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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष-2026’ ने उभरते एवं टिकाऊ स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों से संबंधित अगली पीढ़ी के दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष2026’ (एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह सम्मेलन एक ऐसे ऐतिहासिक वैश्विक मंच के रूप में उभरा, जिसने संपूर्ण खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को एकजुट किया। ‘अन्वेष-2026’ महज एक अकादमिक सम्मेलन से कहीं बढ़कर था। यह सरकारी एजेंसियों, स्टार्टअप, उद्योग जगत की अग्रणी हस्तियों, प्रदर्शकों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, प्रसिद्ध शेफों और टिकाऊ एवं  स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध उत्साही प्रतिभागियों का एक गतिशील संगम साबित हुआ। इसके समापन समारोह में भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने विशेष संबोधन में, श्री प्रभु ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने में एनआईएफटीईएम-कुंडली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस संस्थान के 13 वर्षों के उल्लेखनीय सफर का  उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए एनआईएफटीईएम-कुंडली अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक एवं टिकाऊ खाद्य पदार्थों के लिए खाद्य पिरामिड को नए सिरे से परिभाषित करने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार असित गोपाल भी उपस्थित थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत का सपना केवल नवाचार, ज्ञान और उद्यमिता के जरिए ही साकार हो सकता है। एक अन्य विशिष्ट अतिथि, हल्दीराम समूह के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सिंघानिया ने एनआईएफटीईएम-कुंडली की युवा प्रतिभाओं को खाद्य मूल्य श्रृंखला के हर चरण में मूल्य सृजित करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस संस्थान में “कचरे को खजाने में बदलने” की क्षमता है। इस अवसर पर, एनआईएफटीईएम-के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों, परिणामों और वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक व्यापक सारांश पेश किया।

सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1.4 बिलियन लोगों वाले एक देश के लिए प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास बेहद जरूरी है। गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने हेतु नवाचारों, अनुसंधानों एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों तथा किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25 देशों की भागीदारी हुई। इसमें 3 पैनल चर्चाएं113 मौखिक प्रस्तुतियां115 आमंत्रित वार्ताएं और 226 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो खाद्य क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की गहराई एवं विविधता को दर्शाती हैं। इसमें अकादमिक और उद्योग जगत की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली। विचार-विमर्श में खाद्य संबंधी नवाचार, सुरक्षा, पता लगाने की क्षमता एवं नियामक अनुपालन; पौष्टिक-औषधीय पदार्थों (न्यूट्रास्यूटिकल्स) एवं विशिष्ट खाद्य पदार्थों; वैयक्तिकृत पोषण एवं कार्यात्मक तत्व; टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण, अपशिष्ट का मूल्यवर्धन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था; अपशिष्ट को कम करने हेतु कटाई से इतर की प्रौद्योगिकियां; अगली पीढ़ी की स्मार्ट एवं स्वच्छ लेबल वाली प्रौद्योगिकियों के साथ वैकल्पिक प्रोटीन तथा पादप-आधारित खाद्य पदार्थ; खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में डिजिटल बदलाव; और नीतिगत सुधारों, अनुसंधान नवाचार तथा  उद्योग जगत के सहयोग के जरिए भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम की पुनर्कल्पना जैसे महत्वपूर्ण व भविष्योन्मुखी विषयों को शामिल किया गया। देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों व  अनुसंधान संगठनों के 40 से अधिक कुलपतियों और निदेशकों की भागीदारी वाली एक गोलमेज बैठक में कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच के सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया।

‘अन्वेष-2026’ में एक जीवंत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस प्रदर्शनी में कॉरपोरेट, स्टार्ट-अप, एमएसएमई और सरकारी विभागों सहित 61 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इन प्रदर्शकों ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवीन उत्पादों और प्रसंस्करण संबंधी टिकाऊ उपायों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी ने शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सहयोग के अवसरों एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने की चाहत रखने वाले उद्यमियों का ध्यान आकर्षित किया।

एक अनूठा अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, इस सम्मेलन में 22 लाइव कुकरी शो आयोजित किए गए। इनमें उभरती हुई सामग्रियों, पौधों पर आधारित विकल्पों और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों के वैसे नवीन अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया गया, जो स्थिरता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी प्रवृत्तियों के अनुरूप थे।

नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों की भागीदारी के साथ, ‘अन्वेष -2026’ को उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली। इसमें 500 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी और 2000 से अधिक आगंतुक शामिल हुए, जो एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। इस सम्मेलन ने टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक खाद्य नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्थक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझेदारी को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया, जिससे वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण एवं  पोषण परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिली;

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एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान,वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया ।महाविद्यालय की मुख्य प्रॉक्टर कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो गार्गी यादव,डॉ प्रीति सिंह तथा डॉ शैल बाजपेयी ने माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस अवसर पर इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाओं का योगदान “ तथा अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर पोस्टर एवं मॉडल बनाकर छात्राओं ने प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया । छात्राओं ने ५० पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किये और उनके विषय में बताया ।इस प्रदर्शनी का मूल्यांकन कैप्ट ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे और प्रो मीनाक्षी व्यास ने किया ।

परिणाम इस प्रकार रहा –बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर प्रथम कीर्ति गुप्ता, द्वितीय- सृष्टि पाल तथा अंजलि सिंह, तृतीय-आयना ,सांत्वना-इशिता 

बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर –प्रथम-काजोल गौतम, द्वितीय-ज़िया, तृतीय-सदा 

बी एस सी षष्ठ सेमेस्टर –प्रथम समरीन अनवर, द्वितीय मुस्कान, तृतीय एकता तथा लक्ष्मी सभी विजेता छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागी छात्राओं को उत्साह वर्धन करते हुए अल्प पुरस्कार दिए गए। 

कार्यक्रम में डॉ प्रीता अवस्थी ,डॉ प्रीति यादव, डॉ अनामिका डॉ समीक्षा डॉ श्वेता आदि उपस्थित रहे  अवधेश तथा रेखा ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में युवा संसद आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संसदीय कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. विनय जॉन सेबास्टियन तथा विशिष्ट निर्णायकगण — प्रो. आशुतोष सक्सेना (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान), प्रो. साधना सिंह (पूर्व प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र विभाग, डी.जी. कॉलेज) एवं प्रो. संजय सक्सेना (प्रभारी, इतिहास विभाग) — के आगमन से हुआ। राजनीति शास्त्र विभाग के सदस्यों एवं छात्रों ने ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप उन्हें पौधा भेंट किया गया।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण में प्रो. विभा दीक्षित ने युवा संसद के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. सेबास्टियन ने विद्यार्थियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के संप्रेषण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। इस अवसर पर निर्णायकगण को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात छात्र संयोजकों पूर्वी, कृतिका एवं आदर्श ने संसदीय कार्यवाही का संचालन संभाला। विद्यार्थियों ने बारह मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय संसद की कार्यप्रणाली का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। प्रश्नकाल एवं वाद-विवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण, कर नीति, नागरिक शिष्टाचार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते तथा सुशासन जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।
विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात एक विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिस पर धारा-वार चर्चा के बाद बहुमत से पारित किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, अभिव्यक्ति, वक्तृत्व कौशल, उच्चारण एवं समग्र प्रस्तुति के आधार पर किया तथा विद्यार्थियों के आत्मविश्वास एवं संसदीय प्रक्रिया के प्रभावी प्रदर्शन की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में अन्य विभागों के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों में डॉ. अर्चना पांडेय, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. अंकिता पांडेय, डॉ. रुक्मणी दुबे, डॉ. अर्चना वर्मा सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। यह आयोजन पूर्णतः सफल एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।

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राष्ट्रपति ने पीडी हिंदुजा अस्पताल के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुंबई के लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं कि सभी नागरिक स्वस्थ रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। देश भर में 180,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्राप्त होती है। मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को बीमारियों से बचाने में योगदान दे रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हालांकि, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। “जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ” अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि उचित चिकित्सा देखभाल समय-सीमा के भीतर प्रदान करने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए, प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटरों के साथ-साथ, गंभीर दुर्घटनाओं और चिकित्सा आपात स्थितियों में जीवन बचाने के लिए जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और समुचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना उन्हें स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। नागरिकों का स्वास्थ्य एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सबसे गरीब लोगों को भी समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल मिले। ‘सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराना हम सभी का मिशन होना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इनकी भूमिका और भी बढ़ेगी और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। भारत सरकार नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। इंडियाएआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है। हमारे देश में निर्मित दवाएं विश्व भर के लोगों के इलाज में योगदान दे रही हैं। हालांकि, हम अभी भी कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। ये आयातित उपकरण और दवाएं आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए देश में दवाओं और उपकरणों का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने चिकित्सा जगत और व्यापार जगत से इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नागरिक एक मूलभूत आवश्यकता हैं। नागरिक तभी स्वस्थ रह पाएंगे जब उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हमारे नागरिकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में अधिक मान्यता प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

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कैबिनेट ने महारत्न सीपीएसई को शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों से पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने को मंजूरी दी, जिसके तहत प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की सीमा को 5000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये किया गया

कैबिनेट ने महारत्न सीपीएसई को शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों से पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने को मंजूरी दी, जिसके तहत प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की सीमा को 5000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7500 करोड़ रुपये किया गया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज महारत्न सीपीएसई पर लागू शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के 4 फरवरी, 2010 के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी से पावरग्रिड की प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की अनुमत सीमा वर्तमान 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,500 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि कंपनी की कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा बरकरार रखी गई है।

इस मंजूरी से देश के सबसे बड़े और सबसे अनुभवी ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता, पावरग्रिड को अपने मुख्य व्यवसाय में निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, जिससे गैर-जीवाश्म-आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

अब पावरग्रिड अधिक पूंजी वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं, जैसे अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (यूएचवीएसी) और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए बोलियों में भाग ले सकता है। इसके अतिरिक्त, यह महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए बोलीदाताओं के चयन हेतु टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। इससे बेहतर मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सिविल एन्क्लेव के बृहत् विस्तार को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रस्तावित 1,677 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सिविल एन्क्लेव के विकास को मंजूरी दे दी है। यह कश्मीर घाटी में विमानन अवसंरचना और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। परियोजना के दायरे में सुरक्षा कर्मियों के लिए बैरकों का निर्माण भी शामिल है। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के बडगाम एयरबेस के तहत भारतीय विमानन प्राधिकरण द्वारा प्रचालित, 2005 में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में नामित यह हवाई अड्डा श्रीनगर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है।

73.18 एकड़ में फैले नई सिविल एन्क्लेव परियोजना में 71,500 वर्ग मीटर (विद्यमान ढांचे के 20,659 वर्ग मीटर सहित) में फैला एक अत्याधुनिक टर्मिनल भवन होगा, जिसे व्यस्ततम समय में 2,900 यात्रियों की सेवा और प्रति वर्ष 10 मिलियन यात्रियों (एमपीपीए) की वार्षिक क्षमता के लिए डिज़ाइन किया गया है। विस्तारित एप्रॉन में 15 विमान पार्किंग बे होंगे, जिनमें 1 वाइडबॉडी (कोड ई) विमान (9 विद्यमान और 6 प्रस्तावित) शामिल हैं, जबकि 3,658 मीटर x 45 मीटर का रनवे भारतीय वायु सेना द्वारा प्रचालित किया जाता रहेगा। इस परियोजना में 1,000 कारों के लिए मल्‍टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का निर्माण भी शामिल होगा।

वास्तुशिल्प की दृष्टि से, नया टर्मिनल आधुनिक डिजाइन और कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक सामंजस्यपूर्ण मिश्रण दर्शाएगा, जिसमें लकड़ी की जटिल कारीगरी और स्थानीय रूप से प्रेरित शिल्प कौशल जैसे पारंपरिक तत्वों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ-साथ ही सुव्यवस्थित यात्री प्रसंस्करण क्षेत्रों, विशाल लाउंज और उन्नत सुरक्षा एवं चेक-इन सुविधाओं के माध्यम से प्रचालनगत दक्षता को बनाए रखा जाएगा।

स्‍थायित्‍व इस परियोजना का एक प्रमुख आधार है, जिसमें उन्नत जल संचयन प्रणाली, ऊर्जा खपत कम करने के लिए प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम उपयोग और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों का उपयोग जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इस परियोजना का लक्ष्य प्रतिष्ठित 5-स्टार जीआरआईएचए रेटिंग प्राप्त करना है।

अवसंरचना में सुधार के अतिरिक्‍त, इस परियोजना से डल झील, शंकरचार्य मंदिर और मुगल गार्डन जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से बेहतर संपर्क स्थापित करके पर्यटन और आर्थिक विकास को उल्‍लेखनीय रूप से प्रोत्‍साहन मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और श्रीनगर एक प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। इस प्रकार, सिविल एन्क्लेव का विकास विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण, यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं और बढ़े हुए संपर्क की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है, जो कश्मीर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता को विश्व के सामने प्रदर्शित करेगा।

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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित ‘पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में ‘संकला फाउंडेशन’ के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप फोरम’ द्वारा आयोजित पर्यटन नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने एक ऐसा मंच तैयार करने के लिए आयोजकों की सराहना की, जो न केवल पर्यटन की संभावनाओं का जश्न मनाता है, बल्कि यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र में भारत-अमेरिका आर्थिक गलियारे को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप भी तैयार करता है।

इस बात पर जोर देते हुए कि पर्यटन मात्र एक उद्योग नहीं है, श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे संस्कृतियों के बीच एक सेतु, आर्थिक अवसरों का एक चालक और सॉफ्ट कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बताया।

उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पर्यटन लोगों के बीच गहरे संबंधों, साझा मूल्यों, उद्यमशीलता की भावना और भारतीय प्रवासी समुदाय की जीवंतता को दर्शाता है।

भारत की दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्यटन विजन 2029 की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक राज्य में सुदृढ़ अवसंरचना और वैश्विक आतिथ्य मानकों के साथ कम से कम एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल का विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्बाध संपर्क, स्मार्ट सुविधाएं, सुरक्षा, सततता डिजिटल एकीकरण और समृद्ध आगंतुक अनुभवों सहित समग्र पर्यटन इको-सिस्टम पर केंद्रित है।

भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध भूदृश्यों और युवा जनसांख्यिकी लाभांश को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश वैश्विक स्तर पर पर्यटन को पुनर्परिभाषित करने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के सरंक्षण और विश्व स्तरीय विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, जिसमें बेहतर आगंतुक सुविधाएं, व्याख्या केन्द्र, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, सतत प्रथाएं औऱ डिजिटल कहानी-वाचन शामिल हों।

श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने जोर देकर कहा कि पर्यटन विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जलवायु-सचेत अवसंरचना, समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल तथा प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की वकालत की।

उन्होंने अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले नए युग के पर्यटन स्थलों के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर भी बल दिया।

पर्यटन को रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने समावेशी और समुदाय-संचालित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में अधिक निवेश करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन के समापन में सी.पी. राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि यह शिखर सम्मेलन सततता, नवाचार, समावेशिता और साझा समृद्धि पर आधारित भारत-अमेरिका सहयोग के एक नए अध्याय की शुरूआत करेगा।

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केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्त रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी। इनमें

गोंडिया – जबलपुर लाइन दोहरीकरण

पुनारख-किऊल तीसरी और चौथी लाइन

गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के 8 जिलों में व्‍याप्‍त इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।

प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 5,407 गांवों में संपर्क में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 98 लाख है।

बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार आएगा और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव से परिचालन सुव्यवस्थित बनाने और यात्री तथा माल भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के भविष्‍य दृष्टि अनुरूप इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास द्वारा रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर वहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श द्वारा बहु-मार्गीय संपर्क और परिवहन दक्षता बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें जबलपुर के कचनार शिव मंदिर, बालाघाट में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी, दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य आदि शामिल हैं।

ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी और पत्थर के टुकड़े, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न, सार्वजनिक तेल और उत्पाद पीओएल जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन रेल मार्गों के क्षमता वर्धन से प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी। पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने से रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की प्रचालन लागत कम करने में सहायक होगा। साथ ही इससे तेल आयात में 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 करोड़ किलोग्राम घटेगा, जो एक करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

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मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ राज्य के नाम को बदलकर “केरलम” करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। केरल राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया, जो इस प्रकार है:

मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम केरलम‘ है। नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी नवंबर को ही मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की प्रबल मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल‘ ही दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद के अनुसार तत्काल कदम उठाकर राज्य का नाम बदलकर केरलम‘ करने की अपील करती है।”

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 3 में आगे प्रावधान है कि इस उद्देश्य से कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, और यदि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल को निर्दिष्ट अवधि के भीतर या राष्ट्रपति द्वारा अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए संदर्भित किया जाना चाहिए और इस प्रकार निर्दिष्ट या अनुमत अवधि समाप्त हो जानी चाहिए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के विषय पर विचार किया गया और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों और विधायी विभाग को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि और विधायी विभाग ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील व्यापार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सहयोग पर का उल्लेख किया। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने वर्तमान स्तर को अपर्याप्त बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।

श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।

भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का  लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।

श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।

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