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सकारात्मक मनोविज्ञान के द्वारा मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन” विषय पर अतिथि व्याख्यान तथा भाषण प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक अतिथि व्याख्यान तथा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका विषय *”सकारात्मक मनोविज्ञान के द्वारा मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन”* था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके बाद अतिथि वक्ता डॉ आभा सक्सेना, कॉलेज की प्राचार्या व निर्णायक मंडल की सदस्य शिक्षिकाओं का स्वागत व सम्मान किया गया। स्वागत प्रक्रिया के बाद कॉलेज की प्राचार्य प्रो०डॉ सुमन ने अपने आशीर्वचनों से कार्यक्रम के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के तनावपूर्ण प्रभाव को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए प्रयास किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ मोनिका सहाय ने कार्यक्रम के विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सकारात्मक मनोविज्ञान के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य में किस प्रकार वृद्धि की जा सकती है और व्यक्ति अपना जीवन और अधिक बेहतर व सकारात्मक बना सकते हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए आमंत्रित मुख्य वक्ता ने सकारात्मक मनोविज्ञान तथा मानसिक स्वास्थ्य की महत्ता को स्पष्ट किया तथा दोनों के संबंध पर प्रकाश डाला। इसके बाद प्रतियोगिता प्रारंभ की गई जिसमें प्रतिभागी छात्राओं ने अपने भाषण प्रस्तुत किये। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डाॅ पूजा गुप्ता तथा डॉ अनामिका राजपूत सम्मिलित रहे। प्रतियोगिता के निर्णय इस प्रकार रहे –
प्रथम पुरस्कार – महिमा यादव
द्वितीय पुरस्कार – अंजलि
तृतीय पुरस्कार – स्नेहा सिंह
सांत्वना पुरस्कार – सुनीता शर्मा
प्रतियोगियों को पुरस्कार वितरण के बाद कार्यक्रम समापन प्रक्रिया व धन्यवाद ज्ञापन विभाग की प्रवक्ता असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री प्रीति यादव ने किया। कार्यक्रम संचालन में विभागीय प्रवक्ता असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री मयूरिका गुप्ता ने योगदान दिया। कार्यक्रम में कॉलेज की अन्य शिक्षिकाएं व छात्राएं उपस्थित रही जिससे कार्यक्रम गरिमामय तरीके से संपूर्ण हो सका।

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डाबर रेड पेस्ट, इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) से प्रतिष्ठित सील ऑफ एक्सेप्टेन्स हासिल करने वाला भारत का पहला स्वदेशी आयुर्वेदिक ब्राण्ड बना

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर : एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए डाबर रेड पेस्ट इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) से प्रतिष्ठित सील ऑफ एक्सेप्टेन्स हासिल करने वाला भारत का पहला स्वदेशी आयुर्वेदिक ब्राण्ड बन गया है। वर्ल्ड डेंटल शो के दौरान आईडीए और डाबर रैड पेस्ट के बीच इस साझेदारी की घोषणा की गई। शो में देश भर से 500 से अधिक डेंटिस्ट (दंत चिकित्सक) और डेंटिस्ट्री (दंत चिकित्सा) पढ़ने वाले छात्र शामिल हुए थे। डेंटिस्ट इस घोषणा का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि वे अब आयुर्वेद के प्रमाणित फॉर्मूले को अब अपनी ओरल केयर प्रेक्टिस में शामिल कर सकते हैं। पिछले 5000 सालों से आयुर्वेदिक चिकित्सा को भरोसेमंद माना जाता रहा है। वैज्ञानिक जांच के आधार पर डाबर रेड पेस्ट को इंडियन डेंटल एसोसिएशन से यह एक्सेप्टेन्स मिली है जो इस बात को तय करती है कि प्रोडक्ट सुरक्षा और प्रभाविता के मानकों पर खरा उतरता है। जांच के परिणामों में साफ हो गया है कि यह प्रोडक्ट दांतों की समस्याओं को कम करने और ओरल हेल्थ को बनाए रखने में कारगर है, अगर इसे निर्देशानुसार इस्तेमाल किया जाए। ऐसे में यह सील ऑफ एक्सेप्टेन्स, विज्ञान और आयुर्वेद के रिश्ते को नया आयाम देगी। इसके अलावा यह डाबर के लिए बेहद गर्व की बात है जो इस बैज को हासिल करने वाला पहला स्वदेशी ब्राण्ड बन गया है।’ डॉ अशोक ढोबले, मानद महासचिव, आईडीए ने कहा। यह प्रमाणित हो चुका है कि भारत का नंबर 1 आयुर्वेदिक पेस्ट- डाबर रेड पेस्ट दांतों की 7 समस्याओं से निपटने में कारगर है जैसे दांत में दर्द, मसूड़ों से खून आना, सांस में बदबू, कैविटी, दांतों का पीलापन, जर्म्स और प्लॉक जमना। 13 शक्तिशाली आयुर्वेदिक अवयवों से बना यह अनूठा फॉर्मूला मुँह की सम्पूर्ण देखभाल करता है वर्ल्ड डेंटल शो के दौरान दंत चिकित्सकों ने डाबर रेड पेस्ट के पीछे मौजूद विज्ञान का समझने में उत्सुकता जताई। इस अवसर पर प्रोडक्ट के इन्ग्रीडिएन्ट्स, उनक वैज्ञानिक नामों और फायदों को डिस्प्ले किया गया, ताकि चिकित्सक इनके फायदों के बारे में जान सकें। अभिषेक जुगरान, ईवीपी मार्केटिंग, डाबर इंडिया लिमिटेड ने इस अवसर पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, ‘‘आईडीए की सील डाबर रेड पेस्ट के पेटेंटेड फॉर्मूले की दक्षता और सुरक्षा का प्रमाण है। डाबर रेड पेस्ट इस सील को हासिल करने वाला भारत का पहला स्वदेशी ब्राण्ड बन गया है। इस अवसर पर हम आईडीए की सराहना करना चाहेंगे, जो आम लोगों के मुख के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए प्रयासरत है और ऐसे टूथपेस्ट को स्वीकार्यता प्रदान दे रहा है, जो ओरल हेल्थ को सुनिश्चित करता है। उपभोक्ता पूरे भरोसे के साथ विज्ञान और आयुर्वेद के इस संयोजन डाबर रेड पेस्ट को चुन सकते हैं और किसी भी तरह की दांतों की समस्याओं से सुरक्षित रह सकते हैं।’ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि डाबर रेड पेस्ट दांतों की 7 समस्याओं से सुरक्षा प्रदान कर बेहतर ओरल हेल्थ को सुनिश्चित करता है

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सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता , भाषण प्रतियोगिता एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस . एन. सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता , भाषण प्रतियोगिता एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छात्रों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने मां सरस्वती पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया ।विजय छात्राओं को पुरस्कृत किया गया ।प्राचार्य प्रो. सुमन ने छात्राओं को शासन द्वारा चलाए गए इस प्रकार के कार्यक्रमों की उपयोगिता एवं सड़क पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए संदर्भ में सभी को जागरूक किया, कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. निशि प्रकाश एवं कैप्टन ममता अग्रवाल कुलानुशास्तिका ने मंच साझा करते हुए छात्राओं को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार पाने वाली छात्रों के नाम निम्नवत है भाषाण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्रेरणा शर्मा , द्वितीय स्थान शताक्षी द्विवेदी ,तृतीय स्थान दीप्ति पांडे एवं सांत्वना पुरस्कार प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मुस्कान राठौर द्वितीय स्थान प्रगति तृतीय स्थान मुस्कान को प्राप्त हुआ पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा मनुष्य का सिंह द्वितीय स्थान कामाक्षी पंडित तृतीय स्थान शुभेच्छा वर्मा रहीम पुरस्कार वैष्णवी गुप्ता एवं अफरोज बानो को प्राप्त हुआ। प कार्यक्रम की संयोजक एवं सड़क सुरक्षा अभियान की प्रभारी प्रोफेसर प्रीति पांडे ने पूरे कार्यक्रम का आयोजन किया एवं सभी भी सभी उपस्थित महाविद्यालय की प्रवक्ताओं एवं छात्रों का धन्यवाद क्या कर कार्यक्रम को सड़क सुरक्षा शपथ लेते हुए समाप्त किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर रेखा प्रोफेसर मीनाक्षी प्रोफेसर किरण डॉक्टर कमल डॉ रचना निगम डॉ रश्मि उपस्थित रहे।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में अल्टुडो कंपनी द्वारा प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज में अल्टुडो कंपनी द्वारा प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन किया गया। कॉलेज प्राचार्य डॉ जोसेफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कार्यक्रम का संचालन कैरियर काउंसलिंग सेल की संयोजिका डॉ मीतकमल द्वारा किया गया, अल्टुडो प्लेसमेंट ड्राइव में सीनियर एजेंसी निदेशक विशाल गौर ने और ब्रांच सदस्य सुष्मिता पात्ररा ने 50 से ज्यादा छात्र-छात्राओं का सेल्स मैनेजर के पद के लिए इंटरव्यू लिया और 20 छात्रों को उन्होंने द्वितीय राउन्ड के लिए चयनित किया और बताया कि मेहनत ही सफलता की कुंजी है हार्डवर्क से ज्यादा स्मार्ट वर्क करना चाहिए। उन्होंने साथ ही साथ पर्सनल इंटरव्यू लिया और ग्रुप डिस्कशन के द्वारा उनकी प्रतिभा का आंकलन किया। उन्होंने कहा कि भारत में नौकरियों की कमी नहीं है, छात्रों को सिर्फ सही अवसर की तलाश करनी चाहिए और कौशल का विकास करना चाहिए। इस अवसर पर कॉलेज के डॉ अर्चना, डॉ अंकिता, आदि उपस्थित रहे।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “भारतीय संविधान के 75 वर्षों की यात्रा” विषय पर व्याख्यान और पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता भारत 26 नवंबर 2024 को भारतीय संविधान लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। इस अवसर पर क्राइस्ट चर्च कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग ने “भारतीय संविधान के 75 वर्षों की यात्रा” विषय पर एक व्याख्यान और पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रिंसिपल और सचिव प्रोफेसर जोसेफ डैनियल; मुख्य वक्ता श्री प्रकल्प शर्मा, कानूनी विशेषज्ञ और डिप्टी रजिस्ट्रार आईआईटी कानपुर; और राजनीति विज्ञान विभाग पूर्व प्रमुख प्रो. आशुतोष सक्सेना ने अध्यक्षता की.कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के आह्वान के साथ हुई। संयोजिका प्रो. विभा दीक्षित ने विशिष्ट अतिथियों, सहकर्मियों और छात्रों का स्वागत किया और कार्यक्रम की विषयवस्तु से परिचय कराया। उन्होंने संविधान में निहित सिद्धांतों की रक्षा और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य वक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ, श्री प्रकल्प शर्मा ने संवैधानिक साक्षरता के महत्व पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया. उन्होंने बताया कि कैसे प्रत्येक नागरिक की अपने अधिकारों के बारे में चैतन्यता लोकतंत्र की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। “संविधान हमारे अतीत का एक दस्तावेज मात्र नहीं है; यह हमारे भविष्य का मार्ग दर्शक है।” उनके व्याख्यान में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे भारतीय संविधान ने विभिन्न चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया है और समावेशी और जीवंत लोकतंत्र को बढ़ावा देते हुए शासन में संवैधानिक मूल्यों, आदर्शों और दृष्टिकोण को अक्षुण्ण रखा है।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रोफेसर जोसेफ डेनियल ने छात्रों को भारतीय संविधान में निहित आदर्शों और उद्देश्यों का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को समर्पित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सत्र के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष सक्सेना ने पैनलिस्टों के दृष्टिकोण में निहित सार को बताते हुए विषय पर अपनी मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रस्तुत की. उन्होंने संवैधानिक व्याख्या, कानूनी मिसालों के महत्व और युवा नागरिक जीवन में संविधान का महत्व पर प्रकाश डाला। सभी पैनलिस्टों ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सक्रिय, ज्ञानपूर्ण नागरिक भागीदारी आवश्यक है। इसके उपरान्त इंटरैक्टिव सत्र में छात्रों एवं शिक्षकों ने संविधान में डिजिटल गोपनीयता, सामाजिक न्याय और पर्यावरण नीति पर सवाल किये. सभी पनेलिस्ट ने छात्रों और शिक्षकों को समान रूप से संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिकाओं के बारे में गंभीरता से सोचने के लिए प्रोत्साहित किया।
राजनीति विज्ञान के बी. ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्रों ने इस विषय पर एक “पोस्टर प्रदर्शनी” लगाई और सभी उपस्थित लोगों से इस प्रयास की सराहना की। सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को पुरस्कार के लिए चुना गया। कार्यक्रम का समापन डॉ. अर्चना पांडे द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। डॉ. अर्चना वर्मा और उनकी आयोजन टीम, जिसमें परमा मिश्रा, पूजा कमल और छात्र शामिल थे, के प्रभावी समन्वय के कारण यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही जिनमे डॉ. जुनेजा, डॉ. अनिंदिता, डॉ. नवीन अम्बष्ट, डॉ. सत्यप्रकाश डॉ. हिमांशु आदि मौजूद थे.

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दयानंद गर्ल्स कॉलेज में हुआ माई भारत आउटरीच प्रोग्राम

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर राष्ट्रीय सेवा योजना, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में 9 नवंबर 2024 को कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में एक दिवसीय “माई भारत आउटरीच प्रोग्राम” वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें महाविद्यालय की नॉलेज इंस्टीट्यूशन प्रभारी डॉ ज्योत्सना पांडे ने सभी छात्राओं को माय भारत पोर्टल के महत्व एवं उस पर रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। महाविद्यालय की माई भारत कैंपस एंबेसडर श्रद्धा त्रिवेदी ने एनएसएस की छात्राओं के साथ-साथ महाविद्यालय की अन्य छात्राओं को भी माई भारत पोर्टल पर रजिस्टर करवाया। साथ में वॉलिंटियर सिमरन वर्मा व आदिती का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम में 75 छात्राएं उपस्थित रही

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर पोस्टर प्रेजेंटेशन आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में भूगोल विभाग के द्वारा स्नातक एवं स्नातककोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए बायोडायवर्सिटी एंड इकोसिस्टम (जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र) पर पोस्टर प्रेजेंटेशन का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने चार्ट एवं मॉडल आदि के माध्यम से जैव विविधता तथा पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने छात्राओं के द्वारा किए गए इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन से लड़ने एवम् विलुप्त होती जीवों तथा वनस्पतियों की प्रजातियों के संरक्षण आदि हेतु पारिस्थितिकी तंत्र तथा जैव विविधता के संरक्षण से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है ताकि इस संबंध में युवाओं को अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त हो सके तथा भविष्य में इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए जा सके। महाविद्यालय की सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा जी ने वर्तमान दौर में छात्राओं के लिए इस प्रकार की रुचिकर एवं क्रिएटिव गतिविधियों के आयोजन को अति प्रासंगिक, महत्वपूर्ण एवं लाभदायक बताया। इस अवसर पर कुल 15 छात्राओं के द्वारा अपने प्रेजेंटेशन दिए गए तथा लगभग 100 छात्राएं उपस्थिति रही। संपूर्ण आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में आई क्यू ए सी इंचार्ज प्रो सुगंधा तिवारी एवं प्रो अलका श्रीवास्तव, भूगोल विभाग प्रभारी डॉ संगीता सिरोही, डॉ शशि बाला सिंह, डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा श्रीमती श्वेता गोंड, कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव, भूगोल विभाग की लैब असिस्टेंट श्रीमती आकांक्षा अस्थाना आदि का सक्रिय सहयोग सराहनीय रहा।

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चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में बड़ी जब्ती की

चुनाव आयोग के अधीन एजेंसियों ने महाराष्ट्र, झारखंड और उप-चुनावों में चल रहे चुनावों में मतदाताओं को किसी भी तरह के प्रलोभन से बचाने के लिए 558 करोड़ रुपये की नकदी, मुफ्त सामान, शराब, ड्रग्स और कीमती धातुएं जब्त की हैं। चुनावों की घोषणा के बाद से अकेले महाराष्ट्र में ही करीब 280 करोड़ रुपये की जब्ती हुई है। झारखंड से अब तक 158 करोड़ रुपये की जब्ती हुई है।

दोनों चुनावी राज्यों में संयुक्त जब्ती 2019 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 3.5 गुना अधिक है, जब महाराष्ट्र में 103.61 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई थी, जबकि झारखंड में यह 18.76 करोड़ रुपये थी। नीचे दी गई तालिका में जब्ती का विवरण दिया गया है, जिसमें मुफ़्त सामान 40% से अधिक है।

राज्य नकद (रु.

करोड़)

शराब (रु.

करोड़)

दवाइयां (रु.

करोड़)

बहुमूल्य धातुएं (रु.

करोड़)

मुफ्त उपहार (करोड़ रु. में) कुल (रु.

करोड़)

महाराष्ट्र 73.11 37.98 37.76 90.53 42.55 281.93
झारखंड 10.46 7.15 8.99 4.22 127.88 158.7
उपचुनाव- 14 राज्य 8.9 7.63 21.47 9.43 70.59 118.01
कुल 92.47 52.76 68.22 104.18 241.02 558.64

*06.11.2024 तक की जब्ती

सीईसी राजीव कुमार ने पहले सभी अधिकारियों को चुनाव में किसी भी तरह के प्रलोभन के प्रति आयोग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बारे में निर्देश दिए थे। उन्होंने अवैध शराब, ड्रग्स, मुफ्त सामान और नकदी के वितरण और आवाजाही पर लगाम लगाने के लिए कई एजेंसियों से संयुक्त टीमें बनाने को भी कहा। हाल ही में, 2 चुनावी राज्यों और उनके पड़ोसी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सीएस, डीजीपी, आबकारी आयुक्तों और प्रवर्तन एजेंसियों के साथ एक बैठक के दौरान, श्री राजीव कुमार ने अंतर-राज्यीय सीमाओं पर आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने पर जोर दिया, साथ ही एजेंसियों को व्यापक रोकथाम के लिए जब्ती के बैकवर्ड लिंकेज स्थापित करने का भी निर्देश दिया।

झारखंड के गढ़वा जिले में शराब जब्त की गई और 1.32 करोड़ रुपये मूल्य की नशीली दवा इफेड्रिन जब्त की गई, जिसका मूल्य अकोला जिला पुलिस की अपराध शाखा ने बताया।

पृष्ठभूमि

प्रत्येक जिले के साथ नियमित अनुवर्ती कार्रवाई और समीक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और सटीक डेटा व्याख्या का उपयोग और प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी के कारण अब जब्ती में यह महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। ईसीआई के चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली (ईएसएमएस) के साथ अवरोधों और जब्ती की वास्तविक समय रिपोर्टिंग ने आयोग और एजेंसियों द्वारा व्यय निगरानी पर नियमित और सटीक समीक्षा की है। दोनों राज्यों (महाराष्ट्र -91 और झारखंड -19) के 110 विधानसभा क्षेत्रों में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिन्हें अधिक केंद्रित निगरानी के लिए व्यय संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।

आयोग का cVIGIL ऐप भी चुनाव आचार संहिता उल्लंघनों को चिन्हित करने के लिए नागरिकों के हाथों में एक प्रभावी उपकरण रहा है। विधानसभा चुनाव और उपचुनावों की घोषणा के बाद से, आज तक cVigil ऐप के माध्यम से 9681 शिकायतों का समाधान किया गया है। शिकायतों के निपटान की दर 98% से अधिक रही है, जिसमें से 83% से अधिक शिकायतों का समाधान 100 मिनट से कम समय में किया गया। cVigil उपयोगकर्ता के अनुकूल और उपयोग में आसान एप्लीकेशन है, जो सतर्क नागरिकों को जिला नियंत्रण कक्ष, रिटर्निंग अधिकारी और फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों से जोड़ता है। इस ऐप का उपयोग करके, नागरिक तुरंत किसी भी चुनाव संबंधी उल्लंघन की घटना की रिपोर्ट कर सकते हैं और 100 मिनट की समयसीमा के भीतर कार्रवाई की जाती है।

मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रलोभनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि राजनीतिक दलों के वैध अनुरोधों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए ताकि समान अवसर मिल सके। इस संबंध में, SUVIDHA ऐप ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की काफी मदद की है। चल रहे चुनावों में महाराष्ट्र से 8546 और झारखंड से 6317 सहित 18,045 अभियान संबंधी अनुरोधों को मंजूरी दी गई। आयोग ने अपने SUVIDHA ऐप को भी अपग्रेड किया है, जिससे दलों और उम्मीदवारों को SUVIDHA मोबाइल ऐप के माध्यम से भी अभियान संबंधी अनुमतियों के लिए आवेदन करने का अधिकार मिला है, जो पहले केवल वेब पोर्टल के माध्यम से ही संभव था।

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भारत सरकार और एडीबी ने उत्तराखंड में जलापूर्ति, स्वच्छता, शहरी गतिशीलता और अन्य सेवाओं में सुधार के लिए 200 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज उत्तराखंड राज्य में जलापूर्ति, स्वच्छता, शहरी गतिशीलता और अन्य सेवाओं के स्तर को बेहतर बनाने के लिए 200 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

उत्तराखंड जीवन-यापन सुधार परियोजना के लिए ऋण समझौते पर सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एडीबी की ओर से भारत में इंडिया रेजिडेंट मिशन की निदेशक सुश्री मियो ओका ने हस्ताक्षर किए।

सुश्री मुखर्जी ने कहा कि यह परियोजना भारत सरकार के शहरी विकास एजेंडे के साथ-साथ शहरी सेवाओं में विस्तार के लिए उत्तराखंड सरकार की पहल के अनुरूप है। इसका उद्देश्य शहरों में रहने की स्थितियों को बेहतर बनाना और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

सुश्री मियो ने कहा, “इस परियोजना का उद्देश्य ऐसे शहरी बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है जो बाढ़ और जलवायु और पर्यावरणीय में हो रहे परिवर्तन के कारण भूस्खलन जैसे जोखिमों से निपटने में सक्षम हो और उत्तराखंड की आबादी की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों सुनिश्चित हो सके। यह परियोजना प्रबंधन, जलवायु और आपदा-रोधी योजना, अपने स्रोत से राजस्व सृजन और लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए राज्य एजेंसियों में क्षमता निर्माण भी करेगी।”

उत्तराखण्ड के आर्थिक केंद्र हल्द्वानी में यह परियोजना परिवहन, शहरी गतिशीलता, जल निकासी, बाढ़ प्रबंधन और सभी सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाएगी। इसके अतिरिक्त, इससे कुशल और जलवायु-अनुकूल जल आपूर्ति प्रणालियों को विकसित करके चार शहरों- चंपावत, किच्छा, कोटद्वार और विकासनगर में जल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा।

परियोजना के तहत हल्द्वानी में, 16 किलोमीटर लंबी जलवायु-अनुकूल सड़कों का निर्माण किया जाएगा, आधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जाएगी, साथ ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएगी। आपदा के समय शहर में बचाव के लिए बाढ़ प्रबंधन में सुधार के लिए 36 किलोमीटर लंबी वर्षा जल निकासी तथा सड़क किनारे नालियों का निर्माण किया जाएगा और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाएगी। लोगों को सार्वजनिक सेवाएं और बेहतर ढंग से मुहैया कराने के लिए हरित-प्रमाणित प्रशासनिक परिसर तथा बस टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा।

अन्य चार शहरों में, इस परियोजना का लक्ष्य स्मार्ट वाटर मीटर, 26 ट्यूबवेल, नए जलाशयों और 3.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र के निर्माण के साथ 1,024 किलोमीटर लंबी जलवायु-अनुकूल पाइपलाइनें बिछाकर प्रत्येक घर तक जल पहुंचाना है। विकासनगर में सीवेज शोधन सुविधाओं द्वारा स्वच्छता के दायरे को बढ़ाया जाएगा, जिससे लगभग 2,000 घरों को लाभ होगा।

इस परियोजना के माध्यम से बस चालान, टिकटिंग और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों के रख-रखाव से आजीविका चलाने के कौशल के प्रशिक्षण जैसी पहल महिलाओं के लिए की जाएगी। जल आपूर्ति प्रणालियों की निगरानी में महिलाओं की भूमिका के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना के तहत जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवाओं के संचालन और प्रबंधन में कमजोर परिवारों को शामिल करते हुए महिलाओं में क्षमता निर्माण किया जाएगा।

यूरोपीय निवेश बैंक 191 मिलियन डॉलर की राशि से इस परियोजना को समानांतर आधार पर सह-वित्तपोषित कर रहा है।

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कैबिनेट ने 2024-25 में वेज एंड मीन्स एडवांस को इक्विटी में परिवर्तित करके भारतीय खाद्य निगम में 10,700 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कार्यशील पूंजी के लिए 10,700 करोड़ रुपये की इक्विटी डालने को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना और देश भर के किसानों का कल्याण सुनिश्चित करना है। यह रणनीतिक कदम किसानों को समर्थन देने और भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एफसीआई ने 1964 में 100 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी और 4 करोड़ रुपये की इक्विटी के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। एफसीआई के संचालन में कई गुना वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप फरवरी, 2023 में अधिकृत पूंजी 11,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 21,000 करोड़ रुपये हो गई। वित्तीय वर्ष 2019-20 में एफसीआई की इक्विटी 4,496 करोड़ रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर 10,157 करोड़ रुपये हो गई। अब, भारत सरकार ने एफसीआई के लिए 10,700 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण इक्विटी को मंजूरी दी है, जो इसे वित्तीय रूप से मजबूत करेगी और इसके परिवर्तन के लिए की गई पहलों को एक बड़ा बढ़ावा देगी।

एफसीआई न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खाद्यान्नों की खरीद, रणनीतिक खाद्यान्न भंडार के रखरखाव, कल्याणकारी उपायों के लिए खाद्यान्नों के वितरण और बाजार में खाद्यान्नों की कीमतों के स्थिरीकरण के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इक्विटी का निवेश एफसीआई की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि वह अपने अधिदेश को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके। एफसीआई फंड की आवश्यकता से जुड़ी कमी को पूरा करने के लिए अल्पकालिक उधार का सहारा लेता है। इस निवेश से ब्याज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी और अंततः भारत सरकार की सब्सिडी कम होगी।

एमएसपी आधारित खरीद और एफसीआई की परिचालन क्षमताओं में निवेश के प्रति सरकार की दोहरी प्रतिबद्धता, किसानों को सशक्त बनाने, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और राष्ट्र के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सहयोगात्मक प्रयास का प्रतीक है।

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