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Bharatiya Swaroop

भारतीय स्वरुप एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है। सम्पादक मुद्रक प्रकाशक अतुल दीक्षित (published from Uttar Pradesh, Uttrakhand & maharashtra) mobile number - 9696469699 : 9415153880

कानपुर पब्लिक स्कूल, चकेरी का रजत जयंती समारोह संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, कानपुर पब्लिक स्कूल, चकेरी, कानपुर नगर में सत्र 2025–26 का विद्यालय का रजत जयंती समारोह भव्य, गरिमामय एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय की 25 वर्षों की शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक उपलब्धियों को दर्शाते हुए “Introduction of Silver Jubilee” एवं विद्यालय परिचय (About School) प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन विद्यालय के डायरेक्टर महोदय, रिटायर्ड कर्नल जे. एन. अग्निहोत्री जी, विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रज्ञा अग्निहोत्री तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, कानपुर देहात के सांसद देवेन्द्र सिंह भोले द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसके पश्चात दीप मंत्र के सस्वर उच्चारण से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रज्ञा अग्निहोत्री द्वारा विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें शैक्षिक उपलब्धियों, सह-शैक्षिक गतिविधियों एवं विद्यालय की प्रगति का विस्तार से उल्लेख किया गया। तत्पश्चात विद्यालय के डायरेक्टर रिटायर्ड कर्नल जे. एन. अग्निहोत्री ने मुख्य अतिथि का शाल स्मृति चिन्ह भेट कर के स्वागत किया तथा उनका संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।

समारोह के दौरान विद्यालय के मेधावी एवं होनहार विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। रजत जयंती समारोह के अंतर्गत पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि द्वारा पारिजात वृक्ष का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संदेश दिया गया। इसी क्रम में विद्यालय की स्मारिका “KPS Voice” का विमोचन भी मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में विद्यार्थियों ने अत्यंत मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें वेलकम सॉन्ग, गणेश वंदना, “चक दे इंडिया” गीत, अंग्रेज़ी नाटक, पर्यावरण विषयक प्रस्तुति,बम बम कैलाश खेर के गीत पर नृत्य, जिंगल बेल, राजस्थानी लोक नृत्य, कव्वाली, “ऐगिरी नंदिनी” मैशअप, तथा महाभारत के द्रोपदी चीरहरण प्रसंग पर आधारित सशक्त नाट्य प्रस्तुति सम्मिलित रही, जिसने समाज में नारी सम्मान एवं शोषण के विरुद्ध जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया।

नेशनल इंटीग्रेशन की प्रस्तुति के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा “जयति जयति जयते” गीत पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया।

कार्यक्रम का सफल, सुसंगठित एवं प्रभावशाली मंच संचालन विद्यालय के पवन कुमार यादव (हिंदी प्रवक्ता) द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में Vote of Thanks के माध्यम से विद्यालय के समस्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों के योगदान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह रजत जयंती समारोह विद्यालय परिवार, अभिभावकों एवं अतिथियों के लिए अविस्मरणीय, प्रेरणादायक एवं गौरवपूर्ण सिद्ध हुआ।

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उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में 31 क्षेत्रों में 45 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलवाई

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख पहल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच), देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रभावी, समयबद्ध और मुकदमेबाजी से पहले निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 तक आठ महीने की अवधि के दौरान, हेल्पलाइन ने 31 क्षेत्रों में राशि वापिस दिलवाने के दावों से संबंधित 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए 45 करोड़ रुपये की राशि के वापिस दिलवाई है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुकदमेबाजी से पहले, एनसीएच विवादों के त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण समाधान को सक्षम बनाती है जिससे उपभोक्ता आयोगों पर बोझ कम होता है।

क्षेत्रवार निष्पादन

 -कॉमर्स क्षेत्र में शिकायतों और वापिस दिलवाई गई राशि की मात्रा और संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई जिसमें 39,965 शिकायतों के परिणामस्वरूप 32 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई। इसके बाद यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का स्थान रहा जिसमें 4,050 शिकायतें दर्ज की गई और 3.5 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई।

ई-कॉमर्स क्षेत्र से राशि वापिस दिलवाने से संबंधित शिकायतें देश के सभी हिस्सों से प्राप्त हुई जिनमें प्रमुख महानगरों से लेकर दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। यह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की राष्ट्रव्यापी पहुंच, सुगमता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

कुल वापिस दिलवाई गई राशि में 85 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले शीर्ष पांच क्षेत्रों, प्राप्त शिकायतों की संख्या और संबंधित वापिस दिलवाई गई राशि का विवरण नीचे दिया गया है:

क्रम संख्या क्षेत्र कुल शिकायतें कुल वापसी राशि ( रुपये में )
1 ई-कॉमर्स 39,965 320,680,198
2 यात्रा पर्यटन 4,050 35,222,102
3 एजेंसी सेवाएं 957 13,497,714
4 इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 635 11,725,231
5 एयरलाइंस 668 9,556,843
कुल 46,275 39,06,82,088

इस उपलब्धि के पीछे का एक प्रमुख कारण साझेदारों की संख्या में विस्तार है जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की सामूहिक क्षमता में वृद्धि हुई है। यह संबंधित हितधारकों की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है जो उपभोक्ता कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए उनकी जवाबदेही की पुष्टि करता है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 की अवधि में 45 करोड़ रुपये की राशि की त्वरित वापसी न केवल हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और तत्परता दर्शाती है बल्कि समयबद्ध और परेशानी मुक्त शिकायत निवारण सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी दर्शाती है। यह मुकदमेबाजी से पहले के चरण में एक आवश्यक माध्यम के रूप में एनसीएच के महत्व को और मजबूत करता है जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

उपभोक्ता पर प्रभाव – उदाहरण:

राजस्थान के जोधपुर के एक उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खराब कुर्सियाँ प्राप्त करने के बाद शिकायत दर्ज कराई। समाधान चाहा, उपभोक्ता ने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन लगातार पाँच बार समान वापिस लेना रद्द कर दिया गया जिससे मामला अनसुलझा रह गया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के हस्तक्षेप से मामले का तुरंत समाधान हुआ और उपभोक्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई। उपभोक्ता ने हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे जैसे ठगे गए उपभोक्ताओं की सहायता करने के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन का बहुत-बहुत धन्यवाद… आपका बहुत-बहुत आभार।”

कर्नाटक के बेंगलुरु निवासी एक उपभोक्ता ने वार्षिक इंटरनेट प्लान खरीदा था और उसके खाते से राशि काट ली गई थी। हालांकि, कनेक्शन कभी लगाया ही नहीं गया। जब उसने ग्राहक सेवा से संपर्क किया तो उसे आश्वासन दिया गया कि 10 कार्य दिवसों के भीतर राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। कई बार कॉल करने और शिकायत करने के बावजूद, उपभोक्ता को चार महीने बाद भी राशि वापिस नहीं मिली। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के प्रभावी हस्तक्षेप से कंपनी ने तुरंत राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी। समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “यह एक अच्छा अनुभव रहा। अन्यथा, राशि वापिस पाना मुश्किल था।”

तमिलनाडु के चेन्नई के एक उपभोक्ता ने उड़ान से 96 घंटे से अधिक पहले अपना टिकट रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, उपभोक्ता के बार-बार अनुरोध करने पर भी कंपनी ने राशि वापिस नहीं लौटाई। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के त्वरित हस्तक्षेप से राशि वापिस लौटा दी गई। एनसीएच के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “एनसीएच को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद। मैं आपके प्रयासों से बहुत प्रसन्न हूं।”

ये मामले मुकदमेबाजी से पहले की प्रभावी व्यवस्था के रूप में एनसीएच की भूमिका को दर्शाते हैं जो उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी कार्यवाही के बिना सुलभ और समय पर शिकायत निवारण प्रदान करता है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन तक पहुंच

यह हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए मुकदमेबाजी से पहले ही शिकायतों के निवारण हेतु एक सुलभ केंद्र के रूप में उभरी है । उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतें एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम) के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं। यह एक सर्वसुलभ, सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम केंद्रीय पोर्टल है। इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध हैं,

जिनमें व्हाट्सएप (8800001915), एसएमएस (8800001915), ईमेल (nch-ca[at]gov[dot]in), एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल ( www.consumerhelpline.gov.in ) और उमंग ऐप शामिल हैं जो उपभोक्ताओं को लचीलापन और सुविधा प्रदान करते हैं।

विभाग उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है और सभी उपभोक्ताओं से अपने अधिकारों की रक्षा करने और समय पर निवारण प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन का उपयोग करने का आग्रह करता है।

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प्रधानमंत्री मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर आधारित और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री के सहकारी संघवाद के दृष्टिकोण पर आधारित यह सम्मेलन एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करता है जहां केंद्र और राज्य भारत की मानव पूंजी क्षमता को अधिकतम करने तथा समावेशी भविष्य के लिए तैयार विकास को गति देने के लिए एक एकीकृत प्रारूप तैयार करने के लिए सहयोग करते हैं।

 तीन दिवसीय सम्मेलन में एक साझा विकास एजेंडा को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। यह सम्मेलन भारत की जनसंख्या को केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में देखने के बजाय नागरिकों को मानव पूंजी के रूप में स्थापित करने के लिए सहयोगात्मक कार्रवाई का आधार तैयार करेगा। इसके लिए शिक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, कौशल विकास पहलों को आगे बढ़ाने और देश भर में भविष्य के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन करने के लिए ठोस रणनीतियां विकसित की जाएंगी।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, नीति आयोग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर, पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ होगा, जिसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और रणनीतियों को शामिल किया जाएगा।

इस व्यापक विषय के अंतर्गत, पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष बल दिया जाएगा: प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां, जिन्हें विस्तृत चर्चा के लिए चुना गया है।

राज्यों में विनियमन में ढील; शासन में प्रौद्योगिकी: अवसर, जोखिम और शमन; स्मार्ट आपूर्ति श्रृंखला और बाजार संबंधों के लिए एग्रीस्टैक; एक राज्य, एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल; आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी तथा पोस्ट-एलडब्ल्यूई भविष्य की योजनाएं जैसे विषयों पर छह विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा, भोजन के दौरान विरासत और पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण तथा सभी के लिए आयुष-प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में ज्ञान का एकीकरण जैसे विषयों पर केंद्रित विचार-विमर्श किया जाएगा।

मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इसका प्रथम सम्मेलन जून 2022 में धर्मशाला में आयोजित किया गया था। इसके पश्चात जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में इन्हें नई दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किया गया।

इस सम्मेलन में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य उपस्थित रहेंगे।

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भारतीय रेलवे की अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता दोगुनी करने की योजना

यात्रा की मांग में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए, अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों की नई रेल गाड़ियों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक है। आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा। वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने के लिए निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे:

i. मौजूदा टर्मिनलों को अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं से सुसज्जित करना।

ii. शहरी क्षेत्र में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और निर्माण करना।

iii. मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव सुविधाएं।

iv. विभिन्न स्थानों पर रेल गाड़ियों की बढ़ती संख्या की व्यवस्था करने के लिए यातायात सुविधा कार्यों, सिग्नलिंग उन्नयन और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में वृद्धि करना।

टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनलों के आसपास के स्टेशनों को भी ध्यान में रखा जाएगा ताकि क्षमता में संतुलन बना रहे। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए, पुणे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और स्टेबलिंग लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खड़की और आलंदी स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।

उपरोक्त प्रक्रिया उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों प्रकार के यातायात के लिए की जाएगी, जिसमें दोनों खंडों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। 48 प्रमुख शहरों की एक व्यापक योजना विचाराधीन है (सूची संलग्न है)। इस योजना में निर्धारित समय सीमा के भीतर रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियोजित, प्रस्तावित या पहले से स्वीकृत कार्यों को शामिल किया जाएगा।

क्षमता को वर्ष 2030 तक दोगुना करने की योजना है, लेकिन यह आशा है कि अगले 5 वर्षों में क्षमता में क्रमिक वृद्धि की जाएगी ताकि क्षमता वृद्धि के लाभ तुरंत प्राप्त किए जा सकें। इससे आने वाले वर्षों में यातायात की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी। योजना में कार्यों को तीन श्रेणियों, अर्थात् तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाएँ विशिष्ट होंगी, जिनमें स्पष्ट समयसीमा और परिभाषित परिणाम होंगे। यद्यपि यह अभ्यास विशिष्ट स्टेशनों पर केंद्रित है, प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे को अपने-अपने मंडलों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाने के लिए कहा गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि न केवल टर्मिनल क्षमता में वृद्धि हो, बल्कि स्टेशनों और यार्डों पर अनुभागीय क्षमता और परिचालन संबंधी बाधाओं का भी प्रभावी ढंग से समाधान किया जाए।

केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं और अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। इस कदम से हमारे रेलवे नेटवर्क का उन्नयन होगा और राष्ट्रव्यापी संपर्क सुविधा में सुधार होगा।”

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सरकार ने कोयला खदान मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कोयला खदान नियंत्रण (संशोधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए – कोयला कंपनियों के बोर्ड को खदान, परत या परत के किसी भाग को खोलने की मंजूरी देने का अधिकार प्रदान किया

सरकार ने कोयला खदान मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कोयला खदान नियंत्रण (संशोधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए – कोयला कंपनियों के बोर्ड को खदान, परत या परत के किसी भाग को खोलने की मंजूरी देने का अधिकार प्रदान किया

सरकार ने कोलियरी कंट्रोल रूल्स, 2004 के तहत कोयला और लिग्नाइट खानों के परिचालन मंजूरी से सम्‍बंधित प्रावधानों में संशोधन किया है। कामकाज में आसानी लाने और कोयला क्षेत्र को अधिक व्यवसाय-अनुकूल बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह संशोधन प्रक्रियात्मक अनावश्यकताओं को दूर करता है और खानों के तेजी से परिचालन को सक्षम बनाता है, साथ ही निरंतर नियामक निरीक्षण सुनिश्चित करता है।

कोलियरी कंट्रोल रूल्स, 2004 के नियम (9) के पूर्व प्रावधानों के अनुसार, कोयला/लिग्नाइट खदान के मालिक को कोयला खदान खोलने के साथ-साथ अलग-अलग ज़मीन के नीचे कोयले की परत या परतों के हिस्सों को खोलने के लिए कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (सीसीओ) से पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक था। यदि कोई खदान 180 दिनों या उससे अधिक समय तक परिचालन में नहीं थी, तो कोयला/लिग्नाइट खदान शुरू करने के लिए भी सीसीओ की अनुमति आवश्यक थी।

प्रक्रियात्मक अनावश्यकताओं को दूर करने, कोयला उत्पादन में तेजी लाने और अनुमोदन प्रक्रिया में दक्षता में सुधार करने के लिए, कोलियरी कंट्रोल रूल्स, 2004 के नियम 9 में संशोधन के माध्यम से सीसीओ से पूर्व-खोलने की अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इस नियम में संशोधन करने वाली अधिसूचना 23.12.2025 को जारी की गई है और कोलियरी कंट्रोल (संशोधन) रूल्स, 2025 से सम्‍बंधित इस अधिसूचना का विवरण वेबलिंक https://coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/26-12-2025a-wn.pdf या https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/268804.pdf पर देखा जा सकता है।

संशोधित प्रावधानों के तहत, खदान/ज़मीन के नीचे कोयले की परत परिचालन की अनुमति देने का अधिकार अब सम्‍बंधित कोयला कंपनी के बोर्ड को सौंप दिया गया है। इस सुधार से अनुमोदन प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी और साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि अनुपालन की जिम्मेदारी कंपनी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले प्राधिकरण के पास ही बनी रहे। इस सुधार से खदान के परिचालन में लगने वाले समय में 2 महीने तक की कमी आने की उम्मीद है।

सुरक्षा उपाय के रूप में, यह प्रावधान किया गया है कि (क) सम्‍बंधित कोयला कंपनी का बोर्ड केंद्र/राज्य सरकार और वैधानिक निकायों से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद खदान/ ज़मीन के नीचे कोयले की परत के परिचालन की मंजूरी दे सकता है, (ख) कंपनी को खदान परिचालन के बारे में जानकारी सीसीओ को प्रस्तुत करनी होगी, और (ग) कंपनियों के अलावा अन्य संस्थाओं के लिए, ऐसा अनुमोदन सीसीओ के माध्यम से ही जारी रहेगा।

समग्र सुधार में नियामक निगरानी और वैधानिक सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए परिचालन सम्‍बंधी निर्णय लेने का अधिकार कंपनी बोर्डों को सौंपकर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है। इस संशोधन से अनुमोदन की समयसीमा में कमी आने और जवाबदेही को उच्चतम कॉर्पोरेट स्तर पर होने के साथ-साथ दक्षता में वृद्धि, कोयला उत्पादन में तेजी आएगी और देश के कोयला नियामक ढांचे में विश्वास मजबूत होगा।

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राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्राप्त करने वाले सभी बच्‍चों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता बच्चों ने अपने परिवारों, समुदायों और पूरे देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश भर के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्‍य से प्रदान किए गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये पुरस्कार देश के सभी बच्चों को प्रेरित करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व सिख धर्म के दसवें गुरु और सभी भारतीयों द्वारा श्रृद्धेय  गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चार पुत्रों ने सत्य और न्याय के समर्थन में संघर्ष करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि दो सबसे छोटे साहिबजादों की वीरता का सम्‍मान और आदर भारत और विदेश दोनों में किया जाता है। उन्होंने उन महान बाल नायकों को श्रद्धापूर्वक याद किया जिन्‍होंने सत्य और न्याय के लिए गर्व के साथ अपने प्राणों की आहुति दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश की महानता तब निश्चित होती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से परिपूर्ण होते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों ने वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रग्निका जैसे प्रतिभाशाली बच्‍चों के कारण ही भारत को विश्व पटल पर शतरंज की महाशक्ति माना जाता है। अजय राज और मोहम्मद सिदान पी, जिन्होंने अपनी वीरता और सूझबू    झ से दूसरों की जान बचाई, प्रशंसा के पात्र हैं। नौ वर्षीय बेटी व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय बहादुर बेटे कमलेश कुमार ने अपने साहस से दूसरों की जान बचाते हुए अपनी प्राण गंवा दिए। दस वर्षीय श्रवण सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध से जुड़े जोखिमों के बावजूद अपने घर के पास सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई। वहीं, दिव्यांग बेटी शिवानी होसुरू उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए खेल जगत में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। वैभव सूर्यवंशी ने अत्‍यंत प्रतिस्पर्धी और प्रतिभा-समृद्ध क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है और कई रिकॉर्ड स्‍थापित किए। श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे आगे भी अच्छे कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।

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भारतीय रेलवे ने 2025 में त्योहारों और यात्राओं के दौरान सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 43,000 से अधिक विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित कीं

भारतीय रेलवे ने प्रमुख धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के पीक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन सेवाएँ संचालित कर यात्रियों की सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए। ये पहल बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने और देशभर में निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराने के प्रति रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया, जो बेहतर योजना और यात्रियों की सुविधा पर पहले से अधिक मजबूत फोकस को रेखांकित करता है।

वर्ष 2025 के दौरान भारतीय रेलवे ने महा कुंभ के लिए अपने सबसे बड़े विशेष ट्रेन अभियानों में से एक का संचालन किया। 13 जनवरी से 28 फरवरी 2025 के बीच तीर्थयात्रियों की अत्यधिक संख्या की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 17,340 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं। इसी तरह, होली 2025 के अवसर पर 1 मार्च से 22 मार्च 2025 के बीच 1,144 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं, जो होली 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थीं। इससे यात्रियों को बेहतर उपलब्धता मिली और त्योहार के दौरान यात्रा अधिक सहज और सुव्यवस्थित रही।

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समर ट्रैवल सीज़न, 2025 यानि गर्मी की छुट्टियों के दौरान, जो 1 अप्रैल से 30 जून तक रहा, यात्रियों की बढ़ी हुई आवाजाही को ध्यान में रखते हुए 12,417 समर स्पेशल ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया, जिससे छुट्टियों के पीक महीनों में भी उच्च स्तर की सेवा बनाए रखी जा सकी। इसके अलावा, छठ पूजा 2025 के लिए विशेष इंतज़ामों को और मज़बूत किया गया। 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 के बीच 12,383 विशेष ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

साल 2025 में किए गए ये विस्तारित इंतज़ाम 2024 में तैयार किए गए मज़बूत परिचालन आधार पर आधारित थे। 30 जनवरी से 11 मार्च 2024 के बीच संचालित आस्था स्पेशल सेवाओं के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 326 विशेष सर्कुलर ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं थी। इसी तरह, होली 2024 के अवसर पर 12 मार्च से 2 अप्रैल 2024 के बीच त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने 604 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया था।

गर्मियों की छुट्टियों 2024 के दौरान 12,919 समर स्पेशल ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं थी। वहीं, छठ पूजा 2024 के लिए 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2024 के बीच 7,990 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया था।

वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा, प्रभावी भीड़ प्रबंधन और अधिक मांग वाले समय में विश्वसनीय तथा सुचारु यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति लगातार प्रतिबद्ध है।

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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने उपभोक्ता सुरक्षा और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने हेतु अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का नया मानक जारी किया

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का भारतीय मानक आईएस 19412:2025 – अगरबत्ती – विनिर्देशन जारी किया। यह मानक राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी किया गया।

नए अधिसूचित मानक में अगरबत्तियों में कुछ कीटनाशक रसायनों और कृत्रिम सुगंधित पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है , जो मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए, आईएस 19412:2025 में अगरबत्तियों में उपयोग के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की सूची दी गई है। इसमें एलेथ्रिन, परमेथ्रिन, साइपरमेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन और फिप्रोनिल जैसे कुछ कीटनाशक रसायन , साथ ही बेंजाइल साइनाइड, एथिल एक्रिलेट और डाइफेनिलामाइन जैसे कृत्रिम सुगंधित पदार्थ शामिल हैं। इनमें से कई पदार्थ मानव स्वास्थ्य, घर के अंदर की वायु गुणवत्ता और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और नियामक अनुपालन साथ ही वैश्विक स्तर पर कुछ सुगंधित यौगिकों और रसायनों पर लगे प्रतिबंधों को देखते हुए—अगरबत्तियों के लिए भारतीय मानक की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह मानक अगरबत्ती को मशीन से बनी, हाथ से बनी और पारंपरिक मसाला अगरबत्तियों में वर्गीकृत करता है, और कच्चे माल, जलने की गुणवत्ता, सुगंध प्रदर्शन और रासायनिक मापदंडों के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पाद और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

इस मानक के अनुरूप उत्पाद बीआईएस मानक चिह्न प्राप्त करने के पात्र होंगे , जिससे उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे। आईएस 19412:2025 की अधिसूचना से उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ने, नैतिक और टिकाऊ विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने, पारंपरिक आजीविका की रक्षा होने और भारतीय अगरबत्ती उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

यह मानक बीआईएस की सुगंध एवं स्वाद अनुभागीय समिति (पीसीडी 18) द्वारा हितधारक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीआईएमएपी), सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), सीएसआईआर-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआर), कन्नौज स्थित सुगंध एवं स्वाद विकास केंद्र (एफएफडीसी) और अखिल भारतीय अगरबत्ती निर्माता संघ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस मानक को तैयार करने में योगदान दिया है।

भारत विश्व में अगरबत्ती का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस उद्योग का वार्षिक अनुमानित मूल्य लगभग 8,000 करोड़ रुपये है और लगभग 1,200 करोड़ रुपये का निर्यात 150 से अधिक देशों को किया जाता है। यह क्षेत्र कारीगरों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और सूक्ष्म उद्यमियों के एक बड़े समूह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

अगरबत्ती भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग है और घरों, पूजा स्थलों, ध्यान केंद्रों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में इसका उपयोग किया जाता है। योग, ध्यान, अरोमाथेरेपी और समग्र स्वास्थ्य में बढ़ती वैश्विक रुचि के साथ, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अगरबत्ती उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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जलवायु परिवर्तन: पिघलते हिमनद और डूबता भविष्य

धरती का तापमान धीरे-धीरे नहीं, बल्कि खतरनाक गति से बढ़ रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बीसवीं सदी में भूमंडलीय औसत तापमान में लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। यदि तापमान वृद्धि की यही प्रवृत्ति जारी रही, तो 21वीं सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में लगभग 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह परिवर्तन केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानव जीवन, प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन का सबसे गंभीर प्रभाव हिमालयी हिमनदों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रही, तो सन् 2040 तक हिमाचल प्रदेश की अधिकांश हिमनदियाँ पिघलकर समाप्त हो सकती हैं। गंगोत्री हिमनद, जो गंगा नदी का प्रमुख स्रोत है, प्रतिवर्ष लगभग 23 मीटर की दर से संकुचित हो रही है। इस हिमनद का तीव्र क्षरण भविष्य में गंगा नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित होगा।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल हिमालय तक सीमित नहीं है। ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघलकर नदियों के माध्यम से समुद्र तक पहुँच रही है, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री जलस्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, 2100 तक समुद्र का जलस्तर 9 से 88 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। यह वृद्धि कई तटीय क्षेत्रों और द्वीपों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।

समुद्री जलस्तर में हो रही वृद्धि के कारण अनेक द्वीपीय और तटीय क्षेत्र जलमग्न होने के खतरे का सामना कर रहे हैं। मॉरीशस, मालदीव, अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप समूह इस संकट के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यदि समय रहते प्रभावी नीतियाँ और पर्यावरणीय संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए, तो इन क्षेत्रों की भौगोलिक पहचान और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, सतत विकास, और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की तत्काल आवश्यकता है। जब तक मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित नहीं किया जाता, तब तक पिघलते हिमनद और बढ़ता समुद्री जलस्तर हमारे भविष्य के लिए निरंतर खतरा बने रहेंगे। ~रश्मि गोयल

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कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने पीएम-सेतु योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने देश में कार्यबल को आधुनिक बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और प्रशिक्षण महानिदेशालय के माध्यम से उद्योग जगत को पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री-औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन द्वारा कौशल एवं रोजगार क्षमता उन्नयन कार्यक्रम) योजना में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यह पहल व्यावसायिक प्रशिक्षण के तौर-तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव है, जो सरकार संचालित नीति से विस्तारित होकर एक ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर है, जिसमें प्रशिक्षण के प्रबंधन और क्रियान्वयन में उद्योग अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

मंत्रालय ने राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए मुख्य उद्योग साझेदारों -एआईपी की तलाश हेतु रुचि की अभिव्यक्ति- ईओआई जारी की है। इसके साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने भी चुने हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत बनाने में सहयोग के लिए साझेदारों की पहचान हेतु ईओआई जारी करना आरंभ कर दिया है। इस सिलसिले में अब तक कर्नाटक, गुजरात, असम और चंडीगढ़ ने ईओआई जारी की है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2025 में प्रधानमंत्री-सेतु योजना को 60 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ स्वीकृति दी थी। प्रधानमंत्री ने आधुनिक रोजगार बाजार के अनुरूप प्रशिक्षण और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों-आईटीआई को अधिक प्रासंगिक बनाने और उनकी मौजूदा कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 4 अक्टूबर, 2025 को इस योजना का शुभारंभ किया था। सरकार की योजना हब-एंड-स्पोक मॉडल का उपयोग कर एक हजार सरकारी आईटीआई को उन्नत बनाना है। इस केन्द्रीकृत मॉडल में 200 मुख्य (हब) आईटीआई लगभग चार स्पोक आईटीआई को अत्याधुनिक मशीनरी और उपकरण सहायता प्रदान करेंगे। इसके अलावा इस योजना के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पीएम-एसईटीयू की विशेषता इसका उद्योग-नेतृत्व में संचालन है। प्रत्येक उन्नत आईटीआई का प्रबंधन एक विशेष प्रयोजन वाहन-एसपीवी द्वारा किया जाएगा। इसमें उद्योग जगत की 51 प्रतिशत और सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस सह-निवेश मॉडल में सरकार की 83 प्रतिशत तक सह-वित्तपोषण से कंपनियों पर व्यापक उन्नयन का दायित्व होगा। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है, जिससे उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिकी, गतिशीलता और प्रचालन क्षेत्रों में भागीदारी के द्वार खुल गए हैं।

प्रमुख उद्योग साझेदार के तौर पर कंपनियां रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार करने और उन्नत प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कंपनियां उद्योग अनुभवों के आधार पर प्रशिक्षकों के कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी और संस्थान परिसर में नवाचार केंद्र भी स्थापित करेंगी। इससे उद्योगों को व्यवसाय में कुशल श्रमिकों और प्रशिक्षुओं की विश्वसनीय और मापनीय प्रतिभा प्राप्त होगी, जो उनके व्यवसाय प्रगति रणनीति के प्रतिभावर्धन से सीधे तौर पर जुड़ेंगे। इसके साथ ही उद्योगों को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व-सीएसआर संबंधी लाभ भी मिलेंगे। इस संरचनात्मक सुधार का उद्देश्य भारत के कौशल विकास तंत्र को उन्नत बनाकर देश की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करना है।

आवेदन करने के लिए लिंक: https://linktr.ee/Skill_India

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