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“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी एआई-संचालित रक्त परीक्षण उपकरण का समर्थन किया”

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ “एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के लिए आईओटी-सक्षम पॉइंट-ऑफ-केयर रक्त परीक्षण उपकरण” नामक परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व छात्र श्री साहिल जगनानी और श्री अंकित चौधरी द्वारा स्थापित, यह कंपनी डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, प्रोफेसरों और छात्रों की एक बहु-विषयक टीम से उभरी है, जो वंचित आबादी के लिए किफायती नैदानिक तकनीकें विकसित करने के लिए काम कर रही है। उनके सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास, जिसे शुरू में बीआईआरएसी का सहयोग प्राप्त था, ने मोबिलैब डिवाइस का निर्माण किया—एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइज़र, आईओटी-सक्षम और एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित, जो किडनी, लिवर, हृदय, विटामिन और कैंसर से संबंधित 25 से अधिक मापदंडों का परीक्षण करने में सक्षम है।

कंपनी के पास आईआईटी गुवाहाटी से हस्तांतरित “पॉइंट-ऑफ-केयर क्वांटिफिकेशन के लिए एक ट्रांसमिटेंस-आधारित प्रणाली/किट” का पेटेंट है और उसने एकीकृत मिक्सर, परख विकास, सेंट्रीफ्यूज और प्रोपराइटरी ऑप्टिकल सिस्टम से संबंधित छह से ज़्यादा अतिरिक्त पेटेंट आवेदन दायर किए हैं। इस उपकरण का 10,000 मरीज़ों पर परीक्षण हो चुका है और हाल ही में इसे सीडीएससीओ से निर्माण लाइसेंस मिला है। यह परियोजना वर्तमान प्रोटोटाइप (एम1) को उन्नत बनाने पर केंद्रित होगी ताकि एक साथ पाँच परीक्षण किए जा सकें, रोगियों के प्रतीक्षा समय को कम किया जा सके और व्यावसायिक स्तर पर विनिर्माण स्थापित किया जा सके। इस अगली पीढ़ी के मोबिलैब में हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, यूरिक एसिड, ग्लूकोज और जीजीटी जैसे परीक्षण शामिल होंगे।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव, श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा:
“ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह परियोजना न केवल सामर्थ्य और पहुंच को संबोधित करती है, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी, एआई-संचालित नैदानिक समाधान विकसित करने में देश की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।”

प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का सहयोग प्रयोगशाला नवाचार से लेकर बड़े पैमाने पर तैनाती तक की हमारी यात्रा को गति देगा। मोबिलैब के साथ, हमारा लक्ष्य ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि देश में कहीं भी, देखभाल के बिंदु पर उन्नत निदान उपलब्ध हों।”

यह सहयोग टीडीबी की आत्मनिर्भर भारत के साथ स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा नवाचारों को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर सस्ती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

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महादान का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 18 अगस्त प्रज्ञा परिवार सेवा संस्थान एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में श्याम नगर स्थित छप्पन भोग बैंक्वेट हाल में रक्त दान हेतु कैंप लगाया गया जिसमें करीब 85 लोगों ने इस महादान में हिस्सा लिया,
लोगों की रक्त जरूरत समय पर पूरी हो खून की कमी से किसी की जान पे संकट न आए इसलिए समय समय पर ऐसा आयोजन संस्थान द्वारा  कराया जाता है, गायत्री परिवार के सुरेश जोशी एवं अवनीश शुक्ल ने रक्त दान कर कैंप का शुभारंभ किया

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एनआईएबी, हैदराबाद में भारत के पहले अत्याधुनिक पशु स्टेम सेल बायोबैंक और प्रयोगशाला का उद्घाटन किया

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003R6IJ.jpgकेंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएबी) में भारत के अपनी तरह के पहले अत्याधुनिक पशु स्टेम सेल बायोबैंक और पशु स्टेम सेल प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।

मंत्री महोदय ने एनआईएबी में एक नए छात्रावास ब्लॉक और टाइप-IV क्वार्टरों की आधारशिला भी रखी, जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने कुल ₹19.98 करोड़ की लागत से स्वीकृत किया है। यह बुनियादी ढाँचा शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की ज़रूरतों को पूरा करेगा और एक जीवंत शैक्षणिक एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।

9,300 वर्ग फुट में फैले और ₹1.85 करोड़ की लागत से निर्मित, पशु बायोबैंक की अत्याधुनिक सुविधा पशुओं के लिए पुनर्योजी चिकित्सा और कोशिकीय उपचारों पर केंद्रित होगी। स्टेम सेल कल्चर यूनिट, 3डी बायोप्रिंटर, बैक्टीरियल कल्चर लैब, क्रायोस्टोरेज, ऑटोक्लेव रूम, उन्नत एयर हैंडलिंग सिस्टम और निर्बाध पावर बैकअप से सुसज्जित, यह प्रयोगशाला रोग मॉडलिंग, ऊतक इंजीनियरिंग और प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को आगे बढ़ाएगी।

डीबीटी-बीआईआरएसी के राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम) के समर्थन से, पशु स्टेम कोशिकाओं और उनके व्युत्पन्नों की बायोबैंकिंग को सक्षम करने के लिए सुविधा का विस्तार किया जाएगा।

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भविष्यदर्शी दृष्टि की सराहना की, जिसके कारण जैव प्रौद्योगिकी बायोई3 नीति को लागू करना संभव हुआ, जिससे भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी होने का लाभ मिला।

इसके अलावा, कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाने और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए पांच नवीन पशु चिकित्सा निदान उपकरण शुरू किए:

  1. ब्रुसेलोसिस का त्वरित पता लगाना – ब्रुसेला प्रजातियों का शीघ्र और सटीक पता लगाने के लिए एक क्षेत्र-तैनात, डीआईवीए – सक्षम डायग्नोस्टिक किट।
  2. मैस्टाइटिस का पता लगाने की तकनीक – डेयरी मवेशियों में सबक्लिनिकल और क्लिनिकल मैस्टाइटिस के लिए एक लागत प्रभावी ऑन-साइट निदानात्मक परख।
  3. रोगाणुरोधी संवेदनशीलता परीक्षण उपकरण – एक पोर्टेबल उपकरण जो जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दो घंटे के भीतर परिणाम प्रदान करता है।
  4. टोक्सोप्लाज़मोसिस डिटेक्शन किट – पशुओं में टोक्सोप्लाज़मा गोंडी संक्रमण के लिए एक संवेदनशील और विशिष्ट परीक्षण।
  5. जापानी एन्सेफलाइटिस डिटेक्शन किट – पशुओं और मनुष्यों में बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित तीव्र पट्टी।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नवाचारों से कृषि से जुड़ी जीडीपी को बढ़ावा मिलेगा, पशुधन उत्पादकता में वृद्धि होगी और पशुपालन क्षेत्र में “सदाबहार क्रांति” का मार्ग प्रशस्त होगा।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “मुझे खुशी है कि डॉ. राजेश गोखले के नेतृत्व में पूरा जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत को भविष्य के लिए तैयार करने में योगदान दे रहा है। जैव प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित अगली औद्योगिक क्रांति के आने पर हम पीछे नहीं रहेंगे। अर्थव्यवस्था विनिर्माण से पुनर्योजी और आनुवंशिक प्रक्रियाओं की ओर बढ़ेगी, और भारत ने इस बदलाव की शुरुआत पहले ही कर दी है। नीति निर्माताओं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने जैव ई3 नीति जैसी पहलों की दीर्घकालिक प्रासंगिकता को समझा है, के समर्थन के साथ यह सबसे अच्छे समय में से एक है।”

उन्होंने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन फंड (एएनआरएफ) के तहत हाल ही में घोषित 1 लाख करोड़ रुपये के आरडीआई फंड से निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को विशेष बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से शीर्ष रैंक की ओर बढ़ सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग पौधों, जानवरों और मानव जगत को एक ही छत के नीचे अनोखे ढंग से एकीकृत करता है। उन्होंने अंतरिक्ष विभाग के साथ सहयोग सहित अंतरिक्ष-आधारित प्रयोगों में भारत के योगदान का उल्लेख किया और अंतरिक्ष चिकित्सा एवं अंतरिक्ष शरीरक्रिया विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों की परिकल्पना की।

कृषि के मोर्चे पर, उन्होंने कहा, “ये रिलीज़ पशु-आधारित कृषि उत्पादकता के एक नए चरण—एक ‘सदाबहार क्रांति’—का प्रतीक हैं। कृषि से सकल घरेलू उत्पाद का 18% और हमारे कार्यबल का 60% कृषि पर निर्भर है, इसलिए पशु चिकित्सा स्वास्थ्य में नवाचारों का परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा। कृषि अनुसंधान पर खर्च किया गया एक रुपया ₹13 का प्रतिफल देता है, और पहले दिन से ही उद्योग भागीदारों को जोड़ने से यह सुनिश्चित होता है कि ये तकनीकें ज़मीनी स्तर तक पहुँचें।”

उन्होंने ब्रुसेलोसिस, मैस्टाइटिस और टोक्सोप्लाज़मोसिस जैसी बीमारियों के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया, और कहा कि कई पशुपालक अभी भी निदान और उपचार के विकल्पों से अनभिज्ञ हैं।

इस अवसर पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने किसानों के साथ बातचीत की और किसान कल्याण एवं ग्रामीण समृद्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने पशुपालकों से आधुनिक निदान उपकरण और रोग निवारण उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रोग का शीघ्र पता लगाने से न केवल पशुओं की जान बचती है, बल्कि कृषि आय भी बढ़ती है।

उन्होंने भारत के पहले पशु स्टेम सेल बायोबैंक की स्थापना में उनकी भूमिका के लिए एनआईएबी की निदेशक डॉ. तरु शर्मा की भी सराहना की और कहा, “हमारे पास मानव स्टेम कोशिकाओं के लिए तो ऐसी सुविधाएँ थीं, लेकिन पशु कोशिकाओं के लिए शायद ही कोई सुविधा थी। एनआईएबी और भारतीय जैव प्रौद्योगिकी का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है।”

 

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निरोग रहने के लिए योग अवश्य करें

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की छात्राओं के द्वारा 21 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से तथा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक के निर्देशानुसार प्रातः 8 से 8:10 बजे तक मंत्र उच्चारण के साथ सूर्य नमस्कार किया गया। जिसमें महाविद्यालय की 100 छात्राएं उपस्थित रही। इस अवसर पर महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या प्रो रचना प्रकाश ने छात्राओं के द्वारा किए गए योगासन की प्रशंसा करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, साथ ही छात्राओं ने ग्रीन पार्क में भी प्रातः 6:00 बजे से 7:30 तक प्रशासन के निर्देशानुसार उपस्थित होकर योगिक क्रियाएं की। ।कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मिथिलेश गंगवार तथा अनुराधा सिंह , आस्था शुक्ला दिव्या ब्रिहा, सिमरन, श्रद्धा त्रिवेदी आदि छात्राओं का विशेष योगदान रहा।

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भारत ने विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर ‘एक देश, एक मिशन: बंद करें प्लास्टिक प्रदूषण’ थीम के साथ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व किया

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image0064MDV.jpg
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘एक देश, एक मिशन: बंद करें प्लास्टिक प्रदूषण’ के नारे के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2025 मनाया। कार्यक्रम में प्रसारित एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भारतीय संस्कृति का अंग है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण के मुद्दे की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट होने से बहुत पहले ही भारत ने इससे निपटने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा और दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के सदस्यों, सिविल सोसायटी, छात्रों और राज्यों तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के सरकारी अधिकारियों ने भी ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण का पालन करते हुए भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने मुख्य भाषण में इस बात को रेखांकित किया कि दिल्ली में वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक महत्वपूर्ण समस्‍या है और इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यमुना नदी के प्रदूषण की समस्‍या को राज्यों द्वारा सामूहिक रूप से हल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्लास्टिक एक महत्वपूर्ण सामग्री है, लेकिन प्लास्टिक अपशिष्‍ट का उचित रूप से निपटान न होना प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को जन्म दे रहा है। यादव ने दिल्ली के नागरिकों से 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक थैलों का उपयोग न करने और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग से बचने का आग्रह किया। उन्होंने प्लास्टिक अपशिष्‍ट का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करने का अवसर देने वाली तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और प्लास्टिक प्रदूषण में कमी लाने के लिए नवोन्‍मेषी प्रौद्योगिकी को व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया। श्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि ईपीआर दिशानिर्देश सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देते हैं और प्लास्टिक अपशिष्‍ट का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने मिशन लाइफ के सिद्धांतों को अपनाने और अछूते प्राकृतिक संसाधनों की खपत कम करने के लिए पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अपने संबोधन में पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में की गई हरित पहलों पर जोर दिया और कहा कि दिल्ली का वृक्ष आवरण बढ़ा है। उन्होंने अरावली की हरियाली के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए नवोन्‍मेषी तकनीकों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

आज दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें पहले प्रकाशन गवर्नमेंट इनिशिएटिव्‍स ऑन एंडिंग प्लास्टिक पल्‍यूशन में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्‍या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में सरकार और उद्योग सहित सभी हितधारकों की सामूहिक कार्रवाई की ताकत को दर्शाया गया है। कंपोडियम ऑन इको ऑल्‍टरनेटिव्‍ज टू बैन्‍ड सिंगल यूज प्लास्टिक का भी विमोचन किया गया। यह संग्रह देश भर में उपलब्ध पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों का एक व्यापक संकलन है।

इस कार्यक्रम के दौरान नेशनल प्लास्टिक वेस्‍ट रिपोर्टिंग पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो बहु-चरणीय फिजीकल रिपोर्टिंग से हटकर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह पोर्टल पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करते हुए कचरा बीनने वालों से लेकर कचरे के प्रसंस्करण और निपटान तक के पूरे प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकोसिस्‍टम को कवर करता है। बेहतर नियोजन और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए देश भर के सभी शहरी स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के लिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित डेटा उपलब्ध हो जाएगा।

गणमान्य व्यक्तियों ने सात लाइफ थीमों में आइडियाज4लाइफ‘ के 21 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। एक महीने तक चली प्री-कैंपेन गतिविधियों के अंतर्गत, देश भर में 69,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 21 लाख लोगों ने भाग लिया।

योजनाबद्ध पहलों की श्रृंखला के साथ राष्ट्रीय प्लास्टिक प्रदूषण न्यूनीकरण अभियान भी आज शुरू किया गया। इस अभियान में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत बाघ अभ्‍यारण्‍यों तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की गतिविधियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से विशेष अभियान 5.0 के दौरान सरकारी कार्यालयों में उपयोग में न आने वाले एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एकल उपयोग प्लास्टिक के लिए पर्यावरण-विकल्पों पर एक हैकथॉन तथा प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करने की थीम पर कविता लेखन, नारा लेखन और स्किट (नुक्कड़ नाटक) जैसी रचनात्मक प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को शामिल करना अभियान का हिस्सा है।

प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने पर सरकार के फोकस को ध्यान में रखते हुए, प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक के लिए पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों पर एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में भारत भर से 150 स्टार्टअप, रिसाइकिलर्स और स्थानीय निकायों ने पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन पर नवीन तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन करते हुए जीवंत भागीदारी की। इस प्रदर्शनी में मिशन लाइफ के लिए एक अलग मंडप भी था। छात्रों के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच) द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता की चयनित प्रविष्टियों को भी एक अलग मंडप में प्रदर्शित किया गया।

इस दौरान, ‘प्लास्टिक अपशिष्‍ट पर स्थानीय निकायों के दृष्टिकोण’; ‘पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में स्टार्टअप को बढ़ावा देना’; और ‘प्लास्टिक पैकेजिंग पर ईपीआर: अवसर और आगे की राह’ विषय पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए । स्थानीय निकायों पर सत्र में शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण चरण II के तहत कदमों को शामिल किया गया। स्टार्टअप पर सत्र में वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री, प्लास्टिक-पैकेजिंग-मुक्त दूध वितरण और लचीली पैकेजिंग में उपयोग की जाने वाली डिंकिंग तकनीकों के संबंध में नवोन्‍मेषी तकनीकों को शामिल किया गया। ईपीआर पर सत्र में कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग के पुन: उपयोग, रासायनिक पुनर्चक्रण, डिपोजिट रिफंड सिस्‍टम, प्लास्टिक पैकेजिंग के निर्माण में पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के अभिनव मॉडल शामिल रहे।

 

 

 

 

 

 

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नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के तहत डफरिन में कन्या जन्म उत्सव आयोजित

कानपुर 4 अप्रैल नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत कन्या जन्म उत्सव का आयोजन आज डफरिन हॉस्पिटल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्चियों की मां से केक कटवाकर 25 नवजात बच्चियों की मां को बेबी किट वितरित कर समाज में बेटियों के महत्व को उजागर किया।
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी की उपस्थिति यह दर्शा रही है कि आज बेटियां बेटों से बहुत आगे पहुंच चुकी है, और बेटियों में बहुत सारा टैलेंट भरा हुआ है तथा सरकार उसको उजागर करने में विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है । आज बहुत सारी लड़कियां फील्ड में बहुत अच्छा कार्य कर रही है ।उन्होंने कहा कि 2050 तक जब इन बच्चियों का विवाह होगा तब तक उन्हें दहेज देना नहीं बल्कि दहेज मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी नौकरियों में भी आरक्षण दे रही है। आज बेटियां लड़कों से आगे बेहतर कार्य करते हुए अपना परचम फहरा रही है ।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जाना है, जिससे समाज में जागरूकता बढ़े और कन्या जन्म का स्वागत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित कराने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। जिसके अंतर्गत मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एक अहम योजना है, जिसके तहत अब तक 23.10 लाख लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा चुका है। महिला एवं बाल विकास विभाग की कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत -बालिका के जन्म पर 5,000 रुपये व एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा कक्षा 1 और 6 में प्रवेश पर 3,000-3,000 रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा कक्षा 9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और 10वीं या 12वीं पास करने के बाद स्नातक या डिप्लोमा में प्रवेश पर 7,000 रुपये दिए जा रहे हैं। इस तरह, एक लाभार्थी को कुल 25,000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है, जिससे उसकी शिक्षा और भविष्य सुरक्षित हो सके।

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 हरि दत्त नेगी, जिला प्रोवेशन अधिकारी जयदीप,मुख्य अधीक्षका डफरिन हॉस्पिटल समेत अन्य डॉक्टर उपस्थित रहे।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया लखनऊ से राष्ट्रव्यापी ‘फिट इंडिया संडे साइकिल’ का नेतृत्व करेंगे; किशोर जेना, PEFI ने मोटापे से लड़ने के लिए समर्थन का संकल्प लिया

केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 23 मार्च 2025 को मोटापे के विरुद्ध अभियान तेज करते हुए, राष्ट्रव्यापी आंदोलन ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ में हिस्सा लेंगे। केंद्रीय मंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा मामले मंत्री  गिरीश चंद्र यादव भी शामिल होंगे। डॉ. मांडविया मरीन ड्राइव (सामाजिक परिवर्तन स्थल) से समता मूलक चौराहा होते हुए 1090 चौराहा तक 3 किलोमीटर की साइकिल यात्रा करेंगे और फिर वापस आएंगे। इस दौरान वे 400 से अधिक साइकिल चालकों के समूह का नेतृत्व करेंगे और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोटापे से लड़ने और स्वस्थ तथा सक्रिय जीवन शैली अपनाने के संदेश का प्रसार करेंगे।

दूसरी ओर, एशियाई खेलों के पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी किशोर जेना मुंबई के खूबसूरत अक्सा बीच पर साइकिलिंग अभियान में भाग लेंगे, जिसमें फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) के सदस्य नई दिल्ली में इस पहल में हिस्सा लेंगे। अब तक, राष्ट्रव्यापी साइकिलिंग अभियान 4200 स्थानों पर आयोजित किया जा चुका है, जिसमें लगभग 2 लाख लोगों ने हिस्सा लिया है। यह अभियान देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल कार्यप्रणाली को भी बढ़ावा देता है। यह पहल कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइकिलिंग के शौकीनों, एथलीटों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों आदि की भागीदारी के साथ आयोजित की जा रही है।

इससे पहले, इस साइकिलिंग कार्यक्रम में भारतीय सेना के जवान, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और लवलीना बोरगोहेन, संग्राम सिंह, शैंकी सिंह, नीतू घनघस, स्वीटी बूरा, पेरिस पैरालिंपिक कांस्य पदक विजेता रुबीना फ्रांसिस और सिमरन शर्मा (पैरा विश्व चैंपियन) जैसे प्रमुख खेल सितारों के अलावा राहुल बोस, अमित सियाल और गुल पनाग जैसी मशहूर हस्तियां भी हिस्सा ले चुकी हैं। युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई), माई बाइक्स और माई भारत के सहयोग से ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम देश भर में एसएआई क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (एनसीओई) और खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में एक साथ आयोजित किए जाते हैं।

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा हुई

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 07 मार्च, जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य समिति की शाखा-निकाय की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें राष्ट्रीय वेक्टर जनित कार्यक्रम, राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम, पुनरीक्षित क्षय नियंत्रण कार्यक्रम, परिवार कल्याण कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, आयुष्मान कार्ड आदि शामिल हैं ।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा कोक्लीयर प्लांट सर्जरी के सम्बंध में जनपद में इस सर्जरी को प्रारंभ करने के लिए अभियान चलाते हुए व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उर्सला, हैलेट कांशीराम, और डफरिन अस्पतालों में इसे प्रारंभ कराने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नवजात बच्चों का कोक्लीयर प्लांट जांच के सम्बंध में नवजात बच्चों के अभिभावकों को जन्म के समय ही जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई ताकि समय से बच्चे की कोक्लीयर प्लांट जांच सुनिश्चित हो सके।
सप्लाई चेन की समस्या के सम्बंध में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण के निर्देश दिए कि पिछले तीन महीनों से अर्बन हेल्थ सेंटर की सप्लाई चेन क्यों टूटी हुई है, जिसकी वजह से लक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है।
जिलाधिकारी द्वारा यू/वी0एच0एस0एन0डी0 की जांच में जनपद की कम प्रगति पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यू बी सिंह और उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश्वर सिंह से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए।
वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद में कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस न करे और इस प्रकार की प्रैक्टिस करने वालों की समिति के सदस्यों द्वारा द्वारा सूचना उपलब्ध कराई जाए।
घर-घर बीमार बच्चों का सर्वे संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए, जिन ब्लॉकों में लगातार तीन महीने तक घर-घर बीमार बच्चों के सर्वे की प्रगति खराब रहेगी, उनके उनको प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगीl
जिलाधिकारी द्वारा टीकाकरण में कमी पर नाराजगी नाराजगी व्यक्त की गई कि कानपुर नगर में 9003 बच्चों और घाटमपुर में 1213 बच्चों को Penta One इंजेक्शन की डोज नहीं लगाई गई है, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और अगले जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्टोर प्रभारी ने अवगत कराया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निर्देश प्राप्त न होने के कारण आवश्यक सामग्री खरीदी नहीं जा सकी जिसके कारण जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य को पत्र भेजने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने निर्देशित करते हुए कहा कि यह समिति स्वास्थ्य कार्यों के बेहतर संचालन और जनहित में ठोस कदम उठाए जिससे आम जनमानस को बेहतर सुविधाए प्राप्त हो सके, जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह ज्ञात हुआ कि उर्सला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम में 41 कर्मचारी /डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है जिसके जिलाधिकारी को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उक्त डाक्टरों के उपयोगिता के संबंध में उचित जानकारी न दिए जाने के कारण अपर जिलाधिकारी नगर डॉ0 राजेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सीएमएस, उर्सुला की संयुक्त जांच कमेटी बनाकर उनकी उपयोगिता की जांच करने के निर्देश दिएl

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खाद्य पदार्थ दूध, गेंहूँ आटा,चावल एवं खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े उद्यमियों का फोर्टिफिकेशन सम्बन्धी ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित

कानपुर 06 मार्च आज, नगर में खाद्य पदार्थ दूध, गेंहूँ आटा,चावल एवं खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े उद्यमियों का फोर्टिफिकेशन सम्बन्धी एक ट्रेनिंग कार्यक्रम KHPT एवं GAIN के माध्यम से FSSAI भारत सरकार के निर्देशों के क्रम मे होटल रिजेन्टा, हर्ष नगर में आयोजित किया गया। उक्त ट्रेनिंग कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया। 

इसके पश्चात जिलाधिकारी सिंह ने कार्यक्रम मे उपस्थित उद्यमियों व KHPT एवं GAIN के ट्रेनर्स को सम्बोधित करते हुए खाद्य पदार्थों के प्राकृतिक रूप में उपभोग करने व उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां तक सम्भव हो मनुष्य को खाद्य पदार्थो के प्राकृतिक रूप को ही अपने भोजन मे शामिल करना चाहिए। जब खाद्य पदार्थो को प्रसंस्करण अथवा किसी अन्य माध्यम से उनके प्राकृतिक रूप से छेड़छाड़ करके उनमें उपस्थित पोषक पदार्थों को अलग कर दिया जाता है, तब यह आवश्यक हो जाता है कि वैज्ञानिक विधियों का सहारा लेकर हम अपने खाद्य पदार्थो मे पोषक तत्व को मिलाकर उसका उपभोग करें जिससे हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहे। कहा कि फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया भी एक वैज्ञानिक विधा है, जिसके माध्यम से हम दूध, खाद्य तेल, आटा व चावल मे कुछ पोषक तत्वो को मिलाकर उसकी गुणवत्ता का वर्धन करते हैं। उक्त कार्यक्रम मे उपरोक्त खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग 100 की संख्या मे उद्यमी,मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं समस्त खाद्य सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

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जिलाधिकारी द्वारा उर्सला जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर, 04 मार्च, 2025 जिलाधिकारी द्वारा आज उर्सला जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया गया, निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कई खामियां मिली।

चिकित्सालय के अंदर निर्मित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कंट्रोल रूम के निरीक्षण के दौरान जिसके नोडल अधिकारी ACMO डॉ. आर. के. गुप्ता बिना कार्यालय में उपस्थित हुए किसी मीटिंग में चले गए थे। उपस्थिति रजिस्टर देखने से पता चला कि दो अन्य कर्मचारी भी नदारद रहे। पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा वार्ड के निरीक्षण के साथ-साथ नहीं नियमित देखभाल भी नहीं किया जा रहा है।

यह भी पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय 30 से 35 कर्मचारी उर्सुला अस्पताल में अटैच है जबकि वहां इतने कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है। पाया गया कि 20 बेड के आयुष्मान वार्ड में कुल 8 मरीज भर्ती थे लेकिन वहां एक भी डॉक्टर उपस्थित नहीं पाया गया। जिलाधिकारी द्वारा जब यह पूछा गया कि इस वार्ड में किस डॉक्टर की ड्यूटी लगी हुई है इस पर वहां उपस्थित चिकित्सालय के डायरेक्टर समेत कोई अन्य जिम्मेदार संतोषजनक उत्तर न दे पाए। उक्त वार्ड में जिलाधिकारी द्वारा बिताए गए 15 से 20 मिनट तक भी कोई डॉक्टर वहां उपस्थित नहीं हुआ l

इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा उर्सला चिकित्सालय के डायरेक्टर के अधीनस्थ कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर को देखा गया। पाया गया कि लिपिक किरण रजिस्टर पर बिना साइन किया नदारद रही जबकि अन्य कर्मचारी राकेश मौर्य आकस्मिक अवकाश पर रहे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा यह भी पाया गया कि चिकित्सालय के डायरेक्टर हेल्प डेस्क और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के हेल्प डेस्क पर ताला लगा मिला। वहां उपस्थित मरीजों ने जिलाधिकारी को बताया कि ड्यूटी पर चिकित्सालय के कर्मचारी व डॉक्टर समय पर उपस्थित नहीं होते हैं मरीजों को मूलभूत सुविधाएं देने के नाम पर मात्र खाना-पूर्ति की जा रही है। जिलाधिकारी ने पाया कि चिकित्सालय के अंदर बनी सड़क भी ऊबड़- खाबड़ है जिससे एंबुलेंस के आवागमन में मरीजों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैl पाया कि कई मरीज बैठने की चिकित्सालय द्वारा बैठने की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जमीन पर ही बैठे मिले, इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

उक्त घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा संबंधित को एसीएमओ डॉ. आर. के. गुप्ता वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरिदत्त नेमी को कारण बताओं नोटिस जारी करने के साथ-साथ तीनों अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय के अंदर सड़क को दुरुस्त किया जाए। डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी नियमित तौर पर ओपीडी में मरीजों का इलाज करें। डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि उनके अधीनस्थ कर्मचारी या डॉक्टर समय पर उपस्थित होते हैं या नहीं, इसके लिए उपस्थिति रजिस्टर को नियमित देखा जाए,उन्होंने निर्देश दिए की अस्पताल परिसर में मरीजों के बैठने के लिए प्राप्त संख्या में चेयर लगवाया जाए। किसी भी मरीज को मूलभूत सुविधाओं व आवश्यक दवाओ से वंचित न रखा जाए। यह डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है। सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस ना करें अन्यथा उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने निर्देशित करते हुए यह भी कहा कि सभी डॉक्टर सेवाभाव के साथ काम करें और इस पेशे को बदनाम ना करेंl डॉक्टरों की यह भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी प्रतिभा व कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा इस्तेमाल करें जिससे मरीजों को निजी चिकित्सालयो में न जाना पड़ेl चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा को जमीन पर उतारना और उसे आम जनमानस को तक पहुंचाना शासन के साथ-साथ जिला प्रशासन की भी प्राथमिकता है।

पोषण- पोटली वितरण कार्यक्रम में लिया हिस्सा
इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा उर्सला जिला चिकित्सालय परिसर में ही प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए टीबी से ग्रस्त मरीजों को पोषण – पोटली का वितरण किया गयाl इस अवसर पर कुल 50 मरीजों को पोषण – पोटली वितरित किए गएl इस दौरान जिलाधिकारी ने वहां उपस्थित मरीजों व डॉक्टर को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि सबको समय से व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो, जिसके क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में भारत को ‘टीबी मुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है इसके लिए हम सबको मिलकर टीम भावना के साथ टीबी को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा राजकीय पशु चिकित्सालय, चुन्नीगंज का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कर्मचारी योगेंद्र प्रताप रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके गायब रहें। वहीं, कर्मचारी कविता वर्मा कल और आज 2 दिन से आराम पर चल रही है, इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त कर्मचारियों का वेतन रुकते हुए अन्य आवश्यक कार्रवाई करने हेतु संबंधित को निर्देश दिए।

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