय और दूर-दराज के इलाकों में विकास पर ध्यान देकर नक्सलवाद की जड़ पर प्रहार किया है। बेहतर कानून एवं व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में निवेश ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाला माहौल बनाया है, जिससे सरकारी और निजी निवेश में भी बढ़ोतरी हुई है।

विकास के मोर्चे पर, भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं के अलावा, पूर्व में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में कई खास पहल की गई हैं। इन पहलों में सड़कों के नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने, शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में विकास के मोर्चे पर की गई कुछ पहलों का विवरण इस प्रकार है:

  • सड़कों के नेटवर्क के विस्तार हेतु, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए दो खास योजनाओं – सड़क आवश्यकता योजना (आरआरपी) और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क कनेक्टिविटी परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) – के तहत 4,314 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गई हैं। इसके अलावा, भारत सरकार ने पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न इलाकों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा 127.08 किलोमीटर महत्वपूर्ण सड़कों और 06 महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण को भी मंजूरी दी है।
  •  दूरसंचार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने हेतु, कुल 1511 टावर लगाए गए हैं।
  • कौशल विकास हेतु, कुल 09 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 14 कौशल विकास केन्द्र (एसडीसी) खोले गए हैं।
  • जनजातीय इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 45 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (ईएमआरएस) शुरू किए गए हैं।
  • वित्तीय समावेशन हेतु, डाक विभाग ने बैंकिंग सेवाओं से लैस 1,508 डाकघर खोले हैं। साथ ही, 413 बैंक शाखाएं और 269 एटीएम भी खोले गए हैं।
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच बेहतर बनाने हेतु, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत जगदलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू किया गया है। इस सुविधा से बस्तर के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं अब और अधिक सुलभ हो गई हैं, जिससे मरीजो को इलाज के लिए दूर के शहरों में जाने की जरूरत कम हो गई है।
  • स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हक को सुनिश्चित करने हेतु, लाभार्थियों को 5,34,068 मालिकाना हक के दस्तावेज (टाइटल डीड) वितरित किए गए हैं। इनमें 4,81,432 व्यक्तिगत और 52,636 सामुदायिक मालिकाना हक के दस्तावेज शामिल हैं। छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में स्थानीय स्व-शासन को और सुदृढ़ करने हेतु, गृह मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर एक संयुक्त योजना बना रहा है। ये कदम वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हुए इलाकों में सामुदायिक अधिकारों को मजबूत करने और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे सात जिलों में एक स्वतंत्र एजेंसी के जरिए एक सर्वेक्षण कराया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं एवं विकासात्मक पहलों के कवरेज के स्तर और आजीविका के सृजन की संभावनाओं का आकलन करना था। इस सर्वेक्षण में शिक्षा के स्तर, स्वास्थ्य संबंधी संकेतकों और प्राथमिक विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों एवं द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी एकत्रित की गई है। इस सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी केन्द्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को विकास संबंधी अंतर को कम करने तथा आजीविका सुनिश्चित करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद कर रही है।

युवाओं और स्थानीय समुदायों को रचनात्मक तरीके से जोड़ने हेतु, भारत सरकार ‘ट्राइबल यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (टीवाईईपी)’ चलाती है। इस कार्यक्रम के तहत, छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों के जनजातीय समुदाय के युवाओं को देश के विभिन्न  हिस्सों में एक सप्ताह के जानकारी बढ़ाने वाले दौरे (एक्सपोजर विजिट) पर ले जाया जाता है। यह कार्यक्रम उन्हें अलग-अलग इलाकों एवं पृष्ठभूमि के लोगों से मिलने-जुलने का मौका देता है। इससे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ती है और देश की औद्योगिक व विकासात्मक प्रगति की जानकारी मिलती है। वर्ष 2014 से अब तक छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों के कुल 37,655 जनजातीय युवाओं ने टीवाईईपी में हिस्सा लिया है।

इसके अलावा, ‘सिविक एक्शन प्रोग्राम’ के तहत, भारत सरकार छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों में तैनात केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को फंड देती है। इस फंड का सदुपयोग वे अपने अभियान वाले इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाने, खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने और स्थानीय समुदायों के बीच आवश्यक सामग्रियां वितरित करने जैसी विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों में करते हैं। इससे सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच की दूरी कम करने में बहुत मदद मिली है। वर्ष 2014 से अब तक, इस योजना  के तहत छत्तीसगढ़ समेत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाकों में तैनात सीएपीएफ को कुल 221.88 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है।

सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों की सरकारों की सहायता करती है। इसके लिए वह केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल और इंडिया रिजर्व बटालियन उपलब्ध कराती है, हेलीकॉप्टर की सहायता देती है, सुरक्षा शिविरों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करती है, प्रशिक्षण देती है, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए फंड एवं हथियार व उपकरण देती है, खुफिया जानकारी साझा करती है और सुरक्षित पुलिस थाने निर्मित करवाती  है।  

  • वर्ष 2014-15 से राज्यों की क्षमता बढ़ाने हेतु, ‘सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई)’ योजना के तहत पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे राज्यों को कुल 3805.04 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि सुरक्षा बलों के संचालन संबंधी खर्च एवं प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवाद के कैडरों के पुनर्वास, और वामपंथी उग्रवाद द्वारा की गई हिंसा में मारे गए सुरक्षा बल के जवानों/नागरिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि देने जैसे कामों के लिए दी गई है। एसआरई योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को कुल 1453.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  •  “पुलिस बलों के आधुनिकीकरण” की योजना के तहत अपने पुलिस बलों को आधुनिक बनाने तथा जरूरी संसाधनों से लैस करने के राज्यों के प्रयासों को और ठोस किया गया है। इस योजना के तहत, राज्य सरकारों को हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के उपकरण, दूरसंचार व्यवस्था, प्रशिक्षण, पुलिस थानों के निर्माण, आवाजाही की सुविधा, पुलिस कर्मियों के लिए आवास और अन्य पुलिस अवसंरचना आदि के लिए केन्द्र सरकार की और से सहायता प्रदान की जाती है। इसकी एक उप-योजना यानी ‘विशेष बुनियादी ढांचा योजना (एसआईएस) के तहत, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में संबंधित राज्य के विशेष बलों, विशेष खुफिया शाखाओं (एसआईबी), जिला पुलिस को मजबूत करने और सुरक्षित पुलिस थानों (एफपीएस) के निर्माण हेतु 1,761 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसमें से छत्तीसगढ़ को 451.2 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सुरक्षा संबंध बुनियादी ढांचे पर भारत सरकार का ध्यान बहुत अहम रहा है। अब तक 663 सुरक्षित पुलिस थानों का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें से 135 छत्तीसगढ़ में निर्मित किए गए हैं। एसआईएस-2017-21 और एसआईएस-2022-26 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को 110.34 करोड़ रुपये (केन्द्रीय हिस्से का 60 प्रतिशत) जारी किए गए हैं।
  • ‘वामपंथी उग्रवाद के प्रबंधन हेतु केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएमएस)’ योजना के तहत, शिविरों के बुनियादी ढांचे और वामपंथी उग्रवाद-विरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के जरिए 2014-15 से केन्द्रीय एजेंसियों को कुल 1303.68 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
  • पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित रहे जिलों के विकास को गति देने हेतु, ‘विशेष केन्द्रीय सहायता (एससी) योजना’ के तहत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में अहम कमियों को पूरा करने के लिए फंड दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक, छत्तीसगढ़ राज्य को लगभग 1715.83 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  • वामपंथी उग्रवादियों की आर्थिक आपूर्ति को रोकने और सीपीआई (माओवादी) तथा उनके आर्थिक समर्थकों के बीच के गठजोड़ का पर्दाफाश करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। केन्द्रीय एजेंसियों के सहयोग से राज्य पुलिस द्वारा विभिन्न तरीकों से की गई समन्वित कार्रवाई से अतीत में वामपंथी उग्रवादियों को मिलने वाले फंड और संसाधनों को रोकने में काफी सफलता मिली है।

वामपंथी उग्रवादियों को मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, भारत सरकार और राज्य सरकारों ने व्यापक ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीतियां तैयार की हैं। भारत सरकार, ‘सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई)’ योजना के तहत ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीति के माध्यम से इस प्रयास में भी राज्यों की सहायता करती है।

भारत सरकार, एसआरई योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास पर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों द्वारा किए गए खर्च की भरपाई करती है। पुनर्वास पैकेज में, अन्य चीजों के अलावा, वामपंथी उग्रवाद के ऊंचे पद वाले कैडरों के लिए 5 लाख रुपये और वामपंथी उग्रवाद के अन्य कैडरों के लिए 2.5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि शामिल है। इसके अलावा, इस योजना के तहत हथियार/गोला-बारूद समर्पित करने पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इसमें उनकी पसंद के क्षेत्र/व्यवसाय में प्रशिक्षण देने और तीन वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये का स्टाइपेंड देने का भी प्रावधान है। राज्यों को आकर्षक ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीतियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।

वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन के बाद की स्थिति में, भारत सरकार का ध्यान आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के पुनर्वास में मदद करने, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को पूर्ण रूप से कार्यान्वित करने, स्थानीय स्व-शासन को मजबूत करने, जनजातीय पहचान एवं संस्कृति को संरक्षित करने और दूर-दराज के इलाकों में शासन व सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर है।

इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने के बाद, वामपंथी उग्रवाद से मुक्त इलाकों में मौजूद एक-तिहाई सुरक्षा शिविरों को ‘जन सुविधा केन्द्रों’ में बदला जा रहा है। ये केन्द्र स्थानीय समुदायों को आजीविका को प्रोत्साहित करने, कौशल विकास, सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने, डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाएं और सांस्कृतिक व खेल-कूद की सुविधाएं  सुलभ कराने जैसी विभिन्न प्रकार की सेवाएं देंगे। पहला ‘जन सुविधा केंद्र’ छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में नेतानार में ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा केन्द्र’ के रूप में शुरू किया गया है।

कुल मिलाकर, भारत सरकार पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे देश के विभिन्न जिलों में सुरक्षा और तेजी से विकास सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

यह जानकारी गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

Read More »

प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन के सात वर्ष पूरे होने पर उसके महत्व के बारे में बताया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अनुच्छेद 370 और 35(ए) के ऐतिहासिक निरसन के सात साल पूरे होने पर 5 अगस्त, 2019 को भारत के समावेशी विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

श्री मोदी ने कहा कि पिछले सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव देखा है। इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और खेल के क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। श्री मोदी ने यह भी कहा, “महिलाएं और हाशिए वाले समुदायों के सदस्य, अब भारत के संविधान के भरपूर कार्यान्वयन के माध्यम से सशक्त हुए हैं, जो दशकों से अनेक संवैधानिक अधिकारों से वंचित थे।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की जयंती का विशेष महत्व है क्योंकि देश डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के प्रति डॉ. मुखर्जी की आजीवन प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और उनके द्वारा प्रतिपादित दृष्टिकोण को 5 अगस्त, 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार होते देखा गया।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को बड़े सपने देखने, अपनी आकांक्षाओं को साकार करने और एक विकसित भारत की परिकल्पना में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

सात साल पहले, इसी दिन, अनुच्छेद 370 और 35(ए) इतिहास बन गए, जिसने जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नए अध्याय की शुरुआत की।

तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आया है। इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हुआ है, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता और खेल जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़े हैं। चाहे महिलाएं हों या हाशिए वाले समुदाय के लोगों को भारत के संविधान के भरपूर कार्यान्वयन के कारण सशक्त बनाया गया है, जिन्हें दशकों तक बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया था।

इस वर्ष 5 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन हमारा देश डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है। राष्ट्रीय एकता के प्रति उनका आजीवन समर्पण पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है। दशकों पहले उन्होंने जो कल्पना की थी, वह 5 अगस्त, 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार हुई।

हम जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक नागरिक को बड़े सपने देखने, उन्हें हासिल करने और एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का अवसर मिले।

Read More »

आज देश विदेश के मुख्य समाचार

दैनिक भारतीय स्वरूप 🌉 मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले, G–7 समिट में दोनों ने 5 मिनट बात की; मोदी से मेलोनी बोलीं- हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस

🔶कई भारतीयों की जान गई, PM मोदी ने नाविकों का मुद्दा G7 में ट्रंप के सामने उठाया

🔶TMC के दोनों गुटों का पक्ष सुनेंगे स्पीकर: ममता खेमे को भी बुलाया; बागी सांसदों के NCPI में विलय के दावे पर कानूनी राय लेंगे

🔶आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से जवाब मांगा; दावा- अभी पता और जन्मतिथि का सबूत माना जा रहा

🔶उद्धव की सेना फिर टूटेगी?: शिंदे के साथ जाने की तैयारी में करीब सात सांसद, राउत का दावा- 15 करोड़ ₹ दिए एडवांस

🔶ईरान से डील और ट्रंप की धमकी भी बेअसर… लेबनान पर फिर इजरायल का ताबड़तोड़ हमला, 4 की मौत

🔶’कुछ न कुछ गड़बड़ी हुई है, दोषियों पर कार्रवाई होगी’, रोशन आनंद और खान कोचिंग विवाद पर बोले चिराग पासवान

🔶राम मंदिर में चंदा चोरी: 2021 से अब तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है एसआईटी, जिम्मेदारों की भी पड़ताल शुरू

 

🔶जी7 में दिखी भारत की कूटनीतिक ताकत: पीएम मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से की अहम मुलाकातें

🔶G7 Summit : ‘हम Instagram पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं’, मेलोनी के जवाब पर मुस्कुराए PM मोदी

🔶Jammu Kashmir Breaking : राजौरी में LoC के पास Blast, JCO सहित 4 जवान घायल

🔶किशाऊ बांध विवाद खत्म, हिमाचल को राहत: हरियाणा-दिल्ली-राजस्थान उठाएंगे बिजली कंपोनेंट खर्च; शाह के साथ मीटिंग में बनी सहमति

🔶अन्नामलाई 14 सितंबर को अपनी पार्टी घोषित करेंगे: टीम में 50 से कम उम्र के ही सदस्य होंगे; ‘वी द लीडर’ आंदोलन चला रहे

🔶झारखंड राज्यसभा चुनाव; NDA ने 24 विधायकों की घेराबंदी की: रेडिसन ब्लू होटल में 32 कमरे बुक किए गए, दो सीटों पर 3 उम्मीदवार

🔶भास्कर अपडेट्स: तेलंगाना में 735 डॉक्टर साइबर ठगी के शिकार, ₹30 करोड़ गंवाए

🔶केंद्र सरकार का बड़ा फैसला- बिना डॉक्टर की पर्ची के अब नहीं मिलेगी कफ सिरप

🔶दिल्ली को दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड, 7 गिरफ्तार

🔶शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 544 अंक उछल कर 76,808 पर बंद

🔷वैभव सूर्यवंशी से भिड़ना पड़ा भारी, श्रीलंकाई खिलाड़ी पर गिरी गाज; मैच रेफरी ने सुनाई सजा।

मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले, G–7 समिट में दोनों ने 5 मिनट बात की; मोदी से मेलोनी बोलीं- हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस

US हमले में 3 भारतीयों की मौत पर ट्रंप के सामने PM मोदी की दो टूक, जी-7 के मंच से दुनिया को दिया संदेश

जी7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज यानी 17 जून को द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस द्विपक्षीय बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका से ऊर्जा आयात जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है

भारतीय वायुसेना के लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 87 उन्नत स्वदेशी यूएवी खरीदे जाएंगे। इसके लिए करीब 10 घरेलू कंपनियों ने बोलियां जमा कर दी हैं। यह कदम चीन-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने में मील का पत्थर साबित होगा

राहुल गांधी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देशव्यापी अभियान का नेतृत्व करेंगे। इसकी शुरुआत आज से राजस्थान के कोटा से होगी।  राजस्थान के बाद 10 जुलाई को प्रयागराज, 11 जुलाई को पटना और 14 जुलाई को दिल्ली में भी इस तरह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस इस अभियान के तहत लोगों को इकट्ठा करेगी। पार्टी का दावा है कि इस अभियान में छात्र, परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा, युवा संगठन, शिक्षक और परीक्षा घोटालों से सीधे प्रभावित सभी लोग शामिल होंगे

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना जब्त, 50 करोड़ की बेनामी संपत्तियां भी पता चलीं

राम मंदिर का करोड़पति कर्मचारी टिन्नू यादव सामने आया, बोला- ऑटो चलवाकर कमाए रुपए; चढ़ावा चोरी की 3 शिकायत, FIR अबतक नहीं

उद्धव की सेना फिर टूटेगी?: कई सांसदों के फोन बंद, बगावत की अटकलें तेज; संजय राउत बोले- 15-15 करोड़ दिए एडवांस

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह से सात सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। इस बीच शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दिल्ली पहुंचने की खबरों ने अटकलों को और हवा दे दी है। वहीं, पार्टी नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी रकम की पेशकश की जा रही है

कमजोर मानसून के चलते मुंबई में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले बांधों में जलस्तर तेजी से घटने के कारण सिर्फ 10.35 प्रतिशत जल भंडारण शेष रह गया है। बीएमसी ने जल संकट को देखते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।

मानसून में देरी के चलते मुंबई में पानी की संकट गहरा गया है। आर्थिक राजधानी के जलाशयों के जलस्तर घटकर 10.35 प्रतिशत रह जाने के मद्देनजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने औद्योगिक, व्यावसायिक और खेल प्रतिष्ठानों को होने वाली जलापूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की। बीएमसी ने निर्माण कार्य परियोजनाओं और स्विमिंग पूलों के लिए पानी के कनेक्शन भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं

एअर इंडिया ने शुरू की ‘बेसिक’ किराया कैटेगरी, मुफ्त खाना नहीं मिलेगा, चाय-कॉफी कॉम्प्लीमेंट्री रहेगी; चुनिंदा घरेलू रूट्स पर ट्रायल शुरू

ट्रम्प बोले-ईरान को ₹28 लाख करोड़ देने की बात फर्जी, यह झूठ विपक्ष ने फैलाया; नेतन्याहू पर कहा- मैं न होता, तो इजराइल नहीं होता

अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के संकेतों के बीच कच्चे तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आपूर्ति बाधित होने, ऊर्जा ढांचों को हुए नुकसान और सीमित भंडार के कारण वैश्विक ईंधन बाजारों में आने वाले कई महीनों तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है

राजस्थान में धूल का गुबार, एमपी में आंधी-बारिश, 6 दिन से तेलंगाना में अटका मानसून, उत्तर भारत में बारिश का इंतजार बढ़ा

विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप: श्रीलंका की न्यूजीलैंड पर बड़ी जीत, टूर्नामेंट में पहली बार कीवियों को हराया; इंग्लैंड की लगातार दूसरी जीत, आयरलैंड को हराया।

Read More »

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विश्व पर्यावरण दिवस पर सभी से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने की अपील की

उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

 

Read More »

उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं केएफसीएल प्रबंधन का असहयोगात्मक रवैया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 30 मई अतिरिक्त श्रम आयुक्त के आदेश के अनुपालन में श्रमिक श्रम कार्यालय एवं तत्पश्चात केएफसीएल परिसर में उपस्थित हुए। हमारा उद्देश्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त राहत के अनुरूप नौकरी बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।

कई घंटों की प्रतीक्षा एवं वार्ता के उपरांत श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री सुरेश सिंह एवं श्री हेमंत कुमार द्वारा हमें अवगत कराया गया कि केएफसीएल प्रबंधन के विधिक सलाहकार एस. एल. मुखर्जी ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि “ये मेरे श्रमिक नहीं हैं, मैं इन्हें नहीं रखूंगा।”

यदि यह कथन सही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि यह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश एवं श्रमिकों को प्रदान किए गए वैधानिक संरक्षण की भावना के प्रतिकूल प्रतीत होता है। हम पिछले लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की अपेक्षा कर रहे हैं, किंतु प्रबंधन का यह रवैया अत्यंत निराशाजनक एवं चिंताजनक है।

आज की बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि प्रबंधन हमारी नौकरी बहाली के संबंध में सकारात्मक कदम उठाने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहा है। हम सभी श्रमिक कई घंटों तक भीषण गर्मी में प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन अंततः हमें यह जानकारी दी गई कि प्रबंधन हमें कर्मचारी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हम माननीय उच्च न्यायालय, श्रम विभाग तथा समस्त सक्षम प्राधिकारियों से मांग करते हैं कि इस प्रकरण का संज्ञान लेते हुए न्यायालय के आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।

हम मीडिया जगत से भी अनुरोध करते हैं कि श्रमिकों के इस न्यायसंगत संघर्ष को जनता तक पहुंचाएं, ताकि सत्य सामने आए और श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और अपने वैधानिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए है।

Read More »

धर्मेन्द्र प्रधान ने नई दिल्ली में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश लॉन्‍च किए। इस अवसर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद; छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव; स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव  संजय कुमार; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव  अशोक कुमार मीणा तथा डीओएसईएल की अतिरिक्त सचिव अर्चना एस. अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में  धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश–2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के विज़न को देश के लगभग 15 लाख विद्यालयों में कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों में एसएमसी को विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिससे सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा में साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

 

श्री प्रधान ने इस बात पर बल दिया कि जहाँ एक ओर  सरकार बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए समर्थन सुनिश्चित करने के प्रति वचनबद्ध है, वहीं एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने में सहयोग, मार्गदर्शन और सामुदायिक स्वामित्व के महत्व को भी मान्यता देते हैं। उन्होंने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य एसएमसी को शैक्षिक परिणामों में सुधार की एक स्‍थायी संस्कृति और जन-आंदोलन के रूप में विकसित करना है। विद्यांजलि जैसी पहलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से सामुदायिक नेतृत्व के अंतर्गत फली-फूली है, और नए एसएमसी दिशा-निर्देश विद्यालयों को पुनः सामाजिक सहभागिता के केंद्र में स्थापित कर उसी भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हैं। अपने संबोधन में  आशीष सूद ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल नए दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे गहन और परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करना है, तो उसका मार्ग देश की कक्षाओं से होकर ही गुजरेगा।

सूद ने नवप्रारंभित एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 को इस परिवर्तनकारी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद प्रारंभ किया गया पूर्ववर्ती एसएमसी ढाँचा मुख्यतः अनुदान निगरानी, अवसंरचना पर्यवेक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित था। किंतु आज की चुनौतियाँ और अपेक्षाएँ काफी बदल चुकी हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), डिजिटल पारदर्शिता, अधिगम (लर्निंग) परिणाम तथा सामुदायिक भागीदारी जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। नए एसएमसी दिशा-निर्देशों को इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मंत्री महोदय ने बल देते हुए कहा कि ये दिशा-निर्देश एसएमसी को मात्र निगरानी निकाय से आगे बढ़ाकर वास्तविक “विद्यालय समुदाय प्रशासनिक संस्थान” में परिवर्तित करते हैं। अब एसएमसी समग्र बाल विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता, छात्र कल्याण, सुरक्षा, समावेशन, डिजिटल प्रशासन तथा पारदर्शिता में सक्रिय योगदान देंगी। अपने संबोधन के अंत में श्री सूद ने विश्वास व्यक्त किया कि एसएमसी दिशा-निर्देश 2026 सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

अपने संबोधन में श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के नेतृत्व में प्रस्तुत किए गए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देश विद्यालय प्रबंधन और संचालन में स्थानीय अभिभावकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित कर अभिभावकों और विद्यालयों के बीच की दूरी को कम करने में सहायक होंगे।

बैठक में हरियाणा के स्कूल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा; महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा एवं मराठी भाषा मंत्री श्री दादाजी भुसे; मिजोरम के स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना; त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री किशोर बर्मन; उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री श्री धन सिंह रावत; तथा नागालैंड के उच्च शिक्षा मंत्री श्री तेमजेन इम्ना आलोंग सहित कई राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया

स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशा-निर्देशों हेतु जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

https://dsel.education.gov.in/sites/default/files/guidelines/School_Management_Committee_Guidelines.pdf

Read More »

भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन क्षमता चालू की

भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन-एनजीएचएम को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण नीचे दिया गया है:

निधि आवंटन (करोड़ रुपये में)

(संशोधित अनुमान)

उपयोग

(करोड़ रुपये में)

वित्तीय वर्ष 2023-24 100 0.11
वित्तीय वर्ष 2024-25 300 46.26
वित्तीय वर्ष 2025-26

( 19 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार )

300 203.75

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से खोजी गई हरित हाइड्रोजन की लागत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को आपूर्ति के लिए  397 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरियों को आपूर्ति के लिए 387 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है।

विश्व बैंक समूह की “हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत, यानी लगभग 235 रुपये प्रति किलोग्राम, हिस्सा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

Read More »