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मिशन पोषण 2.0 के तहत, 15वें वित्त आयोग चक्र की अवधि के दौरान, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में सुदृढ़ किया जा रहा है

 पोषण 2.0 के तहत, वित्त मंत्रालय के 15वें चक्र के दौरान, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को (प्रति वर्ष 40,000 आंगनवाड़ी केंद्रों की दर से) सक्षममिशन आंगनवाड़ी केंद्रों में रूपांतरित किया जा रहा है ताकि बेहतर पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रदान की जा सके। सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों को पारंपरिक आंगनवाड़ी केंद्रों की तुलना में बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान किया गया है, जिसमें एलईडी स्क्रीन, जल शोधन प्रणाली, पोषण वाटिका, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा सामग्री (ईसीसीई) और बाला पेंटिंग शामिल हैं। 20.03.2026 तक, देश भर में कुल 1,04,403 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में उन्नत किया जा चुका है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन में चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) विकसित की है ताकि घर ले जाने वाले राशन वितरण की अंतिम चरण तक निगरानी की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल एप्लिकेशन में पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही मिले। इसके अलावा, आधार आधारित ट्रैकिंग से लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित हुई है, डेटा लीक को रोका जा सका है और फर्जी प्रविष्टियां समाप्त हुई हैं।

16 मार्च, 2026 तक पोषण भी पढ़ाई भी (पीबीपीबी) कार्यक्रम के पहले चरण में 41,648 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर (एसएलएमटी) और 10,40,590 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) को प्रशिक्षित किया जा चुका है। एडब्ल्यूडब्ल्यू को प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) की शिक्षण विधियों और पोषण सेवाओं के वितरण में प्रशिक्षित किया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण ईसीसी प्रदान करने में एडब्ल्यूडब्ल्यू की क्षमता का निर्माण करना है।

‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल एप्लिकेशन को आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की सभी गतिविधियों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित शासन माध्यम के रूप में शुरू किया गया है। यह एप्लिकेशन निर्धारित संकेतकों पर आधारित है। इसने आंगनवाड़ी सेवाओं जैसे कि आंगनवाड़ी केंद्रों का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्राथमिक एवं बाल विकास (ईसीसीई) गतिविधियां, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, ​​पूरक पोषण का प्रावधान आदि के लिए लगभग वास्तविक समय में डेटा संग्रह को सुगम बनाया है। पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का उपयोग 0-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में बौनापन, कुपोषण, अल्प-वजन और अधिक-वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए किया जा रहा है। इन संकेतकों पर राज्यवार जानकारी पोषण ट्रैकर के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध है: https://www.poshantracker.in/statistics

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 1 अप्रैल, 2022 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए व्यापक मिशन शक्ति के सामर्थ्य वर्टिकल के तहत पालना योजना को लागू किया है।

आंगनवाड़ी केंद्र विश्व के सबसे बड़े शिशु देखभाल संस्थान हैं जो बच्चों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित हैं और देखभाल सुविधाओं की व्यापर पहुंच सुनिश्चित करते हैं। अपनी तरह की अभिनव पहल में मंत्रालय ने आंगनवाड़ी सह शिशुगृह (एडब्ल्यूसीसी) के माध्यम से शिशु देखभाल सेवाओं का विस्तार किया है। आंगनवाड़ी सह शिशुगृह पहल का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में ‘महिला कार्यबल भागीदारी’ बढ़ाना है। इस योजना का उद्देश्य 6 महीने से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिशुगृह सुविधा, पोषण संबंधी सहायता, स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास, वृद्धि की निगरानी और टीकाकरण प्रदान करना है। पालना योजना के अंतर्गत सभी माताओं को उनकी रोजगार स्थिति की परवाह किए बिना शिशुगृह सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

पालना योजना केंद्र प्रायोजित योजना है। कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) की बैठकें राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के साथ प्रतिवर्ष आयोजित की जाती हैं, जिनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आंगनवाड़ी-सह-क्रेच खोलने के प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन भी योजना के कार्यान्वयन के लिए अपना निर्धारित हिस्सा योगदान करते हैं।

15वें वित्त चक्र के दौरान अर्थात वित्त वर्ष 2025-26 तक, पालना योजना के तहत कुल 17,000 आंगनवाड़ी-सह-क्रेच (एडब्ल्यूसीसी) स्थापित किए जाने हैं। अब तक, देश भर में 3,130 एडब्ल्यूसीसी कार्यरत हैं।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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मंत्रिमंडल ने 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना – संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार के बजटीय सहयोग से 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक दस वर्षों की अवधि के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना – संशोधित उड़ान के शुभारंभ और कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है।

प्रभाव :

  • कम सेवा प्राप्त और सेवा से वंचित क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार।
  • दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा।
  • आम नागरिकों के लिए सस्ती हवाई यात्रा का समर्थन।
  • दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन कार्रवाई और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार।
  • क्षेत्रीय हवाई अड्डों और एयरलाइन संचालकों के लिए अधिक व्यवहार्यता और स्थिरता।
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा।
  • विकसित भारत 2047 लक्ष्य की ओर प्रगति।

इस योजना के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:

(ए) हवाई अड्डों का विकास (पूंजीगत व्यय)

संशोधित उड़ान योजना के तहत, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए मौजूदा अनुपलब्ध हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों को विकसित करने का प्रस्ताव है, जो इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्तार और भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विमानन इकोसिस्‍टम में बदलने के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है, जिसके लिए अगले आठ वर्षों में कुल 12,159 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।

(बी) हवाई अड्डों का संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम)

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के अंतर्गत आने वाले हवाई अड्डों के निरंतर संचालन एवं रखरखाव की उच्च लागत और सीमित राजस्व स्रोतों को देखते हुए, योजना के तहत तीन वर्षों के लिए प्रति हवाई अड्डे 3.06 करोड़ रुपये प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट/वाटर एयरोड्रॉम 0.90 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की अधिकतम सीमा के साथ संचालन एवं रखरखाव संबंधी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिसका अनुमान लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए 2,577 करोड़ रुपये है।

(सी) आधुनिक हेलीपैडों का विकास

पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, योजना के तहत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसकी कुल आवश्यकता अगले आठ वर्षों में (मुद्रास्फीति-समायोजित) 3,661 करोड़ रुपये होगी। यह योजना प्राथमिकता वाले और विकासशील जिलों पर केंद्रित है ताकि अंतिम-मील कनेक्टिविटी और आपातकालीन कार्रवाई में सुधार किया जा सके।

(डी) व्यवहार्यता में कमी के समाधान हेतु निधि (वीजीएफ)

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत, एयरलाइन संचालकों को आवंटित मार्गों पर परिचालन के लिए विजिबिलिटी फंड (वीजीएफ) के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। दीर्घकालीन बाजार के बदलाव की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, एयरलाइन संचालकों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये की विजिबिलिटी फंड सहायता प्रस्तावित की गई है।

(ई) आत्मनिर्भर भारत विमान अधिग्रहण

दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में संचालन के लिए आवश्यक छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों और हेलीकॉप्टरों की कमी को दूर करने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए, इस योजना में पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डोर्नियर विमान खरीदने का भी प्रस्ताव है।

पृष्ठभूमि:

मूल उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में हवाई यात्रा को किफायती बनाने और टियर-2 और टियर-3 शहरों से कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। नौ वर्षों के कार्यान्वयन के दौरान:

  • 28 फरवरी, 2026 तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और वाटर एयरोड्रॉम पर 663 मार्गों को चालू कर दिया गया है।
  • अब तक 341 लाख से अधिक उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं, जिनमें 162.47 लाख यात्रियों ने यात्रा की है।
  • दूरस्थ, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में संपर्क स्थापित हो गया है, जिससे पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा मिला है।
  • इस योजना ने क्षेत्रीय एयरलाइनों और विविध फ्लीट के संचालन में वृद्धि पर जोर दिया है, जिससे संशोधित उड़ान योजना के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।

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आरबीआई, आईआरडीएआई और सेबी ने नागरिकों को बिना दावे वाली जमा राशि वापस दिलाने में मदद करने के लिए उपाय बढ़ाए

वित्तीय क्षेत्र के नियामक निकाय, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचित किया कि 28.02.2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के माध्यम से आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) कोष में हस्तांतरित की गई गैर प्रतिबंधित राशि ₹60,518 करोड़ (31.1.2026 तक) है। इसके साथ ही, बीमाकर्ताओं के पास बकाया गैर प्रतिबंधित बीमा राशि ₹8,973.89 करोड़ (28.2.2026 तक) है। साथ ही, सेबी के नियमों के अंतर्गत म्यूचुअल फंड में गैर प्रतिबंधित राशि का मूल्य ₹3,749.34 करोड़ (28.2.2026 तक) है।

सही दावेदारों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने, बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों के मौजूदा भंडार के साथ-साथ उसमें होने वाली नई बढ़ोतरी को कम करने और नागरिकों के लिए दावा प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए, वित्तीय क्षेत्र नियामकों की ओर से कई उपाय किए गए हैं, जिनमें अन्य बिंदुओं के साथ निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. आरबीआई ने बैंकों के मृत ग्राहकों से संबंधित दावों के निपटान के लिए व्यापक निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें अब आरबीआई के उत्तरदायी व्यापार संचालन निर्देश, 2025 के अंतर्गत समेकित किया गया है। इसके साथ ही, 1.10.2025 से एक प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत दावों के सफल निपटान पर बिना दावे वाली जमा राशि का 5% से 7.5% (एक सीमा के अधीन) का भुगतान किया जाएगा। बैंकों को जमाकर्ताओं, उनके नामित लोगों या कानूनी वारिसों का पता लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने, बिना दावे वाली जमाओं की सूची प्रकाशित करने और जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी गई है। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत बैंक खातों में एकाधिक नामांकन की सुविधा दी गई है, जिसमें चार तक क्रमिक और एक साथ नामांकन शामिल हैं। इसके साथ ही, भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने बैंकों के एक समर्पित पोर्टल के जरिए लावारिस जमाओं के निपटान के लिए एक सामान्य आवेदन पत्र और मानक कार्यान्वयन प्रक्रिया (एसओपी) शुरू की है।
  2. आईआरडीएआई ने सूचित किया कि प्रस्तावक और नामांकित व्यक्ति का विवरण एकत्र करना अनिवार्य है और इसे प्रस्ताव चरण में ही इकट्ठा करना आवश्यक है। बीमाकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने ग्राहकों से नियमित रूप से संपर्क करने के लिए सभी संभव उपाय करें, जिसमें दावों की देय तिथि के बारे में अग्रिम सूचना भेजना और बकाया राशि के सही प्राप्तकर्ता का पता लगाने के प्रयासों को बेहतर करना और उसका कुशल वितरण सुनिश्चित करना शामिल है। इसके साथ ही, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), आम तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और जागरूकता वीडियो आईआरडीएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
  3. सेबी ने हस्तांतरण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें नामांकन को प्रोत्साहन देना, ₹5 लाख तक के दावों के लिए सरलीकृत दस्तावेजीकरण और कई परिस्थितियों के लिए आवश्यक प्रपत्रों और दस्तावेजों सहित विस्तृत दिशानिर्देशों की उपलब्धता शामिल है। ये दिशानिर्देश एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, 27.06.2024 को जारी सेबी के म्यूचुअल फंड संबंधी मास्टर सर्कुलर के अनुसार, एएमसी को नामांकित व्यक्ति/ संयुक्त धारक के दावों के लिए तस्वीर-आधारित प्रोसेसिंग लागू करनी होगी, जिससे प्रक्रिया में लगने वाले समय में सुधार हो सके और निवेशकों को हस्तांतरण प्रक्रिया में सहायता के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क और वेबपेज तैयार करना होगा।

इसके साथ ही, नागरिकों को उनकी बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों का पता लगाने और उन पर दावा करने में सरलीकृत तरीके से सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, वित्तीय सेवाएं विभाग ने आरबीआई, सेबी और आईआरडीएआई की सम्मिलन से अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” शीर्षक से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। 748 जिलों में विशेष शिविर आयोजित किए गए और 28.2.2026 तक, 22.95 लाख दावों से संबंधित ₹5,777 करोड़ की बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियां उनके सही मालिकों को वापस कर दी गई हैं।

डीईए फंड योजना, 2014 के अनुसार, बैंकों को उन खातों में जमा राशि को डीईए फंड में स्थानांतरित करना आवश्यक है, जिन पर 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इसके साथ ही, जमाकर्ताओं को देय लावारिस जमा राशि की कुल राशि, जिसे डीईए फंड में स्थानांतरित किया गया है, संबंधित बैंकों की आकस्मिक देयता (असंतुलन पत्रक मद के रूप में) का हिस्सा है।

आरबीई ने केंद्रीकृत वेब पोर्टल उद्गम (अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स- गेटवे टू एक्सेस इन्फॉर्मेशन) तैयार किया है, जो पंजीकृत उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई बैंकों में बिना दावे वाले जमा/ खातों की खोज करने की सुविधा प्रदान करता है। आरबीआई ने सूचित किया कि 1.3.2026 तक उदगम पोर्टल पर 18.86 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। आईआरडीएआई का बीमा भरोसा पोर्टल और सेबी का मित्रा प्लेटफॉर्म क्रमशः बिना दावे वाली बीमा राशि और म्यूचुअल फंड की राशि का पता लगाने के लिए तैयार किए गए हैं। इसके अलावा, आरबीआई ने एक एकीकृत वेब पोर्टल तैयार करने के लिए एक अंतर-नियामक कार्य समूह का गठन किया है, जिससे नागरिक अपनी बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों को खोज सकें और उन पर दावा कर सकें।

यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में दी।

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भारत ने फरवरी 2026 तक 8,000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन क्षमता चालू की

भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन-एनजीएचएम को लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8000 टन प्रति वर्ष की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता चालू हो चुकी है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि का विवरण नीचे दिया गया है:

निधि आवंटन (करोड़ रुपये में)

(संशोधित अनुमान)

उपयोग

(करोड़ रुपये में)

वित्तीय वर्ष 2023-24 100 0.11
वित्तीय वर्ष 2024-25 300 46.26
वित्तीय वर्ष 2025-26

( 19 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार )

300 203.75

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से खोजी गई हरित हाइड्रोजन की लागत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरी को आपूर्ति के लिए  397 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रिफाइनरियों को आपूर्ति के लिए 387 रुपये प्रति किलोग्राम (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) है।

विश्व बैंक समूह की “हाइड्रोजन उत्पादन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर” शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की कुल लागत का लगभग 50 से 70 प्रतिशत, यानी लगभग 235 रुपये प्रति किलोग्राम, हिस्सा है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।

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कश्मीरी प्रवासी परिवारों के लिए कल्याण और आवास सहायता उपाय

सुरक्षा-संबंधी व्यय (एसआरई) ढांचे और प्रधानमंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के अंतर्गत कश्मीरी प्रवासी परिवारों को वर्तमान में प्रदान किए जा रहे कल्याणकारी उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  1. राहत श्रेणी के अंतर्गत पंजीकृत प्रवासी परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 3250 रुपये की नकद सहायता प्रदान की जा रही है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार प्रति माह 13 हजार रुपये है।
  2. कश्मीरी प्रवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 9 किलो चावल, प्रति व्यक्ति प्रति माह 2 किलो आटा और प्रति परिवार प्रति माह 1 किलो चीनी के हिसाब से मुफ्त राशन दिया जा रहा है। जम्मू से आए प्रवासियों के मामले में, प्रति व्यक्ति प्रति माह 9 किलो आटा, प्रति व्यक्ति प्रति माह 2 किलो चावल और प्रति परिवार प्रति माह 1 किलो चीनी के हिसाब से राशन दिया जा रहा है।
  3. जम्मू में विभिन्न शिविरों में कश्मीरी प्रवासी परिवारों के लिए बने प्रवासी आवासीय शिविरों/फ्लैटों का रखरखाव और देखभाल।
  4. कश्मीरी प्रवासी युवाओं के लिए 6 हजार पद आरक्षित किए गए हैं। उक्त पदों के लिए अब तक 5,896 (98.26 प्रतिशत) उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।
  5. अन्य पहलें:
  • कश्मीरी प्रवासियों की सुविधा के लिए, पंजीकरण और ऑनलाइन सेवाएं शुरू की गई हैं, जिनमें अधिवास प्रमाण पत्र, पिछड़ा क्षेत्र निवासी (आरबीए) प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से कमजोर समूह के रूप में प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और प्रवासी प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है।
  • आधार सीडिंग – प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण – राहत (नकद सहायता) के पारदर्शी और कुशल हस्तांतरण के लिए, जिसने वास्तविक लाभार्थियों को बिना किसी देरी के वास्तविक समय के आधार पर कुशलतापूर्वक राहत हस्तांतरण को सक्षम बनाया है।
  • देश भर में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम और शिकायत निवारण शिविर शुरू किए गए हैं।
  • सांस्कृतिक, भाषाई, स्वास्थ्य और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों/शिविरों का आयोजन किया।
  • भारत सरकार द्वारा प्रवासी राशन कार्डों को स्मार्ट सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पोर्टल के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) डेटाबेस में एकीकृत करना।

सरकार ने कश्मीर घाटी में विभिन्न विभागों में कार्यरत या कार्यरत होने वाले कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए घाटी के 20 अलग-अलग स्थानों पर 6 हजार अस्थायी आवासों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 6 हजार अस्थायी आवास इकाइयों में से 4112 इकाइयों का निर्माण हो चुका है और 3257 इकाइयों का आवंटन किया जा चुका है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा, आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक ऐसा मील का पत्थर हासिल किया है, जिसकी नींव सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर टिकी है।

X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट्स में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सेवा, कड़ी मेहनत और अटूट समर्पण पर आधारित एक मील का पत्थर हासिल करते हुए आज, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए, भारत में किसी भी सरकार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रमुख बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 8,931 दिन—पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और अब प्रधानमंत्री के रूप में—’राष्ट्र-प्रथम’ शासन, कार्यों में ईमानदारी और प्रत्येक नागरिक की अथक सेवा के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाते हैं। यह एक ऐसी दुर्लभ विरासत है, जो अभूतपूर्व विश्वास और बेजोड़ सेवा पर निर्मित है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की दशकों की सेवा ने अपने आप में एक युग का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि चाहे गरीबों को उनके अधिकार दिलाना हो, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करना हो, या वैश्विक मंचों पर राष्ट्र का गौरव बढ़ाना हो—मोदी युग ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। श्री शाह ने कहा कि ‘नए भारत’ को गढ़ने के लिए जीवन भर प्रयास करने की ज़रूरत थी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वह कर दिखाया। उन्होंने कहा कि 24 वर्षों से भी अधिक समय तक बिना अवकाश लिए राष्ट्र और लोगों की सेवा करना, प्रधानमंत्री मोदी जी के अटूट समर्पण का ही एक प्रमाण है। श्री शाह ने कहा कि इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी जी को लोगों से अभूतपूर्व स्नेह प्राप्त हुआ—तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति लोगों का विश्वास, स्नेह और समर्थन, हर दिन बढ़ रहा है।

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं और मतदाता सहायता प्रदान की जाएगी

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।
  1. निर्वाचन आयोग ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी किए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि 2,18,807 मतदान केंद्रों में से प्रत्येक मतदान के दिन सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और मतदाता सहायता से सुसज्जित हो।
  2. एएमएफ में पीने का पानी, छायादार प्रतीक्षा क्षेत्र, पानी की सुविधा वाला शौचालय, पर्याप्त रोशनी, दिव्यांग मतदाताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मानक मतदान कक्ष और उचित संकेत शामिल हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे कतार में नियमित अंतराल पर बेंच लगाएं ताकि मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते समय बैठ सकें।
  1. मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए, सभी मतदान केंद्रों पर चार एकसमान और मानकीकृत मतदाता सुविधा पोस्टर (वीएफपी) प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे, जिनमें मतदान केंद्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची, क्या करें और क्या न करें, स्वीकृत पहचान दस्तावेजों की सूची और मतदान प्रक्रिया की जानकारी होगी।
  1. प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाता सहायता बूथ (वीएबी) स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ)/कर्मचारियों की एक टीम होगी जो मतदाताओं को संबंधित बूथ की मतदाता सूची में अपना मतदान बूथ नंबर और क्रम संख्या खोजने में सहायता करेगी । वीएबी पर प्रमुख चिह्न लगे होंगे और मतदान परिसर में पहुंचते ही मतदाताओं को आसानी से दिखाई देंगे।
  1. मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कई कदमों में से एक के तहत, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाताओं के लिए मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मतदाता स्टेशन में प्रवेश करने से पहले अपना फोन (बंद करके) एक नामित स्वयंसेवक को सौंप सकते हैं और मतदान के बाद उसे वापस ले सकते हैं।
  2. आयोग दोहराता है कि मतदान केंद्रों पर ज़रूरी सुविधाएं और संबंधित सुगम्यता उपाय उपलब्ध कराना अनिवार्य है और सभी मतदान केंद्रों पर इनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा । सभी फील्ड कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान की तारीखों से काफी पहले आवश्यक कार्य पूरे कर लें ताकि सभी मतदाताओं को सुचारू और सुखद मतदान का अनुभव मिल सके।

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राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर शैक्षिक जागरूकता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस उत्साहपूर्ण जनभागीदारी के साथ मनाया, जिसमें लगभग 18,000 आगंतुकों की उपस्थिति दर्ज की गई तथा लगभग 1,500 लोगों ने संरक्षण विषयक गतिविधियों में भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राणी उद्यान के एक निर्देशित शैक्षिक भ्रमण के साथ हुई, जिसमें भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न पशु बाड़ों तथा उनके पारिस्थितिक महत्व के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।

इस पहल का उद्देश्य वन पारितंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वन्यजीव संरक्षण की भूमिका को रेखांकित करना था। भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के 60 विद्यार्थियों ने प्राणी उद्यान भ्रमण के उपरांत एक रोचक प्रस्तुति सत्र में भाग लिया। इस सत्र में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा तथा जैव विविधता के संरक्षण में प्राणी उद्यानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम का समापन प्राणी उद्यान के निदेशक के साथ एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने चल रहे संरक्षण प्रयासों तथा राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के कार्यप्रणाली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

इस अवसर को चिह्नित करते हुए प्राणी उद्यान परिसर में वृक्षारोपण गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। बीट संख्या 11 के नवीनीकृत पक्षी बाड़े में बीट कीपर तथा प्राणी उद्यान के कर्मचारियों द्वारा विभिन्न प्रजातियों के कुल 58 पौधे लगाए गए, जिससे आवास समृद्धि तथा हरित आवरण को सुदृढ़ करने में योगदान मिला।

ईद-उल-फ़ित्र के उत्सव के अवसर पर प्राणी उद्यान में लगभग 18,000 आगंतुकों की उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं जीवंत रहा। लगभग 1,500 आगंतुकों ने विशेष रूप से आयोजित चित्रांकन गतिविधि में सक्रिय भागीदारी की, जिसमें उन्होंने वन संरक्षण तथा जैव विविधता पर अपने विचारों एवं अभिव्यक्तियों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।

इस आयोजन ने आगंतुकों एवं विद्यार्थियों के बीच वनों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यावरणीय प्रथाओं के प्रति जागरूकता को प्रभावी रूप से सुदृढ़ किया।

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2030-31 तक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए ₹11,440 करोड़ के परिव्यय के साथ ‘दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन’ को मंजूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर 2025 को ‘दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन’ नामक एक केंद्रीय प्रायोजित योजना को मंजूरी दी है। इसका योजना का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और छह वर्षों की अवधि (2025-26 से 2030-31) के दौरान दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इस योजना के लिए ₹11,440 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है।

मिशन के फसल कटाई के बाद के अवसंरचना वाले घटक के अंतर्गत, मिशन अवधि के लिए कुल 1000 प्रसंस्करण इकाइयों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन 1000-प्रसंस्करण इकाइयों में से प्रथम चरण में 528-प्रसंस्करण इकाइयों का लक्ष्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित किया गया है। राज्यवार प्रारंभिक लक्ष्य का विवरण परिशिष्ट-1 में दिया गया है।

धान की खेती के बाद खाली रहने वाले इलाकों और अन्य ऐसे क्षेत्रों में, जहां दूसरी फसलें भी उगाई जा सकती हैं, दलहन का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के लिए, मुफ्त बीज किट बांटकर सहायता प्रदान की जा रही है। इस मिशन के अंतर्गत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्य योजना(AAP) के अनुसार 6 वर्षों में 87.5 लाख बीज किट वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रबी 2025-26 के दौरान राज्यों को कुल 10.36 लाख बीज किट आवंटित किए गए हैं। राज्यवार आवंटन का विवरण परिशिष्ट-II में दिया गया है। वर्ष 2026-27, 2027-28, 2028-29, 2029-30 और 2030-31 के लिए बीज किट के संभावित लक्ष्य क्रमशः 15.00 लाख, 16.25 लाख, 17.50 लाख, 13.75 लाख और 12.5 लाख निर्धारित किए गए हैं।

दलहन मिशन के अंतर्गत क्लस्टर हेतु कुल 489 जिलों को केंद्रित जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है। स्थानीय आवश्यकताओं और बदलती परिस्थितियों के आधार पर इन चिन्हित जिलों में भविष्य में संशोधन किया जा सकता है। देश में केंद्रित जिलों की सूची परिशिष्ट-III में दी गई है।

दलहन की खेती के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल में 35 लाख हेक्टेयर की वृद्धि का अनुमान है, जिसमें 24.5 लाख हेक्टेयर पारंपरिक क्षेत्रों में और 10.5 लाख हेक्टेयर गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में होगा, जो वर्ष 2030–31 तक पूरा हो जाएगा। इस मिशन के तहत क्षेत्र विस्तार का अनुमान परिशिष्ट-IV में दिया गया है।

परिशिष्ट–I

‘दलहन में आत्मनिर्भरता हेतु मिशन’ के अंतर्गत फसल कटाई के बाद के अवसंरचना वाले घटक के तहत प्रथम चरण में प्रसंस्करण इकाइयों के राज्यवार लक्ष्य इस प्रकार हैं:

 (संख्या में)

क्रम संख्या राज्य प्रसंस्करण इकाइयाँ (दाल मिलें)
1 आंध्र प्रदेश 22
2 अरूणाचल प्रदेश 10
3 असम 25
4 बिहार 37
5 छत्तीसगढ़ 22
6 गोवा 5
7 गुजरात 28
8 हरियाणा 5
9 हिमाचल प्रदेश 5
10 जम्मू-कश्मीर 5
11 झारखंड 22
12 लद्दाख 5
13 कर्नाटक 30
14 केरल 5
15 मध्य प्रदेश 55
16 महाराष्ट्र 34
17 मणिपुर 5
18 मेघालय 5
19 मिजोरम 5
20 नागालैंड 11
21 ओडिशा 16
22 पंजाब 5
23 पुद्दुचेरी 5
24 राजस्थान 30
25 सिक्किम 5
26 तमिलनाडु 21
27 तेलंगाना 16
28 त्रिपुरा 8
29 उत्तर प्रदेश 56
30 उत्तराखंड 9
31 पश्चिम बंगाल 16
कुल 528

 

परिशिष्ट–II

रबी 2025-26 के दौरान बीज किटों का राज्य-वार आवंटन

 

राज्य बीज किटों की संख्या
आंध्र प्रदेश 96,200
असम 25,000
बिहार 20,000
छत्तीसगढ़ 68,100
गुजरात 4,500
हरियाणा 17,580
झारखंड 12,000
कर्नाटक 8,000
मध्य प्रदेश 2,22,700
महाराष्ट्र 95,000
ओडिशा 18,500
पंजाब 5,000
राजस्थान 1,28,700
तमिलनाडु 82,500
तेलंगाना 5,000
त्रिपुरा 2,000
उत्तर प्रदेश 2,11,000
पश्चिम बंगाल 15,000
Total 10,36,780

 

परिशिष्ट–III

दलहन मिशन के अंतर्गत केन्द्रित जिलों की सूची

राज्य केन्द्रित जिले (संख्या)
आंध्र प्रदेश 22
अरूणाचल प्रदेश 10
असम 25
बिहार 37
छत्तीसगढ़ 22
गुजरात 28
हरियाणा 3
हिमाचल प्रदेश 2
जम्मू-कश्मीर 2
झारखंड 22
लद्दाख 1
कर्नाटक 30
मध्य प्रदेश 55
महाराष्ट्र 34
मेघालय 3
नागालैंड 11
ओडिशा 16
पुद्दुचेरी 3
पंजाब 7
राजस्थान 30
तमिलनाडु 21
तेलंगाना 16
त्रिपुरा 8
उत्तर प्रदेश 56
उत्तराखंड 9
पश्चिम बंगाल 16
कुल 489

 

परिशिष्ट–IV

दलहनों के क्षेत्रफल विस्तार का अनुमान

(लाख हेक्टेयर में)

 

क्रम संख्या राज्य 2024-25 2025-26 2026-27 2027-28 2028-29 2029-30 2030-31
1 आंध्र प्रदेश 11.39 11.67 11.8 12 12.29 12.58 12.79
2 अरूणाचल प्रदेश 0.14 0.14 0.15 0.15 0.15 0.15 0.16
3 असम 1.66 1.7 1.72 1.75 1.79 1.83 1.86
4 बिहार 4.48 4.59 4.64 4.72 4.84 4.95 5.03
5 छत्तीसगढ़ 6.87 7.04 7.12 7.24 7.42 7.59 7.71
6 गोवा 0.04 0.04 0.04 0.04 0.04 0.04 0.04
7 गुजरात 13.16 13.49 13.63 13.87 14.2 14.54 14.78
8 हरियाणा 0.75 0.77 0.78 0.79 0.81 0.83 0.84
9 हिमाचल प्रदेश 0.29 0.3 0.3 0.31 0.31 0.32 0.33
10 जम्मू-कश्मीर 0.32 0.33 0.33 0.34 0.35 0.35 0.36
11 झारखंड 8.96 9.18 9.28 9.44 9.67 9.9 10.06
12 कर्नाटक 34.07 34.92 35.29 35.91 36.77 37.64 38.26
13 केरल 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01
14 लद्दाख 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01
15 मध्य प्रदेश 45.55 46.69 47.18 48.01 49.17 50.32 51.15
16 महाराष्ट्र 49.79 51.03 51.58 52.48 53.74 55.01 55.91
17 मणिपुर 0.31 0.32 0.32 0.33 0.33 0.34 0.35
18 मेघालय 0.09 0.09 0.09 0.09 0.1 0.1 0.1
19 मिजोरम 0.03 0.03 0.03 0.03 0.03 0.03 0.03
20 नागालैंड 0.32 0.33 0.33 0.34 0.35 0.35 0.36
21 ओडिशा 5.41 5.55 5.6 5.7 5.84 5.98 6.07
22 पुद्दुचेरी 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01 0.01
23 पंजाब 0.6 0.62 0.62 0.63 0.65 0.66 0.67
24 राजस्थान 54.02 55.37 55.96 56.94 58.31 59.68 60.66
25 सिक्किम 0.05 0.05 0.05 0.05 0.05 0.06 0.06
26 तमिलनाडु 7.5 7.69 7.77 7.9 8.1 8.29 8.42
27 तेलंगाना 3.54 3.63 3.67 3.73 3.82 3.91 3.97
28 त्रिपुरा 0.21 0.22 0.22 0.22 0.23 0.23 0.24
29 उत्तर प्रदेश 21.77 22.31 22.55 22.95 23.5 24.05 24.45
30 उत्तराखंड 0.49 0.5 0.51 0.52 0.53 0.54 0.55
31 पश्चिम बंगाल 4.39 4.5 4.55 4.63 4.74 4.85 4.93
पूरा भारत 276 283 286 291 298 305 310

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में 6969.04 करोड़ रुपये के परिव्यय से बाराबंकी से बहराइच तक 101.515 किलोमीटर की 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग-927 निर्माण की सरकारी निजी भागीदारी वार्षिकी मोड परियोजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 6969.04 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश में बाराबंकी से बहराइच (101.515 किलोमीटर) तक 4-लेन के प्रवेश और निकास नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के सरकारी निजी भागीदारी वार्षिकी मोड में निर्माण को स्वीकृति दे दी है।

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी-बहराइच खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बाराबंकी और बहराइच जिलों के शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की बड़ी ज्यामितीय खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। सेवा सड़कों के साथ नियंत्रित पहुंच वाले 4-लेन राजमार्ग के रूप में तैयार यह परियोजना प्रमुख रिहायशी क्षेत्रों को बाह्यमार्ग प्रदान करेगी, औसत यात्रा गति बढ़ाएगी, यात्रा समय में लगभग एक घंटे की कमी लाएगी और समग्र सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार करेगी। इससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और प्रचालन केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी है। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर 3 आर्थिक केंद्रों, 2 सामाजिक केंद्रों और 12 प्रचालन केंद्रों से जुड़कर विभिन्न परिवहन साधनों के निर्बाध समन्वय और एकीकरण को बढ़ावा देगी, जिससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट और हवाई अड्डों के साथ बेहतर बहु परिवहन सुविधा मिलेगी और समूचे क्षेत्र में माल और यात्री आवाजाही तेज होगी। परियोजना पूर्ण होने पर, यह नेपालगंज सीमा द्वारा भारत और नेपाल के बीच महत्वपूर्ण सीमा पार व्यापार और पारगमन कॉरिडोर स्थापित करेगी, जिससे रूपईडीहा लैंड पोर्ट तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह सड़क बहराइच और श्रावस्ती जैसे दूरस्थ जिलों को भी जोड़ेगी, प्रधानमंत्री गतिशक्ति आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के साथ संपर्क प्रदान करेगी और कृषि व्यापार, पर्यटन, सीमा पार वाणिज्य और क्षेत्रीय निवेश को प्रोत्साहित करेगी।

गलियारे का नक्शा

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परियोजना विवरण:

विशेषता विवरण
परियोजना का नाम बाराबंकी से बहराइच तक चार लेन वाला एक्सेस-नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्ग-927
गलियारे लखनऊ – रूपईडीहा
लंबाई (किलोमीटर) 101.515
कुल सिविल लागत (करोड़ रुपये में) 3485.49
भूमि अधिग्रहण लागत (करोड़ रुपये में) 1574.85
कुल पूंजीगत लागत (करोड़ रुपये में) 6969.04
मोड हाइब्रिड वार्षिकी मोड
बाईपास 48.28 किलोमीटर
प्रमुख सड़कों का जुड़ाव राष्ट्रीय राजमार्ग 27, 330बी और 730

राज्य राजमार्ग 13 और 30बी

आर्थिक / सामाजिक / परिवहन केंद्र जुड़ाव हवाई अड्डे: लखनऊ और श्रावस्ती

रेलवे स्टेशन: बाराबंकी, रसौली, जंगीराबाद, रफीनगर, बिंदौरा, बुढ़वल, चौकाघाट, घाघराघाट, जरवल और बहराईच

लैंड पोर्ट: रूपईडीहा

आर्थिक केंद्र: 01 विशेष आर्थिक क्षेत्र और 02 मेगा फूड पार्क

सामाजिक केंद्र: 02 आकांक्षी जिले।

प्रमुख शहर/कस्बों का जुड़ाव बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराईच
रोजगार सृजन क्षमता 36.54 लाख व्यक्ति-दिवस (प्रत्यक्ष) और 43.04 लाख व्यक्ति-दिवस (अप्रत्यक्ष)
वित्त वर्ष 28 में वार्षिक औसत दैनिक यातायात अनुमानित यात्री कार यूनिट 28,557 (पैकेज-1) और 21,270 (पैकेज-2) हैं।

 

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