रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 02 जून, 2022 को नई दिल्ली में इजरायल के रक्षा मंत्री श्री बेंजामिन गैंट्ज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और रक्षा औद्योगिक सहयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य गतिविधियों की समीक्षा की, जोकि कोविड – 19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद बढ़ी हैं। उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों तथा रक्षा सह-उत्पादन में अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ रक्षा से संबंधित सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
दोनों मंत्रियों ने पारस्परिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और सामरिक एवं रक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर आपसी तालमेल को रेखांकित किया। उन्होंने सभी मंचों पर सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। भारत-इजरायल रक्षा सहयोग के मौजूदा ढांचे को और अधिक मजबूत करने के इरादे से, दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग से संबंधित भारत-इजरायल विजन को अपनाया। दोनों मंत्रियों के बीच भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के संबंध में एक आशय पत्र का आदान-प्रदान भी किया गया।
इससे पहले दिन में, इज़राइल के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा किया और स्मारक पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले उन्हें पारंपरिक रूप से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इज़राइल के रक्षा मंत्री 02 जून, 2022 की सुबह भारत की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह उनकी पहली भारत यात्रा है। रक्षा सहयोग द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक रहा है। इस वर्ष भारत और इज़राइल के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ है।
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भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रधान डाकघर, वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम में वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने प्रधानमंत्री के सलाहकार रहे श्री भाष्कर खुल्बे और जीआई एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ. रजनीकांत संग तीन जीआई यानी भौगोलिक संकेतक उत्पादों – बनारस जरदोज़ी, बनारस हैण्ड ब्लॉक प्रिंट और बनारस लकड़ी की नक्काशी पर विशेष आवरण और विरूपण जारी किया। इसी के साथ अब तक वाराणसी क्षेत्र से संबंधित 11 जीआई उत्पादों पर डाक विभाग विशेष आवरण जारी कर चुका है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार रहे श्री भाष्कर खुल्बे ने डाक विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीआई उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। जीआई उत्पाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को साकार करते हुए वैश्विक स्तर पर भी अपनी ब्रांडिंग बनाने में कामयाब हो रहे हैं और ‘लोकल’ से ‘ग्लोबल’ की अवधारणा को फलीभूत कर रहे हैं। जीआई सिर्फ भौगोलिक संकेतक मात्र नहीं बल्कि ‘गिफ्ट फ्रॉम इंडिया’ भी हैं।वाराणसी डाक क्षेत्र देश भर में जी. आई. उत्पादों पर सबसे ज्यादा विशेष आवरण जारी करके अग्रणी रहा है। श्री खुल्बे ने कहा कि जीआई उत्पादों को डाक विभाग के माध्यम से सीधे उत्पादकों से लेकर उपभोक्ताओं तक डाकिया द्वारा पहुँचाया जा रहा है। इससे अर्थव्यवस्था को भी काफी फायदा होगा। स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस तरह से जीआई उत्पादों को आगे बढ़ाने की पहल की है, उससे इसे ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ रूप में नए आयाम मिल रहे हैं। पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि वाराणसी के जीआई उत्पाद विश्व भर में अनोखी पहचान रखते हैं और इस कला को यहाँ के कारीगरों ने पुश्त दर पुश्त सदियों से सहेज रखा है। इन विशेष आवरण (लिफाफों) के माध्यम से बनारस की पारम्परिक हस्तशिल्प, कारीगरी और यहाँ की संस्कृति देश -विदेश में प्रचार-प्रसार पायेगी। श्री यादव ने कहा कि इससे पूर्व भी वाराणसी जिले से संबंधित 06 जीआई उत्पादों – बनारस ब्रोकेड और साड़ी, बनारस गुलाबी मीनाकारी क्रॉफ्ट, वाराणसी सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क, वाराणसी लकड़ी के लाख और खिलौने, बनारस मेटल रिपोज क्रॉफ्ट और वाराणसी ग्लास बीड्स पर विशेष आवरण और विशेष विरूपण जारी किया जा चुका है। चूँकि डाक विभाग की पहुँच सर्वत्र है, ऐसे में इसके माध्यम से जीआई उत्पाद भी घर-घर पहुंच सकेंगे। इंटरनेशनल बिजनेस सेंटर के माध्यम से जहाँ जीआई उत्पाद विदेशों में भेजे जा रहे हैं, वहीं अब पार्सल पैकेजिंग यूनिट की स्थापना कर इनका प्रेषण और भी सुचारू बनाया जा रहा है। जीआई एक्सपर्ट पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने कहा कि एक भूक्षेत्र में सर्वाधिक जीआई का रिकार्ड भी वाराणसी के नाम है। उत्तर प्रदेश के 34 में से 18 जीआई उत्पाद वाराणसी और इसके आसपास के जिलों से हैं, जिनका सालाना कारोबार करीब 22,500 करोड़ रूपये का है। जीआई उत्पादों से वाराणसी और आसपास के लगभग 20 लाख कारीगर जुड़े हुए हैं। अभी वाराणसी के 10 और उत्पादों को जीआई टैग मिलने की प्रक्रिया चल रही है। आने वाले दिनों में बनारस के एग्रो उत्पाद, हॉर्टिकल्चर उत्पाद, विशिष्ट चावल और मिठाईयों को भी जीआई टैग दिलवाने का प्रयास जारी है। इस अवसर पर वाराणसी पूर्व मंडल के प्रवर अधीक्षक डाकघर राजन, सीनियर पोस्ट मास्टर चंद्रशेखर सिंह बरुआ, सहायक निदेशक ब्रजेश शर्मा, सहायक अधीक्षक एसके चौधरी, आरके चौहान, पंकज श्रीवास्तव, अजय कुमार, सुरेश चन्द्र, नरेश बारा सहित डाक विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारीगण, जीआई उत्पाद से जुड़े कारीगर और विशेषज्ञ इत्यादि उपस्थित रहे।
हब व्यापक डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ देश भर में इसके प्रसार और रुपांतरण में बुनियादी और प्रायौगिक अनुसंधान को समन्वित, एकीकृत और बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। प्राथमिक उद्देश्यों में से एक शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योग, मुख्य रूप से स्मार्ट मोबिलिटी, हेल्थकेयर के साथ-साथ स्मार्ट बिल्डिंग के क्षेत्रों में भविष्य के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन तैयार करना है। जो बात आईआरएएसटीई परियोजना को और भी अद्वितीय बनाती है वह यह है कि एआई और प्रौद्योगिकी को भारतीय परिस्थितियों के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में व्यावहारिक समाधान बनाने के लिए लागू किया जा रहा है। जबकि आईआरएएसटीई प्रारंभ में नागपुर में उपलब्ध है, अंतिम लक्ष्य अन्य शहरों में इसे दोहराना है। वर्तमान में, उन बसों के बेड़े के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की तेलंगाना सरकार के साथ बातचीत चल रही है जो राजमार्गों पर चलती हैं। आईआरएएसटीई के दायरे को गोवा और गुजरात में भी विस्तारित करने की योजना है। आई-हब फाउंडेशन ने मोबिलिटी क्षेत्र में कई अन्य डेटा-संचालित तकनीकी समाधानों के लिए मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विज़न और कम्प्यूटेशनल सेंसिंग से लेकर तकनीकों का भी उपयोग किया है। ऐसा ही एक समाधान इंडिया ड्राइविंग डेटासेट (आईडीडी) है, जो भारतीय सड़कों के अव्यवस्थित वातावरण में सड़क के दृश्य को समझने के लिए एक डेटासेट है, जो अच्छी तरह से वर्णित बुनियादी ढांचे की दुनिया भर की धारणाओं जैसे कि गलियाँ, सीमित ट्रैफिक प्रतिभागी, वस्तु या पृष्ठभूमि की उपस्थिति में कम भिन्नता और ट्रैफिक नियमों के मजबूत पालन से स्पष्ट होता है। डेटासेट, अपनी तरह का पहला है, जिसमें 10,000 चित्र शामिल हैं, जिसकी हैदराबाद, बैंगलोर और उनके बाहरी इलाके में चल रही एक कार से जुड़े फ्रंट-फेसिंग कैमरे से प्राप्त भारतीय सड़कों पर 182 सड़क श्रेणियों से एकत्र 34 वर्गों के साथ बारीकी से व्याख्या की गई है। सार्वजनिक लाइसेंस के तहत अप्रतिबंधित उपयोग के लिए सार्वजनिक डोमेन में डेटासेट जारी किया गया है और भारतीय सड़क दृश्यों पर सभी विश्लेषण के लिए एक वास्तविक डेटासेट बन रहा है। वर्तमान में, दुनिया भर में इस डेटासेट के लिए 5000 से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। ओपन वर्ल्ड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन ऑन रोड सीन (ओआरडीईआर) नामक एक अन्य डेटासेट को भी इंडिया ड्राइविंग डेटासेट का उपयोग करके विकसित किया गया है जिसका उपयोग भारत की ड्राइविंग स्थितियों में स्वायत्त नेविगेशन प्रणाली द्वारा सड़क दृश्य में वस्तु के स्थानीयकरण और वर्गीकरण के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, एक मोबिलिटी कार डेटा प्लेटफ़ॉर्म (एमसीडीपी) को कई सेंसरों के साथ डिज़ाइन किया गया है – कैमरा, एलआईडीएआर, किसी को भी कार के बारे में डेटा लेने या प्रोसेस करने के लिए आवश्यक गणना के साथ, जो भारत में शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप को उनके ऑटोमोटिव एल्गोरिदम और नेविगेशन तथा भारतीय सड़कों पर शोध में दृष्टिकोण का परीक्षण करने में मदद कर सकता है। लेन रोडनेट (एलआरनेट), एक एकीकृत तंत्र के साथ एक नया ढांचा है, जिसमें गहरे अध्ययन का उपयोग करते हुए लेन और सड़क के मापदंडों पर विचार किया गया है, जिसे भारतीय सड़कों की समस्याओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें कई बाधाएं हैं, बंद लेन के निशान, टूटे हुए डिवाइडर, दरारें, गड्ढे आदि हैं जो गाड़ी चलाते समय ड्राइवर के लिए काफी जोखिम खड़े करते हैं। इस ढांचे में, एक मॉड्यूलर स्कोरिंग फ़ंक्शन की मदद से एक सड़क गुणवत्ता स्कोर की गणना की जाती है। फाइनल स्कोर अधिकारियों को सड़क की गुणवत्ता का आकलन करने और सड़क के रख-रखाव कार्यक्रम को प्राथमिकता देने में मदद करता है ताकि ड्राइवर को गाड़ी चलाने के लिए सुधरी हुई स्थितियां मिल सकें। जिन सड़कों पर वृक्ष नहीं हैं वहां उपयुक्त कायाकल्प विधियों को प्रयोग में लाकर स्थानीय स्व-सरकारी संस्थानों की मदद के लिए, आई-हब फाउंडेशन ने सड़क पर पेड़ का पता लगाने, गणना और कल्पना के लिए एक रूपरेखा तैयार की है जो ऑब्जेक्ट डिटेक्टरों और एक मैचिंग काउंटिंग एल्गोरिदम का उपयोग करती है। इस कार्य ने पेड़ों की कमी वाली सड़कों को पहचानने का त्वरित, सटीक और सस्ते तरीके का पता लगाने का मार्ग प्रशस्त किया है ।