भारत सरकार नियमित रूप से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करती है।
पिछले चार वित्तीय वर्षों में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में आरआरबी की निम्नलिखित समीक्षाएं की गई हैं:
| क्रम संख्या | राष्ट्रीय/क्षेत्रीय स्तर | तारीख और स्थान |
| 1. | राष्ट्रीय स्तर | 07.07.2022 नई दिल्ली में |
| 2. | उत्तर-पूर्वी आरआरबी | 21.07.2023 अगरतला में |
| 3. | दक्षिणी आरआरबी | 04.08.2023 चेन्नई में |
| 4. | उत्तरी आरआरबी | 30.08.2023 नई दिल्ली में |
| 5. | राष्ट्रीय स्तर | 19.08.2024 नई दिल्ली में |
| 6. | पश्चिमी-मध्य आरआरबी | 22.08.2024 उदयपुर में |
| 7. | उत्तर-पूर्वी आरआरबी | 30.09.2024 ईटानगर में |
| 8. | दक्षिणी आरआरबी | 09.11.2024 बेंगलुरु में |
| 9. | पूर्वी आरआरबी | 29.11.2024 पटना में |
| 10. | कर्नाटक ग्रामीण बैंक | 16.10.2025 बेल्लारी में |
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक 10,177 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, साथ ही अन्य प्रमुख वित्तीय मानकों में लगातार सुधार किया है
इसके अलावा अनुवर्ती ( फ़ॉलो-अप ) कार्रवाई के रूप में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) विभिन्न स्तरों पर आरआरबी और प्रायोजक बैंकों के साथ समय-समय पर और नियमित बैठकें करता है।
समीक्षा बैठकों के एजेंडा आइटम में अन्य बातों के साथ-साथ, ये शामिल हैं:
- वित्तीय मापदंडों पर आरआरबी के प्रदर्शन की समीक्षा।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन पर ज़ोर।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पोर्टफोलियो पर ध्यान।
- कृषि-संबद्ध, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्रों के लिए ऋण विविधीकरण का महत्व।
- ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में वित्तीय समावेश का विस्तार।
हाल के वर्षों में आरआरबी की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरआरबी ने 10,177 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया। आरआरबी ने पूंजी से जोखिम भारित संपत्तियां अनुपात (सीआरएआर) जमा, अग्रिम, गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (सीडी अनुपात) आदि जैसे प्रमुख वित्तीय मानकों में भी लगातार सुधार दिखाया है। पिछले तीन वर्षों में प्रमुख वित्तीय पैमानों पर आरआरबी का प्रदर्शन इस प्रकार है:
| क्रम संख्या | मुख्य वित्तीय पैरामीटर | वित्त वर्ष 2023-24 | वित्त वर्ष 2024-25 | वित्त वर्ष |
| 1. | कुल जमा राशि (करोड़ रुपये में) |
6,59,815 | 7,13,800 | 7,68,621 |
| 2. | बकाया लोन
(करोड़ रुपये में) |
4,71,384 | 5,24,163 | 5,78,349 |
| 3. | क्रेडिट-डिपॉज़िट अनुपात
(सीडी अनुपात) (%) |
71.4 | 73.4 | 75.2 |
| 4. | सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति
(जीएनपीए) (%) |
6.1 | 5.4 | 5.3 |
| 5. | शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति
(एनएनपीए) (%) |
2.4 | 2.0 | 2.1 |
| 6. | शुद्ध लाभ
(करोड़ रुपये में) |
7,571 | 6,820 | 10,177 |
| 7. | शुद्ध मूल्य (करोड़ रुपये में) |
56,780 | 63,927 | 74,086 |
| 8. | जोखिम भारित परिसंपत्तियों के लिए पूंजी अनुपात (सीआरएआर) (%) | 14.2 | 14.4 | 15.0 |
स्रोत: नाबार्ड
सरकार ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में वित्तीय समावेश को बढ़ाने की दिशा में आरआरबी की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा करती है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई), प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी विभिन्न वित्तीय समावेश योजनाओं के लक्ष्य डीएफएस द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और समय-समय पर निगरानी की जाती है।
वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।
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