महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) विकसित की है ताकि घर ले जाने वाले राशन वितरण की अंतिम चरण तक निगरानी की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल एप्लिकेशन में पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही मिले। इसके अलावा, आधार आधारित ट्रैकिंग से लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हुई है, डेटा लीक को रोका जा सका है और फर्जी प्रविष्टियां समाप्त हुई हैं।
16 मार्च, 2026 तक पोषण भी पढ़ाई भी (पीबीपीबी) कार्यक्रम के पहले चरण में 41,648 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर (एसएलएमटी) और 10,40,590 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) को प्रशिक्षित किया जा चुका है। एडब्ल्यूडब्ल्यू को प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) की शिक्षण विधियों और पोषण सेवाओं के वितरण में प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण ईसीसी प्रदान करने में एडब्ल्यूडब्ल्यू की क्षमता का निर्माण करना है।
‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन को आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की सभी गतिविधियों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित शासन माध्यम के रूप में शुरू किया गया है। यह एप्लिकेशन निर्धारित संकेतकों पर आधारित है। इसने आंगनवाड़ी सेवाओं जैसे कि आंगनवाड़ी केंद्रों का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्राथमिक एवं बाल विकास (ईसीसीई) गतिविधियां, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, पूरक पोषण का प्रावधान आदि के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रह को सुगम बनाया है। पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का उपयोग 0-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में बौनापन, कुपोषण, अल्प-वजन और अधिक-वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए किया जा रहा है। इन संकेतकों पर राज्यवार जानकारी पोषण ट्रैकर के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध है: https://www.poshantracker.in/statistics।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2022 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए व्यापक मिशन शक्ति के सामर्थ्य वर्टिकल के तहत पालना योजना को लागू किया है।
आंगनवाड़ी केंद्र विश्व के सबसे बड़े शिशु देखभाल संस्थान हैं जो बच्चों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित हैं और देखभाल सुविधाओं की व्यापर पहुंच सुनिश्चित करते हैं। अपनी तरह की अभिनव पहल में मंत्रालय ने आंगनवाड़ी सह शिशुगृह (एडब्ल्यूसीसी) के माध्यम से शिशु देखभाल सेवाओं का विस्तार किया है। आंगनवाड़ी सह शिशुगृह पहल का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में ‘महिला कार्यबल भागीदारी’ बढ़ाना है। इस योजना का उद्देश्य 6 महीने से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिशुगृह सुविधा, पोषण संबंधी सहायता, स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास, वृद्धि की निगरानी और टीकाकरण प्रदान करना है। पालना योजना के अंतर्गत सभी माताओं को उनकी रोजगार स्थिति की परवाह किए बिना शिशुगृह सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
पालना योजना केंद्र प्रायोजित योजना है। कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) की बैठकें राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ प्रतिवर्ष आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आंगनवाड़ी-सह-क्रेच खोलने के प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन भी योजना के कार्यान्वयन के लिए अपना निर्धारित हिस्सा योगदान करते हैं।
15वें वित्त चक्र के दौरान अर्थात वित्त वर्ष 2025-26 तक, पालना योजना के तहत कुल 17,000 आंगनवाड़ी-सह-क्रेच (एडब्ल्यूसीसी) स्थापित किए जाने हैं। अब तक, देश भर में 3,130 एडब्ल्यूसीसी कार्यरत हैं।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
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