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विविधा

मज़े की लाइफ

दैनिक भारतीय स्वरूप, कुछ ख्याल अक्सर अचानक आते हैं यूंकि बेमतलब से लगते हैं लेकिन सोचने पर मजबूर करते हैं कि हम जिंदगी को किस नजर से देखते हैं और शायद हमारा नजरिया हमारी जिंदगी के रास्ते भी तय करता है। कितने ही दुख सुख आते जाते हैं, कितने ही लोग मिलते बिछड़ते हैं जिंदगी में, पता नहीं कब कौन दोस्त बन जाता है और कब किसका साथ छूट जाता है। ये वक्त, ये पल ऐसे होते हैं जिनमें डूबकर हम बह जाते हैं या फिर मौन साधकर तटस्थ हो जाते हैं। कुछ ऐसे अपनों से भी वास्ता रहता है जो जिंदगी में नमक और शक्कर की तरह घुले से रहते हैं लेकिन फिर भी जिंदगी नींबू निचोड़ कर शरबत बना ही देती है क्योंकि हमेशा मुस्कुराते हुए हमें संबंधों को स्वीकारना होता है। कभी-कभी लगता है कि यह सब प्रपंच छोड़कर “मजे की लाइफ” का आनंद लेना चाहिए कोई कुछ बोल रहा हो तो बोलने दो उसे हम अपने ही गीत में मगन रहें, कोई पैर खींचना चाहे तो उसके साथ बैठकर बतिया ही लिया जाए। यह रफ्तार भरी जिंदगी कब थम जाती है यह भी हमें देर से मालूम पड़ता है। लब्बोलुआब कुछ यूं है कि पंचायती स्वभाव वाले प्राणी हमेशा खुश रहते हैं। तांक – झांक, लगाई – बुझाई शगल रहता है उनका और कुछ नहीं तो मनोरंजन ही हो जाता है। मोहल्ले में सबसे ज्ञानी भी वही रहते हैं।

“मोहल्ले में सबसे ज्ञानी हम ही हैं ऐसा हम मानते हैं अब क्या करें सबको मालूम हो या ना हो हमारा काम है ज्ञान बांटना और कुछ इधर-उधर करना। अब घर में बहुरिया है तो घर की चिंता से हम मुक्त है सारा जीवन खट लिया तो अब हम मजे से अपनी लाइफ जिएंगे।”
“पता नहीं लड़कियाँ एक ही शहर में शादी करके मायके में काहे पड़ी रहती है, समझ में नहीं आया आज तक। अब हम पूछे तो बुरे बन जाए फिर भी मन की कुलबुलाहट पर काबू कैसे पाएं तो पूछ ही लेते हैं कि का हो लल्लन की दुल्हिन बिटिया घर में है? सब कुसल मंगल तो है ना ?”
सवाल हम पूछा तो जवाब मा सवाल हम ही से पूछ लिया गया।
“अरे चाची! तुमका काहे चिंता हो रही है?”
चाची:- “अरे कुछू नाहीं! मुन्नी को देखा तो पूछ लिया। कौउनो बात नहीं सुखी रहो। रामदुलारी हमका मिलीं रहीं तो उनहीं बताइन कि मुन्नी आई है तो हाल-चाल लेक खातिर आए गयन और तुमरी सहेली बबीता के घर से झगड़े की आवाज आवत रही। लागत भय कि बहुरिया सास का खूब खरीखोटी बोलत रही। रोना धोना मचा रहै खूब, आवाज आवत रही।”
“अरे चाची! सब घर में कुछ ना कुछ होत है तुम काहे परेसान होती हो? घर मा बैइठ के भजन किया करो।”
चाची:- “हां बिटिया! अब यही करना ही है मगर आंख कान नाक बंद थोड़ी कर लेंगे।”
“चाची तुम तुमरी कहो कल तुम्हार बिटेवा तुमका का बोलत रहै ? काहे डांटत रहै?”
अरे कुछ नहीं! चलो हम जा रहे हैं, देर हो रही है। बिटिया लोगन का बहुत दिन मायका मा नाही रहेक चाही। ससुराल मा ही नीक लगतीं हैं और सुनो लल्लन की दुल्हिन हम अपना समझ कै बोलत हन नहीं तो हमका का पड़ी है। राधे-राधे..”
गली के नुक्कड़ पर सहेली नंदा मिल गई दोनों बतियाने लगी। कहां से आ रही हो जी?
“अरे लल्लन के घर पर रुक गये रहन पता है पंदर दिन से घर पर है मुन्नी, हमका तो दाल में कुछ काला नजर आ रहा है?”
“अरे कुछ नहीं! सब कामचोरी है ससुराल में काम करना पड़ता है तो भाग कर मायके आ जाती हैं।”
“हम्म यही बात होई! अच्छा सुनो तुम मंदिर गई रहौ का? बहुत चोट्टा पंडित है सब डकार लेत है फिर भी पेट नहीं भरत है उका ऊपर से ही – ही करत रहत है बस।”
“ऐजी तुम फालतू ना बोला करो उ अपना काम करत हय बेचारा, जो बुलावत है तय कर लेत है उतना मा ही सब होई जात है।”
“का हमका कुत्ता काटा है जो हम ई मेर बोलब? हंय?. हम देखा है कल रजनी कहत रही।”
“अच्छा छोड़ो तुम जाय के खुदही तय कर लो हम का देर हो रही है राधे-राधे।”
चाची:- “ठीक है! राधे-राधे। आजकल कौउनो से कुछू कहे वाला नहीं उल्टे हमरे ऊपर बरस पड़त हैं।”
घर पहुंचते ही… अम्मा जी आ गई? चौधरी वाले काम हो गए हों आपके तो जरा सब्जी काट दो हमको!”
“हां! लाओ दे दो अब यही करेंगे!”
कहने का मतलब यही है कि आप अपनी जिंदगी को अपने मनमुताबिक जियें। जिंदगी में कुछ हासिल करें या ना करें मगर सुकून जरूर हासिल करें। लोगों से जुड़ाव लगाव और संबंध इस जीवन की कमाई है और इसे निभाना वास्तव में कसौटी है कसौटी पर खरा उतरना भी कसौटी ही है आसान नहीं होता मगर यही हमारी पूंजी भी है। अपनी इच्छाओं अपनी भावनाओं और खुद अपने आप को नकारात्मकता से दूर रख कर जीवन का आनंद लेना चाहिए।- – प्रियंका वर्मा माहेश्वरी 

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आखिर लगा ही दी नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री पद पर हैट्रिक

दैनिक भारतीय स्वरुप, जैसा कि पूर्वानुमान था, नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने हैट्रिक लगाते हुए 9 जून को तीसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली| यद्यपि विपक्षी पार्टियों के गठबन्धन इण्डिया ने राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन को कड़ी टक्कर दी है| जिससे भाजपा का 400 पार का स्वप्न साकार नहीं हो सका| इसके कारणों पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गहन विचार करना पड़ेगा| क्योंकि पार्टी के चाणक्यों ने 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने हेतु जो रणनीति बनायी थी, वह कहीं न कहीं विफल साबित हुई| जिसके चलते भाजपा को बहुमत से बहुत कम 240 सीटें ही प्राप्त हुईं| परन्तु उसके नेतृत्व वाले गठबन्धन राजग ने 292 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की| जनवरी 2023 से फरवरी 2024 के बीच विभिन्न एजेंसियों द्वारा कराये गये चुनावी सर्वेक्षणों में भी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैट्रिक लगाते हुए दिखाई दे रहे थे| जो एकदम सही साबित हुआ| लेकिन सीटों को लेकर सर्वेक्षणों का आकलन गलत सिद्ध हुआ| देश की 13 अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कराये गये सर्वेक्षणों के आधार पर भाजपा गठबन्धन को 44.30 प्रतिशत वोट के साथ 341 के आसपास सीटें मिलने की सम्भावना थी| लेकिन भाजपा को मात्र 36.56 प्रतिशत मतों के साथ 240 सीटें ही प्राप्त हुईं और उसके गठबन्धन राजग को 41.56 प्रतिशत मतों के साथ 292 सीटों से सन्तोष करना पड़ा| सर्वेक्षण में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 36.52 प्रतिशत मतों के साथ 146 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था| जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले इण्डिया गठबन्धन को 39.21 प्रतिशत मतों के साथ 234 सीटें प्राप्त हुईं| सर्वेक्षण के आधार पर अन्य दलों को 56 सीटें मिलनी चाहिए थीं| परन्तु वास्तविक परिणाम मात्र 17 सीटों का ही रहा| यहाँ विचार करने योग्य बात यह है कि इण्डिया गठ्बन्धन को 234 सीटें तब प्राप्त हुई हैं जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की आधारभूत इकाइयाँ संगठनात्मक रूप से भाजपा की तरह मजबूत नहीं हैं|

अयोध्या के बहुचर्चित श्रीराम मन्दिर के निर्माण से भाजपा की बांछे खिली हुई थीं और उसे पूर्ण विश्वास था कि आस्था का शैलाव ऐसा उमड़ेगा कि भाजपा अकेले दम पर 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने में सफल होगी| परन्तु परिणाम पूरी तरह उल्टा निकला| पूरे देश में जो हुआ सो हुआ ही अयोध्या से सम्बन्धित फ़ैजाबाद सीट ही भाजपा के हाँथ से निकल गयी| जिसके कारण अयोध्यावासी कट्टर भाजपाइयों द्वारा सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं| श्रीराम के प्रति उनकी आस्था पर ही सवाल खड़े किये जा रहे हैं| संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतन्त्र रूप से मतदान करने का अधिकार दिया है| इसके लिए कोई किसी पर न तो दबाव डाल सकता है और न ही अपनी मर्जी थोप सकता है| अब यदि किसी दल को उसकी अपेक्षा के अनुरूप मत नहीं प्राप्त हुए हैं तो उस दल को मतदाताओं के प्रति दुर्भावना व्यक्त करने की अपेक्षा अपनी कार्यशैली की समीक्षा करनी चाहिए| जनतन्त्र में जनता ही सर्वोपरि है| सरकारों के काम-काज की समीक्षा करते हुए उसके समर्थन या विरोध का निर्णय वह मतदान के माध्यम से ही सुनाती है| जो हुआ भी और आगे भी होगा| किसी एक मुद्दे के बल पर कोई भी दल लम्बे समय तक पूर्ण बहुमत की अपेक्षा नहीं कर सकता और न ही करना चाहिए| आशा है भाजपा के रणनीतिकार इस बात को गम्भीरता पूर्वक समझेंगे और पुनः उन्हें जो सुअवसर मिला है उसका भरपूर सदुपयोग करेंगे| गरीबी, मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानो की दुर्दशा, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली तथा शिक्षा का गिरता स्तर जैसे ज्वलन्त मुद्दे चुनौती बनकर सामने खड़े हैं| इन मुद्दों को बहुत लम्बे समय तक हासिये पर नहीं डाला जा सकता| निश्चित ही नरेन्द्र मोदी अपने नये कार्यकाल में इन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और इनसे निबटने के लिए स्थाई योजना बनाते हुए उसे प्रभावी ढंग से लागू भी करेंगे| उन्हें विशेष रूप से याद रखना होगा कि उनकी सत्ता में वापसी का मार्ग विकल्पहीनता के कारण भी प्रशस्त हुआ है| लोगों ने इण्डिया गठबन्धन को गुस्से में वोट दिया है| कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को उनका आधारभूत संगठनात्मक ढांचा मजबूत न होने के बावजूद इतना वोट मिलना सिर्फ और सिर्फ लोगों के अन्दर भाजपा सरकार के प्रति व्याप्त गुस्से का परिणाम है| वहीँ असन्तुष्टों के एक बड़े वर्ग ने इण्डिया और राजग के बीच तीसरा और मजबूत विकल्प न देखकर राजग को चुना है| इस बार मतदान का प्रतिशत भी कम रहा| इसके मूल में भी कहीं न कहीं लोगों में सरकार के प्रति उत्साह का अभाव रहा| देशवासी कांग्रेस और सपा के शासन की विफलताओं को अभी भूले नहीं हैं| जिनके विकल्प में उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर अपना विश्वास जताया था| परन्तु इन दस वर्षों में मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार कोई करिश्मा नहीं कर सकी| बल्कि विफलता ही उसके हिस्से में आयी| जिसको लेकर आम जन में रोष होना स्वाभाविक था| परन्तु भाजपा और कांग्रेस की जगह किसी तीसरे और मजबूत विकल्प के अभाव में यह रोष जनाक्रोश में परिवर्तित नहीं हो सका| जैसा 2014 में हुआ था| ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आने वाले विपक्षी दलों के नेताओं का बड़ी संख्या में चुनाव पूर्व भाजपा में शामिल होना, उसके बाद उन पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई रूक जाना और पार्टी में तत्काल उन्हें विशेष स्थान मिल जाना भी भाजपा के लिए घातक बना| क्योंकि इससे न केवल भारतीय जनता पार्टी के रूढ़ नेता एवं समर्पित कार्यकर्ता अन्दरखाने नाराज हुए| बल्कि आम जन में भी इसका गलत सन्देश गया| जिसका सीधा असर भाजपा के वोट प्रतिशत पर पड़ा| अतः प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके सहयोगियों को अपने नये कार्यकाल में पुरानी रणनीतियों का परित्याग करते हुए नई कार्यशैली अपनानी चाहिए| जो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं, रूढ़ नेताओं तथा आम जन को सन्तुष्ट करने वाली हो| यद्यपि इस बार सरकार को गठबन्धन के दबाव में निर्णय लेने पड़ सकते हैं| परन्तु नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत छवि दृढ़ निश्चयी व्यक्ति वाली रही है| इसीलिए वह देश ही नहीं विदशों तक के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं| अतएव गठबन्धन के दबाव की परवाह किये बिना उन्हें जनहित के निर्णय लेने में कतई संकोच नहीं करना चाहिए! — डॉ.दीपकुमार शुक्ल (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)

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एस.एन.सेन बालिका महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय विश्व योग-दिवस 2024″ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता राज भवन, उत्तर प्रदेश द्वारा आदेशित “अंतरराष्ट्रीय विश्व योग-दिवस 2024” के अवसर पर योगाभ्यास संवर्धन से संबंधित आयोजन एवं योग शपथ हेतु एस.एन.सेन बालिका महाविद्यालय की एनएसएस, एनसीसी रेंजर्स यूनिट व क्रीड़ा विभाग द्वारा महाविद्यालय के प्रबंध समिति के सचिव श्री पी.के.सेन एवं प्राचार्या प्रो. (डॉ )सुमन की अध्यक्षता में योग प्रशिक्षक भूमि तिवारी द्वारा महाविद्यालय की शिक्षिकाओं, तीनों यूनिट्स, क्रीड़ा विभाग एवं अन्य छात्राओं को योगाभ्यास कराया गया। साथ ही सभी को योगभ्यास के लाभ बताते हुए योगभ्यास के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में प्राचार्या महोदया के साथ शिक्षिकाओं, कर्मचारियों एवं छात्राओं ने *योग शपथ* ली।
कार्यक्रम में तीनों यूनिट्स के प्रभारी, महाविद्यालय की शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।
शासनादेश के परिपालन में समस्त विभागों की शिक्षिकाओं, महाविद्यालय के कर्मचारियों, महाविद्यालय के तीनों यूनिट्स एवं सभी विभागों की छात्राओं ने ऑनलाइन योग शपथ लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त किया।
महाविद्यालय से लगभग पाँच सौ छात्राओं ने योग शपथ का प्रमाणपत्र प्राप्त किया।

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उत्तर प्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक दुर्घटना बीमा कर वाराणसी डाक परिक्षेत्र ने बनाया नया कीर्तिमान

मात्र एक दिन में 2679 लोगों का दुर्घटना बीमा करके वाराणसी परिक्षेत्र ने उत्तर प्रदेश में बनाया रिकॉर्ड

डाक विभाग के उपक्रम रूप में स्थापित इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने पाँच वर्षों के अपने सफर में ‘आपका बैंक, आपके द्वार’ को प्रोत्साहित करते हुए तमाम नए आयाम स्थापित किये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन और डिजिटल इण्डिया के क्षेत्र में आज इसकी अहम् भूमिका है। समाज के अंतिम वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु विभिन्न कंपनियों से एग्रीमेंट के तहत सस्ती दरों पर बीमा का लाभ भी आईपीपीबी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये।

गौरतलब है कि वाराणसी परिक्षेत्र ने 13 जून को मात्र एक दिन में 2679 लोगों का दुर्घटना सुरक्षा बीमा करके उत्तर प्रदेश परिमंडल में एक दिन में सर्वाधिक बीमा करने का नया कीर्तिमान स्थापित किया, जिसके सापेक्ष साढ़े ग्यारह लाख रूपये का प्रीमियम जमा किया गया। यही नहीं, जीआई सर्वसुरक्षा अभियान के तहत पहले ही दिन प्रदत्त लक्ष्य के सापेक्ष 329 फीसदी सफलतापूर्वक प्राप्तकर वाराणसी परिक्षेत्र ने पूरे भारत में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके उपलक्ष्य में इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने आईपीपीबी के चीफ मैनेजर श्री बृज किशोर और प्रवर डाक अधीक्षक श्री राजीव कुमार के संग केक काटकर लोगों से खुशियाँ बाँटी एवं डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवक, पोस्टमास्टर्स, निरीक्षक, सहायक अधीक्षक, मण्डलाधीक्षक और आईपीपीबी मैनेजर्स सहित समस्त स्टाफ को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में नए कीर्तिमान स्थापित करने हेतु हौसलाआफ़जाई की।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आईपीपीबी की परिवर्तनकारी उपस्थिति ने बैंकिंग परिदृश्य को नया आकार दिया है, जो डोर-स्टेप बैंकिंग की पेशकश करता है एवं सुलभ सेवाओं का प्रतीक है जो परिवर्तन को प्रज्ज्वलित करता है। आईपीपीबी के माध्यम से डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक आज एक चलते फिरते बैंक के रूप में कार्य कर रहे हैं। सीईएलसी के तहत घर बैठे बच्चों का आधार बनाने, मोबाइल अपडेट करने, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, डीबीटी, बिल पेमेंट, एईपीएस द्वारा बैंक खाते से भुगतान, वाहनों का बीमा, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी तमाम सेवाएं आईपीपीबी द्वारा डाकिया के माध्यम से घर बैठे मुहैया कराई जा रही हैं। आईपीपीबी में खाता होने पर डाकघर की सुकन्या, आरडी, पीपीएफ, डाक जीवन बीमा में भी ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। आईपीपीबी उन तमाम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनके पास बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच नहीं है।

इस अवसर पर सहायक निदेशक बृजेश शर्मा, लेखाधिकारी प्लाबन नस्कर, सहायक अधीक्षक पल्ल्वी मिश्रा, निरीक्षक अनिकेत रंजन, दिलीप पांडेय, सहायक लेखाधिकारी संतोषी राय, मनीष मिश्रा, श्रीप्रकाश गुप्ता, आनंद प्रधान, राकेश कुमार सहित तमाम कर्मी उपस्थित रहे।

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मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव का जोश पूरे देश में जोरों पर: दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और पुणे में मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव की बेहतरीन फिल्में देखें!

18वां मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव (एमआईएफएफ) का जादू मुंबई के साथ-साथ अन्य शहरों में भी सर चढ़कर बोल रहा है। पहली बार, एमआईएफएफ का यह आयोजन न केवल मुंबई में होगा, बल्कि दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और पुणे जैसे शहरों में भी समानांतर स्क्रीनिंग के साथ दुनिया भर की बेहतरीन गैर-फीचर फिल्में – डॉक्यूमेंट्री, लघु कथा और एनीमेशन फिल्में दिखाई जाएंगी।

मुख्य कार्यक्रम 15 जून को शुरू होगा और 21 जून, 2024 तक मुंबई के पेडर रोड पर राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम-फिल्म प्रभाग परिसर में चलेगा। दिल्ली में फिल्म प्रेमियों के लिए, 16 जून से 20 जून तक सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम 1, 2 और 3 में फिल्मों का एक समानांतर चयन दिखाया जाएगा। कोलकाता में फिल्म प्रेमी प्रतिष्ठित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में स्क्रीनिंग देख सकते हैं। वहीं, चेन्नई एनएफडीसी के टैगोर फिल्म सेंटर में स्क्रीनिंग दिखाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, पुणे में स्क्रीनिंग नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया के परिसर में होगी। आयोजन स्थलों पर पंजीकरण डेस्क स्क्रीनिंग के लिए आगंतुक उपस्थित लोगों के पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेंगे। बैठने की व्यवस्था पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगी। शुरुआती फिल्म बिली एंड मौली: एन ओटर लव स्टोरी 15 जून को दोपहर 2.30 बजे सभी स्थानों पर एक साथ दिखाई जाएगी।

 

कृपया चार शहरों में 18वें एमआईएफएफ के लिए स्क्रीनिंग शेड्यूल यहां देखें:

दिल्ली

कोलकाता

चेन्नई

पुणे

यह अभिनव कदम राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) की उच्च गुणवत्ता वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण को व्यापक भारतीय दर्शकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है। इस महोत्सव का उद्देश्य इन जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों में एमआईएफएफ को लाकर, देश भर के सिनेमा प्रेमियों के बीच डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए गहरी रुचि को बढ़ावा देना है।

डॉक्यूमेंट्री फिल्में हमारे आस-पास की दुनिया के बारे में शक्तिशाली और विचारोत्तेजक अंतर्दृष्टि प्रदान करती हैं। महोत्सव की पहुंच का विस्तार करके, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम सार्थक बातचीत को बढ़ावा देने और भारत के सभी कोनों में इस महत्वपूर्ण कला के लिए जुनून जगाने की उम्मीद करता है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव लंबे समय से भारत में डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण का चैंपियन रहा है। यह विस्तार न केवल फिल्म उत्सव के मंच को मजबूत करता है, बल्कि दिल्ली, कोलकाता, पुणे और चेन्नई के दर्शकों को बड़े पर्दे पर वृत्तचित्रों के विविध चयन का अनुभव करने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान करता है।

विश्व सिनेमा की सिनेमाई उत्कृष्टता का उत्सव, मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव, दक्षिण एशिया में सबसे बड़े और सबसे पुराने गैर-फीचर फिल्म समारोहों में से एक के रूप में पहचाना जाता है। 1990 से हर दो साल में आयोजित होने वाले मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म, लघु फिल्म और एनीमेशन श्रेणियों में असाधारण कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए लगातार एक मंच प्रदान किया है।

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भारत और जापान का संयुक्त समुद्री अभ्यास – 2024 (जिमेक्स – 24) जापान के योकोसुका में प्रारंभ हुआ

भारतीय नौसेना का स्वदेशी त्वरित, चपल एवं रडार से बच निकलने में सक्षम युद्धपोत आईएनएस शिवालिक द्विपक्षीय भारत-जापान संयुक्त समुद्री अभ्यास 2024 (जिमेक्स 24) में भाग लेने के लिए जापान के योकोसुका पहुंचा। साल 2012 में इस संयुक्त समुद्री अभ्यास की शुरुआत के बाद से यह जिमेक्स का आठवां संस्करण है।

वाइस एडमिरल आईटीओ हिरोशी, कमांडर जेएमएसडीएफ योकोसुका डिस्ट्रिक्ट और जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज द्वारा इस जहाज का बड़ी ही गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया।

संयुक्त अभ्यास में बंदरगाह और समुद्री दोनों तरह के चरण शामिल किये गए हैं। बंदरगाह चरण में नौसैन्य गतिविधियों से सबंधित, खेल व सामाजिक जुड़ाव के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसके बाद दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्र में संयुक्त रूप से अपने युद्ध कौशल को निखारने के प्रयास करेंगी और सतह, उप-सतह एवं वायु क्षेत्रों में जटिल बहु-आयामी संचालन कुशलता के माध्यम से अपनी सहभागिता के साथ क्षमताओं को बढ़ाएंगी।

भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व आईएनएस शिवालिक और जापान की नौसेना का प्रतिनिधित्व गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जेएस युगिरी द्वारा किया जा रहा है। दोनों नौसेनाओं के एकीकृत हेलीकॉप्टर भी संयुक्त अभ्यास में शामिल हो रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में अपने बढ़ते दायरे व मैत्रीपूर्ण अभ्यास गतिविधियों में बढ़ोतरी के साथ जिमेक्स 24 दोनों देशों को एक-दूसरे की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से सीखने का अवसर प्रदान करता है और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए भारतीय नौसेना व जापान की नौसेना के मध्य परिचालन संबंधी कार्रवाई को सुविधाजनक बनाता है।

 

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एलएसएएम13 (यार्ड 81) 08 x मिसाइल लेस एम्युनिशन (एमसीए) बार्ज नौका परियोजना के पांचवें बार्ज का जलावतरण

08 x मिसाइल लेस एम्युनिशन परियोजना का पांचवा पोत भारतीय नौसेना के लिए विशाखापत्तनम के एमएसएमई शिपयार्ड, मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एसईपीपीएल) द्वारा तैयार किया गया है। इस मिसाइल सह गोला बारूद पोत एलएसएएम 13 (यार्ड 81)’ को 10 जून, 2024 को मेसर्स विनायगा मरीन पेट्रो लिमिटेड, मीरा भयंदर, महाराष्ट्र (मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का जलावतरण स्थल) में स्थित डॉकयार्ड से जलावतरित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता एनडी (एमबीआई) के महाप्रबंधक (क्यूए) कमोडोर मनीष विग ने की थी।

08 x मिसाइल लेस एम्युनिशन बार्ज नौकाओं के निर्माण के लिए अनुबंध पर 19 फरवरी, 2021 को भारतीय रक्षा मंत्रालय और विशाखापत्तनम के एमएसएमई शिपयार्ड, मेसर्स सेकॉन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। भार उठाने में सक्षम इन पोतों के नौसेना में शामिल होने से छोटे बांधों एवं बंदरगाहों पर अन्य जहाजों के लिए सामान/गोला-बारूद का परिवहन, रसद की लदान और पोतारोहण तथा अवरोहण की सुविधा के द्वारा भारतीय नौसेना की सैन्य गतिविधियों के संचालन को गति मिलेगी।

इन नौकाओं को भारतीय नौसेना के प्रासंगिक नियमों एवं भारतीय नौवहन रजिस्टर (आईआरएस) के विनियमन के तहत स्वदेशी रूप से तैयार और निर्मित किया गया है। डिजाइन चरण के दौरान बार्ज नौका का मॉडल परीक्षण विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) में किया गया था। ये विशेष छोटे जहाज भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के गौरवशाली ध्वजवाहक हैं।

 

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मीडिया पुरस्कार-2024 के तीसरे संस्करण की घोषणा की

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्मान-2024 के तीसरे संस्करण की घोषणा की है। भारत और विदेशों में योग के संदेश को फैलाने में मीडिया की सकारात्मक भूमिका और जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए मंत्रालय ने जून 2019 में पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्मान (एवाईडीएमएस) शुरू किया था।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मीडिया सम्मान-2024 के तहत, बाईस भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में तीन श्रेणियों अर्थात प्रिंट, टेलीविजन और रेडियो के तहत तैंतीस सम्मान प्रदान किए जाएंगे:

  1. 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में 11 सम्मान – “अखबारों में योग पर सर्वश्रेष्ठ मीडिया कवरेज” श्रेणी के तहत प्रदान किए जाएंगे
  2. 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में 11 सम्मान – “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी) में योग पर सर्वश्रेष्ठ मीडिया कवरेज” श्रेणी के अंतर्गत प्रदान किए जाएंगे
  3. 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में 11 सम्मान – “इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (रेडियो) में योग पर सर्वश्रेष्ठ मीडिया कवरेज” श्रेणी के अंतर्गत प्रदान किए जाएंगे

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

हर साल 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, दुनिया भर में स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक जन आंदोलन का अलग जगाया है। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण के लिए इसके समग्र दृष्टिकोण ने महत्वपूर्ण रुचि पैदा की है, जिससे यह एक वैश्विक आयोजन बन गया है। भारत और विदेश दोनों में योग के संदेश को बढ़ाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, इस प्राचीन परंपरा और इसके कई लाभों को बढ़ावा देने में मीडिया की अपार शक्ति और जिम्मेदारी को मान्यता प्रदान करना महत्वपूर्ण है।

 

एवाईडीएमएस अनुशंसा और दिशानिर्देश

इस सम्मान में एक विशेष पदक/पट्टिका/ट्रॉफी और एक प्रशस्ति पत्र शामिल है। इसे एक स्वतंत्र जूरी द्वारा अनुशंसित किया जाता है। यह पुरस्कार प्रिंट मीडिया, रेडियो और टेलीविजन से जुड़े सभी मीडिया घरानों/कंपनियों के लिए खुले हैं, जिनके पास सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से पंजीकरण/अनुमति है।

दिशानिर्देशों के अनुसार, मीडिया हाउस 12 जून, 2024 से 25 जून, 2024 की अवधि के दौरान बनाए गए और प्रकाशित लेखों या प्रसारित/ऑडियो/विजुअल सामग्री की संबंधित क्लिपिंग के साथ एक निर्धारित प्रारूप में नामांकन का विवरण प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रविष्टियों की अंतिम तिथि 8 जुलाई, 2024 है। विस्तृत दिशानिर्देश पत्र सूचना कार्यालय (https://pib.gov.in/indexd.aspx) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (https://mib.gov.in/sites/default/files/AYDMS%20Guidelines%202024_0.pdf) की वेबसाइटों पर देखे जा सकते हैं।

 

एवाईडीएमएस दूसरा आयोजन – 2023

पहली बार 7 जनवरी, 2020 को पुरस्कार प्रदान प्रदान किए गए थे। एवाईडीएमएस का दूसरा आयोजन – 2023 के लिए सम्मान अभी तक प्रदान नहीं किए गए हैं। पिछले वर्ष के एवाईडीएमएस (द्वितीय आयोजन) के विजेताओं को भी इस वर्ष के एवाईडीएमएस (तृतीय आयोजन) के विजेताओं के साथ-साथ सम्मान प्रदान किया जाएगा।

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राजनीतिक महाभारत…. जीत किसकी?

देश में चल रहे 2024 लोकसभा चुनाव का सियासी घमासान खत्म हो गया है और अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री के शपथ समारोह पर है। सियासी युद्ध के परिणाम लोगों की सोच से परे रहा हालांकि साम दाम दंड भेद वाली नीति भाजपा की हमेशा से रही है मगर इस बार भाजपा की पकड़ कमजोर साबित हुई। इस चुनाव के नतीजों ने जहां बीजेपी की हार ने लोगों को चौकाया वहीं कांग्रेस का मजबूती से खड़ा होना और सत्तारूढ़ दल को टक्कर देना लोगों को आश्चर्य में डाल गया।

ये दीगर बात है कि कांग्रेस बहुमत नहीं ला पाई लेकिन एक मजबूत विपक्ष के रूप में खड़ी हुई है हालांकि सत्ता तक पहुंच बनाने के लिए उसे अभी कड़ी मेहनत की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने जिन प्रदेशों पर आंख मूंद कर भरोसा किया था इस बार वहीं से इन्हें मुंह की खानी पड़ी। अयोध्या जैसे शहर से हार जाना जरा अविश्वसनीय लगता है। जो शहर राम मंदिर के प्रचार और जय श्री राम के नारों से गूंजता था वहां भाजपा की हार अप्रत्याशित है हालांकि कई कारण बताए जा रहे हैं।
फैजाबाद लोकसभा सीट के नतीजे से हर कोई हैरान है जहां सरकार द्वारा राम मंदिर का निर्माण कराया गया था और मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी ऐसे समय  की गई जब इसी साल देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे। यह दीगर बात है कि यह कार्य भी चुनावी रणनीति के तहत ही किया गया था मगर इन सब के बावजूद भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। ध्यान दें कि यहां साल 2022 की विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की जमीन दरक चुकी थी और 2024 के लोकसभा चुनाव आते-आते पूरी तरह खिसक गई। 2022 के चुनाव में भाजपा ने जिले में पांच विधानसभा सीटों में से 2 सीटें गंवा दी थी फिर भी भाजपा सजग नहीं हुई और 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने है।
हिंदुत्व के रथ पर सवार भाजपा ने स्थानीय मुद्दों और मसलों को दरकिनार किया। 2020 में जब विकास कार्य शुरू हुआ तो सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान बड़ी संख्या में मकान और दुकान टूटे। बड़ी संख्या में लोगों के घर उजड़े लोगों के रोजगार छिनें। व्यापारी वर्ग का आरोप है कि उन्हें मकान और दुकानों के अधिग्रहण का उचित मुआवजा नहीं मिला। जो लोग अपनी जमीन से संबंधित कागज पेश नहीं कर सके बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को मुआवजा नहीं मिला। अयोध्या के हाई प्रोफाइल बनने की वजह से यहां आम लोगों की सुनवाई ना तो भाजपा के नेताओं ने की और ना ही यहां के अधिकारियों ने की यही वजह है कि भाजपा से लोगों का मोह भंग होने लगा।
अयोध्या में करीब 84% हिंदू और 13% मुसलमान है। इसके बावजूद यहां पर भाजपा का हिंदुत्व का कार्ड फेल हो गया। स्थानीय हिंदू मुसलमानों ने खुलकर कहा कि बाबरी की घटना के बाद यहां पर लगातार भाईचारे को बिगड़ने का काम किया गया है एक समय था कि जब मुसलमानों के बनाये खड़ाऊं वहां के साधू संतों के पैर में सजते थे।
अयोध्या के आसपास के इलाकों में ज्यादातर किसान है और जो खेती किसानी से अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे में आवारा पशुओं की समस्या को भाजपा ने नजरअंदाज किया। खेतीबाड़ी से हुए नुकसान के चलते किसानों ने अपने खेत कई सालों तक खाली छोड़ रखे थे। किसानी से लागत नहीं निकलती थी और आवारा पशुओं द्वारा नुकसान अलग होता था। समाजवादी पार्टी ने इन मुद्दों पर  मोर्चा संभाला और जन समर्थन हासिल किया।
दूसरी बात महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता ना तो कांग्रेस को वोट देना चाह रही थी और ना ही भाजपा को देना चाह रही थी ऐसे में लोगों ने नोटा को अपनाया और बड़ी संख्या में ऐसे लोग वोट देने नहीं गए। यह चुनाव इस बात का प्रमाण है कि धर्म से देश नहीं चलता बल्कि बुनियादी मुद्दे ज्यादा जरूरी होते है।

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भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से 154 रेगुलर कोर्स और 137 टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स के 394 अधिकारी कैडेट पास हुए

08 जून, 2024 को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून, उत्तराखंड के पोर्टल से 154 रेगुलर कोर्स और 137 टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स के कुल 394 अधिकारी कैडेट पास आउट हुए, जिनमें 10 मित्र देशों के 39 कैडेट शामिल थे। अधिकारी कैडेटों ने उत्साह दिखाते हुए ‘सारे जहां से अच्छा’ और ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की सैन्य धुनों पर पूर्णता व गर्व के साथ मार्चिंग का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार ने पासिंग आउट परेड का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारी कैडेटों को उनके प्रशिक्षण के सफल समापन पर बधाई दी। उन्होंने उत्कृष्ट परेड के साथ-साथ स्पष्ट व समन्वित ड्रिल मूवमेंट के लिए उन्हें और प्रशिक्षकों को बधाई दी, जो युवा अधिकारी कैडेटों द्वारा अपनाए गए प्रशिक्षण और अनुशासन के उच्च मानकों को दर्शाता है।

रिव्यूविंग ऑफिसर ने कहा, “परेड आपके प्रशिक्षण की परिणति और पेशेवर करियर की शुरुआत है। यह एक ऐसा क्षण है जो आपके जीवनकाल में एक बार आता है और भविष्य के सभी प्रयासों के लिए प्रेरणा बनेगा। आप जो प्रतिज्ञा लेते हैं और अपने राष्ट्र के लिए जो प्रतिज्ञा करते हैं, वह पवित्र है और अब से आपकी सभी प्रतिबद्धताओं से पहले होगी। यह तथ्य कि आप आज गर्व से और मजबूती के साथ खड़े हैं, एक अधिकारी बनने के लिए आपने जो कड़ी मेहनत और श्रम किया है, उसका प्रमाण है। आईएमए एक विशिष्ट संस्थान है जिसने आपकी क्षमता का दोहन किया है और आपको एक अधिकारी के लिए सभी ज्ञान और विशेषताओं से लैस किया है।”

रिव्यूविंग ऑफिसर ने दोहराया कि भारतीय सेना को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सैनिकों पर गर्व है, जिनके पास युद्ध और वर्षों के परिचालन अनुभव से प्राप्त ज्ञान है। उन्होंने अधिकारी कैडेटों से हमेशा सम्मान के साथ नेतृत्व करने, विशिष्टता के साथ सेवा करने और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ आसपास के लोगों को प्रेरित करने का आग्रह किया।

युद्ध की तेजी से बदलती प्रकृति पर रिव्यूविंग ऑफिसर ने कहा कि तकनीकी परिवर्तन आधुनिक युद्धों के स्वरूप को लगातार प्रभावित कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध में अंतरिक्ष, साइबर और कॉग्निटिव डोमेन आज की हकीकत है। सूचना युद्ध, ड्रोन, स्वायत्त प्रणाली, इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का दोहन और मानव-मशीन टीमिंग न्यू नॉर्मल हैं। उन्होंने कहा कि इन डोमेन को परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों के उपयोग के साथ हर गुजरते दिन के साथ परिष्कृत किया जा रहा है, जिससे युद्धों की जटिलताएं बढ़ रही हैं। इसे विचारों, बुद्धि और नवाचार के युद्ध के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने अधिकारी कैडेटों से इन चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार और सबसे आगे रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “कहावत याद रखें कि मशीन के पीछे का व्यक्ति सबसे ज्यादा मायने रखता है। शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्फूर्ति, आलोचनात्मक सोच, तकनीकी कौशल और अस्थिर परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया आपकी सफलता की कुंजी होगी।”

इस अवसर पर रिव्यूविंग ऑफिसर ने निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए:

• ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम स्थान पर रहने वाले अधिकारी कैडेट के लिए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक का प्रतिष्ठित पुरस्कार अकादमी के अंडर ऑफिसर प्रवीण सिंह को प्रदान किया गया। रजत पदक अकादमी के कैडेट एडजुटेंट मोहित कापरी को प्रदान किया गया, जबकि कांस्य पदक बटालियन के अंडर ऑफिसर शौर्य भट्ट को दिया गया।

• टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स से ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम स्थान पर रहने वाले अधिकारी कैडेट के लिए रजत पदक अधिकारी कैडेट विनय भंडारी को प्रदान किया गया।

• विदेशी देश से ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम स्थान पर रहने वाले अधिकारी कैडेट के लिए बांग्लादेश पदक विदेशी अधिकारी कैडेट मोहम्मद नूर कुतुबुल आलम, बांग्लादेश को प्रदान किया गया।

• स्प्रिंग टर्म 2024 के लिए 12 कंपनियों में से कुल मिलाकर प्रथम स्थान पर रहने के लिए कोहिमा कंपनी को चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ बैनर प्रदान किया गया।

परेड का निरीक्षण करने के बाद, लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार ने प्रतिष्ठित प्रशिक्षण अकादमी के बहादुर पूर्व छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए युद्ध स्मारक, आईएमए पर पुष्पांजलि अर्पित की, ‘पिपिंग समारोह’, जिसमें अधिकारी कैडेट कमीशन प्राप्त अधिकारियों के रैंक धारण करते हैं, उनके माता-पिता और प्रियजनों द्वारा किया गया।

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