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रेलवे समपार संख्या-44, पर रेलवे ट्रैक की मरम्मत एवं सुरक्षा संबंधी कार्य हेतु 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक आवागमन बन्द रहेगा

रेलवे ट्रैक की मरम्मत के चलते अश्बारमऊ-मैधरी मार्ग पर आवागमन प्रभावित, समपार संख्या-43 से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध।

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (पी.वे.), घाटमपुर ने अवगत कराया कि अश्बारमऊ से मैधरी जाने वाले मार्ग पर हमीरपुर रोड-यमुना साउथ बैंक सेक्शन के मध्य स्थित रेलवे समपार संख्या-44, किमी 1373/04-05 पर रेलवे ट्रैक की मरम्मत एवं सुरक्षा संबंधी कार्य कराया जाना है। यह कार्य रेलवे यातायात की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि उक्त कार्य के चलते रेलवे समपार संख्या-44 को 25 सितंबर 2026 की शाम 6 बजे से एक अक्टूबर 2026 की शाम 6 बजे तक अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। इस अवधि में समपार फाटक से वाहनों एवं अन्य आवागमन पर रोक रहेगी।

अश्बारमऊ से मैधरी जाने वाले वाहन चालकों एवं आमजन के लिए समपार संख्या-43 से वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध रहेगा। संबंधित विभाग द्वारा लोगों से अपील की गई है कि निर्धारित अवधि में आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें और रेलवे कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें

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कोटपा अधिनियम के उल्लंघन पर 20 व्यक्तियों/दुकानदारों का चालान

चार हजार रुपये जुर्माना वसूला, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई*

दैनिक भारतीय स्वरूप (जिला सूचना कार्यालय) कानपुर नगर, 16 सितम्बर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कानपुर नगर के निर्देशानुसार बुधवार को आर्य नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कोटपा अधिनियम, 2003 के अंतर्गत सघन प्रवर्तन अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, नाबालिगों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री सहित तंबाकू उत्पादों पर वैधानिक चेतावनी के संबंध में नियमों के अनुपालन की जांच की गई।

प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान कुल 20 व्यक्तियों/दुकानदारों का चालान करते हुए उनसे 4,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। जांच के दौरान तीन दुकानदारों के प्रतिष्ठानों पर बिना वैधानिक चेतावनी वाले तथा फ्लेवर्ड सिगरेट जैसे प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। संयुक्त टीम द्वारा सभी दुकानदारों को कोटपा अधिनियम की धारा-4, 5, 6 एवं 7 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चेतावनी दी गई कि भविष्य में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया कि जनपद में तंबाकू नियंत्रण को लेकर प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

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अनुरक्षण एवं संचालन शुल्क न चुकाने वाली टेनरियों पर होगी कार्रवाई

20 एमएलडी सीईटीपी परियोजना के कार्य समय से पूरे करने के निर्देश, पाइपलाइन-मैनहोल पर दो दिन में मांगी संयुक्त रिपोर्ट*

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर। जाजमऊ के वाजिदपुर स्थित 20 एमएलडी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के शेष कार्यों को समय से पूरा कराने और पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट में बैठक आयोजित हुई। जिलाधिकारी ने परियोजना की प्रगति एवं विभिन्न कार्यों की समीक्षा करते हुए पाइपलाइन और मैनहोल के शेष कार्यों पर दो दिन में संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही संचालन एवं अनुरक्षण (ओएंडएम) शुल्क के बिलों का भुगतान नहीं करने वाली टेनरी इकाइयों के विरुद्ध यूपीपीसीबी को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि परियोजना के अंतर्गत पाइपलाइन एवं मैनहोल से संबंधित जितने भी कार्य शेष हैं, उनके संबंध में यूपीपीसीबी एवं प्रोजेक्ट इंजीनियर संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार करें। रिपोर्ट को सचिव, जेटेटा से सत्यापित कराकर दो दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

सीईटीपी से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट एवं स्लज के निस्तारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सॉलिड वेस्ट एवं स्लज का नियमानुसार उचित एवं सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण अनुपालन हो सके।

सीईटीपी प्लांट से संबंधित शेष कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित कांट्रेक्टर को निर्धारित समयावधि में सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के लंबित कार्यों को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।

बैठक में सीईटीपी के संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क की स्थिति की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन टेनरी इकाइयों द्वारा ओएंडएम शुल्क के बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा है, उनके विरुद्ध यूपीपीसीबी नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

जिलाधिकारी ने परियोजना के सभी शेष कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के साथ पर्यावरणीय मानकों एवं संबंधित नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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उत्कृष्टता की यात्रा: नेतृत्व के पाँच वर्ष

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, में पाँच वर्षों के सामूहिक प्रयासों, शैक्षणिक प्रगति और उल्लेखनीय उपलब्धियों को समर्पित विशेष समारोह “ए जर्नी ऑफ एक्सीलेंस – सेलिब्रेटिंग 5 इयर्स ऑफ लीडरशिप” का आयोजन किया गया। यह अवसर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के नेतृत्व के पाँच वर्षों के सम्मान के साथ-साथ उन सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं सदस्यों के योगदान को रेखांकित करने का अवसर बना, जिनके समर्पित प्रयासों ने महाविद्यालय की उत्कृष्टता की यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाया है।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में दोपहर 12 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक समारोह तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों, शिक्षकों और संपूर्ण महाविद्यालय परिवार की उपलब्धियों तथा संस्थान के विकास में उनके सामूहिक योगदान के उत्सव के रूप में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. विनय कुमार पाठक, आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक तथा सीडीसी निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन, सचिव रेव. अनिल ज्ञान प्रकाश एवं उप-प्राचार्या प्रो. श्वेता चंद ने किया।
दिन की शुरुआत भविष्य की संभावनाओं और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ हुई। इस अवसर पर AEDP (Apprenticeship Embedded Degree Programme) भवन ‘दक्ष’ तथा विद्यार्थी स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण केंद्र ‘ओजस’ का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि में कुलपति ने विद्यार्थियों से संवाद किया तथा उनके स्टार्टअप और नवाचार आधारित प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। इस संवाद ने युवा प्रतिभाओं को अपने विचारों, नवाचारों और भविष्य की आकांक्षाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
औपचारिक समारोह में महाविद्यालय की अब तक की विकास यात्रा और इसके पीछे रहे सामूहिक प्रयासों को प्रस्तुत किया गया। प्राचार्य के स्वागत संबोधन के पश्चात प्रो. शालिनी कपूर ने महाविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसी अवसर पर एम.एससी. (रसायन विज्ञान) की छात्रा प्राची गुप्ता द्वारा विकसित ‘प्रज्ञान वर्चुअल लैब’ का कुलपति ने ऑनलाइन शुभारंभ किया। आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षण एवं प्रायोगिक अधिगम को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है।
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान रहा। शैक्षणिक एवं खेलकूद के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करने वाले विद्यार्थियों को ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए एक छात्र सॉफ्टवेयर डेवलपर को भी सम्मानित किया गया।
शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए महाविद्यालय के तीन शिक्षकों—वाणिज्य विभाग के डॉ. पवनेश मिश्रा, विज्ञान विभाग के डॉ. आशुतोष कुमार तथा कला विभाग की श्रीमती मनीषी त्रिवेदी—को सम्मानित किया गया। यह सम्मान विद्यार्थियों में शोध, जिज्ञासा और ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका और उनके सतत योगदान की सराहना का प्रतीक रहा।
कार्यक्रम में प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, डॉ. वंदना पाठक तथा आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. सुजाता चतुर्वेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कुलपति एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के अभिनंदन के पश्चात मुख्य अतिथि प्रो. विनय कुमार पाठक ने समारोह को संबोधित किया।
अपने संबोधन में प्रो. पाठक ने शिक्षा में नवाचार, आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग तथा गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख शोध की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में निरंतर परिवर्तन और विकास आवश्यक है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऐसी समावेशी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जिसमें तकनीक, कौशल, शोध और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण का समुचित समावेश हो। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अपने ज्ञान एवं कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
यह आयोजन केवल नेतृत्व के पाँच वर्षों का स्मरणोत्सव नहीं था, बल्कि उस साझी संस्थागत यात्रा का उत्सव था जिसे दूरदर्शी नेतृत्व ने दिशा दी, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के समर्पण ने सुदृढ़ बनाया और विद्यार्थियों के सपनों एवं उपलब्धियों ने सार्थकता प्रदान की। क्राइस्ट चर्च कॉलेज के लिए यह अवसर अब तक प्राप्त उपलब्धियों पर गौरवपूर्ण दृष्टि डालने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में शिक्षा, नवाचार, शोध और उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करने का संकल्प भी बना।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव और भारत सरकार और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा।

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के जल के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गई Team Bharat की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके। श्री शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र,  किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज के समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया!

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

गृह मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।
07 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है
29 जून, 2026 को श्री अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

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एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में “पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन*

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन किया गया,

कार्यक्रम कुलाधिपति/राज्यपाल की प्रेरणा एवं कुलपति के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहा है। कॉलेज की पुस्तकालय समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकों के करीब लाना और उनमें नई सोच व ज्ञान की जिज्ञासा जागृत करना है, इस अवसर पर प्राचार्या प्रो सुमन ने कहा कि “ज्ञान के बढ़ते ग्राफ में किताबों का बहुत योगदान है”। पुस्तकें न केवल नई खोज कराती हैं बल्कि अज्ञानता का नाश भी करती हैं साहित्य विज्ञान व कला की विभिन्न किताबो को पढने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्या ने अब्दुल कलाम की पुस्तकों ,रामायण के विभिन्न अनुवादित पुस्तकों पर प्रकाश डाला । महत्वपूर्ण संदर्भ से संबंधित पुस्तकें पढऩे पर जोर दिया । पुस्तकालय समिति की प्रभारी व दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो किरन ने छात्राओं को पुस्तक पठन – पाठन हेतु प्रेरित किया और पुस्तकों को प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु लाभदायक बताया।  समाजशास्त्र विभाग की प्रवक्ता डा. रेनू कुरील ने छात्राओं को पुस्तकों को सबसे अच्छी दोस्त बताया और ज्ञान संवर्द्धन हेतु पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया।  मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ . मोनिका सहाय ने पुस्तक पठन को मनोविज्ञान के ज्ञान से संबद्ध किया व अंग्रेजी विभागाध्यक्षा डॉ . कोमल सरोज ने पुस्तक पठन को साहित्य के विविध विधाओ से संदर्भित किया। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु डॉ. रोली मिश्रा ने संयोजन किया डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ .रेशमा, डॉ. श्वेता रानी ने सक्रीय भूमिका निभाई । इस कार्यक्रम मे महाविद्यालय की कुलानुशासक कैप्टन ममता अग्रवाल प्रो निशा वर्मा प्रो. प्रीति पाण्डेय, प्रो. मीनाक्षी व्यास डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शुभा बाजपेयी व सभी शिक्षिकाओं ने पुस्तक पठन कार्यक्रम मे प्रतिभाग किया।

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भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन क्षमता चालू की

भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन-एनजीएचएम को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण नीचे दिया गया है:

निधि आवंटन (करोड़ रुपये में)

(संशोधित अनुमान)

उपयोग

(करोड़ रुपये में)

वित्तीय वर्ष 2023-24 100 0.11
वित्तीय वर्ष 2024-25 300 46.26
वित्तीय वर्ष 2025-26

( 19 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार )

300 203.75

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से खोजी गई हरित हाइड्रोजन की लागत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को आपूर्ति के लिए  397 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरियों को आपूर्ति के लिए 387 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है।

विश्व बैंक समूह की “हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत, यानी लगभग 235 रुपये प्रति किलोग्राम, हिस्सा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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एनएसएस विशेष शिविर एआई उपयोग शपथ एवं मतदाता जागरूकता अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 16 फरवरी दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा लल्लनपूर्वा बस्ती में संचालित सात दिवसीय विशेष शिविर के षष्टम् दिवस पर एआई जिम्मेदार उपयोग की शपथ तथा मतदाता जागरूकता से संबंधित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रथम सत्र का शुभारंभ प्रातः व्यायाम एवं योगाभ्यास से हुआ। इसके उपरांत इंडिया ए आई मिशन द्वारा आयोजित ए आई समिट के अंतर्गत जिम्मेदार एआई उपयोग हेतु अधिकतम प्रतिज्ञाओं का रिकॉर्ड बनाने के प्रयास में एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने “AI for All” की शपथ ली। स्वयंसेविकाओं ने डिजिटल तकनीक के सुरक्षित, नैतिक एवं सकारात्मक उपयोग का संकल्प लिया।

स्वल्पाहार के उपरांत द्वितीय सत्र में स्वयंसेविकाओं ने बस्ती क्षेत्र में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। लोगों को मतदान के महत्व, मतदाता पहचान पत्र बनवाने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। रैली के माध्यम से “हर वोट की कीमत”, “मतदान ज़रूरी–लोकतंत्र मज़बूत” जैसे नारों से लोगों को प्रेरित किया गया।इस अवसर पर पोस्टर एवं स्लोगन प्रदर्शनी आयोजित की गई तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बालिका शिक्षा, महिला सम्मान और एआई के जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। स्वयंसेविकाओं ने बस्तीवासियों से संवाद कर प्रत्येक निर्वाचन में मतदान करने की अपील एवं शपथ भी दिलाई।कार्यक्रम में 50 स्वयंसेविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बस्तीवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए महिला सम्मान, डिजिटल जिम्मेदारी और मतदान जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। शिविर को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. साधना सिंह, बसंत कुमार तथा ग्रुप लीडर्स वैष्णवी, सिमरन, वासु, वंशिका एवं शीतल का विशेष सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान के साथ षष्टम् दिवस का समापन किया गया।

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मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता ‘बोली – बानी’ (मातृभाषाओं का त्यौहार) 21 फरवरी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी को क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्रांगण में उतारते हुए हिंदी विभाग द्वारा मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ महाविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। विभिन्न बोलियों और मातृभाषाओं में विविध विधाओं में जैसे गीत, नृत्य, कविता, वक्तव्य, संस्मरण आदि का शानदार प्रदर्शन न केवल छात्र-छात्राओं ने किया, अपितु कॉलेज के अध्यापकों ने भी इसमें बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया।
इस कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र श्रीवास्तव थे, विशिष्ट अतिथि इतिहास विभाग की सूफिया शहाब तथा विशेष अतिथि कॉलेज की उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य जोसेफ डेनियल ने की ।
अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न प्रदान करके किया गया तथा विभागीय स्वागत हिंदी के शोधार्थी अर्जित पाण्डेय ने कन्नौजी बोली में किया। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य ने 21 फरवरी की महत्ता स्पष्ट करते हुए इस दिन मातृभाषा दिवस को मनाने का कारण बांग्ला भाषा में स्पष्ट किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं द्वारा दी गईं एक के बाद एक मोहक प्रस्तुतियों की श्रृंखला सज गई। गरिमा, शाल्वी व साक्षी ने पंजाबी नृत्य किया, आकृति व ओजस्विनी ने राजस्थानी ‘कालबेलिया’ किया तो तन्वी ने मराठी ‘लावणी’ पर प्रस्तुति दी। तनिष्का ने राजस्थानी नृत्य किया तो वर्षा ने भोजपुरी छठ पूजा के गीत पर मोहक नृत्य किया और स्वस्तिक ने नेपाली गीत पर एकल नृत्य किया। साथ ही शरद ने राजस्थानी, तनिष्का ने अवधी व शिवा ने भोजपुरी में एकल गीत प्रस्तुत किए तथा नेहा, उपासना व अंजलि ने अवधी में भांवर गीत प्रस्तुत किया। वैष्णवी ने वंशीधर शुक्ल की अवधी की कविता तथा आदर्श, अब्दुल व पूजा ने क्रमशः हरियाणवी , उर्दू व बंगाली में मातृभाषा के प्रति अपने विचार प्रकट किए।
इसके उपरांत मंच सभी की प्रस्तुतियों के लिए खोल दिया गया। इस खुले मंच पर अनेक सुन्दर प्रस्तुतियाँ शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों आदि ने दीं। तदोपरांत विशेष अतिथि प्रो. श्वेता चंद ने भी एक कविता प्रस्तुत की। साथ ही विशिष्ट अतिथि सूफ़िया शहाब ने उर्दू में अपने विचार व्यक्त किए। सारस्वत अतिथि प्रो. दिनेशचंद्र श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भोजपुरी में सबको संबोधित किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. जोसेफ़ डेनियल ने अपनी मातृभाषा मलयालम में बात करते हुए सभी को अपने देश और उसकी भाषाई विविधता के प्रति गर्व महसूस करने के प्रति प्रेरित किया।
धन्यवाद ज्ञापन हिंदी की शोधार्थी गौरांगी मिश्र द्वारा अवधी बोली में दिया गया। समस्त कार्यक्रम का कुशल संचालन अरुणेश शुक्ल द्वारा अवधी में किया गया। सुंदरम, कांची, प्रज्ञा, विख्यात, अंजलि, नेहा ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी और कर्मचारी-गण उपस्थित रहे और बोलियों की विविधता का आनंद लिया।

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विश्व कुष्ठ रोग दिवस के मौके पर, सीसीपीडी द्वारा कुष्ठ रोग से जूझ रहे विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने, मिथकों को तोड़ने और इससे जुड़े कलंक को मिटाने के लिए वर्चुअल सेमिनार आयोजित

मुख्य आयुक्त (सीसीपीडी), दिव्यांगजन, के कार्यालय ने विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर एक वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभवों का आदान-प्रदान करना, मंथन करना और कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, साथ ही समाज की मुख्यधारा में प्रभावित व्यक्तियों को शामिल करने की वकालत करके मिथकों को तोड़ना और कलंक को मिटाना था। राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) एवं मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन (सीसीपीडी), ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। एस. गोविन्दराज, आयुक्त, विशिष्ट अतिथि थे। पैनल में डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम, वरिष्ठ वैज्ञानिक; डॉ. शिवकुमार, कुष्ठ रोग विशेषज्ञ; सुश्री निकिता सारा, द लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया में वकालत और संचार प्रमुख; और अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ संघ के अध्यक्ष डॉ. पी. नरसिम्हा राव शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत माधव साब्ले द्वारा मराठी में गाए गए एक प्रार्थना से हुई, जिसका बाद में श्री प्रवीण प्रकाश अंबस्था, डिप्टी सीसीपीडी द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। श्री विकास त्रिवेदी, डिप्टी सीसीपीडी, ने सेमिनार में पैनलिस्टों और प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. गोविन्दराज ने उद्घाटन भाषण दिया। राजेश अग्रवाल ने तीन दशक पहले एक युवा अधिकारी के रूप में महाराष्ट्र के जलगाँव में एक कुष्ठ रोग कॉलोनी का दौरा करने के अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग के कारण होने वाला अस्पृश्यता जाति आधारित भेदभाव से भी बदतर है, क्योंकि इसमें अपने परिवार के सदस्य भी प्रभावित व्यक्ति से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने कानूनी सुधारों के महत्व और मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उपचार के बाद पुनर्वास उपायों के महत्व पर भी बल दिया।एस. गोविन्दराज ने कुष्ठ रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव को तोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत में अभी भी 750 कुष्ठ रोग कॉलोनियाँ हैं जो समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग हैं। उन्होंने इस बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी चुनौतियों का भी जिक्र किया और व्यापक समाधान का आह्वान किया। डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम ने कुष्ठ रोग का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत किया और खुलासा किया कि भारत में वैश्विक कुष्ठ रोग के 53% मामले हैं। उन्होंने भेदभाव को खत्म करने और प्रभावित व्यक्तियों का समर्थन करने के लिए समुदाय-आधारित पुनर्वास के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. शिवकुमार ने कुष्ठ रोग के हाल के ट्रेंड पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सबसे कम संक्रामक बीमारियों में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत में 700 से अधिक जिलों में से 125 जिलों में अभी भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ये जिले 14 राज्यों में फैले हुए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 24 जिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक शून्य घरेलू स्वदेशी केस दर्ज करना है। निकिता सारा ने पीड़ितों को समाज से फिर से जोड़ने में मदद करने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग से मुकाबला करने में अज्ञानता सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि समय पर पता चल जाए तो कुष्ठ रोग सबसे आसानी से ठीक होने वाली बीमारियों में से एक है और स्पष्ट किया कि यह कोई विकृति या विकलांगता नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुष्ठ रोग से जुड़ा कलंक जागरूकता की कमी के कारण उत्पन्न होता है। डॉ. पी. नरसिम्हा राव ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन में चिकित्सीय पहलुओं और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बीमारी को जैविक रूप से अनूठी बताया और कहा कि यह दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दुर्लभ है, लेकिन ब्राजील, भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों में यह अभी भी चिंता का विषय है। कुष्ठ रोग से जूझने में अग्रणी सुश्री शबनम खान ने अपनी यात्रा साझा की जो कि दृढ़ता का प्रमाण है। कुष्ठ रोग और सामाजिक अस्वीकृति से जूझने के बावजूद, उन्होंने बाधाओं को पार कर अपने परिवार की पहली स्नातक बनने और एक स्वतंत्र जीवन जीने का लक्ष्य प्राप्त किया। सेमिनार का समापन कुष्ठ रोग को मिटाने और इससे प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए अधिक जागरूकता, शीघ्र पता लगाने और पुनर्वास के व्यापक प्रयासों के आह्वान के साथ हुआ।

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