पिछले 05 वर्षों में 2018-19 से 2022-23 के बीच विशेष अवसंरचना योजना (एसआईएस), सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) और विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजनाओं के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों की क्षमता निर्माण के लिए 4931 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों में हेलीकॉप्टरों के संचालन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को संबोधित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को 765 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
विकास के मोर्चे पर, भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं के अलावा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहलें की गई हैं, जिनमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। कुछ उपाय इस प्रकार हैं:
- सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए 13620 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है।
- दूरसंचार कनेक्टिविटी में सुधार के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 13823 टावरों को मंजूरी दी गई है। अब तक 3700 से अधिक टावर चालू हो चुके हैं।
- वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में स्थानीय जनसंख्या के वित्तीय समावेशन के लिए 4903 नए डाकघर खोले गए हैं। इसके अलावा, अप्रैल-2015 से 30 सबसे अधिक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 955 बैंक शाखाएं और 839 एटीएम खोले गए हैं।
- कौशल विकास के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 46 आईटीआई और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) क्रियाशील बनाए गए हैं।
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों के आदिवासी प्रखंडों (ब्लॉकों) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए 130 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) को क्रियाशील बनाया गया है।
नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा में लगातार गिरावट आई है और इसके भौगोलिक प्रसार में कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा की घटनाओं और उनकी परिणामी मौतें (नागरिक + सुरक्षा बल) 2010 के उच्चतम स्तर से 2023 में क्रमशः 73% और 86% कम हो गई हैं।
वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा की सूचना देने वाले पुलिस स्टेशनों की संख्या 2010 में 96 जिलों के 465 पुलिस स्टेशनों से घटकर 2023 में 42 जिलों के 171 पुलिस स्टेशनों पर आ गई है। भौगोलिक प्रसार में गिरावट सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना। के अंतर्गत कवर किए गए जिलों की कम संख्या में भी परिलक्षित होती है। अप्रैल 2018 में एसआरई जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 हो गई थी और जुलाई 2021 में और घट कर 70 रह गई।
यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है ।
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न ही मोहताज हूँ मैं…
कानपुर 7 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस ऍन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई द्वारा मतदाता जागरुकता विषय पर एक-दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभ आरम्भ महाविद्यालय में ऍन एस ऐस यूनिट की स्वयंसेविकाओं द्वारा स्लोगन के द्वारा किया गया एवम ऍन एस एस प्रभारी प्रोफ चित्रा सिंह तोमर ने मतदाता जागरुकता पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जिसमें महाविद्यालय की सब शिक्षिकाओं ने तथा छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया । इसके पश्च्यात स्वयंसेविकाओं ने रैली निकल कर मतदाता जागरुकता के विषय में आम नागरिकों को जागरूक किया साथ ही गॉड ली हुई बस्ती ‘छोटी बीवी का हाता’ के प्रत्येक घर में जाकर महिलाओं, पुरुषों व युवाओं को मतदान के विषय में जानकारी प्रदान की तथा उन्हें मतदान के महत्व को समझाते हुए मतदान करने के लिए प्रेरित किया। शिविर का समापन महाविद्यालय में प्राचार्य प्रो. सुमन के स्वयंसेविकाओं को दिए गए मार्ग दर्शन के द्वारा किया गया । इस अवसर पर ऍन सी सी की इकाई प्रमुख डॉ प्रीति यादव भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहीं । एवम शिविर का सफलतापूर्वक संचालन ऍन एस एस कार्यक्रम अधिकारी प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने किया।
मां हमेशा जिंदा रहती है…