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“भारत 3 लाख कार्यबल के साथ नाविकों के शीर्ष 3 वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है”: सर्बानंद सोनोवाल

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज चेन्नई में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन और इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों का उल्लेख किया। सर्बानंद सोनोवाल ने 2,196 स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने हुए कहा, “आप एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जो पिछले एक दशक में पुनर्जीवित हुआ है और भारत की आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र में वैश्विक नेताओं में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, पत्तन, पोत परिवहन, जहाज निर्माण, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान और हरित समुद्री प्रौद्योगिकियों में करियर पहले कभी इतने विविध या मांग वाले नहीं रहे।”

भारत के बंदरगाहों का वर्ष 2014 से व्यापक आधुनिकीकरण और मशीनीकरण हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप इनका “टर्नअराउंड टाइम” केवल 0.9 दिन रह गया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर जैसे उन्नत समुद्री देशों के बंदरगाहों से आगे निकल गया है। नौ भारतीय बंदरगाह अब वैश्विक स्तर पर शीर्ष 100 बंदरगाहों में शामिल हैं। 76,000 करोड़ रुपये के निवेश से वधावन बंदरगाह का निर्माण दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में से एक होगा। पिछले दशक में अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की आवाजाही सात गुना बढ़ गई है और तटीय नौवहन की मात्रा में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

‘समुद्री अमृत काल परिकल्पना 2047’ भारत के समुद्री पुनरुत्थान के लिए एक दीर्घकालिक रूपरेखा प्रदान करता है। कुल 80 लाख करोड़ रुपये का निवेश बंदरगाह अवसंरचना, तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाज निर्माण और हरित नौवहन पहलों पर केंद्रित किया जा रहा है। सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों पर हरित गलियारे, हरित हाइड्रोजन बंकरिंग की स्थापना की है और टिकाऊ समुद्री परिचालन को प्रोत्साहित करने के लिए मेथनॉल-ईंधन वाले जहाजों को प्रोत्साहन दिया है।

सरकार ने जहाज निर्माण और जहाज पुनर्चक्रण को पुनर्जीवित करने के लिए 70,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक पैकेज भी शुरू किया है। 25,000 करोड़ रुपये के कोष वाला समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) भारत की टन भार और जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रोत्साहन देने के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करेगा। एक संशोधित जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) घरेलू जहाज निर्माण में लागत संबंधी कमियों को दूर करती है, जिसमें जहाज-तोड़ने के लिए क्रेडिट नोट भी शामिल हैं, जबकि जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) ग्रीनफील्ड क्लस्टर, ब्राउनफील्ड यार्ड विस्तार और जोखिम कवरेज का समर्थन करती है। विशाखापत्तनम में 305 करोड़ रुपये के निवेश के साथ भारतीय जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र (आईएसटीसी) डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, इंजीनियरिंग और कौशल विकास के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा।

भारत का नाविक कार्यबल एक दशक पहले के 1.25 लाख से बढ़कर आज तीन लाख से अधिक हो गया है, जिससे देश प्रशिक्षित नाविकों के शीर्ष तीन वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। इससे भारत और विदेशों में नौवहन, जहाज संचालन, रसद और संबद्ध समुद्री उद्योगों में व्यापक अवसर पैदा होते हैं।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन पहलों की रोजगार क्षमता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “इन परिवर्तनकारी उपायों से जहाज निर्माण, बंदरगाहों, नौवहन, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों में 25-30 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है। भारत का समुद्री पुनरुत्थान केवल आर्थिक विकास के बारे में ही नहीं है, बल्कि एक विकसित भारत और एक आत्मनिर्भर भारत में हमारे युवाओं के लिए सार्थक करियर बनाने के बारे में भी है।”

श्री सोनोवाल ने कहा, “इस क्षेत्र में कदम रखने वाले स्नातकों पर नैतिकता को बनाए रखने, नवाचार को अपनाने और तकनीकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने का दायित्व होता है, जो भारत के एक समुद्री महाशक्ति और समुद्री अर्थव्यवस्था में एक वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभरने में सीधे योगदान करते हैं।” 

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एक दिन एक घंटा एक साथ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान — एक दिन, एक घंटा, एक साथ — पर पूरा देश सुबह 8 बजे श्रमदान के अभूतपूर्व कार्य में एकजुट होकर स्वच्छ भारत के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रदर्शन किया। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित चल रहे स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) 2025 अभियान (17 सितंबर से 2 अक्तूबर ) के तहत, करोड़ों नागरिकों ने स्वैच्छिक श्रमदान किया और स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के जन आंदोलन की भावना को मजबूत किया।

देश के कोने-कोने से नागरिक सुबह 8:00 बजे स्वैच्छिक श्रमदान के ऐतिहासिक एक घंटे के लिए एकजुट हुए। केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में किरण थिएटर के पास सेक्टर 22 मार्केट में श्रमदान करके “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” अभियान का नेतृत्व किया। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, श्री सी आर पाटिल ने नई दिल्ली के ओखला बैराज स्थित कालिंदी कुंज घाट पर श्रमदान किया। विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों ने अपने-अपने शहरों के विभिन्न हिस्सों में श्रमदान करके “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” पहल में भाग लिया। आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री, श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के रतनपुर में स्वैच्छिक सेवा प्रदान करके राष्ट्रव्यापी स्वच्छता श्रमदान में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस उल्लेखनीय राष्ट्रव्यापी पहल में समाज के विविध वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई, जिनमें स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतें, राजनीतिक नेतृत्व, क्षेत्रीय विभाग कार्यालय, प्रमुख संगठन, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), गैर सरकारी संगठन और सभी क्षेत्रों के नागरिक शामिल थे।

अभियान के एक सप्ताह से भी अधिक समय बाद, एसएचएस 2025 एक सच्चे जन आंदोलन के रूप में विकसित हो गया है, जो नागरिक कार्रवाई, सामुदायिक भागीदारी और स्वच्छ भारत मिशन को मज़बूत करने के साझा संकल्प से प्रेरित है। सबसे चुनौतीपूर्ण और उपेक्षित क्षेत्रों – स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (सीटीयू) – को बदलने, कचरा-संवेदनशील बिंदुओं को हटाने और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता सुनिश्चित करने पर केंद्रित प्रयास किए गए हैं। एसएचएस 2025 अभियान में 5 करोड़ से अधिक नागरिक शामिल हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 7 लाख सीटीयू  और 3 लाख सार्वजनिक स्थानों की सफाई हुई है।

स्वच्छ सार्वजनिक स्थान पहल के तहत, मीरा भयंदर में 4,000 से ज़्यादा छात्रों, गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और नागरिकों के साथ मिलकर प्लास्टिक कचरे को हटाने, स्वास्थ्य पहलों और स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाए गए। भारतीय तटरक्षक क्षेत्र (एनई) ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सफाई अभियान चलाया, जहाँ 2,500 से ज़्यादा स्वयंसेवकों ने 1,960 किलोग्राम समुद्री कूड़ा और 1,050 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया।

जैसे-जैसे स्वच्छता आंदोलन अपने उत्सवी दौर में प्रवेश कर रहा है, वैसे-वैसे स्थिरता पर ध्यान केंद्रित हो रहा है, और भारत भर के समुदाय शून्य-अपशिष्ट और प्लास्टिक-मुक्त तरीकों को अपना रहे हैं। पर्यावरण-अनुकूल पूजा पंडालों में टिकाऊ सजावट से लेकर नवरात्रि के दौरान फूलों से सजी कटरा स्थित वैष्णो देवी की खूबसूरती से सजी प्रतिमा तक, ये सभी उत्सव स्वच्छ और हरित उत्सवों के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। राजकोट में, स्वच्छता की भावना एक जीवंत रंगोली उत्सव के माध्यम से जीवंत हुई।

केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सूरत में 6,000 सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया और 10 करोड़ रुपये के कल्याण कोष की घोषणा की, जबकि नवी मुंबई, उज्जैन और रायगढ़ जैसे शहरों में स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए, जिनमें रायगढ़ में 2,600 से अधिक और इंदौर में 15,000 से अधिक प्रतिभागियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया।

एनआईटी जमशेदपुर ने 1,090 किलो कबाड़ से बने ‘मेक इन इंडिया’ शेर का अनावरण किया, जिससे उसकी कुल कबाड़ कला 2,360 किलो हो गई। रेल मंत्रालय ने देश भर में ‘कचरे से कला’ प्रदर्शनियाँ आयोजित कीं। तिरुपति नगर निगम ने भी 500 पेड़ लगाकर, 30,000 पौधे और 25,000 कम्पोस्ट बैग वितरित करके शहर की हरियाली में योगदान दिया।

एसएचएस 2025 यह प्रदर्शित करता रहेगा कि किस प्रकार मंत्रालयों, नगर पालिकाओं, संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर काम करने से देश के स्वच्छता परिदृश्य को नया आकार दिया जा रहा है।

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एफएसएसएआई ने फोस्कोस पोर्टल पर आयुर्वेद आहार के निर्माण के लिए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने अपने खाद्य सुरक्षा अनुपालन प्रणाली (फोस्कोस) पोर्टल पर आयुर्वेद आहार उत्पादों के लिए एक समर्पित लाइसेंसिंग और पंजीकरण सुविधा आधिकारिक तौर पर शुरू की है। इस महत्वपूर्ण कदम से भारत भर के निर्माता पारंपरिक आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और विपणन हेतु लाइसेंस के लिए सहजता से आवेदन कर सकेंगे।

आयुर्वेद आहार के लिए नए ‘व्यापार का प्रकार’ (केओबी) ढांचे का उद्देश्य इस क्षेत्र को औपचारिक और सुव्यवस्थित बनाना है और प्रामाणिक आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णित पारंपरिक नुस्खों को समकालीन खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के साथ संयोजित करना है। इस कदम का उद्देश्य इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एक विनियमित मार्ग बनाकर खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों को बढ़ावा देना है।

यह विनियमन व्यक्तिगत पोषण के मूल आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित है, जो व्यक्ति की विशिष्ट संरचना (प्रकृति) के अनुसार आहार को अनुकूलित करता है। इन पारंपरिक सूत्रों का मानकीकरण करके, एफएसएसएआई के इस कदम से खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रामाणिक और विनियमित आयुर्वेद आहार की उपलब्धता निर्धारित आयुर्वेदिक उपचार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में काम करेगी।

उद्योग के लिए एक सुचारु परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए एफएसएसएआई ने 25 जुलाई 2025 के एक आदेश के माध्यम से 91 अनुमोदित आयुर्वेद आहार व्यंजनों की एक सूची पहले ही प्रकाशित कर दी है। इससे खाद्य व्यवसाय संचालकों को इस नई श्रेणी के अंतर्गत उत्पादों के निर्माण के लिए एक स्पष्ट, पूर्व-अनुमोदित संदर्भ प्राप्त होता है, जिससे प्रामाणिकता और नियामक अनुपालन दोनों सुनिश्चित होते हैं।

यह पहल, आयुष मंत्रालय के साथ करीबी सहयोग में विकसित की गई है, जो आयुर्वेद की गहन ज्ञान परंपरा को आधुनिक खाद्य सुरक्षा प्रथाओं के साथ एकीकृत करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल उद्योग से जुड़े हितधारकों को लाभ मिलेगा, बल्कि जनस्वास्थ्य को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।

फोस्कोस पोर्टल और स्वीकृत आयुर्वेद आहार की सूची से संबंधित आधिकारिक आदेश को निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है:

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हिंदी दिवस पर बाली “इंडोनेशिया” में लोकगायिका अपर्णा सिंह ने की शिरकत

भारतीय स्वरूप संवाददाता अपर्णा सिंह ने बताया ये मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात है। #स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र बाली एवं शब्द यात्रा के संयुक्त तत्वाधान से चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मेलन में हमारे गुरुजनों, माता पिता, बड़े बुजुर्गों, मित्रों और जीवन साथी के आशीर्वाद और सहयोग से भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य इंडोनेशिया के बाली द्वीप में प्राप्त हुआ। लखनऊ से गई अपर्णा सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ अपनी टीम के साथ स्वागत गीत से और फिर कजरी गा कर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस गीत के माध्यम से अपने देश की माटी उसकी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठा। खचाखच भरा पूरा सभागार लोगों की तालियों से पूरा वातावरण गूंज उठा#। भारत और बाली के साथ ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए अनेक प्रतिष्ठित लेखक और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माननीय निदेशक आदरणीय नवीन मेघवाल और बाली के जनरल काउंसलर डॉ शशांक ने सभी प्रतिभागियों,साहित्यकारों को अंग वस्त्र और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया । विशिष्ट अतिथि के रूप में बाली से पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डियान तथा पद्मश्री आई वायन डिबिया ने मंच की शोभा बढ़ाई। इस आयोजन ने ना केवल साहित्य के नए आयाम प्रस्तुत किए बल्कि विभिन्न देशों के साहित्यिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधताओं को समझने का एक सुनहरा मंच भी प्रदान किया । इस प्रकार के आयोजन ना केवल साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि देशों के बीच आपसी संबंधों और सौहार्द बढ़ाने में सहायक होते हैं।

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स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सेहत चौपाल का आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 सितम्बर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर में उजाला सिग्नस नोबल हॉस्पिटल, स्वरूप नगर के सौजन्य से राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा मिशन शक्ति,एनएसएस और रोवर रेंजर्स के संयुक्त तत्वाधान में “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार सप्ताह” के अंतर्गत एक स्वास्थ शिविर – मिशन शक्ति सेहत चौपाल का आयोजन किया गया गया जिसमें 200 से अधिक छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने भागीदारी की तथा विभिन्न प्रकार की जांच कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम तथा निदेशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। महाविद्यालय की मिशन शक्ति कोर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता, जागरूकता एवं सशक्तिकरण पर सिग्नस अस्पताल से पधारे विशेषज्ञों रोहित शुक्ला, चिकित्सक विनस सचान, देवेंद्र सिंह, दिव्या राजपूत, पुष्पांजलि प्रीति पाल, गोविंद झा एवं रमन दिवाकर ने विस्तृत जानकारी दी। छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछकर लाभ लिया। शिक्षिकाओं ने सहयोग करते हुए जागरूकता संदेश प्रसारित किए। स्वास्थ्य परामर्श व मार्गदर्शन प्रदान कर महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में डॉ. अर्चना दीक्षित डॉ. अंजना श्रीवास्तव डॉ ज्योत्स्ना पांडे, डॉ विनीता श्रीवास्तव, डॉ. दीप्ति शुक्ला, डॉ. साधना सिंह, डॉ. पुष्पलता तथा पूजा श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड, डॉ कविता विश्नोई, कार्यलयाधिक्षक कृष्णेंद कुमार एवं समस्त अन्य एन एस एस वॉलेंटियर्स की विशेष भूमिका सराहनीय रही

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शिक्षा समझो वही सफल, जो कर दे आचरण निर्मल”

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन.सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज कानपुर में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत “नारी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान- एक सशक्त भविष्य का आधार”, विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर सुमन, मुख्य वक्ता डॉ. स्वीटी श्रीवास्तव, वरिष्ठ आचार्य प्रो. निशी प्रकाश, निर्णायक मंडल में कैप्टन ममता अग्रवाल, किरन तथा शिक्षाशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण के साथ किय। उपस्थित सभी शिक्षिकाओं ने सरस्वती माँ के चरणों में पुष्प अर्पित किए। मुख्य अतिथि, प्राचार्या एवं निर्णायक मंडल का स्वागत उत्तरीय तथा स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।

प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने विषय प्रवर्तन करते हुए महिला सशक्तिकरण में शिक्षा योगदान के विभिन्न पक्षों को उजागर किया तथा छात्राओं को स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम बढ़ाने को प्रोत्साहित किया उन्होंने मिशन 5.0 की संपूर्ण रूपरेखा भी प्रस्तुत की। प्राचार्या प्रो. सुमन ने शिक्षाशास्त्र विभाग को नवरात्रि में आयोजित नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम हेतु शुभकामनाएं तथा बधाई दी। उन्होंने स्त्री और पुरुष एक दूसरे का पूरक बताया तथा मिशन 5.0 की सफलता के लिए समाज को सम्वेदनशील बनाने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिये।

मुख्य वक्ता डॉ. स्वीटी श्रीवास्तव, ने व्याख्यान के विषय को समसामयिक एवं कभी ना पुराना होने वाला बताया। उन्होंने नारी शिक्षा के लिए समाज में जागरूकता एवं अभिप्रेरणा को आवश्यक बताया। उन्होंने छात्राओं को परेशानी में भी मुस्कुराते रहने को कहा जिससे उनकी शक्ति बनी रहे। सफलता के लिए समय प्रबंधन, उत्तरदायित्व का निर्वाह, मूल्य शिक्षा, संयम, नियमित उपस्थिति, आदि के महत्त्व पर प्रकाश डाला |
प्रो. निशी प्रकाश ने बेटे-बेटी की एक समान शिक्षा और एक समान व्यवहार को नारी सम्मान के लिए अनिवार्य बताया

पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार स्नेहा सिंह,
द्वितीय पुरस्कार रोशनी निषाद, तृतीय पुरस्कार कुमकुम पांडेय और पावनी पांडेय ने संयुक्त रूप से तथा सांत्वना पुरस्कार मुस्कान थारू ने प्राप्त किया।

कैप्टन ममता अग्रवाल ने पाठ्य सहगामी क्रियाओं के महत्त्व को बताया तथा आंतरिक सुंदरता को ज्यादा महत्तवपूर्ण बताया। श्रीमती किरन ने पोस्टर से जुड़े तकनीकी बिंदुओं को बताया। स्वयं में ईमानदारी और नैतिकता बनाए रखें।

डाॅ. ऋचा सिंह तथा डाॅ. संगीता सिंह ने मंच संचालन का कार्य कुशलतापूर्वक किया। डाॅ. अनामिका ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय योगदान दिया। प्राचार्या, मुख्य अतिथि, शिक्षिकाओं तथा छात्राओं की कार्यक्रम में एक साथ उपस्थिति ही वास्तव में महिला सशक्तिकरण की ओर उनके बढ़ते हुए कदम हैं| इस अवसर पर प्रो. रेखा चौबे, प्रो. अलका टंडन, डाॅ. शुभा बाजपेयी, डाॅ. रोली मिश्रा, डाॅ. कोमल, डाॅ. रश्मि, डाॅ. शिवांगी, डाॅ. समीक्षा, डाॅ. शैल उपस्थित रहीं।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “आचार संहिता” पर व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में आईक्यूएसी (IQAC) और वैल्यू एजुकेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में “आचार संहिता पर प्रेरणादायी व्याख्यान”  आयोजित हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत प्रो सुजाता चतुर्वेदी(आईक्यूएसी संयोजक) के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद *प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन* ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा में अनुशासन और मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य व्याख्यान डॉ. विमल सिंह, शिक्षा विभाग, सीएसजेएम विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। उन्होंने छात्रों को ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिकता को जीवन और शिक्षा की दिशा में मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रचनात्मकता जोड़ते हुए *”सेल्फी विद ग्रैंडपेरेंट्स”* प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा प्रो श्वेता चन्द (वैल्यू एजुकेशन सेल संयोजक) द्वारा की गई। अंत में डॉ. धनंजय डे ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही तथा यह संदेश दिया गया कि नैतिक आचरण व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।

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सशक्त नारी – समृद्ध प्रदेश : मिशन शक्ति का पाँचवाँ चरण

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में “मिशन शक्ति” कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर प्रो. मीत कमल ने आए हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम में थाना कोतवाली से एस.ओ. अंकिता तिवारी, एस.आई. चन्द्रा कुमारी और एस.आई. शिवम पांडेय ने विशेष रूप से छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और शासन द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से —

• 1090 : वूमेन पावर लाइन

• 1930 : साइबर हेल्पलाइन

• 181 : महिला हेल्पलाइन

• 1098 : चाइल्ड लाइन

• 108 : एम्बुलेंस सेवा

• 112 : आपातकालीन पुलिस सेवा

• 101 : अग्निशमन सेवा

एस.ओ. अंकिता तिवारी ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग हमेशा उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने छात्राओं से सुरक्षा के प्रति सजग रहने और हेल्पलाइन नंबरों का सही समय पर प्रयोग करने की अपील की।

कार्यक्रम की सफलता में मिशन शक्ति के छात्र-स्वयंसेवक — सुंदरम मिश्रा, कांची त्रिपाठी, वारिशा, आदर्श सिंह, विख्यात दुबे, महमूद आदि का विशेष योगदान रहा। वक्ताओं ने कहा कि “मिशन शक्ति” का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें हर स्तर पर सुरक्षा व सम्मान दिलाना और आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित करना है।

कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने “नारी शक्ति, नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन – मिशन शक्ति का अभियान।” जैसे नारों से माहौल गुंजायमान कर दिया

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देश के आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए आदि युवा फेलोशिप एवं आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक की शुरुआत

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र भारत के साथ साझेदारी में आज आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदि युवा फेलोशिप एवं आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह एक प्रमुख पहल है, जिसे विश्व के सबसे बड़े जनजातीय जमीनी स्तर के नेतृत्व अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

आदि कर्मयोगी अभियान का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष (15 नवंबर 2024 – 15 नवंबर 2025) के भाग के रूप में किया था। इसका उद्देश्य 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 550 जिलों के एक लाख आदिवासी बहुल गांवों के 11 करोड़ नागरिकों को इसमें सीधे शामिल करना है। उत्तरदायी, जवाबदेह एवं नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांतों पर आधारित यह अभियान शासन को एक जन अभियान बनाने एवं विकसित भारत 2047 की नींव रखने की कोशिश करता है।

इस पहल के एक भाग के रूप में, आदि सेवापर्व (17 सितंबर – 02 अक्टूबर 2025) चल रहा है, जिस दौरान जनजातीय समुदाय एवं सरकारी अधिकारी मिलकर जनजातीय ग्राम विजन 2030 कार्य योजना तैयार करेंगे  ताकि समावेशी विकास की दिशा में स्थानीय विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

आदि युवा फेलोशिप

संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा समर्थित आदि युवा फेलोशिप, अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है जिसे संरचित शिक्षा, मार्गदर्शन एवं कैरियर विकास के माध्यम से जनजातिय युवाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

  • चयनित जनजातीय युवा 12 महीने की वेतन फेलोशिप प्राप्त करेंगे, जो एक अनुकूलित शिक्षण योजना होगी जिसमें ज्ञान निर्माण, नौकरी के अनुभव एवं चिंतनात्मक अभ्यास के बीच का संतुलन स्थापित किया जाएगा।
  • फेलो को मासिक भत्ते, व्यापक स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा तथा उच्च गुणवत्ता वाले संयुक्त राष्ट्र एवं वाणिज्यिक शिक्षण प्लेटफार्मों तक पहुंच प्राप्त होगी।
  • यह कार्यक्रम फेलो को राष्ट्रीय कौशल और रोजगारपरकता योजनाओं जैसे पीएमकेवीवाई 4.0, एनएपीएस और पीएम विकसित भारत रोजगार योजना से जोड़ेगा, जिससे दीर्घकालिक करियर के लिए मार्ग सुनिश्चित होगा।
  • फेलो को संरचित मार्गदर्शन, सहकर्मी से सहकर्मी को सीखने और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों के संपर्क का भी लाभ प्राप्त होगा।
  • अगले महीने एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से 16 फेलो के पहले बैच का चयन किया जाएगा और उन्हें राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ रखा जाएगा।

आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक

  • आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक पहल यूएनएफपीए द्वारा समर्थित है जो जनजातीय युवाओं को जमीनी स्तर पर परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक बनने तथा जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए सक्षम बनाएगी।
  • 82 संयुक्त राष्ट्र सामुदायिक स्वयंसेवक आदि कर्मयोगी के रूप में यूएनएफपीए द्वारा समर्थित स्वयंसेवकों को दो महीने की गहन जमीनी स्तर की भागीदारी के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों के 82 ब्लॉकों में तैनात किया गया है।
  • स्वयंसेवक ग्राम विजन 2030 योजना, जागरूकता अभियान, आउटरीच तथा योजनाओं एवं सेवाओं तक बेहतर पहुंच में सहायता प्रदान करेंगे।
  • उनके योगदान से गांव स्तर पर सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन को मजबूती मिलेगी।

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“आदि युवा एवं आदि कर्मयोगी फ़ेलोशिप समावेशी विकास के प्रति हमारी दृढ़ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब हैं, जिसका उद्देश्य युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने व नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व मेंहमें विविधता में भारत की शक्ति का समर्थन करने और 2030 एजेंडा और विकसित भारत 2047, दोनों की दिशा में गतिशील प्रगति देने पर गर्व है।”

-— शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्यवक

“यह साझेदारी आदिवासी युवाओं को अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने में सक्षम बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह न केवल समावेशी प्रगति को गति देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी समुदाय भारत की विकास गाथा के केंद्र में हों। मंत्रालय हमारे युवाओं को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वे भारत के भविष्य के लिए नेतृत्वकर्ता, नवप्रवर्तक और परिवर्तन के वाहक के रूप में उभरें।”

— विभु नायर, सचिवजनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार

आदि युवा फ़ेलोशिप और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी युवाओं को भविष्य के नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तनकारी के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कौशलमार्गदर्शन और जमीनी स्तर पर जुड़ाव को बढ़ावा देकरयह पहल सुनिश्चित करती है कि आदिवासी समुदाय अपने विकास को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनें। भारत में जनजातीय कार्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के बीच इस साझेदारी के माध्यम सेयह अभियान समावेशी विकास, सहभागी शासन और विकसित भारत 2047 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

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भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक ने असम में नागरिक सेवाओं के उन्नयन के लिए 125 मिलियन डॉलर के ऋण पर हस्ताक्षर किए

भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज असम राज्य के छह जिला मुख्यालयों और गुवाहाटी में शहरी जीवन-यापन की क्षमता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन मजबूत करने के लिए 125 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

असम शहरी क्षेत्र विकास परियोजना के लिए ऋण समझौते पर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एडीबी के इंडिया रेजिडेंट मिशन की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका ने हस्ताक्षर किए।

इस परियोजना से असम के 3,60,000 निवासियों को निरंतर मीटरयुक्त जल आपूर्ति और वर्षा जल प्रबंधन प्रणालियों के उन्नयन का लाभ मिलेगा। इसका उद्देश्य संस्थागत सुधारों और क्षमता निर्माण के माध्यम से शहरी शासन को सुदृढ़ बनाना भी है।

प्रमुख बुनियादी ढाँचे के निवेश में बारपेटा, बोंगाईगाँव, धुबरी, ग्वालपाड़ा, गोलाघाट और नलबाड़ी जिला मुख्यालयों में प्रतिदिन 72 मिलियन लीटर की संयुक्त क्षमता वाले छह जल उपचार संयंत्रों और 800 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइनों का निर्माण शामिल है। इस परियोजना में एक वास्तविक समय निगरानी प्रणाली भी स्थापित की जाएगी, जिसका उद्देश्य गैर-राजस्व वाले जल को 20 प्रतिशत से नीचे बनाए रखना है।

गुवाहाटी में, यह परियोजना बाहिनी बेसिन में बाढ़ के डायवर्जन चैनलों, उन्नत जल निकासी प्रणालियों और बाढ़ के निर्वहन को कम करने और भूजल पुनर्भरण में सुधार के लिए एक प्रकृति-आधारित प्रतिधारण तालाब के साथ वर्षा जल प्रबंधन भंडारण को बढ़ावा देगी।

इस परियोजना में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी के सहयोग से असम राज्य शहरी विकास संस्थान की स्थापना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना शहरों में वित्तीय स्थिरता और सेवा वितरण में सुधार के लिए जीआईएस-आधारित संपत्ति कर डेटाबेस, डिजिटल जल बिलिंग प्रणाली और वॉल्यूमेट्रिक जल शुल्क संरचना विकसित करेगा।

यह परियोजना महिलाओं और बालिकाओं के सहयोग और सामाजिक समावेश पर जोर देती है। इसकी गतिविधियों में जल कार्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण देना, कॉलेज जाने वाली महिलाओं के लिए इंटर्नशिप की व्यवस्था करना और जल, स्वच्छता और सफाई के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूल आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है।

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