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दो साल में 509 कृषक परिवारों को 23.84 करोड़ की राहत

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में प्रकरणों की गहन जांच, पात्र आश्रितों तक पहुंच रही आर्थिक सहायता*

दैनिक भारतीय स्वरूप जिला सूचना कार्यालय कानपुर नगर। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दुर्घटना में अपनों को खोने वाले कृषक परिवारों के लिए आर्थिक संबल बन रही है। जनपद में वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 509 दावों के सापेक्ष 23 करोड़ 84 लाख 40 हजार रुपये की सहायता पात्र लाभार्थियों एवं मृतकों के आश्रितों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 341 दावों के सापेक्ष 16 करोड़ 56 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 168 दावों के सापेक्ष 7 करोड़ 27 लाख 50 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन की नीति के अनुरूप मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ प्रत्येक पात्र कृषक परिवार तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी पात्र परिवार अथवा आश्रित को केवल तकनीकी अथवा अपूर्ण तथ्यों के आधार पर योजना के लाभ से वंचित न किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर प्रकरण की पुनः जांच कर राजस्व अभिलेखों के साथ वास्तविक कृषि कार्य एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पात्रता निर्धारित की जाए।

*सड़क हादसे में रामसिंह की मौत, पत्नी तारापती को मिला योजना का सहारा*

घाटमपुर के ग्राम कुंवाखेड़ा निवासी रामसिंह की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। रामसिंह कृषि कार्य के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और राजस्व अभिलेखों में कृषि भूमि के सहखातेदार भी दर्ज थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में लगी गंभीर चोटों के कारण कोमा में जाने का उल्लेख था। ग्रामवासियों के बयान और पंचनामा में भी शरीर में आई गंभीर चोटों के कारण मृत्यु की बात सामने आई।

प्रकरण के पुनः परीक्षण में इन साक्ष्यों के आधार पर रामसिंह की मृत्यु दुर्घटनाजनित होना स्थापित हुआ। जिला स्तरीय समिति ने उन्हें योजना में निर्धारित कृषक की श्रेणी में माना। इसके आधार पर उनकी पत्नी तारापती का दावा पात्र मानते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

*सिर्फ ‘शराब की गंध’ को नहीं माना अपात्रता का आधार*

नर्वल तहसील के ग्राम कनवांपुर, तिलसहरी खुर्द निवासी सुरेंद्र कुमार पाल की कृषि कार्य करते समय दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी नेहा देवी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए दावा किया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज ‘शराब की गंध’ के आधार पर उनका दावा पूर्व में अस्वीकार कर दिया गया था।

प्रकरण के पुनः परीक्षण में सामने आया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहीं यह उल्लेख नहीं था कि मृतक के रक्त में एल्कोहल की मात्रा विधिक अथवा चिकित्सकीय रूप से निषिद्ध सीमा से अधिक थी। किसी रासायनिक अथवा फोरेंसिक रिपोर्ट से भी यह प्रमाणित नहीं था कि दुर्घटना नशे के कारण हुई थी। जिला स्तरीय समिति ने माना कि केवल ‘शराब की गंध’ के उल्लेख के आधार पर किसी कृषक परिवार को लोक कल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेहा देवी का दावा पात्र मानते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

*पिता के नाम थी जमीन, लेकिन बेटा संभालता था खेती; पत्नी भूरी को मिला हक*

घाटमपुर तहसील के ग्राम कोटरा में कृषि भूमि मृतक के नाम दर्ज नहीं थी, बल्कि उसके पिता जगदीश राजस्व अभिलेखों में 1.1060 हेक्टेयर कृषि भूमि के सहखातेदार थे। पिता के अस्वस्थ रहने के कारण खेती की जिम्मेदारी बेटे ने संभाल रखी थी। वह खेत में कृषि कार्य करता और इसी से परिवार का भरण-पोषण करता था।

बेटे की दुर्घटना में मृत्यु के बाद उसकी पत्नी भूरी ने योजना के तहत आर्थिक सहायता का दावा किया। पुनः जांच में एसडीएम घाटमपुर की आख्या और ग्रामवासियों के बयानों से सामने आया कि पिता के अस्वस्थ रहने के कारण परिवार की खेती वास्तव में मृतक ही संभाल रहा था। जिला स्तरीय समिति ने माना कि भूमि उसके नाम दर्ज न होने के बावजूद वह कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ वास्तविक रूप से कृषि कार्य करता था। इसके आधार पर भूरी का दावा पात्र मानते हुए योजना का लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया।

*पिता की जमीन पर खेती के साथ बटाई पर भी लिया खेत, परिवार को मिला लाभ*

घाटमपुर के ग्राम कटरी के प्रकरण में मृतक अपने पिता रामबाबू के नाम दर्ज कृषि भूमि पर खेती करता था। इसके साथ ही वह गांव के एक अन्य व्यक्ति की 0.4400 हेक्टेयर कृषि भूमि बटाई पर लेकर भी कृषि कार्य करता था।

ग्राम प्रधान के प्रमाणपत्र एवं अन्य अभिलेखों से उसके बटाई पर भूमि लेकर वास्तविक रूप से कृषि कार्य करने की पुष्टि हुई। जिला स्तरीय समिति ने माना कि मृतक कृषक परिवार का सदस्य होने के साथ स्वयं भी बटाई पर भूमि लेकर खेती करता था, इसलिए वह योजना में निर्धारित कृषक की परिभाषा के अंतर्गत आता है। इसके आधार पर रामबाबू द्वारा प्रस्तुत दावा पात्र मानते हुए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।

*एक नजर में : मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना*

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में कृषकों और कृषि कार्य से जुड़े परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के निर्धारित प्रावधानों के तहत खातेदार एवं सहखातेदार कृषक, कृषक परिवार के सदस्य, बटाईदार तथा खेतिहर मजदूर भी पात्रता की शर्तें पूरी करने पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में अधिकतम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। दिव्यांगता की स्थिति में उसकी प्रकृति एवं निर्धारित श्रेणी के अनुसार सहायता दी जाती है।

पात्रता का निर्धारण केवल भूमि के स्वामित्व के आधार पर नहीं, बल्कि योजना के प्रावधानों के अनुसार राजस्व अभिलेख, वास्तविक कृषि कार्य तथा उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर किया जाता है।