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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया लखनऊ से राष्ट्रव्यापी ‘फिट इंडिया संडे साइकिल’ का नेतृत्व करेंगे; किशोर जेना, PEFI ने मोटापे से लड़ने के लिए समर्थन का संकल्प लिया

केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 23 मार्च 2025 को मोटापे के विरुद्ध अभियान तेज करते हुए, राष्ट्रव्यापी आंदोलन ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ में हिस्सा लेंगे। केंद्रीय मंत्री के साथ उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा मामले मंत्री  गिरीश चंद्र यादव भी शामिल होंगे। डॉ. मांडविया मरीन ड्राइव (सामाजिक परिवर्तन स्थल) से समता मूलक चौराहा होते हुए 1090 चौराहा तक 3 किलोमीटर की साइकिल यात्रा करेंगे और फिर वापस आएंगे। इस दौरान वे 400 से अधिक साइकिल चालकों के समूह का नेतृत्व करेंगे और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोटापे से लड़ने और स्वस्थ तथा सक्रिय जीवन शैली अपनाने के संदेश का प्रसार करेंगे।

दूसरी ओर, एशियाई खेलों के पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी किशोर जेना मुंबई के खूबसूरत अक्सा बीच पर साइकिलिंग अभियान में भाग लेंगे, जिसमें फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) के सदस्य नई दिल्ली में इस पहल में हिस्सा लेंगे। अब तक, राष्ट्रव्यापी साइकिलिंग अभियान 4200 स्थानों पर आयोजित किया जा चुका है, जिसमें लगभग 2 लाख लोगों ने हिस्सा लिया है। यह अभियान देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल कार्यप्रणाली को भी बढ़ावा देता है। यह पहल कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइकिलिंग के शौकीनों, एथलीटों, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों आदि की भागीदारी के साथ आयोजित की जा रही है।

इससे पहले, इस साइकिलिंग कार्यक्रम में भारतीय सेना के जवान, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और लवलीना बोरगोहेन, संग्राम सिंह, शैंकी सिंह, नीतू घनघस, स्वीटी बूरा, पेरिस पैरालिंपिक कांस्य पदक विजेता रुबीना फ्रांसिस और सिमरन शर्मा (पैरा विश्व चैंपियन) जैसे प्रमुख खेल सितारों के अलावा राहुल बोस, अमित सियाल और गुल पनाग जैसी मशहूर हस्तियां भी हिस्सा ले चुकी हैं। युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई), माई बाइक्स और माई भारत के सहयोग से ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम देश भर में एसएआई क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (एनसीओई) और खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में एक साथ आयोजित किए जाते हैं।

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा हुई

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 07 मार्च, जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य समिति की शाखा-निकाय की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिनमें राष्ट्रीय वेक्टर जनित कार्यक्रम, राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम, पुनरीक्षित क्षय नियंत्रण कार्यक्रम, परिवार कल्याण कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, आयुष्मान कार्ड आदि शामिल हैं ।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा कोक्लीयर प्लांट सर्जरी के सम्बंध में जनपद में इस सर्जरी को प्रारंभ करने के लिए अभियान चलाते हुए व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उर्सला, हैलेट कांशीराम, और डफरिन अस्पतालों में इसे प्रारंभ कराने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नवजात बच्चों का कोक्लीयर प्लांट जांच के सम्बंध में नवजात बच्चों के अभिभावकों को जन्म के समय ही जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई ताकि समय से बच्चे की कोक्लीयर प्लांट जांच सुनिश्चित हो सके।
सप्लाई चेन की समस्या के सम्बंध में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण के निर्देश दिए कि पिछले तीन महीनों से अर्बन हेल्थ सेंटर की सप्लाई चेन क्यों टूटी हुई है, जिसकी वजह से लक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है।
जिलाधिकारी द्वारा यू/वी0एच0एस0एन0डी0 की जांच में जनपद की कम प्रगति पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यू बी सिंह और उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश्वर सिंह से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए गए।
वहीं, प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद में कोई भी सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस न करे और इस प्रकार की प्रैक्टिस करने वालों की समिति के सदस्यों द्वारा द्वारा सूचना उपलब्ध कराई जाए।
घर-घर बीमार बच्चों का सर्वे संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए, जिन ब्लॉकों में लगातार तीन महीने तक घर-घर बीमार बच्चों के सर्वे की प्रगति खराब रहेगी, उनके उनको प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगीl
जिलाधिकारी द्वारा टीकाकरण में कमी पर नाराजगी नाराजगी व्यक्त की गई कि कानपुर नगर में 9003 बच्चों और घाटमपुर में 1213 बच्चों को Penta One इंजेक्शन की डोज नहीं लगाई गई है, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और अगले जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्टोर प्रभारी ने अवगत कराया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निर्देश प्राप्त न होने के कारण आवश्यक सामग्री खरीदी नहीं जा सकी जिसके कारण जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य को पत्र भेजने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने निर्देशित करते हुए कहा कि यह समिति स्वास्थ्य कार्यों के बेहतर संचालन और जनहित में ठोस कदम उठाए जिससे आम जनमानस को बेहतर सुविधाए प्राप्त हो सके, जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह ज्ञात हुआ कि उर्सला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम में 41 कर्मचारी /डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है जिसके जिलाधिकारी को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उक्त डाक्टरों के उपयोगिता के संबंध में उचित जानकारी न दिए जाने के कारण अपर जिलाधिकारी नगर डॉ0 राजेश कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सीएमएस, उर्सुला की संयुक्त जांच कमेटी बनाकर उनकी उपयोगिता की जांच करने के निर्देश दिएl

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खाद्य पदार्थ दूध, गेंहूँ आटा,चावल एवं खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े उद्यमियों का फोर्टिफिकेशन सम्बन्धी ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित

कानपुर 06 मार्च आज, नगर में खाद्य पदार्थ दूध, गेंहूँ आटा,चावल एवं खाद्य तेल के कारोबार से जुड़े उद्यमियों का फोर्टिफिकेशन सम्बन्धी एक ट्रेनिंग कार्यक्रम KHPT एवं GAIN के माध्यम से FSSAI भारत सरकार के निर्देशों के क्रम मे होटल रिजेन्टा, हर्ष नगर में आयोजित किया गया। उक्त ट्रेनिंग कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया गया। 

इसके पश्चात जिलाधिकारी सिंह ने कार्यक्रम मे उपस्थित उद्यमियों व KHPT एवं GAIN के ट्रेनर्स को सम्बोधित करते हुए खाद्य पदार्थों के प्राकृतिक रूप में उपभोग करने व उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां तक सम्भव हो मनुष्य को खाद्य पदार्थो के प्राकृतिक रूप को ही अपने भोजन मे शामिल करना चाहिए। जब खाद्य पदार्थो को प्रसंस्करण अथवा किसी अन्य माध्यम से उनके प्राकृतिक रूप से छेड़छाड़ करके उनमें उपस्थित पोषक पदार्थों को अलग कर दिया जाता है, तब यह आवश्यक हो जाता है कि वैज्ञानिक विधियों का सहारा लेकर हम अपने खाद्य पदार्थो मे पोषक तत्व को मिलाकर उसका उपभोग करें जिससे हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहे। कहा कि फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया भी एक वैज्ञानिक विधा है, जिसके माध्यम से हम दूध, खाद्य तेल, आटा व चावल मे कुछ पोषक तत्वो को मिलाकर उसकी गुणवत्ता का वर्धन करते हैं। उक्त कार्यक्रम मे उपरोक्त खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग 100 की संख्या मे उद्यमी,मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं समस्त खाद्य सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

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जिलाधिकारी द्वारा उर्सला जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर, 04 मार्च, 2025 जिलाधिकारी द्वारा आज उर्सला जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया गया, निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कई खामियां मिली।

चिकित्सालय के अंदर निर्मित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कंट्रोल रूम के निरीक्षण के दौरान जिसके नोडल अधिकारी ACMO डॉ. आर. के. गुप्ता बिना कार्यालय में उपस्थित हुए किसी मीटिंग में चले गए थे। उपस्थिति रजिस्टर देखने से पता चला कि दो अन्य कर्मचारी भी नदारद रहे। पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा वार्ड के निरीक्षण के साथ-साथ नहीं नियमित देखभाल भी नहीं किया जा रहा है।

यह भी पाया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय 30 से 35 कर्मचारी उर्सुला अस्पताल में अटैच है जबकि वहां इतने कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं है। पाया गया कि 20 बेड के आयुष्मान वार्ड में कुल 8 मरीज भर्ती थे लेकिन वहां एक भी डॉक्टर उपस्थित नहीं पाया गया। जिलाधिकारी द्वारा जब यह पूछा गया कि इस वार्ड में किस डॉक्टर की ड्यूटी लगी हुई है इस पर वहां उपस्थित चिकित्सालय के डायरेक्टर समेत कोई अन्य जिम्मेदार संतोषजनक उत्तर न दे पाए। उक्त वार्ड में जिलाधिकारी द्वारा बिताए गए 15 से 20 मिनट तक भी कोई डॉक्टर वहां उपस्थित नहीं हुआ l

इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा उर्सला चिकित्सालय के डायरेक्टर के अधीनस्थ कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर को देखा गया। पाया गया कि लिपिक किरण रजिस्टर पर बिना साइन किया नदारद रही जबकि अन्य कर्मचारी राकेश मौर्य आकस्मिक अवकाश पर रहे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी द्वारा यह भी पाया गया कि चिकित्सालय के डायरेक्टर हेल्प डेस्क और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के हेल्प डेस्क पर ताला लगा मिला। वहां उपस्थित मरीजों ने जिलाधिकारी को बताया कि ड्यूटी पर चिकित्सालय के कर्मचारी व डॉक्टर समय पर उपस्थित नहीं होते हैं मरीजों को मूलभूत सुविधाएं देने के नाम पर मात्र खाना-पूर्ति की जा रही है। जिलाधिकारी ने पाया कि चिकित्सालय के अंदर बनी सड़क भी ऊबड़- खाबड़ है जिससे एंबुलेंस के आवागमन में मरीजों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैl पाया कि कई मरीज बैठने की चिकित्सालय द्वारा बैठने की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जमीन पर ही बैठे मिले, इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

उक्त घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा संबंधित को एसीएमओ डॉ. आर. के. गुप्ता वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरिदत्त नेमी को कारण बताओं नोटिस जारी करने के साथ-साथ तीनों अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय के अंदर सड़क को दुरुस्त किया जाए। डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी नियमित तौर पर ओपीडी में मरीजों का इलाज करें। डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि उनके अधीनस्थ कर्मचारी या डॉक्टर समय पर उपस्थित होते हैं या नहीं, इसके लिए उपस्थिति रजिस्टर को नियमित देखा जाए,उन्होंने निर्देश दिए की अस्पताल परिसर में मरीजों के बैठने के लिए प्राप्त संख्या में चेयर लगवाया जाए। किसी भी मरीज को मूलभूत सुविधाओं व आवश्यक दवाओ से वंचित न रखा जाए। यह डायरेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है। सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस ना करें अन्यथा उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने निर्देशित करते हुए यह भी कहा कि सभी डॉक्टर सेवाभाव के साथ काम करें और इस पेशे को बदनाम ना करेंl डॉक्टरों की यह भी जिम्मेदारी है कि वह अपनी प्रतिभा व कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा इस्तेमाल करें जिससे मरीजों को निजी चिकित्सालयो में न जाना पड़ेl चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा को जमीन पर उतारना और उसे आम जनमानस को तक पहुंचाना शासन के साथ-साथ जिला प्रशासन की भी प्राथमिकता है।

पोषण- पोटली वितरण कार्यक्रम में लिया हिस्सा
इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा उर्सला जिला चिकित्सालय परिसर में ही प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए टीबी से ग्रस्त मरीजों को पोषण – पोटली का वितरण किया गयाl इस अवसर पर कुल 50 मरीजों को पोषण – पोटली वितरित किए गएl इस दौरान जिलाधिकारी ने वहां उपस्थित मरीजों व डॉक्टर को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि सबको समय से व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो, जिसके क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में भारत को ‘टीबी मुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है इसके लिए हम सबको मिलकर टीम भावना के साथ टीबी को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता है।
इसके उपरांत जिलाधिकारी द्वारा राजकीय पशु चिकित्सालय, चुन्नीगंज का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कर्मचारी योगेंद्र प्रताप रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके गायब रहें। वहीं, कर्मचारी कविता वर्मा कल और आज 2 दिन से आराम पर चल रही है, इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त कर्मचारियों का वेतन रुकते हुए अन्य आवश्यक कार्रवाई करने हेतु संबंधित को निर्देश दिए।

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बिना डिग्री के चल रहे है हॉस्पिटल

भारतीय स्वरूप संवाददाता नेवादा कौशाम्बी, नेवादा ब्लॉक के अंतरगत एक ऐसा हॉस्पिटल जहां इन दिनों बिना किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर के इंटर पास एक महिला जिसको कभी उस हॉस्पिटल की देख रेख के लिए रखा गया था। कुछ दिन बाद उस महिला और डॉक्टर के बीच दोस्ती बढ़ी और उस डॉक्टर की अहमियत घटती गई और चाय पिलाने वाली सहायक डॉक्टर बन बैठी।

कहानी यही नहीं खत्म होती डॉक्टर साहब अपने अपयश को देखते हुए उस हॉस्पिटल को छोड़ कर पीपल गांव चले गए और वह महिला डॉक्टर उस हॉस्पिटल के नाम पर गरीब और अनपढ़ मरीजों से मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया। फर्जी
एक्स रे के आधार पर आपरेशन से लेकर प्रसव तक की बीड़ा उठा लिया।
बात हो रही है यस हॉस्पिटल तिल्हापुर मोड़ नेवादा रोड डॉक्टर सीमा कुशवाहा की

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भारत को विश्व का आध्यात्मिक गुरु बनाने के लिए नशे के विरुद्ध एकजुट होना ही होगा…ज्योति बाबा

दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यक्रम में ज्योति बाबा मोस्ट इंस्पायरिंग आइकॉन ऑफ़ द ईयर अवार्ड 25 से फिल्म एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर द्वारा सम्मानित

नशे में मातृशक्ति – स्वस्थ परिवार की संकल्पना कैसे पूरी होगी…. ज्योति बाबा

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर/दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख सोसाइटी योग ज्योति इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक एवं इंडिया बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड,एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा को नशा मुक्ति के क्षेत्र में पिछले 35 वर्षों से निरंतर कार्य करने के लिए मोस्ट इंस्पायरिंग आइकॉन ऑफ़ द ईयर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है आपको यह सम्मान दिल्ली के रेडिसन ब्लू होटल प्लाजा महिपालपुर दिल्ली में दिया गया। इस अवसर पर ज्योति बाबा ने पूरे देश के सम्मानित लोगों के साथ फिल्म एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर एवं फिल्म एक्टर डिनो मौरिया के सम्मुख यह जोर देकर कहा कि यदि भारत को 2047 में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा होना है तो हमें भारत के बचपन को राष्ट्रीयता से ओतप्रोत करते हुए नशा,प्रदूषण,कुपोषण,हिंसा ,प्लास्टिक और बाल बंधुवा मजदूरी से बचाना ही होगा और इन सब के पीछे कहीं ना कहीं मुख्य कारण नशा है इसलिए नशे के विरुद्ध एकजुट हो,यही सनातन की सच्ची सेवा है तभी परिवार बचेगा,समाज बचेगा,राष्ट्र बचेगा।नेशनल लेवल पर चयनित होने की जैसे ही खबर देश के नशा मुक्ति सेनानियों को हुई थी उनमें खुशी की लहर जाग उठी थी,क्योंकि अब देश की जनता नशे के विरुद्ध लामबंद हो रही है क्योंकि दिल्ली में शराब पॉलिसी के विरुद्ध बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने वोट किया है बिहार के बाद मध्य प्रदेश में भी 18 जिलों में पूर्ण शराब पर प्रतिबंध लगने जा रहा है। इस अवसर पर बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर, एक्टर डिनों मौरिया विशेष रूप से अवार्ड सेरेमनी के चीफ गेस्ट थे,उन्होंने युवाओं से देश हित में काम करने का आवाहन किया। साथ ही इस मौके पर देश के प्रमुख इंडस्ट्रीज,एंटरप्रेन्योर्स, लीडरशिप,स्टार्टअप एवं सोशल एक्टिविस्ट विशेष रूप से भाग लेकर कार्यक्रम को उच्च गरिमा प्रदान की। इन सभी क्षेत्रों में पूरे देश से 100 लोगों का चयन किया गया है। समाज सेवा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख एशिया बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा का मेरिट के आधार पर चयन कर सम्मानित किया गया। जैसे ही हाल में ज्योति बाबा का नाम पुरस्कार के लिए पुकारा गया पूरे शिवाजी हॉल के सभी लोगों ने खड़े होकर के तालियों के साथ स्टैंडिंग ओवेशन दी,ऐसा लगा मानो पूरा हॉल एक सुर में ज्योति बाबा के कामों को सराह रहा हो। योग ऋषि डॉक्टर ओमप्रकाश आनंद ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा शिष्य श्री श्री ज्योति बाबा आज नशा मुक्ति के क्षेत्र में विशिष्ट कार्यों हेतु राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। नशा मुक्ति युवा भारत के लिए ज्योति बाबा का जोश जुनून और जज्बा नौजवानों के लिए प्रेरणा की बात है। पीयूष रंजन सनातनी ने जोर देकर कहा कि श्री श्री ज्योति बाबा को इससे पूर्व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड,एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड,प्रदेश रत्न,भारत सेवा श्री सम्मान समेत सैकड़ो पुरस्कार नशा मुक्ति युवा भारत अभियान के लिए प्राप्त हो चुके हैं राष्ट्रीय कार्यक्रम पंचतारा होटल रेडिसन ब्लू प्लाजा दिल्ली में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के बीच ज्योति बाबा को दिया गया, यह पुरस्कार मोस्ट इंस्पायरिंग आईकॉनिक इयर अवॉर्ड मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान ज्योति बाबा का नहीं,यह सम्मान देश के सभी नशा मुक्ति सेनानियों को समर्पित है।आपको राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हेतु संस्था योग ज्योति इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह,प्रमुख संयोजक डॉक्टर प्रवीण,आनंद जी महाराज, हरेंद्र मूर्ति जी, डा.ओम प्रकाश आनंद जी,पीयूष रंजन मिश्रा,शैलेंद्र श्रीवास्तव एडवोकेट,नवीन गुप्ता, गिरधर गर्ग,श्रवण कुमार,प्रदीप बिश्नोई,राकेश गुप्ता,विकास गौड़ एडवोकेट,रोहित कुमार,स्वामी अमिताभ,किशोर भाई,पंकज सिंह एवं गीता पाल जी ने हर्ष व्यक्त किया है। एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स के नेशनल चीफ चंद्रशेखर आजाद एवं सनातन महासभा के डॉ प्रवीण एवं पूरे देश की टीम ने अपने नेशनल ब्रांड एंबेसडर ज्योति बाबा को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी है।

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कैंसर की विभिन्न अवस्थाओं का संकेत देने वाला सामान्य बायोमार्कर कैंसर के शीघ्र निदान के लिए नॉन इनवेसिव तरीके की संभावना प्रदान करता है

शोधकर्ताओं ने अग्नाशय और ग्लायोमा कैंसर जैसे कैंसरों में कुछ सामान्य मेटाबोलाइट्स की पहचान की है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की ग्लायल कोशिकाओं में विकसित होते हैं, जो सार्वभौमिक कैंसर बायोमार्कर के रूप में उनकी संभावना का सुझाव देते हैं। यह कैंसर के शुरुआती निदान के साथ-साथ कैंसर के लिए चिकित्सीय रणनीतियों के लिए एक नॉन इनवेसिव तरीके की संभावना प्रदान करता है।

अग्नाशय और ग्लायोमा जैसे आक्रामक कैंसर का अक्सर देर से निदान किया जाता है और रोग का आसानी से पूर्वानुमान नहीं लग पाता है। इसलिए कैंसर निदान और उपचार में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने के लिए नॉन इनवेसिव, विश्वसनीय कैंसर बायोमार्कर की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से अग्नाशय और ग्लायोमा जैसे आक्रामक कैंसर के लिए, जिनमें शुरुआती पहचान के तरीकों की कमी है। ट्यूमर-व्युत्पन्न मेटाबोलाइट्स के वाहक के रूप में नैनो मैसेंजर (एक्सोसोम), ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट (टीएमई) का पता लगाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली के वैज्ञानिकों की एक टीम, जिसमें सुश्री नंदिनी बजाज और डॉ. दीपिका शर्मा शामिल हैं, ने अग्नाशय के कैंसर, फेफड़े के कैंसर और ग्लायोमा कैंसर सेल लाइन से प्राप्त एक्सोसोम में मेटाबोलाइट्स की पहचान की है, जो संभावित सार्वभौमिक बायोमार्कर प्रदान करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप नैदानिक ​​प्रयोज्यता में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट (टीएमई) के भीतर चयापचय संबंधी अंतःक्रियाओं की अंतर्दृष्टि लक्षित उपचारों के लिए एक आधार प्रदान करती है।

शोधकर्ताओं ने नैनोपार्टिकल ट्रैकिंग एनालिसिस (एनटीए), इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (ईएम), वेस्टर्न ब्लॉट (डब्ल्यूबी), फूरियर ट्रांसफॉर्मेड इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एफटीआईआर), अनटार्गेटेड लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-टेंडेम मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एलसी-एमएस/एमएस) और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) को मिलाकर एक बहु-तकनीक का उपयोग किया, जिससे पारंपरिक एकल-विधि अध्ययनों को पार करते हुए एक्सोसोम का व्यापक लक्षण प्रदान किया गया। यह अध्ययन कैंसर निदान, व्यक्तिगत चिकित्सा और कैंसर प्रगति तंत्र की हमारी समझ को आगे बढ़ाता है।

पहचाने गए ये मेटाबोलाइट्स ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट (टीएमई) में अनियमित मार्गों को उजागर करते हैं, साथ ही यह भी जानकारी देते हैं कि कैंसर किस प्रकार बढ़ता है और गैर-आक्रामक और सटीक कैंसर का पता लगाने और चिकित्सीय लक्ष्य निर्धारण को सक्षम बनाते हैं।

नैनोस्केल पत्रिका में प्रकाशित शोध से लक्षित उपचारों की ओर अग्रसर हो सकता है जो ट्यूमर में अनियमित चयापचय मार्गों को बाधित करते हैं, उपचार की प्रभावकारिता को बढ़ाते हैं और संभावित रूप से दुष्प्रभावों को कम करते हैं। यह प्रगति रोगी के परिणामों में उल्लेखनीय रूप से सुधार कर सकती है, विशेष रूप से व्यक्तिगत, सटीक चिकित्सा दृष्टिकोणों के माध्यम से।

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पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार

भारतीय स्वरूप संवाददाता डॉ योगेंद्र और डॉ दीक्षा को पीडब्ल्यूए ने किया सम्मानित पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार  >  निःशुल्क कंसल्टेंसी और औषधियों के वितरण में जनहितकारी योगदान के लिए सराहा, बोले डॉक्टर समाज में जीवन रक्षक डॉक्टर समाज में लोगों के लिए जीवन रक्षक के रूप में देखे जाते हैं। समाज में अपने कर्तव्यों और निस्वार्थ सेवा के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले दो चिकित्सकों को  वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश(पीडब्ल्यूए) के लोकहित में चले एक माह निशुल्क सेवा ड्राइव में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सम्मानित किया  है। पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश द्वारा वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह यादव और डॉ दीक्षा कटियार को लोकसेवा के लिए सम्मान पत्र  प्रदान किया। पीडब्ल्यूए की ओर से वरिष्ठ  सामाजिक कार्यकर्ता संजय कटियार ने डॉक्टर्स को सम्मान पत्र भेंट किया और लोकहित में उनकी सेवा और सहयोग की सराहना की गई। पीडब्ल्यूए के महासचिव पंकज कुमार सिंह ने बताया कि समाज में असहाय और निर्धनों के लिए मदद में डॉक्टर्स ने अहम भूमिका निभाई है,साथ ही इनके द्वारा निशुल्क औषधीय वितरण में सहयोग भी दिया गया है। डॉक्टर्स ने अपने चिकित्सकीय पेशे के एक हिस्से में पीडब्ल्यूए के साथ जुड़कर लोकहित में गरीब असहायों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।  उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में गायत्रीपुरम गली नम्बर 3 कल्याणपुर में एक स्थाई निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा क्लिनिक भी संचालित किया जा रहा है जहाँ असहाय और निर्धनों के स्वास्थ्य सेवा के लिए मदद दी जाती है। वार्ता में विपिन पटेल, अजय सिंह, प्रदीप सिंह, सुमित शर्मा आदि रहे।

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भारत का 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान

7 दिसंबर, 2024 को भारत तपेदिक (टीबी) को खत्म करने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाएगा। तपेदिक एक ऐसा रोग है, जो देश भर में लाखों लोगों को प्रभावित करना जारी रखे हुए है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा हरियाणा के पंचकूला में इस महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान का आधिकारिक रूप से शुभारंभ करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से असुरक्षित आबादी के लिए टीबी के मामलों का पता लगाने, निदान में होने वाली देरी को कम करने और उपचार के परिणामों को बेहतर बनाते हुए टीबी के खिलाफ़ लड़ाई को तेज़ करना है। यह अभियान 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 347 जिलों में टीबी को समाप्‍त करने और टीबी मुक्त राष्ट्र बनाने की भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है।

राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी): टीबी मुक्त भारत का विजन

यह 100 दिवसीय अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के व्यापक ढांचे का अंग है, जो टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी) 2017-2025 से संबद्ध है। एनएसपी टीबी के मामलों में कमी लाने, निदान और उपचार की क्षमताओं को बेहतर बनाने और इस रोग के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को दूर करने पर केंद्रित है। यह महत्वाकांक्षी पहल 2018 के टीबी उन्मूलन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा निर्धारित विजन को प्रतिबिम्बित करती है, जिसमें उन्होंने 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया था।

एनटीईपी के तहत भारत में टीबी के मामलों में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यहां टीबी के मामलों की दर में वर्ष 2015 में प्रति 100,000 की आबादी पर 237 मामलों की तुलना में वर्ष 2023 में प्रति 100,000 की आबादी पर 195 मामलों के साथ 17.7 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसी तरह, टीबी से संबंधित मौतों में वर्ष 2015 में प्रति लाख की आबादी पर 28 मौतों से 2023 में प्रति लाख की आबादी पर 22 मौतों के साथ 21.4 प्रतिशत तक की कमी आई है। पिछले पांच वर्षों में, टीबी के मामलों की सूचना देने में लगातार वृद्धि हुई है, जैसा कि निम्नलिखित आंकड़ों में देखा जा सकता है:

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कोविड-19 के बाद भारत ने एनटीईपी के जरिए टीबी उन्‍मूलन के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं, जो एनएसपी के साथ लगातार संबद्धता बनाए हुए है। 2023 की प्रमुख उपलब्धियों में लगभग 1.89 करोड़ स्‍प्‍यूटम स्मीयर परीक्षण और 68.3 लाख न्यूक्लिक एसिड एम्‍प्‍लीफीकेशन परीक्षण शामिल हैं, जो स्वास्थ्य सेवा स्तरों में नैदानिक पहुंच का विस्तार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

विकसित हो रहे चिकित्सकीय अनुसंधान के अनुरूप, एनटीईपी ने व्यापक देखभाल पैकेज और विकेन्द्रीकृत टीबी सेवाएं शुरू की हैं, जिनमें अब दवा प्रतिरोधी टीबी (डीआर-टीबी) के रोगियों के लिए अल्‍पकालीन मौखिक उपचार तक व्यापक पहुंच शामिल है। यह कार्यक्रम अलग तरह की देखभाल के नजरिए और जल्‍द निदान को प्रोत्‍साहन देने के माध्‍यम से कुपोषण, मधुमेह, एचआईवी और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी स्वास्थ्य की सहवर्ती स्थितियों से निपटने पर विशेष ध्‍यान देते हुए उपचार में होने वाली देरी को कम करने और देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने पर बल देता है। टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) तक पहुंच में महत्‍वपूर्ण विस्तार के साथ निवारक उपाय भी एनटीईपी की रणनीति का केंद्र बने हुए हैं। इनकी बदौलत अल्‍पकालिक उपचार वालों सहित टीपीटी प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 15 लाख हो गई है।

टीबी और स्वास्थ्य की अन्य स्थितियों के बीच परस्पर क्रिया को पहचानते हुए एनटीईपी ने कुपोषण, मधुमेह, एचआईवी और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी समस्‍याओं से निपटने की दिशा में कदम उठाए हैं। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर किए जा रहे इन प्रयासों का उद्देश्य टीबी रोगियों को अधिक समग्र सहायता प्रदान करना है, अंततः उनके उपचार के परिणामों को बेहतर बनाना है।

उच्च जोखिम वाली आबादी के लिए निदान और उपचार को बढ़ाना

100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेषकर सबसे असुरक्षित समूहों के लिए निदान और उपचार सेवाओं को मजबूत बनाना है। इनमें दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोग, हाशिए पर रहने वाले समुदाय तथा मधुमेह, एचआईवी और कुपोषण जैसी सह-रुग्णता से पीडि़त व्यक्ति शामिल हैं। यह अभियान उन्नत निदान तक पहुंच में सुधार और उपचार शुरू होने में देरी को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई विशेष रणनीतियों के साथ अत्‍यधिक बोझ वाले क्षेत्रों को लक्षित करेगा।

यह अभियान टीबी सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सहायक रहे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के व्यापक नेटवर्क सहित मौजूदा स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे का लाभ उठाएगा। इसके अलावा, स्क्रीनिंग के प्रयास उच्च जोखिम वाले समूहों पर केंद्रित होंगे और स्वास्थ्य संबंधी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष देखभाल पैकेज शुरू किए जाएंगे।

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यह पहल टीबी के रोगियों को बेहतर पोषण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली नि-क्षय पोषण योजना के माध्यम से पोषण सहायता का भी विस्तार करेगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने टीबी रोगियों के निकट संपर्क में रहने वालों को व्यापक देखभाल और सहायता दिलाना सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सहायता पहल प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमबीए) को एकीकृत किया है।

रणनीतिक हस्‍तक्षेप

राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) तपेदिक (टीबी) से निपटने और समूचे भारत में टीबी के परिणामों में असमानताओं को दूर करने की व्यापक रणनीति के केंद्र में है। इस रणनीति के तहत, कई प्रमुख हस्तक्षेप किए जा रहे हैं, जिनमें मामलों का पता लगाने में सुधार, निदान में देरी में कमी और विशेष रूप से असुरक्षित समुदायों के लिए बेहतर उपचार परिणाम शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य एनटीईपी को मजबूत बनाना और पूरे देश में टीबी उन्‍मूलन के लिए अधिक न्यायसंगत और प्रभावी दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है, जैसे:

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इन प्रयासों से टीबी के मामलों, नैदानिक कवरेज और मृत्यु दर जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में सुधार होने की संभावना है, जिससे भारत टीबी उन्‍मूलन के अपने लक्ष्य के करीब पहुंच जाएगा।

वित्तीय सहायता और सामुदायिक सहभागिता: टीबी के खिलाफ लड़ाई को सशक्त बनाना

टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता चिकित्सकीय हस्तक्षेपों से कहीं बढ़कर है। नि-क्षय पोषण योजना के माध्यम से सरकार ने 1 करोड़ लाभार्थियों को सहायता देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए लगभग 2,781 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसके अतिरिक्त, नई पहलों के तहत आशा कार्यकर्ताओं, टीबी चैंपियनों (विजेताओं) और नि-क्षय साथी मॉडल के तहत पारिवारिक देखभाल करने वालों सहित उपचार में सहायता देने वालों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह सहायता नेटवर्क रोगियों को चिकित्सकीय और भावनात्मक दोनों तरह से निरंतर देखभाल मिलना सुनिश्चित करता है।

2022 में पीएमटीबीएमबीए की शुरुआत व्यापक सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए टीबी के खिलाफ लड़ाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई । टीबी के रोगियों की मदद करने के लिए 1.5 लाख से ज़्यादा नि-क्षय मित्र (सामुदायिक समर्थक) पहले ही इस प्रयास में शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों ने भी जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया है, जो टीबी को समाप्‍त करने की दिशा में जमीनी स्तर पर हो रहे सामूहिक प्रयास को दर्शाता है।

टीबी उन्मूलन दिशा में भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता

टीबी को जड़ से खत्म करने के प्रति भारत का दृष्टिकोण केवल राष्ट्रीय प्रयास भर नहीं है; यह वैश्विक लक्ष्यों के साथ भी संबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, भारत टीबी को एसडीजी की 2030 की समय सीमा से पांच साल पहले ही 2025 तक खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीबी उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अंतर्राष्ट्रीय घोषणाओं जैसे कि, गांधीनगर घोषणापत्र के प्रति इसके समर्थन में भी स्पष्ट होती है, जिस पर डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा अगस्त 2023 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस क्षेत्रीय संकल्‍प का उद्देश्य क्षेत्र में 2030 तक टीबी के खिलाफ लड़ाई को बनाए रखना, तेज करना और नई राह निकालना है।

आगे की राह: 2025 तक टीबी का उन्मूलन

टीबी मुक्त राष्ट्र की दिशा में भारत की यात्रा में यह 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए निदान, उपचार और सहायता सेवाओं को बढ़ाकर, भारत 2025 तक टीबी को समाप्त करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण के लिए मंच तैयार कर रहा है। निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक सहभागिता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ, टीबी मुक्त भारत – तपेदिक से मुक्त भारत – का सपना साकार हो सकता है।

इस उद्देश्य के प्रति संकल्‍पबद्धता स्वास्थ्य संबंधी न्‍यायसंगतता, सामाजिक न्याय और सतत विकास के व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करती है। जिस तरह भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक कदम उठा रहा है, यह इस बात को साबित करते हुए दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर रहा है कि सहयोग, नवाचार और दृढ़ संकल्प के बल पर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटा जा सकता है।

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शी-बॉक्स पोर्टल, एक ऑनलाइन प्रणाली है जिसे ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013’ (एसएच अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बेहतर कार्यान्वयन में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में शी-बॉक्स पोर्टल लॉन्च किया है, जो एक ऑनलाइन सिस्टम है जिसे ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ (SH अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बेहतर कार्यान्वयन में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अधिनियम संबंधित सरकार को इसके कार्यान्वयन की निगरानी करने और दर्ज किए गए और निपटाए गए मामलों की संख्या पर डेटा बनाए रखने का अधिकार देता है।

शी-बॉक्स पोर्टल मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर में विभिन्न कार्यस्थलों पर गठित आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) से संबंधित सूचनाओं का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध केंद्रीकृत संग्रह उपलब्ध कराना है, चाहे वे सरकारी हों या निजी क्षेत्र के और साथ ही एक संपूर्ण एकीकृत शिकायत निगरानी प्रणाली भी। इसमें प्रत्येक कार्यस्थल के लिए एक नोडल अधिकारी को नामित करने का प्रावधान है, जिसे शिकायतों की वास्तविक समय निगरानी के लिए नियमित आधार पर डेटा/जानकारी का अद्यतन सुनिश्चित करना होता है।

पोर्टल पर शिकायत एक पीड़ित महिला या शिकायतकर्ता की ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज की जा सकती है। यदि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति स्वयं पीड़ित महिला है, तो उसे अपने मूल विवरण जैसे कि उसकी कार्य स्थिति, नाम, फोन नंबर और ईमेल दर्ज करके पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। यदि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति कोई अन्य व्यक्ति है, तो उसे अपना नाम, शिकायतकर्ता के साथ संबंध और शिकायतकर्ता की ओर से अंडरटेकिंग के साथ-साथ पीड़ित महिला/शिकायतकर्ता की कार्य स्थिति, नाम, फोन नंबर और ईमेल दर्ज करके पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। अपने रोजगार की स्थिति के आधार पर शिकायत दर्ज करने वाले व्यक्ति को उस कार्यस्थल के आईसी/एलसी का चयन करना होगा जहां वे शिकायत दर्ज करना चाहते हैं। यदि पीड़ित महिला का आईसी या एलसी पोर्टल पर पंजीकृत है, तो शिकायत स्वचालित रूप से जमा हो जाएगी और संबंधित आईसी/एलसी को भेज दी जाएगी। यदि किसी कार्यस्थल का आईसी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है, तो पोर्टल पर शिकायतकर्ता से उस कार्यस्थल का विवरण प्राप्त करने तथा उस आईसी का शीघ्र पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र और जिले के राज्य नोडल अधिकारी और जिला नोडल अधिकारी को सूचित करने के लिए एक ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है।

शी-बॉक्स पोर्टल में केंद्र/राज्य/संघ राज्य स्तर और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों के लिए निगरानी डैशबोर्ड है, जिससे उन मामलों की संख्या जो निर्धारित समयसीमा से परे हैं, निपटाए गए और लंबित मामलों की संख्या देखी जा सकती है। शिकायतकर्ता के लिए भी अपनी शिकायत की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसी तरह की सुविधा बनाई गई है। इसके अलावा, पोर्टल में किसी विशेष मंत्रालय/विभाग/राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/निजी क्षेत्र/जिले के आईसी/एलसी के संबंध में रिपोर्ट तैयार करने की सुविधा है, ताकि पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा बेहतर निगरानी और निर्धारित समय-सीमा का पालन किया जा सके।

शी-बॉक्स पोर्टल पर दर्ज की गई कोई भी शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल के आईसी या जिले के एलसी के पास पहुंचती है, जैसा भी मामला हो। पोर्टल को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह गोपनीयता बनाए रखने के लिए शिकायतकर्ता के विवरण को छुपाता है। आईसी/एलसी के अध्यक्ष के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति दर्ज की गई शिकायत का विवरण या प्रकृति नहीं देख सकता है।

शी-बॉक्स पोर्टल का निर्माण ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013’ के प्रावधानों के अनुसार किया गया है। अधिनियम के तहत जांच के लिए 90 दिन का समय निर्धारित है।

यह जानकारी आज महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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