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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 19 मार्च दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) तथा नशा मुक्ति समिति के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति जागरूकता हेतु एक सेमिनार एवं रैली का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली के लिए प्रेरित करना था।
*सेमिनार / कार्यशाला* के अंतर्गत छात्राओं को नशा मुक्ति के प्रति सचेत रहने हेतु व्याख्यान एवं काउंसलिंग प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव एवं अपूर्वा बाजपेई ने नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इसी क्रम में विमला देवी तथा श्वेता गोंड ने छात्राओं को नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं द्वारा एक *‘Say no to Drugs’ जागरूकता रैली* भी निकाली गई, जिसे प्राचार्या द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि नशा व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र—तीनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। छात्राओं ने “Say No to Drugs”, “तंबाकू को ना कहें”, “सिगरेट को ना कहें”, “पान मसाले को ना कहें” जैसे प्रभावी नारों के माध्यम से जन-जागरूकता का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त छात्राओं ने *रंगोली एवं पोस्टर* के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत किया, जिसका निर्देशन पूजा श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम एवं सेल्फ फाइनेंस की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा का पूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. साधना सिंह, पूजा श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्सना पांडे, डॉ. पारुल त्रिवेदी तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव तथा समस्त छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा।

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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष-2026’ ने उभरते एवं टिकाऊ स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों से संबंधित अगली पीढ़ी के दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष2026’ (एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह सम्मेलन एक ऐसे ऐतिहासिक वैश्विक मंच के रूप में उभरा, जिसने संपूर्ण खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को एकजुट किया। ‘अन्वेष-2026’ महज एक अकादमिक सम्मेलन से कहीं बढ़कर था। यह सरकारी एजेंसियों, स्टार्टअप, उद्योग जगत की अग्रणी हस्तियों, प्रदर्शकों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, प्रसिद्ध शेफों और टिकाऊ एवं  स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध उत्साही प्रतिभागियों का एक गतिशील संगम साबित हुआ। इसके समापन समारोह में भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने विशेष संबोधन में, श्री प्रभु ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने में एनआईएफटीईएम-कुंडली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस संस्थान के 13 वर्षों के उल्लेखनीय सफर का  उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए एनआईएफटीईएम-कुंडली अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक एवं टिकाऊ खाद्य पदार्थों के लिए खाद्य पिरामिड को नए सिरे से परिभाषित करने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार असित गोपाल भी उपस्थित थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत का सपना केवल नवाचार, ज्ञान और उद्यमिता के जरिए ही साकार हो सकता है। एक अन्य विशिष्ट अतिथि, हल्दीराम समूह के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सिंघानिया ने एनआईएफटीईएम-कुंडली की युवा प्रतिभाओं को खाद्य मूल्य श्रृंखला के हर चरण में मूल्य सृजित करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस संस्थान में “कचरे को खजाने में बदलने” की क्षमता है। इस अवसर पर, एनआईएफटीईएम-के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों, परिणामों और वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक व्यापक सारांश पेश किया।

सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1.4 बिलियन लोगों वाले एक देश के लिए प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास बेहद जरूरी है। गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने हेतु नवाचारों, अनुसंधानों एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों तथा किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25 देशों की भागीदारी हुई। इसमें 3 पैनल चर्चाएं113 मौखिक प्रस्तुतियां115 आमंत्रित वार्ताएं और 226 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो खाद्य क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की गहराई एवं विविधता को दर्शाती हैं। इसमें अकादमिक और उद्योग जगत की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली। विचार-विमर्श में खाद्य संबंधी नवाचार, सुरक्षा, पता लगाने की क्षमता एवं नियामक अनुपालन; पौष्टिक-औषधीय पदार्थों (न्यूट्रास्यूटिकल्स) एवं विशिष्ट खाद्य पदार्थों; वैयक्तिकृत पोषण एवं कार्यात्मक तत्व; टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण, अपशिष्ट का मूल्यवर्धन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था; अपशिष्ट को कम करने हेतु कटाई से इतर की प्रौद्योगिकियां; अगली पीढ़ी की स्मार्ट एवं स्वच्छ लेबल वाली प्रौद्योगिकियों के साथ वैकल्पिक प्रोटीन तथा पादप-आधारित खाद्य पदार्थ; खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में डिजिटल बदलाव; और नीतिगत सुधारों, अनुसंधान नवाचार तथा  उद्योग जगत के सहयोग के जरिए भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम की पुनर्कल्पना जैसे महत्वपूर्ण व भविष्योन्मुखी विषयों को शामिल किया गया। देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों व  अनुसंधान संगठनों के 40 से अधिक कुलपतियों और निदेशकों की भागीदारी वाली एक गोलमेज बैठक में कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच के सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया।

‘अन्वेष-2026’ में एक जीवंत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस प्रदर्शनी में कॉरपोरेट, स्टार्ट-अप, एमएसएमई और सरकारी विभागों सहित 61 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इन प्रदर्शकों ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवीन उत्पादों और प्रसंस्करण संबंधी टिकाऊ उपायों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी ने शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सहयोग के अवसरों एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने की चाहत रखने वाले उद्यमियों का ध्यान आकर्षित किया।

एक अनूठा अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, इस सम्मेलन में 22 लाइव कुकरी शो आयोजित किए गए। इनमें उभरती हुई सामग्रियों, पौधों पर आधारित विकल्पों और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों के वैसे नवीन अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया गया, जो स्थिरता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी प्रवृत्तियों के अनुरूप थे।

नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों की भागीदारी के साथ, ‘अन्वेष -2026’ को उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली। इसमें 500 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी और 2000 से अधिक आगंतुक शामिल हुए, जो एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। इस सम्मेलन ने टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक खाद्य नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्थक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझेदारी को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया, जिससे वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण एवं  पोषण परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिली;

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राष्ट्रपति ने पीडी हिंदुजा अस्पताल के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुंबई के लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं कि सभी नागरिक स्वस्थ रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। देश भर में 180,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्राप्त होती है। मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को बीमारियों से बचाने में योगदान दे रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हालांकि, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। “जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ” अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि उचित चिकित्सा देखभाल समय-सीमा के भीतर प्रदान करने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए, प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटरों के साथ-साथ, गंभीर दुर्घटनाओं और चिकित्सा आपात स्थितियों में जीवन बचाने के लिए जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और समुचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना उन्हें स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। नागरिकों का स्वास्थ्य एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सबसे गरीब लोगों को भी समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल मिले। ‘सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराना हम सभी का मिशन होना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इनकी भूमिका और भी बढ़ेगी और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। भारत सरकार नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। इंडियाएआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है। हमारे देश में निर्मित दवाएं विश्व भर के लोगों के इलाज में योगदान दे रही हैं। हालांकि, हम अभी भी कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। ये आयातित उपकरण और दवाएं आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए देश में दवाओं और उपकरणों का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने चिकित्सा जगत और व्यापार जगत से इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नागरिक एक मूलभूत आवश्यकता हैं। नागरिक तभी स्वस्थ रह पाएंगे जब उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हमारे नागरिकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में अधिक मान्यता प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

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अहमदाबाद में आयोजित चिंतन शिविर में भारत द्वारा 30 अरब डॉलर का आँकड़ा पार किए जाने पर औषधि निर्यात के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया

चिंतन शिविर श्रृंखला, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जा रहा है, के अंतर्गत “स्केलिंग अप फार्मा एक्सपोर्ट्स” विषय पर एक उद्योग संवाद आयोजित किया गया। यह संवाद उद्योग और नियामकों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से भारत के निर्यात दायरे को विस्तार देने की सरकार की प्राथमिकता को प्रतिबिंबित करता है।

भारत का औषधि निर्यात प्रदर्शन निरंतर स्थिर वृद्धि दर्शा रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में औषधि निर्यात 30.47 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा, जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के इस क्षेत्र का वर्ष 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। मात्रा के आधार पर भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है तथा 200 से अधिक बाज़ारों में दवाओं का निर्यात करता है। कुल निर्यात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कठोर नियामक मानकों वाले बाज़ारों को जाता है। भारत के औषधि निर्यात में 34 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका की तथा 19 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी यूरोप की है। संवाद में निरंतर निर्यात त्वरण हेतु अनुकूल परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने पर सरकार के विशेष बल को रेखांकित किया गया, जबकि उद्योग ने 2026–27 में द्विअंकीय वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वाणिज्य विभाग के वाणिज्य सचिव के वीडियो संदेश से हुआ, जिसमें उन्होंने निर्यातकों और विनिर्माताओं के साथ सतत् संवाद बनाए रखने तथा विनियमित बाज़ारों में उत्पन्न चुनौतियों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया देने के महत्व पर बल दिया। संदेश में एक विश्वसनीय व्यापार भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने, वैश्विक औषधि बाज़ारों में अपनी हिस्सेदारी का विस्तार करने तथा भारत से सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की विश्वभर में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विशेष जोर को पुनः रेखांकित किया गया।

उद्घाटन सत्र में वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन सहित उद्योग से जुड़े हितधारकों की प्रतिभागिता रही। चर्चाएँ नियामकीय प्रक्रियाओं, निर्यात सुगमता तथा नीतिगत उपायों और क्षेत्र की आगामी विकास अवस्था के बीच समन्वय पर केंद्रित रहीं, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संदर्भ में, जिन्हें प्रायः अनुपालन, प्रलेखन तथा निरीक्षण संबंधी आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण सामना करना पड़ता है।

संवाद में केंद्रीय बजट 2026–27 में निर्धारित दिशा को भी संज्ञान में लिया गया, जिसमें बायोफार्मा और जैविक औषधियों को भारत की भावी स्वास्थ्य तथा विनिर्माण प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा गया है। प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल, जिसे पाँच वर्षों में क्रियान्वित किया जाना है, का उद्देश्य जैविक औषधियों और बायोसिमिलर्स के लिए भारत की संपूर्ण पारितंत्र क्षमता को सुदृढ़ करना, आयात निर्भरता को कम करना तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है, जिससे वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल बाज़ार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करने के लक्ष्य के अनुरूप प्रगति की जा सके।

इस संदर्भ में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित करने, सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन करने, 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल परीक्षण स्थलों का विकास करने तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की क्षमता को विशेषज्ञ वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति के माध्यम से सुदृढ़ करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इन उपायों को जटिल उत्पादों के त्वरित मूल्यांकन को सक्षम बनाने तथा भारत की नियामकीय व्यवस्था में विश्वास को सुदृढ़ करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।

पैनल चर्चाओं और विषयगत सत्रों में विनिर्माण अनुशासन से बाज़ार स्वीकृति तक की निर्यात यात्रा का परीक्षण किया गया। “स्केलिंग एक्सिलेंस थ्रू एंटरप्रेन्योरियल जर्नी,” “फ्रॉम कमोडिटी सप्लायर टु ट्रस्टेड ग्लोबल पार्टनर,” “वृद्धि का मंत्र – ग्रोथ का यंत्र,” तथा “स्केल अप मंत्र फॉर इमर्जिंग कंपनीज़” जैसे सत्रों में औषधि निर्यात के अगले दशक की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने गुणवत्ता प्रणालियों को सुदृढ़ करने, अनुपालन तत्परता सुनिश्चित करने तथा मूल्य श्रृंखला में उन्नयन के संबंध में अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, साथ ही लागत और आपूर्ति में विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी बल दिया।

निर्यातकों को प्रमुख साझेदारों, जिनमें यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, के साथ हालिया व्यापारिक सहभागिताओं से उत्पन्न अवसरों के बारे में भी अवगत कराया गया। यह उल्लेख किया गया कि अधिक निकट आर्थिक व्यवस्थाएँ बाज़ार पहुँच तथा स्थिर मांग के लिए स्पष्ट मार्ग सुनिश्चित करने में, विशेषकर बड़े, विनियमित बाज़ारों में, सहायक हो सकती हैं। 572.3 अरब अमेरिकी डॉलर के औषधि और चिकित्सा उपकरण बाज़ार के संदर्भ में यूरोपीय संघ के साथ सहभागिता पर चर्चा की गई, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था भारतीय औषधि कंपनियों के लिए बाज़ार पहुँच और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता को और सुदृढ़ कर सकती है।

भारत की औषधि निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) की गतिविधियों तथा 12वीं अंतरराष्ट्रीय औषधि एवं स्वास्थ्य सेवा उद्योग प्रदर्शनी (आईफेक्स) पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसके पश्चात निर्यातकों और हितधारकों के साथ एक खुला संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 निर्यातकों ने भाग लिया, जिनमें अधिकांश भारत के पश्चिमी क्षेत्र से थे।

अहमदाबाद में हुई चर्चाओं में निर्यातकों और व्यापक जनहित से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रखा गया, जिनमें त्वरित और अधिक सुनिश्चित अनुमोदन, सुदृढ़ नियामकीय सहयोग और मात्रा-आधारित निर्यात से जैविक औषधियों, बायोसिमिलर्स और नवाचार-प्रेरित उत्पादों जैसे उच्च-मूल्य खंडों की ओर क्रमिक बदलाव शामिल हैं। वाणिज्य विभाग निर्यातकों, नियामक निकायों और विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ सतत् संवाद जारी रखेगा, जिससे समस्‍याओं की समय पर पहचान और समाधान सुनिश्चित किया जा सके तथा वैश्विक बाज़ारों में भारत के औषधि निर्यात की निरंतर वृद्धि को समर्थन मिले।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में रीजेंसी हॉस्पिटल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कैंप आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर रीजेंसी हॉस्पिटल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कैंप आयोजित किआ।
यह कार्यक्रम क्राइस्ट चर्च कॉलेज के मिशन शक्ति और value education cell के द्वारा आयोजित किया गया, कार्यक्रम का उद्घाटन मिशन शक्ति के समन्वयक प्रो. मीत कमल ने किया। इस दौरान अतिथि वक्ता उदित यादव ने और ने छात्रों को प्रोत्साहित किया और उसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण किए गए।
यह पूरा कार्यक्रम प्रिंसिपल प्रोफेसर विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ और उन्होंने रीजेंसी की पूरी टीम को भी धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के दौरान जीशान जी ने मास्टर ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट के कोर्स के बारे में जानकारी दी और नौकरी के अवसर प्रदान किए।
अंत में प्रो. मीत कमल ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया और क्राइस्ट चर्च के तरफ से वक्ता को धन्यवाद दिया, सबके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान value education cell की समन्वयक श्वेता चन्द उपस्थित रही ।
इसके अतिरिक्त 

कैरियर काउंसलिंग सेल क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने मेवाड़ विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों का स्वागत किया, जिन्होंने अपने विश्वविद्यालय परिसर में पीजी स्तर और पीएचडी कार्यक्रम में विभिन्न पाठ्यक्रम के अवसरों के बारे में बताया।
कार्यक्रम का आयोजन कैरियर काउंसलिंग सेल द्वारा प्रोफेसर विनय जॉन सेबेस्टियन प्रिंसिपल के मार्गदर्शन में किया गया था। कार्यक्रम में लगभग 100 छात्र शामिल हुए थे। कार्यक्रम प्रोफेसर मीत कमल के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हुआ।

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सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह थर्मल पावर प्लांटों को बायोमास को-फायरिंग मानदंडों का पालन न करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है

एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस पर्यावरण (तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के तहत अधिसूचित फसल अवशेषों से बने पेलेट या ब्रिकेट के सह-दहन से संबंधित अनिवार्य प्रावधानों का अनुपालन न करने के लिए जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2024-25 के अनुपालन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई है।

पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांट द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के अनुसार, सभी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले के साथ फसल अवशेषों से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का न्यूनतम 5% मिश्रण उपयोग करना अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सह-दहन की न्यूनतम सीमा 3% से अधिक निर्धारित की गई है ताकि पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) से बचा जा सके। इन वैधानिक प्रावधानों को धान के पराली के बहिर्गमन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। आयोग ने 2021 से कई वैधानिक निर्देश जारी किए हैं, जिनमें 17.09.2021 का निर्देश संख्या 42 भी शामिल है, और आवधिक समीक्षाओं और निरीक्षणों के माध्यम से कार्यान्वयन की लगातार निगरानी की है।

इन उपायों के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान निम्नलिखित थर्मल पावर प्लांटों की अनुपालन स्थिति असंतोषजनक पाई गई है, जिसमें बायोमास सह-दहन का स्तर निर्धारित सीमा से काफी नीचे रहा है। परिणामस्वरूप, संबंधित संयंत्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें ईसी लागू करने का प्रस्ताव है, जैसा कि नीचे विस्तार से बताया गया है:

  • तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल – वेदांता), मानसा, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹33.02 करोड़;
  • पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस), पानीपत, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹8.98 करोड़;
  • दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन (डीसीआरटीपीएस), यमुनानगर, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹6.69 करोड़;
  • राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (आरजीटीपीपी), हिसार, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹5.55 करोड़;
  • पीएसपीसीएल – गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट, लेहरा मोहब्बत, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹4.87 करोड़;
  • हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन, यूपीआरवीयूएनएल, उत्तर प्रदेश – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹2.74 करोड़।
  • इन 6 थर्मल पावर प्लांट परियोजनाओं में प्रस्तावित कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगभग ₹61.85 करोड़ है।

निर्देश संख्या 42 जारी होने के बाद से, आयोग ने थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) सहित सभी संबंधित हितधारकों के साथ इस मामले की गहन समीक्षा की। अनुपालन में भारी देरी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए, आयोग ने 2024 की शुरुआत में सीएक्यूएम अधिनियम, 2021 की धारा 14 के तहत 4 थर्मल पावर प्लांटों को नोटिस जारी किए, जिनका प्रदर्शन इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से लगातार खराब रहा है। आयोग ने 7 थर्मल पावर प्लांटों और सभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांटों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की चिंता भी व्यक्त की। यहां तक ​​कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि के लिए गैर-अनुपालन करने वाले थर्मल पावर प्लांटों (यदि कोई हो) के अभ्यावेदनों की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया।

संबंधित टीपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।

आयोग इस बात को दोहराता है कि तापसंधि संयंत्रों में बायोमास का सह-दहन, फसल अवशेषों के प्रभावी बहिर्गमन प्रबंधन और एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय है। आयोग सभी विनियमित संस्थाओं द्वारा समय पर और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक निर्देशों का कड़ाई से प्रवर्तन जारी रखेगा।

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वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम हेतु व्यापक अभियान संचालित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर 10 अक्टूबर जनपद कानपुर नगर में वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु विभिन्न गतिविधियाँ संपन्न कराई गईं। जिला मलेरिया अधिकारी के निर्देशन में सरसौल ब्लॉक के ग्राम पौहर में संयुक्त टीम द्वारा वाहक जनित रोगों पर नियंत्रण हेतु की जा रही गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह, सहायक मलेरिया अधिकारी भूपेन्द्र सिंह तथा मलेरिया निरीक्षक मंजीत यादव द्वारा ग्राम सेमरझाल, ब्लॉक सरसौल का भ्रमण किया गया।

भ्रमण के दौरान घर-घर स्वच्छता की स्थिति का निरीक्षण किया गया। किसी भी घर में बुखार के रोगी नहीं पाए गए। एक इंडिया मार्क हैंडपंप के प्लेटफॉर्म की अनुपस्थिति पाई गई, जिसकी जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को अवगत करा दी गई है। ग्राम निवासी राम प्रकाश गुप्ता द्वारा आयुष्मान कार्ड न बनने की समस्या बताई गई, जिसे शीघ्र समाधान हेतु संबंधित विभाग को सूचित किया गया है।

ग्राम वासियों को संचारी एवं वाहक जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। लोगों को अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, कूड़ा-करकट का निस्तारण करने, तथा घर के अंदर या बाहर जलभराव न होने देने के लिए प्रेरित किया गया।

इसी क्रम में जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा ग्राम तिलसहरी खुर्द का भी भ्रमण किया गया, जहाँ नालियों में लार्वीसाइडल दवा का छिड़काव, कूलर, गमले एवं अन्य जल पात्रों की जांच कर सोर्स रिडक्शन की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के लिए प्राकृतिक मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करने एवं शरीर को अधिकतम रूप से कपड़ों से ढके रखने की सलाह दी गई।

ग्रामों में स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए गए, जिनमें कुल 12 सामान्य रोगियों का उपचार कर औषधि वितरित की गई। 2 रोगियों की मलेरिया एवं 2 रोगियों की डेंगू जांच की गई, जिनकी सभी रिपोर्टें निगेटिव प्राप्त हुईं।

इसके अतिरिक्त क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, इंडोर स्पेस स्प्रे, लार्वानाशक छिड़काव एवं एण्टमोलॉजिकल सर्वेक्षण जैसी गतिविधियाँ संचालित की गईं।

जनमानस को संचारी रोगों से संबंधित सूचना देने या जानकारी प्राप्त करने हेतु यू.एच.एम. चिकित्सालय परेड स्थित कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 0512-2333810 अथवा 9335301096 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही नगर निगम स्थित कंट्रोल रूम में हेल्पलाइन नंबर 0512-2526004 एवं 0512-2526005 भी सक्रिय हैं, जिन पर सूचना प्राप्त होने पर संबंधित क्षेत्र में तत्काल कार्रवाई की जाती है।

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डीएम ने किया सिकठिया पीएचसी का औचक निरीक्षण

जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकठिया का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर तैनात तीनों स्वास्थ्यकर्मी मौजूद मिले और ओपीडी नियमित रूप से संचालित होती मिली। इलाज कराने पहुँची श्यामकली, रेखा सहित अन्य मरीजों ने पीएचसी की चिकित्सक डॉ. पूनम सिंह की सराहना करते हुए कहा कि वे नियमित रूप से सेवाएँ देती हैं और पूरे सेवाभाव से कार्य करती हैं। मरीजों की बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त की। डीएम ने दवा वितरण की जानकारी मरीजों और उनके परिजनों से ली। सभी ने बताया कि उन्हें दवाएँ समय पर मिल रही हैं। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्र पर लैब टेक्नीशियन संदीप कुमार तैनात हैं, किंतु उपकरणों के अभाव में पैथोलॉजिकल जांच नहीं हो पा रही है।इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि आगामी 15 दिनों के भीतर आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ ताकि जांच कार्य सुचारू रूप से शुरू हो सके।

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एफएसएसएआई ने फोस्कोस पोर्टल पर आयुर्वेद आहार के निर्माण के लिए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने अपने खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (फोस्कोस) पोर्टल पर आयुर्वेद आहार उत्पादों के लिए एक समर्पित लाइसेंसिंग और पंजीकरण सुविधा आधिकारिक तौर पर शुरू की है। इस महत्वपूर्ण कदम से भारत भर के निर्माता पारंपरिक आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और विपणन हेतु लाइसेंस के लिए सहजता से आवेदन कर सकेंगे।

आयुर्वेद आहार के लिए नए ‘व्यापार का प्रकार’ (केओबी) ढांचे का उद्देश्य इस क्षेत्र को औपचारिक और सुव्यवस्थित बनाना है और प्रामाणिक आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णित पारंपरिक नुस्खों को समकालीन खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के साथ संयोजित करना है। इस कदम का उद्देश्य इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एक विनियमित मार्ग बनाकर खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों को बढ़ावा देना है।

यह विनियमन व्यक्तिगत पोषण के मूल आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित है, जो व्यक्ति की विशिष्ट संरचना (प्रकृति) के अनुसार आहार को अनुकूलित करता है। इन पारंपरिक सूत्रों का मानकीकरण करके, एफएसएसएआई के इस कदम से खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रामाणिक और विनियमित आयुर्वेद आहार की उपलब्धता निर्धारित आयुर्वेदिक उपचार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में काम करेगी।

उद्योग के लिए एक सुचारु परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए एफएसएसएआई ने 25 जुलाई 2025 के एक आदेश के माध्यम से 91 अनुमोदित आयुर्वेद आहार व्यंजनों की एक सूची पहले ही प्रकाशित कर दी है। इससे खाद्य व्यवसाय संचालकों को इस नई श्रेणी के अंतर्गत उत्पादों के निर्माण के लिए एक स्पष्ट, पूर्व-अनुमोदित संदर्भ प्राप्त होता है, जिससे प्रामाणिकता और नियामक अनुपालन दोनों सुनिश्चित होते हैं।

यह पहल, आयुष मंत्रालय के साथ करीबी सहयोग में विकसित की गई है, जो आयुर्वेद की गहन ज्ञान परंपरा को आधुनिक खाद्य सुरक्षा प्रथाओं के साथ एकीकृत करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल उद्योग से जुड़े हितधारकों को लाभ मिलेगा, बल्कि जनस्वास्थ्य को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।

फोस्कोस पोर्टल और स्वीकृत आयुर्वेद आहार की सूची से संबंधित आधिकारिक आदेश को निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है:

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डीआरआई ने भोपाल में अवैध दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग कारखाने का भंडाफोड़ किया; 92 करोड़ रुपये कीमत की 61.2 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त; सात गिरफ्तार

एक महत्त्वपूर्ण खुफिया सूचना के आधार पर, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने भोपाल में एक गुप्त मेफेड्रोन मैन्युफैक्चरिंग कारखाने का, एक सुनियोजित और समन्वित ऑपरेशन, जिसका कोड नाम “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” था, सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन के दौरान सूरत और मुंबई पुलिस ने भी डीआरआई का सहयोग किया।

डीआरआई ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर छापे मारे और इस गिरोह के सात प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया।

ग्राम-जगदीशपुर (इस्लामनगर), हुजूर-तहसील, जिला-भोपाल, मध्य प्रदेश स्थित अवैध निर्माण इकाई की तलाशी में 61.20 किलोग्राम मेफेड्रोन (तरल रूप में) बरामद और जब्त किया गया, जिसकी अवैध बाजार में कीमत ₹92 करोड़ आंकी गई। इसके अतिरिक्त, 541.53 किलोग्राम कच्चा माल, जिसमें मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलमाइन (एमएमए), हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल), और 2-ब्रोमो शामिल हैं, के साथ-साथ प्रसंस्करण उपकरणों का एक पूरा सेट भी जब्त किया गया। एकांत परिसर में जानबूझकर चारों ओर से ढके हुए कारखाने पर डीआरआई अधिकारियों ने चतुराई से छापा मारा। मेफेड्रोन बनाने वाले केमिस्ट समेत दो लोग को अवैध उत्पादन प्रक्रिया में लिप्त पाया गया।

तत्परतापूर्वक की गई कार्रवाई में, ड्रग कार्टेल के एक प्रमुख शख्स को बस्ती, उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किया गया, जिसे भिवंडी (मुंबई) से भोपाल तक कच्चे माल की आपूर्ति की देख-रेख का काम सौंपा गया था। अवैध रूप से रसायन/ कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले दो आपूर्तिकर्ताओं को भी मुंबई में गिरफ्तार किया गया, साथ ही मुंबई से भोपाल तक रसायनों/ कच्चे माल के परिवहन के लिए जिम्मेदार शख्स को भी गिरफ्तार किया गया।

शुरुआती जांच से यह भी पता चला है कि सूरत और मुंबई से हवाला के जरिए भोपाल में पैसा भेजा जा रहा था। पैसे के लेन-देन के लिए जिम्मेदार कार्टेल के एक करीबी सहयोगी को भी सूरत में गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार किए गए सभी सात लोगों ने भारत में मेफेड्रोन नेटवर्क के एक विदेशी संचालक और सरगना के निर्देश पर मेफेड्रोन के गुप्त निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका को स्वीकार किया।

मेफेड्रोन, एक मनोविकार नाशक पदार्थ है जो स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत सूचीबद्ध है। यह समाज के लिए एक गंभीर खतरा है क्योंकि इसमें मनो-सक्रिय गुण होते हैं और माना जाता है कि यह कोकीन और एम्फैटेमिन के सेवन जैसा असर पैदा करता है।

यह पिछले एक साल में डीआरआई की ओर से बर्बाद की गई छठा गुप्त मेफेड्रोन कारखाना है। डीआरआई मादक दवाओं का निर्माण करने वाली अवैध फैक्ट्रियों को ध्वस्त करने और उनके मास्टरमाइंडों तथा इसमें शामिल अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की तलाश में लगातार सक्रिय है।

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