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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार की उपस्थिति में महाराष्ट्र के संभाजी नगर और तमिलनाडु के कोयम्बटूर में सीजीएचएस सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों का उद्घाटन किया

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज केन्‍द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार की उपस्थिति में संभाजी नगर, महाराष्ट्र और कोयम्बटूर, तमिलनाडु में सीजीएचएस स्वास्थ्य और सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्द्रों (एचडब्ल्यूसी) का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्‍ट्र के सहकारिता और ओबीसी कल्याण मंत्री श्री अतुल मोरेश्वर सावे, सांसद श्री पीआर नटराजन, सांसद श्री सैयद इम्तियाज जलील, कोयम्बटूर दक्षिण से विधायक श्रीमती वनथी श्रीनिवासन भी उपस्थित थे।

इस आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा कि दो सीजीएचएस एचडब्ल्यूसी महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लोगों को अच्छी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संभाजी नगर और कोयम्बटूर में सीजीएचएस एचडब्ल्यूसी खोलने पर लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि “यह हमारी सरकार की जिम्मेदारी है कि हम अपने सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र प्रदान करें।”

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये केन्‍द्र चिकित्सा सेवाओं तक आसान पहुंच बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की लोगों को आसानी से सुलभ नजदीक में सम्‍पूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की परिकल्‍पना के अनुरूप सीजीएचएस केन्‍द्रों की संख्या 2014 के 25 से बढ़कर आज 79 हो गई है। सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सीजीएचएस सेवा में सुधार के लिए कई मोर्चों पर मिशन मोड में काम कर रहा है। इनमें उसके लाभार्थियों की शिकायत निवारण के लिए दैनिक निगरानी, ​​​​प्रतिपूर्ति निवारण, निजी अस्पतालों के नेटवर्क का विस्तार और अनेक अन्य कदम उठाए गए हैं ताकि त्वरित प्रतिपूर्ति की जा सके और लंबित मामलों की संख्‍या में कमी लाई जा सके। इस अवधि के दौरान, सीजीएचएस ने स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास के साथ गति बनाए रखने के लिए सेवाओं के डिजिटलीकरण जैसे कई बदलाव किए हैं। आज, सभी नागरिकों को सस्ती और बेहतर गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराकर लोगों की बेहतरी के लिए 9100 से अधिक जन औषधि केन्‍द्र अस्तित्व में हैं।

उन्होंने आगे कहा कि “केन्‍द्र सरकार न केवल एचडब्ल्यूसी खोलकर बल्कि कुछ और मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा पेशेवरों को बढ़ाकर और उनका प्रशिक्षण सुनिश्चित करके ‘टोकन टू टोटल’ दृष्टिकोण का पालन कर रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि आरोग्य परम भाग्यम, स्वास्थ्यम सर्वार्थ साधनम की धारणा का पालन करते हुए अर्थात अच्छा स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है, स्वास्थ्य सेवा में निवेश करना भविष्य में निवेश करने जैसा है, भारत देश भर में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार और उसे मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उन्‍होंने कहा, “देश के दूर-दराज के हिस्से तक पहुंचने के लिए टेलीकंसल्टेशन और एबीडीएम जैसे डिजिटल प्रयास किए गए हैं। जनऔषधि केन्‍द्र स्थापित किए गए हैं और आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई है। केन्‍द्र सरकार विभिन्न सुधार कर रही है ताकि “सभी के लिए स्वास्थ्य” सुनिश्चित किया जा सके।”

सभी लाभार्थियों को बधाई देते हुए और इन दो क्षेत्रों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों के अनुरोध को स्वीकार करने और उन्हें सीजीएचएस वेलनेस सेंटर उपहार में देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए, डॉ. भारती प्रवीन पवार ने कहा कि “सीजीएचएस इन केन्‍द्रों में अविरत प्रयास से तैयार नए नवाचारों और कार्य प्रणालियों के साथ पेंशनभोगियों को मजबूत कवरेज देगा”। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने सीजीएचएस के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए अनेक उपाय किए हैं। “केन्‍द्र सरकार ने देश के प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए पीएमजेएवाई, पीएम-एबीएचआईएम, एचडब्ल्यूसी जैसी कुछ महत्वाकांक्षी पहल शुरू की हैं। हमें उम्‍मीद है कि दक्षिण भारत की कपड़ा राजधानी या दक्षिण भारत के मैनचेस्टर, कोयम्बटूर और कपड़ों और कलात्मक रेशमी कपड़ों के लिए मशहूर, संभाजी में सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र से न केवल कोयम्बटूर और संभाजी नगर में रहने वाले लाभार्थियों / पेंशनभोगियों, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भी कठिनाइयां कम होंगी। उदाहरण के लिए, कोयम्बटूर में, चिकित्सा देखभाल और दवाओं के लिए 8000 से अधिक लाभार्थियों को 400-500 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। कोयंबटूर और संभाजी नगर सीजीएचएस सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र जब एक बार काम करने लगेंगे तो ये न केवल लाभार्थियों को ओपीडी सेवाएं प्रदान करेंगे बल्कि  निजी अस्पताल भी पैनल में आ जाएंगे और पेंशनरों को निजी अस्पतालों से भी कैशलेस चिकित्सा उपचार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। केन्‍द्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ. भागवत किशनराव करार ने लाभार्थियों को बधाई दी और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में देश स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर रहा है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में मां शारदा देवी मंदिर का उद्घाटन किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में मां शारदा देवी मंदिर का उद्घाटन किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से कुपवाड़ा में मां शारदा देवी मंदिर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन की शुरूआत श्री अमित शाह ने देशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि आज नववर्ष के अवसर पर ही मां शारदा का नवनिर्मित मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है और ये पूरे भारत के श्रद्धालुओं के लिए एक शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि आज मां शारदा के मंदिर का उद्घाटन एक नए युग की शुरूआत है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस मंदिर की वास्तुकला और निर्माण शारदा पीठ के तत्वाधान में पौराणिक शास्त्रों के अनुसार किया गया है। श्रंगेरी मठ द्वारा दान की गई शारदा मां की मूर्ति को 24 जनवरी से लेकर आज यहां स्थापित करने तक एक यात्रा के रूप में लाया गया है। उन्होंने कहा कि कुपवाड़ा में माँ शारदा के मंदिर का पुनर्निर्माण होना शारदा-सभ्यता की खोज व शारदा-लिपि के संवर्धन की दिशा में एक आवश्यक एवं महत्त्वपूर्ण कदम है। श्री अमित शाह ने कहा कि एक जमाने में भारतीय उपमहाद्वीप में शारदा पीठ ज्ञान का केन्द्र माना जाता था, शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में देशभर के विद्वान यहां आते थे। उन्होंने कहा कि शारदा लिपि हमारे कश्मीर की मूल लिपि है, जिसका नाम भी मां के नाम के आधार पर रखा गया है। ये महाशक्ति पीठों में से एक है और मान्यताओं के अनुसार मां सती का दाहिना हाथ यहां गिरा था।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि शारदा पीठ भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक विरासत का ऐतिहासिक केंद्र रहा है, मोदी सरकार करतारपुर कॉरीडोर की तरह शारदा पीठ को भी श्रद्धालुओं के लिए खोलने की दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयास से कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद शांति स्थापित होने से घाटी और जम्मू फिर एक बार अपनी पुरानी परंपराओं, सभ्यता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की ओर लौट रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की प्रतिबद्धता के अनुरूप मोदी सरकार ने संस्कृति के पुनर्रुद्धार सहित जम्मू-कश्मीर के सभी क्षेत्रों में पहल की है। इसके तहत 123 चिन्हित स्थानों का व्यवस्थित रूप से जीर्णोद्धार और मरम्मत का काम चल रहा है, जिनमें कई मंदिर और सूफी स्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 65 करोड़ रूपए की लागत से इसके पहले चरण में 35 स्थानों का पुनर्रुद्धार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 75 धार्मिक और सूफी संतों के स्थानों की पहचान करके 31 मेगा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। श्री शाह ने कहा कि यहां हर जिले में 20 सांस्कृतिक उत्सव भी आयोजित किए गए हैं जिनसे हमारी पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने में बहुत मदद मिलेगी।

अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा जी ने जिस शिद्दत से प्रधानमंत्री मोदी की सारी फ्लैगशिप योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम किया है वो प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में श्री मनोज सिन्हा जी ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश लाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज हुई ये शुरूआत इस स्थान की खोई हुई भव्यता को वापिस लाने में मदद करेगी और ये स्थान मां शारदा की उपासना और उनकी प्रेरणा से मिली चेतना की जागृति का युगों-युगों तक भारतवर्ष में केन्द्र बना रहेगा।

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शिक्षा से सेवा, सेवा से समाज उत्थान के मंत्र के साथ सीएसजेएमयू का 37वां दीक्षांत समारोह संपन्न

कानपुर 23 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता,
– कुलाधिपति, राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में हुआ समारोह
– आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानंद सरस्वती रहे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
– सेवा उद्यान और अमृत सरोवर समेत 21 योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास
– मेधावी छात्रों को कुलाधिपति महोदया ने दिए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक

शिक्षा से सेवा का संदेश देते हुए समाज उत्थान की दिशा में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा लें। आपकी डिग्री तभी सार्थक है जब आप समाज के विकास के लिए काम करेंगे। आप यह संकल्प लें कि जीवन में कभी गलत नहीं करेंगे। आप अपना विकास करने का प्रयास करें, साथ ही दूसरों का भला भी करें। ऐसा कार्य करें, जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो सके।
ये कहना है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं सीएसजेएमयू की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल का। श्रीमती पटेल बुधवार को सीएसजेएमयू के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में आयोजित हुए 37वें दीक्षांत समारोह में शिरकत कर रही थी। समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने का मंत्र दिया। उन्होने कहा कि जो मेडल नहीं हासिल कर सके वह भी निराश न हो। जीवन में हर दिन बेहतर करने का संकल्प लें। अधिक से अधिक श्रम करें और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें।
मां सरस्वती को माल्यार्पण करने के बाद दीक्षांत समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय के नवनिर्मित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जल भरो कार्यक्रम के साथ हुई। समारोह की अध्यक्षता आदरणीय कुलाधिपति महोदया श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि परमार्थ निकेतन हरिद्वार के अध्यक्ष, आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानंद सरस्वती शामिल हुए। मंच पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, प्रति कुलपति प्रो सुधीर कुमार अवस्थी एवं कुलसचिव डॉ अनिल कुमार यादव भी मौजूद रहे।
बेटियों की प्रशंसा की
कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में बेटियों की सफलता के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होनें कहा कि जिस प्रकार से लड़कियां मेडल लेने में सबसे आगे रहीं, इससे लड़कों को यह समझना होगा कि आखिर उनकी उपस्थिति कहां है। 80 प्रतिशत पदक लड़कियों ने हासिल किए हैं। ऐसे में लड़कों के कम प्रदर्शन पर राज्यपाल महोदया ने उन्हें भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर की प्रशंसा
कार्यक्रम में पूर्व विधायक सुरेंद्र बहादुर भी उपस्थित हुए। उन्होने विश्वविद्यालय के अतिथि गृह के लिए 1 करोड़ रूपये की धनराशि दान की थी। कुलाधिपति महोदया ने उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें मंच पर बुलाया और सम्मानित भी किया। कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने उनके सहयोग के लिए आभार भी जताया।
मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस अवसर पर भारतीय परंपराओं, मनीषा और ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होने नवरात्र के शुभ अवसर पर हुए इस कार्यक्रम के लिए कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल, कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय के उत्सव में आए हुए सभी छात्र-छात्राओं को राष्ट्र-समाज की बेहतरी के लिए कार्य करना होगा। उन्होने कहा कि डिग्री डिप्लोमा करने के बाद आसमान कोई भी छू सकता है लेकिन आसमान छूने से बेहतर है दिलों को छू लेना। उन्होने कहाकि पशु तक अपनी भाषा से प्यार करते हैं तो फिर हमें अपनी भाषा से प्यार होना ही चाहिए। उन्होने कहा कि लीडर बनने से बेहतर है लैडर बने।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर बोलते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि अपनी भाषा में शिक्षा हो तो सहज और सरल होगी। उन्होने कुलाधिपति , राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल की तारीफ करते हुए कहा कि आदर्शों की बात करना आसान है पर आदर्शों पर चल कर उन्हे निभाना और खुद उस पर खरे उतरना कठिन है लेकिन राज्यपाल ने आदर्शों पर चल कर दिखाया है।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुई प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि जीवन में सकारात्मक रहना चाहिए। सकारात्मक रहने से बड़ी सी बड़ी बाधाओं से पार पाया जा सकता है।
दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने विस्तार से विश्वविद्यालय की प्रगति और कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी। उन्होने कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल का आभार जताते हुए उनके मार्गदर्शन में हो रहे विश्वविद्यालय के शैक्षिक, इन्फ्राक्सट्रक्चर डिवलेपमेंट के बारे में बिंदुवार आख्या प्रस्तुत की। प्रो पाठक ने विश्वविद्यालय में हुए डिजिटल डेवलपमेंट की विस्तार से चर्चा करते हुए, डिजिटल मूल्यांकन, फेसलेस सिस्टम, स्टूडेंट्स सपोर्ट सेल एवं ऑनलाइन वेरिफिकेशन से लेकर तमाम पोर्टल के बारे में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। समारोह में विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र- छात्राओं को कुलाधिपति स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। इस बार कुल 91 पदक दिए गए। दीक्षांत समारोह कार्यक्रम में कानपुर के परिषदीय स्कूलों के कक्षा 5 से 8 तक के 30 स्कूली बच्चों और 25 आंगनबाड़ी केंद्रों की महिलाओं को भी माननीय कुलाधिपति महोदया ने सम्मानित किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर के सभागार का नवीनीकरण का उद्घाटन एवं नामकरण भी समारोह में किया गया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सेवा उद्यान और अमृत सरोवर के साथ 21 योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास भी किया गया।
सेवा उद्यान की प्रशंसा
कुलाधिपति महोदया ने विश्वविद्यालय में पुरातन छात्रों के सहयोग से निर्मित सेवा उद्यान की प्रशंसा की। उन्होने वेस्ट मेटेरियल से बनने वाले उत्पादों की भी सराहना की। सेवा उद्यान विश्वविद्यालय के पुरातन विद्यार्थियों के सहयोग से बनाया गया है। इस उद्यान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सेवा के विषय में अवगत कराना है। छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करना है।
अमृत सरोवर जल सरंक्षण का देगा संदेश
विश्वविद्यालय के अमृत सरोवर को नगर निगम एवं विश्वविद्यालय के सहयोग से निर्मित किया गया है। जल सरंक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय की इस पहल की कुलाधिपति ने सराहना करते हुए इस अच्छा कदम बताया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के इनोवेशन फाउंडेशन के तहत चल रहे छात्रों के स्टार्टअप्स का कुलाधिपति ने अवलोकन किया और स्टार्टअप्स से जुड़े दो छात्रों को सम्मानित भी किया। विश्वविद्यालय ने अपने पुरातन छात्र-छात्राओं के सहयोग से राजकीय बालगृह कानपुर में एक कम्प्यूटर लैब बनाई है। कुलाधिपति महोदया ने इसका भी ऑनलाइन उद्घाटन किया।
बालगृह के बच्चों ने पेटिंग गिफ्ट की
समारोह में राजकीय बालगृह से आए स्टूडेंट्स ने कुलाधिपति महोदया को पेटिंग गिफ्ट की। दीक्षांत समारोह में बालगृह से 5 बच्चों को विशेष रूम से आमंत्रित किया गया था। इन बच्चों को राज्यपाल महोदया ने मंच से सम्मानित भी किया।
अवगत कराना है कि मुख्य समारोह से पहले दीक्षोत्सव के तहत हफ्ते भर तक कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन कार्यक्रमों के तहत में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं परंपरागत खेलों का आयोजन किया गया। दीक्षोत्सव के नाम से हुए इन कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के छात्रों ने बढ़ चढ़ कर भागीदारी की थी। दीक्षांत समारोह की समाप्ति के बाद प्रेक्षागृह में प्रति कुलपति प्रो सुधीर कुमार अवस्थी, डीएसडब्लू प्रो नीरज सिंह, डीन अकेडमिक प्रो रोली शर्मा, डीन प्रशासन प्रो सुधांशु पांड्या, डीन प्रो शिप्रा श्रीवास्तव डीन प्रो सूफिया सहाब समेत सभी अधिकारियों ने स्टूडेंट्स को पुरस्कार वितरित किए।

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समाचार कानपुर से

 

*पनकी पुलिस का खेल निराला, ले देकर अपराधियों को छोड़ डाला*

*कुछ दिनों पहले वाहन चोरी में पकड़े गए थे छह अभियुक्त इसमें से 4 अभियुक्तों को सेटिंग गेटिंग के दम पर दिया थाने से छोड़*

*सूत्रों की माने तो मोटी रकम लेकर वाहन चोरों को थाने से ही दे दी गई क्लीनचिट*

*वहीं सूत्रों की माने तो तिलक नामक अभियुक्त के पास से उनकी पुलिस ने की थी चोरी की बाइक बरामद और लेकर आई थी थाने इसके बावजूद भी सेटिंग गेटिंग के दम पर तिलक को भी दिया गया छोड़*

*क्षेत्रीय वकील का भाई भी हुआ था वाहन चोरी में बंद जिसको सेटिंग गेटिंग के दम पर दिया गया छोड़*

*पकड़े गए वाहन चोरों का सरगना को भी दिया गया छोड़*

*संपूर्ण साक्ष्य के साथ जल्द होगा रतनपुर चौकी का बड़ा खुलासा*

*सूत्रों की माने तो मोटी रकम के चलते वाहन चोरों को बना दिया गया बेकसूर*

*मामला थाना पनकी के रतनपुर चौकी का*

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*पुलिस ने सब्जी व फल वालों को दौड़ाया, व दिव्यांग ठेले वाले को पीटने का लगाया आरोप*

कानपुर. कानपुर में बड़ा चौराहा पुलिस की संवेदनहीनता और मनमानी की वजह से गरीब सब्जी वाले व फल वालो को अपने परिवार को पालन पोषण करने में परेशान हो रहे हैं दरअसल, बड़े चौराहे पर सब्जी व फल का ठेला लगाकर अपने घर का पालन पोषण करते हैं लेकिन कुछ दिनों पहले ही डीएसपी सिटी ट्रैफिक का चार्ज रवीना त्यागी को मिला था उसके बाद से यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए जगह-जगह वनवे का प्रयोग भी किया जा रहा है दुकाने और ठेले वालों को किनारे करके लगाने के लिए कहा गया है दिव्यांग ओमप्रकाश ,राजेश, व सनी, विनय, का कहना है कि किनारे ठेला लगाये हुए था यातायात दरोगा और कुछ सिपाही लाठी-डंडे लेकर फल वाले दुकानदारों को भगाने लगते और लात घुसो से मारते हैं ठेला ना लगने के कारण हम सभी परिवारों को बच्चों की फीस व पालन पोषण करने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिसके शिकायत कई बार पुलिस के बड़े अधिकारियों से की जा चुकी है।सभी ठेला वालों की मांग है कि हम सभी फल वालों को एक जगह निश्चित कर दी जाए जिससे आए दिन ठेला लेकर भरना ना पड़े और यातायात भी सुचारू रूप से चलता रहे।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में जी20: समावेशी और टिकाऊ की विकासकी पहल” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

कानपुर 17 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता, राजनीति विज्ञान विभाग, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (मुख्यालय नई दिल्ली) कानपुर शाखा ने संयुक्त रूप से 17 और 18 मार्च 2023 को “जी20: समावेशी और टिकाऊ की विकासकी पहल” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है।
यह संगोष्ठी कानपुर शहर में किसी भी शैक्षणिक संस्थान द्वारा आयोजित एक अहम् पहल है। आज भारत के लिए G20 अध्यक्षत्ता का एक गौरवशाली काल है.भारत सरकार “वसुधैव कुटुम्बकम” के मूल्यों के तहत के अपने G20 लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानो की अहम् भूमिका एवं भागीदारी की अपेक्षा रखती है। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय जी20 अध्यक्षत्ता के तहत वैश्विक मुद्दों के एजेंडे में पहल और उपलब्धियों के विषय में जागरूकता पैदा करने की दिशा में उठाए गए कदमों में से एक है। इसमें भारत के विभिन्न प्रान्तों से लोगों ने भागीदारी की है.
इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों और दिग्गजों की सूची में मुख्य अतिथि डॉ. उमा शंकर(सीमा शुल्क और जीएसटी लखनऊ के प्रधान मुख्य आयुक्त), सम्मानित अतिथियों में श्री एस.के. सिंह, (प्रधान आयुक्त, सीमा शुल्क एवं जीएसटी कानपुर)और श्री आर. रमानी, (पूर्व मुख्य सचिव, यू.पी. और वर्तमान में अध्यक्ष, IIPA U.P. क्षेत्रीय शाखा), मुख्य वक्ता स्क्वाड्रन लीडर तूलिका रानी उत्तर प्रदेश G20 की ब्रांड एम्बेसडर और प्रो. एन.के.सक्सेना (अध्यक्ष आईआईपीए कानपुर शाखा) शामिल थे। क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल एवं कॉलेज गवर्निंग बॉडी के सचिव डॉ. जोसेफ डेनियल ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारम्भ विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। डॉ. आशुतोष सक्सेना, (विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग और उपाध्यक्ष, आईआईपीए) ने संगोष्ठी के उद्देश्यों और संरचना के विषय में बताया, और डॉ. जी. एल. श्रीवास्तव, (आईआईपीए कानपुर शाखा के सचिव और संगोष्ठी संयोजक) ने सम्मानित अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
Sqnldr तूलिका रानी, ​​जी20 ब्रांड एंबेसडर, यूपी सरकार ने संगोष्ठी में मुख्य अभिभाषण दिया. उन्होंने अपने प्रेरक विचारों से जीवन में चुनौतियों का सामना करने और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने के लिए युवाओं का आह्वान किया। उन्होंने भारत के जी20 एजेंडे को बढ़ावा देने और इसकी सफलता में योगदान देने के लिए उत्तर प्रदेश कैसे अग्रणी हो सकता है, इस बारे में अपने विचार साझा किये । विशिष्ट अतिथि श्री आर. रमानी ने सभी के बीच मानवतावाद और राष्ट्रवाद के मूल्यों को स्थापित करने के लिए इस तरह के और राष्ट्रीय सेमिनारों की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने जी20 की अध्यक्षता के लिए भारतीय एजेंडे और उसके विभिन्न पहलुओं के बारे में कुछ मूल्यवान जानकारियां साझा कीं। मुख्य अतिथि डॉ. उमा शंकर ने जी20 की भारतीय अध्यक्षता की भूमिका और महत्व के बारे में अपनी अंतर्दृष्टि साझा की, उनके अनुसार भारत को वैश्विक शासन में अपने वैचारिक और दार्शनिक आधार को आगे बढ़ाने का यह सुअवसर मिला है. उन्होंने कहा कि भारत समानता, समावेशिता और सामान्य भलाई के लक्ष्यों का अनुसरण करते हुए शासन व्यवस्था का विशव पटल पर एक अनूठा उदाहरण स्थापित करता है।
इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने प्रो. आशुतोष सक्सेना एवं डॉ. विभा दीक्षित द्वारा लिखित द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर की राजनीति विज्ञान की स्नातक पाठ्यपुस्तकों का विधिवत विमोचन किया।
सत्र के अध्यक्ष के रूप में अपने संबोधन में, प्रो. जोसेफ डेनियल ने जी20 और भारतीय अध्यक्षता के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना की। प्रो. एन.के. सक्सेना (अध्यक्ष आईआईपीए कानपुर शाखा) ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र का डॉ. विभा दीक्षित (सह प्रवक्ता राजनीतिक विज्ञान विभाग एवं संगोष्ठी आयोजन सचिव ) ने प्रभावी ढंग से संचालन किया।
पहले दिन संगोष्ठी में तीन तकनीकी सत्र थे जो G20 के चार महत्वपूर्ण पहलुओं पर आधारित थे.
पहले तकनीकी सत्र की अध्यक्षता विशिष्ट अतिथि श्री एस.के. सिंह ने की और संचालन प्रो. आशुतोष सक्सेना ने किया। G20: टिकाऊ और न्यायसंगत वैश्विक विकास के पहलु पर विचार-विमर्श केंद्रित था. श्री एस.के. सिंह ने वैश्विक शासन में समानता और टिकाऊ विकास के विषय में अपने विचार रखे. आमंत्रित वक्ता, प्रो. राजेश कुमार और प्रज्ञा त्रिपाठी ने अपनी महत्त्वपूर्ण प्रस्तुतियों से सभा को सोचने पर विवश किया। अभिनव शाक्य और ऋचा यादव ने इसी थीम पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
दूसरे तकनीकी सत्र में दो विषयों पर विमर्श को शामिल किया गया: ए) जी20: “वसुधैव कुटुम्बकम” दृष्टिकोण के तहत समावेशी वैश्विक विकास, और बी) जी20: पर्यावरण संकट, हरित ऊर्जा, हरित शासन और आपदा प्रबंधन। पीपीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनूप सिंह ने इस सत्र की अध्यक्षता की और अपने ज्ञानवर्धक अभिभाषण से सबको सोचने पर विवश किया. उन्होंने “वसुधैव कुटुमकम” के दर्शन पर विस्तार से अपने मत प्रस्तुत किये। डॉ अनुज मिश्रा ने वसुधैव कुटुमकम के भारतीय वैश्विक शासन के दर्शन की विशिष्टता के बारे में अपने दृष्टिकोण साझा किए। डॉ. कीर्ति मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा और बाजरा परियोजनाओं में भारतीय पहल पर एक प्रस्तुति दी। सोनू त्रिवेदी और ऐश्वर्या अवस्थी ने मानवता और मानव अस्तित्व के लिए पर्यावरण की महत्वपूर्ण अन्योन्याश्रितता पर प्रस्तुतियां दीं।
दिन के अंतिम तकनीकी सत्र में “विकास, व्यापार और सुरक्षा के लिए ग्लोबल साउथ में G20 राष्ट्रों द्वारा संकट प्रबंधन” विषय पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. पद्मा अय्यर ने सत्र की अध्यक्षता की और सतत विकास के लिए जी20 देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों में किये गए कायों के बारे में चर्चा की। डॉ. रश्मि मिश्रा और प्रो. अनुराग रत्न ने अंतर्राष्ट्रीय संकट और उस पर भारतीय प्रतिक्रियाओं और पहल के बारे में मंत्रणा की। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में सुरक्षा संकट से संबंधित मुद्दों पर विचार प्रस्तुत किये। आमिर ने एक बहु-ध्रुवीय दुनिया में नई भारतीय विदेश नीति की पहल पर एक पेपर प्रस्तुत किया जहां एक बहु-संरेखित दृष्टिकोण सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है.
राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन G20 पर कुछ व्यावहारिक एवं महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया और उन पर वृहत विवेचना हुई. इस संगोष्ठी ने विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण एवं उठे सवालों ने सबका ध्यान आकर्षित किया. सभी के लिए यह एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ है.इस संगोष्ठी के पहले दिन के सफल आयोजन में क्राइस्ट चर्च कॉलेज की आयोजन समिति ने कड़ी मेहनत की है जिसमे मुख्य रूप से डॉ. अर्चना हिना, साक्षी, इशिता, ऋचा, शैली, अभिनव, आमिर, उज्जवल अभिषेक, ईशान, मानवी, श्रजल शामिल हैं.।आईआईपीए की आयोजन टीम के सदस्य सीए विनय जैन और धीरेंद्र कुमार ने भूमिका निभाई।

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डॉ. मनसुख मांडविया ने क्षय रोग के उन्‍मूलन हेतु देशव्यापी जागरूकता अभियान के लिए 75 ट्रकों को झंडी दिखाकर रवाना किया

“समूचा राष्‍ट्र क्षय रोग के उन्मूलन की दिशा में कार्य करने के लिए जनभागीदारी की भावना से उत्साहित और सं‍गठित है। एसडीजी 2030 लक्ष्य से पांच साल पहले देश से क्षय रोग का उन्‍मूलन करने संबंधी प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट आह्वान के साथ आज 71,000 से अधिक निक्षय मित्र आगे आए हैं तथा कॉरपोरेट्स, गैर-सरकारी संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यक्तियों आदि सभी हितधारकों को संगठित कर टीबी का उन्मूलन करने संबंधी केंद्र सरकार की निक्षय योजना के तहत पोषण संबंधी सहायता और अन्य माध्यमों से 10 लाख से अधिक टीबी रोगियों की सहायता कर रहे हैं।” यह बात आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने पार्टनरशिप एक्शन अगेन्‍स्‍ट ट्यूबरक्लोसिस (पीएसीटी) शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। डॉ. मांडविया ने टीबी के संबंध में जागरूकता संदेशों वाले 75 ट्रकों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना गया। ये ट्रक निक्षय योजना में सक्रिय सहायता दे रहे अपोलो टायर्स फाउंडेशन ने प्रदान किए हैं। ये ट्रक टीबी मुक्त भारत के संदेश के साथ राज्यों की यात्रा करेंगे।

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https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0034D4V.jpgकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस कार्यक्रम में कई टीबी रोगियों को पोषण टोकरियां भी वितरित कीं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने विस्तार से बताया कि “भारत का अपना स्वास्थ्य सेवा मॉडल साझा सामाजिक और राष्ट्रीय उत्‍तरदायित्‍वों से युक्‍त है। अन्य हितधारकों के सहयोग का लाभ उठा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की सहायता करने में बहु-क्षेत्रीय संपर्क एक प्रमुख स्तंभ है। केवल अपने साझा प्रयासों और सहयोग से ही हम 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। मैं सभी से जनभागीदारी की भावना से आगे आने का आग्रह करता हूं।” उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि निक्षय मित्र टीबी रोगियों को केवल वित्तीय और पोषण संबंधी सहायता ही प्रदान नहीं करते, बल्कि निक्षय मित्र पोर्टल पर उनके साथ निजी रूप से जुड़कर उनकी समग्र भलाई भी सुनिश्चित करते हैं।  डॉ. मांडविया ने क्षय रोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अपोलो टायर्स फाउंडेशन द्वारा देश के 19 राज्यों में 32 स्थानों पर हीरोज ऑन व्हील्स (ट्रक ड्राइवर्स) और अन्य कमजोर समूहों को जोड़कर टीबी मुक्त  भारत अभियान को तेज करने के अभिनव तरीके की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 75 टीबी रोगियों को भी गोद लिया है। इस बात पर गौर करते हुए कि ट्रक चालक टीबी रोगियों का एक महत्वपूर्ण समूह हैं, डॉ. मांडविया ने कहा कि समय पर परीक्षण, पूरा उपचार कराने आदि के माध्यम से टीबी की रोकथाम और नियंत्रण के बारे में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पांच स्थानों (दिल्ली, मुंद्रा पोर्ट- गुजरात, हैदराबाद, जालंधर और अगरतला) से टीबी संदेशों के साथ ब्रांडेड 75 ट्रकों की पहल ट्रक ड्राइवरों के समुदायों और समुदाय से जुड़े अन्य लोगों के बीच टीबी से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अन्य कॉरपोरेट्स, संस्थानों, व्यापार निकायों, संघों और व्यक्तियों से भी आगे आने और क्षय रोग के खिलाफ भारत की लड़ाई में सक्रिय सहायता देने का आग्रह किया। सुश्री रोली सिंह, अपर सचिव और एमडी एनएचएम, स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में एक साथ आने और अपनी रणनीतियों के माध्यम से इसमें योगदान देने के लिए कॉरपोरेट्स और भागीदार एजेंसियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट क्षेत्र अंतिम व्‍यक्ति तक पहुंच कायम करने और समाज को सरकार की विभिन्न पहलों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि 300 कॉरपोरेट्स ने कॉरपोरेट टीबी प्रतिज्ञा ली है।इस अवसर पर डॉ. कुलदीप सिंह सचदेवा, दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय निदेशक, द इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट लंग डिजीज एंड ट्यूबरकुलोसिस, श्री गौरव कुमार, मुख्य वित्तीय अधिकारी, अपोलो  टायर्स लिमिटेड और सुश्री रिनिका ग्रोवर, प्रमुख, सस्टेनेबिलिटी एंड सीएसआर, अपोलो टायर्स भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम को यहां देखा जा सकता है:

https://youtube.com/live/SySolzPQFWI?feature=share

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उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए विकास पहल

केंद्रीय बजट 2022-23 में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम-डिवाइन) स्कीम को एक नई केंद्रीय क्षेत्र स्कीम के रूप में घोषित किया गया था। मंत्रिमंडल ने 12 अक्टूबर, 2022 को पीएम-डिवाइन स्कीम को मंजूरी दी। 100% केंद्रीय वित्त पोषण वाली इस स्कीम में वर्ष 2022-23 से 2025-26 (15वें वित्त आयोग की अवधि के शेष वर्ष) तक 4 साल की अवधि के लिए 6,600 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय होगा। पीएम-डिवाइन के उद्देश्य हैं: (i) पीएम गतिशक्ति की भावना के अनुरूप अवसंरचना को अभिसरण रूप से वित्त पोषित करना; (ii) पूर्वोत्तर क्षेत्र की महसूस की गई आवश्यकताओं के आधार पर सामाजिक विकास परियोजनाओं की सहायता करना; (iii) युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका कार्यकलापों को सक्षम बनाना; और (iv) विभिन्न क्षेत्रों में विकास अंतराल को भरना। पीएम-डिवाइन विद्यमान केंद्रीय और राज्य स्कीमों का एक विकल्प नहीं होगी। यह अवसंरचना का निर्माण करेगी, उद्योगों, सामाजिक विकास परियोजनाओं की सहायता करेगी और युवाओं तथा महिलाओं के लिए आजीविका गतिविधियों का निर्माण करने के साथ आय और रोजगार का सृजन करेगी। पीएम-डिवाइन स्कीम को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर परिषद या केंद्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों या राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। सरकार पर पड़ने वाले समय और लागत वृद्धि के निर्माण जोखिम को सीमित करने के लिए परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) आधार पर यथासंभव कार्यान्वित किया जाएगा। पीएम-डिवाइन परियोजनाओं की संवहनीयता सुनिश्चित करने के लिए परिसंपत्तियों के प्रचालन और अनुरक्षण (ओ एंड एम) के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय या किसी अन्य मंत्रालय/विभाग की किसी भी अन्य स्कीम के साथ परियोजना सहायता का दोहराव न हो। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट 2022-23 में घोषित सात परियोजनाओं सहित ग्यारह परियोजनाओं (अनुबंध-I में विवरण) को मंजूरी के लिए चुना गया है।

क्र.

सं.

परियोजना का नाम अनुमोदित लागत

(करोड़ रु. में)

1 पूर्वोत्तर भारत में बाल चिकित्सा और वयस्क हेमटोलिम्फोइड कैंसर के प्रबंधन के लिए समर्पित सेवाओं की स्थापना, डॉ. बी. बोरुआ कैंसर संस्थान (बीबीसीआई), गुवाहाटी 129.00
2 नैक्टर आजीविका सुधार परियोजना (बहु-राज्य): मूल्य वर्धित उत्पादों के लिए बनाना स्यूडो स्टेम के उपयोग पर मूल्य श्रृंखला 67.00
3 किसानों के क्षमता निर्माण और प्रमाणन की सुविधा के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीक और डिजिटल डेटा प्रबंधन का उपयोग करके पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक जैविक कृषि को बढ़ावा देना (बहु-राज्य) 45.00
4 मिजोरम में पश्चिमी किनारे पर आइजोल बाईपास का निर्माण 500.00
5 मिजोरम में 33.58 करोड़ रुपये की लागत से तुइरियल एयरफील्ड से नॉर्थ चाल्टलांग (18 किमी) तक; और 66.42 करोड़ रुपये की लागत से लेंगपुई से साईफल बांस बागान (41 किमी) तक बांस लिंक सड़कों का निर्माण और उन्नयन 100.00
6 पश्चिम सिक्किम में पेलिंग से सांगा-चोएलिंग तक यात्री रोपवे प्रणाली के लिए गैप फंडिंग 64.00
7 दक्षिण सिक्किम में धापर से भालेडुंगा तक यात्री रोपवे के लिए गैप फंडिंग 58.00
8 लोक निर्माण विभाग, असम सरकार द्वारा असम के कामरूप जिले में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में 20 स्कूलों का रूपांतरण 132.86
9 मेघालय सरकार के शहरी कार्य निदेशालय द्वारा न्यू शिलांग टाउनशिप में नई चार लेन की सड़क का निर्माण और साइकिलिंग ट्रैक, यूटिलिटी डक्ट्स, फुटपाथों आदि के साथ मौजूदा दो-लेन सड़क को चार-लेन में परिवर्तित करना 146.79
10 नागालैंड सरकार के अल्प विकसित क्षेत्र विभाग (डीयूडीए) द्वारा पूर्वी नागालैंड के विशेष विकास से संबंधित आजीविका परियोजनाएं 180.00
11 विद्युत विभाग, त्रिपुरा सरकार द्वारा त्रिपुरा में दूरस्थ बस्तियों को विद्युत की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए सौर माइक्रो ग्रिड की स्थापना 80.79
  कुल 1503.44

यह जानकारी पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सप्ताहभर की गतिविधियों के दौरान ईएसआईसी ने 9.3 करोड़ रुपये के 3724 मातृत्व लाभ दावों का निपटारा किया

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में इस साल की थीम ‘डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए नवाचार एवं प्रौद्योगिकी’ के अनुरूप कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के कार्यालयों/अस्पतालों ने सप्ताहभर चलने वाली गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की। इसमें लैंगिक संवेदनशीलता पर सेमिनार, बीमित महिलाओं/मातृत्व लाभ दावों से संबंधित बकाया बिलों का निपटारा, महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच/स्वास्थ्य जांच शिविर शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए हफ्तेभर चली गतिविधियों की श्रृंखला के दौरान 9.3 करोड़ रुपये की धनराशि के 3724 मातृत्व लाभ दावों का निपटारा किया गया।

हाल ही में ईएसआईसी ने बीमित महिलाओं को ऑनलाइन मातृत्व लाभ का दावा करने की सुविधा शुरू कर ईएसआई योजना के तहत बीमित महिलाओं के लिए विशेष पहल की है। इसका मकसद प्रौद्योगिकी की मदद से लाभ उठाने के प्रयासों को आसान बनाकर उन्हें सशक्त करना है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीक आधारित सुविधाओं ने महिला लाभार्थियों को अपने घरों से ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में काफी मदद की है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सप्ताह भर चली गतिविधियों की श्रृंखला का आज समापन हो गया। इस अवसर पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) मुख्यालय, नई दिल्ली में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार की अध्यक्षता ईएसआईसी के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार ने की। कार्यक्रम में वित्त आयुक्त, ईएसआईसी, टी. एल. यादेन; सीवीओ, ईएसआईसी, श्री मनोज कुमार सिंह; उप महानिदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) श्रीमती अनुजा बापट; और वरिष्ठ विशेषज्ञ एवं निदेशक, नीति आयोग, डॉ. साक्षी खुराना उपस्थित थे। इस साल की थीम ‘डिजिटऑल: इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फॉर जेंडर इक्वैलिटी’ का जिक्र करते हुए डॉ. राजेंद्र कुमार ने आईटी आधारित प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया, जिससे वे इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनेंगी। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से महिलाएं अपने घरों से ही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे समाज की महिलाओं को उच्च महत्व का एहसास कराने और उन्हें प्रदान करने का भी समय है। उन्होंने कहा कि कार्य क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में रैंकिंग कम होने के बावजूद समावेशी एवं एकीकृत प्रौद्योगिकी के जरिए लैंगिक समानता के दृष्टिकोण को जल्दी हासिल किया जा सकता है।

ईएसआईसी की वित्त आयुक्त सुश्री टी. एल. यादेन ने बीमित महिलाओं के मातृत्व लाभ के ऑनलाइन दावे की सुविधा के लिए ईएसआईसी के प्रयासों की प्रशंसा की। इससे तकनीक की मदद से महिला लाभार्थियों को लाभ पाना आसान बनाकर सशक्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी के महत्व को दोहराया, जो भेदभाव कम कर और समाज के सभी सदस्यों के  लिए समान अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को सशक्त बनाने का माहौल तैयार करने में सक्षम है। ईएसआईसी के सीवीओ श्री मनोज कुमार सिंह ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी और योगदान की चर्चा की।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की उप महानिदेशक श्रीमती अनुजा बापट ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को समाज कल्याण योजनाओं की मुख्यधारा में लाने का भी आग्रह किया।

वरिष्ठ विशेषज्ञ और निदेशक, नीति आयोग, डॉ. साक्षी खुराना ने उन महिलाओं के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए, जो समाज के हाशिये पर हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ईएसआईसी और ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं उनके जीवन की मुश्किलों को कम करने में मदद कर रही हैं।

 

चिकित्सा आयुक्त, ईएसआईसी, डॉ. दीपिका गोविल ने स्वास्थ्य शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी के बारे में बताया। उन्होंने समाज में समानता हासिल करने के लिए समता की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया। बीमा आयुक्त (पी एंड ए) श्री दीपक जोशी ने दुनियाभर की महिलाओं की उपलब्धियों और उन्हें सशक्त बनाने के तरीकों के बारे में बात की।

कार्यक्रम के दौरान हफ्तेभर की गतिविधियों  के दौरान आयोजित निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को गणमान्य व्यक्तियों ने नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में ईएसआईसी मुख्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

 

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रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के नौसेना प्रमुख मार्क हैमंड भारत की यात्रा पर

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pix(4)VADMMARKHAMMOND,CHIEFOFNAVY,ROYALAUSTRALIANNAVYVISITTOINDIAN1ZJ.JPGरॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल मार्क हैमंड दिनांक 09 से 11 मार्च 2023 तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं । यात्रा के दौरान वाइस एडमिरल मार्क हैमंड ने नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार के साथ दिनांक 10 मार्च 2023 को साथ बातचीत की । साउथ ब्लॉक लॉन में एक प्रभावशाली गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर उनका स्वागत किया गया ।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pix(5)VADMMARKHAMMOND,CHIEFOFNAVY,ROYALAUSTRALIANNAVYVISITTOINDIAXALG.JPG

इस बातचीत के दौरान दोनों देशों और नौसेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग को मजबूत करने के तरीके, मौजूदा/ उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के साझा तरीके, और मुक्त, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक/आईओआर की प्राप्ति के लिए सहयोग और अंतरप्रचालनीय-क्षमता बढ़ाने की पहल चर्चा की गई ।

भारतीय नौसेना अनेक मुद्दों पर आरएएन के साथ निकटता से सहयोग करती है, जिसमें ऑसिनडेक्स, काकाडू और पी8 ऑपेरशन, प्रशिक्षण संबंधी आदान-प्रदान, व्हाइट शिपिंग सूचनाओं का आदान-प्रदान और विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग विषय के विशेषज्ञों के बीच बातचीत शामिल हैं । इन सभी बातचीत को स्टाफ वार्ता जैसे मंचों के ज़रिए समन्वित किया जाता है । यह बैठकें प्रतिवर्ष आयोजित की जाती हैं । इसके अलावा, दोनों नौसेनाओं के युद्धपोत नियमित रूप से एक-दूसरे के बंदरगाहों पर पोर्ट कॉल करते हैं और बहुपक्षीय अभ्यासों जैसे मालाबार, रिमपैक, लैपरोस आदि में बातचीत करते हैं । दोनों नौसेनाएं ‘मेक इन इंडिया’ विजन को साकार करने की दिशा में नवाचार और उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों, रक्षा उद्योग, रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग के लिए नए रास्ते तलाशने की दिशा में भी सहयोग कर रही हैं ।

रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के नौसेना प्रमुख की यात्रा भारतीय नौसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के बीच निरंतर और नियमित बातचीत में एक महत्वपूर्ण घटना है, और यह दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को ध्यान में रखते हुए नौसेना से नौसेना के सहयोग को मजबूत करती है ।

 

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कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के बैंकों की जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक संपन्न

1 मार्च, 2023 कानपुर नगर। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के बैंकों की जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान पी.एम.ई.जी.पी. योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, पी०एम० स्वनिधि योजना, के.सी.सी.(फसली ऋण) योजना के साथ-साथ विगत बैठक में दिए गए निर्देशों की समीक्षा की गई।
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:-
 किसान क्रेडिट कार्ड (के०सी०सी०): पशुपालकों एवं मत्स्य पालाकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए जाने एवं अन्य सरकारी योजनाओं में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा ऋण स्वीकृति एवं वितरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम होने एवं ऋण अस्वीकृति का प्रतिशत सर्वाधिक होने के कारण मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह बैंक की खराब प्रगति के संबंध में आंतरिक जांच कराए जाने हेतु भारतीय स्टेट बैंक के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए।
 अग्रणी जिला प्रबंधक एवं जिला स्तरीय समिति के समस्त सदस्य यह सुनिश्चित करें कि आवेदनकर्ता एवं संबंधित विभाग द्वारा जिस योजना के तहत ऋण प्रदान करने के आवेदन का अग्रसारण किया गया है, उसी योजना में ऋण स्वीकृत किया जाए। कोई भी बैंक ऋण प्रदान करने हेतु योजना परिवर्तित नहीं की जाएगी।
 एक जनपद एक उत्पाद योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक अति महत्वाकांक्षी योजना है, जिसमें कानपुर नगर जनपद के लिए चमड़े एवं होजरी उद्योगों को सम्मिलित किया गया है। इस योजनांतर्गत जिला उद्योग केंद्र द्वारा प्रेषित आवेदनों के सापेक्ष बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, इंडियन बैंक का ऋण स्वीकृति कम होने पर रोष व्यक्त किया गया एवं लंबित आवेदनों पर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए।
 पी०एम० स्वनिधि योजना के अंतर्गत बैंक ऑफ इंडिया, बड़ौदा यू.पी. बैंक, कैनेरा बैंक एवं भारतीय स्टेट बैंक के पास लंबित ऋण आवेदनों को एक सप्ताह के अंदर निस्तारित कराए जाने के निर्देश दिए गए।
 जिला उद्यान अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना अंतर्गत ऋण प्राप्त करने वाली 05 इकाईयों का निरीक्षण कर बेस्ट प्रैक्टिस के संबंध में आख्या फोटोग्राफ सहित उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
उक्त बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्री सुधीर कुमार, अपर जिलाधिकारी(नगर) अतुल कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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