Breaking News

प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के साथ बातचीत कीजो देश के लिए गौरव का क्षण था। इस मुलाकात के दौरानदोनों ने कई विषयों पर चर्चा कीजिनमें अंतरिक्ष में श्री शुक्ला के अनुभवविज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति और देश के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम – गगनयान जैसे विषय शामिल थे।

एक्स पर एक पोस्ट मेंश्री मोदी ने लिखा:

“शुभांशु शुक्ला के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने अंतरिक्ष में उनके अनुभवों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ-साथ भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन सहित कई विषयों पर चर्चा की। भारत को उनकी उपलब्धि पर गर्व है।

Read More »

सौभाग्य योजना के तहत घरों में बिजली

सरकार ने अक्टूबर 2017 में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी इच्छुक बिना बिजली कनेक्शन वाले घरों और शहरी क्षेत्रों में सभी इच्छुक गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान करना है। सौभाग्य योजना के अंतर्गत सभी स्वीकृत कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं और योजना 31.03.2022 तक पूरी हो चुकी है। राज्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सौभाग्य अवधि के दौरान लगभग 2.86 करोड़ घरों में बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। राज्यवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है ।

सरकार, शुद्ध व्यवाहरिकता द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर, चल रही पुनर्विकसित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत सभी छूटे हुए घरों के ऑन-ग्रिड विद्युतीकरण के लिए राज्यों को सहयोग दे रही है। इसमें पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान) के अंतर्गत पहचान किए गए विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के घरों, डीए-जेजीयूए (धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान) के अंतर्गत जनजातीय घरों, प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के अंतर्गत अनुसूचित जाति के घरों और जहां भी संभव हो, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के अंतर्गत दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के घरों में बिजली कनेक्शन के लिए स्वीकृत कार्य शामिल हैं। अब तक, आरडीएसएस के अंतर्गत, देश भर में 13.59 लाख घरों में बिजली कनेक्शन के लिए 6,487 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा, नई सौर ऊर्जा योजना के तहत 30 जून, 2025 तक 9,961 घरों के ऑफ-ग्रिड सौर आधारित विद्युतीकरण के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि के कार्यों को मंजूरी दी गई है। विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

Read More »

डीआरआई ने भोपाल में अवैध दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग कारखाने का भंडाफोड़ किया; 92 करोड़ रुपये कीमत की 61.2 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त; सात गिरफ्तार

एक महत्त्वपूर्ण खुफिया सूचना के आधार पर, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने भोपाल में एक गुप्त मेफेड्रोन मैन्युफैक्चरिंग कारखाने का, एक सुनियोजित और समन्वित ऑपरेशन, जिसका कोड नाम “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” था, सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन के दौरान सूरत और मुंबई पुलिस ने भी डीआरआई का सहयोग किया।

डीआरआई ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर छापे मारे और इस गिरोह के सात प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया।

ग्राम-जगदीशपुर (इस्लामनगर), हुजूर-तहसील, जिला-भोपाल, मध्य प्रदेश स्थित अवैध निर्माण इकाई की तलाशी में 61.20 किलोग्राम मेफेड्रोन (तरल रूप में) बरामद और जब्त किया गया, जिसकी अवैध बाजार में कीमत ₹92 करोड़ आंकी गई। इसके अतिरिक्त, 541.53 किलोग्राम कच्चा माल, जिसमें मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलमाइन (एमएमए), हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल), और 2-ब्रोमो शामिल हैं, के साथ-साथ प्रसंस्करण उपकरणों का एक पूरा सेट भी जब्त किया गया। एकांत परिसर में जानबूझकर चारों ओर से ढके हुए कारखाने पर डीआरआई अधिकारियों ने चतुराई से छापा मारा। मेफेड्रोन बनाने वाले केमिस्ट समेत दो लोग को अवैध उत्पादन प्रक्रिया में लिप्त पाया गया।

तत्परतापूर्वक की गई कार्रवाई में, ड्रग कार्टेल के एक प्रमुख शख्स को बस्ती, उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किया गया, जिसे भिवंडी (मुंबई) से भोपाल तक कच्चे माल की आपूर्ति की देख-रेख का काम सौंपा गया था। अवैध रूप से रसायन/ कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले दो आपूर्तिकर्ताओं को भी मुंबई में गिरफ्तार किया गया, साथ ही मुंबई से भोपाल तक रसायनों/ कच्चे माल के परिवहन के लिए जिम्मेदार शख्स को भी गिरफ्तार किया गया।

शुरुआती जांच से यह भी पता चला है कि सूरत और मुंबई से हवाला के जरिए भोपाल में पैसा भेजा जा रहा था। पैसे के लेन-देन के लिए जिम्मेदार कार्टेल के एक करीबी सहयोगी को भी सूरत में गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार किए गए सभी सात लोगों ने भारत में मेफेड्रोन नेटवर्क के एक विदेशी संचालक और सरगना के निर्देश पर मेफेड्रोन के गुप्त निर्माण में अपनी-अपनी भूमिका को स्वीकार किया।

मेफेड्रोन, एक मनोविकार नाशक पदार्थ है जो स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत सूचीबद्ध है। यह समाज के लिए एक गंभीर खतरा है क्योंकि इसमें मनो-सक्रिय गुण होते हैं और माना जाता है कि यह कोकीन और एम्फैटेमिन के सेवन जैसा असर पैदा करता है।

यह पिछले एक साल में डीआरआई की ओर से बर्बाद की गई छठा गुप्त मेफेड्रोन कारखाना है। डीआरआई मादक दवाओं का निर्माण करने वाली अवैध फैक्ट्रियों को ध्वस्त करने और उनके मास्टरमाइंडों तथा इसमें शामिल अंतरराष्ट्रीय गिरोहों की तलाश में लगातार सक्रिय है।

Read More »

कोयला खनन में महिलाएँ

कोल इंडिया लिमिटेड ने 14 जुलाई, 2025 को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के वसंत विहार डिस्पेंसरी, बिलासपुर में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित और प्रबंधित अपनी पहली डिस्पेंसरी का उद्घाटन किया। इस डिस्पेंसरी में व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली पूरी तरह से महिला कर्मचारियों की टीम कार्यरत है।

लैंगिक समानता और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने, कोयला क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा, तकनीकी, नियोजन इकाइयों जैसे विविध क्षेत्रों में उनके लिए नेतृत्व के अवसर सृजित करने के लिए महिलाओं के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण पहल लागू की गई हैं।

i) सीआईएल की विभिन्न सहायक कंपनियों में लागू और पूरी तरह से कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व वाली पहल इस प्रकार हैं:

  • वसंत विहार डिस्पेंसरी, बिलासपुर, एसईसीएल।
  • राजेंद्र नगर डिस्पेंसरी, रांची, सीसीएल
  • कोयला नगर अस्पताल (सुबह की पाली), धनबाद, बीसीसीएल
  • सद्भावना कॉलोनी डिस्पेंसरी, पाटनसांगी, नागपुर, डब्ल्यूसीएल
  • केंद्रीय उत्खनन कार्यशाला, गेवरा, एसईसीएल में स्थिति आधारित निगरानी प्रयोगशाला।
  • धनबाद में एलईडी और सौर उपकरणों के लिए केंद्रीकृत तकनीकी केंद्र।
  • लागत और बजट प्रकोष्ठ एनसीएल मुख्यालय, सिंगरौली, एनसीएल।

ii) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान भारतीय कोयला प्रबंधन संस्थान (आईआईसीएम) के माध्यम से महिला नेतृत्व की एक प्रमुख पहल, “ज्योति – एक साथ उठना, मार्ग प्रशस्त करना” शुरू की है। यह एक स्ट्रक्चर्ड पाँच महीने की महिला नेतृत्व यात्रा है। इसे संचार, निर्णय लेने, भावनात्मक इन्टेलिजन्स, बातचीत कौशल, व्यक्तिगत विकास और नेतृत्व तत्परता में दक्षताओं को मजबूत करके सीआईएल के भीतर उच्च जिम्मेदारियों के लिए महिला अधिकारियों को तैयार करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम सर्वोत्तम प्रथाओं, नेटवर्किंग के अवसरों, मार्गदर्शन और संस्थागत समर्थन से भी परिचित कराता है।  इससे कोयला क्षेत्र में महिला प्रमुखों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार होती है।

iii) अब कर्मचारी की मृत्यु होने पर महिला आश्रितों को उनकी वैवाहिक स्थिति की परवाह किए बिना आश्रित नियोजन के लिए विचार किया जाएगा। यह पहले कोल इंडिया लिमिटेड में नहीं था।

iv) संगठनात्मक मामलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लैंगिक संवेदनशीलता, समानता और समावेशिता के प्रति कोल इंडिया लिमिटेड की व्यापक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के लिए, सभी समितियों में एक महिला प्रतिनिधि को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है।

v) भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने एलईडी और सौर ऊर्जा उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव के लिए अपने पहले केंद्रीकृत तकनीकी केंद्र का उद्घाटन किया है।  इसका संचालन पूरी तरह से महिला तकनीशियनों द्वारा किया जाता है। कोयला नगर धनबाद में स्थित यह केंद्र पारंपरिक रूप से पुरुष कर्मचारियों के प्रभुत्व वाले मुख्य तकनीकी कार्यों में महिलाओं को लाने की दिशा में एक अग्रणी कदम है।

vi) कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों में लैंगिक समानता और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, महिला कर्मचारियों को खनन सरदार योग्यता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए भूमिगत प्रशिक्षण में भेजा जाता है।

vii) महिलाओं को बचाव कार्यों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और उन्हें बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्य का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अब तक वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की 19 महिला कर्मचारियों और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की 9 महिलाओं को बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्य का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

viii) महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम) के अंतर्गत आंतरिक शिकायत समितियाँ (ICC) गठित की गई हैं। ये समितियाँ कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने, प्रतिबंधित करने और उसका समाधान करने के लिए कार्य कर रही हैं।

ix) इसके अलावा NLC इंडिया लिमिटेड (NLCIL) इस पहल में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और अपनी खदानों में महिलाओं को नियुक्त कर रहा है। NLCIL के खनन क्षेत्र में 190 महिलाएँ कार्यरत हैं, जिनमें से 48 कार्यकारी पदों पर हैं। अपने इतिहास में पहली बार NLCIL ने महिलाओं को मुख्य खनन कार्यों में शामिल किया है। यह लैंगिक समावेशिता के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता में एक मील का पत्थर है। महिलाओं को सर्वेक्षक, खनन सरदार और ओवरमैन जैसे नौ प्रमुख वैधानिक पदों पर नियुक्त किया गया है।

यह जानकारी केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Read More »

खनन में आईटी एवं डिजिटलीकरण पहल

कोयला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने कोयला उत्पादन और वितरण में दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए अपने खनन कार्यों में निम्नलिखित डिजिटलीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित पहलों को अपनाया है-

कोल इंडिया लिमिटेड –

(i) एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आई.सी.सी.सी.) – 24×7 इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और अलर्ट उत्पादन की सुविधा के लिए खनन क्षेत्रों के रणनीतिक स्थान पर कई परिचालन और सुरक्षा कार्यों का प्रबंधन करने के लिए

(ii) ऑपरेटर स्वतंत्र ट्रक डिस्पैच प्रणाली

(iii) ई-एमबी और ई-बिलिंग पोर्टल

(iv) सुरक्षा पहलों की प्रभावी निगरानी और कार्यान्वयन तथा सुरक्षा निरीक्षणों की प्रभावशीलता में सुधार के लिए केंद्रीकृत सुरक्षा सूचना प्रणाली (सी.एस.आई.एस.)

(v) सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (सी.ए.ए.क्यू.एम.एस.)

(vi) डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि और उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से निर्णय लेने और प्रदर्शन को मजबूत करने के लिए डिजिटल परिवर्तन पहल (डिजिकोल)

(vii) कर्मचारी संसाधन योजना (ई.आर.पी.) पहल

(viii) पीएम गति-शक्ति-राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जिससे परिवहन मार्गों की पहचान करने, परियोजनाओं में कमी का पता लगाने, रेलवे, बिजली लाइनों और पाइपलाइनों के लिए उपयुक्त मार्गों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

(ix) किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा की गई अवैध खनन रिपोर्ट पर रिपोर्टिंग और कार्रवाई के लिए खनन प्रहरी मोबाइल ऐप और संबंधित कोयला खान निगरानी एवं प्रबंधन पोर्टल (सी.एम.एस.एम.एस.) का विकास।

सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड –

(i) 2008 से एस.ए.पी. (ई.आर.पी.) के विभिन्न मॉड्यूलों का कार्यान्वयन।

(ii) ग्लोबल पोजिशन सिस्टम/व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम आधारित कोयला परिवहन वाहन निगरानी प्रणाली लागू

(iii) विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण स्थानों के लिए सी.सी.टी.वी. निगरानी कवरेज तैनात

(iv) ऑपरेटर स्वतंत्र ट्रक डिस्पैच सिस्टम (ओ.आई.टी.डी.एस.)

(v) ड्रोन का सीमित उद्देश्य के लिए उपयोग

एन.एल.सी. इंडिया लिमिटेड –

(i) खदान में तैनात उपकरणों की ट्रैकिंग के लिए जी.पी.एस. तकनीक का उपयोग करते हुए ऑपरेटर स्वतंत्र ट्रक डिस्पैच प्रणाली और जियो-फेंसिंग तकनीक को लागू किया गया है।

(ii) डिजिटल लॉजिस्टिक प्रबंधन प्रणाली (डी.एल.एम.एस.) का कार्यान्वयन, जो कोयला प्रेषण परिचालन से जुड़ी संभार तंत्र और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक व्यापक समाधान है।

(iii) वॉल्यूम माप के लिए जी.एन.एस.एस. रिसीवर के साथ 3डी टी.एल.एस. का उपयोग

कोयला मंत्रालय ने नागरिकों द्वारा कोयले की चोरी और अवैध खनन की घटनाओं की सूचना देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों को शिकायतों पर समय पर उचित कार्रवाई करने में सक्षम बनाने के लिए खनन प्रहरी मोबाइल ऐप और कोयला खान निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली (सी.एम.एस.एम.एस.) वेब ऐप आरंभ किया है। इसके अलावा, कोयला क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा की गई पहल से परिचालन की वास्तविक समय पर निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

यह जानकारी केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी है।

Read More »

“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी एआई-संचालित रक्त परीक्षण उपकरण का समर्थन किया”

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ “एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के लिए आईओटी-सक्षम पॉइंट-ऑफ-केयर रक्त परीक्षण उपकरण” नामक परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व छात्र श्री साहिल जगनानी और श्री अंकित चौधरी द्वारा स्थापित, यह कंपनी डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, प्रोफेसरों और छात्रों की एक बहु-विषयक टीम से उभरी है, जो वंचित आबादी के लिए किफायती नैदानिक तकनीकें विकसित करने के लिए काम कर रही है। उनके सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास, जिसे शुरू में बीआईआरएसी का सहयोग प्राप्त था, ने मोबिलैब डिवाइस का निर्माण किया—एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइज़र, आईओटी-सक्षम और एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित, जो किडनी, लिवर, हृदय, विटामिन और कैंसर से संबंधित 25 से अधिक मापदंडों का परीक्षण करने में सक्षम है।

कंपनी के पास आईआईटी गुवाहाटी से हस्तांतरित “पॉइंट-ऑफ-केयर क्वांटिफिकेशन के लिए एक ट्रांसमिटेंस-आधारित प्रणाली/किट” का पेटेंट है और उसने एकीकृत मिक्सर, परख विकास, सेंट्रीफ्यूज और प्रोपराइटरी ऑप्टिकल सिस्टम से संबंधित छह से ज़्यादा अतिरिक्त पेटेंट आवेदन दायर किए हैं। इस उपकरण का 10,000 मरीज़ों पर परीक्षण हो चुका है और हाल ही में इसे सीडीएससीओ से निर्माण लाइसेंस मिला है। यह परियोजना वर्तमान प्रोटोटाइप (एम1) को उन्नत बनाने पर केंद्रित होगी ताकि एक साथ पाँच परीक्षण किए जा सकें, रोगियों के प्रतीक्षा समय को कम किया जा सके और व्यावसायिक स्तर पर विनिर्माण स्थापित किया जा सके। इस अगली पीढ़ी के मोबिलैब में हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, यूरिक एसिड, ग्लूकोज और जीजीटी जैसे परीक्षण शामिल होंगे।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव, श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा:
“ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह परियोजना न केवल सामर्थ्य और पहुंच को संबोधित करती है, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी, एआई-संचालित नैदानिक समाधान विकसित करने में देश की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।”

प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का सहयोग प्रयोगशाला नवाचार से लेकर बड़े पैमाने पर तैनाती तक की हमारी यात्रा को गति देगा। मोबिलैब के साथ, हमारा लक्ष्य ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि देश में कहीं भी, देखभाल के बिंदु पर उन्नत निदान उपलब्ध हों।”

यह सहयोग टीडीबी की आत्मनिर्भर भारत के साथ स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा नवाचारों को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर सस्ती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

Read More »

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  द्वारा राजधानी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भव्य आयोजन

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त ट्रस्ट  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  ने 14 अगस्त को सेंट्रल पार्क, नई दिल्ली में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। नागरिकों को उन लोगों द्वारा सहन की गई असीमित पीड़ा से परिचित कराया, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने घरों, आजीविका और सम्मान का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वर्ष 2022 से इसके तहत स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और स्वास्थ्य और रसायन और उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा, केन्‍द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल श्री विजय कुमार सक्सेना, , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और केन्‍द्रीय संस्‍कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के रूप में, ‘जैसा उन्होंने देखा: भारत का विभाजन 1947’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका संपादन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया है। यह पुस्तक इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण पर बहुमूल्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ‘द डर्वाल्स एंड पार्टीशन’ नामक एक डीवीडी भी लॉन्च की गई, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े अनुभवों और आख्यानों का एक मार्मिक दृश्य ूप्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन की मानवीय कीमत पर पुनर्विचार किया गया और विस्थापित हुए देशवासियों को गंभीरता से याद किया गया। अनगिनत पीड़ितों की स्मृति में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जो उनके धैर्य के प्रति एक सम्मानजनक श्रद्धांजलि थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) द्वारा मंचित और लोकेंद्र त्रिपाठी द्वारा निर्देशित ‘बतावारा’ नामक एक नाटक का भी मंचन किया गया।

यह उल्लेखनीय है कि देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई लोगों को अपनी अचल संपत्ति से हाथ धोना पड़ा और अनगिनत महिलाओं को अपनी गरिमा के साथ खिलवाड़ का सामना करना पड़ा। विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों की पीढ़ियाँ आज भी इसके घाव सह रही हैं। भारत का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। हालांकि लोगों का पलायन अगस्त 1947 से पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव विभाजन की औपचारिक घोषणा के बाद देखा गया। इस दर्दनाक घटना के सबसे गंभीर परिणाम पंजाब, बंगाल और सिंध में हुए, फिर भी इसका प्रभाव पूरे देश में महसूस किया गया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस अभूतपूर्व मानवीय संकट में लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और लगभग 20 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। प्रदर्शनी और कार्यक्रम ने जनता की काफ़ी रुचि आकर्षित की, ख़ासकर इस त्रासदी के सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आयामों के विस्तृत चित्रण के कारण, जिससे आगंतुकों को व्यक्तिगत स्मृतियों को सामूहिक इतिहास से जोड़ने का अवसर मिला। पुस्तक विमोचन, डीवीडी लॉन्च के माध्यम से दृश्य दस्तावेज़ीकरण और गरिमापूर्ण जनभागीदारी के रूप में विद्वत्ता के इस एकीकरण के माध्यम से, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  स्मृति की संस्कृति को मज़बूत करना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विभाजन के सबक आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र की साझा चेतना का एक स्थायी हिस्सा बने रहें।

Read More »

टॉक्सिक रिलेशनशिप 

कहते हैं जब कोई इंसान प्रेम में होता है या कोमल भावनाओं के साथ किसी रिश्ते में जुड़ जाता है तो कुछ भी करने को, सहने को तैयार हो जाता है। 

जब दो विपरीत प्रवृति के लोग किसी रिश्ते में जुड़ जाते तो सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न होती है। दिल और दिमाग का तालमेल संभव नहीं हो पाता। भावुक इंसान चूंकि भावनाओं से जुड़ता है इस लिए रिश्ते में तमाम समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। दिमाग वाला बिना नफा नुकसान देखे कोई काम नहीं करता। नतीजा भावुक इंसान पीड़ा ,अवसाद में घिरने लगता है। लेकिन तमाम दुख ,दर्द ,अवहेलना , अपमान सहने के बाद भी उस रिश्ते को बचाने में लगा रहता है और दूसरे इंसान को कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

टॉक्सिक रिलेशनशिप आखिर क्या है इसे कैसे पहचाना जाए? अगर किसी रिश्ते में आपको लगातार पीड़ा ,तिरस्कार , अवहेलना मिल रही हो बेवजह प्रताड़ना ,गलत साबित किया जा रहा हो ,रिश्ते में खुशी से ज्यादा दुख ने पाँव पसार लिए हों तो निःसंदेह आप गलत रिश्ते में जुड़े हैं। ऐसे रिश्ते में दूसरा व्यक्ति नकारात्मक रूप से आपको प्रभावित करके नियंत्रित करने की कोशिश करता है। इसके लिए अनैतिक बर्ताव, कटु बाणी ,आरोप प्रत्यारोप आम बातें हो जाती हैं। जबकि दूसरा इंसान कुछ बीते अच्छे दिनों की यादें समेटे बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है। नतीजतन दोनों ही इस चीज़ के अभ्यस्त हो जाते हैं।

अगर हम कहें कि टॉक्सिक रिलेशन जुए के खेल जैसा होता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जैसे जुए में दस बार हारने के बाद भी जीतने की उम्मीद बनी रहती है। वैसे ही भावनाओं से जुड़ा इंसान बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है और एक समय ऐसा आ जाता है कि ये उसकी आदत बन जाती है और मर मर कर जीना उसकी नियति ।

   जीवन हमें एक बार ही मिलता है।कोशिश करें इसे हम उन लोगों के साथ गुजारें जिन्हें हमारी परवाह है। जिनको हमारे सुख दुख से फ़र्क पड़ता हो। महज भावुकता में बह कर ऐसे किसी रिश्ते को ना ढोयें जो आपको कष्ट देना ही जानता हो । 

टूटने ,बिखरने का भय त्याग कर अपने स्वभाव अनुसार रिश्तों में जुड़िए फिर देखिए जीवन कितना खूबसूरत है। बस इस बदलाव के लिए अपने अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करनी होगी।

  • निवेदिता शुक्ला
  • इटावा , उत्तर प्रदेश

Read More »

युवा नवसंकल्प

उठो, जागो युवाओं लेना है तुम्हें आज …एक संकल्प।

वो धरती जिसने बरसों सहा है गुलामी को,

अपने रक्त से रचे हैं जिसने तमाम स्वतंत्रता चिह्न,

अब देना है तुम्हें नव रूप, फिर से उसी धरा को।

पालन करना है तुम्हें अपने कर्तव्यों का ।

जागो युवाओं! व्रत लो, रचोगे नया इतिहास तुम।

तुम्हें चलना है उन राहों पर जिन्हें दिखाया था स्वामी विवेकानंद और गांधी ने,

एक नई ज्योति जगाई थी उन्होंने आजादी की ,

और बंधाया अटूट विश्वास दिल में,

लेकिन युवाओं अब नई चुनौती है इस नए युग में

विकास,शिक्षा और नवोद्योग की।

तुम्हारे हौसलों के पंख ले जाएंगे देश को ऊँचाइयों तक,

गाँव-गाँव और शहर-शहर जगमगाओगे तुम एक सबेरा शिक्षा का।

धरती की छाती पर लहराओगे फूल उत्सवों के, किसान बन कर।

थमने मत दे तू चल उठ आगे बढ़।

थाम ले मशाल अपने हाथों में,

तब चमकेगा तेरा नाम तकनीक, कला और विज्ञान के क्षेत्र में

उठो युवाओं लेना है एक और संकल्प तुम्हें

तुम बनोगे पहिए विकास की गाड़ी के,

तोड़ दोगे तुम भ्रष्टाचार की दीवार को,

बोओगे नए बीज नवाचार के,

और लहराओगे तुम एकता के ध्वज को विविधता के बीच।

युवाओं, तुम ही तो हो केंद्र बिन्दु राष्ट्र की उन्नति का,

ऐसा बिन्दु जिसके आसपास कोई बाधा न हो

न जाति,न धर्म और न ही भाषा ।

उठो युवाओं तुम्हें संभालना है अपने पर्यावरण को,

अपनी स्वच्छ हवाएँ,जल और हरियाली को।

तुम्हीं बनाओगे उन्नति का एक उजला सा वन।

युवाओं मुझे पता है हिलोरें लेती हैं सैनिकों की शौर्य गाथा, तुम्हारे लहू में,

लेकिन नहीं भूलोगे तुम शांति, समृद्धि और अपना उद्देश्य।

युवाओं तुम्हे बनाना है महाशक्ति इस धरा को,

तुम्हीं दे पाओगे सब को न्याय, समृद्धि, साझा तरक्की में सबका हिस्सा।

उठो युवाओं तुम्हारी राह देखता है ये देश,

प्रतिस्पर्धा के युग में तुम जलाओ एक मशाल नव युग की।

नव संकल्प लो युवाओं,राष्ट्र की उन्नति में कर दो न्योछावर अपना सर्वस्व,

क्योकि देश भक्ति ना रहे मोहताज किसी भाषा की, किसी जाति की और न ही धर्म की।

युवाओं तुम्हारा जोश लहराएगा तिरंगा बन कर अनंत अकाश में, हमेशा हमेशा।

~ प्रो. प्रभात द्विवेदी राजकीय महाविद्यालय

चिन्यालीसौंड, उत्तरकाशी उत्तराखण्ड

Read More »

तीन दशक की जद्दोजहद का अंत, सुदामा को मिला मेहनत का पूरा हक

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर 19 अगस्त जिलाधिकारी की सक्रियता से हुआ 1996 से लंबित प्रकरण का समाधान, 29 साल बाद मिली जीपीएफ की राशि*

लगभग तीन दशक की लंबी जद्दोजहद, धैर्य और उम्मीद के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को आखिरकार उनकी मेहनत की कमाई मिल गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय पहल और लगातार निगरानी के चलते सामान्य भविष्य निधि का वह भुगतान संभव हुआ, जो वर्ष 1996 से अटका था। आखिरकार ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये सुदामा के खाते में पहुंच गए।

फरवरी की एक सुबह जिलाधिकारी कार्यालय में जनता दर्शन चल रहा था। अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे लोगों की भीड़ में एक बुज़ुर्ग भी खड़े थे। साधारण पैंट-शर्ट पहने, हाथ में पुरानी फाइल और थैला थामे, चेहरे पर धैर्य और आंखों में उम्मीद की चमक। यह थे 89 वर्षीय सुदामा प्रसाद, जो उनतीस वर्षों से अपनी मेहनत की पाई-पाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। कितने ही दफ्तरों के चक्कर, कितनी ही बार फाइलें चलीं और लौटीं, अधिकारी बदलते गए, नियमावली के पन्ने पलटते रहे लेकिन मेहनत की कमाई तक पहुंच नहीं बन सकी। खास बात यह रही कि उन्होंने कभी न्यायालय का दरवाज़ा नहीं खटखटाया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।

प्रकरण की जड़ सेवानिवृत्ति अभिलेखों में छूटे एक महत्वपूर्ण तथ्य में छिपी थी। पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन 1995 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। यह जानकारी अभिलेखों में दर्ज न हो पाने से भुगतान वर्षों तक थमा रहा।

जनता दर्शन में जब उन्होंने जिलाधिकारी के सामने अपनी व्यथा रखी तो जिलाधिकारी ने तुरंत गंभीरता से सुनवाई की। वर्षों पुरानी फाइलें मंगाई गईं, रिकॉर्ड खंगाला गया। डीएम ने निर्देश दिया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। जनपद बांदा से आवश्यक अभिलेख मंगाए गए। इसके बाद कोषाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि खाते में जमा राशि पर चालू वित्तीय वर्ष तक ब्याज जोड़कर पूरा भुगतान अनुमन्य है और अब तक कोई आंशिक भुगतान भी नहीं हुआ है। इसके बाद उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट में ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये देय पाए गए।

सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी हुए और जिलाधिकारी ने प्रगति पर स्वयं नज़र रखी। आखिरकार 18 अगस्त को वह दिन आया जब भुगतान सुदामा प्रसाद खाते में पहुंच गया। लगभग तीस साल की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद उन्हें अपनी मेहनत का हक मिला।

राशि खाते में आने की ख़बर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं लेकिन होंठों पर सुकून की मुस्कान थी। उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी का आभार व्यक्त करते हुए बस इतना कहा कि देर है, पर अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह रकम केवल पैसे भर नहीं थी, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी है।

Read More »