
श्री यादव ने कहा कि सरकार बहु-प्रबंधन उद्देश्यों के साथ क्षेत्र आधारित प्रबंधन के लिए ब्लू प्रिंट विकसित करने के लिए समुद्र स्थानिक योजना (एमएसपी) के साथ आगे बढ़ रही है। मंत्री महोदय ने एनसीएससीएम को तटीय समुदायों की ठोस आय पर ध्यान देने के साथ मैनग्रोव संरक्षण के लिए मिशन मिष्टी (मैनग्रोव इनसेटिव फॉर शोरलाइन हेबिटेट्स एंड टेंजबल इनकम) में योगदान देने का भी निर्देश दिया।
एनसीएससीएम की स्थापना फरवरी 2011 में तटों की सुरक्षा, संरक्षण, पुनः स्थापना, प्रबंधन और नीति परामर्श पर समर्थन के लिए अनुसंधान संस्थान के रूप में की गई थी। एनसीएससीएम का विजन बढ़ती साझेदारी, संरक्षण व्यवहारों, वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से स्थायी तटों को विकसित करना तथा वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लाभ एवं खुशहाली के लिए ज्ञान प्रबंधन करना है। राष्ट्रीय केंद्र ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ईएसए) के 34,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक की मैपिंग, समग्र जोखिम रेखा की मैपिंग, तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेट) अधिसूचनाओं, 2011 तथा 2019 के अनुसार तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाओं की तैयारी, संचयी तटीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन, ईको-सिस्सटम वस्तुओं और सेवाओं, ब्लू कार्बन पृथकीकरण, ईको-सिस्टम स्वास्थ्य रिपोर्ट्स कार्ड जैसे कई ऐतिहासिक अनुसंधान अध्ययन किए हैं।
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कानपुर 23 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा विश्व जल दिवस मनाया गया,
कानपुर 23 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में सेंचुरी क्लब कानपुर विजन@2047 के अंतर्गत कोऑर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में लैंगिक मुद्दों पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्राचार्या प्रो अर्चना वर्मा ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकता है । आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। कार्यक्रम में विभिन्न छात्राओं ने लैंगिक समानता पर अपने विचार रखे जिनमें प्रमुख रूप से सौम्या उपाध्याय दीक्षा तिवारी, कीर्ति यादव प्रमुख है। छात्राओं ने लैंगिक समानता पर जोर देते हुए कहा कि समाज जो महिलाओं और पुरुषों को समान मानते हैं वे अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। लैंगिक समानता एक मानवाधिकार है। इस गोष्ठी का मे महाविद्यालय की विभिन्न प्रवक्ताएं डॉ अर्चना दीक्षित, डॉ अंजना श्रीवास्तव, श्वेता गोंड, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ मंजुला श्रीवास्तव तथा कृष्णेंद्र श्रीवास्तव आदि भी उपस्थित रहे। सभी छात्राओं की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।
कानपुर 23 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता,
बेटियों की प्रशंसा की
विश्वविख्यात रामलीला मंचन का प्रतीक बनेगा अन्तर्राष्ट्रीय राम महोत्सव-23, लोक संस्कृति के समागम में शामिल होंगे साधु-संतों समेत प्रसिद्द नेता-अभिनेता