
(भारत की लोकतांत्रिक विशेषता के इतिहास को 26 इंटरैक्टिव पैनलों के माध्यम से विभिन्न भाषाओं में प्रदर्शित किया गया।)


(बीच में सिंधु-सरस्वती सभ्यता की लड़की की मूर्ति)

(स्वागत कक्ष के पीछे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के दृश्य प्रदर्शित करती एक विशाल वीडियो स्क्रीन)

(आईजीएनसीए के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी ‘भारत: लोकतंत्र की जननी‘ प्रदर्शनी के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए)
केंद्र में सिंधु-सरस्वती संस्कृति की एक लड़की की मूर्ति है। वह आत्मविश्वास से खड़ी है और दुनिया को देख रही है। वह स्वतंत्र, मुक्त, आश्वस्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण है और दुनिया को आंखों से आंखें मिलाकर देख रही है। वह अपने शरीर पर आभूषण पहनती है, जो पश्चिमी भारत की महिलाओं द्वारा प्रतिदिन पहने जाने वाले आभूषणों से काफी मिलते-जुलते हैं। कलाकृति की वास्तविक ऊंचाई 10.5 सेमी है लेकिन प्रतिकृति 5 फीट ऊंचाई और 120 किलोग्राम वजन के साथ कांस्य में बनाई गई थी।
यहां भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को विभिन्न भाषाओं में 26 इंटरैक्टिव पैनलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जहां आगंतुक 16 विभिन्न भाषाओं में सामग्री पढ़ सकते हैं और ऑडियो द्वारा सुन सकते हैं। पैनल में स्थानीय स्वशासन, आधुनिक भारत में चुनाव, कृष्ण देव राय, जैन धर्म सहित अन्य चीजें शामिल हैं। प्रदर्शनी को जी-20 एप्लिकेशन पर डिजिटल रूप से एक्सेस किया जा सकता है।
भारत में लोकतंत्र एक सदियों पुरानी अवधारणा है। भारतीय लोकाचार के अनुसार, लोकतंत्र में समाज में स्वतंत्रता, स्वीकार्यता, समानता और समावेशिता के मूल्य शामिल होते हैं और यह अपने आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देता है। सबसे पहले उपलब्ध पवित्र ग्रंथ – ऋग्वेद और अथर्ववेद की पंक्तियों में सभा, समिति और संसद जैसी सहभागी संस्थाओं का उल्लेख किया गया है। अंतिम शब्द ‘संसद’ हमारे देश की संसद को दर्शाते हुए प्रचलित है। इस भूमि के महान महाकाव्य रामायण और महाभारत भी निर्णय प्रक्रिया में लोगों को समावेशित करने की बात करते हैं। भारतीय लिखित उदाहरणों में यह भी पाया जाता है कि शासन करने का अधिकार योग्यता या आम सहमति के माध्यम से अर्जित किया जाता है और यह वंशानुगत नहीं है। परिषद और समिति जैसी विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं में मतदाता की वैधता पर लगातार चर्चा होती रही है। भारतीय लोकतंत्र वास्तव में लोगों की सत्यता, सहयोग, समन्वय, शांति, सहानुभूति और सामूहिक शक्ति का उत्सवपूर्ण उद्घोष है।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज कानपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र का आयोजन किया गया।
सर्वप्रथम मां सरस्वती जी की वंदना कर दीप प्रज्वलन किया गया। उक्त अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो० सुमन एवं कार्यक्रम के निर्णायक मंडल प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर एवं डॉक्टर संगीता सिंह अतिथि वक्ता के रूप में मनोज शुक्ला (आना पान सती ध्यान विशेषज्ञ) उपस्थित रहे। प्राचार्या जी ने कहा कि यह दिवस एक माध्यम है आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए। देश में आत्महत्या करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है इसीलिए ऐसे कार्यक्रम का बहुत महत्व है, ताकि उसकी रोकथाम समय पर हो सके निबंध प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के रूप में प्रो० चित्रा सिंह तोमर विभागाध्यक्षा शिक्षा शास्त्र एवं डॉ संगीता सिंह प्रवक्ता शिक्षा शास्त्र विभाग थे। निर्णय इस प्रकार रहा
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के विज्ञान संकाय मे एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र के संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रो सुमन विशिष्ट अतिथि तिलक महाविद्यालय औरैया के प्राचार्य डा रवि कुमार तथा मुख्य वक्ता डॉ शशि बाला ने दीप प्रज्वलित करके किया एवं छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए किया। मंच का संचालन रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.गार्गी यादव ने किया। अतिथि वक्ता के रूप में रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की असिस्टैंट प्रोफेसर शशि बाला ने (Carbon capture and storage: A solution for environmental Carbon di oxide)कार्बन डाई आक्साइड के प्रपाशन एवं भंडारण के द्वारा ग्रीन हाउस गैसों से निपटने का एवं पर्यावरण को बचाने का मार्ग दिखाया , साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय में अभी उनका शोध कार्य चल रहा हैl
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता आज क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर अवध ओझा के वक्तत्व का अयोजन कॉलेज के प्रचार्य जोसेफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कैरियर काउंसिल सेल द्वारा आयोजित किया गया जिसकी संयोजिका प्रो मीत कमल है। कार्यक्रम में इकरा आईएएस के संस्थापक शाह फैसल एवं सदस्य सतेंद्र सिंह ,मयंक सिंह मोजूद रहे।
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया ।जिसमे पेडिलाइट कंपनी के श्री अनिल मल्होत्रा द्वारा छात्राओं को लिप्पन कला को विस्तार पूर्वक करके दिखाया। कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा बताया कि यह बहुत पुरानी कच्छ,गुजरात की पारंपरिक शिल्प कला है। जिसको गोबर, मिट्टी के मिश्रण से शीशे लगाकर बनाते है जो घर के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखती है। छात्राओं को इस तरह की कलाओं को सीख कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शित करने की तरफ प्रेरित किया। इस प्रदर्शन में महाविद्यालय की लगभग 20 छात्राओं ने भाग लिया।
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मन्दिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर’ कानपुर में मुख्यता छात्राओं के लिये “रोजगार मेला” का आयोजन किया गया। जिनमें स्कोप लाइफ, जीवाथम, ए एस वर्ड ग्रुप आदि विभिन्न कंपनियों ने लगभग 200 से अधिक वेकैंसी के लिये जॉब ऑफर की। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर पूनम विज़ ने कहा कि बेटियो को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारा महाविद्यालय हमेशा ही प्रतिबद्ध रहा है । समय समय पर छात्राओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार मेले का आयोजन करते रहेंगे। आयोजन करते रहेंगे।कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रोफेसर निशा पाठक, प्रोफेसर अनुपमा कुमारी ,डॉ. आंचल तिवारी, महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ,डॉ. शालिनी गुप्ता , डॉ. रमा कटियार, डॉ. जसमीत कौर, निक्की वेदी, डॉ.सोनम सिंह, डॉ. स्निग्धा मिश्रा, सुश्री नम्रता भट्टाचार्य, सुश्री कल्पना देवी, डॉ. ऋतु नारंग, सुश्री नेहा सिंह आदि शिक्षिकाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। रोजगार मेला में लगभग 300 छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए।
ने शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो निशा पाठक ने शिक्षक संघ इकाई से निष्पक्षता और ईमानदारी से कार्य करने की अपेक्षा की। कार्यक्रम में महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई के सभी सदस्य उपस्थित रहे।