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महिला जगत

हर साल बिजली का संकट

हर साल की तरह इस साल भी गर्मी ने लोगों को बुरी तरह परेशान कर रखा है ऐसे में बिजली कटौती लोगों का जीना दुश्वार कर रही है। इस भीषण गर्मी के बीच देश में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है। मांग के अनुपात में बिजली नहीं मिल पा रही है। बारह राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। कोयले की कमी के कारण उत्पन्न हुआ यह संकट कोई पहली बार नहीं है। पिछले साल भी यह संकट गहराया था लेकिन इस बार बिजली की किल्लत कुछ ज्यादा ही महसूस की जा रही है। कई राज्यों में बिजली कटौती की घोषणा कर दी गई है जिसकी वजह से आम जन परेशान हो गए हैं। चालू वित्त वर्ष में कोल इंडिया का बिजली कंपनियों को करीब 21.600 करोड़ रूपया बकाया था अब भी कोल इंडिया का बिजली कंपनियों पर 12,300 करोड़ों का बकाया है और बिजली का यह संकट कर्ज ना चुका पाने के कारण है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) की डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट के मुताबिक 165 थर्मल पावर स्टेशनों में से 56 में से 10 फ़ीसदी या उससे कम कोयला बचा है। कम से कम 26 के पास पांच फीसदी से भी कम स्टॉक है। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों के पास एक दिन से भी कम का कोयला बचा है। बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर संसाधनों पर पड़ा है बिजली कटौती से आम जनता को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा हैं। इसके अलावा अस्पताल और मेट्रो सेवाओं में बाधा उत्पन्न होगी सो अलग। बिजली संकट से जो स्थिति उत्पन्न हो गई है वो तकलीफ देने के लिए काफी है। वह भविष्य में आने वाले संकटों के लिए आगाह कर रही है और बारह राज्यों में बिजली कटौती का अर्थ यह नहीं है अन्य प्रदेश इस संकट से बचे हुए हैं। इस संकट की आहट उन्हें भी महसूस हो गई है। बिजली प्रबंधन के मामले में देश में बहुत लचर व्यवस्था चल रही है और इसी वजह से यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। लगभग हर साल यही सुनने में आता है कि एक-दो दिन की बिजली के लिए कोयला बचा है। लगभग सभी ताप बिजलीघर आधे से भी कम क्षमता पर चल रहे हैं। यदि कोयला समाप्ति पर है तो आगे की व्यवस्था, रखरखाव और मरम्मत किस प्रकार होगी? और सरकार इस अव्यवस्था को नजरअंदाज कर रही है। सरकार का ध्यान ग्रीन एनर्जी  की तरफ ज्यादा है।
अब वैकल्पिक ऊर्जा को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और इसी वजह से परंपरागत ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा का सामंजस्य ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण बिजली संकट बढ़ते जा रहा है।
वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा जरूर दिया जा रहा है लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में जागरूकता और बहुत कार्य करने की जरूरत है साथ ही प्रबंधन व्यवस्था को सुधारना अति आवश्यक है यदि इनमें सुधार कर लिया गया तो संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा। विभिन्न  सरकारें सब्सिडी या मुफ्त बिजली दे रही है लेकिन इस राशि का भुगतान विद्युत वितरण कंपनियों को नियमित रूप से नहीं कर रही है। बिजली संकट दूर करने के लिए प्रबंधन में सुधार अत्यावश्यक है।

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तुम्हें रानी बनाने की चाह मे ,पता नही कब ..मै राजा से गुलाम हो गया”

गेट खुलने की आवाज़ सुन कर मीरा ने खिड़की से झांका तो देखा ,शेखर फ़ैक्ट्री से आ गये थे।शेखर मीरा के पति जो शहर के जाने माने बिज़नेसमैन है।मीरा एक घरेलू औरत जो नौकरों की मदद से घर को चला रही है।गर्मी से झुनझुनाइये शेखर ने अपने नौकर से पानी माँगा और सोफ़े पर बैठ गया।बाहर बहुत गर्मी है!ज़रा ऐ-सी तेज करो नौकर से ये कह कर आँखे बंद कर थोड़ा आराम करने के इरादे से लेट गया।सारा दिन काम करके थक जाता हूँ ,शेखर सोच रहा था कितने सालों से वो सारा बिज़नेस अकेले ही देख रहा है ,किस के लिए अपनी पत्नी और बच्चों के लिये।फिर सोचने लगा!
मेरे बच्चे सब अपनी मर्ज़ी ही करते है।मै उनकी हर ख्वाहिश पूरी करताहूँ,क्या वो भी मेरी कोई इच्छा या ज़रूरत पूरी कर पायेंगे?
ये कैसे कैसे सवाल आज मेरे मन मे आ रहे है ?शेखर ने सोचा।शायद थका हुआ हूँ तभी ऐसे विचार मेरे मन में आ रहे हैं।तभी मीरा आई और शेखर से कहा जल्दी से तैयार हो जाओ।आज पुनीत के यहाँ किटी पर जाना हैं।शेखर थका हुआ था सोचा कि बोल दूँ ,कि तुम ही हो आओ।फिर सोचा इस किटी में उसके दोस्त भी होगें।वो जायेगा तो अच्छा भी लगेगा।बेमन से उठा और तैयार होने के लिये अपने कमरे मे चला गया।दोनों थोड़ी ही देर मे पुनीत के यहाँ पहुँच गये।
सब से मिले ,बाते चली ,गाने बजाने नाचने का माहौल ने शेखर को तरोताज़ा कर दिया।रात को काफ़ी देर तक पार्टी चली।शेखर ने मीरा को चलने का इशारा किया और वो दोनों वहाँ से निकल पड़े।रास्ते में मीरा ने शेखर से पार्टी की बात छेड़ दी ,कहा आज सोनिया ने नये डायमंड के टॉपस पहने हुये थे।बता रही थी कि उसके पति ने उसे शादी की सालगिरह का तोहफ़ा दिया और ये भी कह रही थी, बारह लाख के बनवाये।तुनक कर बोली!पता नही,क्या समझती है खुद को और ज़िद्द करने के लहजे से शेखर से बोली !मुझे भी वैसे ही कानों के टॉपस चाहिए।शेखर ने कहा ,ले लेना।ये कौन सी बड़ी बात है। फिर मीरा ने इक और तीर चलाया।कहने लगी और देखा था,रश्मि ने इतना सुन्दर डायमंड का सैट पहना हुआ था।बता रही थी तीस लाख का लिया था।उसके पति ने उस को पचासवीं सालगिरह पर तोहफ़ा दिया है।वो भी चहक चहक कर सब को दिखा रही थी।शेखर मुझे भी वैसा ही सैट चाहिए । शेखर जो पीये हुये भी था कहने लगा !ले लेना।हम कौन सा कम है किसी से। जब सुबह दोनों चाय पीने बैठे तो भी मीरा ने फिर वही बातें दोहरा दी।शेखर ने कहा ! हाँ मैं भी देख रहा था पुनीत मित्तल अपनी फरारी गाड़ी की कितनी ढींगे मार रहा था।मैं भी लैमबरगीनी गाड़ी निकलवाता हूँ ताकि लोगों को भी पता लगना चाहिए कि हम भी किसी से कम नहीं।अपनी 4 कनाल की कोठी की बात ,पता नहीं कितनी दफ़ा अपने दोस्तों के सामने की उसने। क्या समझता है खुद को,हम भी अब 8 कनाल की कोठी लेंगे जल्दी ही, अब बडे लोगों के बीच रहना है तो ये सब तो करना ही पड़ेगा ।शेखर चाय पी कर जल्दी से फ़ैक्ट्री चला गया, दोस्तों कोई बड़ी बात नही।पैसा हो तो खर्च भी करना चाहिए।जो इच्छा हो, पूरी भी करनी चाहिए। देखा जाये ,तो औरतो का सपना होता है बड़ा घर ,पैसा ,गाड़ी और भी बहुत कुछ डिमांड करती रहती है पतियों से ।मगर देखने मे ये आता है जितनी बड़ी माँग को पूरा करना होता है ।पति को उतनी ही कड़ी मेहनत करनी पड़ती है ।कई बार तो साम दाम दंड भेद कोई भी तरीक़े से पैसा कमाया जाता है।ज़मीर तक दावँ पर लगा डालते हैं। शराफ़त से कमाई गई दौलत से इक सादा सच्चा जीवन जीया जा सकता है।बड़े बड़े शौक़ पूरे नही किये जा सकते। ये अलग बात है बड़ी बड़ी फ़ैक्टरियों की आमदनी से ये सब संभव भी है दोस्तों !
डायमंड जिसे मै सिर्फ़ इक चमकता हुआ पत्थर ही कह सकती हूँ और सोना जिसे पीले रंग की धातु मात्र ही समझती हूँ और इस बात से भी इनकार नहीं कर सकती ,ये सब चीज़ें हमारे दुख सुख मे काम भी आते है। ये बैंक बैलेंस ,ये ज़मीनें जायदाद जो हम पता नही ,कैसे कैसे किसी को दुख दे कर या किसी की आह ले कर ,बड़ी ख़ुशी के साथ इकट्ठा करते है जो अंत मे हमारा साथ न देंगी और मरने के बाद हमसे जब बल छल से किये गये करमो का हिसाब माँगा जायेगा तो कोई बच्चा या पत्नी इल्ज़ाम अपने सर नही लेगी कि मेरे कहने पर मेरे पति ने मुझे हीरे का सैट या जुलरी लेने के लिये ही ऐसा कोई करम बना लिया ।हमारी औरतों की बड़ी बड़ी इच्छायें आदमियों से ऐसे ऐसे काम करवा देती है जो उसके शरीर तो भुगतता ही है ,रूह पर भी दाग लग ज़ाया करते है। ये सोशल गैदरिगं मे यही सब हो रहा है आजकल।इक दूसरे से आगे निकलने की रेस। आनन्द लीजिए !इन सोशल नेटवर्किंग का ,मगर कोई ऐसी इच्छा अपने पति के सामने न रखे जिसे पूरा करते वक़्त वो अपना ईमान ही बेच डाले।
अग्नि के इर्द गिर्द फेरे लेने का मतलब ये नहीं ,उसे अपनी इच्छा पूर्ति का ज़रिया बना लिया जायें। उनकी भी अपनी इच्छा होती होगी ,पत्नियों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए। कई पुरुष औरत की हर इच्छा को पूरा करने के लिए कई हदें पार कर देता है और अगर पुरूष की ख़ास इच्छा हो ,जिसमें उसकी ख़ुशी हो ,तो पूरे परिवार को भी उस इच्छा का सम्मान भी करना चाहिए और कहीं न कहीं शायद हम सब ही अपने पिता या पति के प्रयासों के लिये ढंग से आभार भी प्रकट नही कर पाते। अगर आप सच में रानी बनना चाहतीं है तो अपने पति को राजा बनाये न कि अपना या अपनी इच्छायों का गुलाम। कहीं ऐसा न हो कि पति को ये लगने लगे।
“शौक़ तेरे भी थे और मेरे भी,मगर “ईमान”मेरा बिक गया ..तुम्हें रानी बनाने की चाह मे ,पता नही कब ..मै राजा से गुलाम हो गया”।

स्मिता केंथ

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केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने नासिक में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल की नींव रखी

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा और स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने महाराष्ट्र में नासिक के शिंदे में आज एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) के निर्माण की नींव रखी। प्रस्तावित ईएमआर स्कूल का लक्ष्य नासिक के दूरदराज के आदिवासी गांवों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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उद्घाटन समारोह में बोलते हुए श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शिंदे में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल की योजना जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आसपास के आदिवासी इलाकों में उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बनाई है। उन्होंने कहा, “ईएमआर स्कूल, सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करेंगे।” केन्‍द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि ईएमआरएस ऐसी योजना है, जिसके तहत पूरे भारत में आदिवासियों (एसटी) के लिए मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उत्तरपूर्व, छत्तीसगढ़, गुजरात और ओडिशा समेत देश के दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही स्कूल खोले जाने की योजना है। श्री अर्जुन मुंडा ने आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और इसमें शिक्षा की भूमिका पर उनके विचारों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय आदिवासी इलाकों में छात्रों को उन्नत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी खुशी जताई कि आसपास के इलाके में आदिवासी किसान अंगूर, स्ट्रॉबेरी, प्याज आदि की खेती कर रहे हैं और उन्होंने आदिवासियों से उनके बच्चों को स्कूल भेजने की अपील भी की। नींव रखे जाने के बाद आदिवासी नृत्य और संगीत का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया गया।

2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषणा की गई थी कि 50 प्रतिशत और कम से कम 20,000 से अधिक की आदिवासी आबादी वाले प्रखंडों में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार ने देशभर में 452 नए स्कूल बनाने की योजना बनाई है। एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए खोला जा रहा है, जिसमें न केवल अकादमिक शिक्षा पर जोर होगा, बल्कि इसमें आदिवासी छात्रों के संपूर्ण विकास पर जोर दिया जाएगा। इसमें कक्षा 6 से लेकर 12 तक के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा और एक स्कूल की क्षमता 480 छात्रों की होगी। फिलहाल पूरे देश में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर 384 एकलव्य स्कूल चलाए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय कला और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए बेहद उन्नत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के अलावा खेल और कौशल विकास में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ईएमआरएस स्कूलों में छात्रों के समग्र विकास की जरूरतों को परिसर में ही पूरा करने की सुविधाएं मौजूद हैं और इनमें मुफ़्त रहने-खाने की व्यवस्था के साथ शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में विश्व योग दिवस के उपलक्ष में विशेष योगाभ्यास सत्र का अयोजन

कानपुर 14 मई भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में विश्व योग दिवस के उपलक्ष में एक विशेष पूर्व योगाभ्यास सत्र का अयोजन किया गया जो पिछले सप्ताह से महाविद्यालय की एनएसएस वॉलिंटियर्स के द्वारा निरंतर जारी है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने छात्राओं को विभिन्न योग आसनों की उपयोगिता व उनके महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि स्वस्थ मस्तिष्क में ही *स्वस्थ शरीर का वास होता है।* अतः हमें अपने शरीर को आहार-विहार, योगाभ्यास व विचार सभी के द्वारा स्वस्थ रखने का सतत् प्रयास करना चाहिए तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकेगा। इस दौरान छात्राओं ने विभिन्न आसनों का अभ्यास भी किया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. सुनंदा दुबे जी ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी वॉलिंटियर्स , कार्यालय सहायिका आकांक्षा अस्थाना व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पवित्रा का सहयोग सराहनीय रहा।।

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माँ तेरे रूप अनेक विषय पर अंतरराष्ट्रीय ई-संगोष्ठी संपन्न

कानपुर 9 मई भारतीय स्वरूप संवाददाता, भारत उत्थान न्यास महिला समिति के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी माँ तेरे रूप अनेक का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया। संगोष्ठी की शुरुआत कविता सिंह व सोनल बादल द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुति और न्यास की राष्ट्रीय सचिव डॉ नीरा तोमर के स्वागत भाषण से हुई। मुख्य अतिथि कानपुर महानगर की महापौर प्रमिला पांडे ने उपस्थित अतिथियों व वक्ताओं को अपनी शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथियों में पोर्टलैंड प्रभु सतीश ने बताया कि कर्नाटक के मध्यम परिवार में उनका जन्म हुआ और बचपन से ही संघर्षों का सामना करते हुए आज पोर्टेलेंड में एक कंपनी के निदेशक पद पर कार्यरत हैं तो इसके पीछे उनकी माँ ही प्रेरणा बनीं जिन्होंने उन्हें प्रत्येक अवसर पर उनका साथ दिया। पीएसआईटी की वाइस चेयरमैन निर्मला सिंह ने उपस्थित सभी महिलाओं को समाज में बढ़ चढ़कर अपनी सहभागिता प्रदान करने की बात कही। न्यास की राष्ट्रीय मंत्री कल्पना पांडे ने बताया कि वे झांसी में जरूरतमंदों के लिए सेवाकार्य करने के साथ-साथ ज्योतिष के

क्षेत्र में भी सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैैं। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए मथुरा से डॉ दीपा अग्रवाल ने अपने वक्तव्य के माध्यम से संगोष्ठी को सार्थकता प्रदान की उन्होंने प्राचीन काल से लेकर आधुनिक भारत की सभी विद्वान व वीरांगना महिलाओं की पृष्ठभूमि से अवगत कराकर उपस्थित सभी मातृशक्ति को प्रेरित करने का कार्य किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉक्टर चंपा कुमारी सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बबोधन में भावुक होते हुए कहा की पुराने समय में अभावों में भी रहकर परिवार अपनी माताओं और बहनों का ख्याल रखता था और उन्हें कभी वृद्धआश्रम की ओर जाना नहीं पड़ता था लेकिन आज आधुनिकता की अंधी दौड़ में अनेकों परिवारों की माता और बहने वृद्ध आश्रम जाने को मजबूर हैं। इसके पीछे उन्होंने कई कारण बताऐ जिसमें प्रमुख कारण बच्चों का विदेश जाना बताया। वक्ताओं में मथुरा से डॉ सुनीता अवस्थी बंगलुरु से मंजुला पै ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन न्यास की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ चित्रा सिंह तोमर ने किया धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष डॉ के. स्वर्णा ने किया। इस अवसर पर गोष्ठी के संरक्षक व न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुजीत कुंतल डॉ अनीता निगम मंजुला गुप्ता निवेदिता चतुर्वेदी डॉ आनंदेश्वरी अवस्थी, संजय कुमार मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

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स्वदेशी जागरण मंच के कानपुर प्रांत एक़ाई ने स्वावलंबी भारत अभियान के अंतर्गत ११ परिषदों ने संयुक्त रूप से देश को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया है।

कानपुर 8 मई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दीनदयाल उपाध्याय सभागार, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्विद्यालय, कानपुर में स्वदेशी जागरण मंच के कानपुर प्रांत एक़ाई ने स्वावलंबी भारत अभियन के अंतर्गत ११ परिषदों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिंदू परिषद,लघु उद्योग भारती, वनवासी कल्याण आश्रम,ग्राहक पंचायत, भारतीय मज़दूर संघ,भारतीय किसान संघ, भारतीय जनता पार्टी, सहकार भारती एवं राष्ट्रीय सेवा भारती ने संयुक्त रूप से देश कोस्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दूध दही के देश में पेप्सी कोला नहि चलेगा…के नारे के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन तथा ज्ञान की देवी सरस्वती और पंडित दीं दयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण के साथ ही सभागार में स्वावलंबी स्वाभिमानी भाव जगाना है,चलो गाँव की ओर हमें फिर देश बनाना है- गीत गूँज उठा। नोयडा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रसिद्ध अर्थशास्त्रविद प्रोफ़ेसर भगवती शरण शर्मा ने देश की इकॉनमी का विश्लेषण किया उनके अनुसार विश्व की इकॉनमी में भारत का योगदान शून्य से १५०० ईश्वी तक ३४% था पर आज मात्र ३% है हमें वापस अपना स्वावलम्बन जगाना है। हमारा देश १४० करोड़ जनसंख्या वाला देश है और हमारे पास १८ करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो विश्व में सर्वाधिक है। दुनिय में पर कैपिटा मिल्क प्रडक्शन ३५० लीटर है जबकि हमारे भारत की पर कैपिटा प्रडक्शन ५०० ली है। हमें अपने देश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके देश को स्वावलंबी बनाना है। इससे पहले भारत का युवा अलगाववादी ताक़तों के चंगुल में चला जाए उनको रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना है और I HATE FOR APPLYING JOBS का भाव जगाकर रोज़गार दाता बनाना है।
ग्राहक पंचायत के श्री हरिभाऊ खांडेकर,बी जे पी के श्री राम किशोरसाह सहकार भारती के गजेंद्र जी कानपुर के ज़िला सम्पर्क प्रमुख श्री प्रवीण कुमार मिश्रा ,यू पी टेक्स्टायल के निदेशक श्री पी सी ठाकुर तथा एम एस एम ई के कमिशनर श्री सर्वेश्वर शुक्ला जी ,चंद्र शेखर आज़ाद कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक श्री वी के यादव ने युवाओं को नयीं रोज़गारपरक योगनाओ की जानकारी दी|
धन्यवाद ज्ञापन श्री पी के मिश्रा ने दिया प्रांत महिला प्रमुख श्रीमती शलिनी कपूर,क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री अजय उपाध्याय जी तथा प्रांत के सभी कार्यकरता उपस्थित रहे, कार्यक्रम में मुख्य रूप से ड़ा सत्यनारायण मिश्रा को स्वदेशी जागरण मंच का समन्वयक मनोनीत किया गया जिससे मंच का कार्य तेज़ी से हो सकेगा

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हाउस वाइफ

पालक के पत्तों में खो जाती है वो, मेथी बारीक कटी या नहीं इसी उधेड़बुन में घर के बाकी सारे काम कर जाती है वो!!
सबकी फरमाइश पूरी करती है वो, किसी ने घर मे तेज़ आवाज़ दी तो सारे काम छोड़ कर दौड़ पड़ती है वो,बच्चे भी क़भी- क़भी ढंग से बात नहीं करते उससे फिर भी अपनी ममता में कमी नहीं रखती है वो!!
पालक के पत्तों में खो जाती है वो,
याद नहीं उसको कब सँवारी थी आईने के सामने बैठ कर देर तक खुद में झांकी थी,वही जुड़ा जल्दी
वाला बनकर किचन की और बस भागी थी
अकेले बैठी थी सोच रही थी कि मैं भी कुछ कर सकती हूँ क्या,मग़र फिर याद आया सब्जी चढ़ा कर आई हो गैस पर वो ना जला जाये कहीं,इसे छोड़ो अभी सब्जी ज्यादा जरूरी है,खाने का स्वाद ना बिगड़ जाये इसलिए ये ज्यादा जरूरी है!!
पालक के पत्तों में खो जाती है वो,
कितनी ऐसी स्त्रियां है जो गुम हो गई रोज़मर्रा की इन्ही उधड़बुन मैं,खुद को भूल चुकी भरे पूरे परिवार में खो चुकी है,मग़र जब भी वक़्त मिलता है तो सोचती है ऊँचा उड़ाने की,देखे थे कुछ सपने उन्हें पूरा करने की,मग़र उसी दाफा फ़िर से एक और आवाज़ आती है और वो तेज़ी से फ़िर दौड़ लगती है
फ़िर सपनो की दुनिया से निकलकर हकीकत में खो जाती है!!
पालक के पत्तों में खो जाती है वो…..श्रद्धा श्रीवास्तव

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एस. एन. सेन बी. वी. पी.जी. कॉलेज, एन. एस. एस. इकाई तथा ‘रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘ वैदिक विज्ञान एवं गहन ध्यान’ विषय पर एक कार्यशाला आयोजित

कानपुर 6 मई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी.जी. कॉलेज, कानपुर के कोदोम्बिनी देवी एन. एस. एस. इकाई तथा ‘रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘ वैदिक विज्ञान एवं गहन ध्यान’ विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ प्राचार्या डॉ. निशा अग्रवाल, एन. एस. एस. इंचार्ज डॉ. चित्रा सिंह तोमर,’रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ के अध्यक्ष श्री अभिषेक शर्मा, उपाध्यक्ष श्रीमती अंजलि सिंह, सचिव श्री आशीष , कोषाध्यक्ष सुश्री प्रीति जी एवं सदस्य सुश्री दीपाली यादव आदि ने माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया ।
सर्वप्रथम प्रार्थना के पश्चात प्राचार्या डॉ. निशा अग्रवाल जी ने स्वागत वक्तव्य दिया तथा छात्राओं को योग एवं ध्यान को समझने के लिए प्रोत्साहित किया।
अतिथियों के स्वागत के पश्चात ‘रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ की सदस्य ,प्रथम वक्ता एवं मनोविज्ञान की शोधार्थी सुश्री दीपाली यादव विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अगली श्रृंखला में उपाध्यक्ष श्रीमती डॉ. अंजली सिंह आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव एवं दबाव के युग में ध्यान के महत्व के विषय मे बताया। उन्होंने कहा कि, ध्यान स्वप्रबंधन तथा बिखरी हुई ऊर्जा को नियंत्रित करने की कला है ।
इसके पश्चात ‘रुद्र समागम सेवा एवं शिक्षा समिति’ के फाउंडर एवं अध्यक्ष श्री अभिषेक शर्मा जी ने भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रतीकात्मक महत्त्व तथा भारतीय वैदिक परंपरा की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला साथ ही संतुलित जीवन के प्रबंधन के लिए “ध्यान” के वैज्ञानिक महत्व को समझाया।
अंत में कार्यक्रम संयोजिका डॉ. चित्रा सिंह तोमर ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
राष्ट्रगान के साथ कार्यशाला का औपचारिक समापन किया गया ।

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ग्लैमर की चमक में खोते लोग~ प्रियंका वर्मा महेश्वरी

कुछ दिन पहले मैंने मेरी बेटी के मुंह से डेट शब्द सुना। तभी उसके पिताजी ने उससे पूछा कि यह डेट क्या होता है? डेट पर जाना मतलब क्या? ऐसा नहीं था कि उन्हें पता नहीं था लेकिन वो बेटी के मुंह से सुनना चाह रहे थे। बेटी जरा झेंप गई, उसे समझ में नहीं आया कि वो इस बात को किस तरह से बताये। सोचती हूं कि वक्त कितनी तेजी से बदल रहा है। एक वक्त था जब हम डेट जैसे शब्द नहीं पहचानते थे। फोन पर बात करना भी मुश्किल होता था और मिलना तो हमारी कल्पना से बाहर की बात थी लेकिन आज बच्चे छोटी सी उम्र में डेट का मतलब जानते हैं और वो इस चलन को अपनाने में भी बड़ी खुशी महसूस करते हैं। बच्चे गर्व से बताते हैं (अगर बच्चा आपसे बहुत फ्री है तो) कि मैं फला लड़के या लड़की के साथ डेट पर गया था।

बदलते वक्त ने ग्लैमर को बहुत बढ़ावा दिया है आज लोग सेलिब्रिटी जैसी लाइफ स्टाइल अपना रहे हैं। वह खुद को किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं समझते। तमाम वीडियो, रील्स देखने पर तो यही लगता है। अब शादी ब्याह की रस्मों को को ही ले लीजिए। हर रस्म के लिए अलग डेकोरेशन और ड्रेस कोड रहते हैं। गर्मी है तो समर डेकोरेशन और समर ड्रेस कोड और खाना भी कुछ माहौल से मिलता जुलता ही होगा। कोशिश यही रहती है कि इवेंट के हिसाब से सब व्यवस्था की जाये।
अब यदि हल्दी की रस्म है तो सब तरफ पीले रंग का डेकोरेशन रहेगा और कपड़े भी पीले रंग के रहेंगे। मुझे मेरा वक्त याद आता है कि जब मेरी हल्दी की रस्म हुई थी तो एक कैमरा वाला नहीं था, कोई वीडियो नहीं और तो और कोई बाहर बाहरी व्यक्ति भी नहीं था। एक नाउन और घर के करीबी सदस्य और पुराने कपड़े में बैठी मैं सबने हल्दी लगाई गीत गाये और हल्दी की रस्म पूरी हो गई।
इधर कुछ समय से शादियों में प्री वेडिंग शूट का चलन बहुत जोरों पर है। शादी के पहले एक जगह पर जाना और रोमांटिक शॉट देना और बाद में प्री वेडिंग ऑकेजन रखकर लोगों को बुला कर उस शूट को दिखाना बड़ा अजीब लगता है। कुछ लोग तो बाकायदा ड्रेस कोड भी रखते हैं जैसे ग्रीन वैली में शूट किया तो ग्रीन ड्रेस कोड। जो बातें शादी के बाद व्यक्ति अपने गृहस्थ जीवन में शुरू करता है क्या वह शादी के पहले करना जरूरी है और लोगों को दिखाकर आप क्या जताना चाहते हैं। साथ ही ड्रेस कोड भी लोगों पर थोपना क्या सही है? मकसद सिर्फ एक ही होता है कि मेरे बच्चे इतनी महंगी जगह पर प्री वेडिंग शूट के लिए गए हैं और वह बहुत खुश है और हमने इतना खर्चा किया है। एक एक आकेजन पर लाखों का खर्च आता है और इस चमक दमक की भाग दौड़ में लोगों को खुश करने के चक्कर में मिडिल क्लास पिसता जाता है।
और एक रस्म होती है गोद भराई जिसमें लड़की को सात महीने का गर्भ होता है। हमारे हिंदू परंपरा में यह रस्म बहुत पारंपरिक तरीके से निभाई जाती है लेकिन आजकल इस रस्म पर भी चमक दमक भारी पड़ रही है। तरीके से तो जो लड़की गर्भवती होती है उसे ही हरे रंग का वस्त्र पहनना होता है लेकिन दिखावे और ग्लैमर की होड़ में ड्रेस कोड रखकर हर एक को हरे रंग का पहनावा अनिवार्य कर कर दिया जाता है और सजावट भी हरे रंग की ही होती है और तो और खाना भी हरे रंग का होता है जैसे हरा डोसा, हरी चटनी, हरे चावल वगैरह वगैरह।
आज के दौर में संगीत संध्या, मेहंदी, रिसेप्शन, जयमाला, मुंह दिखाई और भी घरेलू रस्में है जिनमें  ग्लैमर ने अपनी जगह बना ली है। अब गर्भ धारण की बात को ही लें आजकल बेबी बंप शूट का चलन बहुत है। जो नितांत निजी एहसास है वह आजकल सोशल साइट पर दिखते हैं। समझ में नहीं आता कि ममता बाजारू हो गई है या जमाने से कदम मिलाने की होड़ में यह बेतुकापन जरूरी हो गया है। मैं इस नए दौर के नए चलन के खिलाफ नहीं हूं लेकिन मैं सोचती हूँ कि कितनी तेजी से लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है। बदलाव जरूरी भी है लेकिन सही गलत फर्क भी जरूरी है। शादियों के रस्म रिवाज परंपरा निभाने के साथ साथ एंजॉय करने के तरीकें भी हैं। दिखावा होना चाहिए लेकिन अगर उस दिखावे में आपकी आंतरिक खुशियाँ छिप जाती है तो दिखावे की खुशी का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। इनसे जुड़ना अच्छा जरूर लगता है लेकिन मर्यादा हर जगह जरूरी है।

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एस एन सेन बालिका विद्यालय में पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

कानपुर 6 मई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय में रसायन शास्त्र विभाग द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव पी के सेन, प्राचार्या डॉ निशा अग्रवाल, डॉ पूनम अरोड़ा, डॉ गार्गी यादव, डॉ प्रीति सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन रसायन विज्ञान की विभागाध्यक्षा डॉ गार्गी यादव ने किया। पोस्टर प्रतियोगिता का निर्णय निर्णायक मंडल की सदस्या जन्तु विज्ञान की विभागाध्यक्षा डॉ पूनम अरोड़ा एवं वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्षा डॉ प्रीति सिंह ने किया। उन्होंने प्रत्येक पोस्टर का विश्लेषण बहुत ही बारीकी से किया और सम्बंधित प्रश्न पूछ कर छात्राओं का उत्साह वर्धन किया। प्राचार्या डॉ निशा अग्रवाल ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से छात्राओं की विषयों के प्रति अभिरुचि उत्पन्न होती है और उन्हें अपने विषयों को समझना आसान हो जाता है . नई शिक्षा नीति में छात्राओं के लिए इस तरह के कार्यक्रमों को करवाने पर विशेष बल दिया गया है.
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे:

प्रथम :रिया राणा,अनन्या अवस्थी
द्वितीय : महक विश्वकर्मा, नेहा श्रीवास्तव
तृतीय : सरिया सलमान, निकिता मिश्रा, गौरी ओमर

सभी विजेताओं को निर्णायक मंडल एवं प्राचार्या द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर डॉ निशा वर्मा, श्रीमती किरण, डॉ कीर्ति पांडे, डॉ प्रीता अवस्थी, कु वर्षा सिंह, कु तैय्यबा ,श्रीमती प्रतिभा, डॉ राई घोष आदि शिक्षिकायें उपस्थित रहीं।

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