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मेरा गाँव मेरी धरोहर कार्यक्रम

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए, संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) की स्थापना की है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) द्वारा कार्यान्वित इस मिशन का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की इसकी क्षमता का दस्तावेजीकरण करना है।

आज़ादी का अमृत महोत्सव के एक भाग के रूप में एनएमसीएम ने जून 2023 में मेरा गाँव मेरी धरोहर (एमजीएमडी) पोर्टल (https://mgmd.gov.in/) शुरू किया। इस पहल का उद्देश्य भारत के 6.5 लाख गाँवों की सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण करना है। वर्तमान में 4.7 लाख गाँव अपने-अपने सांस्कृतिक पोर्टफोलियो के साथ पोर्टल पर लाइव हैं।

एमजीएमडी पोर्टल मौखिक परंपराओं, मान्यताओं, रीति-रिवाजों, ऐतिहासिक महत्व, कला रूपों, पारंपरिक भोजन, प्रमुख कलाकारों, मेलों और त्योहारों, पारंपरिक परिधानों, आभूषणों और स्थानीय स्थलों सहित सांस्कृतिक तत्वों की एक विस्तृत श्रृंखला को समाहित करता है। इस पोर्टल में देश में हाशिए पर पड़े समुदायों और देश भर की कम-जानने वाली परंपराओं की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ भी शामिल हैं।

एनएमसीएम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सांस्कृतिक संपत्तियों का दस्तावेजीकरण और संवर्धन करके, इस मिशन का उद्देश्य सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

एमजीएमडी कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए लक्षित गाँवों की कुल संख्या 6.5 लाख है। इसमें पश्चिम बंगाल राज्य के 41,116 गाँव शामिल हैं। अब तक पश्चिम बंगाल के 5,917 गाँवों का मानचित्रण किया जा चुका है और संबंधित डेटा एमजीएमडी वेब पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। शेष 35,199 गाँव दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया में हैं।

अभी तक तमिलनाडु सहित राज्यवार उक्त कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए कोई वित्तीय सहायता आवंटित/स्वीकृत नहीं की गई है।

वर्तमान में एमजीएमडी वेब पोर्टल पर 4.7 लाख गाँवों का डेटा अपलोड किया जा चुका है। यह डेटा पारंपरिक कला रूपों, अनुष्ठानों और लोक प्रदर्शनों सहित अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की पहचान और संरक्षण में सहायक होगा।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पहलगाम हमले के बाद जम्मू और कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा

घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या के आँकड़े राज्य पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। जम्मू और कश्मीर पर्यटन विभाग से प्राप्त नवीनतम जानकारी के आधार पर, जम्मू और कश्मीर में घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या इस प्रकार है:

वर्ष डीटीवी एफटीवी
2020 25,19,524 5,317
2021 1,13,14,920 1,650
2022 1,84,99,332 19,985
2023 2,06,79,336 55,337
2024 2,35,24,629 65,452
2025 (जनवरी से जून) 95,92,664 19,570

स्रोत: जम्मू और कश्मीर पर्यटन विभाग

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा जम्मू और कश्मीर में स्थानीय पर्यटन पर निर्भर हितधारकों पर आर्थिक प्रभाव का कोई ऐसा आकलन नहीं किया गया है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर सहित पूरे देश में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और पहलें की हैं, जिनके विवरण निम्नलिखित है:

  • पर्यटन मंत्रालय ‘स्वदेश दर्शन’, ‘तीर्थयात्रा पुनरुद्धार एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान पर राष्ट्रीय मिशन (प्रशाद)’ और ‘पर्यटन अवसंरचना विकास के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता’ योजनाओं के अंतर्गत देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटन संबंधी अवसंरचना एवं सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों/केंद्रीय एजेंसियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • पर्यटन मंत्रालय अपने विभिन्न अभियानों एवं आयोजनों के माध्यम से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों एवं उत्पादों को बढ़ावा देता है। इनमें से कुछ पहलों में देखो अपना देश, चलो इंडिया, अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट और भारत पर्व जैसे अभियान शामिल हैं।
  • एक व्यापक डिजिटल संग्रह अतुल्य भारत कंटेंट हब का शुभारंभ किया गया, जिसमें भारत में पर्यटन से संबंधित उच्च-गुणवत्ता वाली फोटो, फिल्मों, ब्रोशर एवं न्यूज़लेटर्स का समृद्ध संग्रह है जिसका वेबसाइट www.incredibleindia.org है और इसे मंत्रालय के सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रचार किया जाता है।
  • अन्य विषयों के साथ-साथ स्वास्थ्य पर्यटन, पाक-कला पर्यटन, ग्रामीण, पारिस्थितिकी पर्यटन आदि जैसे विषयगत पर्यटन को बढ़ावा दिया जाता है जिससे पर्यटन को अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ाया मिल सके।
  • क्षमता निर्माण, कौशल विकास पर केंद्रित पहलों के माध्यम से समग्र गुणवत्ता एवं अनुभव को बढ़ाना देना जिसमें सेवा प्रदाताओं के लिए क्षमता निर्माण, अतुल्य भारत पर्यटक सुविधा प्रदाता (आईआईटीएफ), पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी शामिल हैं।

यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्मारकों का जीर्णोद्धार

देश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में 3685 केंद्रीय संरक्षित स्मारक/स्थल हैं। इन स्मारकों/स्थलों की स्थिति का आकलन करने के लिए एएसआई द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और यह एक नियमित प्रक्रिया है। संरक्षण और रखरखाव का कार्य स्मारक /स्थल की आवश्यकता और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार किया जाता है। हालांकि, कोई भी स्मारक/स्थल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में नहीं है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान सभी केन्द्रीय संरक्षित स्मारकों/स्थलों के संरक्षण और रखरखाव के लिए आवंटित और उपयोग किए गए धन का विवरण, जिसमें आंध्र प्रदेश शामिल है, अनुलग्नक-I में दिया गया है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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तर्कशीलता का मतलब नास्तिक होना नहीं है

किसी भी बात को तर्क के जरिए स्थापित किया जा सकता है और तर्कों द्वारा ही खंडित भी किया जा सकता है। हमारे देश में से बहुत से ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन को तर्कों द्वारा स्थापित करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी है और लोगों द्वारा बहिष्कार भी सहन करना पड़ा है। धर्म के उन्मादी लोगों को समझा पाना बहुत कठिन होता है क्योंकि समाज में फैली कुरीतियों में या तो उनके स्वार्थ सिद्ध होते हैं या फिर एक भेड़ चाल जो सदियों से चली आ रही है  जिसकी वजह से वो उस लीक से हटना पसंद नहीं करते हैं।
हमारे यहाँ सती प्रथा जो 500 ईसा पूर्व शुरू हुई और 1829 में इसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने इसे गैर कानूनी घोषित कर दिया था। इस प्रथा को खत्म करने में राजा राममोहन राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। इसी तरह बाल विवाह का इतिहास भी बहुत पुराना है लेकिन समय के साथ इसके नियम बदलते रहे और इस प्रथा का विरोध भी राजाराम मोहन राय ने प्रमुखता से किया।1929 में बाल विवाह विरोध कानून लागू हुआ। इसी तरह विधवा विवाह शुरू करने में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का योगदान रहा। ईश्वर चंद्र विद्यासागर  ने विधवा विवाह अधिनियम के लिए आवाज उठाई। पर्दा प्रथा के लिए भी कई समाज सुधारकों ने आवाज उठाई। स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में भी सावित्रीबाई फुले, भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलवाया। सावित्री बाई फुले को भी सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने तर्क के साथ समाज में अपनी बात रखने के साथ-साथ उसे लोगों के जेहन में स्थापित भी किया।
अब कुछ मसले और है जो विवाद के तौर पर उभरने लगे हैं। सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह, स्त्री शिक्षा ऐसे कई मसले रहे हैं जिन्हें सबसे पहले तर्कों द्वारा ही खत्म किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन कुरीतियों को धार्मिक मान्यता प्राप्त थी। अब धीरे-धीरे लड़कियों में होने वाले मासिक चक्र को लेकर उनके विचारों में परिवर्तन लक्षित हो रहा है। उनका मानना है कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। एक क्रिया जो हर महीने होती है इसके लिए उन्हें अपवित्र मानना या मंदिर में प्रवेश ना करने देना, पूजा पाठ से वंचित रखना उन्हें सही नहीं लगता। यदि स्वास्थ्य की नजर से देखा जाए तो यह दिन आराम करने के लिए होते हैं क्योंकि इन दिनों लड़कियों+महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि बदलते वक्त के साथ बहुत बदलाव आया है लेकिन सबकी अपनी सुविधानुसार बदलाव आया है और इन आराम के दिनों का महत्व भी खत्म हो गया है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी जगह महिलाएं अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करती है और अब आराम जैसा कुछ भी नहीं रह गया है। घर में महिलाएं सभी काम बहुत नॉर्मल तरीके से करती है सिर्फ पूजा पाठ नहीं करती। तो फिर पूजा पाठ में अड़चन क्यों? मंदिर में प्रवेश वर्जित क्यों? क्यों अभी भी कुछ जगहों पर इन दिनों में घर के कामों से भी वंचित रखा जाता है?
अभी भी धार्मिक कर्मकांडों का भय बहुत ज्यादा है और हाल के समय में तो कुछ ज्यादा ही है। यदि बाहरी देशों में देखें तो इस मसले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाता है, एक स्वाभाविक शारीरिक क्रिया के तौर पर ही देखा जाता है। सभी देशों में इस मसले पर अपने कुछ रिवाज हैं लेकिन बहुत से देश इन कुरीतियों से बाहर निकल चुके हैं। मासिक धर्म को लेकर वहाँ इतनी संकीर्णता नहीं है।
सवाल हमारे यहाँ गहरी पैठ चुकी इस कुरीति पर है? क्या हम भविष्य में इन कुरीतियों से आगे बढ़ पाएंगे? यह सवाल अब लड़कियों के मन में पनपने लगा है। ~प्रियंका वर्मा महेश्वरी 

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निरोग रहने के लिए योग अवश्य करें

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की छात्राओं के द्वारा 21 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से तथा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक के निर्देशानुसार प्रातः 8 से 8:10 बजे तक मंत्र उच्चारण के साथ सूर्य नमस्कार किया गया। जिसमें महाविद्यालय की 100 छात्राएं उपस्थित रही। इस अवसर पर महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या प्रो रचना प्रकाश ने छात्राओं के द्वारा किए गए योगासन की प्रशंसा करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, साथ ही छात्राओं ने ग्रीन पार्क में भी प्रातः 6:00 बजे से 7:30 तक प्रशासन के निर्देशानुसार उपस्थित होकर योगिक क्रियाएं की। ।कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मिथिलेश गंगवार तथा अनुराधा सिंह , आस्था शुक्ला दिव्या ब्रिहा, सिमरन, श्रद्धा त्रिवेदी आदि छात्राओं का विशेष योगदान रहा।

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ईपीएफओ ने सदस्यों से अनधिकृत एजेंटों से संपर्क करने से बचने और नि:शुल्क तथा सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं के लिए ईपीएफओ के आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करने का आग्रह किया

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने सभी हितधारकों के लिए ईपीएफओ सेवाओं को तेज़, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। ये पहल ईपीएफओ की अपने सभी हितधारकों को परेशानी मुक्त, सुरक्षित और कुशल सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं।

हाल ही में ईपीएफओ ने केवाईसी या सदस्य विवरण में सुधार तथा स्थानांतरण दावों को प्रस्तुत करने के सरलीकरण, एक लाख रुपये तक के अग्रिम दावों के स्वत: निपटान के लिए कार्यक्षमता बढ़ाना तथा पेंशन संवितरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) के लिए परिपत्र जारी किए हैं

बीमारी, आवास, विवाह और शिक्षा के लिए अग्रिम ऑटो क्लेम निपटान सुविधा की सीमा को बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 में 2.34 करोड़ दावों का ऑटो मोड में निपटान किया गया। अधिकांश मामलों में नियोक्ता की मंजूरी की आवश्यकता को हटाकर 15.01.2025 से स्थानांतरण दावा प्रक्रिया को भी सरल बना दिया गया है।

आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करके सदस्य प्रोफ़ाइल सुधार के लिए प्रदान की गई ऑनलाइन सुविधा को सरल बनाया गया है। अधिकांश मामलों में सदस्य प्रोफ़ाइल सुधार के लिए नियोक्ता और ईपीएफओ पर निर्भरता समाप्त कर दी गई है। ऑनलाइन डी-लिंकिंग सुविधा ने सदस्यों को उनके यूएएन से गलत सदस्य आईडी को डीलिंक करने में सक्षम बनाया है और इस प्रकार शिकायतों में कमी आई है।

यूएएन का आवंटन और सक्रियण फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (एफएटी) का उपयोग करके उमंग ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। इस सुविधा का लाभ उठाकर, सदस्य को ईपीएफओ सेवाओं जैसे पासबुक देखना, केवाईसी अपडेट, दावा प्रस्तुत करना आदि तक तत्काल पहुंच प्राप्त होती है।

ईपीएफओ ने ऑनलाइन दाखिल दावों के त्वरित निपटान और दावों की अस्वीकृति को कम करने के लिए चेक लीफ/सत्यापित बैंक पासबुक की छवि अपलोड करने की आवश्यकता को हटा दिया है। साथ ही, यूएएन के साथ बैंक खाते के विवरण को जोड़ने के लिए नियोक्ता की मंजूरी की आवश्यकता को अप्रैल 2025 से हटा दिया गया है।

हालांकि, यह देखा गया है कि कई साइबरकैफे संचालक/फिनटेक कंपनियां ईपीएफओ सदस्यों से उन सेवाओं के लिए बड़ी रकम वसूल रही हैं जो आधिकारिक तौर पर मुफ्त हैं। कई मामलों में ये संचालक केवल ईपीएफओ के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं, जिसे कोई भी सदस्य अपने घर बैठे, मुफ्त में कर सकता है। हितधारकों को ईपीएफओ से संबंधित सेवाओं के लिए तीसरे पक्ष की कंपनियों या एजेंटों के पास जाने या उनसे जुड़ने के खिलाफ चेतावनी दी जाती है क्योंकि इससे उनका वित्तीय डेटा तीसरे पक्ष की संस्थाओं के सामने आ सकता है। ये बाहरी संस्थाएं ईपीएफओ द्वारा अधिकृत नहीं हैं और वे अनावश्यक शुल्क ले सकती हैं या सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से समझौता कर सकती हैं।

ईपीएफओ के पास एक मजबूत शिकायत निगरानी और निवारण प्रणाली है, जिसमें सदस्यों की शिकायतों को सीपीजीआरएएमएस या ईपीएफआईजीएमएस पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है और समयबद्ध तरीके से उनके समाधान होने तक उनकी निगरानी की जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में ईपीएफआईजीएमएस में कुल 16,01,202 शिकायतें और सीपीजीआरएएमएस में 1,74,328 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 98 प्रतिशत शिकायतों का समय सीमा के भीतर निवारण किया गया। ईपीएफओ अपने सभी सदस्यों, नियोक्ताओं और पेंशनभोगियों को ईपीएफओ पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने की सलाह देता है। दावा दाखिल करना, स्थानान्तरण, केवाईसी अपडेशन और शिकायत प्रक्रिया सहित सभी ईपीएफओ सेवाएं पूरी तरह से नि:शुल्‍क हैं और सदस्यों को उन सेवाओं के लिए तीसरे पक्ष के एजेंटों या साइबर कैफे को कोई शुल्क नहीं देना चाहिए, जिन्हें आसानी से ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, सदस्य किसी भी प्रकार की समस्या के लिए आधिकारिक वेबसाइट (www.epfindia.gov.in) पर सूचीबद्ध क्षेत्रीय कार्यालयों में ईपीएफओ हेल्पडेस्क/पीआरओ से संपर्क कर सकते हैं।

ईपीएफओ विश्व स्तरीय, प्रौद्योगिकी-संचालित सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के साथ भारत के कार्यबल को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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प्रधानमंत्री और साइप्रस के राष्ट्रपति ने साइप्रस और भारत के व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति महामहिम निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के साथ आज लिमासोल में साइप्रस और भारत के व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ गोलमेज वार्ता की। प्रतिभागियों में बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों, विनिर्माण, रक्षा, रसद, समुद्री, शिपिंग, प्रौद्योगिकी, नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, एआई, आईटी सेवाओं, पर्यटन और गतिशीलता जैसे विविध क्षेत्रों के प्रतिनिधि सम्मिलित थे।

पिछले 11 वर्षों में भारत के तेजी से आर्थिक परिवर्तन की जानकारी देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि अगली पीढ़ी के सुधारों, नीतिगत पूर्वानुमान, स्थिर राजनीति और व्यापार करने में आसानी से प्रेरित होकर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। नवाचार, डिजिटल क्रांति, स्टार्ट-अप और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विकास को दी जा रही प्राथमिकता पर बल देते हुए, श्री  मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, भारत कुछ वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा कि भारत में नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, जहाज निर्माण, डिजिटल भुगतान और हरित विकास क्षेत्रों में स्थिर वृद्धि ने साइप्रस की कंपनियों के लिए भारत के साथ साझेदारी करने के असंख्य अवसर खोले हैं। उन्होंने भारत की कुशल प्रतिभा और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत की जानकारी दी और भारत की विकास गाथा में योगदान देने वाले नए और उभरते क्षेत्रों के रूप में विनिर्माण, एआई, क्वांटम, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइप्रस भारत के लिए   खासकर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में नए निवेश के लिए साइप्रस की गहरी रुचि का स्वागत किया। वित्तीय सेवा क्षेत्र में व्यावसायिक जुड़ाव की संभावना पर बल देते हुए, दोनों नेताओं ने एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज गिफ्ट सिटी, गुजरात और साइप्रस स्टॉक एक्सचेंज के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। एनआईपीएल (एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड) और यूरोबैंक साइप्रस ने दोनों देशों के बीच सीमा पार भुगतान के लिए यूपीआई शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। इससे पर्यटकों और व्यवसायों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने भारत-ग्रीस-साइप्रस (आईजीसी) व्यापार और निवेश परिषद के शुभारंभ का भी स्वागत किया, जो शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने इस तथ्य का स्वागत किया कि कई भारतीय कंपनियां साइप्रस को यूरोप के प्रवेश द्वार और आईटी सेवाओं, वित्तीय प्रबंधन और पर्यटन के केंद्र के रूप में देखती हैं।

साइप्रस अगले वर्ष यूरोपीय संघ परिषद की अध्यक्षता संभालने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने वर्ष के अंत तक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को पूरा करने के बारे में आशा व्यक्त की, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि व्यापार गोलमेज चर्चा ने व्यावहारिक सुझाव दिए हैं जो संरचित आर्थिक रोडमैप का आधार बनेंगे। इससे व्यापार, नवाचार और रणनीतिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग सुनिश्चित होगा।

साझा आकांक्षाओं और भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, भारत और साइप्रस गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक सहयोग के नए युग के लिए तैयार हैं।

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पोर्टल सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए आरएनआई राज्यवार वर्कशाप आयोजित करे – के. डी. चन्दोला

भारतीय स्वरूप संवाददाता देहरादून विगत दिवस हिन्दी भवन देहरादून में एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया की उत्तराखंड इकाई द्वारा ’’छोटे एवं मंझोले समाचार पत्रों के लिए बढ़ती चुनौतियां’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । गोष्ठी का शुभारंभ डा. नीता कुकरेती जी, पूर्व उपाध्यक्ष, हिन्दी साहित्य समिति देहरादून द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया । अतिथियों के स्वागत उपरांत विषय पर चर्चा प्रारम्भ करते हुए एसोसियेशन की प्रदेश अध्यक्ष निशा रस्तोगी ने कहा कि आरएनआई द्वारा समाचार पत्रों का पंजीकरण व अन्य सभी कार्य पोर्टल के माध्यम से करने की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है परन्तु पोर्टल में कमियां होने के कारण समाचार पत्र प्रकाशकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सम्पादक दैनिक शिखर संदेश पर्वतीय सम्पादक परिषद के अध्यक्ष एवं एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री आई.पी. उनियाल ने भी स्माल एवं मीडियम समाचार पत्रों के संचालन में आने वाली कठिनाईयों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उनके निवारण हेतु प्रयास करने की अपेक्षा की । वरिष्ठ पत्रकार श्री इन्द्रदेव रतूड़ी ने भी प्रकाशकों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया कि पत्रकारों के सभी संगठनों को संयुक्त रूप से संघर्ष कर समस्याओं का निवारण करने के प्रयास करने चाहिएं । वरिष्ठ पत्रकार एवं देवभूमि पत्रकार यूनियन उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री श्री बी0डी0शर्मा ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि आरएनआई द्वारा छोटे व मंझोले समाचार पत्रों का गला दबाने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। एक ओर इलैक्ट्रोनिक चैनल, पोर्टल एवं सोशल मीडिया के कारण पहले ही छोटे व मंझोले समाचार पत्रों के प्रकाशन में कठिनाइयां बढ़ रही हैं दूसरी ओर आरएनआई द्वारा दिन प्रतिदिन नये नये प्रतिबन्ध लगाकर छोटे समाचार पत्रों के समक्ष परेशानियां खड़ी की जा रही हैं। कार्यक्रम में अध्यक्षीय सम्बोधन करते हुए एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के0डी0चन्दोला द्वारा कहा गया कि आरएनआई के पोर्टल में अनेक कमियां होने के कारण सभी प्रकाशकों के समक्ष कठिनाइयां आ रही है जिसके कारण उन्होंने आरएनआई से अनुरोध किया है कि पोर्टल के संचालन हेतु प्रदेश स्तर पर वर्कशाप का आयोजन कर प्रकाशकों, सम्पादकों को उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए ताकि वे अन्य को भी जानकारी देकर कार्यो का सम्पादन कुशलता से कर सकें ।

 कार्यक्रम में श्री राजेश डोभाल जी ने राष्ट्रभक्ति का गीत प्रस्तुत किया, श्री बी0एस0नेगी जी द्वारा भी अपने विचार प्रस्तुत किये गये । कार्यक्रम के समापन की घोषणा करते हुए एसोसियेशन के प्रान्तीय महामंत्री एस0सी0भटनागर ने सभी अतिथियों व सभागार में उपस्थित समस्त सम्मानित अतिथियों का आभार व्यक्त किया । अन्त में गुजरात में हुए विमान हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए समस्त दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु प्रार्थना की गई। साथ ही एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री शिवचन्द अग्निहोत्री जी के माह अप्रैल 2025 में हुए निधन पर भी शोक प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई।

 कार्यक्रम में श्रीमति भगवती, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया, श्री आलोक अग्निहोत्री, कानपुर, हिन्दी साहित्य समिति के उपाध्यक्ष डा. राकेश बलूनी, हिन्दी साहित्य समिति के महामंत्री श्री हेमवतीनन्दन कुकरेती, श्री स्वपनिल सिन्हा, सविता आदि भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट काजल द्वारा किया गया ।

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सशक्त ग्रामीण समुदायों के बिना विकसित भारत संभव नहीं है: केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री श्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा है कि सशक्त ग्रामीण समुदायों के बिना विकसित भारत संभव नहीं है। गोवा के मीरमार में आज प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री पेम्मासानी ने कहा कि जब हमारे गांव समृद्ध होंगे, तो भारत समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना अंत्योदय की सच्ची भावना – अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान- को मूर्त रूप देती है।

श्री पेम्मासानी ने कहा कि पीएमएवाई-ग्रामीण एक नीति से कहीं अधिक है, इस योजना के तहत उम्मीदें साकार हुई हैं, सपनों को मूर्त रूप दिया गया है और परिवारों को अनिश्चितता से सुरक्षा की ओर ले जाया गया है। उन्होंने कहा, “मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घरों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, हमने पहले ही उल्लेखनीय प्रगति की है। आज तक, कुल 3.90 करोड़ लक्ष्य आवंटित किए गए हैं, 3.69 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है और 2.76 करोड़ घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना के तहत बने घरों की प्रत्येक संख्या एक परिवार को शांति से नींद लेते हुए, बच्चों को सुरक्षित रूप से पढ़ते हुए और बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीवन गुजारते हुए दर्शाती है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बदलाव केवल घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकार पीएमएवाई-जी को उज्ज्वला, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत जैसी प्रमुख योजनाओं के साथ जोड़ रही है, ताकि केवल घर ही नहीं, बल्कि समग्र आवास का निर्माण किया जा सके। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को स्वच्छ जल, स्वच्छता और खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन मिले।

श्री पेम्मासानी ने कहा कि सरकार की सोच ईंटों और गारे से कहीं आगे की है। राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से, हम ग्रामीण भारत में कुशल कारीगरों का एक समूह तैयार कर रहे हैं। यह अपने शुद्धतम रूप में आर्थिक सशक्तिकरण है। हमारा उद्देश्य नौकरियां पैदा करना, विशेषज्ञता का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण युवा अपनी समृद्धि के लेखक स्वयं बनें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम ग्रीन हाउसिंग की ओर जा रहे हैं,

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भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा एंटी सबमरीन वॉरफेयर-शैलो वाटर क्राफ्ट श्रेणी का पहला पोत अर्नाला

भारतीय नौसेना 18 जून 2025 को विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में पहला एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट – अर्नाला अपने बेड़े में शामिल करेगी। समारोह की अध्यक्षता चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान करेंगे। समारोह की मेज़बानी पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर करेंगे। नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, विशिष्ट अतिथि तथा पोत के निर्माण से जुड़ी विभिन्न अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि समारोह में शामिल होंगे।

सोलह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट श्रेणी के जहाजों में से पहले पोत को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किए जाने का यह अवसर होगा। इस जहाज का निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने लॉर्सन एंड टुब्रो शिपबिल्डर्स के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी में किया है। अर्नाला रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर भारत की पहल की सफलता का प्रमाण है ।

पोत निर्माण निदेशालय के मार्गदर्शन और कोलकाता और कट्टुपल्ली में युद्धपोत निरीक्षण टीमों की देखरेख में निर्मित, अर्नाला को 08 मई 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। ( https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2127729 )। महाराष्ट्र के वसई में स्‍थित ऐतिहासिक अर्नाला किले के नाम परयह युद्धपोत भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को दर्शाता है। विभिन्न खतरों के खिलाफ मजबूती से खड़े किले की तरह यह जहाज समुद्र में दुर्जेय उपस्थिति दर्ज कराएगा। इसका मजबूत निर्माण और उन्नत क्षमताएं सुनिश्चित करती हैं कि यह समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों का सामना कर उभरते खतरों से जलीय क्षेत्र में भारत की रक्षा करेगा।

80 प्रतिशत स्‍वदेशी तकनीक से निर्मित यह पोत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एलएंडटी, महिंद्रा डिफेंस और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड – एमईआईएल सहित प्रमुख भारतीय रक्षा फर्मों की उन्नत प्रणालियों से युक्‍त है। इस परियोजना में घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने और संबंधित आर्थिक गतिविधियां उत्पन्न करने वाले 55 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल रहे हैं।

एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट ऑपरेशन श्रृंखला के लिए डिज़ाइन और निर्मित गया, अर्नाला पोत, उपसतह-तटीय इलाकों में खुफिया निगरानी, तटीय सुरक्षा, खोज और बचाव तथा कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में सक्षम है। 1490 टन से अधिक वजन का 77.6 मीटर लंबा भारतीय नौसेना का यह सबसे बड़ा डीजल इंजन-वॉटरजेट संयोजन से चलने वाला युद्धपोत है।

अर्नाला पोत के नौसेना बेड़े में शामिल होने से यह भारत की नौसैनिक क्षमताओं में  परिवर्तनकारी बदलाव लाएगा। इससे तटीय सुरक्षा मजबूत होगी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में यह आत्मनिर्भर समुद्री शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ बनाएगा।

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