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इस स्वतंत्रता दिवस ज़ी सिनेमा में देखिए `आज़ादी एक्सप्रेस’ के साथ. जाट, द साबरमती रिपोर्ट और द केरल स्टोरी का प्रीमियर

भारतीय स्वरूप संवाददाता मुंबई, अगस्त 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है तीन ऐसी कहानियां, जो सच्चाई, हिम्मत और जज़्बे से भरी हैं। ये तीनों प्रीमियर सुबह 10 बजे से एक के बाद एक लगातार दिखाए जाएंगे। सबसे पहले बात करते हैं ‘जाट’ की, जिसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर दोपहर 12:30 बजे होगा। इसमें सनी देओल ‘गदर 2’ की बड़ी कामयाबी के बाद एक और दमदार रोल में लौटे हैं। इस फिल्म में सनी एक फौजी का किरदार निभा रहे हैं, जो लोगों की मदद के लिए ज़ुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होते हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना सबकी हिफ़ाज़त करते हैं। इसके साथ ही लाइनअप में है ‘द साबरमती रिपोर्ट’ – सच की तलाश करने वाली एक बेहद दिलचस्प थ्रिलर जो सुबह 10 बजे शुरू होगी और फिर शाम 3:30 बजे आएगी ‘द केरल स्टोरी’ – एक दिल झकझोर देने वाली कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की मिट्टी से जुड़ी ये तीनों कहानियां, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान के सच्चे जज़्बे को दर्शाती हैं।

सनी देओल की दमदार ‘ढाई किलो का हाथ’ वाली परफॉर्मेंस देखने के लिए तैयार हो जाइए दोपहर 12:30 बजे, फ़िल्म ‘जाट’ में। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है बल्कि ये उस इंसान की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल देता है। सनी का किरदार सच्चा, निडर और मदद करने वाला है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल से टकराता है ताकि देशवासियों की हिफ़ाज़त कर सके। इस फिल्म में सनी देओल ने अपने सारे एक्शन सीन खुद किए हैं, और हर सीन में उनका असली जोश नज़र आता है, और वो फिर याद दिलाते हैं कि क्यों उन्हें पर्दे का सबसे वजनदार हीरो कहा जाता है।

सुबह 10 बजे आएगी ‘द साबरमती रिपोर्ट’, जिसमें हैं विक्रांत मैसी। ये कहानी है उस हादसे की जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था – गोधरा ट्रेन में आग की घटना। ये एक पत्रकार की लड़ाई है, जो हर हाल में सच तक पहुंचना चाहता है। फ़िल्म की कहानी तेज़, असरदार और सच्चे जज़्बातों से भरी है – जो बताती है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बोलने की नहीं, सच जानने की भी आज़ादी है; झूठ और फरेब से आज़ादी!

शाम 3:30 बजे देखिए ‘द केरल स्टोरी’ – वो फ़िल्म जिसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं और जिसे खूब सराहा गया है। इसमें अदा शर्मा ने एक ऐसी लड़की का रोल निभाया है, जो धोखे से आतंक के जाल में फंस जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानती और हिम्मत के साथ उस अंधेरे से बाहर निकलने की लड़ाई लड़ती है। ये कहानी है एक लड़की की जिद और हौसले की जो अपनी ज़िंदगी को फिर से जीने की कोशिश करती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

तो इस 15 अगस्त, अपना दिन कीजिए ज़ी सिनेमा के नाम! देखिए तीन ज़बर्दस्त कहानियां जो सच्चाई, हिम्मत और इंसानियत को सलाम करती हैं – ‘द साबरमती रिपोर्ट’, ‘जाट’ और ‘द केरल स्टोरी’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ, सिर्फ़ ज़ी सिनेमा पर।

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सीआईएसएफ ने रचा नया इतिहास – विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों में रिकॉर्ड पदक जीते

भारतीय स्वरूप संवाददाता भोपाल। अमेरिका के बर्मिंघम में हाल ही में संपन्न विश्व पुलिस और अग्निशमन खेल 2025 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 66 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वर्ष 2024-25 के दौरान सी आई एस एफ के एथलीटों ने कुल 159 पदक जीतकर बल की अब तक की सर्वाधिक पदक संख्या का रिकॉर्ड भी बनाया है।
भारत सरकार की ‘खेलो इंडिया’ नीति के तहत सी आई एस एफ ने खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें खेल बजट में छह गुना वृद्धि, विशेष आहार भत्ता, आधुनिक खेल सुविधाएं, चोट प्रबंधन सेवाएं और वार्षिक टूर्नामेंट कैलेंडर जैसे प्रावधान शामिल हैं। मुख्यालय में खेल गतिविधियों की निगरानी के लिए सहायक महानिरीक्षक स्तर का अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, सी आई एस एफ ने पहली बार माउंट एवरेस्ट अभियान दल का गठन किया है, जो वर्ष 2026 में चढ़ाई करेगा। बल ने अब तक का सबसे बड़ा खेल भर्ती अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत 433 खिलाड़ियों, जिनमें 229 महिलाएं शामिल हैं, की भर्ती की जा रही है। यह अभियान देशभर के 14 चयन केंद्रों पर 7 से 29 जुलाई 2025 तक चला।

खिलाड़ियों को विदेशों में प्रशिक्षण, विशेषज्ञ स्टाफ और अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इस प्रयास का उद्देश्य सी आई एस एफ को खेलों में अग्रणी बनाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक पोडियम तक पहुंच बनाना है।
भोपाल की केओसुब इकाई भेल में अमेरिका से लौटे पदक विजेता पांच सी आई एस एफ एथलीटों का वरिष्ठ कमांडेंट शिवरतन सिंह मीणा व अन्य अधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।

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कानपुर दर्शन

दिलों में बसा कानपुर, आओ करें गुणगान।
अनेकों दर्शनीय स्थल,सभी रखें निज मान।।

बात करें बिठूर की, ऐतिहासिक सम्मान।
ग्रीन पार्क स्टेडियम, बहु उद्देशीय मैदान।।

पनकी मंदिर बाबा का, मनोकामना धाम।
जे के मंदिर में बसे , राधे संग श्याम।।

बात करें ऊंनं की, लाल इमली उद्यान।
चले जो चिड़िया घर,पक्षी जानवर प्राण।।

अब चले शिवालय, ले चूड़ी चलो चौक।
आगे आए मिस्टन रोड,मिले जहां सब थोक।।

करें अब तपेश्वरी की बात,मिले पुण्य सौगात।
वही पे बिरहाना रोड, ले लो गहने साथ।।

करें पवित्रता की बात, अनेकों गंगा घाट।
चलो जरा फूलबाग, पाएं संग्रहालय आप।।

माहेश्वरी मोहाल , कांच का मंदिर बसा।
भीतर गांव जो जाओ,प्राचीनता से सजा।।

जाजमऊ की टेंडरी,करे लेदर निर्माण ।
निर्यात हो विदेशों में, बने जिससे समान।।

कानपुर बड़ी धरोहर, ऐतिहासिक सम्मान।
गिनाने बैठे जो हम, नहीं सभी आसान!! — डॉ अंजनी अग्रवाल कानपुर नगर

दैनिक भारतीय स्वरूप

अतुल दीक्षित द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं महाराष्ट्र से प्रकाशित

मोबाइल :~9696469699foe

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भारत-अमेरिका सांस्कृतिक संपदा समझौता

भारतीय पुरावशेषों की तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सांस्कृतिक संपदा करार (सीपीए) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. करार के निवारक प्रकृति के होने के कारण ऐसी कोई समय समय सीमा या संख्या निर्धारित नहीं की गई है. अभी तक 588 पुरावशेष संयुक्त राज्य अमेरिका से वापस लाए गए हैं जिनमें से 297 पुरावशेष वर्ष 2024 में प्राप्त हुए हैं.

भारत आवश्यकता अनुसार यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग करता है.

सांस्कृतिक संपदा करार (सीपीए) में तकनीकी सहायता, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक संपदा के लूट के मामलों में सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का प्रावधान है.

भारत आवश्यकतानुसार यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करता है.

सीपीए में तकनीकी सहायता, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक संपत्ति की लूट के मामलों में सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का प्रावधान है. यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी.

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डॉ. मनसुख मांडविया ने दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स का उद्घाटन किया

केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज नई दिल्ली में इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर के केडी जाधव इंडोर हॉल में दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 की शुरुआत की घोषणा की। आठ दिन तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में छह खेल विधाओं में 1300 से अधिक पैरा एथलीट हिस्सा लेंगे।

छह पैरालिंपियन – सिमरन शर्मा (एथलेटिक्स), प्रवीण कुमार (बैडमिंटन), नितेश कुमार (बैडमिंटन), नित्या श्री (बैडमिंटन) और प्रीति पाल (एथलेटिक्स) खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाने के लिए केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, अरुणाचल प्रदेश के खेल और युवा कार्य मंत्री श्री केंटो जिनी और भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष और पूर्व पैरालिंपियन श्री देवेंद्र झाझरिया के साथ एक अनूठी मशाल रैली में शामिल हुए।

डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि वह खेलो इंडिया के हर आयोजन को मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर उत्साहित हैं, जो अब देश के लिए सम्मान जीतने के इच्छुक सभी एथलीटों के लिए “प्रतिष्ठा” बन गया है। डॉ. मांडविया ने कहा, “खेलो इंडिया द्वारा भारतीय खेलों में दिए गए योगदान से मैं बेहद गर्वित और उत्साहित हूं। चाहे वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स हो, खेलो इंडिया स्कूल गेम्स हो, खेलो इंडिया विंटर गेम्स हो या खेलो इंडिया पैरा गेम्स हो, हमारे एथलीट हर जगह अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित कर रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने आगे कहा, “जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है। पेरिस पैरालिंपिक 2024 में मिली सफलता, जहाँ हमने कुल 29 पदक जीते, ने साबित कर दिया कि हमारे एथलीटों में देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करने की क्षमता है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से हमारे एथलीटों को बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जिसकी हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल्पना की थी।”

डॉ. कुमार ने भी खेलो इंडिया पहल की सराहना की और कहा, “खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 भारतीय एथलीटों के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए एक विश्व स्तरीय मंच है। साथ ही, यह पैरा एथलीटों को न केवल खुद को साबित करने का मौका देता है, बल्कि अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा के माध्यम से दूसरों को प्रेरित भी करता है।”

उद्घाटन समारोह में देश भर से एथलीट, कोच और सहयोगी स्टाफ शामिल हुए। सचिव (खेल) श्रीमती सुजाता चतुर्वेदी और भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।

केआईपीजी 2025 के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें: स्वागत | केआईपीजी 2025

खेलो इंडिया पैरा गेम्स के बारे में

खेलो इंडिया पैरा गेम्स, खेलो इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली एथलीटों को अपने खेल और प्रतिस्पर्धी कौशल का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। दिसम्बर 2023 में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स का पहला संस्करण पैरा-एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया गया था। खेल नई दिल्ली में तीन स्थानों पर सात खेल विधाओं में खेले गए। राजधानी में तीन स्थानों पर 20-27 मार्च, 2025 के बीच आयोजित होने वाले केआईपीजी के दूसरे संस्करण में छह विधाएँ – पैरा-एथलेटिक्स, पैरा तीरंदाजी, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस और पैरा शूटिंग – आयोजित की जाएँगी।

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भारत के शुभांकर प्रकाश के निर्देशन में फ़्रांस में चल रहा देश की कलात्मक विरासत का जश्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जाएगी भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत कला क्षेत्र में वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित आर्ट संस्थान के निदेशक ऑपरेशन हैं सुल्तानपुर के शुभांकर प्रकाश  
लखनऊ/ नई दिल्ली। भारत की अमित विरासत को दुनियां से रूबरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी शुभांकर प्रकाश भारती (संचालन निदेशक) ने भारतीय कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित करने वाली एक कला प्रदर्शनी आयोजित की है।फ़रवरी प्रथम सप्ताह से आगामी 22 मार्च चलने वाली यह प्रदर्शनी पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत का जश्न मनाना है, जिसमें देश की जीवंत संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली शानदार कलाकृतियों का संग्रह एक साथ लाया जाएगा। प्रदर्शनी में पारंपरिक पेंटिंग, समकालीन कृतियाँ और मिश्रित मीडिया कृतियां सहित विभिन्न प्रकार की कलाएं प्रदर्शित की जाएँगी। आगंतुकों को भारतीय कलाकारों की अनूठी शैलियों और तकनीकों को जानने, उनकी रचनात्मक प्रक्रियाओं और उनकी उत्कृष्ट कृतियों के पीछे की कहानियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली 193 आर्ट गैलरी इस प्रदर्शनी के लिए एकदम सही जगह है। पेरिस के केंद्र में स्थित, गैलरी कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं को भारतीय कला की सुंदरता और गहराई की सराहना करने के लिए एक परिष्कृत और स्वागत योग्य स्थान प्रदान करती है।
*साहित्य प्रसारक राजेश कुमार के बेटे हैं शुभांकर प्रकाश
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के भारतीय साहित्य के प्रसारक और व्यवसायी राजेश कुमार के एक बेटी और दो बेटों में से एक शुभांकर प्रकाश भारती हैं।  जेएनवी  नवोदय विद्यालय  सुल्तानपुर से शुभांकर ने बारहवीं कक्षा तक टॉप किया था। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में तीसरी रैंक हासिल की थी इसी क्रम में शुभंकर ने प्रवेश के लिए शांतिनिकेतन चुना।फिर वहां से अपनी प्रतिभा के दम पर स्कॉलरशिप पर फ्रांस चले गए। जहां आगे की पढ़ाई की और अब वहां की प्रतिष्ठित आर्ट गैलरी में डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशन है। शुभांकर के भाई रविंद्र प्रकाश बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर हैं।

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अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 8 दिसंबर एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज द्वारा अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया यह प्रतियोगिता सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में आयोजित की गई जिसमें कानपुर नगर से पांच महाविद्यालयों ने ट्रायल में प्रतिभा किया। इस अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में टीमों की संख्या की प्रतिभागिता कम होने के कारण ट्रायल करवाया गया जिसमें 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। रेफरी श्री अनुज , श्री हरप्रीत , एवंअनुराग को कानपुर हैंडबॉल एसोसिएशन से आमंत्रित किया गया था।ट्रायल में कुल 35 खिलाड़ियों ने प्रतिभा किया जिसमें से 21 खिलाड़ियों को चयनित किया गया यह सभी चयनित खिलाड़ी एक हफ्ते के कैंप के बाद छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की हैंडबॉल महिला टीम बनाकर नॉर्थ जोन अंतर विश्वविद्यालय ही प्रतियोगिता में प्रतिभा करेंगे प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी और प्रोफेसर प्रीति पांडेय जो इस कार्यक्रम की आयोजन सचिव थी उनको सफल ट्रायल हेतु बधाई दी एवं टीम को आगे और मेहनत कर कानपुर विश्वविद्यालय टीम को को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
चयनित खिलाड़ियों के नाम निम्न वत हैं– आरती देवी, दिव्यांशी सिंह ,अनामिका कुमारी ,आरोही द्विवेदी ,दीक्षा कुमारी ,दिव्या सिंह, अंकित यादव, आराध्या यादव ,प्रीति सिंह , नित्या ,मुस्कान गौतम ,अंजलि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से निशा विश्वकर्मा, रागिनी गिरी ,नैंसी वर्मा ,निशा, दीपिका कुमारी ए एन डी कॉलेज कानपुर से, स्वाति , प्रिया एस एन सेन बालिका विद्यालय, पीजी कॉलेज से , दीशिका सिंह VSSD कॉलेज कानपुर , जहान्वी DAV कॉलेज कानपुर इस प्रकार कुल 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। इन सभी खिलाड़ियों का छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की तरफ से नॉर्थ जोन महिला हैंडबॉल अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में प्रतिभा करने वाली छात्रों के लिए चयन किया जाएगा इन सभी खिलाड़ियों के लिए एक हफ्ते का कैंप लगेगा उपरांत टीम हेतु 16 खिलाड़ियों का चयन करके विश्वविद्यालय को प्रतिनिधित्व करते हुए टीम का चयन किया जाएगा पूरे कार्यक्रम का आयोजन प्रोफेसर प्रीति पांडेय विभागध्यक्ष शारीरिक शिक्षाविभाग सेन कॉलेज के द्वारा किया गया प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं शिक्षिकाओं ने आयोजन सचिव को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी। हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में कराया गया जहां की प्राचार्य एवं खेल शिक्षक श्री शंकर जी ने पूर्ण सहयोग के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया ।आयोजन सचिव ने सेन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं सेठ मोतीलालविद्यालय के प्राचार्य एवं सहयोगियों को धन्यवाद प्रेषित किया।

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कृष्णवेणी संगीत नीराजनम संगीत समारोह के दूसरे संस्करण का विजयवाड़ा में उद्घाटन हुआ

कृष्णवेणी संगीत नीराजनम संगीत महोत्सव के दूसरे संस्करण का आज विजयवाड़ा के तुम्मलपल्ली क्षेत्रय्या कलाक्षेत्र सभागार में उद्घाटन किया गया। इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी उपस्थित थे। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में आंध्र प्रदेश सरकार के पर्यटन, संस्कृति और छायांकन मंत्री श्री कंडुला दुर्गेश, आंध्र प्रदेश राज्य रचनात्मकता और संस्कृति आयोग की अध्यक्ष श्रीमती पी. तेजस्वी, आंध्र प्रदेश नाटक अकादमी के अध्यक्ष श्री गुम्मादी गोपाल कृष्ण, आंध्र प्रदेश के पर्यटन सचिव श्री विनय चंद, पर्यटन मंत्रालय के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार श्री ज्ञान भूषण और आंध्र प्रदेश पर्यटन प्राधिकरण (एपीटीए) की सीईओ सुश्री आम्रपाली काटा शामिल थे।

तीन दिवसीय महोत्सव विजयवाड़ा के तीन प्रतिष्ठित स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 140 से अधिक प्रतिभाशाली कलाकार भाग लेंगे और 35 मंत्रमुग्ध कर देने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, जो कर्नाटक संगीत की समृद्ध विरासत का जश्न मनाएंगे।

अपने मुख्य भाषण के दौरान, श्री सुरेश गोपी ने इस उत्सव को तेलुगु परंपराओं की समृद्ध सांस्कृतिक और संगीत विरासत का सम्मान करने के एक मंच के रूप में मनाया। उन्होंने त्यागराज, अन्नामाचार्य और रामदास जैसे महान संगीतकारों के योगदान पर प्रकाश डाला, जिनकी रचनाएँ वैश्विक स्तर पर गूंजती रहती हैं। मंत्री ने इस उत्सव की प्रशंसा “संगीत पर्यटन” के लिए एक अग्रणी मॉडल के रूप में की, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण को पर्यटन संवर्धन के साथ एकीकृत किया गया है। उन्होंने आंध्र प्रदेश में आध्यात्मिक और विरासत स्थलों पर आयोजित प्रीक्वल कार्यक्रमों की सराहना की, जिसने कर्नाटक संगीत को स्थानीय समुदायों और छोटे शहरों के करीब ला दिया है।

श्री सुरेश गोपी ने कर्नाटक संगीत की प्रामाणिकता को बनाए रखने में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर जोर दिया और शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए अन्य दक्षिणी राज्यों, विशेष रूप से केरल में भी इसी तरह के उत्सवों का विस्तार करने की कल्पना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए सांस्कृतिक संरक्षण के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस उत्सव की अवधारणा बनाने, संस्कृति और पर्यटन को शास्त्रीय कलाओं के उत्सव के लिए एक स्थायी मंच में मिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को भी श्रेय दिया।

पर्यटन, संस्कृति और छायांकन मंत्री श्री कंडुला दुर्गेश ने आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने में महोत्सव की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इसे संगीत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक शानदार मंच बताया, जिसमें कर्नाटक संगीत, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्र की कलात्मक विरासत को उजागर किया गया। मंत्री ने त्यागराज और अन्नामाचार्य जैसे महान संगीतकारों की विरासत को संरक्षित करने और पिनाकिनी और द्वारम वेंकटस्वामी जैसे कलात्मक दिग्गजों को सम्मानित करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए कदम उठाए जाएंगे और आंध्र प्रदेश में नृत्य अकादमी के लिए अध्यक्ष नियुक्त करने की योजना का खुलासा किया।

कृष्णवेणी संगीत नीराजनम महोत्सव संगीत से आगे बढ़कर आंध्र प्रदेश की समृद्ध विरासत के विभिन्न पहलुओं को एकीकृत करके एक समग्र सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है। इस महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जीआई-टैग किए गए हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन है, जिसे कपड़ा मंत्रालय के हस्तशिल्प और हथकरघा विकास आयुक्त द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। यह पहल क्षेत्र की कारीगर विरासत का जश्न मनाती है, जिससे आगंतुकों को राज्य की सांस्कृतिक पहचान को परिभाषित करने वाले शिल्प कौशल की सराहना करने का अवसर मिलता है।

इस उत्सव में एक अनूठा आयाम जोड़ते हुए, तिरुपति स्थित भारतीय पाककला संस्थान (आईसीआई) ने आंध्र प्रदेश की पाककला परंपराओं को उजागर करके महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक समर्पित खाद्य स्टाल के माध्यम से, आईसीआई के छात्र और संकाय प्रामाणिक क्षेत्रीय व्यंजन परोस रहे हैं, जिससे उत्सव में आने वाले लोगों को राज्य की पाक विरासत का स्वाद मिल रहा है। यह पहल न केवल इस आयोजन की सांस्कृतिक कथा को समृद्ध करती है, बल्कि व्यंजनों और सांस्कृतिक पहचान के बीच गहरे संबंध को भी रेखांकित करती है, जो संगीत पर्यटन को बढ़ावा देने के उत्सव के लोकाचार के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।

संगीत, शिल्प और व्यंजनों को एक साथ पिरोकर कृष्णवेणी संगीत नीराजनम महोत्सव आंध्र प्रदेश की मूर्त और अमूर्त विरासत का जीवंत चित्रण करता है, जो पर्यटन मंत्रालय के अभिनव दृष्टिकोण को दर्शाता है। तीन दिनों तक चलने वाला कृष्णवेणी संगीत नीराजनम महोत्सव कर्नाटक संगीत की दिव्य धुनों के माध्यम से आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव मनाता है, समुदायों को जोड़ता है और तेलुगु भाषी क्षेत्र के आध्यात्मिक और कलात्मक सार को प्रदर्शित करता है।

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मैं 90 के दशक की पीढ़ी के लिए ‘वंदे मातरम’ को और अधिक आकर्षक बनाना चाहता था: भारत बाला

प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक भारत बाला ने कहा, “मेरे पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे और 90 के दशक की पीढ़ी के लिए वंदे मातरम गीत को और अधिक आकर्षक बनाने के उनके अनुरोध पर मैंने ए.आर. रहमान द्वारा लोकप्रिय एल्बम ‘वंदे मातरम’ बनाया।” वह गोवा में 55वें इफ्फी में ‘सिनेमैटिक स्टोरीटेलिंग के संदर्भ में संस्कृति’ विषय पर पैनल चर्चा में बोल रहे थे। पैनल में अन्य वक्ता प्रतिष्ठित लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी और अमीश त्रिपाठी थे।

श्री बाला ने कहा कि विज्ञापन का मतलब किसी उत्पाद के प्रति उत्साह और रोमांच पैदा करना है। इसी तरह वह नई पीढ़ी के लिए ‘वंदे मातरम’ को कूल बनाना चाहते थे और ‘वंदे मातरम’ एल्बम का गीत इसी सोच का नतीजा था।

श्री बाला ने बताया कि वे वर्चुअल भारत नामक एक नई परियोजना पर काम कर रहे हैं, जो देश के विभिन्न भागों से आने वाली 1000 कहानियों के माध्यम से भारत का इतिहास प्रस्तुत करेगी। श्री बाला ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि “वर्तमान प्रणाली के विपरीत, जहां निर्माता या निर्देशक यह निर्णय लेते हैं कि फिल्म बनाने के लिए कौन सी कहानी चुननी है, फिल्मों की क्राउड फंडिंग आम जनता को अपनी पसंद की कहानियां चुनने की शक्ति दे सकती है।”

‘द शिवा ट्रिलॉजी’ और ‘राम चंद्र सीरीज’ के लोकप्रिय लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि कई दशकों से फिल्में समाज की वास्तविकताओं को चित्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब कहानीकार अपने सांस्कृतिक परिवेश के प्रति सजग होगा तो अधिक प्रामाणिक कहानियाँ सामने आएंगी।

श्री त्रिपाठी ने निष्कर्ष निकाला, “हिंदी फिल्म उद्योग हमारे प्राचीन साहित्य में उपलब्ध विविध कहानियों का उपयोग करने में पीछे रह गया है, जबकि क्षेत्रीय सिनेमा ऐसी कहानियों को चुनने में कहीं बेहतर स्थिति में रहा है।”

प्रसिद्ध लेखक और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि मोबाइल फोन धीरे-धीरे हमारे घरों में बुजुर्गों के माध्यम से बताई जाने वाली पारंपरिक कहानीयों को कहने की कला को खत्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों की असाधारण कहानियाँ जो अब हमारे बुजुर्गों के माध्यम से नहीं बताई जा रही हैं उन्हें सिनेमा द्वारा सामने लाया जा रहा है और फिल्मों के माध्यम से हम तक पहुंचाया जा रहा है। श्री जोशी ने निष्कर्ष देते हुए बताया, “क्लासिक साहित्य पर आधारित स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देते समय शोध की कमी की भरपाई क्लासिक के विभिन्न संस्करणों के तत्वों को मिलाकर की जा रही है।”

सुप्रसिद्ध लेखक, श्री मकरंद परांजपे ने चर्चा का संचालन किया।

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‘अम्माज़ प्राइड’ और ‘ओंको कि कोठीन’- 55वें आईएफएफआई में वंचित समुदाय की आवाज़ को चित्रित करती दो फिल्मों प्रदर्शित की गयीं

55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दो बेहतरीन फ़िल्में ‘अम्माज़ प्राइड’ और ‘ओंको कि कोठीन’ को देश भर के सिनेमा प्रेमियों ने खूब पसंद किया। दोनों फ़िल्मों के निर्माता और कलाकारों ने आज गोवा के पणजी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मीडिया से बातचीत की।

अम्माज़ प्राइड: दृढ़ता और गर्व की यात्रा

इस साल आईएफएफआई की एकमात्र एलजीबीटीक्यू+ फ़िल्म, अम्माज़ प्राइड एक ट्रांसवुमन का सच्चा और ईमानदार चित्रण है, जो अपने पूरे जीवन में अपनी गरिमा और गौरव के लिए लड़ती है।

भारतीय पैनोरमा में गैर-फीचर फ़िल्मों के खंड के लिए चुनी गई यह लघु फ़िल्म, दक्षिण भारत की एक युवा ट्रांसवुमन श्रीजा के कष्टों और परेशानियों का चित्रण करती है। जिस तरह से वह अपनी शादी की जटिलताओं से निपटती है और इसे कानूनी मान्यता दिलाने के लिए लड़ती है और जिस तरह से उसकी माँ, वल्ली पूरे दिल से उसका समर्थन और मार्गदर्शन करती है, यही फ़िल्म का केंद्रीय भाव है।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/24-9-3LPMH.jpg

मीडिया से अपनी फ़िल्म के बारे में बात करते हुए, निर्देशक शिव कृष्ण ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ट्रांसजेंडर लोगों के मुद्दों को दर्शाने वाली फ़िल्में बहुत कम और कभी-कभार बनती हैं। उन्होंने कहा, “ये फ़िल्में अक्सर ट्रांसपर्सन को रूढ़िवादी नकारात्मक रोशनी में चित्रित करती हैं, जिससे वे निराश हो जाते हैं। फ़िल्म की मुख्य पात्र माँ वल्ली हैं, जो खुद एक सिंगल मदर होने के बावजूद अपनी बेटी को अपने तरीके से जीने में सक्षम बनाती हैं।“

समाज में ट्रांसपर्सन के प्रति धारणा बदलने की उम्मीद करते हुए, नवोदित निर्देशक ने कहा, “हमने वरिष्ठ एलजीबीटीक्यू कार्यकर्ताओं और कई ट्रांसपर्सन को उनकी प्रतिक्रियाएँ प्राप्त करने के लिए फ़िल्म दिखाई और वे फ़िल्म में दिखाई गई सकारात्मकता से चकित थे। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ। वे यह भी चाहते हैं कि इस फ़िल्म का सामाजिक प्रभाव हो और हम भारत के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इस फ़िल्म के इर्द-गिर्द एक प्रभाव अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं, जिससे मुझे उम्मीद है कि ट्रांसपर्सन के लिए मुख्यधारा के मीडिया में एक सकारात्मक लहर पैदा होगी।”

फ़िल्म समारोहों में प्रशंसा अर्जित करते हुए, इस वृत्तचित्र ने इस वर्ष कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय दक्षिण एशियाई फ़िल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ एलजीबीटीक्यू फ़िल्म के लिए शेर वैंकूवर पुरस्कार जीता है। इसे दुनिया भर के कई समारोहों जैसे 64वें क्राको फ़िल्म समारोह, वुडस्टॉक फ़िल्म समारोह 2024, अंतर्राष्ट्रीय दक्षिण एशियाई फ़िल्म समारोह कनाडा 2024 में भी प्रदर्शित किया गया है और इसे दर्शकों की खूब सराहना मिली है।

ओंको कि कोठीन – विपरीत परिस्थितियों के बीच सपने

55वें आईएफएफआई में वर्ल्ड प्रीमियर के तौर पर बंगाली फीचर फिल्म ‘ओंको कि कोठीन’ को भी इंडियन पैनोरमा खंड के लिए चुना गया है। फिल्म तीन वंचित बच्चों की कहानी है, जो एक अस्थायी अस्पताल बनाते हैं और इसे बनाए रखने की कोशिश में कई चुनौतियों का सामना करते हैं। कहानी इस उम्मीद के साथ खत्म होती है कि क्या ये तीनों बच्चे तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने सपने पूरे कर पाएंगे।

फिल्म के निर्देशक सौरव पालोधी कहते हैं, “कहानी तीन बच्चों, बबिन, डॉली और टायर की उम्मीद और दृढ़ संकल्प के बारे में है।” “कोविड महामारी के दौरान कई सरकारी स्कूल बंद हो गए, जिससे कई वंचित बच्चों की शिक्षा रुक गई। अगर सपनों की फैक्ट्रियां, यानि स्कूल बंद हो जाएं, तो बच्चे सपने देखना कहां सीखेंगे। इसलिए, जब मैंने फिल्म बनाने के बारे में सोचा तो यही मुख्य विचार मेरे दिमाग में आया।”

सम्मेलन में मौजूद फिल्म की अभिनेत्री उषाशी चक्रवर्ती ने बताया कि कैसे कहानी ने उन्हें इस प्रोजेक्ट को चुनने के लिए प्रेरित किया। “भारतीय सिनेमा में वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों का चित्रण करने वाली बहुत कम फिल्में बनती हैं। जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे लगा कि इस कहानी को बड़े दर्शक वर्ग के बीच जाना चाहिए। तीन बच्चों की यह कहानी, जिन्होंने तमाम बाधाओं के बावजूद कभी हार नहीं मानी, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है।”

पालोधी ने निष्कर्ष के तौर पर कहा, “हमारे देश में, वंचित पृष्ठभूमि के माता-पिता अपने बच्चों को केवल दोपहर के भोजन के लिए स्कूल भेजते हैं, उनके लिए सीखना गौण है। मैंने करीब से देखा है कि कैसे इन बच्चों के सपने उनके माता-पिता की सीमाओं और आर्थिक बाधाओं के कारण चकनाचूर हो जाते हैं। इसलिए, यह फिल्म बनाना इन बच्चों की कठोर वास्तविकता को सामने लाने तथा उनके दृढ़ संकल्प और ईमानदारी को दिखाने का मेरा तरीका था।”

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