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54वां आईएफएफआई: सिनेमा के उस मनमोहक सफर के लिए तैयार हो जाइए जो कथानक को फिर से परिभाषित करने का भरोसा देता है

आईएफएफआई में भारतीय पैनोरमा खंड के तहत 25 फीचर और 20 गैर-फीचर फिल्में फिल्म-प्रेमियों को शानदार सिनेमा का अनुभव प्रदान करेंगी। भारतीय पैनोरमा सत्र कल मलयालम फिल्म अट्टम के साथ शुरू होगा। विविधता में एकता और समावेशिता के व्यापक विषयों ने भारतीय पैनोरमा खंड में फिल्मों को बांध लिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार की संस्कृतियों, संभावनाओं, पहचानों और जीवन के सभी क्षेत्रों की कथानकों का प्रतिनिधित्व करने वाली फिल्मों का जश्न मनाया जा रहा है।

आनंद एकरसाही द्वारा निर्देशित, शुरुआती फिल्म एक महिला और बारह पुरुषों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिलता है।

मीना लोंगजाम द्वारा निर्देशित एक डॉक्यूमेंट्री ‘एंड्रो ड्रीम्स’ गैर-फीचर खंड में शुरुआती फिल्म होगी। मणिपुर के एक ग्रामीण गांव पर आधारित यह डॉक्यूमेंट्री एक बूढ़ी महिला लाइबी और उसके तीन दशक पुराने लड़कियों के फुटबॉल क्लब की कहानी है, जो पूर्वोत्तर भारत के एक प्राचीन गांव में आर्थिक चुनौतियों, पितृसत्तात्मक व्यवस्था और रूढ़िवादिता से जूझ रहा है।

भारतीय पैनोरमा के तहत आईएफएफआई में दिखाई जाने वाली फीचर और गैर-फीचर फिल्में एक आनंददायक अनुभव प्रदान करेंगी जो फिल्म प्रेमियों को भारतीय सिनेमा की अनूठी कथा शैली और सांस्कृतिक समृद्धि की दुनिया में गोता लगाने पर मजबूर कर देंगी।

सिनेमाई कला की मदद से भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ-साथ भारतीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए आईएफएफआई में 1978 में भारतीय पैनोरमा की शुरुआत की गई थी। अपनी स्थापना के बाद से, भारतीय पैनोरमा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह समर्पित रहा है।

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54वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा में 20 से 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा

• अंतर्राष्ट्रीय खंड में 198 फिल्में दिखाई जाएंगी, जिनमें 13 का विश्व प्रीमियर भी शामिल हैं।

• कैचिंग डस्ट’ ओपनिंग फिल्म होगी; ‘अबाउट ड्राई ग्रासेज’ मिड-फेस्ट फिल्म होगी और ‘द फेदरवेट’ समापन फिल्म होगी।

• इस साल विभिन्न प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की 19 पुरस्कार विजेता फिल्मों  को इफ्फी कैलिडोस्कोप में शामिल किया गया है।

• फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में इस वर्ष 300 अंतर्राष्ट्रीय फिल्म परियोजनाओं को उत्पादन, वितरण या बिक्री के लिए क्यूरेट और प्रदर्शित किया गया।

• प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं, छायाकारों और अभिनेताओं के साथ 20 से अधिक ‘मास्टरक्लास’ और ‘इन कन्वर्सेशन’ सत्र आयोजित किए जाएंगे।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज घोषणा की कि 54वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई-इफ्फी) 20 नवंबर 28 नवंबर 2023 तक गोवा में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर श्री ठाकुर ने कहा कि भारत के बाजार की विश्व रैंकिंग 5वें नंबर पर है, जो भारत की मीडिया और मनोरंजन उद्योग की शक्ति दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह बाजार पिछले तीन वर्षों में 20 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ हर साल बढ़ रहा है। भारत में बनी फिल्में देश के कोने-कोने में छा गई हैं और अब दुनिया के दूर-दराज स्थानों तक पहुंच रही हैं।

मंत्री महोदय ने कहा कि इस वर्ष सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार विश्व सिनेमा के दीप्तिमान सितारे श्री माइकल डगलस को प्रदान किया जाएगा, जिन्हें सिनेमाई जगत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।

श्री ठाकुर ने बताया कि इफ्फी के अंतर्राष्ट्रीय खंड में प्राप्त फिल्मों की संख्या में तीन गुना वृद्धि देखी गई है और यह इफ्फी के लिए अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उद्योग के आकर्षण का परिचायक है।

नए शुरू किए गए ओटीटी पुरस्कारों के बारे में उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से ओटीटी उद्योग ने भारत में बहुत अधिक वृद्धि की है और यह मंच हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है। इस क्षेत्र के सालाना 28 प्रतिशत वृद्धि वाली गतिशीलता को देखते हुए मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफार्मों पर उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर्स को मान देते हुए इस पुरस्कार की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि 15 ओटीटी प्लेटफार्मों से 10 भाषाओं में कुल 32 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं और विजेता को दस लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा।

श्री अनुराग ठाकुर ने देश में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के बारे कहा कि सरकारें ऐसी संस्थाओं को पोषित करने के लिए एक समर्थन प्रणाली बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म क्षेत्र में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने और देश के दूरदराज के इलाकों से प्रतिभाओं को पहचानने के लिए हमने क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो पहल की शुरुआत की थी। मंत्री महोदय ने बताया कि इस वर्ष के लिए इस खंड में 600 से अधिक प्रविष्टियां मिली हैं। इस वर्ष 75 विजेताओं के चयन से तीन वर्षों में ऐसे विजेताओं की कुल संख्या 225 हो जाएगी।

मंत्री महोदय ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस वर्ष के इफ्फी के सभी स्थलों में सभी सुविधाएं होंगी और उन तक दिव्यांगों की पहुंच होगी। दृष्टिबाधितों के लिए ऑडियो डिस्क्रिप्शन, श्रवणबाधितों के लिए सांकेतिक भाषा, कई भाषाओं में कंटेंट की डबिंग सबका साथ सबका विकास के मंत्र का प्रतीक होगा।

राज्य मंत्री डॉ. एल मुरूगन ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में कहा कि इफ्फी विश्व के सबसे बड़े फिल्म और सांस्कृतिक समारोहों में से एक है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी का नेतृत्व जाने-माने फिल्म निर्माता श्री शेखर कपूर कर रहे हैं।

यहां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण की झलकियां पेश की जा रही हैं:

  1. इफ्फी के मुख्य आकर्षण में से एक सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (एसआरएलटीए) है, जो विश्व सिनेमा में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। हॉलीवुड अभिनेता और निर्माता माइकल डगलस, जो वर्तमान में विश्व सिनेमा में सबसे महान अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों में से एक हैं, उन्हें अपनी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री कैथरीन ज़ीटा-जोन्स के साथ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

फिल्म और टेलीविजन उद्योग में 50 से अधिक वर्षों के साथ, माइकल डगलस को दो ऑस्कर, पांच गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, एक प्राइमटाइम एमी पुरस्कार और अनगिनत अन्य सम्मान मिला है। वर्ष 2023 में, उन्हें 76वें फेस्टिवल डी कान में पाल्मे डी’ओर नामक लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार मिला है। उन्हें ‘वॉल स्ट्रीट’ में गॉर्डन गेको की भूमिका के लिए अकादमी पुरस्कार से लेकर फेटल एट्रेक्शन, द अमेरिकन प्रेसिडेंट, बेसिक इंस्टिंक्ट, ट्रैफिक और रोमांसिंग द स्टोन जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों तक की भूमिकाओं के लिए जाना जाता है। माइकल न केवल एक अभिनेता हैं, बल्कि एक कुशल निर्माता भी हैं। उनकी कृतियों में वन फ्लाई ओवर द कुकूज नेस्ट और द चाइना सिंड्रोम जैसी दमदार फिल्में शामिल हैं। श्री डगलस अपने मानवीय प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। वह न्यूक्लियर थ्रेट इनीशिएटिव संगठन के बोर्ड में हैं, जो मानवता को संकट में डालने वाले परमाणु और जैविक खतरों को कम करने पर केंद्रित है। उन्हें 1998 में संयुक्त राष्ट्र के शांति दूत के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

  1. 270 से अधिक फिल्मों को महोत्सव के दौरान चार स्थानों पर प्रदर्शित किया जाएगा – आईनॉक्स पंजिम (4), माक्विनेज पैलेस (1), आईनॉक्स पोरवोरिम (4), जेड स्क्वायर सम्राट अशोक (2)।
  2. 54वें इफ्फी के ‘अंतर्राष्ट्रीय खंड‘ में 198 फिल्में होंगी। इस बार इस खंड में 53वें इफ्फी की तुलना में 18 फिल्में अधिक हैं। इसमें 13 विश्व प्रीमियर, 18 अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर, 62 एशिया प्रीमियर और 89 इंडिया प्रीमियर होंगे। इस वर्ष इफ्फी को 105 देशों से रिकॉर्ड 2926 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियां हैं।
  3. भारतीय पैनोरमा’ खंड में भारत की 25 फीचर फिल्में और 20 गैर-फीचर फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। फीचर सेक्शन में ओपनिंग फिल्म मलयालम फिल्म, अट्टम है, और गैर-फीचर सेक्शन में मणिपुर से एंड्रो ड्रीम्स है।
  4. सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कारः इस साल बेस्ट वेब सीरीज (ओटीटी) अवॉर्ड की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य ओटीटी प्लेटफार्मों के समृद्ध कंटेंट और इसके रचनाकारों को मान देना, प्रोत्साहित करना और सम्मानित करना है। 15 ओटीटी प्लेटफॉर्म से 10 भाषाओं में 32 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। समापन समारोह में घोषित होने वाली सीरीज को पुरस्कार राशि के रूप में प्रमाण-पत्र और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
  5. इस वर्ष के इफ्फी का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म खंड- इसमें आठ क्यूरेटेड सेक्शन होंगे। महत्वपूर्ण फिल्मों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं –
  • ओपनिंग फिल्मकैचिंग डस्ट | निर्देशक: स्टुअर्ट गैट | यूनाइटेड किंगडम | (इंटरनेशल प्रीमियर)- इस थ्रिलर फिल्म में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता, एरिन मोरियार्टी, जय कर्टनी, दीना शिहाबी, रयान कोर, जोस अल्टिट, गैरी फैनिन और ओल्वेन फॉरे काम कर रहे हैं। स्टुअर्ट गैट मिश्रित एशियाई विरासत के एक पुरस्कार विजेता ब्रिटिश फिल्म निर्माता हैं जिनकी कहानियां अक्सर सामयिक सामाजिक विषयों से प्रभावित होती हैं।
  • मिड-फेस्ट फिल्मअबाउट ड्राई ग्रासेज | निर्देशन: नूरी बिल्गे सीलान | फ्रांस | (इंडिया प्रीमियर)- यह प्रसिद्ध निर्देशक का एक तुर्की ड्रामा है, जिन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं। उनकी फ़िल्म विंटर स्लीप (2014) ने कान फिल्म फेस्टिवल में पाल्मे डी’ओर पुरस्कार प्राप्त किया था, जबकि उनकी छह फिल्मों को सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए तुर्की की प्रस्तुति के रूप में चुना गया है। इसमें ‘अबाउट ड्राई ग्रासेज’ भी शामिल है। यह फिल्म इस साल कान फिल्म फेस्टिवल के कॉम्पिटिशन सेक्शन में भी थी। इसकी प्रसिद्ध अभिनेत्री मर्व दिज़दार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए पुरस्कृत किया गया था
  • समापन फिल्मद फेदरवेट | निर्देशक: रॉबर्ट कोलोडनी | संयुक्त राज्य अमेरिका | (एशिया प्रीमियर)- यह 2023 की एक अमेरिकी बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो एक स्टार एथलीट की बायोपिक के माध्यम से मिथकीय और आधुनिक स्टारडम की कल्पना को उजागर करती है। इसे क्लासिक “सिनेमा वेरिटे” (यथार्थवादी सिनेमा) शैली में तैयार किया गया है। रॉबर्ट कोलोडनी एक बहुमुखी अमेरिकी निर्देशक, लेखक और छायाकार हैं। फिल्म का प्रीमियर सितंबर, 2023 में 80वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। रॉबर्ट ने कई फिल्मों के लिए फोटोग्राफी निर्देशक के रूप में कार्य किया और विभिन्न पुरस्कार विजेता फिल्मों और वृत्तचित्रों का निर्देशन भी किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड में 15 फीचर फिल्मों (12 अंतर्राष्ट्रीय + 3 भारतीय) को प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार, गोल्डन पीकॉक और 40 लाख रुपये के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अलावा ज्यूरी सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष), सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला), विशेष जूरी पुरस्कार श्रेणी में भी विजेताओं का निर्धारण करेगी। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई है और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • बेस्ट फीचर फिल्म डेब्यू डायरेक्टर– 5 अंतर्राष्ट्रीय + 2 भारतीय फिल्में प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक के लिए इस खंड में प्रतिस्पर्धा करेंगी, नकद पुरस्कार के रूप में 10 लाख रुपये और प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई है और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी– जाने-माने भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता श्री शेखर कपूर (अध्यक्ष), पुरस्कृत स्पेनिश सिनेमैटोग्राफर जोस लुइस अल्केन, मार्चे डु कान के प्रतिष्ठित पूर्व प्रमुख जेरोम पैलार्ड, फ्रांस के विपुल फिल्म निर्माता कैथरीन डसार्ट, ऑस्ट्रेलिया से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हेलेन लीके।
  • फेस्टिवल कैलिडोस्कोप इस वर्ष प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार विजेता फिल्मों को इफ्फी कैलिडोस्कोप में शामिल किया गया है। 19 फिल्में कान, वेनिस, साओ पाउलो, रॉटरडैम, सांता बारबरा, स्टॉकहोम आदि जैसे समारोहों से ली गई हैं।
  • दुनिया का सिनेमा खंड में प्रविष्टियों के माध्यम से 103 फिल्में शामिल हैं, जो दुनिया भर के सिनेमाघरों से सौंदर्यबोध और कथा वस्तुओं वाली फिल्मों में शामिल हैं। पिछले वर्षों (77) की तुलना में इनकी संख्या इस बार अधिक है।
  • डॉक्यू-मोंटाज खंड का परिचय- दुनिया भर के मनमोहक वृत्तचित्रों का समुच्चय है।
  • एनिमेशन खंड के हवाले से अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय एनिमेशन फिल्मों को क्यूरेट करने के लिए महोत्सव का विस्तार किया गया है, जिसमें एक व्यापक लाइन अप शामिल है। सौंदर्यवादी रूप से सरल और कथात्मक रूप से अचंभित कर देने वाली पोलैंड की आधिकारिक फिल्म ओसर की प्रविष्टि सहित एनिमेटेड फिल्में – द पीजेंट्स (डीआईआर: डीके वेल्चमैन, ह्यूग वेल्चमैन) फिल्में शामिल हैं। इनमें भारतीय एनिमेशन फिल्मों को भी रखा गया है।
  • पुनर्स्थापित क्लासिक्स खंड की शुरुआत- राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत एनएफडीसी-एनएफएआई द्वारा भारतीय क्लासिक्स के क्षतिग्रस्त सेल्युलाइड रीलों से सात विश्व स्तरीय फिल्मों को दुरुस्त किया गया है, जिनकी सूची इस प्रकार है-
    • विद्यापति (1937) बांग्ला, निर्देशक: देवकी बोस
    • श्यामची आई (1953), मराठीनिर्देशक: पी.के.
    • पाताल भैरवी (1951), तेलुगुनिर्देशक: के.वी. रेड्डी
    • गाइड (1965), हिंदीनिर्देशक: विजय आनंद
    • हकीकत (1964), हिंदीनिर्देशक: चेतन आनंद
    • कोरस (1974) बांग्लानिर्देशक: मृणाल सेन
    • बीस साल बाद (1962), हिंदीनिर्देशक: बीरेन नाग
    • इसके अलावा, इस खंड में तीन अंतर्राष्ट्रीय पुनर्स्थापित फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें वेनिस के द एक्सोरिस्ट एक्सटेंडेड डायरेक्टर कट और सर्गेई परजानोव की शैडोज़ ऑफ फॉरगॉटन एनसेस्टर्स शामिल हैं।
  • यूनेस्को फिल्में– यूनेस्को के आदर्शों को प्रतिबिंबित करने वाली फिल्में: 7 अंतर्राष्ट्रीय + 3 भारतीय फिल्में। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई हैं और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • सुलभ फिल्में 54वें इफ्फी में यह सुनिश्चित करने की सुविधा होगी कि विशेष रूप से दिव्यांग महोत्सव प्रतिनिधि सभी स्क्रीनिंग और अन्य स्थानों तक पहुंच सकें। उत्सव को सभी के लिए एक समावेशी और सुलभ अवसर बनाना समावेशिता की दिशा में उठाया गया एक कदम है।
    • विशेष रूप से दिव्यांग प्रतिनिधि
      • दृष्टिबाधितों के लिए: फिल्मों के साथ एम्बेडेड ऑडियो विवरण– सिर्फ एक बंदा काफी है और शेरशाह
      • श्रवण-बाधितों के लिए: फिल्मों के साथ एम्बेडेड साइन लैंग्वेज – 83 और भाग मिल्खा भाग
    • एकाधिक भाषा डबिंग– कई भारतीय पैनोरमा फिल्में अपने “स्मार्टफोन और ईयरफोन” का उपयोग करके पसंदीदा भाषा में डबिंग के साथ देखने के लिए उपलब्ध होंगी। इफ्फी ने इसके लिए ‘सिनेडुब्स’ ऐप के साथ साझेदारी की है, जिसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। ऐप के माध्यम से कई डब उपलब्ध होंगे। जिस भाषा में थिएटर में फिल्म चलाई जा रही है, उसके अलावा अन्य भाषाओं में भी यह उपलब्ध होगी।
  • इफ्फी के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में 40 से अधिक महिला फिल्म निर्माताओं की फीचर फिल्में।
  1. मास्टर क्लासेस और इन-कन्वर्सेशन सत्र- प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं, छायाकारों और अभिनेताओं के साथ 20 से अधिक ‘मास्टरक्लास’ और ‘इन कन्वर्सेशन’ सत्रों के साथ यह एक रोमांचक सप्ताह होगा। फेस्टिवल माइल, पणजी, गोवा में पुनर्निर्मित और नवीनीकृत कला अकादमी में होगा। माइकल डगलस, ब्रेंडन गाल्विन, ब्रिलेंटे मेंडोज़ा, सनी देओल, रानी मुखर्जी, विद्या बालन, जॉन गोल्डवाटर, विजय सेतुपति, सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, केके मेनन, करण जौहर, मधुर भंडारकर, मनोज बाजपेयी, कार्तिकी गोंजाल्विस, बोनी कपूर, अल्लू अरविंद, थियोडोर ग्लक, गुलशन ग्रोवर और इस सूची में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सितारे शामिल हैं।
  2. गाला प्रीमियर- पिछले साल शुरू हुए गाला प्रीमियर्स का विस्तार किया जा रहा है। इफ्फी में इन फिल्म प्रीमियर में उनके अभिनेता और प्रतिभाएं अपनी फिल्मों का प्रचार करने के लिए इफ्फी में मौजूद रहेंगी।
  3. वर्चुअल इफ्फी– मास्टरक्लास, इन-कन्वर्सेशन सत्र, पैनल चर्चा और इफ्फी के 54वें संस्करण के उद्घाटन/समापन समारोह को बुक माय शो ऐप के माध्यम से ऑनलाइन देखा जा सकता है। पंजीकरण शुल्क मामूली रखा जाएगा।
  4. फिल्म बाजार- इफ्फी संक्षेप में “विश्व सिनेमा का उत्सव” है। इसके साथ ही एनएफडीसी द्वारा “सिनेमा के व्यवसाय” के लिए एक फिल्म बाजार का आयोजन किया जाता है। इफ्फी का फिल्म बाजार दक्षिण एशिया में सबसे बड़े वैश्विक फिल्म बाजार में से एक के रूप में विकसित हुआ है। यह अंतर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं, निर्माताओं, बिक्री एजेंटों और उत्सव प्रोग्रामर के हवाले से संभावित रचनात्मक और वित्तीय सहयोग के संबंध में एक आदर्श इकोसिस्टम के रूप में कार्य करता है। इस तरह “एनएफडीसी फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार किया जाएगा
    • फिल्म बाजार में मंडप और स्टॉल –
      1. वीएफएक्स और टेक पवेलियन– एक नए क्यूरेटेड “वीएफएक्स एंड टेक पवेलियन” को फिल्म बाजार में एकीकृत किया गया है, जिसे समुद्र के सामने तैयार किया गया है। यह फिल्म निर्माताओं को नवीनतम नवाचारों से अवगत कराएगा, न केवल “टेकिंग द शॉट” के पारंपरिक तरीके से कहानी कहने की संभावनाओं की पड़ताल करने के लिए, बल्कि अनंत संभावनाओं के साथ “क्रिएटिंग द शॉट” के बारे में भी।
      2. अंतर्राष्ट्रीय फिल्म आयोगों और भारतीय राज्यों के कई स्टॉल उनके स्थानों व प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए होंगे।
      3. फिल्म से संबंधित प्रोडक्शंस हाउस, संस्थानों, संघों आदि के कई स्टॉल।
    • वृत्तचित्र और गैर-फीचर परियोजनाओं/फिल्मों का परिचय
    • ज्ञान श्रृंखला” फिल्म निर्माण और वितरण के महत्वपूर्ण पहलुओं के साथ-साथ चयनित फिल्म निर्माताओं, देशों और राज्यों के मद्देनजर गहन चर्चा सत्र शामिल करने के लिए तैयार किया गया।
    • पिछले साल शुरू हुए, ‘बुक टू बॉक्स ऑफिस खंड ने ‘द स्टोरी इंक’ के साथ साझेदारी की है। इसका मुख्य उद्देश्य रचनात्मक लेखकों को अपना काम प्रस्तुत करने के लिए एक मंच प्रदान करना और इन कहानियों को निर्माताओं और मंच के प्रमुखों को पेश करना है।
    • कुल मिलाकर उत्पादनवितरण या बिक्री के लिए फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में 300 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म परियोजनाएं क्यूरेट और प्रदर्शित की जाएंगी।
  1. 75 क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो (सीएमओटी): माननीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर की पहल। इस पहल का उद्देश्य फिल्म निर्माण के विभिन्न व्यवसायों से युवा रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान करना, प्रोत्साहित करना और पोषण करना है। शॉर्ट्स टीवी वैचारिक प्रोग्रामिंग पार्टनर है, जो टीवी पर, मोबाइल पर, ऑनलाइन और सिनेमाघरों में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली लघु फिल्मों और श्रृंखलाओं की दुनिया की सबसे बड़ी श्रृंखला पेश करता है। इन चयनित ‘क्रिएटिव माइंड्स’ को ‘फिल्म चैलेंज’ के लिए 5 टीमों में विभाजित किया गया है। यह 48 घंटों में एक लघु फिल्म बनाने के लिए है। इस वर्ष उम्मीदवारों के पास विशेष रूप से सिनेमा के मास्टर्स द्वारा क्यूरेट की गई पेशेवर कक्षाएं भी होंगी और भर्ती के लिए 20 से अधिक अग्रणी कंपनियों के साथ एक “प्रतिभा शिविर” आयोजित किया जाएगा।
  2. इफ्फी सिने-मेलाइफ्फी न केवल सिनेमाई उत्कृष्टता का प्रदर्शन है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता का उत्सव भी है। इस वर्ष, इफ्फी सिने-मेला सिनेमाई उत्सवों के लिए एक शानदार पहल होगी। इसके लिए उपस्थित लोग और यहां तक कि अन्य लोग जैसे कि स्थानीय लोग और पर्यटक जो इफ्फी के लिए पंजीकृत नहीं हैं, वे भी सिनेमा, कला, संस्कृति, शिल्प, खान-पान आदि से संबंधित रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
  3. अन्य आकर्षण: इफ्फी को दुनिया के लिए भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक समारोहों में से एक के रूप में बढ़ाने के लिए ओपन एयर स्क्रीनिंग, कारवां, शिगमोत्सव, गोवा कार्निवल, सेल्फी पॉइंट, इफ्फी मर्चेंडाइज आदि का आयोजन किया गया।
  4. महोत्सव स्थलों की ब्रांडिंग और सजावट : एनएफडीसी और ईएसजी ने महोत्सव स्थलों की पूरी सजावट और ब्रांडिंग के लिए एनआईडी, अहमदाबाद के साथ साझेदारी की है।
  5. भारत की संस्कृतियों का उत्सव (5 दिन) फिल्म स्क्रीनिंग को रेखांकित करते हुए, गाला प्रीमियर्स और अपने-अपने क्षेत्रों का प्रदर्शन करने के लिए फिल्म प्रतिभाएं अपनी प्रतिभा का परिचय देंगी।
      • 22 वीं: पूर्व: बांग्लाउड़ियाअसमियामणिपुरी और उत्तर पूर्वी बोलियां
      • 23 वां: दक्षिण 1: तमिल और मलयालम
      • 24 वीं: उत्तर: पंजाबीडोगरीभोजपुरीराजस्थानीउर्दूछत्तीसगढ़ी
      • 25 वां: पश्चिम: कोंकणीमराठीगुजराती
      • 26 वां: दक्षिण 2: कन्नड़ और तेलुगू

6. इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट https://iffigoa.org/. पर दैनिक घोषणाएं और अपडेट देखे जा सकते हैं।

7. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) के माध्यम से गोवा राज्य सरकार के साथ संयुक्त रूप से अपनी एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) के माध्यम से 20 से 28 नवंबर, 2023 तक गोवा में 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) का आयोजन कर रहा है।

8. इफ्फी दुनिया के 14 सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता फीचर फिल्म समारोहों’ में से एक है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एफआईएपीएफ) द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह विश्व स्तर पर फिल्म समारोहों को नियंत्रित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। कान, बर्लिन और वेनिस जैसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह ऐसे अन्य प्रतिष्ठित उत्सव हैं, जो इस श्रेणी के तहत एफआईएपीएफ द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

9. यह वार्षिक सिनेमाई समारोह वर्षों से विश्व और भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों का गंतव्य रहा है, जिसमें भारत के फिल्म उद्योग के साथ-साथ दुनिया भर के दिग्गज प्रतिनिधि, अतिथि और वक्ता इसकी शोभा बढ़ाते हैं।

अनुलग्नक

54वां इफ्फी 2023

फिल्म सूची– प्रतियोगिताएं

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता (आईसी)- 15 फिल्में

अंड्रेगोगी | निर्देशक : रेगास भानुतेजा | इंडोनेशिया | 2023 | इन्डोनेशियाई | 110′ | आईसी
ब्लागाज लेसंस | निर्देशक: स्टीफन कोमांदारेव | बुल्गारिया, जर्मनी | 2023 | बल्गेरियाई | 114′ | आईसी
बोस्नियाई पॉट | निर्देशन: पावो मारिनकोविच | क्रोएशिया | 2023 | क्रोएशियाई, जर्मन | 103′ | आईसी
एंडलेस बॉर्डर्स | निर्देशक: अब्बास अमीनी | इस्लामी गणराज्य ईरान | 2023 | फारसी | 111′ | आईसी
हॉफमैन्स फैरी टेल्स | निर्देशक: टीना बरकलाया | रूसी संघ | 2023 | रूसी | 88′ | आईसी
लुबो | निर्देशन: जियोर्जियो डिरिट्टी | इटली, स्विट्ज़रलैंड | 2023 | इतालवी, स्विस जर्मन, जेनिश | 181′ | आईसी
मेजर्स ऑफ मैन | निर्देशन: लार्स क्रुम | जर्मनी | 2023 | जर्मन | 116′ | आईसी
पार्टी ऑफ फूल्स | निर्देशन:­ अरनॉड डेस पल्लीरेस | फ्रांस | 2023 | फ्रेंच | 122′ | आईसी
द अदर विंडो | निर्देशक: मा’अयान रिप्प | इज़राइल | 2022 | हिब्रू | 83′ | आईसी
वुमन ऑफ | निर्देशक: स्ज़ुमोव्स्का, माइकल एंगलर्ट | पोलैंड | 2023 | पोलिश | 132′ | आईसी
असोग | निर्देशक: शान डेवलिन | कनाडा | 2023 | अन्य, तागालोग | 99′ | आईसी
डाइ बिफोर डेथ | निर्देशक: अहमद इमामोविच | बोस्निया और हर्जेगोविना | 2023 | बोस्नियाई | 94′ | आईसी
कंतारा | निर्देशक: ऋषभ शेट्टी | भारत | 2022 | कन्नड़ | 150′ | आईसी
सना | निर्देशक: सुधांशु सरिया | भारत | 2023 | हिंदी | 119′ | आईसी
मीरबेन | निर्देशक: मृदुल गुप्ता | भारत | 2022 | कर्बी | 89′ | आईसी

 

बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर अवार्ड (बीडी) – फिल्में

 

ऑलमोस्ट एंटायरली अ स्लाइट डिजास्टर | निर्देशक : उमुत सुबासी | तुर्की | 2023 | अंग्रेज़ी, तुर्की | 88′ | बीडी
लेट मी गो | निर्देशन: मैक्सिम रैपज़ | स्विट्ज़रलैंड | 2023 | फ्रेंच | 92′ | बीडी
ओकारिना | निर्देशक: अल्बान ज़ोगजानी | अल्बानिया | 2023 | अल्बेनियन, अंग्रेज़ी | 92′ | बीडी
स्लीप | निर्देशक: जेसन यू | दक्षिण कोरिया | 2023 | कोरियाई | 95′ | बीडी
वेन द सीडलिंग्स ग्रो | निर्देशक : रेगर आजाद काया | सीरियाई अरब गणराज्य | 2022 | अरबी, कुर्द | 83′ | बीडी
ढाई आखर | निर्देशक: परवीन अरोड़ा | भारत | 2023 | हिंदी | 98′ | बीडी
इरत्ता | निर्देशक: रोहित एम.जी. कृष्णन भारत | 2023 | मलयालम | 112 ‘ | बीडी

 

आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पदक पुरस्कार – 10 फिल्में

ए हाउस इन यरूशलेम | निर्देशक: मुयाद अलायन | फिलिस्तीन, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, कतर | 2022 | अंग्रेज़ी, अरबी, हिब्रू | 103′ | आईसीएफटी यूनेस्को
सिटिजन सेंट  निर्देशक: तिनातिन कजिरिश्विली | जॉर्जिया | 2023 | जॉर्जियाई | 100′ | आईसीएफटी यूनेस्को
ड्रिफ्ट | निर्देशक: एंथनी चन | ब्रिटेन, फ्रांस, ग्रीस | 2023 | अंग्रेज़ी, ग्रीक | 93′ | आईसीएफटी यूनेस्को
इट्स सिरा | निर्देशन: एपोलिन ट्राओरे | बुर्किना फासो, फ्रांस, जर्मनी, सेनेगल | 2023 | फ्रेंच, फुला | 122′ | आईसीएफटी यूनेस्को
कालेव | निर्देशक: ओव मस्टिंग | एस्टोनिया | 2022 | एस्टोनियाई, रूसी | 94′ | आईसीएफटी यूनेस्को
द प्राइज! | निर्देशक: पॉल फौजान अगस्ता | इंडोनेशिया | 2022 | इन्डोनेशियाई | 96′ | आईसीएफटी यूनेस्को
द सुगर एक्सपेरिमेंट | निर्देशक: जॉन टॉर्नब्लैड | स्वीडन | 2022 | स्वीडिश | 91′ | आईसीएफटी यूनेस्को
मंडली | निर्देशक: राकेश चतुर्वदी ओम | भारत | 2023 | हिंदी | 118′ | आईसीएफटी यूनेस्को
मलिकापुरम | निर्देशक: विष्णु शशि शंकर | भारत | 2022 | मलयालम | 121′ | आईसीएफटी यूनेस्को
रबिन्द्र काब्य रहस्य | निर्देशक: सायंतन घोसन | भारत | 2023 | बांग्ला | 115′ | आईसीएफटी यूनेस्को

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भारतीय रेल 16 नवंबर को दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारत गौरव ट्रेन टूर का संचालन करेगी

रेल मंत्रालय, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) लिमिटेड के साथ एक सहयोगात्मक पहल में, पूर्वोत्तर राज्यों के संबंध में अनछुए स्थानों को बढ़ावा देने के लिए “नॉर्थ ईस्ट डिस्कवरी” टूर संचालित कर रहा है। भारत गौरव डीलक्स वातानुकूलित पर्यटक ट्रेन पर विशेष रूप से आयोजित किए जाने वाला यह टूर 16 नवंबर, 2023 को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करेगा। इस टूर में असम के गुवाहाटी, शिवसागर, जोरहाट और काजीरंगा, त्रिपुरा के उनाकोटि, अगरतला और उदयपुर, नागालैंड के कोहिमा और दीमापुर तथा मेघालय के शिलांग और चेरापूंजी शहर शामिल हैं, जिनका 15 दिनों के दौरे में भ्रमण किया जाएगा।

भारत गौरव डीलक्स वातानुकूलित पर्यटक ट्रेन में दो डाइनिंग कार/रेस्तरां, एक समकालीन रसोईघर (फ्लेमलेस), एसी I और एसी II कोचों में शॉवर क्यूबिकल, सेंसर-आधारित वॉशरूम फ़ंक्शन, फुट मसाजर और एक मिनी लाइब्रेरी सहित अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। पूरी तरह से वातानुकूलित इस ट्रेन में एसी I, एसी II और एसी III तीन प्रकार की आवास सुविधा उपलब्ध हैं। ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रॉनिक तिजोरियां और प्रत्येक कोच के लिए नियुक्त किए गए समर्पित सुरक्षा गार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

14 रातों और 15 दिनों के इस टूर के लिए चलने वाली इस ट्रेन का पहला पड़ाव गुवाहाटी है जहां पर्यटक कामाख्या मंदिर और उसके बाद उमानंद मंदिर तथा ब्रह्मपुत्र नदी में सूर्यास्त क्रूज का भ्रमण करेंगे। इसके बाद यह ट्रेन रात्रिकालीन यात्रा पर नाहरलागुन रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होगी जो अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यात्रा का अगला पड़ाव शहर शिवसागर है- जो असम के पूर्वी हिस्से स्थित है और अहोम साम्राज्य की पुरानी राजधानी है। यहां के प्रसिद्ध शिव मंदिर सिवाडोल के साथ-साथ तलातल घर और रंग घर (पूर्व का कोलोसियम) जैसे अन्य विरासत स्थलों की यात्रा भी इस कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके अलावा पर्यटकों को जोरहाट में चाय के बागानों और काजीरंगा में रात भर रुकने के साथ-साथ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सुबह की जंगल सफारी का अनुभव भी कराया जाएगा। इसके बाद यह ट्रेन त्रिपुरा राज्य के लिए प्रस्थान करेगी, जहां मेहमानों को सघन जम्पुई पहाड़ियों में प्रसिद्ध विरासत स्थल उनाकोटि के दर्शनीय स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। इसके बाद वे राजधानी अगरतला के लिए आगे बढ़ेगें, जहां की यात्रा में उन्हें प्रसिद्ध उज्जयंता पैलेस, नीरमहल और उदयपुर में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की यात्रा कराई जाएगी।

त्रिपुरा के बाद, यह ट्रेन नागालैंड राज्य को कवर करने के लिए दीमापुर के लिए प्रस्थान करेगी। बदरपुर स्टेशन से लुमडिंग जंक्शन के बीच की प्राकृति सौंदर्य से भरी इस सुंदर ट्रेन यात्रा का मेहमान सुबह के शुरुआती घंटों में अपनी सीटों से ही लुत्फ उठा सकते हैं। दीमापुर स्टेशन से पर्यटकों को बसों द्वारा कोहिमा ले जाया जाएगा जहां वे नागा जीवन शैली का अनुभव करने के लिए खोनोमा गांव का भ्रमण करने सहित अन्य स्थानीय स्थलों का भी अवलोकन करेंगे। इस पर्यटक ट्रेन का अगला पड़ाव गुवाहाटी होगा जहां से पर्यटकों को सड़क मार्ग से मेघालय की राजधानी शिलांग ले जाया जाएगा और उनका रास्ते में राजसी उमियम झील पर रुकने का कार्यक्रम है। अगले दिन की शुरुआत पूर्वी खासी पहाड़ियों में बसे चेरापूंजी की यात्रा से होगी। जहां पर्यटक शिलांग पीक, एलिफेंट फॉल्स, नवाखलिकाई फॉल्स और मावसमाई गुफाओं जैसे दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करेंगे। चेरापूंजी से पर्यटक वापसी यात्रा में दिल्ली वापस लौटने के लिए गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होंगे। इस यात्रा के दौरान यह ट्रेन लगभग 5800 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

यह उल्लेखनीय है कि भारत गौरव पर्यटक ट्रेन का शुभारंभ घरेलू पर्यटन को बढावा देने के लिए भारत सरकार की पहल “एक भारत श्रेष्ठ भारत” और “देखो अपना देश” के अनुरूप है। आईआरसीटीसी पर्यटक ट्रेन का यह 15 दिनों का सर्व-समावेशी टूर पैकेज होगा, जिसमें संबंधित श्रेणी में ट्रेन यात्रा, वातानुकूलित होटलों में रात्रि प्रवास, सभी भोजन (केवल शाकाहारी), बसों में सभी स्थानांतरण और दर्शनीय स्थलों की सैर, यात्रा बीमा, टूर एस्कॉर्ट की सेवाएं शामिल होंगी। इसके अलावा इसमें सभी आवश्यक स्वास्थ्य निवारक उपायों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और आईआरसीटीसी मेहमानों को एक सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करने का पूरा प्रयास करेगा।

अधिक जानकारी के लिए आप https://www.irctctourism.com/bharatgaurav पर जा सकते हैं, जहां बुकिंग ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर ऑनलाइन उपलब्ध है।

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भारतीय रेलवे ने इस त्योहारी मौसम के दौरान यात्रियों की सुगम और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 283 विशेष रेल सेवाओं को अधिसूचित किया है

भारतीय रेलवे इस समय चल रहे वर्तमान त्योहारी मौसम में रेल यात्रियों की सुविधा के लिए और यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए, इस वर्ष छठ पूजा तक 283 विशेष रेल सेवाओं की 4480 फेरे संचालित कर रहा है। दिल्ली-पटना, दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा, दानापुर-सहरसा, दानापुर-बेंगलुरु, अंबाला-सहरसा, मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर, पुरी-पटना, ओखा- नाहरलागुन, सियालदह-न्यू जलपाईगुड़ी, कोचुवेली-बेंगलुरु, बनारस-मुंबई, हावड़ा-रक्सौल आदि जैसे रेलवे मार्गों पर देश भर के प्रमुख स्थलों को जोड़ने के लिए विशेष ट्रेनों की योजना बनाई गई है। वर्ष 2022 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 216 पूजा स्पेशल रेलगाड़ियों के 2614 फेरे अधिसूचित किए थे।

 

                        अधिसूचित पूजा/दिवाली/छठ विशेष रेलगाड़ियां -2023 (19.10.23 तक)
क्रम संख्या रेलवे अधिसूचित विशेष रेलगाड़ियों की संख्या अधिसूचित फेरों की कुल संख्या
1 मध्य रेलवे 14 100
2 पूर्व मध्य रेलवे 42 512
3 पूर्व तटीय रेलवे 12 308
4 पूर्वी रेलवे 8 42
5 उत्तर रेलवे 34 228
6 पूर्वोत्तर रेलवे 4 26
7 पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 22 241
8 उत्तर पश्चिम रेलवे 24 1208
9 दक्षिण रेलवे 10 58
10 दक्षिण पूर्वी रेलवे 8 64
11 दक्षिण मध्य रेलवे 58 404
12 दक्षिण पश्चिम रेलवे 11 27
13  पश्चिम रेलवे 36 1262
  कुल योग 283 4480

 

अनारक्षित यानों में यात्रियों के व्यवस्थित प्रवेश के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मचारियों की देखरेख में टर्मिनस स्टेशनों पर कतार बनाकर भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जवानों को तैनात किया गया है। रेलगाड़ियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अधिकारियों को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया गया है। रेल सेवा में किसी भी व्यवधान को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के लिए विभिन्न अनुभागों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

प्लेटफॉर्म नंबरों के साथ रेलगाड़ियों के आगमन/प्रस्थान की लगातार और समय पर घोषणा के लिए उचित उपाय किए गए हैं।

महत्वपूर्ण स्टेशनों पर “मे आई हेल्प यू” यानी मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ जैसे बूथ चालू रखे गए हैं जहां यात्रियों की उचित सहायता और मार्गदर्शन के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कार्मियों और चल टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को तैनात किया गया है। चिकित्सा टीमें कॉल पर प्रमुख स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। पैरामेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस भी उपलब्ध है।

सुरक्षा एवं सतर्कता विभाग के कर्मचारियों द्वारा किसी भी कदाचार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विशेष रूप से प्रतीक्षलय, विश्राम गृह, प्लेटफॉर्म और सामान्य तौर पर स्टेशनों पर सफाई बनाए रखने के निर्देश क्षेत्रीय मुख्यालय द्वारा दिए गए हैं।

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विक्षिप्तता पंगु होने का दूसरा रूप है

विक्षिप्तता पंगु होने का दूसरा रूप है। पंगु व्यक्ति शरीर से लाचार होता है और विक्षिप्त व्यक्ति दिमाग से लाचार। बच्चियों, महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए अपराध सीमा लांघते हुए नजर आ रहे हैं। 10, 15, 17 साल की बच्चियां जो दुनिया को अभी ठीक से जानती भी नहीं वहशियों की दरिंदगी का शिकार हो जाती है। ऐसा नहीं है कि कानून नहीं है और नए कानून बने नहीं लेकिन यह कानून कारगर कितने हैं? न्याय मिलने में वक्त कितना लगता है? इसके अलावा उन बच्चियों का पूरा जीवन डर और समाज की घूरती और प्रश्नवाचक नजरों का सामना करते हुए बीत जाता है। शादी ब्याह में भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता होगा क्योंकि हम अभी भी बाह्य रूप से तो बदल गए हैं लेकिन मानसिक रूप से अभी भी रूढ़िवादी हैं। अपनी सहज सुविधानुसार ही हम चीजों को अपनाते और छोड़ते हैं।

मैंने देखा है कि युद्ध में भी शिकार महिलाएं ज्यादा होती है। उनके हिस्से में बर्बरता ज्यादा आती है। अपने दुश्मन को सबक सिखाने के लिए और अपनी मर्दानगी साबित करने के लिए कमजोर निहत्थी महिलाओं को हथियार बनाया जाता है। युद्ध हो,  राजनीतिक साजिशें हों या सिर्फ भोग्य नजरिया निशाना सिर्फ बच्चियां, महिलाएं ही होती हैं। अभी हाल ही में उज्जैन की घटना विचलित कर देने के लिए काफी है। दिव्या,  आसिफा, ट्विंकल शर्मा यह लोगों के जेहन से उतर गयीं होगीं। उन्नाव, कठुवा, सीतापुर दुष्कर्म की घटनाएं भी लोगों के जेहन से उतर गई होगीं और ऐसी न जाने कितनी घटनाएं हैं जो हर कुछ थोड़े समय पर नजर आतीं है लेकिन लोगबाग भूल बहुत जल्दी जाते हैं। मणिपुर की घटनाएं दिल दहला देने के लिए काफी है। दोनों समुदायों द्वारा की गई हिंसा का शिकार महिलाएं ही ज्यादा रहीं हैं।
कितना अजीब होता है यह शब्द प्रेम और भरोसा। समय के साथ शायद इन सबके मायने भी बदल गए हैं। प्रेम में आंख बंद करके भरोसा करना और मर्यादा से बाहर कदम रखना मतलब आत्मघाती कदम उठाना। इस तरह के कदम ऐसी घटनाओं को अंजाम देते है। एक लड़की जो भरोसे के साथ कदम बढ़ाती है और  विक्षिप्त मानसिकता के लोग उनके भरोसे को तोड़कर उसे अपमानित कर समाज में डर फैलाते हैं। इस तरह के लोग समाज के लिए कलंक है और इसे खत्म किया जाना चाहिए।
यह सही है कि कपड़ों को विक्षिप्तता से नहीं जोड़ सकते लेकिन कपड़े भी अश्लीलता के मायने तय करते हैं। बेढंगे कपड़े जिन पर हम स्त्रियों की नजर ठहर जाती है तो पुरुषों की बात ही क्या करना? और आजकल तो रील्स बनाने के नाम पर फूहड़ता बहुत फैलाई जा रही है। छोड़ी, बड़ी उम्र की महिलाएं सीमाएं लांघती नजर आ रही हैं।
विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण एक सहज प्रक्रिया है जिससे हर कोई गुजरता है लेकिन यह आकर्षण इतना ज्यादा होने लगता है कि लोग अच्छा बुरा समझना छोड़ देते हैं। 18+ वाली लड़कियां इसी आकर्षण के चलते अपने साथी पर बहुत जल्दी भरोसा भी कर लेती हैं, क्योंकि आजकल गर्लफ्रैंड को लड़के भावी पत्नी बोलते हैं जिससे उन्हें लायसेंस मिल जाता है मनचाहा कदम उठाने का और इसी चक्कर मे लड़कियां खुद का पतन कर बैठती हैं।
आज बहुत जरूरी हो गया है की लड़कियों को सेक्स, प्यार उससे होने वाले दुष्परिणाम के बारे में जानकारी दी जाए। उन्हें अपनी पारिवारिक परंपराओं और अपनी संस्कृति का ज्ञान दिया जाए ताकि ऐसा कदम उठाने से पहले वो विचार करें और सही गलत का फर्क कर सके।
आखिर क्या वजह है इस विक्षिप्तता की? अपराध पहले भी होते थे लेकिन इतने वीभत्स नहीं। और आज इंसान की जमीर, संवेदनशीलता की बात करना बेमानी है।  क्या सोशल मीडिया और फिल्मों के जरिए जो गंदगी परोसी जा रही है वह जिम्मेदार है इन घटनाओं के पीछे? सस्ता मनोरंजन का परिणाम बहुत घातक होता है। लोग मानसिक रोग के शिकार होते जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए और कानून का डर भी होना चाहिए जोकि बहुत जरूरी है।

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क्राइस्ट चर्च महाविद्यालय की को~करिकुलर कमेटी द्वारा एक्शन और एक्टिंग विषय पर कार्यशाला आयोजित

कानपुर 21 अक्टूबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च महाविद्यालय की को~करिकुलर कमेटी द्वारा दिनांक २०/१०/२०२३ से दो दिवसीय कार्यशाला का कॉलेज के प्राचार्य जोसेफ डेनियल के दिशा निर्देशन में आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता परवेज खान एक्शन और एक्टिंग गुरु मुंबई से आए इस कार्यक्रम का आयोजन डॉक्टर संजय सक्सेना समन्वयक तथा सह समन्वयक डॉ मीत कमल द्वारा कराया गया कार्यक्रम का उक्त संचालन मानवी शुक्ला द्वारा किया गया इसके साथ कार्यशाला के प्रथम दिन परवेज खान सर द्वारा एक्शन के मुख्य तत्व एवं आधारो को समझाया गया और कुछ एक्सरसाइज कराई गई उसके बाद सही माइनो एक्शन कैसे होता है उसका डेमो भी सर द्वारा प्रस्तुत किया गया इसी प्रकार की प्रक्रियाओं के साथ कार्यशाला के दूसरे दिन भी सर द्वारा कुछ एक्सरसाइज एवं एक्शन के डेमो कराए कार्यशाला में 100 से अधिक छात्र एवं छात्राओं ने प्रतिभाग किया और कार्यशाला के आखिरी दिन महाविद्यालय द्वारा सर को स्मृति चिन्ह देकर उनका सम्मान किया गया इसी के साथ 2 दिन की कार्यशाला का समापन किया गया

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जम्मू-कश्मीर में 82 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 395 मीटर (2-लेन) मारोग सुरंग के साथ 250 मीटर सेतु (2-लेन) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है : गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक पोस्ट में कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुमानित लागत पर 395 मीटर (2-लेन) मारोग सुरंग के साथ 250 मीटर सेतु (2-लेन) का 82 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

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गडकरी ने कहा कि यह अवसंरचना एनएच-44 के रामबन से बनिहाल खंड के साथ स्थित है। बड़ी परियोजना के हिस्से के रूप में यह 645 मीटर का खंड, न केवल यात्रा की दूरी को 200 मीटर तक कम कर देगा, खड़ी ढलानों को कम करेगा, बल्कि प्रसिद्ध सीता राम पासी स्लाइड क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की सुविधा भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्‍त, यह चुनौतीपूर्ण मार्गों क्षेत्र की ढलानों को दरकिनार करते हुए वाहनों के सुचारू प्रवाह की सुविधा प्रदान करता है।

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गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के तहत हमने जम्मू और कश्मीर में अद्वितीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि यह रूपांतरकारी विकास न केवल क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि में योगदान देता है बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में इसके आकर्षण को भी बढ़ाता है।

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वजूद है तुम्हारा मेरी तलाश में

हाथो में जाम थामे विराज पूरी महफ़िल में झूमता सा दिख रहा था..,
कुंवर प्रताप सिंह का बेटा विराज जिसका व्यक्तित्व देखने में बिन्दास ,मन मौजी सा ,मगर अन्दर से गंभीर, शांत व्यक्तित्व का स्वामी था।
विराज की ख़ुशी की वजह सौम्या का पार्टी मे होना ही था ।
शांत स्वभाव वाली सौम्या,..सोने जैसा रंग और उस पर नीले रगं के लिबास में लिपटी पार्टी में सब से मिल रही थी।
कुंवर प्रताप सिंह के चरण स्पर्श कर उनको उनके जन्मदिन की हार्दिक बधाई देती है कुँवर प्रताप सिंह जाने माने शहर के लोगों में से एक है .. सौम्या उनके दोस्त की बेटी जो इंग्लैंड से डिग्री ले आई थी अभी।
विराज की नज़रें सौम्या पर ही थी।धड़कते दिल से सौम्या के पास आया और धीरे से अपने होंठ सौम्या के कान के पास ले जा पूछने लगा ! कब आई इंग्लैंड से ? मुझे बताया नहीं ,कि तुम आने वाली हो।सौम्या ने मुड़ कर देखा तो विराज को अपने बेहद क़रीब पाया।विराज कहता जा रहा था। सौम्या तुम पर तो इंग्लैंड का रंग बिलकुल नही चढा।
वही हीरे जैसी चमकती आँखे जो झील से भी गहरी है ..पार्टी में म्यूज़िक की आवाज़ ऊँची होने पर भी सौम्या विराज की हर बात को सुन पा रही थी। सौम्या ने इक नज़र विराज को देखा, और बिना कुछ कहे आगे निकल गई। विराज सौम्या के पास जा कर कहने लगा !
तुम से बात करनी है मुझे ..इतने सालों के बाद तुम्हें मिल रहा हूँ और तुम ….,
सौम्या बोली !
होश में तो आप आ जायें पहले,फिर बात भी कर लूँगी और फिर जल्दी से कुंवर प्रताप सिंह से इजाज़त ले कर पार्टी से निकल गई। विराज को लगा जैसे कोई हवा का झोंका आया और उसके दिल और दिमाग़ पर तूफ़ान सा छोड़ गया और उसके बाद पार्टी में क्या हुआ,सबसे बेख़बर सा ,लुटा लुटा सोच रहा था।पार्टी तो चल रही है लोग भी है यहाँ, पर मैं क्यों ख़ाली ख़ाली सा महसूस कर रहा हूँ।क्या हो गया मुझे इक दम अचानक से ? वजह भी जानता था विराज ….
ज़िन्दगी में कोई ख़ास ऐसा होता ही है .. जिस के होने,या न होने से बहुत फ़र्क़ पड़ता है ..ऐसा कोई ख़ास शख़्स ,रूह से जुड़ा होता है
जिस के बिना हर चीज़ बे-मायने हो जाती है।और उसकी जुदाई आप की रूह को जला डालती है ।
उसे याद आ रहा था कि कैसे सौम्या और वो इक दूजे को चाहते थे मगर विराज की शादी रोशनी से,जो शहर के जाने माने रईस की बेटी थी तय कर दी गई थी ।जब सौम्या को उसकी सगाई का पता चला तो बिना कुछ कहे लंदन चली गई थी .. .. सौम्या की नाराज़गी से वाक़िफ़ था विराज।
इक रोज़ विराज ने सौम्या को काफ़ी के लिए बुलाया।
सौम्या के लिए न करना आसान नही था।रेस्टोरेन्ट में सौम्या का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा विराज बार बार घड़ी देख रहा था तभी उसने सौम्या को देखा आते हुये देखा…
कच्चे पीले रंग का दुपट्टा ,जो बार बार लहरा कर उसके चेहरे को ढके जा रहा था ,उसपर आँखो पर काला चश्मा बेहद खूबसूरत लग रहा था।
सौम्या की गंभीर आँखों को देख कर विराज बोला! नाज़ है मुझे मेरी पसंद पर ..
तुम कुछ भी न कहो चाहे ,सौम्या मगर
मेरी मौजूदगी तुम्हारी आँखों में आज भी साफ़ दिख रही है…
. वजूद तो तुम्हारा है वहाँ …मगर मेरी ही तालाश में ..
अक्सर तुम्हारी तसवीर देखता हूँ तुम्हारे फ़ोन पर
होंठों पर मुस्कुराहट तो होती है वहाँ..मगर फीकी फीकी सी …. जैसे तुम्हारी आँखे देखती तो सबको है ,मगर ढूँढती मुझे ही है।
सौम्या बोली! इतना जानते हो मुझे ,तो ये भी जानते होंगे कि मैं नाराज़ हूँ आप से।मेरे लिए ,मेरी चाहत के लिए जरा सा भी लड़ नहीं पाये किसी से ..और मुझे नहीं पता था कि आप रोशनी से शादी कर लोगे ।मुझे लगा !आप और मैं …कहते कहते सौम्या का गला भर आया।सौम्या कहती जा रही थी..विराज आप भागते जा रहे हो दुनिया की चाहते ले कर ..और मैं …कुछ न चाह कर ..बस आप तक ही आ कर ठहर गई थी मगर आप वहाँ न ठहर सके।विराज बोला !
तुम ने ये कैसे सोचा कि मैं रोशनी से शादी करूँगा। मेरी मजबूरी थी वो ,शायद तुम्हें नहीं पता।जब मेरी सगाई की हुई ।तब पापा की तबियत इक दम से ख़राब हो गई थी और पापा दिल्ली अस्पताल में दाखिल थे।तब मैं पापा से कुछ नहीं कहना चाहता था ,मगर कुछ दिन बाद मैंने वो रिश्ता खुद ही तोड़ दिया था। रोशनी ने भी इस बात को समझा कि वो मेरे साथ कभी ख़ुश नहीं रह पायेगी।तब तक तुम जा चुकी थी। तुम ने मुझ से कोई सवाल नहीं किया ,न ही कभी कोई जवाब माँगा.. भरोसा नहीं था मुझ पर ,या मेरे प्यार पर ..कितना इन्तज़ार किया है मैंने तुम्हारा ।मैं तुम्हें चाहता था मगर खुद ही जान नहीं पाया मैं, कि तुम मेरे लिए कितनी ज़रूरी थी।तुम्हीं मेरा प्यार हो ,तुम मेरा बचपन हो ,.. तुम ही तो हो जिस ने मेरे दिल पर राज किया है।
सौम्या बोली! तो क्या आप रोशनी को चाहते नहीं थे।पागल हो तुम !
इतना भी पहचान नहीं पाई मुझे।विराज का यूँ सौम्या को पागल कहना ,सौम्या को इक अपनेपन का अहसास करवा रहा था
विराज बोला।रोशनी को बचपन से जानता ज़रूर हूँ मगर अपनी पत्नी के रूप में उसे कभी नहीं देखा था।
मेरी बेशुमार चाहतों की तुम ही अकेली वारिस रही हो।
सौम्या बोली !विराज
पिछले चार सालों में मैंने दर्द तो सहा ,मगर आप से नाराज़ नहीं हो पाई।विराज बोला ! सौम्या किसी से हँस कर बात करना ,प्यार नहीं होता .. ,जो दिल मे छिपा रहता है वही प्यार है,ज़ाहिर रिश्तों मे गहराई नही हुआ करती।रोशनी मेरी दोस्त से ज़्यादा कुछ भी नहीं ..याद है मुझे इक रोज़ तुम ने कहा !तुम मुझ से कभी बात नहीं करोगी ,न ही कभी मिलोगी।ये सोच कर मैं अक्सर बेचैन रहता था ,फिर तुम मुझे छोड़ कर इंग्लैंड पढ़ने चली गई और तुम्हें देखने की मेरी तमन्ना मुझे दिवाना बना दिया करती।कभी कभी तो जैसे पंजाबी में कहते हैं न,खो पढ़ जाना ऐसे तुम्हें देखने के लिए मुझे हुआ करती थी।तुम नहीं थी यहाँ , मैं खुद को काम मे बीज़ी रखने लगा, पार्टियों में जाने लगा,गाने सुनता मगर सकून मुझ से कोसों दूर ही रहा।
तुम्हारी याद मुझे बेचैन रखती।बहुत मिस करता था तुम्हें।
मिस करना जैसा लफ़्ज़ शायद बहुत छोटा है।सौम्या को, ये सब सुनना कहीं न कहीं सकून दे रहा था।अच्छा लग रहा था कि विराज को भी उसकी कमी का अहसास होता रहा है ..जैसे वो खुद महसूस किया करती थी।विराज कहता जा रहा था लोगों की नज़रों में जो मैं दिखता हूँ मैं वैसा बिलकुल भी नहीं .. सौम्या बोली !
विराज मेरी नाराज़गी अपनी जगह थी .. फ़िक्र अपनी जगह थी ..नही चाहती थी कि तुम से बात करूँ कभी ..मगर मुझे भी बार बार तलब उठती थी ..तुम्हें देखने की . ..तुम से बात करने की मगर मैं खुद को रोक लेती थी।
विराज कहने लगा जितनी ऊँची दिवारें तुम बनाती रही अपने इर्द गिर्द ,उतनी ही मेरी चाहत बढ़ती रही।विराज ने सौम्या का हाथ पकड़ कर धीरे से कहा !अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो मैं अपने पापा से बात करूँ शादी की ?
और सौम्या ने भरी आँखों से अपना सर विराज के कंधे पर रख दिया जैसे हाँ की स्वीकृति दे रही हो ..
दोस्तों !
ग़लतफ़हमियाँ ही वजह बनती है दूरियों की … वक़्त रहते उन्हें सुलझा लेना चाहिए क्योंकि
कोई भरोसा नही ,कब ज़िन्दगी बेवफ़ाई कर हमारे अपनों को हम से दूर ले जाये और हमारे हाथ तरसने ..तड़पने और बेचैन होने के इलावा कोई रास्ता ही न बचे।
यही मेरी इल्तिजा है सब के लिए ..वक़्त रहते.. अपने दिल के क़रीब रिश्तों को संभाल लीजिए .. —स्मिता केंथ

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गोवा में भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का आज शुभारंभ हुआ; प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जाने वाले 75 ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष ध्यान

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 23 सितंबर 2023 को गोवा के पणजी में ऐतिहासिक किले अगौड़ा में ‘भारतीय प्रकाश स्तंभ उत्सव’ या भारतीय लाइटहाउस महोत्सव के पहले संस्करण का उद्घाटन किया।

इस महोत्सव का उद्देश्य भारत के 75 प्रतिष्ठित प्रकाशस्तंभों के समृद्ध समुद्री इतिहास को पुनर्जीवित करना और दुनिया के सामने उनकी शानदार गाथाओं को सामने लाना है। इस प्रकार के पहले आयोजन के प्रमुख स्थल, फोर्ट अगौड़ा में आयोजित बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत; केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और पर्यटन राज्य मंत्री,  श्रीपद नाइक और गोवा सरकार के पर्यटन मंत्री श्री रोहन खौंटे ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधायक माइकल लोबो भी उपास्थित थे।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “इस महोत्सव के शुभारंभ के साथ, हम इन प्रतिष्ठित स्थलों की समृद्ध विरासत को उजागर करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ समुद्र तटीय भारत में 75 प्रकाश स्तंभों में सदियों पुराने क्लासिक्स को फिर से जीवंत करने की प्रक्रिया और उन्हें दुनिया के सामने पेश करने के लिए सक्षम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा देश आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र प्रयास में हम प्रतिष्ठित प्रकाश स्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के प्रमुख केन्द्रों का उत्प्रेरक बनाकर मोदी की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। आज, हम अपने दूरदर्शी नेता,  मोदी  की दूरदर्शिता और नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमारे विशिष्ट प्रकाशस्तंभों को मनोरम विरासत पर्यटन स्थलों में बदलने का समर्थन किया है। बहुत लंबे समय तक, अंधेरी रातों के बीच सैकड़ों नाविकों और जहाजों को आशा की रोशनी प्रदान करते समय समुद्र तटों के मूक प्रहरी को नजरअंदाज कर दिया गया था। “प्रकाश स्तंभ उत्सव” इसे बदलने का हमारा प्रयास है। इन ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभों ने हमारे देश के इतिहास में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उसके बारे में आप सभी को सूचित करनाउससे जोड़ना और शिक्षित करना हमारा मिशन है।

 

भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य ऐतिहासिक स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों में विकसित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मार्ग के लिए आधार तैयार करने के लिए भारतीय प्रकाश स्तंभ महोत्सव का लाभ प्राप्त करना है। प्रकाश स्तंभ और लाइटशिप महानिदेशालय ने पहले ही 75 ऐसे प्रकाश स्तंभों की पहचान कर ली है और यह उत्सव हमारी समुद्री विरासत का जश्न मनाने और संरक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री महोदय ने कहा, “प्रकाश स्तंभ महोत्सव” एक शानदार उत्सव है जो समय और सुंदरता के माध्यम से एक मनोरम यात्रा होने का वादा करता है। यह एक ऐसी यात्रा है जो हमारे समुद्री इतिहास के छिपे हुए रत्नों को उजागर करेगी और हमारे ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों की अनकही गाथाओं को उजागर करेगी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने परिवर्तन के लिए सुधार की पहल के एक हिस्से के रूप में, भारत में पोत परिवहन क्षेत्र में सहायता के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एक रूपरेखा प्रदान करने के लिए लाइटहाउस अधिनियम, 1927 को निरस्त करके समुद्री परिवहन के लिए समुद्री सहायता अधिनियम, 2021 लागू किया। इसके अंतर्गत हमने विरासत प्रकाश स्तंभ की नई अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें केंद्र सरकार अपने नियंत्रण में समुद्री परिवहन के लिए किसी भी सहायता को विरासत प्रकाश स्तंभ के रूप में नामांकित कर सकती है। समुद्री परिवहन में सहायता के रूप में उनके कार्य के अलावा, ऐसे प्रकाशस्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटक उद्देश्यों के लिए विकसित किया जाएगा। यह महोत्सव सिर्फ ज्ञान का नहीं है; यह मूल्यों और अवसरों को पैदा करने के बारे में है। महोत्सव से अलग, हमारी परिकल्पना प्रकाशस्तंभों को पर्यटन स्थलों के रूप में बढ़ावा देना, इन ऐतिहासिक संरचनाओं पुनर्जीवन प्रदान करना और स्थानीय समुदायों और व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करना है।”

दिन भर चले कार्यक्रम के दौरान, ‘हमारे तटों के अग्ररक्षक: भारत के अतीत और वर्तमान के प्रमाण के रूप में प्रकाशस्तंभ’ शीर्षक से एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसे शासन, नीतियां और राजनीति संस्थान की पहल, भारत प्रवाह द्वारा आयोजित किया गया था, जहां प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् जो राखीगढ़ी के रूप में ख्याति प्राप्त प्रो. वसंत शिंदे ने भारत के समुद्री इतिहास में प्रकाशस्तंभों के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की। डॉ. सुनील गुप्ता, समुद्री पुरातत्वविद् और नई दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में ओएसडी; और गोवा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. वासु उस्पाकर ने भी सत्र में अपने विचार रखे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने प्रकाश स्तंभ विरासत पर्यटन विकास के प्रति मंत्रालय के दृष्टिकोण और इस चरण में 75 प्रकाश स्तंभों में निवेश के अवसरों के बारे में एक केस प्रस्तुत किया।

भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रदर्शनी सत्र, समुद्री इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश और ध्वनि शो, ख्याति प्राप्त गायकों के साथ मधुर शामें, समुद्र तटों के  जायको और सामुदायिक सहभागिता हैं।

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कनपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज महाविद्यालय में पिछले एक सप्ताह से चल रहे मंच कला वह फिल्म अभिनय का सफलतापूर्वक समापन प्राचार्य जोसेफ डेनियल के दिशा निर्देशन में किया गया। सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित की गई यह कार्यशाला संयोजक डॉ.संजय सक्सेना और सहसंयोजक प्रो.मीत कमल द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगीत नाटक पुरस्कार विजेता नाटक और संवाद लेखक विभांशु वैभव के नेतृत्व में यह एक सप्ताह की कार्यशाला की गई। इस कार्यशाला में महाविद्यालय के 40 से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया कार्यशाला के सप्ताह में वैभव ने मंच कला में अभिनय के इतिहास के बारे में बच्चों को बताया एवं इसकी उत्पत्ति कैसे हुई यह बताया, ध्यान केंद्रित करने के तरीके बताएं ।एक छोटी सी मूवी – ए बॉय इन स्ट्रिप्ड पजामा के माध्यम से हमें ऑब्जर्वेशन के विषय में समझाया । वैभव ने विदोहम सिंफनी म्यूजिक में एक्ट भी कराया । सर ने कार्य दिया कि हमें अपने आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को ध्यानपूर्वक ऑब्जर्व करना है ।उसे अगले दिन अपने एकल प्रस्तुति माध्यम द्वारा दिखाना है। कार्यशाला में एक्टर के लिए महत्वपूर्ण तत्वों पर बात की जैसे रिलैक्सेशन ,कंसंट्रेशन ऑब्जरवेशन ,बिलीव एंड इमोशन। सर ने अपनी रचित कविता भी लिखाई ।कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को चार समूह में विभाजित कर दिया एवं उनको समाज के कुछ ऐसे विषयों पर नाट्य प्रस्तुत करने का मौका दिया जैसे ड्रग्स, वृद्ध आश्रम, आतंकवादी हमले एवं एसिड अटैक इन्हीं कार्यक्रमों की फाइनल प्रस्तुति 22/09/2023 की कार्यक्रम द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल के मार्गदर्शन में किया गया मुख्य अतिथि संगीत नाटक अवार्ड विजेता विभांशु वैभव रहे ।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभांशु वैभव ने बताया कि बच्चे न सिर्फ जिस तरह से रंगमंच में भाग लेते हैं बल्कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा का भी विकास होता है ।कार्यक्रम में सभी का स्वागत डॉक्टर संजय सक्सेना संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम का संचालन नागेंद्र प्रताप सिंह एवं कावेरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया। गया कार्यक्रम का अंत प्रोफेसर मीत कमल सह संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया । उक्त कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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