छात्र-छात्राओं ने नाटक के माध्यम से सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और कुटुंब प्रबोधन का दिया संदेश
भारतीय संस्कृति और देश प्रेम का प्रतीक बना वार्षिकोत्सव*
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय नवाबगंज में चल रहे त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या “अभिव्यंजना” हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें पंच परिवर्तन – स्व का बोध, नागरिक कर्त्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, और सामाजिक समरसता पर आधारित विविध कार्यक्रम विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर उपस्थित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कानपुर नगर महेंद्र सिंह तँवर और विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ० संजीव गुप्त तथा ए डी एम सिटी सौरभ सिंह, ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्री वीरेंद्रजीत सिंह (अध्यक्ष, श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल), विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष योगेंद्र नाथ भार्गव, विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती नीतू सिंह, सह प्रबंधक श्रीमती उर्षमीना खेर तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राकेश राम त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया।
वार्षिकोत्सव ‘अभिव्यंजना’ के इस सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा स्तुति से हुई। यह नृत्य मां दुर्गा के दिव्य स्वरुप को समर्पित है जो शक्ति, साहस, करुणा और संरक्षण की प्रतीक हैं। बहुत ही भावपूर्ण मुद्राओं और सशक्त अभिनय से मां के तेजस्वी एवं करुणामई स्वरूप की प्रस्तुति ने सभी दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी श्री महेंद्र सिंह तँवर जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीनदयाल जी का चिंतन, उनकी तपस्या, त्याग और साधना की खुशबू हमें इस विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देखने को मिली। दीनदयाल जी के दो दर्शन- अंत्योदय और समग्र विकास मुझे आकर्षित करते हैं। उनमें से अंत्योदय दर्शन जिस पर दीनदयाल जी का विचार था कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाए। उनका दूसरा दर्शन समग्र विकास है जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक विकास की बात की गई है। समग्र विकास को पूर्ण करने के लिए वर्तमान सरकार प्रयत्न शील है। सन 2047 तक विकसित भारत और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को पूरा करने में हम सभी योगदान दें। हम सब अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग होकर राष्ट्र निर्माण तथा विकास में सहयोग दें। हम सब मिलकर अपने कानपुर शहर को भी श्रेष्ठता के शिखर पर पहुंचाएं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ० संजीव गुप्त जी ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह विद्यालय अनूठा है यहां शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाते हैं। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि मैंने और मेरे भाई ने यहां से पढ़ाई की है। यहां पर प्रवेश पाना मुश्किल था। विद्यालय का ध्येय वाक्य ‘वयं राष्ट्र जागृयाम’ है। हम स्वयं जागें और राष्ट्र को जगाएं। इस विद्यालय में अष्टधातु की हनुमान जी की प्रतिमा है। हनुमान जी अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हैं, और अत्यंत गुणीहैं। उनकी भक्ति करके आप सभी छात्रों को श्रेष्ठ छात्र बनकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग करना चाहिए। गीता के आठवें श्लोक का प्रसंग लेते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान पवित्र होना चाहिए और पवित्र ज्ञान और विनम्रता से ही सब कुछ पाया जा सकता है। आप सभी ज्ञान के साथ विनम्रता प्राप्त करें।
विद्यालय की प्रबंधक श्रीमती नीतू सिंह जी ने विद्यालय की वार्षिक प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारा विद्यालय उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर अग्रसर है और अनेक उपलब्धियां प्राप्त कर रहा है। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक दीनदयाल विद्यालय के विद्यार्थियों ने जो कीर्तिमान इस वर्ष स्थापित किए हैं उनका उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हमारे विद्यालय के अनेक छात्र अपनी प्रतिभा, परिश्रम और कुशल मार्गदर्शन से देश विदेश के अनेक विभागों में सेवाएं देते हुए हमारे विद्यालय और कानपुर का नाम रोशन कर रहे हैं।
इस वर्ष की प्रतियोगी परीक्षाओं में कई छात्र चयनित हुए हैं, जिनमें चिरंजीव कुणाल गुप्त जो 2021 बैच के छात्र रहे हैं इन्होंने सी. ए. की परीक्षा में कानपुर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। 2021 बैच के चिरंजीव रोहन कुशवाहा तथा 2018 बैच के चिरंजीव कार्तिकेय तिवारी ने भी सी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। चिरंजीव श्रेष्ठ वर्मा तथा चिरंजीव सूर्यांश यादव का नीट परीक्षा में चयन हुआ। कानपुर सहोदय विद्यालय संगठन (KSS) में हमारे विद्यालय का प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
कक्षा 6 से 12 तक की बालक वर्ग की खो-खो प्रतियोगिता में विद्यालय को प्रथम स्थान और कक्षा 6 से 8 तक के बालक वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में भी विद्यालय को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। कक्षा 6 से 8 तक बालिका वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में आठवीं कक्षा की कुमारी छवि बोर्ड विनर रहीं और कक्षा 9 से 12 तक बालक वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में 11वीं कक्षा के चिरंजीव अरिहंत राजपूत बोर्ड विनर रहे। कक्षा 9 से 12 तक बालिका वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में नवीं कक्षा की कुमारी नव्या राठौर बोर्ड विनर रहीं। कक्षा 9 से 12 तक हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यालय की छात्रा कुमारी आकृति सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। गया। सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी में विद्यालय को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। इसी प्रकार से हमारे विद्यालय ने अन्य अनेक प्रतियोगिताओं जैसे -अमर उजाला द्वारा आयोजित शतरंज प्रतियोगिता में, लखनऊ में ताइक्वांडो एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में, ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा दिल्ली में आयोजित ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में, जिला भारोत्तोलन संघ द्वारा आयोजित भारोत्तोलन प्रतियोगिता में, सीबीएसई द्वारा आयोजित क्लस्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में, प्रताप इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित विज्ञान प्रतियोगिता में तथा अन्य अनेक प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करते हुए अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ पर आधारित विद्यालय में एक नाटक वटवृक्ष प्रस्तुत किया गया। यह नाटक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने सन् 1925 में विजयदशमी के दिन की थी। प्रारंभ में इस संगठन की स्थापना का उद्देश्य अंग्रेजों की गुलामी के विरुद्ध आवाज उठानी और संगठन खड़ा करना था। कालांतर में आजादी के बाद समाज में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण की सुरक्षा, नागरिक कर्त्तव्य और स्वदेशी का बोध इन पांच संकल्पों के प्रति जागरूक करना है। उनकी इस विचारधारा को किस प्रकार से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक माधव सदा शिवराव गोलवलकर (गुरुजी), बालासाहेब जी, के सी सुदर्शन जी, रज्जू भैया जी, दीनदयाल उपाध्याय जी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, अटल बिहारी वाजपेई जी, अशोक सिंघल जी, बालाजी देशमुख और मोहन भागवत जी ने आगे बढ़ाया तथा आत्मनिर्भर भारत के लिए एक जिम्मेदार नागरिक की भावना एक ही विचार, एक ही प्रेरणा, अनेक रूप और एक ही लक्ष्य ‘राष्ट्र प्रथम’ की होनी चाहिए यह दर्शाना नाटक का मुख्य उद्देश्य रहा।
पर्यावरण संरक्षण के संकल्प पर आधारित कथक नृत्य की प्रस्तुति द्वारा यह संदेश दिया गया कि जहां प्रकृति है वहां जीवन है। प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की रक्षा है। पेड़ लगाने, जल को बचाने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, प्रत्येक जीव -जंतुओं की रक्षा करने और अपने पर्यावरण का संरक्षण करके प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेवारी है।
भावपूर्ण मुद्राओं, जटिल पदचाप, लयबद्ध संरचनाओं और गतिशील सामूहिक विन्यासों के माध्यम से इस प्रस्तुति ने हरे – भरे वनों, बहते जल और प्रवाहित होने वाली हवा तथा पृथ्वी पर विद्यमान जीत की जीवंतता को साकार करते हुए इस अद्भुत प्रस्तुति नै पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
दशावतार नृत्य नाटिका भाव विभोर कर देने वाली प्रस्तुति द्वारा भगवान विष्णु के दस अवतारों मत्स्य, कूर्म, वाराह, नरसिंह, दामोदर, मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम, भगवान श्री कृष्ण, भगवान बुद्ध, और कल्कि की मनमोहक प्रस्तुतियों द्वारा यह संदेश दिया गया कि सत्य, धर्म, करुणा और न्याय की शक्ति हमेशा झूठ, अधर्म, अहंकार और अन्याय पर विजय प्राप्त करती है।
नुक्कड़ नाटक “टूटता संसार” की प्रस्तुति के द्वारा मोबाइल के बढ़ते प्रभाव, संवाद की कमी और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण टूटते संयुक्त परिवारों को पुनः जोड़ने, मिलकर रहने, आपसी संवाद बनाए रखने और पारिवारिक मूल्यों को जगाने (कुटुंब प्रबोधन) का प्रयास किया गया।
आर्केस्ट्रा नाद – निनाद : भारतीय शास्त्रीय संगीत के अत्यंत लोकप्रिय राग यमन पर आधारित शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं एवं वाद्य यंत्रों – हारमोनियम, तबला, नाल, बांसुरी, घूंघररू और गिटार के सुंदर समन्वय की अद्भुत प्रस्तुति ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
राग ध्रुपद गायन यह भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीनतम एवं गंभीर गायन शैलियों में से एक है, जिसका विकास मुख्यतः मार्गी संगीत के साधकों तथा राजदरबारों की संगीत परंपरा में हुआ। ध्रुपद गायन में स्वर की शुद्धता, गंभीरता चार खंड की आलापचारी और लय का विशेष महत्त्व होता है। छात्रों ने दोनों प्राचीन शास्त्री परंपरा की गायन शैलियों की अद्भुत प्रस्तुति से सबको भावविभोर कर दिया।
समूह गान सीनियर वर्ग के छात्रों द्वारा स्वदेशी थीम पर आधारित ‘आत्मनिर्भर भारत होगा’ गीत के माध्यम से स्वदेशी को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
विद्यालय के छात्र समिष्ठ अग्रवाल ने शास्त्रीय एकल गायन की प्रस्तुति देकर गायन कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। चरैवेति -चरैवेति गीत के माध्यम से मिलकर चलने का संदेश दिया।
समूहगान ‘सर पर हिमालय का छत्र है’ इस भावपूर्ण संघ गीत की प्रस्तुति के माध्यम से एकता, अनुशासन, समर्पण, राष्ट्र-प्रेम और निःस्वार्थ सेवा की भावना को अभिव्यक्ति करते हुए यह संदेश दिया गया कि जब हम एक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं तो हमारा प्रत्येक प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन जाता है।
नागरिकों के कर्त्तव्य पर आधारित नृत्य-नाटकः ‘हम भारत के नागरिक हैं” प्रस्तुत किया गया जो आज के समय में नागरिक होने के असली मायने समझाता है। नाटक में यह दिखाया गया कि देश की समस्याएँ सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं बल्कि उन समस्याओं और समाज की व्यवस्था की जिम्मेदारी लेना असली नागरिकता है। नागरिक चेतना, सामाजिक संवेदनशीलता तथा मानवीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना इस नाटक का मुख्य संदेश रहा।
इंग्लिश प्ले- Legacy of India (भारत की विरासत) की प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारत की असली विरासत सिर्फ़ पुरानी इमारतों या राजनीतिक उपलब्धियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हज़ारों साल पुरानी एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जो यहाँ के लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और उनकी आत्मा में रची-बसी है। ईमानदारी से की गई मेहनत और इंसान का सम्मान ऐसी दौलत है जिसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। आत्म सम्मान की भावना, कुशल कारीगरी और हुनर को महत्व देना सर्वोपरि बताया गया। भारत की असली विरासत को एक सक्रिय जीवन शक्ति और ऐतिहासिक घावों को भरने तथा दुनिया में सद्भाव को बढ़ावा देने के रूप में दर्शाया गया।
अभिव्यंजना सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय के सैकड़ो छात्र-छात्राओं ने विविध कार्यक्रमों की अद्भुत प्रस्तुति द्वारा सभी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया और उपस्थित सैकड़ों दर्शकों ने उपर्युक्त सभी कार्यक्रमों की खूब सराहना की। इस अवसर पर मोहित यादव जी अध्यक्ष ग्रुप ऑफ सीएचएस, माननीय ब्रजमोहन जी प्रधानाचार्य बी एन एस डी इंटर कॉलेज, प्रांत प्रचारक श्री राम जी, विभाग प्रचारक बैरिस्टर जी, माननीय श्री नारायण जी नगर संघचालक दीनदयाल नगर, माननीय मोहन तिवारी जी जिला संघ चालक कानपुर, श्याम बाबू गुप्ता जी विभाग संघ चालक, आदित्य शंकर उपाध्यक्ष महामंडल आदि अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य जी राकेश राम त्रिपाठी जी ने समस्त छात्र-छात्राओं की विभिन्न प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कार्यक्रम में पधारे समस्त अतिथियों अभिभावकों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का प्रबंध समिति में स्वागत किया।
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