सफर की शुरुआत अगर अच्छी हो तो पूरा सफर अच्छा बीतता है और सफर में उत्साह भी बना रहता है। जब हम हैदराबाद घूमने के लिए रवाना हुए तो कुछ ऐसा ही उत्साह और मंजिल पर पहुंचने की बेचैनी हमारे सफर को खुशनुमा बनाए हुए थी। हमारी यात्रा की मंजिल हैदराबाद से ढाई सौ किलोमीटर कुरनूल के पास स्थित श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन मंदिर था। गोल पहाड़ियों वाला रास्ता बहुत रोमांचक था। सधे हुए हाथों से गाड़ी चलाना आसान नहीं था, हर समय एक डर बना रहता था किसी दुर्घटना का। श्रीशैलम पहुंचने का रास्ता पैदल नहीं है, आपको या तो बस, टैक्सी करनी पड़ती है या फिर खुद का वाहन रखना पड़ता है।रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है। रास्ते भर बंदरों का जमघट दिखाई पड़ता है और रात में वापसी की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। जंगली जानवरों का डर, अंधेरा और खतरनाक रास्ते रात में गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं देते।
श्रीशैलम पहुंचने के बाद हम होटल में रूकने के बजाय मंदिर के प्रांगण में ही रुके और वहां प्रकृति और मंदिर की सुंदरता का आनंद लेने लगे। मंदिर में दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम को 5:00 से 6:00 बजे तक रहता है। शीघ्र दर्शन के लिए रूपया महत्वपूर्ण तो हो ही गया है। बिचौलियों ने अपनी घुसपैठ हर जगह बना रखी है। बहरहाल हम सादी लाइन में खड़े हो गये और कुछ देर बाद करीब 4:30 बजे के आसपास मंदिर का दरवाजा खुला और हम सब अंदर जाने लगे। अंदर पड़ी हुई बेंच पर बैठकर बाबा के दर्शन का इंतजार करने लगे। कुछ समय बाद बाबा के दर्शन के लिए धीरे-धीरे भीड़ छोड़ी जाने लगी। यह सत्य है कि ईश्वर के सामने अमीर गरीब सब एक समान हो जाते हैं। उस समय भी ऐसा ही था। बाबा के दर्शन के समय शीघ्र दर्शन वालों की लाइन और आम लोगों की लाइन सब मिलकर एक हो गए और सभी दर्शनार्थी एक साथ दर्शन लाभ ले रहे थे। सबसे अच्छी बात यह लगी की भीड़भाड़ होने के बावजूद सब लोग एक जगह पर बैठे हुए थे और थोड़ी-थोड़ी देर से लोग दर्शन के लिए भेजे जा रहे थे। सावन के महीने में यहाँ बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। बाबा का फूलों से श्रंगार देखकर मेरी नजर हट ही नहीं रही थी अगर मन में कुछ मांगने की इच्छा हो तो शायद वह भी भूल जाते हैं बाबा को देख कर। सिर्फ सुंदर अलौकिक रूप दर्शन ही दिखाई देता है।
उसके बाद हम लोगों ने मां पार्वती के दर्शन किये। दक्षिण संस्कृति की छाप के कारण मंदिर का एक अलग सौंदर्य देखने को मिल रहा था। मल्लिकार्जुन मंदिर की स्थापत्य कला ने मुझे बहुत आकर्षित किया। पुराने पत्थर, पुराना ढांचा, पुराने खंभे और उन पर बनी आकृति कहीं कोई नवनिर्माण नहीं। मैं कुछ देर तक मंदिर की बनावट और पत्थरों को देखती रही। वहाँ की स्थानीय भाषा तेलुगु होने के कारण लोग क्या बोलते थे वह समझ से बाहर था लेकिन जरूरत पड़ने पर वह लोग हिंदी भाषा का इस्तेमाल करते थे।
ऐसा माना जाता है कि शैल पर्वत पर स्थित होने के कारण इसे श्रीशैलम पर्वत भी कहते हैं। शिवपुराण के आधार पर मल्लिकार्जुन का अर्थ मल्लिका मां पार्वती और अर्जुन भगवान शिव को माना गया है मल्लिकार्जुन की कहानी शिव पार्वती के पुत्र गणेश और कार्तिकेय की कहानी है जो गणेश जी अपने माता-पिता की परिक्रमा पूरी करते हैं. ऐसी मान्यता है कि जब गणेश जी के परिक्रमा पूरी करने पर कार्तिकेय जी नाराज हो गये तो माता पार्वती भगवान शिव के साथ क्रौंच पर्वत पर कार्तिकेय जी को मनाने पहुंची। माता पिता के आगमन को सुन कार्तिकेय जी बारह कोस दूर चले गए, तब भगवान शिव वहां पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और तभी से वह स्थान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हो गया। ऐसा कहा जाता है कि वहां पर पुत्र स्नेह में माता पार्वती हर पूर्णिमा और भगवान शिव हर अमावस्या को आते हैं।
इसके बाद हम सब रामोजी सिटी घूमने गए। रामोजी सिटी घूमने में पूरा दिन लग गया। मुझे सबसे ज्यादा अच्छा रामोजी सिटी का प्रबंधन लगा। हर व्यवस्था बहुत कायदे से की गई थी और घूमने आए पर्यटकों का ध्यान भी बहुत अच्छे से रखा जा रह था। कई प्रोग्राम जो मूवी से ही जुड़े हुए थे जिससे यह पता चलता है कि कार्टून कैसे बनते हैं, मूवी कैसे बनती है इसकी जानकारियां दी गई थी। जिसे जानकर आप आश्चर्य करेंगे। नई – पुरानी फिल्मों के सेट देखे बाहुबली, केजीएफ, आरआर, पुष्पा जैसी मूवी के सेट देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। बाहुबली का सेट जब देखा तो महसूस हुआ कि व्यक्ति मूवी देखने में इतना गुम जाता है कि पीछे लगा सेट जिसमें हाथी घोड़े हिल रहे हैं या नहीं वह भी मालूम नहीं पड़ता। वैसे भी तकनीकी दौर है और अब सबकुछ टेक्निकल हो गया है। रामोजी में ही हम लखनऊ, आगरा, मुंबई, दिल्ली, लंदन, रेलवे स्टेशन, ताजमहल वगैरह वगैरह सब घूम लिए। रामोजी सिटी 2,500 एकड़ में डिज़ाइन किया गया है, इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया के सबसे बड़े स्टूडियो कॉम्प्लेक्स के रूप में प्रमाणित किया गया है।
बर्ड पार्क, एडवेंचर पार्क, जापानी गार्डन, मुगल गार्डन, सन फाउंटेन गार्डन और एंजल्स फाउंटेन गार्डन मुख्य आकर्षण हैं। वाइल्ड वेस्ट स्टंट शो, रामोजी स्पिरिट और कई तरह के स्ट्रीट इवेंट जैसे आकर्षक और रोमांचकारी लाइव शो हैं।
उसके बाद हम सालार जंग म्यूजियम जो हैदराबाद का इतिहास बयां करता है। म्यूजियम की जैपनीज गैलरी बहुत सुंदर है। पुराने गहने, बर्तन, हाथी को पहनाने वाले गहने, हथियार वगैरह सब कुछ बहुत दिलचस्प था। म्यूजियम में चीन, जापान, ईरान, पर्शिया और भारतीय सभ्यताओं का मिलाजुला इतिहास दिख रहा था।
बात करती हूँ अब चारमीनार की… चारमीनार यूं तो बहुत खूबसूरत दिखता है लेकिन वहां फैला हुआ बाजार उसकी सुंदरता को खत्म कर रहा है। चारमीनार हैदराबाद का सबसे प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण का केंद्र है। यह स्मारक 1591 में मोहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा बनाया गया था और इसका नाम चारमीनार रखा गया था। इसे ‘पूर्व का आर्क डी ट्रायम्फ’ भी कहा जाता है। चारमीनार की ऊपरी मंजिल पर एक छोटी सी मस्जिद है। शाम की रोशनी इसे देखने लायक बनाती है। चारमीनार भीड़-भाड़ वाले इलाके में खड़ा है, जहां बाजार अस्त-व्यस्त हैं, जहां फेरीवाले, चूड़ी बेचने वाले और खाने-पीने की दुकानें हैं। फिर भी, यह हैदराबाद में एक लोकप्रिय यात्रा स्थल बना हुआ है।
इसके बाद हम सब सेवेन टोमब्स देखने गये। सात मकबरे काफी बड़े एरिया में फैला हुआ है और मैं दो ही मकबरे तक घूम सकी क्योंकि मेरे पैरों ने जवाब दे दिया था। मैंने वहां पर लोगों को पिकनिक मनाते हुए देखा। वो जगह हैदराबाद की विरासत को अब भी संभाले हुए हैं। कुतुब शाही मकबरा कुतुब शाही शासकों का शाही कब्रिस्तान है।
फिर निजाम पैलेस दिखा जो अब होटल के रूप में तब्दील हो चुका है। रास्ते से गुजरते हुए धूलपेट नाम की एक जगह थी। जिसके बारे में मालूम हुआ कि वहां पर मौजूद मस्जिद जिसमें एक मंदिर भी है जहां दोनों समय आरती और नमाज होती है और मस्जिद के बाहरी हिस्सों में लगी दुकानों में पूजा की सामग्री मिलती है। कहीं कोई बैरभाव नहीं दिखता। यह भाईचारा देखकर दिल बहुत खुश हो गया और अच्छा भी लगा कि अब भी ऐसी जगह मौजूद है।
हैदराबाद के खास पर्यटन स्थलों में गोलकुंडा किला बहुत मशहूर है। 170 सालों तक यहां के निजाम ने गोलकुंडा पर शासन किया। गोल आकार का किला, हैदराबाद का एक दर्शनीय पर्यटन स्थल है। किला 300 फीट की ग्रेनाइट पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। 87 बुर्जों के साथ गोलकुंडा किले में मंदिर, मस्जिद, महल, हॉल, अपार्टमेंट और अन्य संरचनाएं हैं। शानदार डिजाइन के साथ-साथ यह किला अपनी ध्वनि से भी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। हमलों के दौरान राजा को सचेत करने के लिए किले को एक किलोमीटर की दूरी तक ध्वनि ले जाने के लिए बनाया गया था। गोलकुंडा खदानें अपने हीरे जैसे कोहिनूर, नासक डायमंड और होप डायमंड के लिए भी प्रसिद्ध हैं। गोलकुंडा का किला शहर के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। किले के ऊपर से सूर्यास्त देखने लायक होता है।
फिर वहां का संघी मंदिर हैदरबाद के बाहरी क्षेत्र संघी नगर में स्थित है। यह मंदिर ऊंचे बने राजा गोपुरम के लिए जाना जाता है, जो कि स्थानीय लोगों के बीच काफी पवित्र है। अपनी ऊंचाई के कारण गोपुरम को काफी दूर से भी देखा जा सकता है। यह मंदिर सुंदर ढंग से परमानंद गिरि नामक एक छोटी सी पहाड़ी पर बना है। मंदिर की बनावट विशिष्ट दक्षिण भारतीय वास्तुशिल्प की याद दिलाती है। यहां हर साल हजारों की तादाद में लोग अपनी मनोकामना पूरी करने आते हैं। मंदिर में पत्थर से बने एक हाथी से खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। संघी मंदिर में कुल तीन गोपुरम है, जिसे देखकर लगता है कि यह आसमान को छू रहा है।
उसके बाद हम सब चिल्कुर मंदिर गये। वहाँ बालाजी को वीजा देने वाले भगवान भी कहते हैं। इस विश्वास की जड़ें एक घटना की जानकारी के रूप में मिलती हैं जब कुछ छात्र जिनके वीज़ा का आवेदन खारिज कर दिया गया था, वो यहाँ मंदिर में आए और प्रार्थना की कि केवल उनके आवेदन स्वीकार किए जाएं। खास बात यह है कि यह मंदिर किसी भी तरह का धन या दान स्वीकार नहीं करता है और यहाँ भगवान के दर्शन करते समय आंखें बंद नहीं की जाती है। यह बहुत पुराना मंदिर है और अभी भी अपनी वास्तविकता को बरकरार रखे हुए है।
इसके बाद नंबर बिड़ला मंदिर का जो अपने आप में बहुत खूबसूरत है। शांत वातावरण और बालाजी को देखकर शांति महसूस की। प्रभू का चेहरा निहारना अत्यंत सुखद लगा।
कोई भी घुमक्कड़ी हो बिना खरीदारी के पूरी नहीं होती। हैदराबाद को मोती की नगरी भी कहते हैं। तरह तरह के आकर्षक मोती के गहने मन को लुभाते हैं। लाख की चूड़ियाँ, मोजड़ी और हैदराबाद की पोचमपल्ली साड़ी बहुत मशहूर है। हैदराबाद एक ऐसा शहर है जो अपनी पारंपरिक संस्कृति के लिए जाना जाता है और वह संस्कृति निज़ामी विशेष खानपान की चीजों में दिखती है। खानपान में हैदराबादी बिरयानी, ईरानी चाय बहुत मशहूर है।
~प्रियंका वर्मा महेश्वरी
Read More »
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर, 5 नवंबर, 2022: उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने पब्लिक पॉलिसी एण्ड ओपीनियन सेल, आईआईटी कानपुर द्वारा आयोजित इंडियन गवर्नेंस समिट’22 के उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि रूप में आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर का दौरा किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहते हुए, उन्होंने संस्थान की कुछ महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं से परिचित होने के लिए दौरा भी किया।
उत्तर प्रदेश कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी और आई आई टी (IIT) कानपुर (B.Tech – EE) से स्नातक । उन्होंने बहुत ही विनम्र शुरुआत की थी, लेकिन पूरी लगन और समर्पण के साथ, उपलब्धियों की सीढ़ी चढ़ते चले गए। इंडियन गवर्नेंस समिट’22 में श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने नीति निर्माण पर बात की है l दशकों के एक शानदार करियर में, उन्होंने राज्य और संघीय सरकारों में कई शीर्ष पदों पर कार्य किया है, जिनमें राज्य और संघीय कराधान, राजस्व प्रशासन, आंतरिक सुरक्षा, सतर्कता, नागरिक उड्डयन, पर्यटन, खेल, कृषि अनुसंधान के क्षेत्र, चिकित्सा और स्वास्थ्य, खनन और शहरी विकास शामिल हैं। चार साल से अधिक समय तक, उन्होंने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में भारत सरकार के सचिव के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू), प्रधान मंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू), कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (अमृत), दीन दयाल अंत्योदय योजना सहित कई प्रमुख शहरी मिशनों की योजना और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
कानपुर 5 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता क्रिकेट प्रेमियों में किंग कोहली के नाम से मशहूर भारत की शान विराट कोहली का जन्मदिन आज कानपुर में धूमधाम से मनाया गया । भरत स्ट्राइकर क्रिकेट क्लब की ओर से हुए इस आयोजन में 34 किलो मिठाई बांटकर “कोहली” का विराट स्वरूप में 34 वां जन्मदिन मनाया गया । किसी के हाथों में विराट कोहली का पोस्टर तो कोई क्रिकेट का बैट लिए था । कोई मिठाई खिला रहा था तो कोई क्रिकेट पैड और ग्लब्स लिए हुए था । ” हैप्पी बर्थ डे विराट कोहली ” के सुरों के बीच क्रिकेट प्रेमियों ने राहगीरों को मिठाई खिलाकर एक दूसरे को बधाई दी । कार्यक्रम के दौरान विराट कोहली के दीर्घायु की कामना के साथ ही टी 20 वर्ड कप में भारत के विजेता होने की प्रार्थना भी की । कहां गया कि विराट कोहली ने अपने प्रतिभा के दम पर पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया है । कई मैच में तो अकेले विराट के खेल से भारत को जीत मिली है । टी 20 वर्ड कप में इंडिया-पाकिस्तान के मैच हुए कांटे के मैच में विराट ने अकेले दम पर भारत को जीत दिलाई थी । विराट ने अपने खेल से यह साबित कर दिया कि विराट का व्यक्तित्व “विराट” है । इस मौके पर भारतेंदु पुरी , विपिन वर्मा , सुनील गुप्ता प्रशांत पुरी , शारदा प्रसाद साहू , कुशाग्र सक्सेना , गौरव श्रीवास्तव , पवन साहू सहित अन्य क्रिकेट प्रेमी मौजूद थे ।
कानपुर 4 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग ने बी एस सी प्रथम द्वितीय तथा तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए शैक्षिक भ्रमड़ का आयोजन किया
।चंद्र शेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय के डीन डॉ डी आर सिंह ने अनुमति के अतिरिक्त स्वयं छात्राओं को सम्बोधित करते हुए विश्वविद्यालय का इतिहास बताते हुए विज्ञान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और छात्राओं को विज्ञान की पढ़ाई हेतु प्रेरित किया। वेक अतिरिक्त डॉ अनिल सचान,विभागाध्यक्ष मृदा विज्ञान ,डॉ एड के बिस्वास, विभागाध्यक्ष प्लांट पथॉलॉजी,डॉ वी के त्रिपाठी विभागाध्यक्ष हॉर्टिकल्चर तथा डॉ राम सिंह एंटमालजी , ड़ा द्विवेदी ने सक्रिय सहयोग करते हुए अपने अपने विभागों में छात्राओं का मर्गदर्शन करते हुए अनेक विदेशी उपकरण दिखाए उनकी जानकारी दी एवं किस प्रकार उनका उपयोग शोध कार्यों में होता है दिखाया।
इस भ्रमण में डॉ प्रीति सिंह, डॉ समीक्षा सिंह, डॉ रायी घोष तथा डॉ स्नेह त्रिवेदी के अतिरिक्त अवधेश, हरिनारायण तथा दिनेश शुक्ला ने भरपूर सहयोग किया।
कानपुर 3 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एस.एन.सेन बी. वी. पी.जी. कॉलेज कानपुर में एल.आई.सी. कानपुर और सेन महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्त्वाधान में सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सतर्कता जागरूकता सप्ताह 31 अक्टूबर से 6 नवंबर तक मनाया जा रहा है जिसे सार्वजनिक जीवन में नैतिकता को बढ़ाने के लिए, लोगों को भ्रष्टाचार से उत्पन्न खतरों के बारे में जागरूक करने के लिए, हित धारकों को एक साथ लाने के लिए मनाया जाता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग इसे हर वर्ष बनाता है। वर्ष 2022 में सतर्कता सप्ताह की थीम है- *एक विकसित राष्ट्र के लिए, भ्रष्टाचार मुक्त भारत* ।




