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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया; प्रत्येक नागरिक से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 28,000 से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा नागरिकों सहित विविध समूहों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। इस अवसर के सामूहिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सामूहिक संकल्प का अवसर बताया। श्री मोदी ने कहा, “आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस पहल की व्यापक प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ है।’विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि देश की युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और नशे जैसी आत्म विनाशकारी आदतों से पूरी तरह मुक्त हो। श्री मोदी ने कहा, “आज जब राष्ट्र ने विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, तब यह आवश्यक है कि देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, आत्मविश्वास से भरपूर हो और नशे जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहे।”

अभियान की शुरुआत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि यह पहल पिछले वर्ष पवित्र भूमि काशी से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक स्पष्टता, आध्यात्मिक ऊर्जा और गहरे सांस्कृतिक समर्पण के अनूठे समन्वय से प्रेरित इस अभियान का व्यापक विस्तार हुआ है। श्री मोदी ने कहा, “काशी घोषणा के तहत 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों और अनेक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से शुरू हुई यह जन कल्याणकारी पहल अब सफलतापूर्वक एक राष्ट्रीय परियोजना बन गई है।”

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” का शुभारंभ, प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के केंद्र में हमेशा भारत के युवाओं को रखा है और उन्हें अमृत काल की प्रेरक शक्ति के रूप में देखा है।

इस विजन से प्रेरित होकर सरकार ने युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, मार्गदर्शन और राष्ट्र सेवा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेरा युवा भारत (MY Bharat) को एकल खिड़की मंच के रूप में स्थापित किया है, जिसके माध्यम से देशभर के 2.23 करोड़ से अधिक युवा जुड़े हैं। लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा नशा मुक्त भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि मेरा युवा भारत (MY Bharat) निरंतर युवा भागीदारी के माध्यम से इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि 100 सप्ताह की कार्य योजना और प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से तैयार काशी घोषणा ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध देशव्यापी जन आंदोलन की नींव रखी है। अभियान के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन भागीदारी ने स्वच्छ भारत, फिट इंडिया और कई अन्य राष्ट्रीय अभियानों को जन आंदोलन की सफलता में परिवर्तित किया है, उसी प्रकार “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” भी लाखों-करोड़ों भारतीय युवाओं को स्वस्थ, नशा मुक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, 26 राज्यों के राज्यपालों और 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लिया।

नशा विरोधी शपथ लेने वाले लाखों युवाओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके नशामुक्त जीवन जीने के संकल्प और अपने विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा समुदायों में नशा मुक्त जीवन का संदेश सक्रिय रूप से प्रसारित करने के प्रयासों की प्रशंसा की। अभियान की महत्वाकांक्षी 100 सप्ताह की कार्य योजना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रत्येक आगामी रविवार को कला, संस्कृति, खेल और ध्यान से संबंधित विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे नए प्रतिभागियों को लगातार जोड़ा जा सकेगा।

श्री मोदी ने कहा, “आने वाले 100 रविवार निश्चित रूप से पूरी तरह नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम साबित होंगे।”

छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सदस्यों और मेरा युवा भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की विशाल ऑनलाइन सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं द्वारा प्रदर्शित जागरूकता, संवेदनशीलता और गंभीर प्रतिबद्धता पर गर्व व्यक्त किया।

युवा पीढ़ी को भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा वर्ष 2047 तक देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

श्री मोदी ने कहा, “देश के उज्ज्वल भविष्य और अपने स्वयं के जीवन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप स्वयं को नशे से पूरी तरह मुक्त रखें।”

संशोधन के बाद यह संस्करण PIB राजभाषा शैली के अनुरूप है। इसमें तकनीकी शब्दावली, सरकारी भाषा और मूल अंग्रेजी अर्थ का मिलान कर दिया गया है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विनाशकारी प्रभावों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने आज के युवाओं की स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खेल और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों का उल्लेख किया और चेतावनी दी कि नशे की लत किस प्रकार एकाग्रता को भटकाती है तथा सपनों को नष्ट कर देती है। परिवारों पर पड़ने वाले इसके गंभीर दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे माता-पिता के सपने टूटते हैं और बुजुर्गों को प्रतिदिन पीड़ा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने समाज पर पड़ने वाले इसके व्यापक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “जब किसी परिवार या समाज में यह विनाश होता है, तो पूरे राष्ट्र की समग्र शक्ति भी कमजोर हो जाती है।”

युवाओं को नशीले पदार्थों की भ्रामक प्रकृति से आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों से मिलने वाला क्षणिक नशे का प्रभाव अंततः उनके करियर और पारिवारिक जीवन के लिए स्थायी नुकसान का कारण बनता है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक गुरुओं के गहन ज्ञान, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का भी उल्लेख शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से चेतना को प्रभावित करने वाले पदार्थों को स्वीकार नहीं किया है। श्री मोदी ने कहा, “हमें किसी भी परिस्थिति में नशे को किसी भी प्रकार की सामाजिक स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।”

नशे की लत से मुक्ति के लिए उपलब्ध व्यापक सहायता प्रणालियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक सहयोग, योग, ध्यान और आधुनिक पुनर्वास केंद्र नशे की आदत को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने परिवारों से सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी गलत चिंताओं के बजाय चिकित्सा सहायता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने घरों में खुले संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि संवेदनशील बच्चे नशे के जाल में फंसने से बच सकें। श्री मोदी ने कहा, “यदि कोई युवा गलती से नशे की लत में पड़ गया है, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उसके सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।”

शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से विशेष अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने नियमित पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों के खतरों से संबंधित चर्चाओं को सक्रिय रूप से शामिल करें और अपने परिसरों में नशा विरोधी विशेष अभियान शुरू करें। नशे की लत से उबर रहे लोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से उनके प्रति सम्मान और दूसरा अवसर देने का आह्वान किया तथा उनके अतीत से जुड़े कलंक को पूरी तरह अस्वीकार करने की बात कही। श्री मोदी ने कहा, “नशे की लत से संघर्ष कर बाहर आने वाले युवा कमजोर नहीं होते; वे सच्चे योद्धा होते हैं, जिनका अद्भुत साहस ही उनकी वास्तविक पहचान है।”

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि इस महत्वपूर्ण लड़ाई में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने देश भर में नशीले पदार्थों के खिलाफ की गई अभूतपूर्व कड़ी कार्रवाई, हजारों करोड़ रुपये मूल्य की जब्ती और नशीले पदार्थों के तस्करों तथा कारोबारियों के खिलाफ बढ़ती गिरफ्तारियों का उल्लेख किया। युवा पीढ़ी की दृढ़ता पर अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय अभियान अत्यंत सफल होगा। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी ऊर्जा की रक्षा करेंगे और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएंगे।”

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भारत की राष्ट्रपति ने पीबीजी सोल्जरेथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज, 2 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में राष्‍ट्रपति के अंगरक्षक रेजिमेंट द्वारा आयोजित, पीबीजी सोल्जरेथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मिजोरम के राज्‍यपाल, जनरल (सेवानिवृत्‍त) डॉ. वी.के. सिंह भी उपस्‍थित थे। जनरल सिंह इस पहल के संरक्षक हैं। राष्ट्रपति ने इस अवसर की स्‍मृति में एक विशेष डाक आवरण का भी विमोचन किया। यह दौड़ (रेस) दिल्ली छावनी स्‍थित करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित की गई थी।

‘सैनिकों के लिए दौड़ें, सैनिकों के साथ दौड़ें’ की संकल्‍पना पर आधारित ‘सोल्जरेथॉन’ सामान्‍य जनों और सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने का एक विशिष्‍ट मंच है। ‘वास्‍तविक नायक – भारत के सशस्त्र बलों का समर्थन’ थीम पर आधारित यह आयोजन हमारे सैनिकों के समर्पण, साहस और बलिदान को सम्मान अर्पित करता है और नागरिकों को इस बात के लिए प्रोत्‍साहित करता है कि वे इसमें सक्रियतापूर्वक भाग लेकर उनके प्रति एकजुटता दिखाएं।

सोल्जरेथॉन रेस तीन श्रेणियों में आयोजित की जाती है – 3 किमी, 5 किमी और 10 किमी। सोल्जरेथॉन से प्राप्‍त राशि का उपयोग सशस्‍त्र बलों के पैराप्लेजिक रिहैबिलिटेशन सेंटर की सहायता करने और लड़ाई में हताहत हुए सैनिकों के परिवारजनों के कल्याण, आदि के लिए किया जाता है। पीबीजी सोल्जरेथॉन का उदेश्य इस बल के घोड़ों और सैनिकों की सहायता करना है।

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जवाहर नवोदय विद्यालय, कानपुर नगर में कक्षा-6 प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 07 अगस्त तक बढ़ी*

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर  (जिला सूचना कार्यालय) नगर, दिनांक 02 अगस्त, 2026* पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सरसौल, कानपुर नगर के प्रभारी प्राचार्य आर. के. सिंह ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा-2027 के अंतर्गत कक्षा-6 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 07 अगस्त, 2026 कर दी गई है। ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे निर्धारित तिथि तक अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न की जाएगी। प्रथम चरण में अभ्यर्थी को राज्य, जनपद, विकास खंड, विद्यालय का नाम, वास्तविक पता, अभ्यर्थी का नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर तथा जन्मतिथि सहित आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इसके पश्चात पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से द्वितीय चरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।
द्वितीय चरण में अभ्यर्थी का नवीनतम पासपोर्ट आकार का फोटो, हस्ताक्षर, माता-पिता के हस्ताक्षर तथा कक्षा-5 में अध्ययनरत होने का विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सभी विवरण एवं आवश्यक अभिलेख सफलतापूर्वक अपलोड होने के बाद आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रख लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रवेश हेतु अभ्यर्थी की जन्मतिथि 01 मई, 2015 से 31 जुलाई, 2017 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के मध्य होनी चाहिए। अभ्यर्थी www.navodaya.gov.in तथा https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा शनिवार, 28 नवम्बर, 2026 को आयोजित की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, जिससे किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एवं अभिभावक उपरोक्त वेबसाइटों का अवलोकन कर सकते हैं।

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डी जी कॉलेज में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत : संकल्प अभियान” का आयोजन को सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु प्रेरित करना था। इस अवसर पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें प्रो रुचिमिता पांडे ने युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों जैसे मेडिटेशन सत्र, जागरूकता कार्यक्रम, कला प्रतियोगिता , मेडिटेशन, खेलकूद एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अभियान के शुभारंभ का सजीव प्रसारण छात्राओं ने उत्साहपूर्वक देखा तथा नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं उपस्थित जनसमूह को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगी तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगी। इस अवसर पर “Say No to Drugs, Say Yes to Life” तथा “युवा शक्तिशाली बनेगी, विकसित भारत गढ़ेगी” जैसे प्रेरणादायक संदेशों का प्रसार किया गया। 

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. संगीता सिरोही (कार्यक्रम अधिकारी, एन.एस.एस.) के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम तथा निदेशक (स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम) प्रो. अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, माय भारत वॉलंटियर्स, एन.सी.सी. इंचार्ज प्रो. शुभ्रा राजपूत, प्रेंजर प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ कुमुद लता, डॉ उमा अवस्थी, डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ साधना सिंह, डॉ सुषमा शर्मा, डॉ वंदना द्विवेदी, डॉ पिंकी द्विवेदी, डॉ दीपाली सक्सेना, समस्त एनएसएस समिति एवं सांस्कृतिक समिति का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार ग्वालियर में भारत का पहला दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टीएमजेड) स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे

भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) और मध्य प्रदेश सरकार 30 जुलाई 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र (टीएमजेड) के प्रथम चरण की स्थापना के लिए मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी सहित अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।

ग्वालियर में भारत के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की स्थापना देश के घरेलू दूरसंचार विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस पहल का उद्देश्य निवेश आकर्षित करके, नवाचार को बढ़ावा देकर, स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण को प्रोत्साहित करके और अगली पीढ़ी के दूरसंचार उत्पादों और समाधानों के विकास में तेजी लाकर दूरसंचार उपकरणों और संबद्ध प्रौद्योगिकियों के लिए विश्व स्तरीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र से दूरसंचार उपकरण निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और दूरसंचार मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के पर्याप्त अवसर भी उत्पन्न होंगे, क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ेगी और भारत दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से ग्वालियर में टीएमजेड चरण-1 की स्थापना की दिशा में सहयोग के ढांचे को औपचारिक रूप दिया जाएगा, जिससे भारत की दूरसंचार विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र-राज्य साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

इस कार्यक्रम में भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और दूरसंचार क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी और हितधारक एक साथ आएंगे।

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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 10,177 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, साथ ही अन्य प्रमुख वित्तीय मानकों में लगातार सुधार किया है

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 10,177 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, साथ ही अन्य प्रमुख वित्तीय मानकों में लगातार सुधार किया है

भारत सरकार नियमित रूप से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करती है।

पिछले चार वित्तीय वर्षों में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में आरआरबी की निम्नलिखित समीक्षाएं की गई हैं:

क्रम संख्या राष्ट्रीय/क्षेत्रीय स्तर तारीख और स्थान
1. राष्ट्रीय स्तर 07.07.2022 नई दिल्ली में
2. उत्तर-पूर्वी आरआरबी 21.07.2023 अगरतला में
3. दक्षिणी आरआरबी 04.08.2023 चेन्नई में
4. उत्तरी आरआरबी 30.08.2023 नई दिल्ली में
5. राष्ट्रीय स्तर 19.08.2024 नई दिल्ली में
6. पश्चिमी-मध्य आरआरबी 22.08.2024 उदयपुर में
7. उत्तर-पूर्वी आरआरबी 30.09.2024 ईटानगर में
8. दक्षिणी आरआरबी 09.11.2024 बेंगलुरु में
9. पूर्वी आरआरबी 29.11.2024 पटना में
10. कर्नाटक ग्रामीण बैंक 16.10.2025 बेल्लारी में

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 10,177 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, साथ ही अन्य प्रमुख वित्तीय मानकों में लगातार सुधार किया है

इसके अलावा अनुवर्ती ( फ़ॉलो-अप ) कार्रवाई के रूप में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) विभिन्न स्तरों पर आरआरबी और प्रायोजक बैंकों के साथ समय-समय पर  और नियमित बैठकें करता है।

समीक्षा बैठकों के एजेंडा आइटम में अन्य बातों के साथ-साथये शामिल हैं:

  1. वित्तीय मापदंडों पर आरआरबी के प्रदर्शन की समीक्षा।
  2. प्रौद्योगिकी उन्नयन पर ज़ोर।
  3. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पोर्टफोलियो पर ध्यान।
  4. कृषि-संबद्ध, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्रों के लिए ऋण विविधीकरण का महत्व।
  5. ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में वित्तीय समावेश का विस्तार।

हाल के वर्षों में आरआरबी की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरआरबी ने 10,177 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया। आरआरबी ने पूंजी से जोखिम भारित संपत्तियां अनुपात (सीआरएआर) जमा, अग्रिम, गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (सीडी अनुपात) आदि जैसे प्रमुख वित्तीय मानकों में भी लगातार सुधार दिखाया है। पिछले तीन वर्षों में प्रमुख वित्तीय पैमानों पर आरआरबी का प्रदर्शन इस प्रकार है:

क्रम संख्या मुख्य वित्तीय पैरामीटर वित्त वर्ष 2023-24 वित्त वर्ष 2024-25 वित्त वर्ष
1. कुल जमा राशि
(करोड़ रुपये में)
6,59,815 7,13,800 7,68,621
2. बकाया लोन

(करोड़ रुपये में)

4,71,384 5,24,163 5,78,349
3. क्रेडिट-डिपॉज़िट अनुपात

(सीडी  अनुपात) (%)

71.4 73.4 75.2
4. सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति

(जीएनपीए) (%)

6.1 5.4 5.3
5. शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति

(एनएनपीए) (%)

2.4 2.0 2.1
6. शुद्ध लाभ

(करोड़ रुपये में)

7,571 6,820 10,177
7. शुद्ध मूल्य
(करोड़ रुपये में)
56,780 63,927 74,086
8. जोखिम भारित परिसंपत्तियों के लिए पूंजी अनुपात (सीआरएआर) (%) 14.2 14.4 15.0

स्रोत: नाबार्ड

सरकार ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में वित्तीय समावेश को बढ़ाने की दिशा में आरआरबी की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा करती है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी विभिन्न वित्तीय समावेश योजनाओं के लक्ष्य डीएफएस द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और समय-समय पर निगरानी की जाती है।

वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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गगनयान मिशन के लिए विकास संबंधी गतिविधियां संचालित की गई

गगनयान मिशन के लिए विकास संबंधी निम्नलिखित गतिविधियां संचालित की गई हैं:
  • मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (एचएलवीएम3): सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा उनके जमीनी परीक्षण  सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं।
  • ऑर्बिटल मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण पूरा कर लिया गया है। पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ईसीएलएसएस) का इंजीनियरिंग मॉडल विकसित कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, डेसीलरेशन प्रणाली, क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग प्रणाली, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम तथा एंड-टू-एंड एवियोनिक्स का विकास एवं सफल परीक्षण भी पूरा कर लिया गया है।
  • क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस): पांच प्रकार की मोटरों का विकास कर उनका स्थिर परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। क्रू एस्केप सिस्टम की सभी संरचनाओं का निर्माण और प्रमाणीकरण भी पूरा कर लिया गया है।
  • बुनियादी ढांचे की स्थापना: ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केन्द्र, गगनयान नियंत्रण सुविधा, क्रू प्रशिक्षण सुविधा तथा दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक संशोधनों का कार्य पूरा कर लिया गया है।
  • परीक्षण मिशन: क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) के उड़ान के दौरान प्रमाणीकरण के लिए पहला टेस्ट व्हीकल मिशन (टीवी-डी1) सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अतिरिक्त, डेसीलरेशन प्रणाली के प्रमाणीकरण के लिए सिम्युलेटेड क्रू मॉड्यूल के साथ इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-01 (आईएडीटी-01) और इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-02 (आईएडीटी-02) भी सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं। टीवी-डी2 मिशन को पूरा करने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं।
  • उड़ान संचालन एवं संचार नेटवर्क : ग्राउंड नेटवर्क का विन्यास अंतिम रूप से तैयार कर लिया गया है। आईडीआरएसएस-1 के फीडर स्टेशन और स्थलीय संचार लिंक स्थापित किए जा चुके हैं। पारस्परिक सहयोग के लिए अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • क्रू रिकवरी संचालन: रिकवरी के लिए आवश्यक संसाधनों को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा क्रू रिकवरी की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

इसके समानांतर, गगनयान मिशन के लिए विकसित नई प्रणालियों के प्रदर्शन और प्रमाणीकरण हेतु विभिन्न ग्राउंड क्वालिफिकेशन परीक्षण किए जा रहे हैं।

गगनयात्रियों ने रूस के ग्लावकोसमोस में सामान्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वर्तमान में बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में गगनयान मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण जारी है।

पहले मानव रहित मिशन जी-1 को पूरा करने की दिशा में विभिन्न गतिविधियां प्रगति पर हैं। एचएलवीएम3 के सभी चरण—एचएस200, एल110 और सी32—तथा क्रू एस्केप सिस्टम की मोटरें उड़ान के लिए तैयार हैं। क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की सभी प्रणालियां विकसित की जा चुकी हैं। इन दोनों मॉड्यूलों का संयोजन, एकीकरण और परीक्षण अंतिम चरण में है तथा समेकित सिमुलेशन भी किए जा रहे हैं।

गगनयान मिशनों का प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र एसएचएआर के द्वितीय प्रक्षेपण परिसर से किया जाएगा। इसके लिए एकीकरण, परीक्षण और प्रक्षेपण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न अवयवों, सुविधाओं और प्रणालियों की योजना बनाकर उनका विकास एवं स्थापना की गई है। ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा (ओएमपीएफ) का निर्माण किया गया है, जहां क्रू मॉड्यूल (सीएम), सर्विस मॉड्यूल (एसएम) तथा क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस), जिसमें सीईएस के ठोस मोटर भी शामिल हैं, की तैयारी की जाएगी। एकीकरण, पहुंच तथा परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए द्वितीय वाहन संयोजन भवन (एसवीएबी) में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। एसवीएबी टर्मिनल कक्ष (एसवीटीआर) तथा लॉन्च पैड टर्मिनल कक्ष–गगनयान (एलटीआर-जी) में परीक्षण सुविधाओं और इंटरफेस को उन्नत बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, उप-संयोजन एवं चरण तैयारी सुविधाओं (एचएस200, एल110-जी, सी25-जी और ईबी) के लिए परीक्षण प्रणालियों का भी विस्तार किया गया है। मानवयुक्त मिशनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए द्वितीय प्रक्षेपण परिसर के अम्बिलिकल टॉवर पर क्रू एक्सेस आर्म, बबल लिफ्ट तथा जिप लाइन प्रणाली भी स्थापित की गई हैं।

पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस) अनेक परस्पर जुड़ी प्रणालियों का एक समेकित तंत्र है और मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी है। इसका उपयोग पूरे मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल के भीतर तापमान, आर्द्रता, वायुदाब तथा कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित रखते हुए रहने योग्य वातावरण बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली का विकास इसरो द्वारा स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। वर्तमान में यह प्रणाली विकासात्मक परीक्षणों के चरण में है। इसके सीमित संस्करण का उड़ान प्रदर्शन मानव रहित गगनयान मिशनों में किए जाने की योजना है।

यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी

प्रभाव आकलन भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केन्‍द्र (इन-स्‍पेस) द्वारा किया गया है। प्रभाव आकलन पर प्रारंभिक टिप्पणी अनुलग्नक-I के रूप में संलग्न है।

वर्ष 2026 में कुल 187 मिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश की जानकारी मिली है। अब तक इन-स्‍पेस द्वारा गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को विभिन्न अंतरिक्ष कार्यों के लिए कुल 108 आधिकारिक अनुमतियां प्रदान की जा चुकी हैं। इनमें उपग्रह/पेलोड की स्थापना एवं संचालन, अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों का प्रक्षेपण आदि शामिल हैं।

इन-स्‍पेस द्वारा जारी “अंतरिक्ष गतिविधियों की मंजूरी (एनजीपी) के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के कार्यान्वयन के लिए मानदंड, दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाओं” के अंतर्गत अनुमति के लिए प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन इस दृष्टि से किया जाता है कि निजी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देते समय रणनीतिक, सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हितों सहित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त, इन-स्‍पेस हितधारकों के परामर्श से “भारतीय संस्थाओं द्वारा भारत में संचालित अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए सुरक्षा एवं संरक्षा दिशानिर्देश” तैयार करने पर भी कार्य कर रहा है।

सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए विभिन्न पहल और योजनाएं शुरू की हैं। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए निम्नलिखित पहल और नीतियां लागू की गई हैं:

  1. भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 लागू की गई है, जिसमें सभी हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं।
  2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति उदार बनाई गई है।
  3. इन-स्‍पेस से अनुमति प्राप्त करने के लिए मानदंड, दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाएं लागू की गई हैं।
  4. इसरो की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एनजीई के लिए रियायती मूल्य नीति लागू की गई है।
  5. 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की गई है।
  6. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और उसके व्यावसायीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष की स्थापना की गई है।
  7. विचारों को उत्पाद में विकसित करने के लिए इन-स्‍पेस सीड फंड योजना शुरू की गई है।
  8. निजी क्षेत्र को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच तथा मार्गदर्शन (मेंटरशिप) उपलब्ध कराया जा रहा है।
  9. कौशल संबंधी आवश्यकताओं की कमी को दूर करने के लिए स्किल पहल शुरू की गई है।
  10. अंतरिक्ष प्रणालियों के परीक्षण और सिमुलेशन की सुविधाएं किफायती लागत पर उपलब्ध कराने के लिए एक तकनीकी केन्‍द्र की स्थापना की गई है।
  11. इसरो से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाया गया है।
  12. पीओईएम प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष उपयोगिता का परीक्षण करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
  13. स्पेस एडॉप्शन अवेयरनेस वर्कशॉप (एसएएडब्‍ल्‍यू), इंडस्ट्री मीट्स तथा अन्य प्रचारात्मक आयोजनों के माध्यम से व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इसके अलावा, 17 स्टार्ट-अप्स को अंतरिक्ष से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां करने की मंज़ूरी दी गई है।

स्पेस टेक्नोलॉजी के कमर्शियल इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने ये योजनाएं/पहल शुरू करने की घोषणा की है:

  1. अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति लागू की गई है।
  2. गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को इसरो की सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए रियायती मूल्य निर्धारण नीति लागू की गई है।
  3. अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के वेंचर कैपिटल फंड की स्थापना की गई है।
  4. स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विकास, प्रदर्शन और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष (टीएएफ) की शुरुआत की गई है।
  5. निजी क्षेत्र के विकास को समर्थन देने के लिए इसरो के अवसंरचना, तकनीकी विशेषज्ञता और मार्गदर्शन तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है।
  6. अंतरिक्ष क्षेत्र की बदलती कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास संबंधी पहलें शुरू की गई हैं।
  7. अंतरिक्ष प्रणालियों के किफायती परीक्षण, सत्यापन और सिमुलेशन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक तकनीकी केन्‍द्र की स्थापना की गई है।
  8. ii. व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के उद्योगों को हस्तांतरण की व्यवस्था की गई है।
  9. पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के सत्यापन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  10. स्वदेशी उपग्रह प्लेटफॉर्म क्षमताओं के विकास तथा उपग्रह निर्माण में तेजी लाने के लिए “सैटेलाइट बस ऐज़ अ सर्विस (एसबीएएएस) “ पहल शुरू की गई है।
  11. घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने, निवेश आकर्षित करने तथा एकीकृत अंतरिक्ष औद्योगिक इकोसिस्‍टम के विकास के लिए राज्य सरकारों को समर्पित अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टरों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के माध्यम से कई सक्रिय कदम उठाए हैं, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। इस दिशा में उठाए गए विभिन्न कदम निम्नलिखित हैं:

नीतिगत एवं नियामक सुधार:

  1. भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 का कार्यान्‍वयन.
  2. उदारीकृत एफडीआई नीति और अनुकूल नियामकों, दिशानिर्देशों का विकास।

बुनियादी ढांचा विकास:

  1. गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को पहुंच प्रदान करते हुए इसरो की सुविधाओं का विस्तार।
  2. साझा अवसंरचना सहायता के साथ इन-स्‍पेस तकनीकी केन्‍द्र तथा अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टरों की स्थापना।

कौशल विकास:

  1. उद्योगोन्मुख अंतरिक्ष पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों के लिए इमर्शन कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण संबंधी पहलें।
    1. अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रत्येक प्रमुख पहलू को शामिल करते हुए 14 अल्पकालिक कौशल विकास पाठ्यक्रमों का डिजाइन और विकास।

पूंजी तक पहुंच:

  1. 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड।
  2. प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रौद्योगिकी अपनाओ कोष।
  3. स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण तथा अनुसंधान एवं विकास सहायता को प्रोत्साहन।

प्रौद्योगिकी एवं क्षमता विकास:

  1. एसएसएलवी सहित इसरो की प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को बढ़ावा।
  2. स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को प्रोत्साहन।

मांग सृजन :

  1. पृथ्वी अवलोकन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट कार्यक्रम।
  2. विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को अपनाने को बढ़ावा देना।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं वैश्विक बाजार तक पहुंच:

  1. द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से अग्रणी अंतरिक्ष देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ बनाना।
  2. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष आयोजनों, व्यावसायिक मंचों तथा बिजनेस-टू-बिजनेस सहभागिताओं में भागीदारी को समर्थन देकर वैश्विक बाजार तक पहुंच को सुगम बनाना।
  3. निर्यात, प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उभरते हुए अंतरिक्ष बाजारों के साथ सहयोग का विस्तार करना।

यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

अनुलग्‍नक – I

परिणाम

परिपक्व होती निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

जून 2020 में किए गए सुधारों के तहत अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के छह वर्ष बाद इसके परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सक्रिय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2014 में केवल 1 से बढ़कर आज 400 से अधिक हो गई है। निजी निवेश 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने प्रक्षेपण तथा कक्षा (ऑर्बिटल) संचालन क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। दो कंपनियों ने उप-कक्षीय (सब-ऑर्बिटल) प्रक्षेपण यान का सफल प्रक्षेपण किया है (नवम्‍बर 2022 और मई 2024 में)। एनजीई ने 30 से अधिक उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया है तथा पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (पीओईएम) जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लगभग 45 पेलोड अंतरिक्ष में संचालित किए जा रहे हैं।

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: निवेश में वृद्धिनिवेशकों का व्यापक आधार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

निजी पूंजी में न केवल उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि निवेशकों का आधार भी व्यापक हुआ है। संचयी वित्तपोषण वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, वर्ष 2023-24 में बढ़कर 348.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया और 31 मार्च 2026 तक यह 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। साथ ही, निवेश का स्वरूप शुरुआती चरण के सीड निवेश से आगे बढ़कर विकास चरण की ओर स्थानांतरित हुआ है।

भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्‍टम को गति देने वाले निवेशकों का आधार अब सम्‍पन्‍न निवेशकों तक सीमित नहीं रहा है। अब संप्रभु संपदा कोष, वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधक और रणनीतिक कॉर्पोरेट निवेशक भी निवेशकों की सूची में प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस परिपक्व होते निवेश परिदृश्य के परिणामस्वरूप स्काईरूट एयरोस्पेस, जीआईसी और ब्लैकरॉक के निवेश सहयोग के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र की पहली यूनिकॉर्न कंपनी बनी। वहीं, दिगंतारा ने जापान की एसबीआई इन्वेस्टमेंट की भागीदारी के साथ 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हासिल किया, जबकि पिक्सेल को वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी अल्फाबेट का समर्थन प्राप्त हुआ।

यह गति वर्ष 2026 में और तेज हुई। अग्निकुल कॉसमॉस ने इक्विटी निवेश के रूप में 2.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार से ऐतिहासिक 25 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त किया। गैलेक्सआई ने वर्ष की शुरुआत में कई निवेश चरणों के माध्यम से 11 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाई, जबकि ध्रुव स्पेस ने मई में 105 करोड़ रुपये (12.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश प्राप्त कर अपनी उपग्रह समूह क्षमताओं के तीव्र विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। हालांकि, ये चर्चित सफलता की कहानियां अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक संभावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन वे देश के कहीं अधिक व्यापक, जीवंत और तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष इकोसिस्‍टम की केवल एक छोटी-सी झलक भर हैं।

निजी अंतरिक्ष मिशनों का एक वर्ष: देश और विदेश में सहयोग तथा बढ़ता विश्वास

पिछले एक वर्ष के दौरान भारतीय कंपनियों ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभावी प्रदर्शन किया है और अनेक अवसरों पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर सफल मिशन संचालित किए हैं। जनवरी 2025 में पिक्सेल, दिगांतारा और एक्सडीलिंक्स स्पेसलैब्स ने एक साथ सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश किया। इसके बाद अगस्त 2025 में पिक्सेल ने फाल्कन-9 के माध्यम से तीन और उपग्रह प्रक्षेपित कर अपने छह-उपग्रहों वाले फायरफ्लाई उपग्रह समूह के प्रथम चरण को पूरा किया, जो वर्तमान में सेवा में उपलब्ध सर्वाधिक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाला वाणिज्यिक हाइपरस्पेक्ट्रल प्रणाली है। ध्रुव स्पेस ने अपने थायबोल्ट-3 और लीप-1 मिशनों का सफल संचालन किया तथा एमओआई-1 और लाचित जैसे सहयोगात्मक मिशनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त बेलाट्रिक्स, गैलेक्सआई, ग्रहा स्पेस, हेक्स-20, टेकमी2स्पेस, ऑर्बिटएड सहित अनेक अन्य कंपनियों ने भी निजी क्षेत्र की ऑर्बिटल क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया। प्रक्षेपण यान और प्रणोदन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्निकुल कॉसमॉस ने अपने 3डी-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया, जबकि स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसरो की एक सुविधा में अपने विक्रम रॉकेट के लिए ठोस ईंधन मोटर का सफल परीक्षण किया।

पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष में अपने पेलोड और प्रौद्योगिकियों के सत्यापन के लिए एक अत्यधिक सुलभ और कम लागत वाला मंच उपलब्ध कराया है। पीओईएम-4 मॉड्यूल में इसरो तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रयोगों के साथ-साथ गैलेक्सआई, बेलाट्रिक्स, टेकमी2स्पेस, पियरसाइट स्पेस, मनस्तु स्पेस और एनस्पेस टेक के पेलोड भी शामिल थे।

भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की व्यावसायिक पहुंच भी लगातार बढ़ रही है। दिगंतारा अमेरिका और यूरोप में अपने कार्यालय स्थापित कर रही है तथा सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम की अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ कार्य कर रही है। वहीं पिक्सेल विभिन्न महाद्वीपों के ग्राहकों को हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा उपलब्ध करा रही है। इन-स्‍पेस ने 45 से अधिक देशों के साथ कार्य संबंध स्थापित किए हैं और विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ तीन सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। देश में, इन-स्‍पेस की अर्थ ऑब्जर्वेशन–पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (ईओ-पीपीपी) पहल के तहत पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, सैटश्योर और पियरसाइट स्पेस ने एलाइड ऑर्बिट्स के रूप में साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निजी निवेश से पांच वर्षों में 12 बहु-मोडल उपग्रहों वाला भारत का पहला निजी स्वामित्व वाला पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह विकसित किया जाएगा, जो देश को उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाला कानून के अधीन डेटा उपलब्ध कराएगा।

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पराग कणों से पता चला हड़प्पा सभ्यता क्यों सिकुड़ गई

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार कम हो गया और सिंधु घाटी सभ्यता (आईवीसी) या हड़प्पा सभ्यता के सिंधु नदी और घग्गर-हाकरा नदी के किनारे रहने वाले लोग पूर्व गांगेय क्षेत्रों में पलायन कर गए। इस पलायन का कारण लगभग 5100 और 4000 कैलेंडर वर्ष पूर्व (बीपी) के बीच कमजोर भारतीय ग्रीष्म मानसून (आईएसएम) था, जहां वर्तमान 1950 सीई है।

भारत के गढ़वाल हिमालय में वनस्पति की गतिशीलता और उससे संबंधित जल-जलवायु परिवर्तनशीलता को समझना, उत्तर होलोसीन (मेघालय युग; 4.2 हजार वर्ष पूर्व से वर्तमान तक) के दौरान मानसूनी परिवर्तनशीलता को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है। हिमालय से प्राप्त होलोसीन झील अभिलेख (नाचिकेता ताल, छराका ताल, देवर ताल, देवरिया ताल) सीमित हैं क्योंकि इनमें रेडियोकार्बन कालक्रम ठीक से निर्धारित नहीं हैं, जिनमें जलाशय प्रभाव, आयु संबंधी बड़ी त्रुटियां और मोटे तौर पर नमूने लेने की प्रक्रिया शामिल है।

इसलिए, इस शोध की कमी को दूर करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) ने गढ़वाल हिमालय के देवरिया ताल (झील) से प्राप्त एक अच्छी तरह से दिनांकित (10 एएमएस 14 सी तिथियां) तलछट कोर पर जांच की, ताकि मध्य होलोसीन से लेकर वर्तमान तक फैले वनस्पति गतिशीलता, जल-जलवायु परिवर्तन और आईएसएम परिवर्तनशीलता का उच्च रिज़ॉल्यूशन (शताब्दी से सहस्राब्दी पैमाने तक) पराग-आधारित रिकॉर्ड प्रदान किया जा सके।

पराग और बीजाणुओं का उपयोग अतीत की वनस्पति गतिशीलता और समकालीन जलवायु परिवर्तन के पुनर्निर्माण के लिए स्थापित उपकरणों के रूप में किया जाता रहा है।

त्रापा बीज के खोलों पर प्राप्त दस एएमएस रेडियोकार्बन ( 14सी ) तिथियों ने देवरिया ताल से प्राप्त तलछट कोर के कालक्रम को विकसित करने में सहायता की। रेडियोकार्बन डेटिंग का कार्य अमेरिका में जॉर्जिया विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एप्लाइड आइसोटोप स्टडीज (सीएआईएस) में किया गया और तिथियों को ऑक्सकैल 4.355 का उपयोग करके कैलेंडर वर्षों में परिवर्तित किया गया।

डॉ. मोहम्मद फ़िरोज़ क़मर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने लगभग 4250 कैलेंडर वर्ष बीपी के आसपास ओक/पाइन अनुपात में अचानक वृद्धि पाई, जो 4200 कैलेंडर वर्ष बीपी पर अचानक, अल्पकालिक शुष्क जलवायु स्थिति के स्थल से पहले से प्रलेखित मौलिक और तलछटी साक्ष्य के अनुरूप है, जिसे विश्व स्तर पर “4.2 हजार घटना” (का = हजार) के रूप में जाना जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि इससे सिंधु घाटी सभ्यता (आईवीसी) या हड़प्पा सभ्यता के सिंधु नदी और घग्गर-हाकरा नदी के किनारे बसे लोगों का पलायन हुआ। वे घरेलू और कृषि कार्यों के लिए पूर्वी गांगेय मैदानी इलाकों के नए क्षेत्रों में चले गए, क्योंकि थार रेगिस्तान के किनारे नदी प्रणाली में आने वाली नियमित मौसमी बाढ़ समाप्त हो गई थी। इस प्रकार, शोधकर्ताओं ने हड़प्पा सभ्यता के संकुचन का कारण भारत के गढ़वाल हिमालय में 4.2 हजार वर्ष पूर्व होलोसीन काल में हुए अचानक जलवायु परिवर्तन (एसीसी) को बताया।

वैज्ञानिकों ने ठंडी-शुष्क जलवायु और कमजोर समुद्री सूक्ष्म भूभाग (आईएसएम) का कारण अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (आईटीसीजेड) के दक्षिण की ओर खिसकने को बताया, जो उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों में सौर विकिरण में कमी के परिणामस्वरूप होता है। 4.2 हजार वर्ष पहले आईएसएम के अचानक कमजोर होने का संबंध अल-नीनो के मजबूत चरण और हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) के प्रबल ऋणात्मक अवस्था में परिवर्तन से जोड़ा गया है।

सबसे स्पष्ट होलोसीन शीतलन घटनाओं में से एक के रूप में, 4.2 हजार वर्ष पुरानी घटना निम्न अक्षांश क्षेत्र में आईएसएम के साथ-साथ अल नीनो, अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (आईटीसीजेड), हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी), और ग्रीष्मकालीन सौर विकिरण (एसआई) जैसे विभिन्न प्रेरक कारकों के बीच दूरसंचार की जांच करने के लिए एक प्राकृतिक प्रयोग प्रदान करती है।

चित्र 1. अध्ययन क्षेत्र का मानचित्र जिसमें अध्ययन स्थल देवरिया ताल को प्रमुखता से दर्शाया गया है। ऊपरी पैनल में राष्ट्रीय संदर्भ दिया गया हैजिसमें नई दिल्लीचंडीगढ़ और श्रीनगर की स्थिति शामिल है। निचले पैनल में अध्ययन स्थल के आसपास की स्थानीय स्थलाकृति को दर्शाया गया है

 

डॉ. डेविड एफ. पोरिंचू (जॉर्जिया विश्वविद्यालय, अमेरिका), डॉ. अनूप कुमार सिंह (लखनऊ विश्वविद्यालय; लखनऊ, अब बाबू, लखनऊ में) और डॉ. बहादुर सिंह कोटलिया (कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल; अब दिवंगत) के सहयोग से किए गए अध्ययन में विभिन्न अवधियों के दौरान अन्य वैश्विक जलवायु घटनाओं के संकेतों पर जोर दिया गया है।

शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि रोमन वार्म पीरियड (आरडब्ल्यूपी: 2500-1450 कैलेंडर वर्ष बीपी) के दौरान, जब उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र गर्म था (सौर परिवर्तनशीलता या आंतरिक उत्तरी अटलांटिक परिवर्तनशीलता के कारण), आईएसएम मजबूत था (जिसके परिणामस्वरूप उच्च कृषि उत्पादकता हुई और “भारत के स्वर्ण युग” का उदय हुआ)। इसकी वजह संभवतः बढ़े हुए सौर विकिरण और आईटीसीजेड के संबंधित उत्तर की ओर खिसकना रहा होगा।

मध्यकालीन जलवायु विसंगति (एमसीए: 1050–650 कैलेंडर वर्ष बीपी ) के दौरान, आईटीसीजेड के उत्तर की ओर खिसकने से तीव्र आईएसएम (सूक्ष्म भूगर्भीय भूगर्भीय तरंगदैर्ध्य) उत्पन्न हुई। अन्य पहचाने गए कारकों में अल नीनो-दक्षिणी दोलन ( ईएनएसओ) द्वारा नियंत्रित सौर विकिरण में उतार-चढ़ाव, सकारात्मक तापमान विसंगतियां, सूर्य धब्बों की बढ़ी हुई गतिविधि, उच्च सौर विकिरण और उत्तरी अटलांटिक में ऊष्माभंगुर परिसंचरण की शक्ति में परिवर्तन शामिल थे। इसके अतिरिक्त, अरब सागर में हवा की बढ़ी हुई शक्ति और भारत में अधिक नमी की स्थिति भी इसी अवधि के दौरान देखी गई।

चित्र 2. अ) समय के सापेक्ष क्वेरकस और पाइनस की सापेक्ष बहुलता का आरेख। ब) आर्टेमिसिया और कैनाबिस सैटिवाअमरेंथेसीब्रैसिकेसीअल्टरनैंथेराकैरियोफिलेसी और कॉन्वोलवुलेसी से युक्त सिनैंथ्रोपिक परागकणों की सापेक्ष बहुलता और सेरेलिया की सापेक्ष बहुलता। ग) ओक/पाइन परागकण अनुपात और पोएसी की सापेक्ष बहुलता। घ) ओक/पाइन परागकण अनुपात और एक्सआरएफ-व्युत्पन्न मौलिक डेटा के पीसीए अक्ष स्कोर (नीडरमैन एट अल., 2021)

छवि कॉपीराइट पैलियोजियोग्राफीपैलियोक्लाइमेटोलॉजीपैलियोइकोलॉजी (एल्सवियर), 2026

 

लघु हिमयुग (एलआईए: 650–100 कैलेंडर वर्ष पूर्व; 1350-1850 ईस्वी ) के दौरान आईएसएम कमजोर था, जिसका संबंध उत्तरी अटलांटिक दोलन (एनएओ) के सकारात्मक चरण के दौरान मध्य पूर्व में एशियाई पछुआ जेट स्ट्रीम और पछुआ हवाओं के तीव्र होने और ईएनएसओ के गर्म चरण के दौरान एशियाई जेट स्ट्रीम के निचले अक्षांशों की ओर पलायन से हो सकता है। एलआईए के दौरान आईएसएम के सबसे कमजोर चरण का संबंध ठंडे उत्तरी गोलार्ध के दौरान भूमध्य रेखा के पार उत्तर की ओर ऊर्जा प्रवाह में वृद्धि के कारण आईटीसीजेड के दक्षिण की ओर खिसकने से है। ईएनएसओ आईटीसीजेड की उत्तर की ओर गति को सीमित करता है, जिससे ग्रीष्म मानसून की शुरुआत में देरी होती है और वर्षा में कमी आती है।

पैलियोजियोग्राफी पैलियोक्लाइमेटोलॉजी पैलियोइकोलॉजी में प्रकाशित यह शोध, वर्तमान आईएसएम-प्रभावित जलवायु परिस्थितियों के साथ-साथ भविष्य के संभावित जलवायु रुझानों और अनुमानों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाता है और नीति निर्माताओं को सामाजिक आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने वाली वैज्ञानिक रूप से सूचित रणनीतियों को विकसित करने के लिए अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

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विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान का शुभारम्भ 2 अगस्त 2026 को होगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नशा मुक्त भारत और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 2 अगस्त 2026 को “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” का शुभारम्भ करेंगे। इसमें देश के युवाओं से जन भागीदारी की भावना के जरिए मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व करने का आह्वान किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के आह्वान पर ‘एमवाई भारत’ के नेतृत्व में एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन के रूप में यह अभियान शुरू किया जाएगा। इसमें देश भर के युवाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। इस पहल का उद्देश्य जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और निरंतर जन भागीदारी को बढ़ावा देकर नशामुक्त भारत के निर्माण के लिए युवा नागरिकों को एक सामूहिक राष्ट्रीय मिशन में एकजुट करना है।

प्रधानमंत्री के संबोधन से प्रेरित होकर, देश भर में लगभग 10,000 स्थानों पर एक साथ शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाएंगे, जिसमें एक करोड़ से अधिक युवा नशा मुक्ति की शपथ लेंगे, नशा मुक्त समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेंगे और नशा मुक्त युवा स्वयंसेवकों के रूप में राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को समर्पित करेंगे।

इस अभियान में माय भारत स्वयंसेवकों, भारत राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवकों, युवा क्लबों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, गैर-सरकारी संगठनों, औद्योगिक संघों और 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिलेगी, जिससे यह देश में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक बन जाएगा।

पारंपरिक जागरूकता कार्यक्रमों के विपरीत, विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान को 100 सप्ताह के सतत जन भागीदारी आंदोलन के रूप में परिकल्पित किया गया है। अगले 100 सप्ताहों तक प्रत्येक रविवार को स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करने, सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने और युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक राष्ट्र निर्माण की दिशा में निर्देशित करने के लिए देश भर में युवाओं के नेतृत्व में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

साप्ताहिक गतिविधियों में खेल प्रतियोगिताएं, पैदल मार्च, ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कला और रचनात्मक प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक (स्ट्रीट प्ले), जागरूकता अभियान और अन्य सामुदायिक सहभागिता पहल शामिल होंगी। इनका उद्देश्य सकारात्मक सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देते हुए समाज को मादक द्रव्यों के सेवन के हानिकारक प्रभावों को लेकर संवेदनशील बनाना है।

निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने और अनुकरणीय प्रयासों को मान्यता देने के लिए, अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वयंसेवकों और संगठनों को 50वें, 75वें और 100वें सप्ताह के पड़ावों पर सम्मानित किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक सेवा और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बल मिलेगा।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने देश भर के युवाओं और सामाजिक संगठनों से राष्ट्रीय हित में प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करने और इस ऐतिहासिक आंदोलन में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया है। लाखों युवाओं, संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के सामूहिक प्रयासों से, इस अभियान का उद्देश्य एक राष्ट्रव्यापी सामाजिक आंदोलन का निर्माण करना है जो लोगों को नशे के सेवन को त्यागने और एक स्वस्थ, मजबूत तथा अधिक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करे।

विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें मादक पदार्थों के विरुद्ध लड़ाई को नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से संचालित जन आंदोलन में परिवर्तित करने की बात कही गई है। “विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति नशा मुक्त युवा हैं” के संदेश से प्रेरित यह अभियान इस राष्ट्रीय संकल्प को हर गांव, कस्बे और शहर तक पहुंचाने का प्रयास है ताकि विकसित भारत 2047 की ओर देश की यात्रा को और मजबूती मिल सके।

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