
हाल ही में ईएसआईसी ने बीमित महिलाओं को ऑनलाइन मातृत्व लाभ का दावा करने की सुविधा शुरू कर ईएसआई योजना के तहत बीमित महिलाओं के लिए विशेष पहल की है। इसका मकसद प्रौद्योगिकी की मदद से लाभ उठाने के प्रयासों को आसान बनाकर उन्हें सशक्त करना है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीक आधारित सुविधाओं ने महिला लाभार्थियों को अपने घरों से ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में काफी मदद की है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सप्ताह भर चली गतिविधियों की श्रृंखला का आज समापन हो गया। इस अवसर पर कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) मुख्यालय, नई दिल्ली में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार की अध्यक्षता ईएसआईसी के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार ने की। कार्यक्रम में वित्त आयुक्त, ईएसआईसी, टी. एल. यादेन; सीवीओ, ईएसआईसी, श्री मनोज कुमार सिंह; उप महानिदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) श्रीमती अनुजा बापट; और वरिष्ठ विशेषज्ञ एवं निदेशक, नीति आयोग, डॉ. साक्षी खुराना उपस्थित थे। इस साल की थीम ‘डिजिटऑल: इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फॉर जेंडर इक्वैलिटी’ का जिक्र करते हुए डॉ. राजेंद्र कुमार ने आईटी आधारित प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया, जिससे वे इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनेंगी। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से महिलाएं अपने घरों से ही स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे समाज की महिलाओं को उच्च महत्व का एहसास कराने और उन्हें प्रदान करने का भी समय है। उन्होंने कहा कि कार्य क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में रैंकिंग कम होने के बावजूद समावेशी एवं एकीकृत प्रौद्योगिकी के जरिए लैंगिक समानता के दृष्टिकोण को जल्दी हासिल किया जा सकता है।
ईएसआईसी की वित्त आयुक्त सुश्री टी. एल. यादेन ने बीमित महिलाओं के मातृत्व लाभ के ऑनलाइन दावे की सुविधा के लिए ईएसआईसी के प्रयासों की प्रशंसा की। इससे तकनीक की मदद से महिला लाभार्थियों को लाभ पाना आसान बनाकर सशक्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी के महत्व को दोहराया, जो भेदभाव कम कर और समाज के सभी सदस्यों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को सशक्त बनाने का माहौल तैयार करने में सक्षम है। ईएसआईसी के सीवीओ श्री मनोज कुमार सिंह ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी और योगदान की चर्चा की।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की उप महानिदेशक श्रीमती अनुजा बापट ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को समाज कल्याण योजनाओं की मुख्यधारा में लाने का भी आग्रह किया।

वरिष्ठ विशेषज्ञ और निदेशक, नीति आयोग, डॉ. साक्षी खुराना ने उन महिलाओं के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए, जो समाज के हाशिये पर हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ईएसआईसी और ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं उनके जीवन की मुश्किलों को कम करने में मदद कर रही हैं।
चिकित्सा आयुक्त, ईएसआईसी, डॉ. दीपिका गोविल ने स्वास्थ्य शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी के बारे में बताया। उन्होंने समाज में समानता हासिल करने के लिए समता की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया। बीमा आयुक्त (पी एंड ए) श्री दीपक जोशी ने दुनियाभर की महिलाओं की उपलब्धियों और उन्हें सशक्त बनाने के तरीकों के बारे में बात की।

कार्यक्रम के दौरान हफ्तेभर की गतिविधियों के दौरान आयोजित निबंध प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को गणमान्य व्यक्तियों ने नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में ईएसआईसी मुख्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
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1 मार्च, 2023 कानपुर नगर। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के बैंकों की जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान पी.एम.ई.जी.पी. योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, पी०एम० स्वनिधि योजना, के.सी.सी.(फसली ऋण) योजना के साथ-साथ विगत बैठक में दिए गए निर्देशों की समीक्षा की गई।
मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार देश में ‘उच्च प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण’ को आगे बढ़ाकर सर्कुलर-जैव-अर्थव्यवस्था को सक्षम करने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) हरित, स्वच्छ और समृद्ध भारत के लिए बायोई3 (यानी अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) के विभाग के एक प्रमुख लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को एक साथ लाने की परिकल्पना करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आगामी ‘अमृतकाल’ में “हरित विकास” की कल्पना करता है और इसके लिए हमारे राष्ट्र के चल रहे आर्थिक विकास को और बढ़ावा देने के लिए मजबूत अभिनव जैव-आधारित पर्यावरण-अनुकूल समाधानों के कार्यान्वयन के लिए एक व्यवस्थित रूपरेखा योजना की आवश्यकता है। मंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त, 20 अक्टूबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुभारंभ किया गया “मिशन लाइफ” यानी ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट (लाइफ)’ हमें जलवायु और ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिए जीवन के हर पहलू में हरित और अनुकूल पर्यावरणीय समाधानों को आगे बढ़ाने का आग्रह करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम घरेलू विनिर्माण (उद्योग 4.0) का समर्थन करके ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करेगा, क्योंकि यह देश भर में जैव-विनिर्माण के लिए हरित बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायता करेगा। इसके अलावा, यह जैव-विनिर्माण के क्षेत्र में एक कुशल कार्यबल के विकास, विशेष रूप से दो और तीन-स्तरीय शहरों में रोजगार सृजन और उद्यमिता में वृद्धि और बाजार के अवसरों का विस्तार करने के लिए बायोजेनिक उत्पादों के लिए नीतियों और विनियमों को कारगर बनाने का भी काम करेगा। मंत्री ने बताया कि यह नवीकरणीय संसाधनों से उच्च गुणवत्ता, पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं का निर्माण करके रासायनिक व्यवसायों को राजस्व सृजन के नए अवसर प्रदान करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-विनिर्माण नवोन्मेष, ऊर्जा कुशल और कम प्रदूषण के कारण एक बड़ी क्षमता प्रदान करता है, क्योंकि यह व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए रोगाणुओं, पौधों की कोशिकाओं और एंजाइमों सहित जैविक प्रणालियों को नियोजित करता है। उन्होंने बताया कि इस पहल की मुख्य चीज में जैव प्रौद्योगिकी के उन्नत उपकरण शामिल हैं जिनमें सिंथेटिक बायोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, माइक्रोबियल बायो-रिसोर्सेज, मेटाबोलिक इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
डीबीटी के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का चौथा सबसे बड़ा आयातक है, जिसका एक बड़ा हिस्सा रासायनिक औद्योगिक निर्माण में उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवाश्म ईंधन के प्रमुख घटक हाइड्रोकार्बन को जलाने से सीओ2 एक प्रमुख उप-उत्पाद के रूप में निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग में महत्वपूर्ण योगदान देती है। डॉ. गोखले ने कहा कि 2027 तक भारत को ‘नेट जीरो’ कार्बन इकोनॉमी’ बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के संदर्भ में, हम बायो-मैन्युफैक्चरिंग के एक एकीकृत और समावेशी दृष्टिकोण को अपनाकर बायो-बेस्ड सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी की ओर एक आदर्श बदलाव की उम्मीद करते हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अलका शर्मा ने रेखांकित किया कि इस दृष्टिकोण के माध्यम से उद्योग 4.0 के लिए विनिर्माण का एक अभिनव ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल प्रस्तावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इस पहल के केंद्र में बायोटेक्नोलॉजी के उन्नत उपकरण शामिल हैं जिनमें सिंथेटिक बायोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, मेटाबोलिक इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
कानपुर 24 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, फिजियो कनेक्ट 3 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में सम्मानित हुए डॉ सुधीर कुमार द्विवेदी

कम आबादी वाले उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, निजी अस्पतालों/औषधालयों/नर्सिंग होम आदि की भारी कमी और पूर्वोत्तर राज्यों में कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, कर्मचारी राज्य बीमा-ईएसआई निगम ने पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम को ईएसआई योजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना जारी रखने का फैसला किया। उत्तर पूर्वी राज्यों (असम को छोड़कर) के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 से लागू होने वाले अधिकतम सीमा तक का पूरा खर्च कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा वहन किया जाएगा, इसके अलावा, अतिरिक्त वित्तीय सहायता जिसके अंतर्गत राज्य सरकार को 40 लाख रुपये प्रति डिस्पेंसरी (10 लाख रुपये तिमाही) उपलब्ध करायी जाती है, उसे भी शुरू किया जायेगा। यह मानक चिकित्सा देखभाल के अंतर्गत नियमित फंड आवंटन के अलावा एक अतिरिक्त लाभ होगा। यह नए औषधालयों के लिए भी उपलब्ध रहेगा, यदि वे मौजूदा निर्देशों के अनुसार खोले जाते हैं।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समावेशी समाज के निर्माण के प्रधानमंत्री मोदी के विजन को ध्यान में रखते हुए इस पार्क को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सहानुभूति दर्शाने के बजाय यह पार्क संवेदना दिखाएगा, इसलिए इस पार्क का नाम अनुभूति दिव्यांग पार्क रखा गया है।
गडकरी ने कहा कि इस पार्क के माध्यम से न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में समावेश का संदेश पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इस पार्क में सभी 21 प्रकार की दिव्यांगता के लिए अनुकूलित सुविधाएं होंगी, इसमें स्पर्श और गंध उद्यान, हाइड्रोथेरेपी इकाई, जल चिकित्सा, मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों के लिए स्वतंत्र कक्ष, मां जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ‘दिव्यांग पार्क-अनुभूति इंक्लूसिव पार्क’ से केवल देशभर में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इन्क्लूजन का अर्थात समावेशी समाज संकल्पना का संदेश पहुँचेगा।
गडकरी ने कहा कि नागपुर शहर देश के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है। वर्ष 2016 में, केंद्र सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के लिए दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम को पारित किया था। उन्होंने कहा कि यह कानून दिव्यांगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देने के लिए है। इसी के तहत केंद्र सरकार ने पहल करते हुए दक्षिण भारत और मध्य प्रदेश में कुछ दिव्यांग पार्क बनाए हैं, इसी कड़ी में नागपुर के पारदी परिसर में दिव्यांग बच्चों और आम नागरिकों के लिए यह ‘अनुभूति समावेशी पार्क’ बनाया जा रहा है. उन्होंने ने कहा कि यह दुनिया का पहला समावेशी दिव्यांग पार्क है। 90 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में बन रहे इस पार्क के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लगभग 12 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यहां दिव्यांगों के साथ-साथ आम जनता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विभिन्न परियोजनाओं की परिकल्पना की गई है।