नाराज़ बच्ची को पाकर खिल ऊठा मां का चेहरा, बगाही चौकी इंचार्ज ने रिकॉर्ड टाईम में खोई बच्ची को ढूंढ निकाला, परिवार जनों ने चौंकी इंचार्ज की करी प्रशंशा।
बगाही भट्ठा निवासनी ने अपनी 8 वर्षीय पुत्री की खो जाने की पुलिस को दी थी सूचना, मां की डांट से नाराज पुत्री घर छोड़ कर कहीं दूर जाने का कर रही थी प्रयास।
बाबूपुरवा थाने की बगाही चौंकी इंचार्ज दिनेश पांडे ने सूझ बूझ से महज़ आधे घंटे में घर वालो से नाराज़ 8 वर्षीय पुत्री की खोज निकाला।
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रामनवमी आयोजन के लिये हुई पीस कमेटी की बैठक
आगामी राम नवमी की शोभा यात्रा आयोजन के संबंध में मंगलवार दिनांक 21.03.2023 को रावतपुर के एवेल पैलेस में पीस कमेटी की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से पुलिस आयुक्त बी.पी जोगदण्ड , जिलाधिकारी विशाख जी, ज्वाइंट कमिश्नर आनन्द प्रकाश तिवारी, नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस उपायुक्त यातायात रवीना त्यागी, अपर नगर आयुक्त सूर्य कान्त त्रिपाठी , केस्को , जल निगम आदि विभाग उपस्थित रहे।_
*_बैठक में निम्न निर्देश दिए दिए।_*
• _शोभायात्रा निर्धारित रूट पर ही निकले।_
• _शोभायात्रा के रूट में लटके बिजली के तारों को कसा जाए।_
• _नगर निगम समस्त शोभायात्रा रूट में मरम्मत करते हुए सड़को का पैच वर्क कराया जाए।_
• _पर्याप्त पुलिस बल लगाया जाएगा।_
_•रामनवमी शोभायात्रा रूट में सीसीटीवी कैमरे से चप्पे चप्पे पर कड़ी नजर रखी जाएगी।_
_•शोभायात्रा के साथ आगे आगे केस्को का एक गैंग साथ चलेगा।_
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भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर 17 मार्च, भारतीय स्वरूप संवाददाता, जी-20 के विशेष संदर्भ में “सतत विकास में महिलाओं की अग्रणी भूमिका” विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें मुख्य वक्ता पूर्व भारतीय वायु सेना अधिकारी, पर्वतारोही (एवरेस्ट पर्वतारोही), अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक वक्ता (TEDx), लेखिका, शिक्षाविद, उत्तर प्रदेश की G–20 ब्रांड एंबेसडर, स्क्वाड्रन लीडर सुश्री तुलिका रानी रही। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि महिलाएं परिवार बनाती है, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। अतः महिलाओं की अनदेखी करके हम किसी विकसित राष्ट्र का सपना नहीं संजो सकते। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. अर्चना वर्मा ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत के लिए जी-20 अध्यक्षता अमृत काल की शुरुआत है जो हमें “वसुधैव कुटुंबकम” के आधार पर समावेशी विकास की ओर उन्मुख करता है। संचालन डॉ मनीष पांडे ने किया। संयोजिका डॉक्टर संगीता सिरोही ने बताया कि गोष्ठी में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता व समावेशी विकास आदि मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से चीफ प्रॉक्टर प्रो अर्चना श्रीवास्तव, महाविद्यालय जी–20 समिति के सभी सदस्य, समस्त विभागाध्यक्ष व प्राध्यापिकाएं, छात्राएं व शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
कानपुर 17 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता, राजनीति विज्ञान विभाग, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (मुख्यालय नई दिल्ली) कानपुर शाखा ने संयुक्त रूप से 17 और 18 मार्च 2023 को “जी20: समावेशी और टिकाऊ की विकासकी पहल” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस कार्यक्रम में कई टीबी रोगियों को पोषण टोकरियां भी वितरित कीं।
तोड दे तू चाहे ..मुझे हर तरह से … पर मेरा दिल तोड़ने से पहले ज़रा सोच लेना …इसमें मैं नही तू रहता है
ईएसआईसी की वित्त आयुक्त सुश्री टी. एल. यादेन ने बीमित महिलाओं के मातृत्व लाभ के ऑनलाइन दावे की सुविधा के लिए ईएसआईसी के प्रयासों की प्रशंसा की। इससे तकनीक की मदद से महिला लाभार्थियों को लाभ पाना आसान बनाकर सशक्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी के महत्व को दोहराया, जो भेदभाव कम कर और समाज के सभी सदस्यों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को सशक्त बनाने का माहौल तैयार करने में सक्षम है। ईएसआईसी के सीवीओ श्री मनोज कुमार सिंह ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी और योगदान की चर्चा की।

पता नहीं यह मंदिर मुझे क्यों अच्छा लगता था मुझे और यह भी नहीं जानती थी कि यहां बैठकर मुझे शांति क्यों मिलती है? यहीं पर गीत गुनगुनाते हुए भगवान के लिए फूलों की माला बनाना मुझे अच्छा लगता है। मां बाबूजी सुबह – सुबह आकर मंदिर की साफ सफाई में लग जाते हैं। आंगन साफ करना, पौधों में पानी डालना, फूलों का कचरा समेटना उनका यही काम था। मैं भी मां के साथ-साथ मंदिर चली आती थी। पहले पहल तो यूं ही साथ में आ जाती थी लेकिन अब यह बोलकर साथ आती हूं कि तुम्हारे काम में हाथ बंटा दूंगी तो काम जल्दी निपट जाएगा। यहीं पर काम करते-करते मैं छोटी से बड़ी हो गई थी। सभी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई थी। मंदिर में पुजारी मेरे हाथ की बनी माला सामने से मुझसे मांग कर चढ़ाते थे क्योंकि मैं माला बहुत सुंदर बनाती थी। मैं माला की टोकरी मंदिर के सीढ़ियों के पास रख देती थी। पंडित जी पानी के छींटे मारकर टोकरी अंदर ले लेते थे और भगवान को चढ़ा देते थे। यह मंदिर मुझे अब अपना घर जैसा ही लगने लगा था। एक दिन ना आऊं तो कुछ अधूरा सा लगता था।