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जीएनएसएस प्रौद्योगिकी से नेविगेशन एवं स्थिति निर्धारण बेहतर होता है, और यह टोल संग्रह प्रणालियों को आधुनिक बनाने, निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने, एवं हमारी सड़कों पर भीड़-भाड़ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है-नितिन गडकरी

राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चालकों को निर्बाध और बाधा मुक्त टोलिंग अनुभव कराने के लिए एनएचएआई द्वारा प्रवर्तित कंपनी भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने ‘भारत में ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्र‍ह’ पर नई दिल्ली में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में उद्योग जगत और वैश्विक विशेषज्ञों दोनों को ही भारत में जीएनएसएस प्रौद्योगिकी पर आधारित फ्री-फ्लो टोलिंग प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक अनूठा मंच मुहैया कराया गया।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव श्री अनुराग जैन, एनएचएआई के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव, एनएचएआई के सदस्य (प्रशासन) एवं आईएचएमसीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री विशाल चौहान, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव (लॉजिस्टिक्स) श्री एस.पी. सिंह तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई, आईएचएमसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अमेरिका और यूरोप के अंतर्राष्ट्रीय उद्योग विशेषज्ञ और आईआईटी, एनआईसी, एनपीसीआई, सी-डैक, एचओए (आई), एनएचबीएफ, आईआरएफ, एसआईएएम, वित्तीय संस्थानों और अग्रणी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधिगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

दिन भर चली कार्यशाला में कई पैनल चर्चाएं हुईं। इन चर्चाओं में विभिन्न औद्योगिक और तकनीकी पेशेवरों के साथ-साथ दुनिया भर के ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) विशेषज्ञों ने विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इसमें ऑन-बोर्ड यूनिट्स (ओबीयू), वाणिज्यिक वाहन और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, टोल चार्जर सॉफ्टवेयर, जारीकर्ता इकाई की भूमिका और भारत में मल्टी-लेन फ्री फ्लो ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के सफल कार्यान्वयन के लिए सड़क बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं शामिल थीं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) तकनीक नेविगेशन और पोजिशनिंग को बढ़ाती है, टोल संग्रह प्रणालियों को आधुनिक बनाने, निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने और हमारी सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने, शासन को अधिक पारदर्शी बनाने और त्वरित सेवाएं प्रदान करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।”

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा, “आज की कार्यशाला में ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) पर कई वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भारत की विकास गाथा में विश्वास रखती है। हम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए काम कर रहे हैं और ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) का कार्यान्वयन उस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदमों में से एक होगा।”

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार यादव ने कहा, “पिछले एक दशक में, सड़क नेटवर्क का कई गुना विस्तार हुआ है और राष्ट्रीय राजमार्ग यात्री यातायात के साथ-साथ देश की 70 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं को लाने-ले जाने का काम करते हैं। ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) को लागू करने से न केवल हमारी अर्थव्यवस्था के विकास में बहुत बड़ा योगदान मिलेगा, बल्कि हमारे नागरिकों के लिए बाधा रहित टोल व्यवस्था भी एक वास्तविकता बन जाएगी।”

एनएचएआई के सदस्य (प्रशासन) एवं आईएमएचसीएल के सीएमडी श्री विशाल चौहान ने भारत में जीएनएसएस आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान आयोजित पैनल चर्चा के मुख्य बिंदुओं का सारांश प्रस्तुत किया तथा आगे की राह बताई।

ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) आधारित टोलिंग इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह का एक बैरियर फ्री तारीका है, जिसमें सड़क पर चलने वाले लोगों से टोल वाले राजमार्ग पर उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर शुल्क लिया जाता है।

एनएचएआई मौजूदा फास्टैग इकोसिस्टम के भीतर जीएनएसएस-आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली को लागू करने की योजना बना रहा है, जिसमें शुरुआत में हाइब्रिड मॉडल का उपयोग किया जाएगा, जहां आरएफआईडी-आधारित ईटीसी और जीएनएसएस-आधारित ईटीसी दोनों एक साथ काम करेंगे। टोल प्लाजा पर समर्पित जीएनएसएस लेन उपलब्ध होंगी, जिससे जीएनएसएस-आधारित ईटीसी का उपयोग करने वाले वाहन आसानी से गुजर सकेंगे। जैसे-जैसे जीएनएसएस आधारित ईटीसी अधिक व्यापक होता जाएगा, सभी लेन अंततः जीएनएसएस लेन में परिवर्तित हो जाएंगी।

भारत में जीएनएसएस आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के कार्यान्वयन से राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की सुगम आवाजाही में सुविधा होगी और राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को कई लाभ प्रदान करने की परिकल्पना की गई है जैसे कि बाधा रहित फ्री-फ्लो टोलिंग जिससे परेशानी मुक्त सवारी का अनुभव होगा और दूरी आधारित टोलिंग होगी। जीएनएसएस आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह से लीकेज को रोकने और टोल चोरों पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में टोल संग्रह प्रणाली अधिक कुशल होगी।

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“अगले 5 वर्षों में भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 70 प्रतिशत बढ़ जाएगी”: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां परमाणु ऊर्जा विभाग की 100 दिवसीय कार्य योजना की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा “भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता अगले पांच वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ जाएगी।”

यह केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग, डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा मोदी सरकार 3.0 में मंत्री के रूप में पुनः कार्यभार संभालने के बाद आयोजित पहली परमाणु ऊर्जा से संबंधित बैठक है।

ऊर्जा परिदृश्य में परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “7.48 गीगावॉट की स्थापित क्षमता 2029 तक 13.08 गीगावॉट हो जाएगी, जो 7 नए रिएक्टरों के जुड़ने से 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने पहले से चल रही परियोजनाओं का भी जायजा लिया और आगामी योजनाओं के लिए दिशा-निर्देश दिए।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विभाग को क्षमता निर्माण और ज्ञान, संसाधनों और विशेषज्ञता को साझा करके पूर्ण क्षमता का दोहन करने के लिए एकीकृत सहयोग करने का निर्देश दिया। मंत्री ने प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने याद दिलाया कि इस सरकार ने, सहयोग के माध्यम से बजट में वृद्धि करके, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों का उपयोग और सहयोग में वृद्धि करके सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ संयुक्त उपक्रमों की अनुमति दी है। अनुसंधान में आसानी और गतिविधियों को बढ़ाने पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम आसान विज्ञान को बढ़ावा देने और परमाणु प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग द्वारा नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए एकल बिंदु अनुमोदन दे रहे हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि विभाग कैप्टिव परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भारत लघु रिएक्टर (बीएसआर) का उपयोग करने के लिए 220 मेगावाट दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) को डिजाइन कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि डीएई कैलेंड्रिया को प्रेशर वेसल द्वारा प्रतिस्थापित करके हल्के जल-आधारित रिएक्टरों का उपयोग करने के लिए भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) 220 मेगावाट पर भी काम कर रहा है।

डॉ. जीतेंद्र सिंह के अनुसार, भाविनी सार्वजनिक क्षेत्र का एक उपक्रम प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की प्रारंभिक ईंधन लोडिंग को पूरा करने का काम प्रगति पर है और आने वाले महीनों में इसकी पहली क्रिटिकैलिटी की ओर बढ़ने की उम्मीद है। यह पहला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है जो अपनी खपत से ज़्यादा ईंधन का उत्पादन करता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ रेडियोफार्मास्युटिकल्स और परमाणु चिकित्सा, कृषि और खाद्य संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि विकिरण प्रौद्योगिकी के विकास से आम नागरिकों को आर्थिक और सामाजिक लाभ होगा और जीवन को आसान बनाने में मदद मिलेगी तथा उप-परमाणु कणों का उपयोग करके बुनियादी, अनुप्रयुक्त और ट्रांसलेशनल विज्ञान में अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

समीक्षा बैठक में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत कुमार मोहंती तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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केंद्र सरकार किसानों के कल्याण और उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैः प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज भारत मंडपम में अंतर्राष्ट्रीय चीनी संगठन (आईएसओ) की 64वीं परिषद बैठक का उद्घाटन किया। इस बैठक का 27 जून, 2024 को समापन होगा। इस बैठक में 30 से अधिक देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और गन्ना, चीनी व संबद्ध क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं, चुनौतियों और रणनीतियों पर चर्चा एवं विचार-विमर्श किया। इससे पहले, भारत ने वर्ष 2012 में आईएसओ कंपनी के 41वें सत्र की मेजबानी की थी।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलेखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित किया

अपने उद्घाटन भाषण में केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि लगभग 5 करोड़ किसान गन्ने की खेती में लगे हुए हैं और चीनी उद्योग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्‍ध करा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसान कल्याण और उद्योग के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, ताकि कृषि प्रकियाओं को बेहतर बनाने के लिए सहयोगात्मक प्रयास सुनिश्चित किए जा सकें।

श्री जोशी ने आईएसओ सम्मेलन की मेजबानी पर गर्व व्यक्त करते हुए चीनी और जैव ईंधन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी और कौशल को आगे बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी दी। चीनी के बारे में भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक निर्भरता पर जोर देते हुए उन्‍होंने दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता और एक महत्वपूर्ण जैव ईंधन उत्पादक के रूप में भारत की स्थिति का उल्लेख किया और कहा कि इससे पेट्रोल के साथ 12 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का स्‍तर प्राप्‍त हो गया है और जल्दी ही 20 प्रतिशत का लक्ष्य प्राप्‍त होगा।

श्री जोशी ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में जैव ईंधन की भूमिका पर जोर देते हुए चीनी उद्योग और किसानों पर पेट्रोल के साथ भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के सकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्‍होंने प्रतिनिधियों को चीनी क्षेत्र में भविष्य के उद्यमों के लिए इस सम्मेलन का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी सफलता की कामना की।

भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव और आईएसओ के अध्यक्ष श्री संजीव चोपड़ा ने आने वाले समय में आईएसओ की बड़ी भूमिका का सुझाव दिया। उन्होंने इस बात की तत्काल जरूरत पर बल दिया कि दुनिया के चीनी और इथेनॉल उद्योग, सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थिति में भी पैदा होने वाली गन्ने की किस्‍म विकसित करने, जल संरक्षण और जैव ईंधन को बढ़ावा देने सहित सुदृढ़ कार्यप्रणालियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटे। उन्‍होंने कहा कि अपने किसानों और छोटे उद्योगों के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में आईएसओ सदस्य देशों में अधिक सहयोग की आवश्यकता है। भारत और ब्राजील दो सबसे बड़े चीनी उत्‍पादक देश हैं। उन्‍हें गन्ने में अनुसंधान और विकास में सहयोग व समन्वित प्रयास करने चाहिए ताकि अधिक उपज, अधिक सुक्रोज तत्‍व वाली तथा स्थानीय परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बेहतर गन्‍ना किस्मों का विकास किया जा सके। उन्होंने इथेनॉल उत्पादन और मिश्रण में भारत की प्रगति पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि इन प्रयासों में स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देना राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। श्री चोपड़ा ने भारत के प्रधानमंत्री की एक पहल वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन की सफलता पर भी प्रकाश डाला।

श्री जोस ओरिवे, ईडी, आईएसओ ने अध्यक्ष के रूप में आईएसओ मामलों को सफलतापूर्वक संभालने और इस कार्यक्रम को इतने भव्य रूप में आयोजित करने के लिए भारत को बधाई दी। उन्होंने भारत सरकार, भारतीय चीनी और जैव ईंधन उद्योग के बीच समन्‍वय की सराहना करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने भारत की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर आज शुगर एवं जैव-ऊर्जा- उभरते परिदृश्य विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला ने उद्योग जगत की हस्तियों और सरकारी अधिकारियों में विचारों का आदान-प्रदान करने और चीनी तथा जैव-ऊर्जा क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक उत्कृष्ट मंच के रूप में भी काम किया।

शुगर एवं जैव-ऊर्जा- उभरते परिदृश्य विषय पर कार्यशाला में विभिन्न ज्ञानवर्धक सत्र शामिल रहे, जो इस प्रकार हैं-

  1. विविधीकरण के माध्यम से स्थिरता: इस सत्र में गन्ने की खेती और चीनी क्षेत्र को अधिक टिकाऊ प्रथाओं की ओर ले जाने और इस बारे में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अतिरिक्‍त, मजबूत वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जीवाश्म ईंधन के स्थान पर हरित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देगा।
  2. चीनी क्षेत्र का मशीनीकरण और आधुनिकीकरण: स्थिरता विषय को आगे बढ़ाते हुए, इस  सत्र के दौरान गन्ने की खेती पर मुख्‍य रूप से चर्चा की गई। भारत में छोटी भूमि जोतों के लिए कृषि मशीनीकरण, और विशेष रूप से मशीनरी का निर्माण, किसानों को विस्तार सेवाएं तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग गन्ने की खेती को और अधिक किफायती व उत्पादक बना देगा।
  3. चीनी क्षेत्र का डिजिटलीकरण: इस सत्र में भारत सरकार की एग्रीस्टैक जैसी विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला गया। ये कृषि सांख्यिकी और डेटा प्रबंधन में क्रांतिकारी परिवर्तन कर रही हैं और अधिक उपयुक्त नीति का निर्माण करने और समय पर सरकारी उपायों के लिए आवश्यक है। कृषि पद्धतियों के लिए एआई/एमएल के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
  4. चीनी की वैश्विक मांग और आपूर्ति: आईएसओ के अर्थशास्त्री श्री पीटर डी क्लार्क और डॉ. क्लॉडियू कोवरिग ने वैश्विक चीनी क्षेत्र के बारे में अपने विश्लेषण साझा किए और निकट भविष्य में वैश्विक चीनी व इथेनॉल के क्षेत्र में मांग और आपूर्ति परिदृश्य को स्पष्ट करते हुए, इस पैनल चर्चा ने चीनी व्यापार की पद्धति और वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों के अनुमानों को दर्शाया।
  5. ग्रीन हाइड्रोजन: आईएसओ के सलाहकार श्री लिंडसे जॉली ने ऊर्जा के स्रोत के रूप में हाइड्रोजन की क्षमता और इस क्षेत्र में चीनी क्षेत्र की भूमिका पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। वे ऑटोमोबाइल क्षेत्र के साथ-साथ बिजली क्षेत्र के लिए ईंधन के प्रमुख स्रोत के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास के प्रति अधिक आशावादी रहे।

पोडियम पर खड़ा एक व्यक्तिविवरण स्वचालित रूप से उत्पन्न होता है

सम्मेलन ने प्रतिनिधियों को चीनी क्षेत्र के विशेषज्ञों से बातचीत करने, वैश्विक रुझानों को समझने, चीनी तथा इथेनॉल के लिए प्रासंगिक विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बेहतर अवसर प्रदान किया। इन सत्रों ने उत्पादक चर्चाओं को सुगम बनाया और विचारों के सार्थक आदान-प्रदान को सुनिश्चित किया, जिसके परिणामस्‍वरूप बातचीत से प्रभावशाली परिणाम प्राप्‍त हुए। इस सम्मेलन ने चीनी उद्योग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। इस सम्‍मेलन से इस क्षेत्र में टिकाऊ और उन्नत प्रथाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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ऐतिहासिक 350वें रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडीईएक्स) अनुबंध पर हस्ताक्षर; रक्षा मंत्रालय 150 किलोग्राम तक के कई पेलोड ले जाने में सक्षम लघु उपग्रह के डिजाइन और विकास के लिए स्पेसपिक्सल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ सहयोग करेगा

रक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहल रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडीईएक्स) ने 25 जून, 2024 को नई दिल्ली में ऐतिहासिक 350वें अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। यह अनुबंध स्पेसपिक्सल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ ‘150 किलोग्राम तक के इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल, इन्फ्रारेड, सिंथेटिक अपर्चर रडार और हाइपरस्पेक्ट्रल पेलोड ले जाने में सक्षम लघु उपग्रह’ के डिजाइन और विकास के लिए किया गया था। 150वें आईडीईएक्स अनुबंध पर दिसंबर 2022 में हस्ताक्षर किए गए थे और 18 महीने के भीतर 350वें अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

रक्षा सचिव श्री गिरिधर अरमाने और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति में अपर सचिव (रक्षा उत्पादन) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) श्री अनुराग बाजपेयी और स्पेसपिक्सेल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवैस अहमद नदीम अलदुरी के बीच अनुबंध का आदान-प्रदान किया गया। स्पेसपिक्सेल विस्तृत पृथ्वी अवलोकन प्रदान करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रहों के निर्माण और प्रक्षेपण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

यह 350वां आईडीईएक्स अनुबंध अंतरिक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स में नवाचार को सक्षम बनाता है, इसमें पहले समर्पित बड़े उपग्रहों पर तैनात कई पेलोड को अब लघु किया जा रहा है। मॉड्यूलर लघु उपग्रह आवश्यकता के अनुसार कई लघु पेलोड को एकीकृत करेगा, जो तेजी से और किफायती परिनियोजन, निर्माण में आसानी, मापनीयता, अनुकूलन क्षमता और पर्यावरणीय के प्रभाव को कम करने जैसे लाभ प्रदान करेगा।

अपने संबोधन में, रक्षा सचिव ने प्रौद्योगिकी के विस्तार और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए नए रक्षा नवप्रवर्तकों की अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। नवाचार के साथ स्वदेशीकरण के संयोजन के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि घरेलू क्षमताएं प्रयोग और विकास के लिए एक मंच प्रदान करके नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करती हैं। नवाचार नई प्रौद्योगिकियों और समाधानों के निर्माण को प्रोत्साहन देकर स्वदेशीकरण को बढ़ावा देता है।

रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईईडीईएक्स) के बारे में

आईडीईएक्स, 2021 में नवाचार श्रेणी में सार्वजनिक नीति के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में एक गेम-चेंजर के रूप में उभरा है। रक्षा उत्पादन विभाग के तहत रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) द्वारा स्थापित, आईडीईएक्स ने डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज (डीआईएससी) के 11 संस्करणों का शुभारंभ किया है, और हाल ही में महत्वपूर्ण और रणनीतिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए आईडीईएक्स (एडीआईटीआई) योजना के साथ अभिनव प्रौद्योगिकियों के एसिंग विकास किया है।

एक संक्षिप्त अवधि में, आईडीईएक्स ने तेजी से सफलता हासिल की है। इससे रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप के एक बढ़ते समुदाय को प्रोत्साहन मिला है। यह वर्तमान में 400 से अधिक स्टार्ट-अप और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ जुड़ा हुआ है। अब तक दो हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 35 वस्तुओं की खरीद को स्वीकृति दी जा चुकी है। आईडीईएक्स ने रोजगार के कई अवसर सृजित किए हैं और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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सरकार दूरसंचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू करेगी

सभी नागरिकों को सस्ती, अत्याधुनिक उच्च गुणवत्ता वाली दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता के अनुरूप सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी का आयोजन कर रही है। वर्तमान दूरसंचार सेवाओं को बढ़ाने और निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने स्पेक्ट्रम नीलामी शुरू कर दी है और 08 मार्च, 2024 को आवेदन आमंत्रण सूचना (एनआईए) जारी की गई है। संचार मंत्रालय ने घोषणा की है कि आगामी नीलामी में स्पेक्ट्रम बैंड बोली के लिए 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज शामिल हैं।

नीलाम किए जाने वाले स्पेक्ट्रम की कुल मात्रा विभिन्न बैंडों में 10,522.35 मेगाहर्ट्ज है, जिसका मूल्य आरक्षित मूल्य पर 96,238.45 करोड़ रुपये है।

 

बैंड

नीलामी में रखा गया कुल स्पेक्ट्रम (मेगाहर्ट्ज में) एलएसए की संख्या जहां स्पेक्ट्रम बेचा जाता है आरक्षित मूल्य पर स्पेक्ट्रम का मूल्य (करोड़ में)
800 मेगाहर्ट्ज 118.75 19 21341.25
900 मेगाहर्ट्ज 117.2 22 15619.6
1800 मेगाहर्ट्ज 221.4 22 21752.4
2100 मेगाहर्ट्ज 125 15 11810
2300 मेगाहर्ट्ज 60 6 4430
2500 मेगाहर्ट्ज 70 5 2300
3300 मेगाहर्ट्ज 1110 22 16251.2
26 गीगाहर्ट्ज 8700 21 2734
कुल 10,522.35 96,238.45

 

स्पेक्ट्रम नीलामी की मुख्य विशेषताएं:

· नीलामी में तीन बोलीदाता – मैसर्स भारती एयरटेल लिमिटेड, मैसर्स वोडाफोन आइडिया लिमिटेड और मैसर्स रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड भाग लेंगे।

· नीलामी की प्रक्रिया: यह नीलामी एक समकालिक बहु-चरणीय आरोही (एसएमआरए) ई-नीलामी होगी।

· स्पेक्ट्रम की अवधि : स्पेक्ट्रम बीस (20) वर्ष की अवधि के लिए आवंटित किया जाएगा।

· भुगतान : सफल बोलीदाताओं को 8.65 प्रतिशत की ब्याज दर पर एनपीवी की विधिवत सुरक्षा करते हुए 20 समान वार्षिक किस्तों में भुगतान करने की अनुमति दी जाएगी।

· स्पेक्ट्रम का अवधि – इस नीलामी के माध्यम से प्राप्त स्पेक्ट्रम को न्यूनतम दस वर्ष की अवधि के बाद वापस किया जा सकता है।

· स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क : इस नीलामी में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए कोई स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) नहीं लगेगा।

· बैंक गारंटी : सफल बोलीदाता को वित्तीय बैंक गारंटी (एफबीजी) और निष्पादन बैंक गारंटी (पीबीजी) प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है।

बोलीदाताओं को ई-नीलामी प्लेटफॉर्म से सहजता के लिए 03 जून 2024, 13 जून 2024 और 14 जून 2024 को मॉक नीलामी आयोजित की गई। इसके बाद , बोलीदाताओं के डेटा में कोई अशुद्धि न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए 24 जून 2024 को सुबह 09:00 बजे नीलामी सूची प्रकाशित की गई।

स्पेक्ट्रम नीलामी के अन्य विवरण, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ, आरक्षित मूल्य, पूर्व-योग्यता शर्तें, बयाना राशि जमा (ईएमडी), नीलामी नियम आदि तथा उपरोक्त अन्य नियम व शर्तें शामिल हैं, एनआईए में निर्दिष्ट हैं, जिन्हें दूरसंचार विभाग की वेबसाइट https://dot.gov.in/spectrum पर देखा जा सकता है ।

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देश की राजनीति में वो होगा जो पहले कभी नहीं हुआ

दैनिक भारतीय स्वरूप , संवाद सूत्र मनोज अग्निहोत्री देश की राजनीति में जो पहले कभी नहीं हुआ वो अब होने जा रहा है।कल यानी 26 जून की सुबह लोकसभा स्पीकर के पद के लिए वोटिंग होगी। स्पीकर पद पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आम सहमति ना बनने के कारण चुनाव की नौबत आई है। एनडीए ने एक बार फिर ओम बिरला को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, आईएनडीआईए की तरफ से के सुरेश ने पर्चा दाखिल किया है।

लोकसभा स्पीकर को लेकर मंगलवार सुबह से ही सियासी माहौल गरमाया हुआ था। शुरुआत में उम्मीद जताई जा रही थी कि स्पीकर पद पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र को समर्थन देने का भी एलान किया था। हालांकि, घंटेभर बाद ही विपक्ष ने ओम बिरला के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतार दिया।

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छोटे व मझोले अखबारों को खत्म करने की साजिशः के. डी. चंदोला

~छोटे व मझोले अखबारों का उत्पीड़न बन्द करे केन्द्र सरकारः चंदोला
-प्रेस सेवा पोर्टल की जटिलताओं का दूर करने की मांग
-प्रेस सेवा पोर्टल व विज्ञापन पालिसी की विसंगितयों को दूर करवाने का प्रयास करूंगाः के. सतीश नम्बूदरीपद्
-अनेक जटिलतायें पैदा करके छोटे व मझोले अखबारों को बन्द करने की साजिशः चंदोला
-अखबार प्रकाशन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री जी. एस. टी. मुक्त की जायेः श्याम सिंह पंवार
गुवाहाटी। एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया की राष्ट्रीय परिषद् (नेशनल काउंसिल) की बैठक असम राज्य के गुवाहाटी के पलटन बाजार स्थित होटल स्टार लाइन में आयोजित की गई।
बैठक में छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों को प्रभावित करने वाली नीतियों व उनकी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की गई। अनेक राज्यों से पधारे प्रकाशकों ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीनस्थ आर. एन. आई. कार्यालय व सी. बी. सी. कार्यालय के अधिकारियों की मनमानी के चलते छोटे व मझोले वर्ग के अखबार मालिक परेशान हैं। इन दिनों नया प्रेस सेवा पोर्टल परेशानी का एक बड़ा कारण बना हुआ है जिसके चलते अखबारों के प्रकाशकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और प्रकाशकगण अपने-अपने अखबारों का वार्षिक विवरण नहीं भर पा रहे हैं। अतः प्रेस सेवा पोर्टल की जटिलताओं को दूर करने के साथ-साथ वार्षिक विवरण भरने का समय अगस्त 2024 तक बढ़ाया जाये। वहीं सी. बी. सी. की विज्ञापन पालिसी के चलते छोटे व मझोले अखबारों की विज्ञापन की हिस्सेदारी प्रभावित हो रही है और उनका हक मारा जा रहा है। अतः विज्ञापन नीति में संशोधन किया जाये ताकि छोटे व मझोले अखबारों की विकासदर प्रभावित ना हो। अखबार मालिकों ने यह माँग भी रखी कि अखबारों के मालिकों का परिचय पत्र भी आर. एन. आई. द्वारा जारी किया जाये।
मुख्य अतिथि रहे प्रेस इन्फॉर्मेंशन ब्यूरो (पूर्वोत्तर जोन) के डायरेक्टर जनरल के. सतीश नम्बूदरीपद् ने प्रकाशकगणों की अनेक समस्याओं को सुनकर आश्वासन दिया कि आर. एन. आई. व सी. बी. सी. के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर छोटे व मझोले अखबारों की जटिल समस्याओं का निस्तारण अवश्य करवायेंगे और जहाँ जिस तरह की जरूरत होगी, उसमें परिवर्तन व संशोधन करवायेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई-नई तकनीकों का सामना करने के लिये तैयारी करने की जरूरत है अन्यथा पिछड़ जाओगे। लेकिन मैं अपने स्तर से यही प्रयास करूंगा कि प्रकाशकों की हर समस्या का समाधान हो जाये।
इस मौके पर एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चंदोला ने कहा, ‘‘हम केन्द्र सरकार से कहना चाहते हैं कि हम प्रकाशकगण, नई तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विज्ञापन नीति व प्रेस सेवा पोर्टल में जो विसंगतियाँ हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाये अन्यथा देशभर के छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों के प्रकाशकगण विरोध करने पर बाध्य होंगे।’’
उत्तर प्रदेश राज्य इकाई के अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार ने कहा, ‘‘अखबारों को प्रकाशित करने में प्रयुक्त होने वाली सभी सामग्री को जी. एस. टी. मुक्त किया जाये, जिससे कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबार प्रकाशकों को जटिलता से राहत मिल सके।’’
उन्होंने यह भी मांग कि अखबारों की पिं्रट लाइन के अनुसार ही प्रेस सेवा पोर्टल पर प्रकाशकों/स्वामियों की प्रोफाइल बनाने की सुविधा दी जाये क्योंकि आधार में दर्ज विवरण भिन्न होने के चलते प्रकाशकों का विवरण मेल नहीं खा रहा है जिसके प्रकाशकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में एसोसियेशन की कोषाध्यक्ष भगवती चंदोला, उत्तर प्रदेश राज्य इकाई के अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार, अखिलेश सिंह, असम इकाई अध्यक्ष गिरिन्द्र कुमार कार्जी, किरि रांगहेंग, उत्तराखण्ड इकाई अध्यक्ष अतुल दीक्षित, मध्य प्रदेश से अकरम खान, सबरूनिशा, आन्ध्र प्रदेश से एस. कोण्डलाराव, के. वेंकटेश रेड्डी, राजस्थान से गोपाल गुप्ता, तरूण कुमार जैन, धर्मेन्द्र सोनी, अन्जू लता सोनी, कर्नाटक से वेनुगोपाल के. नाइक सहित अनेक प्रकाशक मौजूद रहे।

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आखिर लगा ही दी नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमन्त्री पद पर हैट्रिक

दैनिक भारतीय स्वरुप, जैसा कि पूर्वानुमान था, नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने हैट्रिक लगाते हुए 9 जून को तीसरी बार भारत के प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली| यद्यपि विपक्षी पार्टियों के गठबन्धन इण्डिया ने राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन को कड़ी टक्कर दी है| जिससे भाजपा का 400 पार का स्वप्न साकार नहीं हो सका| इसके कारणों पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गहन विचार करना पड़ेगा| क्योंकि पार्टी के चाणक्यों ने 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने हेतु जो रणनीति बनायी थी, वह कहीं न कहीं विफल साबित हुई| जिसके चलते भाजपा को बहुमत से बहुत कम 240 सीटें ही प्राप्त हुईं| परन्तु उसके नेतृत्व वाले गठबन्धन राजग ने 292 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की| जनवरी 2023 से फरवरी 2024 के बीच विभिन्न एजेंसियों द्वारा कराये गये चुनावी सर्वेक्षणों में भी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी हैट्रिक लगाते हुए दिखाई दे रहे थे| जो एकदम सही साबित हुआ| लेकिन सीटों को लेकर सर्वेक्षणों का आकलन गलत सिद्ध हुआ| देश की 13 अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कराये गये सर्वेक्षणों के आधार पर भाजपा गठबन्धन को 44.30 प्रतिशत वोट के साथ 341 के आसपास सीटें मिलने की सम्भावना थी| लेकिन भाजपा को मात्र 36.56 प्रतिशत मतों के साथ 240 सीटें ही प्राप्त हुईं और उसके गठबन्धन राजग को 41.56 प्रतिशत मतों के साथ 292 सीटों से सन्तोष करना पड़ा| सर्वेक्षण में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को 36.52 प्रतिशत मतों के साथ 146 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था| जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले इण्डिया गठबन्धन को 39.21 प्रतिशत मतों के साथ 234 सीटें प्राप्त हुईं| सर्वेक्षण के आधार पर अन्य दलों को 56 सीटें मिलनी चाहिए थीं| परन्तु वास्तविक परिणाम मात्र 17 सीटों का ही रहा| यहाँ विचार करने योग्य बात यह है कि इण्डिया गठ्बन्धन को 234 सीटें तब प्राप्त हुई हैं जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की आधारभूत इकाइयाँ संगठनात्मक रूप से भाजपा की तरह मजबूत नहीं हैं|

अयोध्या के बहुचर्चित श्रीराम मन्दिर के निर्माण से भाजपा की बांछे खिली हुई थीं और उसे पूर्ण विश्वास था कि आस्था का शैलाव ऐसा उमड़ेगा कि भाजपा अकेले दम पर 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने में सफल होगी| परन्तु परिणाम पूरी तरह उल्टा निकला| पूरे देश में जो हुआ सो हुआ ही अयोध्या से सम्बन्धित फ़ैजाबाद सीट ही भाजपा के हाँथ से निकल गयी| जिसके कारण अयोध्यावासी कट्टर भाजपाइयों द्वारा सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं| श्रीराम के प्रति उनकी आस्था पर ही सवाल खड़े किये जा रहे हैं| संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतन्त्र रूप से मतदान करने का अधिकार दिया है| इसके लिए कोई किसी पर न तो दबाव डाल सकता है और न ही अपनी मर्जी थोप सकता है| अब यदि किसी दल को उसकी अपेक्षा के अनुरूप मत नहीं प्राप्त हुए हैं तो उस दल को मतदाताओं के प्रति दुर्भावना व्यक्त करने की अपेक्षा अपनी कार्यशैली की समीक्षा करनी चाहिए| जनतन्त्र में जनता ही सर्वोपरि है| सरकारों के काम-काज की समीक्षा करते हुए उसके समर्थन या विरोध का निर्णय वह मतदान के माध्यम से ही सुनाती है| जो हुआ भी और आगे भी होगा| किसी एक मुद्दे के बल पर कोई भी दल लम्बे समय तक पूर्ण बहुमत की अपेक्षा नहीं कर सकता और न ही करना चाहिए| आशा है भाजपा के रणनीतिकार इस बात को गम्भीरता पूर्वक समझेंगे और पुनः उन्हें जो सुअवसर मिला है उसका भरपूर सदुपयोग करेंगे| गरीबी, मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानो की दुर्दशा, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली तथा शिक्षा का गिरता स्तर जैसे ज्वलन्त मुद्दे चुनौती बनकर सामने खड़े हैं| इन मुद्दों को बहुत लम्बे समय तक हासिये पर नहीं डाला जा सकता| निश्चित ही नरेन्द्र मोदी अपने नये कार्यकाल में इन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और इनसे निबटने के लिए स्थाई योजना बनाते हुए उसे प्रभावी ढंग से लागू भी करेंगे| उन्हें विशेष रूप से याद रखना होगा कि उनकी सत्ता में वापसी का मार्ग विकल्पहीनता के कारण भी प्रशस्त हुआ है| लोगों ने इण्डिया गठबन्धन को गुस्से में वोट दिया है| कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को उनका आधारभूत संगठनात्मक ढांचा मजबूत न होने के बावजूद इतना वोट मिलना सिर्फ और सिर्फ लोगों के अन्दर भाजपा सरकार के प्रति व्याप्त गुस्से का परिणाम है| वहीँ असन्तुष्टों के एक बड़े वर्ग ने इण्डिया और राजग के बीच तीसरा और मजबूत विकल्प न देखकर राजग को चुना है| इस बार मतदान का प्रतिशत भी कम रहा| इसके मूल में भी कहीं न कहीं लोगों में सरकार के प्रति उत्साह का अभाव रहा| देशवासी कांग्रेस और सपा के शासन की विफलताओं को अभी भूले नहीं हैं| जिनके विकल्प में उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर अपना विश्वास जताया था| परन्तु इन दस वर्षों में मंहगाई, बेरोजगारी, गरीबी, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार कोई करिश्मा नहीं कर सकी| बल्कि विफलता ही उसके हिस्से में आयी| जिसको लेकर आम जन में रोष होना स्वाभाविक था| परन्तु भाजपा और कांग्रेस की जगह किसी तीसरे और मजबूत विकल्प के अभाव में यह रोष जनाक्रोश में परिवर्तित नहीं हो सका| जैसा 2014 में हुआ था| ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के दायरे में आने वाले विपक्षी दलों के नेताओं का बड़ी संख्या में चुनाव पूर्व भाजपा में शामिल होना, उसके बाद उन पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई रूक जाना और पार्टी में तत्काल उन्हें विशेष स्थान मिल जाना भी भाजपा के लिए घातक बना| क्योंकि इससे न केवल भारतीय जनता पार्टी के रूढ़ नेता एवं समर्पित कार्यकर्ता अन्दरखाने नाराज हुए| बल्कि आम जन में भी इसका गलत सन्देश गया| जिसका सीधा असर भाजपा के वोट प्रतिशत पर पड़ा| अतः प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी तथा उनके सहयोगियों को अपने नये कार्यकाल में पुरानी रणनीतियों का परित्याग करते हुए नई कार्यशैली अपनानी चाहिए| जो भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं, रूढ़ नेताओं तथा आम जन को सन्तुष्ट करने वाली हो| यद्यपि इस बार सरकार को गठबन्धन के दबाव में निर्णय लेने पड़ सकते हैं| परन्तु नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत छवि दृढ़ निश्चयी व्यक्ति वाली रही है| इसीलिए वह देश ही नहीं विदशों तक के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं| अतएव गठबन्धन के दबाव की परवाह किये बिना उन्हें जनहित के निर्णय लेने में कतई संकोच नहीं करना चाहिए! — डॉ.दीपकुमार शुक्ल (स्वतन्त्र टिप्पणीकार)

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उत्तर प्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक दुर्घटना बीमा कर वाराणसी डाक परिक्षेत्र ने बनाया नया कीर्तिमान

मात्र एक दिन में 2679 लोगों का दुर्घटना बीमा करके वाराणसी परिक्षेत्र ने उत्तर प्रदेश में बनाया रिकॉर्ड

डाक विभाग के उपक्रम रूप में स्थापित इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने पाँच वर्षों के अपने सफर में ‘आपका बैंक, आपके द्वार’ को प्रोत्साहित करते हुए तमाम नए आयाम स्थापित किये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन और डिजिटल इण्डिया के क्षेत्र में आज इसकी अहम् भूमिका है। समाज के अंतिम वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु विभिन्न कंपनियों से एग्रीमेंट के तहत सस्ती दरों पर बीमा का लाभ भी आईपीपीबी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। उक्त उद्गार वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये।

गौरतलब है कि वाराणसी परिक्षेत्र ने 13 जून को मात्र एक दिन में 2679 लोगों का दुर्घटना सुरक्षा बीमा करके उत्तर प्रदेश परिमंडल में एक दिन में सर्वाधिक बीमा करने का नया कीर्तिमान स्थापित किया, जिसके सापेक्ष साढ़े ग्यारह लाख रूपये का प्रीमियम जमा किया गया। यही नहीं, जीआई सर्वसुरक्षा अभियान के तहत पहले ही दिन प्रदत्त लक्ष्य के सापेक्ष 329 फीसदी सफलतापूर्वक प्राप्तकर वाराणसी परिक्षेत्र ने पूरे भारत में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके उपलक्ष्य में इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने आईपीपीबी के चीफ मैनेजर श्री बृज किशोर और प्रवर डाक अधीक्षक श्री राजीव कुमार के संग केक काटकर लोगों से खुशियाँ बाँटी एवं डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवक, पोस्टमास्टर्स, निरीक्षक, सहायक अधीक्षक, मण्डलाधीक्षक और आईपीपीबी मैनेजर्स सहित समस्त स्टाफ को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में नए कीर्तिमान स्थापित करने हेतु हौसलाआफ़जाई की।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आईपीपीबी की परिवर्तनकारी उपस्थिति ने बैंकिंग परिदृश्य को नया आकार दिया है, जो डोर-स्टेप बैंकिंग की पेशकश करता है एवं सुलभ सेवाओं का प्रतीक है जो परिवर्तन को प्रज्ज्वलित करता है। आईपीपीबी के माध्यम से डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक आज एक चलते फिरते बैंक के रूप में कार्य कर रहे हैं। सीईएलसी के तहत घर बैठे बच्चों का आधार बनाने, मोबाइल अपडेट करने, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, डीबीटी, बिल पेमेंट, एईपीएस द्वारा बैंक खाते से भुगतान, वाहनों का बीमा, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी तमाम सेवाएं आईपीपीबी द्वारा डाकिया के माध्यम से घर बैठे मुहैया कराई जा रही हैं। आईपीपीबी में खाता होने पर डाकघर की सुकन्या, आरडी, पीपीएफ, डाक जीवन बीमा में भी ऑनलाइन जमा किया जा सकता है। आईपीपीबी उन तमाम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनके पास बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच नहीं है।

इस अवसर पर सहायक निदेशक बृजेश शर्मा, लेखाधिकारी प्लाबन नस्कर, सहायक अधीक्षक पल्ल्वी मिश्रा, निरीक्षक अनिकेत रंजन, दिलीप पांडेय, सहायक लेखाधिकारी संतोषी राय, मनीष मिश्रा, श्रीप्रकाश गुप्ता, आनंद प्रधान, राकेश कुमार सहित तमाम कर्मी उपस्थित रहे।

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आयुष पर किए गए सर्वेक्षण के परिणाम (जुलाई 2022 से जून 2023) जारी किए गए

मुख्य निष्कर्ष
  • लगभग 95% ग्रामीण और 96% शहरी उत्तरदाताओं को आयुष के बारे में जानकारी है।
  • लगभग 85% ग्रामीण और 86% शहरी परिवारों में कम से कम एक सदस्य औषधीय पौधों/घरेलू उपचार/स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा/लोक चिकित्सा के बारे में जानकारी रखता है।
  • पिछले 365 दिनों में लगभग 46% ग्रामीण और 53% शहरी लोगों ने बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुष का उपयोग किया।
  • आयुर्वेद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपचार के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली है।
  • आयुष का उपयोग मुख्य रूप से कायाकल्प और निवारक उपायों के लिए किया जाता है।

परिचय

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 79वें दौर के हिस्से के रूप में जुलाई 2022 से जून 2023 तक राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा ‘आयुष’ पर पहला विशेष अखिल भारतीय सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ दुर्गम गांवों को छोड़कर पूरे देश को शामिल किया गया। 1,81,298 परिवारों से जानकारी एकत्र की गई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 1,04,195 और शहरी क्षेत्रों में 77,103 परिवार शामिल रहे।

सर्वेक्षण के व्यापक उद्देश्य निम्नलिखित के बारे में जानकारी एकत्र करना था:

  • स्वास्थ्य सेवा की पारंपरिक प्रणाली (चिकित्सा की आयुष प्रणाली) के बारे में लोगों की जागरूकता,
  • बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुष का उपयोग,
  • घरेलू उपचार, औषधीय पौधों, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा/लोक चिकित्सा के बारे में परिवारों की जागरूकता।

इसके अतिरिक्त, सर्वेक्षण में आयुष चिकित्सा प्रणालियों का उपयोग करके उपचार के लिए घरेलू व्यय के बारे में जानकारी एकत्र की गई। परिणाम (यूनिट स्तर के डेटा के साथ तथ्य पत्रक) मंत्रालय की वेबसाइट ([www.mospi.gov.in](http://www.mospi.gov.in)) पर उपलब्ध हैं।

बी. नमूना डिजाइन

आयुष पर किया गया सर्वेक्षण एक स्तरीकृत बहु-चरणीय नमूना डिजाइन का उपयोग के जरिए किया गया जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों और शहरी क्षेत्रों में शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (यूएफएस) ब्लॉक या गांवों या यूएफएस ब्लॉकों की उप-इकाइयों (एसयू) को पहले चरण की इकाइयों (एफएसयू) के रूप में माना गया था। दोनों क्षेत्रों में अंतिम चरण की इकाइयाँ (यूएसयू) परिवारों में रहने वाले लोग थे. एफएसयू के साथ-साथ चुने गए एफएसयू से घर परिवारों के चयन के लिए प्रतिस्थापन के बिना सरल यादृच्छिक नमूनाकरण (एसआरएसडब्ल्यूओआर) का उपयोग किया गया।

सी. संकल्पनात्मक रूपरेखा

सर्वेक्षण के उद्देश्य से, आयुष के बारे में ‘जागरूकता’ और ‘उपयोग’ को नीचे वर्णित तरीके से परिभाषित किया गया है:

एक परिवार के 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उस सदस्य को “आयुष के बारे में जागरूक” माना गया है, यदि निम्नलिखित में से एक या अधिक शर्तें पूरी होती हैं:

  1. यदि उसने कभी भी आयुष चिकित्सा पद्धति का उपयोग करके उपचार लिया हो, चाहे वह डॉक्टर के पर्चे के साथ हो या बिना डॉक्टर के पर्चे के।
  2. यदि उसने किसी भी आयुष पद्धति के बारे में सुना हो, जैसे आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा/आमची, होम्योपैथी – परिवार, मित्रों, चिकित्सक, मीडिया (टीवी, रेडियो, होर्डिंग्स, समाचार पत्र और पत्रिकाएँ, इंटरनेट- फेसबुक/व्हाट्सएप/ट्विटर/आउटरीच कैंप, संगठनों के सर्वेक्षण आदि के माध्यम से आईईसी सामग्री), शोध लेख/चिकित्सा समाचार-पत्र/पाठ्य पुस्तकें आदि।
  3. यदि वह औषधीय पौधों या औषधीय महत्व वाले पौधों, घरेलू उपचारों या उपचार या रोकथाम के लिए पारंपरिक प्रथाओं/लोक प्रथाओं के बारे में जानता है/जानती है/ या जानती थी।
  4. यदि वह पेशे से निम्न में से किसी भी श्रेणी में आयुष स्वास्थ्य सेवा केंद्रों/सेवा प्रदाताओं से जुड़ा हुआ है/था: पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी, अपंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी, दाई, मालिश करने वाले, फार्मासिस्ट, योग प्रशिक्षक, पंचकर्म चिकित्सक, कपिंग चिकित्सक आदि या आयुष दवाओं के उत्पादन/निर्माण में शामिल है।

‘आयुष चिकित्सा पद्धति के उपयोग’ से तात्पर्य किसी चिकित्सक/प्रशिक्षक की सलाह पर बीमारियों/बीमारियों के उपचार/उपचार या बीमारियों/बीमारियों की रोकथाम के लिए आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी की एक या अधिक प्रणालियों के उपयोग/अपनाने से है। इसमें उपचार/दवा के निवारक या लाभकारी प्रभावों को जानने वाले घर के किसी सदस्य द्वारा उपयोग किए जाने वाले घरेलू उपचार/स्व-चिकित्सा/स्व-उपचार भी शामिल रहते हैं।

D. सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष:

1. आयुष के बारे में जागरूकता:

ग्रामीण भारत में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 95% पुरुष और महिलाएँ आयुष के बारे में जागरूक पाए गए हैं, जबकि शहरी भारत में यह लगभग 96% है। अखिल भारतीय स्तर पर लिंग (जेंडर) के आधार पर आयुष प्रणाली के बारे में जागरूक लोगों(15 वर्ष या उससे अधिक आयु के) के प्रतिशत का अनुमान चित्र 1 में दिखाया गया है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/11111edewwewe7TFE.png

ग्रामीण भारत में लगभग 79% घरों और शहरी भारत में लगभग 80% घरों में कम से कम एक सदस्य औषधीय पौधों और घरेलू दवाओं के बारे में जानता है, जबकि ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में लगभग 24% घरों में कम से कम एक सदस्य लोक चिकित्सा या स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा के बारे में जानता है।

2. आयुष का उपयोग:

बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुष का उपयोग, पिछले 365 दिनों के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में अधिक देखा गया है। नीचे दिया गया चित्र 2 पिछले 365 दिनों के दौरान बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुष का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के प्रतिशत का अनुमान दर्शाता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/22222fsdfddf412R.png

ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में, बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुर्वेद को आयुष की अन्य प्रणालियों की तुलना में प्राथमिकता दी गई है।.

तालिका 1: चिकित्सा पद्धति के अनुसार बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए आयुष का उपयोग करने वाले लोगों का प्रतिशत
चिकित्सा प्रणाली ग्रमीण शहरी
आयुर्वेद 40.5 45.5
अन्य* 9.4 12.8
कोई भी 46.3 52.9
* इसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं

यह भी देखा गया है कि आयुष का उपयोग ज्यादातर कायाकल्प या निवारक उद्देश्य के लिए किया जाता है, उसके बाद चिकित्सीय या उपचारात्मक उपचार किया जाता है।

3. आयुष के उपचार का लाभ उठाने के लिए किया गया व्यय::

ग्रामीण और शहरी भारत के लिए पिछले 365 दिनों के दौरान आयुष का उपयोग करके बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए प्रति व्यक्ति औसत व्यय का अनुमान तालिका 2 में दिया गया है।

तालिका 2: आयुष का उपयोग करके बीमारियों की रोकथाम या उपचार के लिए प्रति व्यक्ति औसत व्यय (रु.)
चिकित्सा प्रणाली ग्रामीण शहरी
आयुर्वेद 394 499
अन्य* 622 592
कोई भी 472 574
* इसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं।

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