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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 19 मार्च दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) तथा नशा मुक्ति समिति के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति जागरूकता हेतु एक सेमिनार एवं रैली का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली के लिए प्रेरित करना था।
*सेमिनार / कार्यशाला* के अंतर्गत छात्राओं को नशा मुक्ति के प्रति सचेत रहने हेतु व्याख्यान एवं काउंसलिंग प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव एवं अपूर्वा बाजपेई ने नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इसी क्रम में विमला देवी तथा श्वेता गोंड ने छात्राओं को नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं द्वारा एक *‘Say no to Drugs’ जागरूकता रैली* भी निकाली गई, जिसे प्राचार्या द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि नशा व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र—तीनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। छात्राओं ने “Say No to Drugs”, “तंबाकू को ना कहें”, “सिगरेट को ना कहें”, “पान मसाले को ना कहें” जैसे प्रभावी नारों के माध्यम से जन-जागरूकता का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त छात्राओं ने *रंगोली एवं पोस्टर* के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत किया, जिसका निर्देशन पूजा श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम एवं सेल्फ फाइनेंस की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा का पूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. साधना सिंह, पूजा श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्सना पांडे, डॉ. पारुल त्रिवेदी तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव तथा समस्त छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में ‘रिसर्च प्रोजेक्ट एवं मेथडोलॉजी’ पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विभाग द्वारा “रिसर्च प्रोजेक्ट एवं मेथडोलॉजी” विषय पर 11–12 मार्च 2026 को सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज शास्त्र एवं वाणिज्य विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों में शोध कौशल को विकसित करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. विनय जे. सेबेस्टियन ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने उच्च शिक्षा में शोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को शोध परियोजना तैयार करते समय वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे अकादमिक आयोजनों से अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के प्रथम दिन के पहले शैक्षणिक सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. ए. के. शर्मा (पूर्व विभागाध्यक्ष, एचएसएस विभाग, आईआईटी कानपुर) ने “सामाजिक विज्ञान में शोध कैसे करें” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने शोध समस्या की पहचान, शोध प्रश्नों का निर्माण, परिकल्पना निर्माण तथा उपयुक्त शोध पद्धति के चयन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध कार्य में नैतिकता और शैक्षणिक ईमानदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।

इसके बाद विशिष्ट अतिथि प्रो. अशुतोष सक्सेना (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, क्राइस्ट चर्च कॉलेज) ने “रिसर्च प्रोजेक्ट निर्माण की कला और विज्ञान: सामाजिक विज्ञान के यूजी एवं पीजी विद्यार्थियों के लिए चरणबद्ध मार्गदर्शिका” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध विषय चयन, डेटा संग्रहण, अध्यायों की संरचना तथा शोध निष्कर्षों की प्रस्तुति के बारे में व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। साथ ही उन्होंने शोध कार्य की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए योजनाबद्ध अध्ययन और आलोचनात्मक विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों सत्र अत्यंत संवादात्मक और ज्ञानवर्धक रहे। विद्यार्थियों ने शोध पद्धति, विषय चयन, डेटा संग्रहण तथा परियोजना लेखन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यक्रम के प्रो. विभा दीक्षित ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया और संयोजक डॉ. संजय शुक्ला धन्यवाद् ज्ञापन प्रस्तुत किया । कार्यक्रम के सहसंयोजक डॉ. प्रवीण के. सिंह, डॉ. मनीषी त्रिवेदी, डॉ. अर्चना वर्मा एवं डॉ. अर्चना पाण्डेय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना योगदान दिया.

कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया तथा इसे विद्यार्थियों के लिए शोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उपयोगी पहल बताया गया। कार्यशाला का दूसरा दिन 12 मार्च को शोध सिनॉप्सिस तथा प्रभावी शोध परियोजना लेखन पर केंद्रित सत्रों के साथ आयोजित किया जाएगा।

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असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग से 299 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में प्राप्त हुई

केंद्र सरकार ने असम के पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15वीं वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी की है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त, यानी 256.60 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह धनराशि असम राज्य की सभी पात्र 27 जिला पंचायतों (डीपी), सभी पात्र 182 ब्लॉक पंचायतों (बीपी), सभी पात्र 2192 ग्राम पंचायतों (जीपी) और सभी पात्र 3 स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) यानी बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी), कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (केएएसी) और दीमा हसाओ स्वायत्त परिषद (डीएचएसी) के लिए है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना शर्त अनुदान की पहली किस्त के रोके गए 42.70 करोड़ रुपये भी अतिरिक्त पात्र 3 एडीसी (बीटीसी, केएएसी और डीएचएसी) को जारी कर दिए गए हैं।

भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों, के लिए राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान को जारी करने की अनुशंसा करती है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किए जाते हैं। अप्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उनतीस विषयों के अंतर्गत स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए, अन्य स्थापना लागतों को छोड़कर किया जाएगा। वेतन प्रतिबंधित अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है जिनमें (क) स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना, जिसमें घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव मल एवं मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए; और (ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में लगभग ₹33,500 करोड़ की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने दिल्ली में लगभग ₹33,500 करोड़ की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सभा को संबोधित करते हुए  मोदी ने कहा, “आज हम सभी यहाँ दिल्ली के विकास को एक नई गति देने के लिए एकत्र हुए हैं।”

इन परियोजनाओं का दायरा व्यापक है, जो मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से लेकर हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए आधुनिक आवासीय परिसरों की स्थापना तक फैला हुआ है। मोदी ने जोर देते हुए कहा, “दिल्ली के लोगों ने नई आशा और नए संकल्प के साथ एक वर्ष पहले यहाँ डबल-इंजन की सरकार का गठन किया था और उसका परिणाम आज इन विकास कार्यों में दिखाई दे रहा है।”

इस आयोजन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं की व्यापक उपस्थिति की सराहना की और यह रेखांकित किया कि उनकी शक्ति और आत्मविश्वास, राज्य सरकार के सफल नेतृत्व में, राजनीति, विज्ञान और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में सशक्त भारत के कथानक को आगे बढ़ा रहे हैं। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “चाहे राजनीति हो, प्रशासन हो, विज्ञान हो, खेल हो या सामाजिक सेवा, भारत की नारी शक्ति प्रत्येक क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है।”

इस बात पर बल देते हुए कि दिल्ली भारतीय लोकतंत्र की वैश्विक पहचान और ऊर्जा का प्रतीक है, प्रधानमंत्री ने कहा कि राजधानी के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और कनेक्टिविटी का आधुनिकीकरण, जैसे नमो भारत ट्रेन और मेट्रो नेटवर्क का 375 किलोमीटर तक ऐतिहासिक विस्तार, विश्व के समक्ष भारत के आत्मविश्वास को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक है। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली जितनी अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और बेहतर रूप से कनेक्‍टेड होगी, उतनी ही दृढ़ता से भारत का आत्मविश्वास विश्व के सामने दिखाई देगा।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि डबल-इंजन शासन मॉडल के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी में प्रत्येक परिवहन सुविधा का व्यवस्थित रूप से उन्नयन किया जा रहा है, जिससे प्रतिदिन बस सेवाओं पर निर्भर रहने वाले लाखों नागरिकों को स्वच्छ, आधुनिक और आरामदायक सफ़र उपलब्ध हो सके। श्री मोदी ने कहा, “हालांकि, केंद्र द्वारा उपलब्‍ध कराई गई चार हजार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें पहले से ही संचालित हो रही हैं,  केवल पिछले एक वर्ष में ही अतिरिक्त 1,800 नई बसें चलाई गई हैं, जिनमें सैकड़ों ‘देवी बसें’ भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली की कॉलोनियों और मोहल्लों में अंतिम छोर तक संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए तैयार किया गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के समक्ष उपस्थित विविध चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार वर्तमान में मिशन मोड में कार्य कर रही है और विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि किस तरह पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने उन लाखों वाहनों को सफलतापूर्वक दूसरे मार्ग की ओर मोड़ दिया है जिन्हें पहले शहर में प्रवेश करना पड़ता था। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक व्यापक पहल प्रारंभ की गई है और इसकी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं पर कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।”

प्रधानमंत्री ने बल दिया कि सरकार राजधानी में जीवन की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने के लिए समर्पित है और विशेष रूप से पिछले एक वर्ष के दौरान कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन के साथ अब गरीब और मध्यम वर्ग, दोनों को निःशुल्क उपचार तथा महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो रहे हैं। दक्षता के एक नए युग को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा, “वर्तमान विकास मॉडल त्वरित कार्रवाई और ठोस परिणामों पर केंद्रित है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि परियोजनाएँ शीघ्र ही नियोजन से क्रियान्‍वयन के बुनियादी स्तर पर पहुँचें।”

कार्यक्रम से पूर्व सरोजिनी नगर के अपने दौरे का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन किए गए आधुनिक आवासीय परिसरों के उद्घाटन को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बल देते हुए कहा, “जो लोग राष्ट्र के संकल्पों को पूरा करने के लिए निरंतर परिश्रम करते हैं, वे सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक आवासीय परिस्थितियों के अधिकारी हैं, और यही इन नई अवसंरचना परियोजनाओं के पीछे प्रेरक शक्ति है।” आज हजारों फ्लैट लाभार्थियों को सौंपे जाने के साथ श्री मोदी ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि ये आधुनिक आवास राष्ट्र के “कर्मयोगियों” के लिए सुख और आकांक्षाओं के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि कल्याणकारी योजनाएँ बीहड़ गाँवों से लेकर शहरी केंद्रों तक, प्रत्येक परिवार तक पहुँच रही हैं, जिससे विशेष रूप से गरीब परिवारों, किसानों और श्रमिकों को लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पीएम स्वनिधि योजना’ के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि अकेले दिल्ली में ही लगभग 2 लाख रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को ₹350 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है, जिससे वे ऊँचे ब्याज वाले अनौपचारिक ऋणों से हटकर औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था की ओर अग्रसर हुए हैं। वित्तीय समावेशन में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो क्रेडिट कार्ड सुविधाएँ पहले केवल संपन्न वर्ग के लिए उपलब्ध थीं, अब उन्हें रेहड़ी-पटरी वालों तक भी विस्‍तृत किया जा रहा है, जिससे उनके छोटे व्यवसाय सशक्त हो सकें। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “स्वनिधि क्रेडिट कार्ड गरीबों के लिए आत्मसम्मान का एक नया माध्यम बन रहा है, जिससे जो लोग कभी हाशिए पर थे, वे अब आधुनिक वित्तीय साधनों के साथ सशक्त हो रहे हैं।”

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने 3 करोड़ “लखपति दीदी” बनाने के राष्ट्रीय संकल्प की ऐतिहासिक उपलब्धि साझा की और बताया कि अब 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से सशक्त हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन महिलाओं को पूंजी, बैंकिंग व्यवस्था तथा विशेष प्रशिक्षण तक पहुँच उपलब्ध करवा कर सरकार ने उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाया है। श्री मोदी ने कहा “हमारी बहनों की सफलता ने 3 करोड़ और लखपति दीदी बनाने के एक नए संकल्प के लिए प्रेरित किया है और मुझे विश्वास है कि हमारी नारी शक्ति के आशीर्वाद से यह लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।”

पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने एक शिकायत साझा की कि राज्य सरकार द्वारा पारंपरिक संथाल जनजातीय उत्सव के दौरान भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के दौरे के समय कथित रूप से अनादर दिखाया गया। अहंकार के पतन के संबंध में प्राचीन ज्ञान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार की ऐसी राजनीति को अंततः राज्य के नागरिक अस्वीकार कर देंगे। श्री मोदी ने रेखांकित किया, “राष्ट्रपति के कार्यक्रम का बहिष्कार और कुप्रबंधन संविधान तथा इस देश की प्रत्येक बेटी का अपमान है और जनता सत्ता के इस अहंकार को कभी क्षमा नहीं करेगी।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने दिल्ली को एक ऐतिहासिक शहर बताया, जो वर्तमान में “न्यू इंडिया” के आत्मविश्वास से परिभाषित एक परिवर्तनकारी दौर का साक्षी बन रहा है, जो विकसित भविष्य की आधारशिला बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी नागरिकों से राष्ट्रीय संकल्पों की पूर्ति के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। नई प्रारंभ की गई परियोजनाओं के लिए लोगों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सद्भाव और राष्ट्रीय गौरव की भावना का आह्वान किया। श्री मोदी ने रेखांकित किया,  “न्यू इंडिया का आत्मविश्वास हमें विकसित भविष्य की ओर ले जाएगा और मुझे विश्वास है कि दिल्ली का प्रत्येक परिवार बेहतर और अधिक समृद्ध जीवन देखेगा।”

हम आधुनिक और विकसित दिल्ली के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज प्रारंभ की गई परियोजनाएँ अवसंरचना को सुदृढ़ करेंगी, संपर्क में सुधार लाएंगी और शहर के लोगों के जीवन में सुगमता बढ़ाएँगी।

 

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भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने लखनऊ में अपने पहले रणनीतिक संचार सम्मेलन का आयोजन किया

भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने 7 मार्च, 2026 को उत्तर प्रदेश स्थित लखनऊ में अपने पहले रणनीतिक संचार सम्मेलन का आयोजन किया। करीब 500 लोगों की उपस्थिति के बीच आयोजित इस सम्मेलन में, राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक संचार पर विचार-विमर्श और पैनल चर्चाएं हुईं। पैनलिस्ट व वक्ताओं में वरिष्ठ राजनयिक, सरकार और मीडिया के संचार के जानकार शामिल थे। उपस्थित लोगों में सेंट्रल कमांड के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और सरकार व निजी क्षेत्र के संचार पेशेवर भी मौजूद रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में, सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने युद्ध की प्रकृति में आए मूलभूत बदलावों को रेखांकित किया, जिसमें अब सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी शामिल हैं। धारणा के प्रबंधन की बड़ी भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि धारणा वैधता को आकार देती है, वैधता असर पैदा करती है और असर से परिणाम तय होते हैं। उन्होंने नैरेटिव को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने और युद्ध की सीमा से नीचे के संघर्षों से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि रणनीतिक संचार प्रतिक्रियात्मक, छिटपुट या निजी असर पर आधारित नहीं रह सकता, बल्कि इसे संस्थागत, सिद्धांत-सहयोगी और क्षमता वाला होना चाहिए।

इस सम्मेलन में उभरते संचार क्षेत्र में भविष्य की तैयारियों के लिए एक क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का संस्थागतकरण विषय पर संस्थागत और राष्ट्रीय सुरक्षा आयामों पर एक विशेषज्ञ नीति-स्तर के सत्र का आयोजन किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज (सेवानिवृत्त), राजदूत यशवर्धन सिन्हा (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने सत्र को संबोधित किया।

उभरते बहुक्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचाररणनीतियांसंरचनाएंप्रक्रियाएं और तैयारी विषयवस्तु पर एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें नीतिगत और कार्यान्वयन संबंधी दृष्टिकोणों को जोड़ा गया। राजदूत दिलीप सिन्हा, डॉ. शांतनु मुखर्जी, श्रीमती वीणा जैन और लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय के साथ सेवानिवृत्त नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने सत्र के दौरान महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि साझा कीं। मन के क्षेत्र को आकार देनारणनीतिक क्षेत्र में धारणा प्रबंधन और सूचना की शक्ति और रणनीतिक संचार’ विषयवस्तु पर मीडिया के साथ पैनल चर्चा में धारणा प्रबंधन और सूचना की शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना के भीतर एक संस्थागत क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का परीक्षण करना और उभरते सूचना क्षेत्र में सिद्धांत, संरचनाओं, प्रक्रियाओं और तैयारियों पर कार्रवाही के लिए अंतर्दृष्टि पैदा करना था।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 9 मार्च क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल (GSWDC) द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में बड़े उत्साह के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम “Celebrating Strength, Equality & Empowerment” विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समकालीन समाज में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र एंकर अक्षिता वर्मा और आदर्श के स्वागत एवं परिचयात्मक संबोधन से हुई, जिन्होंने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कविता पाठ के सत्र में गौरी अग्निहोत्री, पूजा डे और श्रुति ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रभावशाली कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें महिलाओं की दृढ़ता, सशक्तिकरण और शक्ति के भाव को अभिव्यक्त किया गया।कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने महिला प्रतिनिधित्व पर केंद्रित चर्चित फिल्मों की समीक्षाएँ भी प्रस्तुत कीं। ये समीक्षाएँ पूजा डे, श्रेयांशी शर्मा, अंशिका मिश्रा और आदित्य कुमार द्वारा प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने मीडिया में महिलाओं की छवि और प्रस्तुति पर विचारोत्तेजक चर्चा को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “आईना-ए-समाज” शीर्षक से प्रस्तुत एक नाट्य मंचन रहा, जिसमें ध्रुव, श्रुति, विभांश, रिद्धिमा यादव, श्रेयांशी, शिवा, उपासना और क्रति ने अभिनय किया तथा इसका संचालन अक्षिता द्वारा किया गया। यह प्रस्तुति दो लिंगों के बीच भूमिका परिवर्तन की हास्यपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक संरचनाओं पर व्यंग्य करती हुई दिखाई गई।सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति भी शामिल रही, जिसने महिलाओं की गरिमा, साहस और शक्ति का सुंदर चित्रण किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन, संरक्षक एवं प्राचार्य, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर ने की। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन डॉ. विभा दीक्षित, समन्वयक, जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड वूमेन डेवलपमेंट सेल के मार्गदर्शन में किया गया। इस आयोजन में सह-समन्वयकों डॉ. फिरदौस, डॉ. आशीष, डॉ. रुक्मणी और डॉ. मनीषी त्रिवेदी का विशेष योगदान रहा।

छात्र समन्वयक आर्यन, आदर्श और पूजा ने कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात कॉलेज के संकाय सदस्यों को प्रो. सत्य प्रकाश और प्रो. मीत कमल द्वारा एक आनंदपूर्ण अवकाश समारोह में आमंत्रित किया गया, जिसने सभी शिक्षकों को आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना के साथ एकत्र होने का अवसर प्रदान किया।

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धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित किया। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भारत की शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव का उल्लेख किया और कहा कि भारत शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति और गुणवत्ता, नवाचार तथा सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

 धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगी। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सीखने, अनुसंधान, नवाचार और उसे लागू करने के अपार अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। श्री प्रधान ने कहा कि भारत नई शिक्षा नीति 2020 और ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर से लेकर सतत ऊर्जा तक, भारत एक विश्वसनीय नवाचार भागीदार के रूप में उभर रहा है और सहयोग, क्षमता निर्माण तथा साझा ज्ञान पर आधारित वैश्विक दक्षिण मॉडल को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनिश्चितता और तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा ही समाजों के बीच सबसे मजबूत सेतु है और भारत सहयोगी देशों के साथ ज्ञान के मजबूत सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने राजनयिकों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-प्रेरित, बहुविषयक और सुलभ शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पिछले छह वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा सुधारों, विशेष रूप से बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास को शिक्षा के साथ एकीकृत करने और अंतर्राष्ट्रीयकरण को मजबूत करने के संदर्भ में स्पष्ट दिशा प्रदान की है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय संस्थान संयुक्त, द्विभाषी और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव को गहरा कर रहे हैं, जबकि प्रमुख विश्वविद्यालय अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में सुविधा हो रही है, और ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल भारत के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी वैश्विक शिक्षा साझेदारी का खुला निमंत्रण है।

इस सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए:

  • भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में
  • एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
  • भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लिए यूजीसी विनियम 2023
  • अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर और सहायक ढांचे
  • भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
  • भारत इनोवेट्स 2026

सम्मेलन के दौरान भारत के विकसित हो रहे उच्च शिक्षा तंत्र पर प्रकाश डाला गया जिनमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग छात्र गतिशीलता, संयुक्त कार्यक्रम, अनुसंधान साझेदारी और परिसरों की स्थापना शामिल हैं।

स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में राजनयिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भागीदार देशों के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा और अल्पकालिक कार्यक्रमों में भाग लेने, संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने और विश्व स्तरीय दर्जा प्राप्त विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया।

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ट्राई ने बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754A) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

ट्राई ने बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754A) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर मोबाइल नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन किया

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने जनवरी 2026 के दौरान राजस्थान लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) के बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का हिस्सा) और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर किए गए स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है।

इस स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट के दौरान, ट्राई सभी सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क के लाइव प्रदर्शन डेटा को कॉल सेटअप सफलता दर, डेटा डाउनलोड और अपलोड गति, ध्वनि की गुणवत्ता जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों पर एकत्रित करता है। इसके लिए कई उन्नत परीक्षण वाले हैंडसेट का उपयोग किया जाता है। इनकी निगरानी उसी समय की जाती है और उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके उनका विश्लेषण किया जाता है। आईडीटी के परिणाम ट्राई की वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को सूचित किया जा सके और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

ट्राई क्षेत्रीय कार्यालय, जयपुर ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से राजस्थान के बीकानेर जिले में विस्तृत ड्राइव टेस्ट आयोजित किए। इन टेस्टों में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बों में 293.8 किलोमीटर, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग पर 41.1 किलोमीटर और पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) पर 104.2 किलोमीटर की दूरी शामिल थी।  ये टेस्ट 13 जनवरी 2026 से 16 जनवरी 2026 के बीच किए गए। मोबाइल सेवाओं के आईडीटी (आईडीटी) निष्कर्षों का सारांश नीचे दिया गया है:

  • बीकानेर जिले में बीकानेर शहर, नोखा और श्री डूंगरगढ़ कस्बे शामिल हैं।

(i) वॉयस सेवाएं

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 100.00 95.61 99.78 99.55
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 0.92 0.00 0.45
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 1.82 1.71 0.57 1.10
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.46 3.54 0.23 6.73
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 4.05 3.38 4.55 4.53

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट 5जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 225.02 अनुपलब्ध 337.31 अनुपलब्ध
2 औसत अपलोड थ्रूपुट 5जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 33.60 अनुपलब्ध 42.24 अनुपलब्ध
3 औसत डाउनलोड थ्रूपुट 4जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 42.17 14.41 54.68 33.96
4 औसत अपलोड थ्रूपुट 4जी (मेगाबिट्स/सेकंड) 13.41 4.33 21.46 12.61
5 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 25.17 39.96 24.12 33.64

ख. बीकानेर जिले में देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का भाग):

(i) वॉयस सेवाएं

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी))
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 100.00 74.07 100.00 95.83
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 0.00 0.00 4.35
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 1.89 2.19 0.86 1.76
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.00 6.25 9.09 23.81
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 3.78 3.03 3.58 3.60

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई
 
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 55.22 10.63 147.24 11.43
2 औसत अपलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 7.27 2.63 9.83 5.71
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 35.29 231.04 26.51 39.88

ग. बीकानेर जिले में पुगल से रणजीतपुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-911) :

(i) ध्वनि सेवाएँ

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 88.64 64.91 100.00 18.82
2 कॉल ड्रॉप दर प्रतिशत प्रतिशत 12.82 24.32 2.50 31.25
3 कॉल सेटअप का औसत समय (सेकंड में) सेकंड 2.10 3.20 1.63 5.39
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 7.69 4.35 5.00 अनुपलब्ध
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 3.90 3.38 4.25 2.26

(ii) डेटा सेवाएं:

क्र.सं. केपीआई
(स्वचालित चयन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी))
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 70.17 9.53 91.80 0.04
2 औसत अपलोड थ्रूपुट (मेगाबिट्स/सेकंड) 12.16 1.73 6.61 0.14
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 30.61 42.90 37.14 860.39

इस ड्राइव परीक्षण में बीकानेर शहर, नोखा और  डूंगरगढ़ कस्बों, देशनोक से नोरंगदेसर राजमार्ग (अमृतसर से जामनगर भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 754ए) का हिस्सा) और पूगल से रणजीतपुरा एनएच-911 राजमार्ग शहर के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर किया गया, जिसमें नोखा, बीकासर, बूढ़रों की ढाणी, रासीसर, पलाना, उदयरामसागर, गंगाशहर, सारा काजानी, मुक्ता प्रसाद नगर, नोरंगदेसर, सेरूणा, जोधासर शामिल हैं। गंगाजली, दंतौर, मीरांवाला, करणीसर, मियावाला, कंधारली और गौर आदि से गुजरते हुए श्री डूंगरगढ़, पूगल से रणजीतपुरा तक के क्षेत्र इसमें शामिल किए गए।

इस आईडीटी रिपोर्ट के निष्कर्ष संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाता के साथ साझा किए गए हैं ताकि वे आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई कर सकें। आईडीटी की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी के लिए, जयपुर स्थित ट्राई के क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल आईडी adv.jaipur@trai.gov.in पर ईमेल भेजा जा सकता है।

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भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने को लेकर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया

नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित विवेकानंद हॉल में 27 फरवरी 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) की ओर से ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना : नीतियां, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अनुसंधान एवं विकास संस्थान, सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक मंच पर साथ लाया गया ताकि भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतियों, चुनौतियों और रणनीतिक अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में वैश्विक सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण’ पर हाल ही में किए गए अध्ययन को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का आयोजन भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के वर्तमान परिदृश्य का आकलन करने, चुनौतियों की पहचान करने, सहयोग के अवसरों का पता लगाने, वैश्विक पद्धतियों और नीतिगत जानकारियों की पहचान करने, नीतिगत पहल पर संवाद को सुगम बनाने और भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता के लिए व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया गया था।

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इस कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, बीआईटीएस पिलानी; नीति आयोग; सीएसआईआर-सीईआरआई पिलानी; सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (एसएसपीएल), डीआरडीओ, एनआईईएलआईटी, नई दिल्ली; सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़; सीएसआईआर-एनपीएल, नई दिल्ली; आईआईटी जोधपुर; आईआईटी दिल्ली; विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस); दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय; सीएसआईआर-एनएएल, बेंगलुरु; अमृता विश्वविद्यालय; इंटेल इंडिया; लैम रिसर्च, एप्लाइड मैटेरियल्स, सेमीवर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड; सहस्रा सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली; और वेरसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (पी) लिमिटेड, नोएडा के प्रतिभागियों ने भाग लिया और भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अपने विचार साझा किए।

उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद के महत्व पर जोर दिया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी विरोधाभासी स्थिति, मजबूत वैश्विक डिजाइन नेतृत्व के बावजूद 95% आयात पर निर्भरता और साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत को 2030 तक एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों, आईएसएम 2.0 नवाचार प्रोत्साहन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

बीआईटीएस पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर और ईएस मैन्युफैक्चरिंग कमेटी के पदेन सदस्य प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टरों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत फाउंड्री की मेजबानी करने के बजाय स्वदेशी प्रौद्योगिकी, मिशन-मोड कार्यक्रमों और डीप-टेक स्टार्टअप पर केंद्रित रणनीति को अपनाने पर बल दिया। प्रो. राव ने नवाचारों को निम्न से उच्च टीआरएल में प्रगति करने और ‘वैली ऑफ डेथ’ से उबरने में मदद करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं के विस्तार की सिफारिश की।

तकनीकी चर्चा को तीन विषयगत सत्रों में संरचित किया गया था। पहला सत्र ‘अनुसंधान एवं विकास और नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र’ पर केंद्रित था। इस सत्र के वक्ताओं ने आईएसएम 2.0 से आग्रह किया कि वह पायलट फैब्स, विशिष्ट रक्षा सेमीकंडक्टर, स्वदेशी सामग्रियों/उपकरणों, डिजाइन-आधारित अनुसंधान एवं विकास, फोटोनिक्स/एआई फोकस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन, उत्पादन, उपयोग और निपटान को उनके पूरे जीवनचक्र में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन-कुशल तरीके से करने, विविध विनिर्माण, मजबूत आईपी, कौशल, बुनियादी ढांचे, वैश्विक साझेदारी और अनुकूल रणनीतियों के माध्यम से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की खाई को कम करने का प्रयास करे। “कुशल कार्यबल और प्रतिभा विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र” पर द्वितीय सत्र की अध्यक्षता भारत सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक (प्रौद्योगिकी) डॉ. मनीष के हुडा ने की। इस सत्र के वक्ताओं ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए संतुलित डिजाइन-विनिर्माण विकास, सीएमओएस-केंद्रित शैक्षणिक कार्यक्रमों, संरचित कौशल विकास पहल, उद्योग जगत से सहयोग और कार्यबल विकास पर जोर दिया।

तृतीय सत्र का मुख्य विषय ‘नीति, शासन और संस्थागत ढांचा’ रहा। इस सत्र में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया।  इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की। वक्ताओं ने वैश्विक नीति मॉडलों की तुलना की, एकीकृत शासन और एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की आवश्यकता पर बल दिया। एआई-चिप स्टार्टअप के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही सेमीकंडक्टर कूटनीति, दुर्लभ खनिजों तक पहुंच, आपूर्ति शृंखला में अनुकूलन और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। तृतीय सत्र: नीति, शासन और संस्थागत ढांचा में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की।

‘रणनीतिक मार्ग : भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक रोडमैप’ पर एक पैनल चर्चा और समापन सत्र के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। सत्र की अध्यक्षता भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी, बेंगलुरु) के अंतःविषय विज्ञान प्रभाग के डीन और नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र के प्रोफेसर नवकांत भट ने की। विशेषज्ञों ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम 1.0 और 2.0) के माध्यम से भारत सरकार की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि अगले चरण में बेहतर क्रियान्वयन, नवाचार और विस्तार की आवश्यकता है। उद्योग जगत के दृष्टिकोण ने भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ साझेदारी सहित शिक्षा-उद्योग सहयोग के माध्यम से उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और संरचित कार्यबल के विकास पर जोर दिया।

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वक्ताओं ने स्वदेशी एनालॉग (अनुरूप), सेंसर और एप्लीकेशन-विशिष्ट उत्पादों में भारत की ताकत पर जोर दिया, साथ ही विशिष्ट सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में उच्च विशिष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। चिप-टु-चिप-लेस आर्किटेक्चर और क्वांटम-इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों को अभूतपूर्व प्रगति के अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला के समापन पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चारू वर्मा ने अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं ने सामूहिक रूप से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास, डिजाइन, विनिर्माण, कौशल और नीतिगत समर्थन में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और रणनीतिक एसएंडटी डोमेन पर बहु-हितधारक संवाद को सुविधाजनक बनाने में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की भूमिका को भी रेखांकित किया।

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आईएनएसवी कौंडिन्या को मुंबई बंदरगाह में ध्वजारोहण के साथ उतारा गया

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pic(2)(4)O091.jpegभारतीय नौसेना के नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्या को मुंबई बंदरगाह पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा औपचारिक रूप से ध्वजारोहण किया गया

यह ध्वजारोहण समारोह ओमान सल्तनत के लिए पोत की पहली विदेशी यात्रा के सफल समापन तथा अरब सागर को पार कर की गई उसकी ऐतिहासिक वापसी यात्रा का प्रतीक है, जो भारत की चिरस्थायी समुद्री विरासत और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-ओमान संबंधों की सुदृढ़ता की पुष्टि करता है।

आईएनएसवी कौंडिन्या एक पारंपरिक विधि से निर्मित सिलाईदार पोत है, जिसे प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीकों का पूर्णतः अनुसरण करते हुए बनाया गया है। इसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सी से हाथों द्वारा सिला गया है तथा प्राकृतिक रेज़िन से सील किया गया है। यह पोत भारत की सदियों पुरानी समुद्री शिल्प परंपरा के पुनरुद्धार का प्रतीक है और भारतीय ज्ञान प्रणालियों की पुनः खोज एवं संरक्षण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अजंता गुफाओं में पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के एक चित्रण से प्रेरित होकर तथा भारतीय नौसेना की देखरेख में पारंपरिक कारीगरों के सहयोग से निर्मित यह पोत, पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक नौसेना अभियांत्रिकी के सामंजस्य का सशक्त उदाहरण है।

आईएनएसवी कौंडिन्या 29 दिसंबर 2025 को पोरबंदर से मस्कट के लिए रवाना हुई और भारतीय नाविकों द्वारा प्राचीन काल से प्रयुक्त समुद्री मार्गों का अनुसरण किया। यह 14 जनवरी 2026 को पोर्ट सुल्तान काबूस पहुँची, जहाँ ओमान के गणमान्य व्यक्तियों तथा भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति में इसका औपचारिक स्वागत किया गया। अपने प्रवास के दौरान यह पोत आम आगंतुकों के लिए खुला रहा और समुद्री विरासत तथा सांस्कृतिक कूटनीति के एक तैरते प्रतीक के रूप में कार्य करता रहा। इस यात्रा ने भारत-ओमान संबंधों को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया, जिनकी जड़ें मसालों, वस्त्रों और लोबान के व्यापार में हजारों वर्षों से निहित हैं, तथा अरब सागर क्षेत्र में साझा समुद्री परंपराओं को और मजबूत किया।

इस अभियान ने भारतीय नौसेना की भूमिका को केवल समुद्री सुरक्षा प्रदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत समुद्री विरासत के संरक्षक के रूप में भी रेखांकित किया। प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम पर नामित यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्राचीन समुद्री नौवहन परंपरा और समुद्री पहुंच का प्रतीक है। इसकी सफल यात्रा पारंपरिक जहाज निर्माण पद्धतियों की दृढ़ता तथा चालक दल के उच्च स्तर के पेशेवर कौशल का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करती है।

मुंबई में आयोजित ध्वजारोहण समारोह एक ऐतिहासिक समुद्री विरासत पुनरुद्धार परियोजना की परिणति का प्रतीक होगा तथा समुद्री पहुंच, सांस्कृतिक कूटनीति और पारंपरिक समुद्री शिल्पकला के संरक्षण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pic(5)(1)E0K9.jpeg

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