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महिला जगत

एस.एन. सेन. बालिका विद्यालय पी.जी कॉलेज कानपुर में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत भारतीय संस्कृति के पुरोधा गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई गई

कानपुर 4 अगस्त, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन. सेन. बालिका विद्यालय पी.जी कॉलेज कानपुर में आजादी का अमृत महोत्सव पर हिंदी विभाग द्वारा भारतीय संस्कृति के पुरोधा गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई गई ।
इस समारोह में गोस्वामी जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस के बालकांड पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ सुमन ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया।
प्राचार्या जी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस भारतीय संस्कृति का एक नीतिपरक ग्रंथ है। यह लोकग्रंथ एवं साहित्य का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। गोस्वामी तुलसीदास जी का जीवन गुरु शिष्य परंपरा को भारतीय समाज में स्थापित करता है।
उन्होंने छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना की ।
नित्या गुप्ता, भूमि बाजपेई, अमृता शुक्ला,शुभी त्रिपाठी,पलक तिवारी व सौम्या गुप्ता ने श्री रामचरितमानस के बालकांड की चौपाइयों का गायन करते हुए उनकी व्याख्या प्रस्तुत की।
प्राचार्या मैडम का स्वागत हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा श्रीमती रचना शर्मा, डॉ शुभा बाजपेई श्रीमती रेशमा तथा अंकिता ने किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की सहायक आचार्य रेशमा ने तुलसीदास जी की रचना कर्म पर प्रकाश डाला
इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्रवक्ता गण .कर्मचारी गण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ शुभा बाजपेई ने तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा श्रीमती रचना शर्मा ने किया।

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​​टॉप्स से जुड़ी एथलीट और साई एनसीओई की प्रशिक्षु बिंद्यारानी का अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन

भारोत्तोलक बिंद्यारानी देवी ने राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 55 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता। उन्होंने कुल 202 किलोग्राम (86 किलोग्राम + 116 किलोग्राम) वजन उठाए।

एक दशक से भी कम समय पहले मणिपुर की बिंद्यारानी देवी ने अपने गृहनगर इम्फाल में भारोत्तोलन शुरू किया था। इस खेल को अपनाने के तीन साल से भी कम समय में उन्हें इम्फाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) में प्रशिक्षण के लिए चुन लिया गया और वहां से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एनसीओई इंफाल में तीन साल के निरंतर प्रशिक्षण एवं कड़ी मेहनत के बाद, उन्हें वर्ष 2019 में साई के पटियाला क्षेत्रीय केंद्र में भारतीय राष्ट्रीय शिविर के लिए चुना गया।

उन्होंने राष्ट्रमंडल सीनियर चैंपियनशिप 2019 में स्वर्ण पदक, वर्ष 2021 में इसी स्पर्धा में रजत पदक सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है। लेकिन उन्हें सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि 30 जुलाई की रात को हासिल हुई जब उन्होंने बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किलोग्राम भार वर्ग की स्पर्धा में रजत पदक जीता।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे राष्ट्रमंडल चैंपियन राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अच्छी तरह से तैयार हों, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) ने साई के तहत अपने प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता के लिए वार्षिक कैलेंडर (एसीटीसी) योजना के माध्यम से कुल 25,63,336 रुपये का वित्त पोषण प्रदान किया। इस योजना ने अन्य भारोत्तोलकों के साथ बिंद्यारानी को भी राष्ट्रमंडल खेलों से एक महीना पहले बर्मिंघम भेजा ताकि वे इस बड़ी स्पर्धा से पहले वहां के  वातावरण के साथ तालमेल बिठा सकें। बिंद्यारानी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के विकास समूह का भी हिस्सा हैं, जो उन्हें 25,000 रुपये के मासिक भत्ते के साथ-साथ अपने प्रशिक्षण के लिए व्यक्तिगत सहायता प्राप्त करने की अनुमति देता है।

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भारोत्तोलक मीराबाई चानू द्वारा कल भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद जेरेमी ने राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारोत्तोलन में भारत का दूसरा स्वर्ण जीता

मुख्य बिंदु:

  • राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जेरेमी को उनके इस असाधारण प्रदर्शन के लिए बधाई दी
  • खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने जेरेमी को बधाई देते हुए कहाभारत को उन पर गर्व है

मिजोरम से आने वाले 19 साल के जेरेमी लालरिननुंगा ने रविवार को राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन के 67 किलोग्राम वर्ग में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक जीता। जेरेमी ने इन खेलों में कुल 300 किग्रा (स्नैच में 140 किग्रा + सी एंड जे में 160 किग्रा) भार उठाया, जो सीडब्ल्यूजी में एक रिकॉर्ड है। इस मुकाबले में भारत का ये पांचवां पदक और दूसरा स्वर्ण पदक है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर और देश के कोने-कोने से भारतीयों ने जेरेमी को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।Image

इससे पहले, मीराबाई चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 201 किलोग्राम भार उठाकर राष्ट्रमंडल खेल 2022 में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता था। संकेत सरगर ने पुरुषों की 55 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता। बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 55 किग्रा भारोत्तोलन में रजत पदक और पुरुषों के 61 किग्रा भारोत्तोलन वर्ग में गुरुराजा पुजारी ने कांस्य पदक जीता।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने जेरेमी को उनकी इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ट्वीट किया:

“बधाई हो जेरेमी लालरिननुंगा, राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीतने के लिए। इस आयोजन के दौरान चोट लगने के बावजूद आपके आत्मविश्वास ने आपको ये इतिहास रचने और लाखों लोगों को प्रेरित करने में सक्षम बनाया। आपकी पोडियम फिनिश ने भारतीयों को गर्व से भर दिया है। आपको ऐसे और गौरवशाली के पलों की शुभकामनाएं।”

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उपराष्ट्रपति ने पुलिस बलों से महिलाओं के विरूद्ध अपराधों से संबंधित मामलों में अतिरिक्त संवेदनशील होने की अपील की

उपराष्ट्रपति  एम. वेंकैया नायडू ने आज पुलिस बलों से महिलाओं के विरूद्ध अपराधों से संबंधित मामलों में अतिरिक्त संवेदनशील होने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने और उनकी पूरी क्षमता हासिल करने में सहायता करने के लिए महिलाओं के लिए सुरक्षित और सक्षमकारी वातावरण का निर्माण करना बहुत महत्वपूर्ण है।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image009EV79.jpg

श्री नायडू ने आज चेन्नई में तमिलनाडु पुलिस को प्रेसिडेंशियल पुलिस कलर प्रदान करने के बाद पुलिस कर्मियों को संबोधित करते हुए, देश में सबसे अधिक महिला पुलिस थानों और महिला पुलिस कर्मियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या होने के लिए तमिलनाडु की प्रशंसा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाएं हमारी आधी आबादी हैं लेकिन उन्हें विभिन्न मोर्चों पर समान अवसर प्रदान करने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उपराष्ट्रपति ने साइबर अपराध और अन्य आधुनिक अपराधों जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी और सीमापारी अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए, पुलिस बलों को 21वीं सदी के इन अपराधों से प्रभावी और त्वरित तरीके से निपटने के लिए कुशल बनने और खुद को इसके लिए तैयार होने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिक तर्ज पर साइबर अपराध के मामलों की जांच के लिए विभिन्न साइबर फोरेंसिक सुविधाओं के अलावा 46 साइबर अपराध पुलिस स्टेशनों के साथ एक अलग साइबर अपराध विंग की स्थापना के लिए तमिलनाडु पुलिस की सराहना की। उन्होंने कहा, “कौशल का उन्नयन, अवसंरचना में सुधार और पुलिस बल के रवैये में बदलाव पुलिस के आधुनिकीकरण के प्रमुख तत्व हैं।”

उपराष्ट्रपति ने सांस्कृतिक कलाकृतियों की चोरी या नुकसान के मामलों की जांच के लिए देश में अपनी तरह की पहली विशिष्ट आइडल विंग के लिए भी तमिलनाडु पुलिस की सराहना की। हाल ही में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से दस अमूल्य प्राचीन मूर्तियों को हासिल करने के लिए राज्य पुलिस की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु राज्य की समृद्ध और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए इसे हमारी आगामी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री नायडू ने तमिलनाडु को भारत के सबसे समृद्ध और औद्योगिक राज्यों में से एक बताते हुए कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक माहौल में पुलिस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “राज्य की आर्थिक प्रगति के पीछे प्राथमिक कारणों में से एक सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में राज्य पुलिस की भूमिका है, जो राज्य में निवेश, वृद्धि और विकास को आकर्षित करने के लिए आवश्यक है।”

पुलिस कर्मियों के लिए कई कल्याणकारी उपायों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने बल में तनाव तथा शराब और आत्महत्याओं की रोकथाम के लिए एक “पुलिस कल्याण कार्यक्रम” शुरू करने के लिए विशेष रूप से तमिलनाडु की प्रशंसा की। उन्होंने तमिलनाडु की 1076 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा की प्रभावी ढंग से रक्षा करने और मछुआरों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने में राज्य पुलिस की भूमिका की भी सराहना की।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001G8EL.jpg

प्रेसीडेंट पुलिस कलर की प्रस्तुति को तमिलनाडु पुलिस के इतिहास में एक गौरवशाली क्षण बताते हुए, श्री नायडू ने तमिलनाडु पुलिस के सभी सेवारत और सेवानिवृत्त सदस्यों को अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “यह आपके समर्पण, पेशागत कुशलता, निस्वार्थ सेवा और बलिदान का सम्मान है”। उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु में पुलिस महानिदेशक और पुलिस बल के प्रमुख डॉ. सी. सिलेंद्र बाबू को भी बधाई दी, जिनके नेतृत्व में तमिलनाडु पुलिस के कर्मियों ने परेड का एक प्रभावशाली प्रदर्शन किया। श्री नायडू ने इस अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी किया।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के दौरान, चेन्नई के साथ अपने जीवन भर रहे जुड़ाव का स्मरण किया और इसे एक सुंदर शहर बताया जो उन्हें सदा विस्मित करता रहा है। उपराष्ट्रपति के रूप में यह श्री नायडू की चेन्नई की अंतिम यात्रा थी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन, तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव डॉ. वी. इराई अंबू, तमिलनाडु के पुलिस बल के प्रमुख, डीजीपी डॉ. सी. सिलेंद्र बाबू,  तमिलनाडु सरकार के एसीएस (गृह) श्री के. फणींद्र रेड्डी, चेन्नई के डीजीपी/सीओपी श्री शंकर जीवाल, तमिलनाडु सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल श्री बी. सेल्वा कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।

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एस.एन .सेन .बालिका विद्यालय पी.जी कॉलेज कानपुर में हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जी की जयंती मनाई गई

कानपुर 30सितंबर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन .सेन . बालिका विद्यालय पी.जी कॉलेज कानपुर में हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जी की जयंती मनाई गई। कॉलेज की डा प्रीति सिंह के अनुसार 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती होती है। किंतु 31 तारीख को रविवार  की छुट्टी होने के कारण एक दिन पहले ही समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में कथा सम्राट के आईने में (पंच परमेश्वर) कहानी पर छात्राओं द्वारा परिचर्चा कराई गई ।इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंध तंत्र समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा, सचिव प्रोवीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन,प्राचार्य डॉ निशा अग्रवाल, समाज शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ निशी प्रकाश, डॉ रेखा चौबे ,अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ अलका टंडन तथा हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा रचना शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्य जी ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। चाहे आर्थिक पक्ष हो.चाहे राजनीतिक या सामाजिक वे आज भी हमें झकझोर देती हैं। नित्या गुप्ता शुभी त्रिपाठी ,भूमि बाजपेई,पलक अमृता शुक्ला मनीषा कुमारी ने पंच परमेश्वर कहानी पर अपने विचार व्यक्त किए ।
मुख्य अतिथि का स्वागत हिंदी विभाग की सहायक आचार्य श्रीमती रेशमा ने किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की प्रवक्ता श्रीमती अंकिता शर्मा, दीपाली गुप्ता ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इस अवसर पर महाविद्यालय की सभी प्रवक्ता गण, कर्मचारी गण उपस्थित थे ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ शुभा बाजपेयी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा रचना शर्मा ने किया।

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सकून तेरे पास है और तू भटकाता फिर रहा

बात बात पर भड़क रही थी शैफाली आज।रसोई के बर्तनो की आवाज़ से ही उसकी मन की व्यथा का अंदाज़ा लगाया जा सकता था।समीर की पत्नी शैफाली,जो किटी पार्टीयो में अक्सर आया जाया करती और आ कर अपने पति को परेशान करती और कहती ! समीर देखा !मेरी सहेली रीटा का घर बेस्ट लोकेशन में है हमारा कंयू नही। मोनिका ने अभी बंगला ख़रीदा है हम क्यों नहीं ले पा रहे।रात के खाने के बर्तन समेटते हुए शैफाली ने समीर से पूछा ?समीर तुम्हारी प्रमोशन का क्या बना ?बॉस से बात हुई क्या ? कब से कह रही हूँ बंगला ले लो।साल से ज़्यादा वक़्त हो गया हमें इस शहर में आये हुये।समीर चुपचाप अपनी पत्नी शैफाली की बाते सुन रहा था।शैफाली बोले जा रही थी ,मेरा मन भी करता है कि मै बंगले में रहूँ।अब तो मुझे ईर्ष्या सी होने लगी है सभी सहेलियों से।समीर तुम इतने काबिल हो कर भी कुछ कर नहीं पा रहे और बेधड़क भगवान को कोसे जा रही थी कि भगवान ने उसे ये फ़्लैट कंयू दिया,बंगला कयू नही दीया वग़ैरह वग़ैरह।समीर की ये सब बातें सुनना उसकी दिनचर्या में शामिल था।हर रोज ये बातें सुनता और मन ही मन में झुंझला जाता।चुपचाप अपने सोने के कमरे में चला गया।आँखे मूँद कर सोने का बहाना करने लगा।नींद तो उसे भी नहीं आ रही थी क्योंकि सोच तो वो भी यही रहा था कि कैसे तैसे कर के इक बंगला बन जाये।पता नहीं कब आँख लगी और सुबह हो गई।जल्दी से उठा और नाश्ता करके आफ़िस चला गया तो उसे वहाँ जा कर पता चला कि उसकी कंपनी जिस में वो काम करता था ,बैंकरपसी मतलब बंद होने को है और बॉस ने हाथ जोड़कर कर सभी कर्मचारियों को कहा !अब मेरी कंपनी बंद हो रही है और आप कहीं और काम देखिए।समीर के पैरो तले जैसे ज़मीन निकल गई।समीर अपनी कंपनी में बहुत अच्छी पोस्ट पर था।बड़ा अच्छा घर चल रहा था।ओह !अब क्या करेगा।आफ़िस से सीधा घर आया और शैफाली को भी ये बात बताई।अब दोनो परेशान कि अब कैसे घर चलेगा ,बच्चों की स्कूल की भारी फ़ीस कहाँ से देगा ,फ़्लैट की किश्त कैसे भरेंगा ।रात दिन नौकरी तालाश करने लगा।उसकी तो रातों की नींद ही उड़ गई।परेशान सा सोच रहा था कि अब जल्दी ही फ़्लैट भी ख़ाली करना पड़ेगा ,क्योंकि अगले महीने फ़्लैट की किश्त वो नहीं भर पायेगा।महीने का आख़िरी दिन है और जगह जगह नौकरी के लिये अपलाई कर चुका है मगर कहीं से कोई जवाब हाँ में नहीं आ रहा।कोई जवाब न पा कर बेहद निराश सा ,खोया सा बैठा था।कुछ नही सूझ रहा था उसे ।अचानक से दरवाज़े की घंटी बजी।समीर ने भारी कदमो से दरवाज़ा खोला ।वहाँ कोई उसे लैटर देने आया था।लैटर खोला तो देखा उसे इक कंपनी मे अच्छी नौकरी मिल गई है समीर इतना ख़ुश कि ख़ुशी से रोने ही लगा और कहने लगा कि शुक्र है भगवान ,तू कितना दयालु है मुझे सड़क पर जाने से बचा लिया।वरना मैं कहाँ ले कर जाता बच्चों को,और फ़्लैट को ऐसे देख रहा था जैसे वो फ़्लैट न हो कर उसका महल हो।शैफाली और समीर ख़ुशी से नाच रहे थे और भगवान का शुक्रिया कर रहे थे।
दोस्तों फ़्लैट तो वही था जो दोनों के दुख का कारण था और आज वही फ़्लैट सुख का कारण बना हुआ था।ख़ुशी कहाँ से आई अन्दर से ,स्वीकार करने मे ,शुक्र करने मे।ख़ुशी हमारी प्रतिक्रियाओं मे है कि हम हर हालात मे कैसे रिएक्ट करते है ।कैसे किसी हालात को समझते है।अपनी चीजों की कद्र हमे तब होती है जब वो हमारे हाथों से जा रही होती है या जा चुकी होती है ।सो वक़्त रहते हमे चीजो की,या हालातो की या अपने आसपास के लोगों की कद्र करना सीख लेना चाहिए।अकसर लोग सोचते है कि वो बहुत ख़ुश होते,अगर वो कहीं बाहर के देशों मे सैटल होते। विदेशों मे रहने वाले लोगों से पूछिए।वो भी परेशान है किसी न किसी बात पर।किसी को काम नही मिल रहा ,कोई बीमारी की वजह से परेशान,किसी के घर तालाक की बाते चल रही है कोई डिप्रेशन से घिरा हुआ है। जिसको सुख और सकून मिलना है वो कहीं भी रह कर भी मिल सकता है ।
दोस्तों ! दूसरो की उन्नति से ईषा करके कोई फ़ायदा नहीं ।अपने पास जो है उसी में सकून ढूँढिए।
“सकून की तालाश में अपना वक़्त न ज़ाया कर..सकून तेरे पास है और तू भटकाता फिर रहा है ..ऐ सकूने यार मे”।
✍️ लेखिका स्मिता केंथ (England)

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को देश के सर्वोच्च पद पर चुने जाने के ऐतिहासिक क्षण पर आज नई दिल्ली में उनसे भेंट कर उन्हें शुभकामनाएं दीं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति पद पर उनकी ऐतिहासिक जीत की बधाई दी। श्री अमित शाह ने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को देश के सर्वोच्च पद पर चुने जाने के ऐतिहासिक क्षण पर आज नई दिल्ली में उनसे भेंट कर उन्हें शुभकामनाएं दीं।

अपने ट्वीट्स में श्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव में उनकी प्रचंड विजय पर पूरा देश विशेषकर जनजातीय समाज उत्साह व हर्षोल्लास के साथ जश्न मना रहा है। एक अति सामान्य जनजातीय परिवार से आने वाली NDA प्रत्याशी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का भारत का राष्ट्रपति चुना जाना पूरे देश के लिए गौरव का पल है, उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ। यह विजय अन्त्योदय के संकल्प को चरितार्थ करने व जनजातीय समाज के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी जिन विषम परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आज देश के इस सर्वोच्च पद पर पहुँची है वो हमारे लोकतंत्र की अपार शक्ति को दर्शाता है। इतने संघर्षों के बाद भी उन्होंने जिस नि:स्वार्थ भाव से खुद को देश व समाज की सेवा में समर्पित किया वो सभी के लिए प्रेरणादायी है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में NDA के सहयोगियों, अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय जनप्रतिनिधियों का जनजातीय गौरव श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के पक्ष में मतदान करने पर आभार व्यक्त करता हूँ। मुझे विश्वास है कि भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में मुर्मू जी का कार्यकाल देश को और गौरवान्वित करेगा।

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खुद से हठ करना ग़लत नहीं है इक ताक़त है

अक्तूबर का महीना और सुहानी हवायों का धीरे धीरे चलना।होटल के लॉन में फूलो की सजावट क़ाबिले तारीफ़ थी और फूलो की सोंधी सोंधी ख़ुशबू हवा मे जैसे घुल कर सारे वातावरण को मदहोश कर रही थी। होटल भी इक पहाड़ी पर, वाह !जहां से चारों ओर पहाड़ ही पहाड़,ढलती हुई शाम और उस पर गाने की धुन बड़ी ही मनमोहक प्रतीत हो रही थी।शाही खानो के स्टालस और उसपर खाने की ख़ुशबू ,मैं उस शादी के माहौल का पूरे मन से आनन्द ले रही थी।बहुत सालों के बाद इंग्लैंड से भारत आई थी,बानी की शादी मे शामिल होने के लिये।बानी मेरी सहेली की
बेटी।हालाँकि शादियाँ इंग्लैंड में भी बहुत अच्छे से होती हैं, मगर इंगलिश टच तो कहीं न कहीं होता ही है।मैं बहुतों से मिलते मिलाते बानी को मिली।बहुत ही प्यारी लग रही थी दुल्हन के रूप में।बानी के पिता का अच्छा कारोबार था तो ज़ाहिर था,शादी भी बड़े ही स्तर पर थी।जो साज सजावट से ही साफ़ दिखाई दे रही थी।मेरे बचपन की सहेली निशा भी मिली।बड़ा अच्छा लग रहा था।खाने की ख़ुशबू मुझे खाने की स्टालस की ओर खींचने लगी।मै और निशा स्टालस की बढ़ रही थी तो पीछे से आवाज़ आई ,बेटा आरूश तुम्हारी ममी कहाँ है ? जा बेटा ,ज़रा बुला कर ला।आरूश अपनी दादी से कह रहा था।दादी इतने लोगों के बीच कहाँ ढूँढू ममी को।अच्छा देखता हूँ शायद शैल आंटी से पास खडी हो।आरूश भागा भागा गया और अपनी ममी स्वाति को बुला लाया।दादी ने स्वाति से कह रही थी।
बहू स्वाति !मेरी खाने की प्लेट तो बना ला ज़रा ,और ये भी देख लेना ,तुमहारे पापा ने खाना खा लिया क्या ?और हाँ सुन ज़्यादा तीखी चीजें मेरी प्लेट मत लाना।सब थोड़ा ही डालना ,बहुत ज़्यादा खाना तो मै खा ही नही सकूँगी ।
इक और आवाज़ फिर सुनाई दी ,जो कह रही थी ! नही पूनम तुम ख़ुद उठो और खुद अपनी प्लेट बना कर लाओ।ये क्या तरीक़ा है पूनम ऐसे तो तुमहारी टाँगें काम करना बंद कर देंगी,और अगर तुम खुद चलोगी तो अपनी पसंद का खाना ,ज़रूरत के मुताबिक़ डाल कर ला सकती हो।बहू तो मर्ज़ी से कुछ भी प्लेट में डाल कर ले आयेगी।वो शायद तुम खाना चाहोगी कि नहीं ,इसी लिये कह रही हूँ ।अभी तुम चल सकती हो ,तो चलना चाहिए न ।इस तरह बच्चों से ऐसे छोटी छोटी बाते की अपेक्षा कंयू करती हो और तुम अपने पति गोयल साहब की भी फ़िक्र क्यों कर रही हो ,देखा नही वो अपने दोस्तों के बीच कितना हंस खेल रहे है ,वो भी खा ही लेंगे अपने दोस्तों के साथ।
तुम बस मेरा हाथ पकड़ो ,मैं चलती हूँ तुमहारे साथ।और पूनम कह रही थी।मैं कहाँ जाऊँगी ,बहू ले आयेगी न अपने आप।मुझ से नहीं चला जाता इतनी भीड़ में।फिर इक ज़ोर से हंसी सुनाई दी।सारी बाते मेरे कानों मे साफ़ सुन रही थी।
मैंने मुड कर देखा तो इक बड़ी उम्र की महिला ,जो आंटी शोभना थी और अपनी सहेली पूनम का हाथ बड़े प्यार से पकड़ कर धीरे धीरे खाना की स्टालस की तरफ़ ले जा रही थी। मुख पर तेज ,आवाज़ मे रोबीलापन था और चाल भी बेमिसाल थी।बड़ा अच्छा लगा ये देख कर कि आंटी शोभना बड़ी उम्र होने के बाद भी उनकी सोच कितनी पाजीटिव है।जब कि हम इन्हें पुरानी पीढ़ी मे गिनते है और उन्हें पुराने ख़यालात वाले समझते है।
मैं खाने की प्लेट ले कर लाईन मे खड़ी थी।वो दोनों महिलायें हमारे पास आई तो मैंने शिष्टाचार निभाते हुए ,लाईन मे उन्हें आगे करना चाहा मगर आंटी शोभना ने बहुत ही प्यार से मुझे धन्यवाद दिया और कहाँ नही बेटा ,आप पहले अपनी प्लेट बनाइये ,हमारी बारी भी आ जायेंगीं जब कि आंटी शोभना के हाथ में भी चलने के लिये छड़ी पकड़ी हुई थी।मैं सोच रही थी ये आंटी जो खुद ठीक से चल भी नहीं पा रही।चेहरे पर पसीने की बूँदें भी चमक रही थी खुद आंटी की उम्र 80 साल के लगभग होगी शायद,मगर अपनी सहेली को कैसे समझा रही थी,और पूनम आंटी उनसे उम्र मे छोटी लग रही थी और यही नही ,निशा बता रही थी मुझे कि शोभना आंटी तो इस उम्र मे भी,इतनी शहर की ट्रैफ़िक होने के बावजूद भी ,खुद अपनी गाड़ी चलाती हैं ।बाहर के सारे काम खुद ही करती है।मैं सोचने लगी मैं आज भी अपनी सासु माँ की खाने की प्लेट लगा कर देती हूँ। कहीं न कहीं हम ही है जो बुजुर्गों को प्रोत्साहित नहीं करते कि वो अपना काम खुद से करते रहे।शोभना आंटी ठीक ही तो कह रही थी कि जब तक जान है।जब तक शरीर मे ताक़त है तब तक हिम्मत करते रहना चाहिए।ये कितनी अच्छी सीख है बुजुर्गों के लिये और हम सब के लिए ।
बहुत लोग ऐसा सोचते भी हैं कि बहू आ गई तो अब सास को बहू पर ज़िम्मेदारी सौंप देनी चाहिए।दोस्तों मैं खुद ऐसी सोच को सलाम करती हूँ ।बच्चे लाख अच्छे हो फिर भी अपने आप का काम करते रहना चाहिए।इससे शरीर भी चलता रहता है ।मन भी लगा रहता है।हठ करते रहना चाहिए।ये ज़रूरी नही कि आप की उम्र क्या है ज़रूरी ये है कि आप ,किस उम्र की सोच रखते है यू भी खुद से हठ करना ग़लत नहीं है ,ये इक ताक़त है सच में “कुछ लोग चंदन की तरह, ताउम्र खुशबू देते रहते हैं।”
बढ़ती उम्र उन्हें मुरझाने नहीं देती ,क्योंकि वो उम्र को हराना जानते हैं अपनी जवान सोच के साथ।
🙏लेखिका स्मिता

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नेशनल मीडिया क्लब के “मैंगो फेस्टिवल” में छाया मोदी आम

यूपी सरकार की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया उदघाटन ।

महोत्सव में हर आम और खास ने शिरकत किया।

कानपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, इंसान के हाँथ की बनाई नही खाते हम आम के मौसम में मिठाई नही खाते, यह पंक्तियां नेशनल मीडिया क्लब के मैंगो फेस्टिवल पर सटीक बैठती है , इस मैंगो फेस्टिवल का उदघाटन मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुँची उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल व वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने फीता काटकर किया । कानपुर के प्रमिला सभागार में आयोजित इस मैंगो फेस्टिवल में मंत्री , सांसद , विधायक , उद्योगपति , आलाअधिकारी समाजसेवियों के अलावा और नामचीन हस्तियों का तांता लगा रहा । इस कार्यक्रम में लगभग 300 से ज्यादा प्रजातियों के आम की प्रदर्शनी लगाई गई । जिसमें मोदी आम मेहमानों में आकर्षण का केंद्र बना । जिसके बाद कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्या ने मोदी आम को बेस्ट मैंगो के खिताब से नवाज़ा । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बेबी रानी मौर्य के अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री संजय गंगवार, राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने इस महोत्सव की जमकर तारीफ की ।
कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्या ने इस खास आम महोत्सव की जमकर तारीफ़ की । उन्होंने कहा कि देशभर में उन्होंने अब तक अनगिनत पार्टी देखी , लेकिन इस मैंगो पार्टी में आकर एक अलग एहसास हुआ । उन्होंने कहा कि मैंने अपने कई साथियों से सुना कि उन्हें इस मैंगो पार्टी का बेसब्री से इंतजार रहता है, ऐसे आयोजन देश मे होना एक अलग एहसास कराता है ।इस दौरान राज्यमंत्री संजय गंगवार ने नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक व सहारा समय के समूह संपादक रमेश अवस्थी की जमकर तारीफ करते हुए कहा की यह फेस्टिवल अपने आप में एक अलग छटा बिखेरता है । उन्होंने इस आम महोत्सव के लिए आयोजकों को बधाई दी साथ ही कहा कि कृषि प्रधान देश में कृषकों की फसल को इतना बड़ा प्लेटफार्म देना काबिले तारीफ है। वहीं उत्तरप्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ल ने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब की आम पार्टी का सभी को एक साल तक इंतजार रहता है। क्योकि यह अन्य आयोजनों से अलग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कानपुर की महापौर प्रमिला पाण्डेय ने कहा कि मैं इस आयोजन का हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करती हूँ, ऐसा आयोजन जिसमे देश प्रदेश व कानपुर नगर के कई नामचीन हस्तियों का एक साथ होना इस आयोजन को अति ख़ास बनाता है, मैं ऐसे आयोजन में आकर और आमो की इतनी प्रजातियों को देखकर महसूस करती हूँ कि ये सच मे खास लोगों की आम पार्टी है। वहीं आरएसएस के प्रांत प्रचारक श्री राम जी ने मैंगो फ्रेस्टिवल में आम की प्रदर्शनी की जमकर तारीफ की, उन्होंने प्रदर्शनी में आये हुए किसानों का भी उत्साहवर्धन किया ।

वहीं नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक और सहारा समय के ग्रुप एडिटर रमेश अवस्थी ने आये हुए मेहमानों का स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया, इस दौरान उन्होंने बताया कि मैंगो फेस्टिवल का मकसद किसानों की मेहनत से जनता को रूबरू कराना तो है साथ ही आम जनमानस को पता चले कि हमारे देश का किसान कितनी मेहनत करके उन्हें स्वाद और शक्ति उत्पन्न करने वाले फल और अनाज पैदा करता है । उन्होंने कहा कि आम का स्वाद तो सभी को लुभाता है लेकिन इसकी गुठलियां भी कारगर होती है ।
नेशनल मीडिया क्लब के अध्यक्ष और मैंगो फेस्टिवल के आयोजक सचिन अवस्थी के ने बताया कि पार्टी का मकसद लोगो को आम की प्रजतियो से अवगत करना था । उन्होंने कहा की देश में 700 ज्यादा प्रकार के आम उपलब्ध है । जिनमे से 300 से अखिक आम के प्रकार इस प्रदर्शनी में मौजूद है ।
इस कार्यक्रम के दौरान संगीत लहरियों ने भी भक्ति व फिल्मी गीत संगीत से कार्यक्रम में चार चाँद लगाए । इस दौरान भारतीय जनता पार्टी से सांसद सत्यदेव पचौरी, पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी, महापौर प्रमिला पाण्डेय, एमएलसी सलिल विश्नोई , विधायक सुरेंद्र मैथानी , जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण , पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया , वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र दुबे, प्रकाश पाल, पंजाबी अकादमी के चेयरमैन गुरविंदर सिंह छाबड़ा , गुरु सिंह सभा के हरविंदर सिंह लार्ड , सुखविंदर सिंह लाडी, जिला अध्यक्ष सुनील बजाज , महामंत्री वीरेश त्रिपाठी , महामंत्री संतोष शुक्ला , दक्षिण की भाजपा जिलाध्यक्ष बिना आर्या पटेल , महामंत्री शिवराम सिंह , क्षेत्रीय सह मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी , भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुनील साहू , पूर्व जिला अध्यक्ष नवाब सिंह ,राज्य महिला आयोग की सदस्य पूनम कपूर, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश अवस्थी, पार्षद नवीन पंडित, पार्षद संदीप जायसवाल, पूनम द्विवेदी समेत सैकड़ो भाजपाई मौजूद रहे । वही समाजवादी पार्टी से विधायक अमिताभ बाजपेई, विधायक हसन रूमी, पूर्व विधायक सतीश निगम, वीरेंद्र शुक्ला, महासचिव अभिषेक गुप्ता मोनू मौजूद रहे । जबकि प्रशानिक महकमें से जॉइन कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी, एडीसीपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव, डीसीपी प्रमोद कुमार, डीसीपी विजय ढुल, केडीए सचिव शत्रुघन वैश्य , अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता , कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ विनय कृष्णा, डॉ राकेश वर्मा समेत दर्जनों अधिकारी मौजूद रहे ।
वहीं डेन केबिल नेटवर्क के डायरेक्टर संजीव दीक्षित , कानपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अवनीश दीक्षित , उधोगपति विजय कपूर, आईआईए अध्यक्ष आलोक , महाराज शिवाकान्त शास्त्री महाराज, जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश तिवारी , चरनजीत सिंह बंटी आदि गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत कर के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई ।

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ससुराल गेंदा फूल

नेहा इंजीनियरिंग की डिग्री तो मिल गई है अब तुम्हारा आगे का क्या विचार है? स्मिता:- यार ! मेरे विचार से क्या होता है? घरवाले लड़का देख रहे हैं। एक जगह बात भी चल रही है। मम्मी कह रही थी कि अगर अच्छा लड़का मिल गया तो हाथ पीले कर दूंगी।

नेहा:-  तो जॉब के लिए ट्राई नहीं करेगी?
स्मिता:- करना तो चाह रही लेकिन पता नहीं क्या कर पाती हूं और अनमनी होकर घर जाने लगी।
स्मिता के बारे में सोचते सोचते नेहा घर पहुंच गई।
नेहा:- मां क्या बनाया है खाने में?
मां:- कढ़ी चावल है, फ्रेश हो जाओ फिर खा लो। फिर आराम से बात करते हैं। नेहा ने सवालिया नजर से मां की तरफ देखा।
मां:- तेरी बुआ ने एक लड़का बताया है। अच्छा घर परिवार है ऐसा बोल रही थी जीजी। अच्छा घरबार होगा तो रिश्ता तय कर सकते हैं।
नेहा:- मां मेरी पढ़ाई अभी बाकी है। मुझे एमबीए करना है फिर जॉब करना है। इस बारे में फिर सोचूंगी।
मां:- देखो ! लोग अच्छे होंगे तो रिश्ता तय कर देंगे फिर चाहे शादी बाद में करें। नेहा कुछ नहीं बोली। नेहा शाम की राह देखने लगी कि वह पापा से इस विषय पर बात करेगी। पढ़ाई कर लेने के बाद में क्या तुरंत शादी कर देना ही सही होता है? क्या यही एक जिम्मेदारी रह जाती है हमारी हम लड़कियों के प्रति? यही सब सोचते सोचते नेहा की आंख लग गई। शाम को पापा आए तो नेहा ने चाय बना कर दी और कहा, “पापा मुझे आपसे कुछ बात करनी है।”
पापा बोले, “बोलो बेटा क्या चल रहा है दिमाग में?
नेहा:- पापा मुझे अभी एमबीए करके जॉब करनी है फिर उसके बाद मेरी शादी की जाये पर मम्मी और बुआ अभी से मेरे पीछे पड़ी है!
पापा:- देखो बेटा तुमको कुछ करने के लिए मना नहीं किया है और हम अभी से देखेंगे तब जाकर एक-दो साल में कुछ ढंग के रिश्ते आएंगे और तुमको जो करना है उसके लिए कोई मना थोड़ी कर रहे है। जब तुम आर्थिक रूप से मजबूत हो जाओगी हम तभी तुम्हारी शादी करेंगे।
इधर स्मिता के घर में उसके ऊपर लगातार शादी के लिए दबाव बन रहा था। स्मिता भी चाह रही थी कि वह जॉब करें और उसके बाद ही उसकी शादी हो लेकिन उसकी मां यह बात नहीं समझ पा रही थी।
इधर नेहा को प्लेसमेंट मिल गया था और वह अपनी नौकरी के साथ साथ एमबीए की तैयारी में लग गई थी।
स्मिता ने भी अपने पापा से परमिशन लेकर अपनी जॉब शुरू कर दी लेकिन स्मिता के पापा ने स्पष्ट कह दिया था कि यदि ससुराल वाले नौकरी नहीं पसंद करेंगे तो तुझे नौकरी छोड़नी पड़ेगी। स्मिता कुछ नहीं बोली यह सोच कर कि चलो घर से बाहर काम कदम तो निकले। दोनों सहेलियां अपनी अपनी राह पर चलने लगी। दोनों में अक्सर फोन के जरिए बातचीत होते रहती थी।
नेहा:- हेलो स्मिता ! मेरी शादी पक्की हो गई है मेरा कलीग ही है। अजय नाम है उसका। बस हाय हेलो ही थी, ज्यादा कुछ बातचीत भी नहीं थी हमारी। अजय मुझे पसंद करते हैं यह बात मुझे पता नहीं थी। उसके घरवालों ने पापा से मिलकर मेरा हाथ मांग लिया।
स्मिता:- अरे वाह! कांग्रेचुलेशन ! शादी की तारीख कब निकली है ? मुझे भी तो शॉपिंग करनी है, अभी से शुरू करनी होगी।
नेहा:- तीन महीने बाद की तारीख निकली है।
स्मिता:- वाह़़….. बढ़िया!
शादी के दिन करीब आ रहे थे और तैयारियां शुरू हो चुकी थी। नेहा ऑफिस के काम के साथ-साथ शादी की तैयारी भी कर रही थी । आखिर वह दिन भी आ गया जब नेहा शादी करके ससुराल चली गई। अजय को पति रूप में पाकर नेहा खुश थी लेकिन एक अनजाना सा डर भी था उसके मन में कि पता नहीं हम दोनों में सामंजस्य हो पाएगा कि नहीं? मैं नौकरी छोड़ना नहीं चाहती थी और पता नहीं अजय के मन में क्या है? अजय क्या चाहते हैं मैंने कभी इस विषय पर बात भी नहीं की? उसका ससुराल में पहला दिन बहुत अच्छा रहा। घर के माहौल और तौर-तरीकों को समझने का प्रयास करते रही। किचन में सब देखती समझती रही, यथासंभव काम में हाथ बंटाती रही। मेरे ऑफिस की छुट्टियां अब खत्म होने वाली थी। कुछ दिनों में मुझे ऑफिस ज्वाइन करना था और मुझे अब अजय से बात करना जरूरी हो गया था। शाम को जब वह घर आए तो चाय मैं कमरे में ही ले आई।
नेहा:- सुनो! कुछ बात करनी है आपसे।
अजय:- हां…. बोलो ।
नेहा:- मेरे ऑफिस ज्वाइन करने का समय आ रहा है, छुट्टियां खत्म हो रही है।
अजय:-  हां तो दिक्कत क्या है? समय से ऑफिस ज्वाइन कर लो।
नेहा:- वो…. मम्मी पापा से बात….
अजय:-  उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। तुम ऑफिस जाना शुरु कर दो।
मैं मुस्कुरा कर रह गई। मम्मी को बताना जरूरी था कि मैं ऑफिस जाने वाली हूं। सुबह किचन में काम करते हुये मैंने कहा, मम्मी जी मैं मंडे से ऑफिस जाना शुरू कर रही हूं।
मम्मी:- हां ठीक है… सारे मेहमान चले गये हैं और रस्में भी पूरी हो गई है तो तुम अपना ऑफिस शुरू कर सकती हो। मुझे आश्चर्य हो रहा था कि सब इतनी आसानी और नॉर्मल तरीके से कैसे हो रहा है। रात में खाना खाने के बाद जब मैं अजय के साथ वॉक पर निकली तो उनसे पूछा कि घर में किसी को एतराज नहीं है मेरे काम करने पर?
अजय:-  जब हमारे रिश्ते की बात चल रही थी तब तुम्हारे पापा ने हमें पहले ही बता दिया था कि तुम नौकरी करना चाहती हो और उन्होंने कहा भी था कि लड़की आर्थिक रूप से मजबूत रहे तो ज्यादा अच्छा है। मम्मी ने बस इतना ही कहा था कि घर बाहर मैनेज कर लेगी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। तुम्हारे पापा ने कहा कि आप लोगों का साथ और समय उसे जरुर मदद करेगा और मैं भी चाहता हूं कि तुम अपनी नौकरी नहीं छोड़ो।
मुझे पापा पर बहुत प्यार आया। मैं खुश थी।
सुबह मम्मी ने पूछा, “ऑफिस के लिए कितने बजे निकलेगी?”
नेहा:- मैं 9:00 बजे निकल जाऊंगी मम्मी ।
मम्मी:-  अरे अजय! इसे ऑफिस छोड़ते हुए चले जाना।
अजय:- हम दोनों का रूट अलग है मम्मी! इसे छोड़ने के चक्कर में मुझे लेट हो जाएगा।
नेहा:- कोई बात नहीं मैं रिक्शा से चली जाऊंगी।
मम्मी:- ठीक है कुछ दिन एडजस्ट कर लो। (अजय से कहते हुये) इसे टू व्हीलर दिला दो ताकि आने-जाने में सुविधा रहे।
मैं देख रही थी कि मम्मी मेरे सभी कामों में मदद करती थी और मैं धीरे-धीरे घर में सेट होते जा रही थी मम्मी धीरे धीरे जिम्मेदारियां मेरे ऊपर डाल रही थी मेरे मन का डर निकलते जा रहा था और घर में मैं रमते जा रही थी।
इधर स्मिता की भी शादी तय हो गई थी। मन में डर भी था और खुशी भी थी। कुछ नये सपने सजने लगे थे। नेहा को जब शादी का पता चला तो वह स्मिता को छेड़ने लगी।
नेहा:- अब तो महारानी के भाव नहीं मिलेंगे ! अब तो नखरे ही नखरे दिखेंगे! अब कहां मुझे याद रखोगी! अच्छा तुम जीजू से कब मिलवा रही हो ?
स्मिता:- फोन पर बात कर लो और फिर किसी दिन मिलवा भी दूंगी।
नेहा:- अच्छा यह बताओ तुम तो यहां ही बड़ी मुश्किल से नौकरी कर रही हो वहां पर लोग क्या बोल रहे हैं?
स्मिता:- अभी तक किसी ने कुछ कहा नहीं है आलोक को भी एतराज नहीं है मेरे काम करने से। सासू जी बोल रही थी कि मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है, मुझसे घर के काम अब संभाले नहीं जाते।
नेहा के मन में घर लौटते समय यही सवाल घूम रहा था कि स्मिता ससुराल में एडजस्ट कर पाएगी क्या? उसे सबका सपोर्ट मिलेगा क्या?
तय समय पर स्मिता की शादी हो गई। पहले ही दिन से स्मिता ने घर के काम संभाल लिए। ऑफिस की छुट्टी खत्म होते ही स्मिता ने घर में कहा कि कल से वह ऑफिस जा रही है। सास ने कहा, “नाश्ता खाना निपटा कर जाना मेरी तबीयत ठीक नहीं है।”
स्मिता:- जी मम्मी !
अगले दिन जब स्मिता ऑफिस जाने लगी तो सास में टोक दिया, “नई नई शादी हुई है थोड़ा बहुत तैयार होकर, साड़ी पहन कर जाया करो। तुमको तो कोई कुछ कहेगा नहीं मुझे ही सब कहेंगे कि बहू बहुत तेज है।”
स्मिता:- जी मम्मी ।
शादी के कुछ दिन गुजरने के बाद इस स्मिता अपनी सुविधानुसार कपड़े पहनकर ऑफिस जाने लगी। सास मुंह तो बना लेती पर कहती कुछ नहीं। बस बड़बड़ाते रहती कि हमारे वक्त में मजाल था कि हम अपने बड़ों के कहने से बाहर जाए और आजकल के बच्चे हैं जिन्हें कुछ सुनना ही नहीं।”
घर के रीति-रिवाज और तौर-तरीकों पर मम्मी जी मेरे मायके से तुलना करती रहती और मेरी कोशिश होती कि मैं जल्दी से जल्दी घर से ऑफिस चली जाऊं अगर आलोक का साथ ना होता तो शायद मैं ससुराल में सामंजस्य नहीं बैठा पाती। आलोक हर बात को हल्के में लेकर हंसी मजाक में उड़ा देते और मैं चैन की सांस लेती थी। कितना फर्क है है मेरे और नेहा के ससुराल में। नेहा की सास हर काम में मदद करती है और मुझे मदद की उम्मीद रखनी पड़ती है। मैं आलोक के सहारे सफर तय कर रही हूं। ससुराल और उनसे जुड़े रिश्तो के बारे में न जाने कितनी बातें होती रहती हैं यह सच है कि हम हर एक को एक ही तराजू मैं नहीं तोल सकते हैं।
प्रियंका वरमा माहेश्वरी
गुजरात

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