भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। श्रीराम रामलीला सोसाइटी परेड में रामलीला शुरू हुई। लीला के पहले दिन नारद मोह, राम जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया।
प्रभु श्रीराम के जन्म लेते ही अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। हर घर में लोग बधाइयां गाने लगे। महाराज दशरथ ने प्रभु राम को गोद में लेकर सभी अयोध्यावासियों को दर्शन कराए। लीला के मंचन में कलाकारों ने संवाद के माध्यम से ऐसा समा बांध की माहौल भक्तिमयीं हो गया । भगवान राम की जन्म और बाल लीला में प्रथम साहू सहित अन्य बच्चों ने अपनी लीला से सभी का मन मोह लिया । मंचन से पहले दोपहर में रामलीला भवन में मुकुट पूजन हुआ। शाम को बैंड बाजे के साथ रामलीला भवन से शोभायात्रा निकाली गई जो परेड रामलीला मैदान पहुंच कर समाप्त हुई । भगवान लक्ष्मी नारायण जी की आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ । व्यास महेश दत्त चतुर्वेदी के भजनों से भक्त भाव विभोर हो गए । इस दौरान सोसाइटी प्रधानमंत्री कमलकिशोर अग्रवाल, लाल जी शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, संरक्षक राकेश गर्ग, मंत्री आलोक अग्रवाल, संयोजक जगत नारायण गुप्ता , अशोक अग्रवाल लोकेश अग्रवाल और वीरेंद्र अग्रवाल मौजूद थे ।
मनोरंजन
हिंदी दिवस

हिंदी से है जुड़ा हमारा अभिमान,
हिंदी से रोशन है हिंदुस्तान।
सरल, सहज और मीठी बोली,
संस्कृति की है यह अनमोल डोली।
मातृभाषा का मान बढ़ाएँ,
हर दिल में हिंदी को अपनाएँ।
ज्ञान, साहित्य, संस्कृति का संगम,
हिंदी ही है भारत का अनुपम।
विद्या की गंगा हिंदी बहाती,
मन की बातों को स्वर दे जाती।
एकता का संदेश सुनाती,
दूरियों को भी पास कराती।
यही है हमारी पहचान की शान,
यही है भविष्य, यही है वरदान।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
हिंदी को विश्व शिखर तक ले जाएँ।
डॉ अंजनी अग्रवाल कानपुर नगर उत्तर प्रदेश
Read More »इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा राजधानी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भव्य आयोजन
कार्यक्रम के रूप में, ‘जैसा उन्होंने देखा: भारत का विभाजन 1947’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका संपादन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया है। यह पुस्तक इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण पर बहुमूल्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ‘द डर्वाल्स एंड पार्टीशन’ नामक एक डीवीडी भी लॉन्च की गई, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े अनुभवों और आख्यानों का एक मार्मिक दृश्य ूप्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन की मानवीय कीमत पर पुनर्विचार किया गया और विस्थापित हुए देशवासियों को गंभीरता से याद किया गया। अनगिनत पीड़ितों की स्मृति में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जो उनके धैर्य के प्रति एक सम्मानजनक श्रद्धांजलि थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) द्वारा मंचित और लोकेंद्र त्रिपाठी द्वारा निर्देशित ‘बतावारा’ नामक एक नाटक का भी मंचन किया गया।

यह उल्लेखनीय है कि देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई लोगों को अपनी अचल संपत्ति से हाथ धोना पड़ा और अनगिनत महिलाओं को अपनी गरिमा के साथ खिलवाड़ का सामना करना पड़ा। विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों की पीढ़ियाँ आज भी इसके घाव सह रही हैं। भारत का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। हालांकि लोगों का पलायन अगस्त 1947 से पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव विभाजन की औपचारिक घोषणा के बाद देखा गया। इस दर्दनाक घटना के सबसे गंभीर परिणाम पंजाब, बंगाल और सिंध में हुए, फिर भी इसका प्रभाव पूरे देश में महसूस किया गया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस अभूतपूर्व मानवीय संकट में लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और लगभग 20 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। प्रदर्शनी और कार्यक्रम ने जनता की काफ़ी रुचि आकर्षित की, ख़ासकर इस त्रासदी के सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आयामों के विस्तृत चित्रण के कारण, जिससे आगंतुकों को व्यक्तिगत स्मृतियों को सामूहिक इतिहास से जोड़ने का अवसर मिला। पुस्तक विमोचन, डीवीडी लॉन्च के माध्यम से दृश्य दस्तावेज़ीकरण और गरिमापूर्ण जनभागीदारी के रूप में विद्वत्ता के इस एकीकरण के माध्यम से, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र स्मृति की संस्कृति को मज़बूत करना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विभाजन के सबक आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र की साझा चेतना का एक स्थायी हिस्सा बने रहें।
इस स्वतंत्रता दिवस ज़ी सिनेमा में देखिए `आज़ादी एक्सप्रेस’ के साथ. जाट, द साबरमती रिपोर्ट और द केरल स्टोरी का प्रीमियर
भारतीय स्वरूप संवाददाता मुंबई, अगस्त 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है तीन ऐसी कहानियां, जो सच्चाई, हिम्मत और जज़्बे से भरी हैं। ये तीनों प्रीमियर सुबह 10 बजे से एक के बाद एक लगातार दिखाए जाएंगे। सबसे पहले बात करते हैं ‘जाट’ की, जिसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर दोपहर 12:30 बजे होगा। इसमें सनी देओल ‘गदर 2’ की बड़ी कामयाबी के बाद एक और दमदार रोल में लौटे हैं। इस फिल्म में सनी एक फौजी का किरदार निभा रहे हैं, जो लोगों की मदद के लिए ज़ुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होते हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना सबकी हिफ़ाज़त करते हैं। इसके साथ ही लाइनअप में है ‘द साबरमती रिपोर्ट’ – सच की तलाश करने वाली एक बेहद दिलचस्प थ्रिलर जो सुबह 10 बजे शुरू होगी और फिर शाम 3:30 बजे आएगी ‘द केरल स्टोरी’ – एक दिल झकझोर देने वाली कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की मिट्टी से जुड़ी ये तीनों कहानियां, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान के सच्चे जज़्बे को दर्शाती हैं।
सनी देओल की दमदार ‘ढाई किलो का हाथ’ वाली परफॉर्मेंस देखने के लिए तैयार हो जाइए दोपहर 12:30 बजे, फ़िल्म ‘जाट’ में। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है बल्कि ये उस इंसान की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल देता है। सनी का किरदार सच्चा, निडर और मदद करने वाला है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल से टकराता है ताकि देशवासियों की हिफ़ाज़त कर सके। इस फिल्म में सनी देओल ने अपने सारे एक्शन सीन खुद किए हैं, और हर सीन में उनका असली जोश नज़र आता है, और वो फिर याद दिलाते हैं कि क्यों उन्हें पर्दे का सबसे वजनदार हीरो कहा जाता है।
सुबह 10 बजे आएगी ‘द साबरमती रिपोर्ट’, जिसमें हैं विक्रांत मैसी। ये कहानी है उस हादसे की जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था – गोधरा ट्रेन में आग की घटना। ये एक पत्रकार की लड़ाई है, जो हर हाल में सच तक पहुंचना चाहता है। फ़िल्म की कहानी तेज़, असरदार और सच्चे जज़्बातों से भरी है – जो बताती है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बोलने की नहीं, सच जानने की भी आज़ादी है; झूठ और फरेब से आज़ादी!
शाम 3:30 बजे देखिए ‘द केरल स्टोरी’ – वो फ़िल्म जिसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं और जिसे खूब सराहा गया है। इसमें अदा शर्मा ने एक ऐसी लड़की का रोल निभाया है, जो धोखे से आतंक के जाल में फंस जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानती और हिम्मत के साथ उस अंधेरे से बाहर निकलने की लड़ाई लड़ती है। ये कहानी है एक लड़की की जिद और हौसले की जो अपनी ज़िंदगी को फिर से जीने की कोशिश करती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
तो इस 15 अगस्त, अपना दिन कीजिए ज़ी सिनेमा के नाम! देखिए तीन ज़बर्दस्त कहानियां जो सच्चाई, हिम्मत और इंसानियत को सलाम करती हैं – ‘द साबरमती रिपोर्ट’, ‘जाट’ और ‘द केरल स्टोरी’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ, सिर्फ़ ज़ी सिनेमा पर।
Read More »सीआईएसएफ ने रचा नया इतिहास – विश्व पुलिस और अग्निशमन खेलों में रिकॉर्ड पदक जीते
भारतीय स्वरूप संवाददाता भोपाल। अमेरिका के बर्मिंघम में हाल ही में संपन्न विश्व पुलिस और अग्निशमन खेल 2025 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 66 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वर्ष 2024-25 के दौरान सी आई एस एफ के एथलीटों ने कुल 159 पदक जीतकर बल की अब तक की सर्वाधिक पदक संख्या का रिकॉर्ड भी बनाया है।
भारत सरकार की ‘खेलो इंडिया’ नीति के तहत सी आई एस एफ ने खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें खेल बजट में छह गुना वृद्धि, विशेष आहार भत्ता, आधुनिक खेल सुविधाएं, चोट प्रबंधन सेवाएं और वार्षिक टूर्नामेंट कैलेंडर जैसे प्रावधान शामिल हैं। मुख्यालय में खेल गतिविधियों की निगरानी के लिए सहायक महानिरीक्षक स्तर का अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, सी आई एस एफ ने पहली बार माउंट एवरेस्ट अभियान दल का गठन किया है, जो वर्ष 2026 में चढ़ाई करेगा। बल ने अब तक का सबसे बड़ा खेल भर्ती अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत 433 खिलाड़ियों, जिनमें 229 महिलाएं शामिल हैं, की भर्ती की जा रही है। यह अभियान देशभर के 14 चयन केंद्रों पर 7 से 29 जुलाई 2025 तक चला।
खिलाड़ियों को विदेशों में प्रशिक्षण, विशेषज्ञ स्टाफ और अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इस प्रयास का उद्देश्य सी आई एस एफ को खेलों में अग्रणी बनाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक पोडियम तक पहुंच बनाना है।
भोपाल की केओसुब इकाई भेल में अमेरिका से लौटे पदक विजेता पांच सी आई एस एफ एथलीटों का वरिष्ठ कमांडेंट शिवरतन सिंह मीणा व अन्य अधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
कानपुर दर्शन
दिलों में बसा कानपुर, आओ करें गुणगान।
अनेकों दर्शनीय स्थल,सभी रखें निज मान।।
बात करें बिठूर की, ऐतिहासिक सम्मान।
ग्रीन पार्क स्टेडियम, बहु उद्देशीय मैदान।।
पनकी मंदिर बाबा का, मनोकामना धाम।
जे के मंदिर में बसे , राधे संग श्याम।।
बात करें ऊंनं की, लाल इमली उद्यान।
चले जो चिड़िया घर,पक्षी जानवर प्राण।।
अब चले शिवालय, ले चूड़ी चलो चौक।
आगे आए मिस्टन रोड,मिले जहां सब थोक।।
करें अब तपेश्वरी की बात,मिले पुण्य सौगात।
वही पे बिरहाना रोड, ले लो गहने साथ।।
करें पवित्रता की बात, अनेकों गंगा घाट।
चलो जरा फूलबाग, पाएं संग्रहालय आप।।
माहेश्वरी मोहाल , कांच का मंदिर बसा।
भीतर गांव जो जाओ,प्राचीनता से सजा।।
जाजमऊ की टेंडरी,करे लेदर निर्माण ।
निर्यात हो विदेशों में, बने जिससे समान।।
कानपुर बड़ी धरोहर, ऐतिहासिक सम्मान।
गिनाने बैठे जो हम, नहीं सभी आसान!! — डॉ अंजनी अग्रवाल कानपुर नगर
दैनिक भारतीय स्वरूप
अतुल दीक्षित द्वारा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं महाराष्ट्र से प्रकाशित
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Read More »भारत-अमेरिका सांस्कृतिक संपदा समझौता
भारत आवश्यकता अनुसार यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग करता है.
सांस्कृतिक संपदा करार (सीपीए) में तकनीकी सहायता, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक संपदा के लूट के मामलों में सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का प्रावधान है.
भारत आवश्यकतानुसार यूनेस्को और इंटरपोल सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करता है.
सीपीए में तकनीकी सहायता, अवैध व्यापार और सांस्कृतिक संपत्ति की लूट के मामलों में सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का प्रावधान है. यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी.
डॉ. मनसुख मांडविया ने दूसरे खेलो इंडिया पैरा गेम्स का उद्घाटन किया
छह पैरालिंपियन – सिमरन शर्मा (एथलेटिक्स), प्रवीण कुमार (बैडमिंटन), नितेश कुमार (बैडमिंटन), नित्या श्री (बैडमिंटन) और प्रीति पाल (एथलेटिक्स) खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाने के लिए केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, अरुणाचल प्रदेश के खेल और युवा कार्य मंत्री श्री केंटो जिनी और भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष और पूर्व पैरालिंपियन श्री देवेंद्र झाझरिया के साथ एक अनूठी मशाल रैली में शामिल हुए।

डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि वह खेलो इंडिया के हर आयोजन को मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर उत्साहित हैं, जो अब देश के लिए सम्मान जीतने के इच्छुक सभी एथलीटों के लिए “प्रतिष्ठा” बन गया है। डॉ. मांडविया ने कहा, “खेलो इंडिया द्वारा भारतीय खेलों में दिए गए योगदान से मैं बेहद गर्वित और उत्साहित हूं। चाहे वह खेलो इंडिया यूथ गेम्स हो, खेलो इंडिया स्कूल गेम्स हो, खेलो इंडिया विंटर गेम्स हो या खेलो इंडिया पैरा गेम्स हो, हमारे एथलीट हर जगह अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित कर रहे हैं।”

डॉ. मांडविया ने आगे कहा, “जब कोई दृढ़ निश्चय कर लेता है, सही दिशा में आगे बढ़ता है और कड़ी मेहनत करता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है। पेरिस पैरालिंपिक 2024 में मिली सफलता, जहाँ हमने कुल 29 पदक जीते, ने साबित कर दिया कि हमारे एथलीटों में देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करने की क्षमता है। खेलो इंडिया पैरा गेम्स के माध्यम से हमारे एथलीटों को बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं और वे सफलता का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जिसकी हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल्पना की थी।”
डॉ. कुमार ने भी खेलो इंडिया पहल की सराहना की और कहा, “खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 भारतीय एथलीटों के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने और अपनी प्रतिभा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए एक विश्व स्तरीय मंच है। साथ ही, यह पैरा एथलीटों को न केवल खुद को साबित करने का मौका देता है, बल्कि अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा के माध्यम से दूसरों को प्रेरित भी करता है।”
उद्घाटन समारोह में देश भर से एथलीट, कोच और सहयोगी स्टाफ शामिल हुए। सचिव (खेल) श्रीमती सुजाता चतुर्वेदी और भारतीय खेल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में मौजूद थे।
केआईपीजी 2025 के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें: स्वागत | केआईपीजी 2025
खेलो इंडिया पैरा गेम्स के बारे में
खेलो इंडिया पैरा गेम्स, खेलो इंडिया मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली एथलीटों को अपने खेल और प्रतिस्पर्धी कौशल का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। दिसम्बर 2023 में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स का पहला संस्करण पैरा-एथलीटों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम बनाने के लिए आयोजित किया गया था। खेल नई दिल्ली में तीन स्थानों पर सात खेल विधाओं में खेले गए। राजधानी में तीन स्थानों पर 20-27 मार्च, 2025 के बीच आयोजित होने वाले केआईपीजी के दूसरे संस्करण में छह विधाएँ – पैरा-एथलेटिक्स, पैरा तीरंदाजी, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस और पैरा शूटिंग – आयोजित की जाएँगी।
भारत के शुभांकर प्रकाश के निर्देशन में फ़्रांस में चल रहा देश की कलात्मक विरासत का जश्न
भारतीय स्वरूप संवाददाता पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जाएगी भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत कला क्षेत्र में वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित आर्ट संस्थान के निदेशक ऑपरेशन हैं सुल्तानपुर के शुभांकर प्रकाश
लखनऊ/ नई दिल्ली। भारत की अमित विरासत को दुनियां से रूबरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी शुभांकर प्रकाश भारती (संचालन निदेशक) ने भारतीय कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित करने वाली एक कला प्रदर्शनी आयोजित की है।फ़रवरी प्रथम सप्ताह से आगामी 22 मार्च चलने वाली यह प्रदर्शनी पेरिस में प्रतिष्ठित 193 आर्ट गैलरी में आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत का जश्न मनाना है, जिसमें देश की जीवंत संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली शानदार कलाकृतियों का संग्रह एक साथ लाया जाएगा। प्रदर्शनी में पारंपरिक पेंटिंग, समकालीन कृतियाँ और मिश्रित मीडिया कृतियां सहित विभिन्न प्रकार की कलाएं प्रदर्शित की जाएँगी। आगंतुकों को भारतीय कलाकारों की अनूठी शैलियों और तकनीकों को जानने, उनकी रचनात्मक प्रक्रियाओं और उनकी उत्कृष्ट कृतियों के पीछे की कहानियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए जानी जाने वाली 193 आर्ट गैलरी इस प्रदर्शनी के लिए एकदम सही जगह है। पेरिस के केंद्र में स्थित, गैलरी कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं को भारतीय कला की सुंदरता और गहराई की सराहना करने के लिए एक परिष्कृत और स्वागत योग्य स्थान प्रदान करती है।
*साहित्य प्रसारक राजेश कुमार के बेटे हैं शुभांकर प्रकाश
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के भारतीय साहित्य के प्रसारक और व्यवसायी राजेश कुमार के एक बेटी और दो बेटों में से एक शुभांकर प्रकाश भारती हैं। जेएनवी नवोदय विद्यालय सुल्तानपुर से शुभांकर ने बारहवीं कक्षा तक टॉप किया था। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में तीसरी रैंक हासिल की थी इसी क्रम में शुभंकर ने प्रवेश के लिए शांतिनिकेतन चुना।फिर वहां से अपनी प्रतिभा के दम पर स्कॉलरशिप पर फ्रांस चले गए। जहां आगे की पढ़ाई की और अब वहां की प्रतिष्ठित आर्ट गैलरी में डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशन है। शुभांकर के भाई रविंद्र प्रकाश बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर हैं।
अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 8 दिसंबर एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज द्वारा अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया यह प्रतियोगिता सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में आयोजित की गई जिसमें कानपुर नगर से पांच महाविद्यालयों ने ट्रायल में प्रतिभा किया। इस अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में टीमों की संख्या की प्रतिभागिता कम होने के कारण ट्रायल करवाया गया जिसमें 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। रेफरी श्री अनुज , श्री हरप्रीत , एवंअनुराग को कानपुर हैंडबॉल एसोसिएशन से आमंत्रित किया गया था।ट्रायल में कुल 35 खिलाड़ियों ने प्रतिभा किया जिसमें से 21 खिलाड़ियों को चयनित किया गया यह सभी चयनित खिलाड़ी एक हफ्ते के कैंप के बाद छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की हैंडबॉल महिला टीम बनाकर नॉर्थ जोन अंतर विश्वविद्यालय ही प्रतियोगिता में प्रतिभा करेंगे प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी और प्रोफेसर प्रीति पांडेय जो इस कार्यक्रम की आयोजन सचिव थी उनको सफल ट्रायल हेतु बधाई दी एवं टीम को आगे और मेहनत कर कानपुर विश्वविद्यालय टीम को को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
चयनित खिलाड़ियों के नाम निम्न वत हैं– आरती देवी, दिव्यांशी सिंह ,अनामिका कुमारी ,आरोही द्विवेदी ,दीक्षा कुमारी ,दिव्या सिंह, अंकित यादव, आराध्या यादव ,प्रीति सिंह , नित्या ,मुस्कान गौतम ,अंजलि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से निशा विश्वकर्मा, रागिनी गिरी ,नैंसी वर्मा ,निशा, दीपिका कुमारी ए एन डी कॉलेज कानपुर से, स्वाति , प्रिया एस एन सेन बालिका विद्यालय, पीजी कॉलेज से , दीशिका सिंह VSSD कॉलेज कानपुर , जहान्वी DAV कॉलेज कानपुर इस प्रकार कुल 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। इन सभी खिलाड़ियों का छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की तरफ से नॉर्थ जोन महिला हैंडबॉल अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में प्रतिभा करने वाली छात्रों के लिए चयन किया जाएगा इन सभी खिलाड़ियों के लिए एक हफ्ते का कैंप लगेगा उपरांत टीम हेतु 16 खिलाड़ियों का चयन करके विश्वविद्यालय को प्रतिनिधित्व करते हुए टीम का चयन किया जाएगा पूरे कार्यक्रम का आयोजन प्रोफेसर प्रीति पांडेय विभागध्यक्ष शारीरिक शिक्षाविभाग सेन कॉलेज के द्वारा किया गया प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं शिक्षिकाओं ने आयोजन सचिव को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी। हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में कराया गया जहां की प्राचार्य एवं खेल शिक्षक श्री शंकर जी ने पूर्ण सहयोग के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया ।आयोजन सचिव ने सेन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं सेठ मोतीलालविद्यालय के प्राचार्य एवं सहयोगियों को धन्यवाद प्रेषित किया।
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