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चुनावी राजनीति

जैसे-जैसे चुनाव करीब आते जा रहे हैं राजनीतिक दलों की हलचल भी बढ़ती जा रही है। छींटाकशी, आरोप प्रत्यारोप के दौर के साथ-साथ राजनीतिक दल अपना दमखम दिखाने की पुरजोर कोशिश में लगी हुई है। यह बात दीगर है की अपना दमखम दिखाने और दूसरे दल को नीचा दिखाने के लिए भाषाई मर्यादा का महत्व खत्म हो गया है और “येन केन प्रकारेण” की  सुविधा अपना ली गई है।

आज के राजनीतिक दौर की बड़ी बात यह है कि राजनीति के इस दौर में धर्म को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मुद्दा कोई भी हो उसे किनारे करके धर्म की राजनीति पहले की जा रही है साथ ही पाखंड को बढ़ावा दिया जा रहा है। “भारत माता की जय”, “जय हिंद” से ज्यादा महत्वपूर्ण “जय श्री राम” हो गया है। उन सब में सबसे खास बात यह है कि बाबाओं को भी चुनावी मैदान रास आने लगा है। मोह माया से दूर रहने वाले भौतिक साधनों का त्याग करने वाले बाबाओं को सत्ता की चमक लुभाने लगी है।
धार्मिक राजनीति होने के कारण आज की राजनीति महत्वपूर्ण मुद्दों से भटक कर हिंदू –  मुसलमान, धर्म, राम के नाम पर ही टिकी हुई है, यदि इन्हें हटा दिया जाए तो शायद मुद्दों की बात की जाये? वोट मुद्दों के बजाय (क्योंकि मुद्दों का अस्तित्व ही नहीं है) धर्म के नाम पर मांगे जा रहे हैं? जिस महिला शक्ति का दावा किया जाता हैं उन्हें शर्मसार करने में जरा भी संकोच नहीं करते। मणिपुर की घटना ताजातरीन है। जनता मंहगाई से, युवा वर्ग बेरोजगारी से परेशान है जिसका कोई समाधान नहीं निकाला गया है। भाषण और बयानबाजी में कहीं भी रोजगार, मंहगाई का जिक्र नहीं होता।
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले भारत के मतदाताओं सबसे बड़ी चिंता बढ़ती कीमतें और बेरोजगारी है जैसा कि सेंटर फॉर स्टडी आफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) द्वारा किये गए चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में सामने आया हैं। विशेष रूप से गांवों, कस्बों और शहरों सहित विभिन्न जनसांख्यिकी क्षेत्रों के 62% उत्तरदाताओं ने संकेत दिया कि रोजगार हासिल करना तेजी से चुनौतीपूर्ण हो गया है। सीएसडीएस की रिपोर्ट से पता चला है कि 65% पुरुषों ने इस भावना को साझा किया, जबकि महिलाओं में यह संख्या 59% कम थी। केवल 12% उत्तरदाताओं ने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
इसी तरह मुद्रास्फीति के मुद्दे पर, 26% केंद्र को 12%  ने राज्यों को और 56% ने दोनों को दोषी ठहराया यह सीएसडीएस सर्वेक्षण से पता चला है। अधिकांश मतदाताओंने अपने वित्त पर गंभीर प्रभाव व्यक्त किया, जिसमें 71% ने वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को नोट किया। सर्वेक्षण में दावा किया गया कि बढ़ती लागतों ने मुख्य रूप से आर्थिक रूप से 76% लोगों को प्रभावित किया है।
एक मजबूत विपक्ष के बिना लोकतंत्र अधूरा है और चुनावी प्रक्रिया भी अधूरी रहती है। विपक्ष को मजबूती के साथ युवा वर्ग की परेशानियों को सामने रखना चाहिए और समस्याओं के निवारण का आश्वासन देना चाहिए। भारत जोड़ो यात्रा से विपक्ष जनमानस से जुड़ तो रहा है लेकिन फिर भी सत्ता की पहुंच से दूर नजर आता है। जिस तरह से विपक्ष के गठबंधन का सफाया किया जा रहा है उससे जरूरी हो जाता है कि विपक्ष एकजुट हो। विपक्ष का संगठन और गठबंधन डांवाडोल है और क्या यह गठबंधन सफल होगा इस पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। विपक्ष का मणिपुर प्रयास सार्थक रहा। विपक्ष का अपनी पार्टी की एकता को बनाए रखना जरूरी है “इंडिया” के अस्तित्व के लिए।
जिस तरह से ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स की कार्यप्रणाली नजर आ रही है उससे विपक्ष को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दलगत राजनीति, भ्रष्टाचार, इलेक्टोरल बांड जैसे मुद्दे सत्तारूढ़ सरकार के लिए गले की हड्डी साबित हो सकती है। “सबका साथ सबका विकास” का नारा अब खोखला महसूस होता है. देश में शिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई ने देश को पीछे धकेल कर सिर्फ “राम नाम” पर समेट दिया है। विकास की परिपाटी यही है कि लोगों को शिक्षा और रोजगार का अवसर ज्यादा से ज्यादा दिये जायें।

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आप ही शक्ति स्वरूपा है जननी है स्वामिनी है

दिल से बधाई देना चाहूँगी अपनी सब देवी स्वरूप बहनों को ..जो आज अपने पैरों पर खड़ी है और सिर उठा कर चल रही है ।शक्ति बन कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रही है। मैं हमेशा यही कहती हूँ अपनी सभी बहनों से .. कि रानियों की तरह जीयें.. शासन करे समाज पर .. अपने आर परिवार पर .. सभी के दिलों पर शासन करने की अधिकारिणी हैं आप । आप को ज़रूरत नहीं कि आप सोसायटी के साथ साथ बदलती जाये.. किसी के बताने की ज़रूरत नहीं कि आप क्या करे या न करें  आप जैसी है वैसी ही रहें क्योंकि आप ही शक्ति स्वरूपा है जननी है स्वामिनी है आप ही तो है जो टूटे बटनो से लेकर ..टूटे हुए आत्मविश्वास को जोड़ने की क्षमता रखतीं हैं।
आप ही है ,जो सब के सकून का सबब ..और विनाश का कारण हो सकती है.. मगर अपने घर की और जिस देश मे आप का जनम हुआ है । वहाँ की ज़िम्मेवारी को उठाना हम सब का धर्म तो बनता ही है।
हर औरत पहले बेटी बन कर पिता के साथ दुख सुख में निभाती है तो कभी बहन बन कर भाई और पत्नी बन कर पति को मार्गदर्शन करवाती है और फिर माँ बन कर बच्चों में संस्कार डालने की ज़िम्मेदारी हम औरतों पर ही है। जो हम आज खुद को बहुत आत्मनिर्भर समझ रहे है और सोच लेते है कि हम ने ज़िन्दगी में जो भी हासिल किया है वो खुद किया है जबकि मैं समझती हूँ !!
हम जो भी बन पायें है ,उसमें कहीं न कहीं इक आदमी का भी हाथ होगा और होता भी है .. किसी के पापा ने ,पति ने ,भाई ने आगे बढ़ने की सीख दी होगी ,या फिर हो सकता है किसी दोस्त ने हमे आगे बढ़ने में हमारी मदद की होगी और इस बात को हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।सोसायटी में नाम कमाना अपने आप मे ही बहुत बडी उपलब्धि है ।ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना गौरव और शक्ति का प्रतीक है। आज हमारे भीतर की आवाज़ ..जो बरसों से सोई हुई थी .. वो जाग चुकी है ।
हर पीढ़ी अपने से बडी पीढ़ी से ही सीखती है इसलिए एक बात जो बहुत ज़रूरी है,जो हमे अपनी नई पीढ़ी को विरासत मे देनी है .. और वो है …संस्कार,कोमलता , दया भाव,श्रद्धा ..गरिमा ..और मर्यादा … हम कह तो रहे है कि हमें स्ट्रोंग बनना चाहिए मगर परिणाम क्या हुआ ,हमारी कोमलता लुप्त हो गई कहीं । मैं ये नहीं कह रही कि हम आने वाली पीढ़ी को सिर पर पल्लू रखना सिखाये ,बस यही कह रही हूँ ,अपने संस्कारों को साथ ले कर चले।आँधी नग्नता … लोगों को लुभा तो सकती है मगर इज़्ज़त नहीं दे सकती।
बात बहुतो को बुरी लग सकती है मगर सच यही है कि आज माडर्न ज़माना कह कर …आज की औरत
वाइन ,शराब यहाँ तक की ड्रैगस ले रही है।ये हमारे देश की सभ्यता तो न थी कभी।हमारे समाज में यह ख़ास वजह है जो नस्ल दर नस्ल को ख़राब कर रही है, शायद अभी हम इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे .. मगर आने वाले समय में हम सब को इस बात का अफ़सोस ज़रूर रहेगा । जब हमारे बच्चों के घर टूटने लगेंगे और टूटने बिखरने की इक ख़ास वजह ,नशा करना ही होगी।! और आज तलाक होने की वजह संयम और सहनशीलता या मर्यादा में कमी ही है।
ये कैसी सोच हो गई है हमारी .. जहां हमारा घर टूटता है तो टूट जाये मगर हम मे से कोई भी..कुछ भी सहने को तैयार नही ।
.बचाईये !! अपने घरों को अपने बच्चों की ख़ातिर। हम सब मिल कर ही तो बदलाव ला सकते है।कोई हमें ख़ुशी बाहर से ला कर नहीं देगा।हमें खुद में से ही अर्जित करनी होगी। सब कुछ तेज़ी से बदल रहा है .. हमारा देश अपने संस्कारों के लिए ही सारे संसार में ख़ास जाना जाता था। यहाँ का लिबास विश्व भर में चर्चे का विषय हुआ करता था। धीरे धीरे हमारे देश में अपने देश की वेशभूषा की जगह विदेशी पहनावे ने ले ली है। दोस्तों! मेरे हिसाब से जिसे हम सैकसी लुक कहते है वो साड़ी में ज़्यादा दिखती है।
बस यही पैग़ाम है मेरा …स्वीकार कीजिए खुद को जैसे रब ने आप को बनाया है । आज के दौर में सब अच्छा दिखने में लाखों खर्च कर रहे है महँगे कपड़े पार्लर वग़ैरह …और ऊपर से कासमैटिक सर्जरी । फिर भी हम सकून में नही। ऐसा जीवन हमें किस ओर ले कर जा रहा है । हर कोई शान्ति को बाहर तालाश कर रहा है। अपने दुख की वजह दूसरे को बता रहा है …
भीड़ का हिस्सा बन कर हम सब ही तो भीड़ मे भागते जा रहे है । कभी एकान्त में बैठ कर सोचियेगा इस बारे में।
हम सभी को अपने संस्कारों पर से धूल हटाने की ज़रूरत है।तभी हमे शान्ति मिल सकती है … क्योंकि जो वक़्त चल रहा है ,
वहाँ लोग दिशा से भ्रमित हो रहे है। अकेले हो रहे है ,अगर कोई साथ है भी ..तो भरोसा नही है कि ये साथ कब तक चलेगा।
अपने को पहचानें। खुद को सक्षम बनाये ताकिआप की ख़ुशी दूसरों पर निर्भर न हो। किसी को जवाब देना बहुत आसान होता है ।कोई एक कहता है तो आज हम दस सुना सकते है ,मगर बात को सह लेना …. पोलाइट होना जरा मुश्किल है ।वही सीखने और सीखाने की ज़रूरत भी है । हम सब पर ही समाज की ज़िम्मेवारी है और हम ज़िम्मेदारियों को निभा कर भी ज़िन्दगी को इंजाय कर सकते है। इसमें कोई शक नही है। आज हम आसमान की बुलंदियों को तो छू रहे है मगर हम छोटी छोटी बातों को नज़रअंदाज़ भी कर रहे है। नई पीढ़ी के लिए अपना घर ,पैसा ,सोना ,चाँदी ,हीरे जवाहरात अपना बैंक बैलेंस ही न छोड़ कर जाये..अपितु … कुछ ऐसा छोड़ कर जायें ..जो आने वाली “ पीढ़ियों दर पीढ़ियों “के लिए सुख का कारण बने।

लेखिका स्मिता ✍️

✍️

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घरेलू स्त्रियों का बायोडाटा नहीं होता.

घरेलू स्त्रियों का बायोडाटा नहीं होता….
उनकी तालीम और डिग्रियां कहीं धूल में सनी,
गर्द में दब जाती है….

वह खुद भूल जाती है कि उन्होंने तालीम हासिल की है
उन्हें याद रहता है बस पत्नी, बहू और मां की हासिल की हुई डिग्रियां

हर एक में अव्वल आना उनकी जिम्मेदारी है..
उनका कागजों का कोई औचित्य नहीं
जो ‘कागज’ कमा ना सके….

बहू के संस्कार से लेकर मां के संस्कार तक की तालीम में पीएचडी तो हो ही जाती है
यह जुदा है की ‘कमियां’ तो फिर भी रही जाती है…

अनपढ़, गंवार और तुम्हें कुछ मालूम नहीं है की डिग्रियां घर से ही मिल जाती है
इसीलिए उनका ‘बायोडाटा’ नहीं बस घरेलू स्त्री ही कहलाती है…

प्रियंका वर्मा माहेश्वरी 

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रंग दे गुलाल मोहे…

होली करीब आते जा रही थी और मेरे मन में उमंगे बढ़ती जा रही थी। इस बार पक्का सोच लिया था कि प्रतीक को ढेर सारा गुलाल लगाऊंगी और खुद लगवाऊंगी भी। मैं खास होली के लिए सफेद रंग की ड्रेस भी खरीद कर ले आई थी।

नई-नई शादी और शादी के बाद मेरी पहली होली कुछ ज्यादा ही रोमांच था मेरे भीतर। मैं तरह-तरह के पकवान बनाने में व्यस्त हो गई। होली में गुझिया बहुत पसंद थी मुझे और हमारे यहां तो भांग की गुजिया भी बनाई जाती है। भाभियां अपने देवरों को भांग की गुझिया खिला देती और भांग भी बहुत पी जाती थी हमारे यहाँ। लेकिन मैंने इस सब का इंतजाम नहीं किया था क्योंकि मैं रंग में भंग नहीं डालना चाहती थी। मुझे बस प्रतीक के साथ होली खेलनी थी और उसके साथ समय बिताना था ताकि मेरी पहली होली की यादें हमेशा रंगीन रहे।
नीरजा! नीरजा ! कहां हो तुम? प्रतीक की आवाज आई।
मैं:- “आ रही हूं, बोलो क्या काम है? क्यों घर को सर पर उठा रखा है?”
प्रतीक:-  “चलो बाजार चलते हैं। रंग गुलाल और पूजा का सामान वगैरा ले आते हैं, फिर बाद में मेरे पास वक्त नहीं होगा।”
मैं:-  “अच्छा ठीक है! कुछ देर रुको मैं जरा हाथ का काम निपटा लूं फिर आती हूं।” दस मिनट बाद हम लोग बाजार सामान लेने के लिए निकल गए। रंगों को देखकर मेरा मन मचलने लगा। मन हुआ कि अभी प्रतीक को गुलाल मल दूं लेकिन मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा। जरूरत की चीजें खरीद कर हम घर आ गए।
प्रतीक अगली सुबह ही दोस्तों के साथ बाहर चले गए। मैंने फोन किया तो उठाया नहीं और दोपहर में घर आए तो कुछ नशे की हालत में दिखे। मैंने कहा, “आज से ही पीना शुरू कर दिया? होली तो कल है?”
प्रतीक:- “अरे ! दोस्तों के साथ था तो थोड़ी ले ली। अब मुझे खाना दो बहुत भूख लगी है।
मैं:-  “तुम्हारे कपड़े खराब है तो पहले नहा लो और मैं नींबू पानी लाती हूं तुम्हारे लिए।”
प्रतीक:- “नहीं ! मुझे वापस जाना है सब मेरा इंतजार कर रहे हैं बाद में आकर नहाऊंगा मैं।”
मैं:- “प्रतीक तुम्हारी हालत ठीक नहीं है और अब तुम्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आराम करो। कल होली खेलेंगे।”
प्रतीक :- “तुम चुप रहो! फालतू बातें मत किया करो, मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं यह तुम मत बताओ। जो कहा है वह करो।”
मुझे प्रतीक का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं चुप रही। मेरे बहुत मना करने के बाद भी प्रतीक अपने दोस्तों के पास चले गए। रात को भी बहुत देर से घर आये और बहुत नशे में थे। आते ही सो गये। मैं जो इतने सपना संजो कर बैठी थी वह टूटते दिखाई दे रहे थे। सुबह होली की पूजा थी और प्रतीक सो रहे थे। मैंने प्रतीक को आवाज दी।
मैं:- “प्रतीक उठो आठ बज गए हैं।”
प्रतीक हड़बड़ा कर उठ गया ।
प्रतीक:- “अरे आठ बज गए तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं?”
मैं:- “मैंने उठाया था लेकिन तुम उठे नहीं। अब उठ जाओ मैं चाय लेकर आती हूं।”
प्रतीक हाथ मुंह धोने चला गया और चाय पीकर फ्रेश होकर कब चला गया मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। मैंने फोन लगाया और पूछा, “अरे! कहां चले गए आप? नाश्ता भी नहीं किया?”
प्रतीक:- “हां! मैं मेरे दोस्तों के साथ हूं। एक दोस्त के फार्म हाउस पर जा रहे हैं हम सब लोग।”
मैं:- “आज के दिन मुझे आपके साथ होली खेलनी थी। मम्मी पापा के यहां जाना था।”
प्रतीक:- “देखो आज तो समय नहीं है कल जाएंगे वहां और मैं आता हूं तब खेल लेना होली। यही एक दो दिन का तो मौका मिलता है जो मैं दोस्तों के साथ बिता सकता हूं और तुम पास में भाभी और दीदी है ना खेल लेना उनके साथ। अच्छा खाने पर मेरा इंतजार मत करना।”
मैं दुखी हो गई और मुझे सारे रंग फीके लगने लगे। मैं काम में लग गई और फिर बाद में तबीयत ठीक नहीं है का बहाना करके कमरे में आ गई। बाहर होली है… होली है की आवाजें… बच्चों की चिल्लाने की आवाजें आ रही थी और मैं अंदर ही अंदर कुढ़ रही थी। थकावट के कारण मेरी आंख लग गई थी कि प्रतीक के आने की आहट हुई। प्रतीक पूरे रंग में रंगे हुए थे।
प्रतीक:- “अरे! लेटी क्यों हो तुम? गई नहीं कहीं?”
मैं:- “नहीं मन नहीं हुआ।”
प्रतीक:- “अच्छा कुछ ले आओ खाने के लिए बहुत भूख लग रही है।”
मैं:- “क्यों वहां कुछ खाया नहीं?”
प्रतीक:- “खाया पर पता नहीं क्यों भूख लग रही है फिर से।”
मैं:- “अच्छा आती हूं लेकर।” मैं गुझिया पापड़ लेकर कमरे में आ गई कि प्रतीक ने गुलाल की थैली मेरे ऊपर पलट दी और आगे बढ़कर अपना गाल मेरे गाल से लगाकर गुलाल लगा दिया और पास आकर कहा “होली है”। मैं खुशी और शर्म से लाल हो गई। मैं प्रतीक को देखे जा रही थी।
प्रतीक:-  “सुबह से तो कह रही थी कि आपके साथ होली खेलनी है, अब सब छोड़ कर आया हूं तो ऐसे क्यों खड़ी हो?”
खाने की प्लेट जो रंग से रंग गई थी मैंने बाजू में रख दी और हाथों में रंग लेकर प्रतीक को रंग दिया। मेरी होली रंगीन होने लगी थी और मन गा रहा था…. मल दे गुलाल मोहे…. कि आई होली आई रे…….। ~प्रियंका वर्मा माहेश्वरी 

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तालाश उसकी.. जो रूह को छुए

न ही मोहताज हूँ मैं…
और .. न ही आरज़ू है कोई..
कि वो मुझे गुलाब देता …
बेहतरीन सौग़ातों से नवाज़ा हुआ है उसने मुझे …
शिद्दत दी ..
लम्हे दिये..
यादे दी ..
इन्तज़ार दिया ..
उसपर वो ..
उसका
बेशक़ीमती इश्क़ जो
आज भी
मेरी रूह को
महका रहा है
🌹♥️🌹♥️
ये फूल है .. या फिर तेरा ख़याल .. जिसे छूते ही ..महक जाती हूँ मैं .,

दोस्तों !
वैलेण्टाइन बहुत ख़ास दिन होता है उन लोगों के लिए जो प्यार का इज़हार करना चाहते हैं मेरे हिसाब से प्यार बताने की ..या जताने की चीज है ही नहीं .. इसे दिल और रूह अपने आप ही महसूस कर लेती है …
वैलेण्टाइन पर कुछ शेयर करना चाहती हूँ आप सब से .. 🙏

आज सब कन्फ़्यूज है सोचते हैं उन्हें मोहब्बत हो गई है..मगर कई बार वो महज़ एक आकर्षण या फिर ज़रूरत से बढ़ कर कुछ भी नहीं ..मोहब्बत तो इक पाक जज़्बा है जो सिर्फ़ इक बार ही होती है बार बार नही .. मगर लोगों का कहना है कि ये कभी भी हो सकता है।
..असल में ..ये एक अनियंत्रित मन की अवस्था है जिसे अपने मन पर ..इन्द्रियों पर कंट्रोल नही ।
हम सब…दोस्तों से
रिश्तेदारों से ..
बच्चों से और माँ बाप से करते है।
मगर हर प्यार मे फ़र्क़ होता है ..
शिद्दत का ..
तासीर का ..
केवल एक प्यार ,एक सम्बन्ध जो हमे सकून देता है जिसका सम्बंध हमारे जिस्म और रूह के साथ होता है वो एक ही हो सकता है ।
हमारे ऋषि मुनि कहा करते थे घर में रह कर ही ..
सब भोगों को ..भोग सकते है
भोगों को भोगते भोगते मन विरक्त होने लगता है .. और हम विरह की ओर चल पढ़ते हैं ।
विरह बहुत क्षरेठ अवस्था है जो इन्सान को भगवान की ओर ले जाने में सहायक होती है ..

जब इन्सान जीवन भोग चुकता है कुछ समय पश्चात कहने लगता है अब वो चीज़ नहीं रही ..चाहे वो रिश्ता हो या दुनियादारी हो ।
तब इन्सान उदासीनता को महसूस करने लगता है तो ऐसे मे ध्यान भटकता है यानि इधर उधर जाता है

जब कि वो ही अवस्था होती है जब हम अपने असली उद्देश्य की तरफ़ चल सके जिस कारण हम देह में आये हैं इक उम्र के बाद सहज होना .. रूक जाना और गहरा सोचना ज़रूरी है जो हम सब नहीं कर रहे ।
आज के दौर में लोग शादी को ले कर भी बड़े कन्फ़्यूज.है हर कोई यही चाहता कि उसकी शादी बड़े घर में हो … पैसे वाले के साथ हो .. जब कि हम सब जानते हैं कि पैसा हमें वो सुख नहीं दे सकता जिसे हम सकून कहते है।

दोस्तों !
लोगों की सूरतों पर न जा कर बल्कि दिल और संस्कारों को परखना लेना।
जीवन साथी पोटेन्षियिलटी …क्षमताओं .. और
क़ाबलियत के हिसाब से ही ढूँढना।याद ये भी रखना ..हर इन्सान पहले थोड़े से ही शुरू करता है फिर आगे बढ़ता है।जिन को पहले से ही सब बना बनाया मिल जाता है उनकी अपनी.. क्या क़ाबलियत हो सकती है। इन्सान वही है जो खुद खड़ा हो कर.. अपना रास्ता बनाता है गिर गिर कर संभलने वाला इन्सान ही असल मे सफल कहलाने के काबिल है ।

किसी ऐसे की तालाश…जो सिर्फ़ आप ही का हो .. जिसमें मर्यादा हो।
किसी ऐसे की तालाश.. जो तुम्हारी रूह को महका दे।

पैसा तो वक़्त के साथ बन भी जाता है और कई बार आप को दुख दे चला भी जाता है..देखा जा रहा है ..कई बार बच्चों की ..जहां शादियाँ हो रही होती है ..वहाँ सिर्फ़ पैसा ही पैसा होता है मगर सच्चाई ,लौयलटी ..,प्यार बिलकुल नहीं होते।लोग एक दूसरे से बहुत जल्दी ऊब रहे है ।
हर चीज़ की तरह ..उन्हें रिश्तो मे भी वैरायइटी चाहिए होती है।
यही वजह है कि लोग अपने रिश्तो मे ज़्यादा देर तक ख़ुश नहीं रह पा रहे ..और फिर शुरू हो जाती है किसी और की तालाश …जो लोगों के घुटन और डिप्रेशन की ख़ास वजह बन रही हैं समाज में।
दोस्तों ।
आज के दौर में प्यार जिस्मों तक ही सीमित है, जो बेहद अफ़सोस की बात है …इन्सान उस जिस्म की चाह में रहता है जो ख़त्म हो जायेगा ..किसी को अगर अपना बनाने की चाह हो, तो कोशिश करो कि उसकी रूह को छू पाओ या कोई …तुम्हारी रूह को छू पाये …जो वाक़ई में तुम्हारे सकून का सबब होगा ..सच्चे प्यार की तलाश अगर है तो पहले खुद सच्चा बनना पढ़ता .. अगर सीता जैसा पार्टनर चाहिए तो खुद को राम बनाना होगा ..केवल यही एक रास्ता है
जो आप को सकून की ओर ले जायेगा 🙏🌹

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फेम इंडिया योजना के चरण-II के तहत 13,41,459 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को 5,790 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई

हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों का तीव्र अंगीकरण और विनिर्माण (फेम) योजना के चरण-II के तहत बजटीय आवंटन और धनराशि के परिव्यय का विवरण निम्नलिखित है:

क्रम संख्या वित्तीय वर्ष बजट आवंटन धनराशि का उपयोग (31.01.2024 की स्थिति के अनुसार)
1 2019-20 500 करोड़ रुपये 500 करोड़ रुपये
2 2020-21 318.36 करोड़ रुपये 318.36 करोड़ रुपये
3 2021-22 800 करोड़ रुपये 800 करोड़ रुपये
4 2022-23 2897.84 करोड़ रुपये 2402.51 करोड़ रुपये
5 2023-24 5171.97 करोड़ रुपये 1980.83 करोड़ रुपये

 

भारी उद्योग मंत्रालय ने 25 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 68 शहरों में 2,877 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की मंजूरी दी है। इन चार्जिंग स्टेशनों में से 148 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण किया जा चुका है और इनका परिचालन किया जा रहा है।

इसके अलावा भारी उद्योग मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तीन तेल विपणन कंपनियों को 7,432 इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए पूंजीगत सब्सिडी के रूप में 800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

31 जनवरी, 2024 की स्थिति के अनुसार फेम इंडिया योजना के चरण-II के तहत इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माताओं को 13,41,459 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर 5790 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। (31 जनवरी, 2024 की स्थिति के अनुसार फेम-II पोर्टल पर दावाकृत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नीचे दिए गए ब्यौरे के अनुसार)

क्रम संख्या वाहन का प्रकार कुल वाहन संख्या
1 दोपहिया 11,85,829
2 तिपहिया 1,38,639
3 चौपहिया 16,991
  कुल 13,41,459

इसेक अलावा भारी उद्योग मंत्रालय ने शहर के भीतर परिचालन के उद्देश्य से विभिन्न शहरों/एसटीयू/राज्य सरकार की इकाइयों के लिए 6862 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी है। 29 नवंबर, 2023 की स्थिति के अनुसार इन 6,862 ई-बसों में से 3487 बसों की आपूर्ति एसटीयू को की जा चुकी है।

यह जानकारी भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने आज राज्य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

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एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में श्रीराम जी का सांकेतिक पदार्पण

भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में श्रीराम जी का सांकेतिक पदार्पण किया गया जिसमें राम सीता और लक्ष्मण के रूप में महाविद्यालय की शारीरिक शिक्षा विभाग की छात्राओं ने अद्वितीय छवि दिखाते हुए श्री राम सीता मैया और श्री लक्ष्मण जी के रूप में महाविद्यालय सभागार में प्रवेश किया। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय कानपुर खो खो संघ सचिव एवं रोटरी क्लब के क्रीड़ा विभाग के अध्यक्ष अजय शंकर दीक्षित द्वारा किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया साथी उन्हें एक रामायण उपहार के रूप में भेद करते हुए उनका स्वागत और अभिनंदन किया। सभी आगंतुकों ने राम सीता लक्ष्मण जी की आरती उतारी तदुपरांत उनके ऊपर फूलों की वर्षा की गई और सभी ने ईश्वर के रूप को अपने हृदय में उतारा। अजय ने छात्राओं को श्री राम के द्वारा किए गए त्याग और समर्पण के साथ-साथ उनके पुरुषोत्तम होने की विशेषताओं और व्यक्तित्व गुडों को अपनाने के लिए छात्रों को प्रेरित किया। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया पूरे कार्यक्रम को संचालित और आयोजन शारीरिक शिक्षा विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर प्रीति पांडे के द्वारा किया गया महाविद्यालय में सभी शिक्षिका, छात्राएं एवं शिक्षक कर्मचारियों ने कार्यक्रमों में कार्यक्रम में सहभागिता की ।

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हर शय “इश्क़ नहीं “…

वक़्त से पूछा मैने .. अब इसका हल क्या है ? …
वक़्त ने कहा … मुझे गुज़र जाने दे ..
मैंने पूछा !! इस दर्द का इलाज क्या है ?
वक़्त ने हसं कर कहा .. .. “थोड़ा सब्र रख “
संभलने में वक़्त तो लगेगा.. इस जहान में हर शय
“इश्क़ नहीं “ जो पल भर में हो जाये….
🌹❤️🌹
दोस्तों ! समुद्र में तूफ़ान आने से कई बार बड़े बड़े

जहाज़ डूब ज़ाया करते हैं
मगर इक लकड़ी का टुकड़ा जो हमे समुद्र से बाहर निकालने की

क्षमता रखता है। किसी ने ठीक ही कहा है कि “सह ले !
हँस कर ,हर सितम ज़िन्दगी का ..
न कर शिकायत … न शिकवा किसी से …बस मान कर चल …तेरे
सब्र में ही तेरा सकून छिपा है।
🌹🌹🌹
जो इन्सान अपनी ज़ुबान से किसी को ग़लत नहीं कहता, गाली गलौज नहीं करता ।अच्छा सोचता है ,हर लम्हा मालिक की याद में रहकर मालिक का नाम जिस की ज़ुबान पर रहे ।ऐसे इन्सान की ज़ुबान में ताक़त आ जाती है उसी ताक़त को वाणी की सिद्धि कहते है और ऐसा इन्सान किसी को कुछ कह दे तो वो सच होने लगता है,
और अगर हाथ सब को देने के लिए ही उठे, सब की मदद करे तो हाथों में बरकत आ जाती है।ऐसे लोग जब दूसरों को आशीर्वाद देते हैं तो वो फलीभूत होने लगता है।
इसी तरह जब आँखे दूसरों मे सिर्फ़ अच्छाई ही देखती है ,कुछ बुरा दिखाई ही नही देता , जिनकी आँखों में सदा करूणा रहती है उनकी नज़र में ताक़त आ जाती है इसी को ही सिद्धी पाना कहते हैं हम ने अक्सर ये सुना होगा कि फ़लाह इन्सान की नज़र हम पर क्या पड़ी ,मेरी तकलीफ़ दूर हो गई।
कभी-कभी हम ये भी कह देते है ,किसी ने हमे जो कहा था ,देखो आज मेरे साथ हो रहा है।
ये सब ताक़ते है ज़रूरी नहीं कि मंत्रों से ही हम सिद्धि पा सकते हैं ।अपने मन करम विचारों से भी हम सिद्धियो के स्वामी बन सकते है। भगवान के यहाँ बस यहीं नियम है कि इन्सान को इन्सान बन कर रहना चाहिए।
मगर काम क्रोध लोभ मोह हम इन्सानों को, इन्सानियत से हैवानियत की तरफ़ मोड़ देता है।
दोस्तों !
इक औरत
बहुत कमाई वाली थी।उसे मै साध्वी कह सकती हूँ
उसके यहाँ उसकी सेवा मे इक औरत रहा करती थी जिसका नाम लौरा था
लौरा आये दिनों बिमार रहने लगी .. वो साध्वी से कहती ,आप मुझे किसी तरह ठीक कर दो .. साध्वी बस मुस्कुरा देती .. और कहती !
लौरा “सह लो अभी “..
मगर लौरा की बिमारी में कोई सुधार नहीं आ रहा था।
इक दिन फिर लौरा ने साध्वी से कहा !
मैंने कितने साल आप की सेवा की है ।आप मुझे ठीक क्यों नहीं करती ।साध्वी ने फिर बड़े प्यार से लौरा के सिर पर हाथ फेर कर कहा!
तभी कह रही हूँ तुम से कि अभी तुम इस बिमारी को सह लो।
लौरा सोचने लगी मैंने ऐसे ही अपना वक़्त बर्बाद कर दिया, इस साध्वी के पीछे लग कर ..
दिन पर दिन लौरा की बिमारी तेज़ी से बढ़ने लगी।
लौरा फिर साध्वी के पास आ कर रो कर कहने लगी अब ये दर्द मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा ,मेरी मदद किजीए ।
मुझे ठीक कर दो .. मै बहुत तकलीफ़ में हूँ ।
इस बार साध्वी ने आँखें बंद करके लौरा के लिए प्रार्थना की और इक पुड़िया लौरा के हाथ में रख दी और कहा !
ये लो विभूति ,इसका सेवन रोज़ करना।मेरे गुरू की किरपा से तुम जल्दी ठीक हो जाओगी.. लौरा को दस बाहर दिनों मे ही असर होने लगा और वो धीरे धीरे ठीक होने लगी ।
कुछ साल लौरा के अच्छे गुज़र गये मगर कुछ सालों बाद लौरा की बीमारी फिर ज़ोरों से आई और लौरा इस संसार को छोड़ कर चली गई।
वक़्त गुजरने लगा।
अब जब भी साध्वी अपने ध्यान में बैठती तो उसे लौरा दिखने लगी ..जो साध्वी के सामने रोया करती ।साध्वी ने कहा !
अब कंयू रोती हो लौरा ?
लौरा कहती !
यहाँ इक दरवाज़ा है सब जीवात्माये अन्दर जा रही है ।जब भी वो दरवाज़ा खुलता है, बहुत अच्छी सुगंध बाहर तक आती है।मै भी वहाँ जाना चाहती हूँ मगर मुझे अन्दर नहीं जाने देते।
बाहर ही रोक लेते हैं ।
जब वजह पूछती हूँ तो कहते हैं कि तुम्हारे करमो की वजह से वो बिमारी आई थी और उन्हीं करमो का तुम्हें भुगतान करना था मगर तुमने उस बिमारी को सहा नहीं , रब की रजा को न मान कर अपनी दख़लंदाज़ी की और रब की रजा में ख़लल डाला। इसी लिए तुम अन्दर नहीं जा सकती ।
लौरा कहने लगी जब आप को सब पता था फिर मुझे उस वक़्त आपने कंयू ठीक किया था।
अब मै जहां हूँ ,वहाँ कुछ भी अच्छा नही है
इक अजीब सी गंध है वहाँ जो असहनीय है।
साध्वी ने लौरा से कहा !
तभी मै कहा करती थी ,अभी यहाँ सह लो ..ताकि तुम्हारा आगे का रास्ता सुखमय हो जाये मगर तुम ही ज़िद्द किया करती थीं अगर उस वक़्त मेरा कहा मान लेती तो तुम भी आज उस ..दरवाज़े से अन्दर जा सकती।
.. दोस्तों
जैसे किसी परिन्दे के पंखों पर बहुत बड़े बड़े पत्थर रख दिये जाये तो वो परिन्दा आसानी से उड़ नहीं सकता है और जब हम करमो को हँस कर सह लेते है
तो करम रूपी पत्थर पँखो से हटने लगते है और रूह हल्की महसूस करने लगती हैं और जब इस संसार को छोडने का वक़्त आता है आसानी से उड़ जाती है .. करमो का यहीं बोझ हमें यहाँ भी तंग करता है और वहाँ भी …..।

जो मिल रहा है उसी में ही शुक्र
करें ।
“दुख सुख उसका ही भेजा हुआ है प्रशाद है “ऐसा मान कर उसे ह्रदय से ग्रहण करें तो ही हम सकून से रह सकते हैं यहाँ भी और फिर आगे के संसार मे भी

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उड़ान योजना के अंतर्गत 9 हेलीपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रम सहित 76 हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 517 हवाई मार्ग शुरू किए गए

क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस)-उड़ान के माध्यम से देश के दूरदराज इलाकों में अब तक अप्रयुक्त/अपेक्षाकृत कम प्रयुक्त हवाई अड्डों को जोड़कर क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ाया गया है। उड़ान योजना के अंतर्गत पांच दौर की बोली के आधार पर, अब तक 517 मार्गों के लिए 76 हवाई अड्डों को जोड़ कर परिचालन शुरू किया गया है, जिसमें 9 हेलीपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रम शामिल हैं। उड़ान योजना के अंतर्गत उड़ान शुरू होने से 130 से ज्यादा शहरों की जोड़ी बन गई है। उड़ान योजना के अंतर्गत अब तक 2.47 लाख उड़ानें संचालित की गई है, जिसमें 1.3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने यात्रा की है।

इस योजना के अंतर्गत प्रदान की जा रही रियायतें निम्नानुसार हैं:

हवाईअड्डा ऑपरेटर:

  1. हवाईअड्डा ऑपरेटर आरसीएस उड़ानों पर लैंडिंग और पार्किंग कर न लगाएं।
  2.  भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण आरसीएस उड़ानों पर कोई टर्मिनल नेविगेशन लैंडिंग शुल्क (टीएनएलसी) नहीं लगाएं।
  3. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा रूट नेविगेशन और सुविधा शुल्क (आरएनएफसी) आरसीएस उड़ानों पर सामान्य दरों के  42.50% पर रियायती आधार पर लगाया जाए।
  4. चयनित एयरलाइन प्रचालकों (एसएओ) ने सभी हवाईअड्डों पर इस योजना के अंतर्गत ऑपरेटरों को स्व-ग्राउंड हैंडलिंग की अनुमति दी है।

केंद्र सरकार:

  1. इस योजना की अधिसूचना जारी होने की तारीख से तीन वर्ष की प्रारंभिक अवधि के लिए आरसीएस हवाईअड्डों से एसएओ द्वारा खरीदे गए हवाई र्इंधन (एटीएफ) पर 2% की दर से उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।
  2. एसएओ को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस दोनों के साथ कोड साझाकरण व्यवस्था में प्रवेश करने की स्वतंत्रता है।

राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों के आरसीएस हवाई अड्डों पर:

  1. राज्यों में स्थित आरसीएस हवाईअड्डों पर एटीएफ पर वैट को 10 वर्षों की अवधि के लिए घटाकर 1 प्रतिशत या उससे कम करना।
  2. आरसीएस हवाई अड्डों के विकास के लिए अगर आवश्यक हो, तो न्यूनतम भूमि को निशुल्क और बाधाओं से मुक्त करना एवं आवश्यकतानुसार मल्टी-मॉडल भीतरी इलाकों को संपर्क प्रदान करना।
  3. आरसीएस हवाई अड्डों पर सुरक्षा और अग्निशमन सेवाएं मुफ्त प्रदान करना।
  4. आरसीएस हवाई अड्डों पर रियायती दरों पर बिजली, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाएं प्रदान करना या उपलब्ध कराना।

इस योजना से अब तक 1.3 करोड़ से ज्यादा यात्री लाभान्वित हुए हैं।

यह जानकारी नागर विमानन राज्य मंत्री, जनरल (सेवानिवृत्त) वी के सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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प्रधानमंत्री मोदी ने यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में गरबा नृत्‍य को शामिल किए जाने की सराहना की

प्रधानमंत्री मोदी ने आज यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में गुजरात के गरबा नृत्‍य का नाम शमिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया;

“गरबा जीवन, एकता और हमारी गहन परंपराओं का उत्सव है। यूनेस्‍को की अमूर्त विरासत सूची में इसका शिलालेख विश्‍व के समक्ष भारतीय संस्कृति के सौंदर्य को दर्शाता है। यह सम्मान हमें भावी पीढ़ियों के लिए अपनी विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए बधाई वैश्विक स्वीकृति।”

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