भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 22 मार्च दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा दिनांक 22 मार्च, 2025 को आजाद नगर स्थित लल्लन पुरवा बस्ती में कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ एन एस एस गीत गाकर हुआ। शिविर के प्रथम सत्र में छात्राओं ने रैली निकालकर बस्ती वासियों को प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संदेश देते हुए बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक, पाउच पॉलिथीन यह सभी पर्यावरण के लिए अत्यधिक खतरा है। हमें इनका प्रयोग करने से बचना चाहिए तथा पर्यावरण की रक्षा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करना चाहिए।
शिविर के दूसरे सत्र में वॉलिंटियर्स ने पोषक आहार के तत्वों के बारे में विशेष रूप से जानकारी देते हुए उन्हें अपने खाने में सम्मिलित करने का महत्व बताया तथा बस्ती के बच्चों को इस अवसर पर वॉलिंटियर्स के द्वारा गन्ने के जूस का वितरण किया गया। राष्ट्रगान गाकर शिविर का समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ अंजना श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा।
देश प्रदेश
डीपीआईआईटी और किंड्रिल ने भारत के विनिर्माण और आईटी स्टार्टअप इकोसिस्टम में नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए साझेदारी की
इस अवसर पर बोलते हुए डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव श्री संजीव ने कहा कि यह सहयोग भारत में नवाचार-संचालित स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किंड्रिल की वैश्विक विशेषज्ञता और उद्यम समाधानों का लाभ उठाकर, डीपीआईआईटी का लक्ष्य स्टार्टअप्स को उनके परिचालन को बेहतर करने और उद्योगों में तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
इस साझेदारी के अंतर्गत, स्टार्टअप को मेंटरशिप, इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग और बाजार पहुंच के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, जिससे वे ऑटोमोटिव, फार्मास्यूटिकल्स, बीएफएसआई, तेल व गैस और सरकारी सेवाओं जैसे उद्योगों में उद्यम इकोसिस्टम में अपने समाधानों को एकीकृत करने में सक्षम होंगे। डिजिटल उत्पाद, स्टार्टअप, एआई-संचालित इनोवेटर्स और उद्यमियों का सहयोग करने के लिए किंड्रिल समर्पित कार्यक्रमों को संस्थागत रूप देगा।
किंड्रिल स्टार्टअप के विकास में सहायता करेगा, उनके नवाचारों को उद्यम समाधानों में एकीकृत करेगा और उन्हें बड़े पैमाने के व्यावसायिक ग्राहकों से जोड़ेगा। स्टार्टअप को उत्पाद विकास, बाजार की तत्परता, साइबर सुरक्षा तन्यकशीलता और उद्यम परिनियोजन पर मार्गदर्शन मिलेगा। किंड्रील ग्राहक अनुभव और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के लिए सलाहकार सत्र और उद्योग कार्यशालाएं आयोजित करेगा। स्टार्टअप इंडिया और डीपीआईआईटी के सहयोग से, किंड्रिल ज्ञान साझाकरण, नीतिगत अंतर्दृष्टि और सरकारी प्रोत्साहनों तक पहुंच प्रदान करेगा। स्टार्टअप को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने समाधानों को बढ़ाने और नए बाजारों का पता लगाने के बारे में भी मार्गदर्शन मिलेगा।
डीपीआईआईटी निदेशक डॉ. सुमीत कुमार जारंगल और किंड्रिल के प्रतिनिधि ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र के तौर पर स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है। डीपीआईआईटी के स्टार्टअप सहायता ढांचे को किंड्रील की उद्यम क्षमताओं के साथ एकीकृत करके, सहयोग एक संरचित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा जहां स्टार्टअप फल-फूल सकते हैं, नवाचार कर सकते हैं और आर्थिक विकास में योगदान दे सकते हैं।
भारत एक अग्रणी वैश्विक पर्यटन स्थल
पर्यटन मंत्रालय देश के प्रमुख और कम ज्ञात पर्यटन स्थलों तक सड़क और हवाई संपर्क सहित सुधार करने के लिए नियमित रूप से संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय करता है।
मंत्रालय ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और विविध आकर्षणों की खोज में रुचि रखने वाले यात्रियों और हितधारकों के लिए एक व्यापक संसाधन के रूप में 27 सितंबर, 2024 को अतुल्य भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म (आईआईडीपी) का नया संस्करण लॉन्च किया है। आईआईडीपी की नई विशेषताओं में से एक अतुल्य भारत सामग्री हब है – एक व्यापक डिजिटल भंडार, जिसमें भारत में पर्यटन से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाली छवियों, फिल्मों, ब्रोशर और समाचार पत्रों का समृद्ध संग्रह है। यह भंडार विभिन्न प्रकार के हितधारकों के उपयोग के लिए है, जिसमें टूर ऑपरेटर, पत्रकार, छात्र, शोधकर्ता, फिल्म निर्माता, लेखक, प्रभावित करने वाले, सामग्री निर्माता आदि शामिल हैं। आईआईडीपी समकालीन मौसम अपडेट, शहर की खोज और आवश्यक यात्रा सेवाएं प्रदान करके व्यक्तिगत आगंतुक अनुभव प्रदान करेगा।
यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी
अमृत ज्ञान कोष पोर्टल
अमृत ज्ञान कोष पोर्टल निम्नलिखित तरीके से विभिन्न सरकारी विभागों में सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करने में योगदान देता है:
i. शासन संबंधी चुनौतियों के प्रति वास्तविक जीवन, समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण के मूल्यवान उदाहरण के रूप में कार्य करना, जिससे अधिकारी समान मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित कर सकें।
ii. शासन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि प्रदान करना, निरंतर नवाचार को बढ़ावा देना और व्यावहारिक ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देना।
iii. लोक सेवकों को प्रेरित करना, उन्हें अनुकरण करने के लिए सफल शासन मॉडल प्रदान करना तथा लोक सेवा वितरण में सुधार के लिए नवीन रणनीतियों को अपनाना।
iv. आईजीओटी पोर्टल जैसे प्लेटफार्मों पर उनके योगदान को मान्यता देकर सरकारी अधिकारियों के उच्च प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना, लोक सेवकों को उनकी भूमिकाओं में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करना।
अमृत ज्ञान कोष पोर्टल को आईजीओटी (एकीकृत सरकारी ऑनलाइन प्रशिक्षण) प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है, जो मिशन कर्मयोगी पहल के तहत एक प्रमुख डिजिटल शिक्षण उपकरण है जो सरकारी अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सामग्री प्रदान करता है।
सभी सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अमृत ज्ञान कोष के केस स्टडीज को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सरकारी अधिकारियों की समस्या-समाधान और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने टोल प्लाजा शुल्क संग्रह अनियमिताओं के लिए 14 एजेंसियों को प्रतिबंधित किया
इन एजेंसियों के उत्तर संतोषजनक न पाए जाने और अनुबंध समझौते के प्रावधानों के उल्लंघन पर उन्हें दो साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। अनुबंध उल्लंघन के लिए इन एजेंसियों की 100 करोड़ रुपये से अधिक की प्रदर्शन प्रतिभूतियां जब्त कर ली गई हैं और उन्हें भुनाया जा रहा है।
अब इन टोल प्लाजाओं पर निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए एनएचएआई प्रतिबंधित एजेंसियों को सूचित करेगा कि वे अपना कामकाज प्राधिकरण द्वारा नियुक्त नई एजेंसी को सौंपें।
एनएचएआई राजमार्ग संचालन में उच्च मानकों के पालन के लिए प्रतिबद्ध है और कोई भी अनियमितता सहन नहीं की जाएगी। ऐसी टोल एजेंसियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी और उन्हें कठोर दंड के साथ एनएचएआई परियोजनाओं से वंचित किया जाएगा।
रेलवे के बजट में वृद्धि और तेजी से ट्रैक बनने के साथ पूर्वोत्तर में रेलवे की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और भर्ती में उल्लेखनीय प्रगति
देश भर में रेलवे परियोजनाओं/कार्यों के लिए औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के प्रस्ताव/अनुरोध/सुझाव/अभ्यावेदन राज्य सरकारों, संसद सदस्यों, केन्द्र सरकार के मंत्रालयों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, रेलवे की अपनी आवश्यकताओं, संगठनों/रेल उपयोगकर्ताओं आदि द्वारा उठाई गई मांगों के आधार पर रेलवे बोर्ड, क्षेत्रीय रेलवे, डिवीजन कार्यालय आदि सहित विभिन्न स्तरों पर प्राप्त होते हैं। चूंकि ऐसे प्रस्तावों/शिकायतों/सुझावों की प्राप्ति एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए ऐसे अनुरोधों का केन्द्रीकृत संग्रह नहीं रखा जाता है। हालाँकि, इनकी जाँच की जाती है और समय-समय पर व्यवहार्य और उचित पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है।
पिछले 3 वर्षों (2021-22, 2022-23, 2023-24 और चालू वित्तीय वर्ष यानी 2024-25) में, असम राज्य सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में पूरी तरह/आंशिक रूप से पड़ने वाले कुल 2,499 किलोमीटर लंबाई के 21 सर्वेक्षण (17 नई लाइन और 04 दोहरीकरण) को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, 01.04.2024 तक, 18 रेलवे परियोजनाएं (13 नई लाइनें और 05 दोहरीकरण), कुल 1,368 किलोमीटर लंबाई, 74,972 करोड़ रुपये की लागत जो पूरी तरह/आंशिक रूप से असम राज्य सहित उत्तर पूर्व क्षेत्र में आती हैं, योजना और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं, जिनमें से 313 किलोमीटर लंबाई चालू हो गई है और मार्च 2024 तक 40,549 करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है।
कार्य की स्थिति संक्षेप में इस प्रकार है: –
| वर्गीकरण | परियोजनाओं की संख्या | कुल लम्बाई | अधिकृत लम्बाई | मार्च, 2024 तक व्यय |
| (किमी. में) | (किमी. में) | (करोड़ रूपये में) | ||
| नई लाइनें | 13 | 896 | 81 | 34,616 |
| दोहरीकरण | 5 | 472 | 232 | 5,933 |
| कुल | 18 | 1368 | 313 | 40,549 |
सभी रेलवे परियोजनाओं का लागत, व्यय और परिव्यय सहित क्षेत्रवार/वर्षवार विवरण भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराया गया है।
असम राज्य सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में पूर्णतः/आंशिक रूप से आने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य कार्यों के लिए औसत बजट आवंटन इस प्रकार है: –
| अवधि | व्यय |
| 2009-14 | 2,122 करोड़ रूपये/वर्ष |
| 2024-25 | 10,376 करोड़ रूपये (करीब 5 गुना) |
असम राज्य सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में पूर्णतः/आंशिक रूप से आने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कमीशनिंग नीचे दी गई है:
| अवधि | नये ट्रैक चालू | नये ट्रैकों की औसत कमीशनिंग |
| 2009-14 | 333 किमी. | 66.6 किमी./वर्ष |
किसी भी रेलवे परियोजना का पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे राज्य सरकार द्वारा शीघ्र भूमि अधिग्रहण, वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वन मंजूरी, लागत साझाकरण परियोजनाओं में राज्य सरकार द्वारा लागत हिस्सेदारी का जमा करना, परियोजनाओं की प्राथमिकता, गैरकानूनी उपयोग को हटाना, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक स्थितियां, परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति, जलवायु परिस्थितियों के कारण विशेष परियोजना स्थल के लिए एक वर्ष में कार्य महीनों की संख्या आदि।
रेलवे परियोजनाओं के त्वरित अनुमोदन और कार्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों में शामिल हैं (i) गति शक्ति इकाइयों की स्थापना
(ii) परियोजनाओं को प्राथमिकता देना (iii) प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए धन के आवंटन में पर्याप्त वृद्धि (iv) क्षेत्र स्तर पर शक्तियों का हस्तांतरण (v) विभिन्न स्तरों पर परियोजना की प्रगति की बारीकी से निगरानी, और (vi) भूमि अधिग्रहण, वानिकी और वन्यजीव मंजूरी में तेजी लाने और परियोजनाओं से संबंधित अन्य मुद्दों को हल करने के लिए राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित अनुवर्ती कार्रवाई। इससे 2014 से कमीशनिंग की दर में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
(घ) भारतीय रेलवे के आकार, स्थानिक वितरण और परिचालन की गंभीरता को देखते हुए रिक्तियों का होना और भरना एक सतत प्रक्रिया है। नियमित परिचालन, प्रौद्योगिकी में परिवर्तन, मशीनीकरण और नवीन प्रथाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त और उपयुक्त जनशक्ति प्रदान की जाती है। परिचालन और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार रेलवे द्वारा भर्ती एजेंसियों के साथ मांगपत्र जारी करके रिक्तियों को मुख्य रूप से भरा जाता है।
कोविड-19 के कारण लगाए गए प्रतिबंधों में ढील के बाद, 2020 से 2022 के दौरान 2.37 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों वाली दो प्रमुख परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की गई हैं।
| परीक्षा | उम्मीदवार | शहर | केन्द्र | दिन | शिफ्ट |
| एल2 – एल6 | 1.26 करोड़ | 211 | 726 | 68 | 133 |
| एल1 | 1.1 करोड़ | 191 | 551 | 33 | 99 |
इन परीक्षाओं के आधार पर रेलवे में 130581 उम्मीदवारों की भर्ती की गई है।
आरआरबी परीक्षाएँ काफी तकनीकी प्रकृति की होती हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर कर्मियों और संसाधनों को जुटाना और जनशक्ति को प्रशिक्षित करना शामिल है। रेलवे ने इन सभी चुनौतियों पर काबू पाया और सभी निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से भर्ती सफलतापूर्वक पूरी की।
पूरी प्रक्रिया के दौरान पेपर लीक या इसी तरह की किसी गड़बड़ी की घटना नहीं हुई। 2004-2005 से 2013-2014 के दौरान भारतीय रेलवे में की गई भर्तियों और 2014-2015 से 2023-2024 के दौरान की गई भर्तियों का ब्यौरा इस प्रकार है: –
| अवधि | भर्तियां * |
| 2004-2005 से 2013-2014 | 4.11 लाख |
| 2014-2015 से 2023-2024 | 5.02 लाख |
* लेवल-1 और सुरक्षा संबंधी पदों सहित।
इसके अलावा, व्यवस्था में सुधार के तौर पर रेल मंत्रालय ने ग्रुप ‘सी’ के विभिन्न श्रेणियों के पदों पर भर्ती के लिए 2024 से वार्षिक कैलेंडर प्रकाशित करने की व्यवस्था शुरू की है। वार्षिक कैलेंडर की शुरुआत से उम्मीदवारों को निम्नलिखित तरीके से लाभ होगा:
• उम्मीदवारों के लिए अधिक अवसर;
• हर साल पात्र उम्मीदवारों को अवसर;
• परीक्षाओं की निश्चितता;
• भर्ती प्रक्रिया, प्रशिक्षण और नियुक्तियों में तेज़ी
तदनुसार, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में सहायक लोको पायलट, तकनीशियन, उप-निरीक्षक, कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर (जेई)/ डिपो सामग्री अधीक्षक (डीएमएस)/रासायनिक एवं धातुकर्म सहायक (सीएमए), पैरामेडिकल श्रेणियां, गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियां (स्नातक), गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियां (स्नातक से नीचे), मंत्रिस्तरीय एवं पृथक श्रेणियां और लेवल-1 के पदों को भरने के लिए जनवरी से दिसम्बर 2024 के दौरान 92116 रिक्तियों के लिए दस केन्द्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं (सीईएन) अधिसूचित की गई हैं।
चार अधिसूचनाओं के लिए, 25.11.2024 से 30.12.2024 तक कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) पूरे हो चुके हैं। विवरण इस प्रकार है: –
| परीक्षा | उम्मीदवार | शहर | केन्द्र | दिन | शिफ्ट |
| एएलपी (18,799 रिक्तियां) के पद के लिए प्रथम चरण सीबीटी | 18,40,347 | 156 | 346 | 5 | 15 |
| आरपीएफ-एसआई पद के लिए सीबीटी (452 रिक्तियां) | 15,35,635 | 143 | 306 | 5 | 15 |
| जेई/डीएमएस/सीएमए के पद के लिए प्रथम चरण सीबीटी (7,951 रिक्तियां) | 11,01,266 | 146 | 323 | 3 | 9 |
| तकनीशियन के पद के लिए सीबीटी (14,298 रिक्तियां) | 26,99,892 | 139 | 312 | 9 | 27 |
इसके अलावा, कांस्टेबल के पद के लिए आरपीएफ सीईएन संख्या 02/2024 (4208 रिक्तियां) के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट 02.03.2025 से शुरू हो गया है। सहायक लोको पायलट के पद के लिए सीईएन संख्या 01/2024 के लिए द्वितीय चरण कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी-II) 19.03.2025 और 20.03.2025 को निर्धारित है।
यह जानकारी केन्द्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने के लिए सरकार के कदम
वर्ष 2022 में संशोधित राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 में अन्य बातों के साथ-साथ पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से बदल कर इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2025-26 कर दिया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने जून 2022 में पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो ईएसवाई 2021-22 के दौरान लक्ष्य से पांच महीने पहले है। 28 फरवरी 2025 तक इथेनॉल का मिश्रण ईएसवाई 2022-23 में 12.06 प्रतिशत, ईएसवाई 2023-24 में 14.60 प्रतिशत और ईएसवाई 2024-25 में 17.98 प्रतिशत हो गया है। अभी तक सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रण को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा तैयार भारत में इथेनॉल मिश्रण के लिए 2020-25 के रोडमैप के अनुसार, 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई20) का उपयोग करने से ई10 के लिए डिज़ाइन किए गए और ई20 के लिए कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में मामूली कमी आती है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) ने समिति को सूचित किया था कि इंजन हार्डवेयर और ट्यूनिंग में संशोधन के साथ, मिश्रित ईंधन के कारण दक्षता में होने वाली हानि को कम किया जा सकता है। समिति की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ई20 ईंधन के साथ वाहन के प्रदर्शन, इंजन के पुर्जों के खराब होने या इंजन ऑयल के खराब होने में कोई बड़ी समस्या नहीं देखी गई।
जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति द्वारा घोषित अधिशेष चरण के दौरान खाद्यान्नों के उपयोग की अनुमति देती है। यह नीति मकई, कसावा, सड़े हुए आलू, टूटे हुए चावल जैसे क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न, मक्का, गन्ने का रस और गुड़, कृषि अवशेष (चावल का भूसा, कपास का डंठल, मकई के दाने, चूरा, खोई आदि) जैसे फीडस्टॉक के उपयोग को भी बढ़ावा देती है और प्रोत्साहित करती है। इथेनॉल उत्पादन के लिए अलग-अलग फीडस्टॉक के उपयोग की सीमा हर साल बदलती रहती है, जो उपलब्धता, लागत, आर्थिक व्यवहार्यता, बाजार की मांग और नीतिगत प्रोत्साहन जैसे कारकों से प्रभावित होती है। इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस, उसके उप-उत्पादों, मक्का आदि का कोई भी डायवर्जन संबंधित हितधारकों के परामर्श से सावधानीपूर्वक कैलिब्रेट किया जाता है।
इसके अलावा, सरकार ने 2014 से, ईबीपी कार्यक्रम के तहत किसानों और इथेनॉल उत्पादकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कई उपाय किए हैं। इसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए फीडस्टॉक का विस्तार करना, ईबीपी कार्यक्रम के तहत इथेनॉल की खरीद के लिए एक प्रशासित मूल्य तंत्र को लागू करना, ईबीपी कार्यक्रम के लिए इथेनॉल पर जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत करना, इथेनॉल के अंतरराज्यीय और अंतरराज्यीय आंदोलन को सुविधाजनक बनाने के लिए उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन करना, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा इथेनॉल खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना और पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को 2030 से बदलकर इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2025-26 कर दिया।
यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
जे एन यू प्रोफ़ेसर विवेक कुमार को मिली विश्व रैंकिंग
> एडी साइंटिफिक इंडेक्स की वैश्विक सूची में प्रोफ़ेसर विवेक कुमार का नाम, देश विदेश के छात्रों ने ज़ाहिर की ख़ुशी
> जेएनयू में नंबर 1, भारत में 11 और एशिया में 134 वीं रेंक हांसिल की है प्रोफ़ेसर विवेक कुमार ने
> कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका सहित , जर्मनी, कनाडा, श्रीलंका, ब्रिटिश विश्वविद्यालय के विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं विवेक कुमार

भारतीय स्वरूप संवाददाता लखनऊ/नई दिल्ली। देश के शीर्ष जवाहर लाला नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली (जेएनयू) के विश्वविख्यात समाज शास्त्री व वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर विवेक कुमार को वैश्विक स्तर की एडी साइंटिफिक इंडेक्स-2025 की रैंकिंग में शामिल किया गया है। प्रोफ़ेसर विवेक कुमार ने अपने शोधपरक अध्यन और उत्कृष्ट अध्यापन के बलबूते जेएनयू में नंबर 1 की रेंक हांसिल की है, इसी के साथ भारत के इंडेक्स में शामिल 247 विज्ञानियों में उन्हें 11 वीं और एशिया में 1,792 समाज विज्ञानियों के बीच उन्हें 134 वीं रेंक प्राप्त हुई है। इसी कड़ी में दुनिया में समाज विज्ञानियों के बीच 3,081 वीं रैंक प्राप्त हुई है। रैंकिंग के लिए पिछले 6 वर्षों के गूगल स्कॉलर के समाज शास्त्र विज्ञानियों की तकनीकी डाटा के आधार पर यह रैंक तय की गई है। जिसमे प्रोफ़ेसर विवेक कुमार को रिकॉर्ड 820 साइटेशन प्राप्त हुए है। वैश्विक स्तर पर मिली रैंकिंग के लिए देश विदेश से उन्हें बधाई मिल रही है।
कौन हैं जेएनयू प्रोफ़ेसर विवेक कुमार
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लालबाग लखनऊ निवासी प्रोफ़ेसर डॉक्टर विवेक कुमार दिल्ली की जेनयू में समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष हैं। वर्ष 2001 में उन्होंने जेएनयू ज्वाइन किया था। इससे पहले वर्ष 1996 में टाटा इंस्टीट्यूट और सोशल साइंसेज़ में बतौर सहक प्रोफ़ेसर अध्यापन सेवन दीं थीं। प्रोफ़ेसर विवेक कुमार अमेरिका की शीर्ष यूनिवर्सिटी कोलंबिया विश्वविद्यालय के विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं। इसी के साथ कैलगिरी विश्वविद्यालय कनाडा, टोरेंटो विश्व विद्यालय, इम्वोल्ट विश्वविद्यालय जर्मनी, ब्रिटिश विश्वविद्यालय सहित श्रीलंका के विश्व विद्यालय में बतौर विजिटिंग प्रोफ़ेसर सैकड़ों छात्रों को अपने ज्ञान से लाभान्वित किया है।
जहाँ पढ़े, वहीँ पर हेड और डिपार्टमेंट
प्रोफ़ेसर डॉक्टर विवेक कुमार ने ने जेएनयू से ही समाज शास्त्र की पढ़ाई की है और यहीं पर बतौर सहायक प्रोफ़ेसर पद से अध्यापन कर शुरूकर यहीं समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष पद पर तैनात हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की ख्याति को अपने शोधपरक ज्ञान से लगातार दृढ़ता से मजबूती दी है। प्रोफ़ेसर विवेक कुमार के मार्गदर्शन में 106 विद्यार्थियों ने शोध अध्यन किया है वहीँ 58 ने शोध में डॉक्टरेट के उपाधि प्राप्त की है। प्रोफ़ेसर विवेक कुमार कहते हैं कि मुझे साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है। मैं अपने छात्रों, सहकर्मियों, और समाज को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं अपने शोधकर्ताओं जिन्होंने ने मुझे अपने कार्यों में उद्धृत किया उनका भी आभारी हूँ।
Read More »प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कार्यान्वयन
देश में खरीफ 2016 सीजन से शुरू की गई पीएमएफबीवाई सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध है। यह राज्यों के साथ-साथ किसानों के लिए भी स्वैच्छिक है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी जोखिम धारणा और वित्तीय विचारों आदि को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत सदस्यता लेने के लिए स्वतंत्र हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने एक या अधिक मौसमों में इस योजना को लागू किया है। वर्तमान में 23 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश इस योजना का कार्यान्वयन कर रहे हैं।
बीमा मॉडल का चयन, पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से बीमा कंपनियों का चयन, किसानों का नामांकन, स्वीकार्य दावों की गणना के लिए फसल उपज/फसल हानि का आकलन जैसे सभी प्रमुख कार्य संबंधित राज्य सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों और संबंधित बीमा कंपनी की संयुक्त समिति द्वारा किए जा रहे हैं। इस योजना के उचित कार्यान्वयन के लिए प्रत्येक हितधारक की भूमिका और जिम्मेदारियां योजना के परिचालन दिशानिर्देशों में परिभाषित की गई हैं।
बीमा कंपनियों द्वारा योजना के परिचालन दिशानिर्देशों के तहत निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिकांश दावों का निपटारा किया जाता है। हालांकि, पीएमएफबीवाई के कार्यान्वयन के दौरान, बीमा कंपनियों के खिलाफ दावों का भुगतान न करने और/या देरी से भुगतान करने, बैंकों द्वारा बीमा प्रस्तावों को गलत/देरी से प्रस्तुत करने के कारण दावों का कम भुगतान करने, उपज के आंकड़ों में विसंगति और इसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार और बीमा कंपनियों के बीच विवाद, राज्य सरकार के हिस्से की धनराशि प्रदान करने में देरी, बीमा कंपनियों द्वारा पर्याप्त कर्मियों की तैनाती न करने आदि के बारे में कुछ शिकायतें पहले प्राप्त हुई थीं, जिन्हें योजना के प्रावधानों के अनुसार उचित रूप से दूर किया गया।
चूंकि यह योजना राज्य सरकार द्वारा कार्यान्वित की जाती है, इसलिए बीमित किसानों के दावों से संबंधित शिकायतों सहित शिकायतों के समाधान के लिए, योजना के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों में स्तरीकृत शिकायत निवारण तंत्र अर्थात जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति (डीजीआरसी), राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) का प्रावधान किया गया है। इन समितियों को परिचालन दिशा-निर्देशों में उल्लिखित विस्तृत अधिदेश दिए गए हैं, ताकि शिकायतों की सुनवाई की जा सके और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका निपटान किया जा सके।
शिकायत निवारण तंत्र को और बेहतर बनाने के लिए, कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (केआरपीएच) विकसित की गई है। अखिल भारतीय टोल फ्री नंबर 14447 शुरु किया गया है और इसे बीमा कंपनियों के डेटाबेस से जोड़ा गया है, जहाँ किसान अपनी शिकायतें/मुद्दे उठा सकते हैं। इन शिकायतों/मुद्दों के समाधान के लिए समयसीमा भी तय की गई है।
विभाग सभी हितधारकों के साथ साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस, व्यक्तिगत बैठक तथा राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलनों के माध्यम से दावों के समय पर निपटान सहित बीमा कंपनियों के कामकाज की नियमित निगरानी कर रहा है।
प्राप्त अनुभव, विभिन्न हितधारकों के विचारों के आधार पर तथा बेहतर पारदर्शिता, जवाबदेही, किसानों के दावों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और योजना को अधिक किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से, सरकार ने समय-समय पर पीएमएफबीवाई के परिचालन दिशा-निर्देशों को व्यापक रूप से संशोधित किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना के तहत पात्र लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचे।
यह जानकारी आज लोकसभा में लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने दी।
अमरीकी टैरिफ का प्रभाव
इस्पात एक विनियमन-मुक्त क्षेत्र है और सरकार देश में इस्पात क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाकर एक सुगमताप्रदानकर्ता के रूप में कार्य करती है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) घरेलू उद्योग द्वारा दायर विधिवत प्रमाणित आवेदन के आधार पर कस्टमज़ टैरिफ अधिनियम, 1975 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत डंपिंग रोधी जांच करता है, जिसमें देश में माल की डंपिंग के कारण घरेलू उद्योग को नुकसान होने का आरोप लगाया जाता है। डंपिंग रोधी उपायों का मूल उद्देश्य डंपिंग के अनुचित व्यापार व्यवहार से घरेलू उद्योग को होने वाली क्षति को खत्म करना और घरेलू उद्योग के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना है।
भारत में अन्य देशों से इस्पात की बढ़ती डंपिंग से संबंधित चिंताओं को संबोधित करने के लिए, कुछ इस्पात उत्पादों जैसे कि सीमलेस ट्यूब, पाइप और आयरन लोहे के हॉलो प्रोफाइलज़, मिश्र धातु या गैर-मिश्र धातु इस्पात (कच्चा लोहा और स्टेनलेस स्टील के अलावा) (चीन से), इलेक्ट्रो-गैल्वेनाइज्ड इस्पात (कोरिया आरपी, जापान, सिंगापुर से), स्टेनलेस-स्टील सीमलेस ट्यूब और पाइप (चीन से), वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब (वियतनाम और थाईलैंड से) से संबंधित डंपिंग रोधी ड्यूटी संबंधी उपाय (एडीडी) वर्तमान में लागू हैं।
सरकार ने घरेलू इस्पात निर्माताओं की सुरक्षा और भारत के इस्पात उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:-
i. चीन और वियतनाम से वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब के लिए प्रतिसंतुलक शुल्क (सीवीडी) लागू है।
ii. केंद्रीय बजट 2024-25 में, घरेलू विनिर्माताओं को समर्थन देने और घरेलू इस्पात विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए:-
a. फेरो-निकेल और मोलिब्डेनम अयस्कों और सांद्रों पर मूल कस्टमज़ ड्यूटी (बीसीडी) को 2.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो इस्पात उद्योग के लिए कच्चा माल हैं।
b. फेरस स्क्रैप पर बीसीडी छूट 31.03.2026 तक जारी रखी गई है।
c. कोल्ड रोल्ड ग्रेन ओरिएंटेड (सीआरजीओ) इस्पात के निर्माण के लिए निर्दिष्ट कच्चे माल पर छूट 31.3.2026 तक जारी रखी गई है। इसके अतिरिक्त, टैरिफ मद 7226 11.00 के अंतर्गत आने वाले सीआरजीओ इस्पात के निर्माण के लिए ऐसे निर्दिष्ट कच्चे माल पर भी छूट बढ़ा दी गई है।
iii. सरकारी खरीद के लिए ‘मेड इन इंडिया’ इस्पात को बढ़ावा देने के लिए घरेलू रूप से निर्मित लौह एवं इस्पात उत्पाद (डीएमआई एंड एसपी) नीति।
iv. देश के भीतर ‘स्पेशलिटी स्टील’ के विनिर्माण को बढ़ावा देने और पूंजी निवेश को आकर्षित करके आयात को कम करने के लिए स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना। स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना के तहत अनुमानित अतिरिक्त निवेश 27,106 करोड़ रुपये है, जिसमें स्पेशलिटी स्टील के लिए लगभग 24 मिलियन टन (एमटी) की डाउनस्ट्रीम क्षमता का निर्माण शामिल है।
v. इस्पात गुणवत्ता नियंत्रण आदेश की शुरूआत, जिससे घरेलू बाजार में घटिया/दोषपूर्ण इस्पात उत्पादों के साथ-साथ आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि संबंधित उद्योग, उपयोगकर्ताओं और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण इस्पात की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इस आदेश के अनुसार, यह सुनिश्चित किया गया कि अंतिम उपयोगकर्ताओं को प्रासंगिक बीआईएस मानकों के अनुरूप केवल गुणवत्ता वाले इस्पात ही उपलब्ध कराए जाएं। आज की तारीख तक, कार्बन इस्पात, मिश्र धातु इस्पात और स्टेनलेस स्टील को शामिल करते हुए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के तहत 151 भारतीय मानक अधिसूचित हैं।
सरकार एमएसएमई के संवर्धन और विकास के लिए विभिन्न योजनाएं/कार्यक्रम कार्यान्वित कर रही है, जिनमें सूक्ष्म और लघु उद्यम – परिवर्तन के लिए हरित निवेश और वित्तपोषण योजना (एमएसई-जीआईएफटी योजना), परिपत्र अर्थव्यवस्था में संवर्धन और निवेश के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यम योजना (एमएसई-एसपीआईसीई योजना), एमएसएमई चैंपियंस योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), एमएसएमई समाधान, सूक्ष्म और लघु उद्यम – क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) आदि शामिल हैं।
इस्पात एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर