केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री श्री गिरिराज सिंह कल नई दिल्ली में आयोजित समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर वे कुछ ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्ति-पत्र भी बांटेंगे, जिन्होंने डीडीयू-जीकेवाई के तहत इसी प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त किया था और उनकी कैप्टिव नियोक्ताओं के यहां नियुक्ति होनी है।
श्री गिरिराज सिंह के निर्देश पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डीडीयू-जीकेवाई के अंतर्गत कैप्टिव रोजगार (इन हाउस) दिशानिर्देश जारी किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उम्मीदवारों को उद्योग की आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित किया जा सकें और उन्हें रोजगार मिल सकें। कैप्टिव रोजगार मॉडल नियोक्ताओं को ग्रामीण युवाओं का चयन करने, उन्हें कौशल प्रदान करने और उन्हें अपने प्रतिष्ठान/अपनी अन्य संस्था/सहायक कंपनियों में तैनात करने की अनुमति प्रदान करता है।
आरटीडी (भर्ती, प्रशिक्षण और तैनाती) मॉडल को एक तरफ उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने और दूसरी ओर ग्रामीण युवाओं के लिए स्थायी नौकरी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है। यह मॉडल उद्योग, सरकार और ग्रामीण गरीब युवाओं के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। उद्योग अपनी आवश्यकता के अनुसार अपने कार्य स्थल पर ही इन युवाओं को अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सक्षम होगा, जबकि सरकार ग्रामीण गरीब युवाओं के लिए अधिक अवधि तक रोजगार (न्यूनतम छह महीने) सुनिश्चित करेगी।
कैप्टिव रोजगार (इन हाउस) के दिशानिर्देश डीडीयू-जीकेवाई कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जा रहे लाभों के कारण इस योजना में उद्योग की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाएंगे जिससे ग्रामीण युवाओं के लिए बड़ी मात्रा में रोजगार सुनिश्चित होंगे। कैप्टिव नियोक्ताओं को प्रदान किए जाने वाले कुछ लाभ इस प्रकार हैं: लक्ष्य आवंटन में सर्वोच्च प्राथमिकता, प्रदर्शन बैंक गारंटी की छूट, गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया और शुल्क की छूट, उद्योग के संचालन को आसान बनाने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की लगन और डीडीयू-जीकेवाई के कुछ अन्य जनादेश के प्रति दिलचस्पी, तीन साल की अवधि के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन, उद्योग को अपने कार्य के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की प्राप्ति होगी जिससे नुक्सान कम होगा, कार्य प्रदर्शन बेहतर होगा और सरकार की प्रशिक्षण लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, बदले में कैप्टिव नियोक्ताओं को सभी प्रशिक्षित उम्मीदवारों को कैप्टिव (इन-हाउस) रोजगार देने और 6 महीने की अवधि के लिए न्यूनतम 70 प्रतिशत प्रशिक्षित उम्मीदवारों को 10,000 रुपये के न्यूनतम वेतन पर रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके अलावा 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए 12,000 रुपये का रोजगार देने की जरूरत पड़ती है।
डीडीयू-जीकेवाई का मूल उद्देश्य कौशल प्राप्त करने के बाद ग्रामीण युवाओं को स्थायी रूप से लाभकारी रोजगार प्रदान करना है, इसलिए वर्ष 2020 में अंत्योदय दिवस के अवसर पर कैप्टिव रोजगार की अवधारणा की परिकल्पना की गई और इसका शुभारंभ किया गया।
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कानपुर 28 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के षष्ठम दिवस का शुभारंभ प्रथम सत्र में प्रातः कालीन प्रार्थना, एनएसएस सॉन्ग, योगा, प्राणायाम के साथ हुआ। द्वितीय सत्र में आज के मुख्य विषय *सड़क सुरक्षा एवम् साइबर क्राइम* के अंतर्गत महाविद्यालय से अधिग्रहित मलिन बस्ती अस्पताल घाट तक पोस्टर प्रदर्शन व रैली का आयोजन कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही तथा प्राचार्या प्रोफेसर अर्चना वर्मा के कुशल निर्देशन में किया गया। जिसमें सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा, यातायात के नियमों का पालन करें, सावधान रहें सतर्क रहे जैसे नारों के द्वारा जन जागरूकता फैलाई गई। एनएसएस वॉलिंटियर्स ने मलिन बस्ती अस्पताल घाट में जाकर बस्ती वासियों, युवाओं, महिलाओं व बच्चो को पोस्टर, वाक्य, गीत, कविता, आपसी वार्तालाप एवम् नुक्कड़ नाटक के द्वारा यातायात के नियमों का पालन करने एवं साइबरक्राइम से बचने के उपाय समझाएं।

कानपुर 27 मार्च भारतीय स्वरूप संवाददाता,दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के पंचम दिवस का शुभारंभ प्रथम सत्र में प्रातः कालीन प्रार्थना, एनएसएस सॉन्ग, योगा, प्राणायाम के साथ हुआ। द्वितीय सत्र में आज के मुख्य विषय *व्यक्तिगत स्वच्छता एवम् शिक्षा का महत्व* के अंतर्गत महाविद्यालय से अधिग्रहित मलिन बस्ती अस्पताल घाट तक पोस्टर प्रदर्शन व रैली का आयोजन कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही तथा प्राचार्या प्रोफेसर अर्चना वर्मा के कुशल निर्देशन में किया गया। जिसमें ‘क्लीन कानपुर ग्रीन कानपुर, सफाई अपनाएं बीमारी भगाएं’ जैसे नारों के द्वारा जन जागरूकता फैलाई गई। एनएसएस वॉलिंटियर्स ने मलिन बस्ती अस्पताल घाट में जाकर बस्ती वासियों, युवाओं, महिलाओं व बच्चो को पोस्टर, वाक्य, गीत, कविता, आपसी वार्तालाप एवम् नुक्कड़ नाटक के द्वारा व्यक्तिगत स्वच्छता के अंतर्गत हाथ धोना सिखाया तथा उन्हें शरीर की सफ़ाई, प्रतिदिन स्नान करने, नियमित रूप से बालों को धोना, शैम्पू करना, तेल लगाना और भोजन करने के पूर्व तथा टॉयलेट करने के उपरांत हाथ धोने का महत्व बताया।

