पीएम गति शक्ति परियोजना के बारे में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा, “पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान (एनएमपी) एक बहुत बड़ी पहल है और इससे हमें लॉजिस्टिक की लागत को कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिका जैसी अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सकल घरेलू उत्पाद के 8 से 9 प्रतिशत की तुलना में भारत में लॉजिस्टिक लागत जीडीपी की 13 से 14 प्रतिशत के स्तर तक है, जो काफी ज्यादा है। ऊंची लॉजिस्टिक लागत वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। लॉजिस्टिक की लागत को जीडीपी के 9 प्रतिशत तक कम करना सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है।”
राजमार्ग नेटवर्क में सुधार की योजनाओं के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनएचएआई राजमार्गों से सटे 600 से ज्यादा स्थानों पर विश्व स्तरीय वेसाइड एमेनिटीज (डब्ल्यूएसए) यानी सड़क किनारे की सुविधाएं विकसित कर रहा है। अच्छे शौचालय, पार्किंग और रेस्तरां जैसी बुनियादी सुविधाओं के अलावा, इन वे साइड एमेनिटीज में ट्रक ड्राइवरों के लिए शयनगृह, ईवी चार्जिंग सुविधाएं, कन्वेंशन सेंटर, ट्रामा सेंटर और हस्तशिल्प और स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए खुदरा दुकानें भी होंगी। सड़क दुर्घटनाओं और अंग प्रत्यारोपण जैसी आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए कुछ डब्ल्यूएसए में हेलीपैड और ड्रोन लैंडिंग की सुविधाएं भी होंगी।
अपने संबोधन में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग और आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत उस गति से आगे बढ़ रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने में 60 साल लगे और अब, 2014 के बाद केवल 9 वर्षों में, भारत लगभग साढ़े तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हो गई है।”
श्री सोनोवाल ने कहा कि पीएम गति शक्ति एनएमपी के तहत, पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय ने 2025 तक कार्यान्वयन के लिए 62,227 करोड़ रुपये की 101 परियोजनाओं की पहचान की है। इन 101 परियोजनाओं में से 8,897 करोड़ रुपये की 26 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 15,343 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं विकास के चरण में है और 36,638 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। कार्यान्वयन के तहत परियोजनाओं में से, 20,537 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाओं के दिसंबर 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 101 गति शक्ति परियोजनाओं में से 9,867 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाएं महाराष्ट्र में कार्यान्वित हो रही हैं, जिनमें से 3,165 करोड़ रुपये की 3 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। 675 करोड़ रुपये की 2 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं, वहीं बाकी 6,027 करोड़ रुपये की 7 परियोजनाएं कार्यान्वयन के दौर में हैं और इनके 2025 तक पूरी होने का अनुमान है।
सागरमाला परियोजना के तहत प्रगति के बारे में विस्तार से बताते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत 2035 तक 5.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 802 परियोजनाएं कार्यान्वित होनी हैं। 1,21,545 करोड़ रुपये की 228 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं और 2.36 लाख करोड़ रुपये की 260 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। महाराष्ट्र राज्य में, सागरमाला कार्यक्रम के तहत 1,13,285 करोड़ रुपये की 126 परियोजनाएं हैं। 126 परियोजनाओं में से 16,393 करोड़ रुपये की 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 18,146 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। 78,746 करोड़ रुपये की 45 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं। हरित पहलों के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत 2035 तक सभी बड़े बंदरगाहों में ग्रीन हाइड्रोजन/ अमोनिया बंर और रिफ्यूलिंग की सुविधाएं स्थापित की जानी हैं। दीनदयाल, पारादीप और वी ओ चिदम्बरानार बंदरगाहों पर हाइड्रोजन बंकरिंग की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।
इस अवसर पर रेलवे और कपड़ा राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने कहा कि आईएमसी की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वदेशी आंदोलन में योगदान देने की समृद्ध विरासत रही है। उन्होंने कहा कि रेल क्षेत्र में ऐसी कई परियोजनाएं हैं जहां निवेश के अवसर हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया, “कई घरेलू और विदेशी निवेशक रेल परियोजनाओं में निवेश करना चाह रहे हैं। रेल क्षेत्र में स्वचालित रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। सरकार की 2030 तक रेल बुनियादी ढांचे में 715 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना है।”
इससे पहले, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि परिचालन तैयारियों को बनाए रखने के लिए भारत मुख्य रूप से रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर है और हमारे सामरिक लक्ष्यों के लिए आत्म निर्भरता और आयात पर निर्भरता को कम करना काफी अहम है। वे ‘रक्षा विनिर्माण में अवसर’ विषय पर आयोजित सत्र में बोल रहे थे।
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देश के लोगों की जानमाल से खिलवाड़ कर रही है कैब कम्पनी ‘‘ओला’’
बताते चलें कि ओला (ओ0 एल0 ए0) कैब कम्पनी से हुण्डई कम्पनी की एक कार नम्बर यू0पी0 78 एफ0 एन0 5980 सम्बद्ध है। कैब कम्पनी के अभिलेखों में इस गाड़ी को चलाने हेतु विजय कुमार नामक व्यक्ति अधिकृत है। दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद कई महीनों से उपरोक्त कार, जी0-1 टी/17, अर्मापुर स्टेट कानपुर नगर के पते पर खड़ी है। इस गाड़ी का फिटनेश 16 जनवरी 2021 तक, टैक्स 31 दिसम्बर 2019 तक व इन्श्योरेन्स 15 जनवरी 2020 तक वैध है और उपरोक्त गाड़ी के नाम पर ओला (ओ0 एल0 ए0) कैब कम्पनी, लोगों को बुकिंग दे कर कमीशन के लालच में उनकी जानमाल की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है। ऐसे में आशंका है कि ऐसा ही अनेक मामलों में और भी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि देश की अन्य कैब कम्पनियों में भी क्या ऐसा नहीं हो रहा होगा और लोगों की जानमाल की सुरक्षा के साथ अन्य कम्पनियों द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा होगा ?
दर्जनों लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने का आरोपी जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, जिन कैमरों के साये में उसके चहरे पर मृत्यु का खौफ तो दूर, रंच मात्र का शक भी नहीं था| उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार ने माफिया और उसके भाई का पल भर में काम तमाम कर दिया| यह सब अचानक हुआ या पूर्व नियोजित साजिश के तहत, इसकी चर्चा इस समय गाँव की गलियों से लेकर शहर के नुक्कड़ों तक हो रही है| किसी भी निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के बाद लोग यह कहते हुए बातचीत का विषय बदल देते हैं कि सच जल्द ही सबके सामने आएगा| वहीँ कुछ लोग यह भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि पकड़े गये तीनों हमलावरों को किसी बहाने से मौत के घाट उतारकर कहीं सत्य को सदा सर्वदा के लिए दफ़न ही न कर दिया जाए| आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है| लेकिन इस घटना के बाद से लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता, अब सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा है| समाज के कुछ बुद्धिजीवियों ने अभी तक पत्रकारिता को विरोधी और गोदी मीडिया के रूप में वर्गीकृत कर रखा था| लेकिन अब वह गोली मीडिया के रूप में लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का तीसरा वर्ग भी निर्धारित कर सकते हैं| टीवी चैनलों की आई बाढ़ और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन ने पत्रकारिता के मायने आज पूरी तरह बदल दिये हैं| टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में हल्ला बोल पत्रकारिता के शोरगुल के बीच मूल्यों की तिलांजलि न जाने कब दी जा चुकी है| लेकिन प्रयागराज की घटना ने पत्रकारिता का जो नवीन चेहरा प्रस्तुत किया है, उससे चिन्तित हुए बिना नहीं रहा जा सकता| वरिष्ठ पत्रकारों से अक्सर उनके जानने वाले प्रेस का परिचय-पत्र बनवाने के लिए निवेदन करते रहते हैं| ताकि वह अपने वाहन पर प्रेस लिखा सकें तथा सरकारी विभागों में पत्रकारिता का रौब जमाकर अपना व्यक्तिगत काम करवा सकें| रजिस्ट्रार ऑफ़ न्यूजपेपर्स फॉर इण्डिया से किसी तरह रजिस्ट्रेशन नम्बर हासिल करने वाले अनेक सम्पादक ऐसे हैं जिनके अख़बार का धरातल पर कहीं कोई बजूद नहीं है| ऐसे सम्पादक शौकिया लोगों से सदस्यता शुल्क के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूल कर, अपने अख़बार का परिचय-पत्र प्रदान करके पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रहे हैं| इसी सदस्यता शुल्क से ही सम्पादक जी के परिवार का खर्च चलता है| भले ही उनके अख़बार का पहचान-पत्र प्राप्त करने वाले उसका किसी भी हद तक दुर्पयोग क्यों न करते हों| यहाँ सदुपयोग के बारे में तो सोचना ही व्यर्थ है| अतीक और अशरफ के तीनों कातिलों के पास से जो डमी कैमरे बरामद हुए हैं| उनके बारे में अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि उनके माइक पर चिपका लोगो किस मीडिया संस्थान का है| लेकिन इससे इतना तो अनुमान लग ही जाता है कि कुछ टीवी चैनल भी फर्जी आईडी बनाने का कारोबार कर रहे हैं|
कानपुर 19 अप्रैल भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर में मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग समारोह (MoU Ceremony) का आयोजन महाविद्यालय सभागार में किया गया। महाविद्यालय ने अपना प्रथम समझौता ज्ञाप (MoU) वरदान इंस्टीट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसिंस एंड एलाइड साइंसेज मेरठ के साथ किया। वरदान इंस्टीट्यूट की चेयरपर्सन डॉ. पल्लवी रस्तौगी, सेन महाविद्यालय के सचिव श्री प्रोबीर कुमार सेन, प्राचार्य प्रो. सुमन ने MoU पर हस्ताक्षर किए। प्रो. सुमन ने अपने वक्तव्य में कहा कि विद्यार्थी हित हेतु महाविद्यालय आगे भी ऐसी ही कड़ियां जोड़ता रहेगा। श्री पी. के. सेन जी ने इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार को बधाई एवम् शुभकामनाएं दी। डॉ. पल्लवी रस्तौगी ने छात्राओं को अवगत कराया कि वरदान इंस्टीट्यूट के सहयोग से सेन महाविद्यालय में व्यवसायपरक शिक्षा के अंतर्गत एक्यू फिजियो कोर्स, चक्र संतुलन, कलर थैरेपी, एक्यूप्रेशर व नेचुरोपैथी का बेसिक कोर्स, डाइट एंड न्यूट्रीशन कोर्स आदि विभिन्न पाठ्यक्रम तथा कार्यशालाएं संचालित की जाएंगी। साथ ही मेधावी छात्राओं को इन पाठक्रमों हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी। इस MoU सेरेमनी के अवसर पर प्रबंध तंत्र सदस्य श्रीमती दीपाश्री सेन सहित समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।