यह पुस्तिका एक व्यापक और अंतर्दृष्टिपूर्ण दस्तावेज है जो भारत में महिलाओं और पुरुषों की स्थिति के बारे में समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास करता है और जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था में भागीदारी, निर्णय लेने में सहभागिता आदि जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर डेटा प्रदान करता है। यह जेंडर, शहरी-ग्रामीण विभाजन और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग डेटा प्रस्तुत करता है, जो महिलाओं और पुरुषों के विभिन्न समूहों के बीच विद्यमान असमानताओं को समझने में मदद करता है। पुस्तिका में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों/संगठनों के प्रकाशित आधिकारिक डेटा से प्राप्त महत्वपूर्ण संकेतक शामिल हैं।
“भारत में महिलाएं और पुरुष 2023” न केवल लैंगिक समानता की दिशा में की गई प्रगति को रेखांकित करता है, बल्कि उन क्षेत्रों की भी पहचान करता है जहां महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं। विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की जांच करके, पुस्तिका समय के साथ रुझानों का कुछ विश्लेषण प्रस्तुत करती है और इस प्रकार नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम जनता को सूचित निर्णय लेने और जेंडर-संवेदनशील नीतियों के विकास में योगदान करने में मदद करती है।
यह रिपोर्ट भारत में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और उनके निहितार्थों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने की वकालत और कार्रवाई करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है कि विकास प्रयास समावेशी और टिकाऊ हों।
“भारत में महिलाएं और पुरुष 2023” मंत्रालय की वेबसाइट (https://mospi.gov.in/) पर उपलब्ध है।
पुस्तिका के कुछ मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- 2036 तक भारत की जनसंख्या के 152.2 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, महिला प्रतिशत 2011 के 48.5 प्रतिशत की तुलना में मामूली वृद्धि के साथ 48.8 प्रतिशत होगा। संभवतः प्रजनन क्षमता में गिरावट के कारण 15 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों का अनुपात 2011 की तुलना में 2036 में घटने का अनुमान है। इसके विपरीत, इस अवधि के दौरान 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के अनुपात में अधिक वृद्धि होने का अनुमान है।


- 2036 में भारत की जनसंख्या में 2011 की जनसंख्या की तुलना में स्त्रियों की संख्या अधिक होने की उम्मीद है, जैसा कि जेंडर अनुपात में परिलक्षित होता है, जिसके 2011 में 943 से बढ़कर 2036 तक 952 होने का अनुमान है। यह लैंगिक समानता में सकारात्मक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

- यह स्पष्ट है कि 2016 से 2020 तक, 20-24 और 25-29 आयु वर्ग में आयु विशिष्ट प्रजनन दर क्रमशः 135.4 और 166.0 से घटकर 113.6 और 139.6 हो गई है। उपरोक्त अवधि के लिए 35-39 आयु के लिए एएसएफआर 32.7 से बढ़कर 35.6 हो गया है, जो दर्शाता है कि जीवन में व्यवस्थित होने के बाद, महिलाएं परिवार के विस्तार पर विचार कर रही हैं।
- 2020 में किशोर प्रजनन दर निरक्षर आबादी के लिए 33.9 थी, जबकि साक्षर लोगों के लिए 11.0 थी। यह दर उन लोगों के लिए भी अत्यधिक कम है जो साक्षर हैं, लेकिन निरक्षर महिलाओं की तुलना में बिना किसी औपचारिक शिक्षा के (20.0) के हैं। यह तथ्य महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने के महत्व पर फिर से जोर देता है।

- मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर) एसडीजी संकेतकों में से एक है और इसे 2030 तक 70 तक लाया जाना एसडीजी ढांचे में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण, भारत ने समय रहते अपने एमएमआर (2018-20 में 97/लाख जीवित शिशु) को कम करने का प्रमुख मील का पत्थर सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और एसडीजी लक्ष्य को भी हासिल करना संभव होना चाहिए।

- शिशु मृत्यु दर में पिछले कुछ वर्षों में पुरुष और महिला दोनों के लिए कमी आ रही है। महिला आईएमआर हमेशा पुरुषों की तुलना में अधिक रही है, लेकिन 2020 में, दोनों 1000 जीवित शिशु पर 28 शिशुओं के स्तर पर बराबर थे। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर के आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2015 में 43 से घटकर 2020 में 32 हो गई है। यही स्थिति लड़के और लड़कियों दोनों के लिए है और लड़के तथा लड़कियों के बीच का अंतर भी कम हुआ है।
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 से पुरुष और महिला दोनों आबादी के लिए बढ़ रही है। यह देखा गया है कि 2017-18 से 2022-23 के दौरान पुरुष एलएफपीआर 75.8 से बढ़कर 78.5 हो गया है और इसी अवधि के दौरान महिला एलएफपीआर 23.3 से बढ़कर 37 हो गई है।
- 15वें राष्ट्रीय चुनाव (1999) तक, 60 प्रतिशत से कम महिला मतदाताओं ने भाग लिया, जिसमें पुरुषों का मतदान 8 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, 2014 के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 65.6 प्रतिशत हो गई और 2019 के चुनावों में यह और अधिक बढ़कर 67.2 प्रतिशत हो गई। पहली बार, महिलाओं के लिए मतदान प्रतिशत थोड़ा अधिक रहा, जो महिलाओं में बढ़ती साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता के प्रभाव को दर्शाता है।

· उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने जनवरी 2016 में अपनी स्थापना के बाद से दिसंबर 2023 तक कुल 1,17,254 स्टार्ट-अप को मान्यता दी है। इनमें से 55,816 स्टार्ट-अप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो कुल मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप का 47.6 प्रतिशत है। यह महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व भारत के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में महिला उद्यमियों के बढ़ते प्रभाव और योगदान को रेखांकित करता है।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर द्वारा राष्ट्रीय संस्कृत प्रतिभा खोज का आयोजन किया गया इस प्रतियोगिता में स्नातकोत्तर स्तरीय हिंदी विभाग व संस्कृति विभाग द्वारा संस्कृत युवा गीत संस्कृत भाषण व श्रुत लेखन की प्रतिभागिता छात्राओ से कराई गई इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबंधन तंत्र समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा सचिव श्री प्रोवीर कुमार सेन संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन समाजशास्त्र विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर निशि प्रकाश व प्रोफेसर रेखा चौबे ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया छात्रों को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने कहा की भाषा विभाग उत्तर प्रदेश शासन अधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ द्वारा आयोजित जनपद मंडल तथा राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतिवर्ष आयोजित होती है जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयी महाविद्यालयी छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रतियोगिता में प्रतिभाग करते हैं जिसमें संस्कृत भाषा ज्ञान से संबंधित उत्कृष्ट प्रतिभा सामने उभर कर आती है इसी के प्रेरणा स्रोत अब प्रत्येक वर्ष अपने महाविद्यालय में यह प्रतियोगिता आयोजित होगी और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मंडल तथा राज्य स्तरीय परीक्षा में भेजा जाएगा जिसके खर्च का संपूर्ण वहन महाविद्यालय करेगा प्राचार्य जी ने संस्कृत भाषा के संवर्धन हेतु छात्राओं को शुद्ध संस्कृत लेखन शुद्ध गायन व शुद्ध वाचन करने के लिए प्रोत्साहित किया कुलानुशासक प्रोफेसर कप्तान ममता अग्रवाल व हिंदी विभाग अध्यक्ष शुभा वाजपेई ने निर्णायक की भूमिका निभाई
कानपुर 8 अगस्त भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा आज दिनांक 8 अगस्त , 2024 को खाद्य सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत व्याख्यान एवं ग्रुप डिस्कशन का आयोजन किया गया। जिसमें एनएसएस वॉलिंटियर्स ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि खाद्य सुरक्षा किसी व्यक्ति की पौष्टिक और पर्याप्त मात्रा में भोजन तक पहुँचने की क्षमता का माप है। खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत भोजन को व्यक्ति की खाद्य प्राथमिकताओं और सक्रिय व स्वस्थ जीवन शैली के लिए आहार संबंधी ज़रूरतों को भी पूरा करना चाहिए, यही खाद्य सुरक्षा है। छात्राओं ने खाद्य सुरक्षा से संबंधित अपने अनुभव को एक दूसरे से साझा भी किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में भूगोल विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंजना श्रीवास्तव एवं श्वेता गोंड का विशेष सहयोग रहा साथ ही एनएसएस वॉलिंटियर्स की सक्रिय सहभागिता अत्यंत सराहनीय रही।
कानपुर 29 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में एनएसएस वालंटियर्स एवं अन्य छात्र छात्राओं को बजट 2024 में युवाओं के कौशल विकास , रोजगार एवं महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष रूप से किए गए प्रावधानों पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वॉलिंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता की तथा अपने-अपने विचार रखें। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया , एवम् स्किल इंडिया आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए छात्राओं को बताया गया कि किस प्रकार से युवा खासकर महिलाएं एवं युवतियां किस प्रकार से , कहां से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं तथा अपना रोजगार (स्टार्टअप) प्रारंभ कर स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं तथा अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर देश के आर्थिक विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
कानपुर 26 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आज दिनांक 26 जुलाई 2024 को एन एस एस वॉलिंटियर्स के द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा जागरूकता अभियान चलाकर नशा मुक्त भारत बनाने का संदेश आम जन जन तक पहुंचाया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने स्लोगन राइटिंग, डिबेट पोस्टर मेकिंग आदि प्रतियोगिताएं की। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। वॉलिंटियर्स के द्वारा लोगों को नशे से होने वाली हानि जैसे रोड एक्सीडेंट्स तथा गंभीर रोगों कैंसर , टीवी, फेफड़ों के अन्य रोग, त्वचा संबंधी रोग तथा विभिन्न प्रकार की एलर्जी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी गई ।