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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर की अनंतिम उम्मीदवारी रद्द की और उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं/चयनों से स्थायी रूप से वंचित किया गया

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा 18 जुलाई, 2024 को सिविल सेवा परीक्षा-2022 (सीएसई-2022) की अनंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवार सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था। इस नोटिस में अपनी पहचान को गलत तरीके से पेश करके परीक्षा नियमों में निर्धारित प्रदत्त सीमा से अधिक प्रयास करने के लिए उन्हें 25 जुलाई, 2024 तक एस.सी.एन. में अपना जवाब प्रस्तुत करना था। हालांकि, उन्होंने 04 अगस्त, 2024 तक का अतिरिक्त समय मांगा था, ताकि वह अपने जवाब के लिए आवश्यक दस्तावेज एकत्र कर सकें।

2. यूपीएससी ने सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के अनुरोध पर सावधानीपूर्वक विचार किया और न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, उन्हें 30 जुलाई, 2024 को दोपहर 3:30 बजे तक का समय दिया गया, ताकि वे एस.सी.एन. में अपना जवाब प्रस्तुत कर सकें। सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को यह भी स्पष्ट रूप से बता दिया गया कि यह उनके लिए अंतिम अवसर है और इससे आगे उन्हें कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। उन्हें स्पष्ट शब्दों में यह भी बताया गया कि यदि उपरोक्त तिथि/समय तक कोई जवाब नहीं मिलता है, तो यूपीएससी उनसे कोई और संदर्भ लिए बिना आगे की कार्रवाई करेगा। उन्हें दिए गए अतिरिक्त समय के बावजूद, वह निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने में विफल रहीं।

3. यूपीएससी ने उपलब्ध अभिलेखों की सावधानीपूर्वक जांच की है और उसे सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। सीएसई-2022 के लिए उसकी अनंतिम उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है और उन्हें यूपीएससी की सभी आगामी परीक्षाओं/चयनों से स्थायी रूप से वंचित कर दिया गया है।

4. सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के मामले को देखते हुए, यूपीएससी ने वर्ष 2009 से 2023 यानि 15 वर्षों के सीएसई के 15,000 से अधिक अंतिम रूप से अनुशंसित उम्मीदवारों के उपलब्ध अभिलेखों की उनके द्वारा प्राप्त प्रयासों की संख्या के संबंध में गहन जांच की। इस विस्तृत जांच के बाद, सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के मामले को छोड़कर, किसी अन्य उम्मीदवार को सीएसई नियमों के तहत प्रदत्त संख्या से अधिक प्रयासों का लाभ उठाते हुए नहीं पाया गया है। सुश्री पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के एकमात्र मामले में, यूपीएससी की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मुख्य रूप से इस तथ्य के कारण उसके प्रयासों की संख्या का पता नहीं लगा सकी क्योंकि उन्होंने न केवल अपना नाम बल्कि अपने माता-पिता का नाम भी बदल लिया था। यूपीएससी एसओपी को और सशक्त करने की प्रक्रिया में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसा मामला दोबारा ना आ सके।

5. जहां तक ​​झूठे प्रमाणपत्र (विशेष रूप से ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों) जमा करने की शिकायतों का सवाल है, यूपीएससी यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह प्रमाण पत्रों की केवल प्रारंभिक जांच करता है, जैसे कि प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है या नहीं, प्रमाण पत्र किस वर्ष से संबंधित है, प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि, प्रमाण पत्र पर कोई ओवरराइटिंग है या नहीं, प्रमाण पत्र का प्रारूप आदि। आम तौर पर, यदि प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, तो उसे असली माना जाता है। यूपीएससी के पास हर साल उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए हजारों प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करने का न तो अधिदेश है और न ही साधन। हालांकि, यह समझा जाता है कि प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच और सत्यापन का कार्य कार्य सौंपे गए अधिकारियों द्वारा किया गया है।

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भारत को आपूर्ति श्रृंखला परिषद का उपाध्यक्ष नियुक्‍त किया गया

भारत और 13 अन्य हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) भागीदारों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन से संबंधित महत्वपूर्ण इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (आईपीईएफ) समझौते के तहत तीन आपूर्ति श्रृंखला निकायों की स्थापना की है। आपूर्ति श्रृंखला परिषद (एससीसी), संकट प्रतिक्रिया नेटवर्क (सीआरएन) और श्रम अधिकार सलाहकार बोर्ड (एलआरएबी) की उद्घाटन वर्चुअल बैठकों के आयोजन से आपूर्ति श्रृंखला में लचीलेपन को सुदृढ़ करने के लिए भागीदार देशों के बीच सहयोग के क्षेत्र में एक महत्‍वपूर्ण कदम के साथ आगे बढ़े हैं।

इन आयोजित उद्घाटन बैठकों के माध्यम से, 14 आईपीईएफ भागीदारों ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं का लचीलापन, प्रतिस्पर्धा और श्रम अधिकारों को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि के लिए जोखिम पैदा करने वाले आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से निपटने के लिए बेहतर तैयारी और प्रतिक्रियात्‍मक रूप से सहयोग की सुविधा के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं और सामूहिक संकल्प की पुष्टि की।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सर्वप्रथम आईपीईएफ आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन समझौते पर अन्य आईपीईएफ भागीदार देशों के मंत्रियों के साथ नवंबर 2023 में वाशिंगटन डीसी में हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य आईपीईएफ आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला, मजबूत और अच्छी तरह से एकीकृत बनाना तथा समग्र रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक विकास और प्रगति में योगदान देना है। इस समझौते की पुष्टि फरवरी 2024 में की गई थी और यह तभी से लागू है। इससे पूर्व भी श्री गोयल ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की वैश्विक उत्पादन क्षमताओं के बारे में बताया है, जो आईपीईएफ भागीदारों के लिए आपूर्ति विविधीकरण के अवसर प्रदान करते हैं।

इससे पूर्व, जून 2024 में सिंगापुर में आयोजित आईपीईएफ मंत्रिस्तरीय बैठक में वाणिज्य विभाग के सचिव सुनील बर्थवाल ने इस पर प्रकाश डाला कि भारत अपनी कौशलयुक्‍त जनशक्ति, प्राकृतिक संसाधनों और नीतिगत समर्थन के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख भागीदार बनने का लक्ष्य रखता है। सरकार की पहल समाधान और विविध एवं पूर्वानुमानित आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी सुनिश्चित करना है

आपूर्ति श्रृंखला समझौते के अनुसार, आईपीईएफ भागीदारों ने तीन आपूर्ति श्रृंखला निकायों की स्थापना की – एक आपूर्ति श्रृंखला परिषद, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों और वस्तुओं के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लक्ष्‍य प्राप्ति हेतु कार्रवाई-उन्मुख कार्य करेगी; एक संकट प्रतिक्रिया नेटवर्क, जो सामूहिक आपातकालीन व्यवधानों के लिए प्रतिक्रिया स्वरूप एक मंच प्रदान करेगा; और एक श्रम अधिकार सलाहकार बोर्ड, जो क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में श्रम अधिकारों और कार्यबल विकास को बल प्रदान करने के लिए श्रमिकों, नियोक्ताओं और सरकारों को एक दिशा में लेकर आता है।

भारत ने एक लचीले आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क के महत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण के दृष्टिकोण से इसके लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर हितधारकों के साथ चल रहे परामर्श पर अपने विचार साझा किए। भारत ने कौशल विकास क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस बात पर जोर दिया गया कि हमारी अर्थव्यवस्थाओं में अंतराल की पहचान करना और सही कौशल सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी, जिसमें एक लचीले आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कार्यबल विकास और डिजिटलीकरण के लिए तकनीकी सहायता शामिल है।

बैठकों के दौरान, तीनों आपूर्ति श्रृंखला निकायों में से प्रत्येक ने एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया, जो दो वर्ष की अवधि के लिए कार्य करेंगे। निर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं:

  • आपूर्ति श्रृंखला परिषद: अमेरिका (अध्यक्ष) और भारत (उपाध्यक्ष)
  • संकट प्रतिक्रिया नेटवर्क: कोरिया गणराज्य (अध्यक्ष) और जापान (उपाध्यक्ष)
  • श्रम अधिकार सलाहकार बोर्ड: संयुक्त राज्य अमेरिका (अध्यक्ष) और फिजी (उपाध्यक्ष)

सप्लाई चेन काउंसिल ने संदर्भ की शर्तें अपनाईं और आरंभिक कार्य प्राथमिकताओं पर चर्चा की, जिन पर सप्लाई चेन समिट के दौरान सितंबर 2024 में वाशिंगटन, डीसी में होने वाली अपनी पहली व्यक्तिगत बैठक में आगे चर्चा की जाएगी। क्राइसिस रिस्पॉन्स नेटवर्क ने निकट और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की, जिसमें टेबल टॉप अभ्यास आयोजित करना शामिल है, और सप्लाई चेन समिट के साथ-साथ अपनी पहली व्यक्तिगत बैठक की योजना बनाई। श्रम अधिकार सलाहकार बोर्ड ने आईपीईएफ आपूर्ति श्रृंखलाओं में श्रम अधिकारों को मजबूत करने की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। यह आयोजन न केवल श्रम अधिकार सलाहकार बोर्ड के कार्य को आगे बढ़ाएगा, बल्कि आईपीईएफ स्वच्छ अर्थव्यवस्था समझौते और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था समझौते में श्रम प्रावधानों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

आईपीईएफ साझेदारों ने आपूर्ति श्रृंखला शिखर सम्मेलन के अवसर पर सितंबर 2024 में वाशिंगटन डीसी में होने वाली आगामी व्यक्तिगत बैठक के महत्व को भी रेखांकित किया।

आईपीईएफ के बारे में: आईपीईएफ की शुरुआत 23 मई 2022 को टोक्यो, जापान में की गई थी, जिसमें यह 14 देश, ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, फिजी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया गणराज्य, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और अमेरिका शामिल हैं। आईपीईएफ का उद्देश्य क्षेत्र में विकास, आर्थिक स्थिरता और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ भागीदार देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव और सहयोग को मजबूत करना है। यह ढांचा व्यापार (स्तंभ I); आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (स्तंभ II); स्वच्छ अर्थव्यवस्था (स्तंभ III); और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था (स्तंभ IV) से संबंधित चार स्तंभों के आसपास संरचित है। भारत आईपीईएफ के स्तंभ II से IV में शामिल हो गया है, जबकि इसने स्तंभ- I में पर्यवेक्षक की भूमिका का निर्वाहन किया है।

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उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम के लिए बजट का आवंटन

भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) के तहत कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) देश भर में समाज के सभी वर्गों को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों/संस्थानों आदि के व्यापक नेटवर्क से  स्किल, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान 2023-24 तक कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की विभिन्न योजनाओं के तहत किए गए व्यय का विवरण इस प्रकार है :

 

राशि करोड़ रुपये में

योजना का नाम 2019-20 2020-21 2021-22 2022-23 2023-24
पीएमकेवीवाई 1613.26 1514.76 1043.21 233.26 502.00
जेएसएस 111.98 107.68 137.64 154.66 154.38
एनएपीएस 47.60 107.64 241.60 335.42 632.82

 

आईटीआई के संबंध में रोजाना के कामकाज के साथ-साथ वित्तीय नियंत्रण संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के पास है।

 

समय-समय पर कौशल अंतर अध्ययन आयोजित किए जाते हैं, जो आवश्यक कौशल और विभिन्न क्षेत्रों में कौशल अंतर के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। उद्योग की जरूरतों के अनुसार कार्यबल को तैयार करने के उद्देश्य इस तरह के अध्ययन किए जाते हैं। इसके अलावा जमीनी स्तर पर विकेंद्रीकृत योजना और कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए जिला कौशल समितियों (डीएससी) को जिला कौशल विकास योजनाएं (डीएसडीपी) तैयार करने का अधिकार दिया गया है। डीएसडीपी जिले में रोजगार के अवसरों के साथ-साथ कौशल की संबंधित मांग वाले क्षेत्रों की पहचान करते हैं और कौशल प्रशिक्षण के लिए उपलब्ध सुविधाओं का खाका या ढांचा तैयार करते हैं। सरकार के कौशल विकास कार्यक्रमों को विभिन्न क्षेत्रों में पहचाने गए कौशल अंतर को पाटने के लिए तैयार और कार्यान्वित किया जाता है।

भविष्य के कार्यबल के लिए कौशल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए योग्यता की गुणवत्ता में सुधार और उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए अर्थव्यवस्था व प्रौद्योगिकी में बदलाव के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संरेखित करने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं :

प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने और प्रशिक्षुओं की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:

  1. एमएसडीई की योजनाओं के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उद्योगों के सहयोग से विकसित किया जाता है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा संबंधित क्षेत्रों में उद्योग के दिग्गजों के नेतृत्व में 36 क्षेत्र कौशल परिषदों (एसएससी) की स्थापना की गई है, जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल योग्यता मानकों को निर्धारित करने के लिए अनिवार्य हैं।
  2. पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत उद्योग 4.0 की आवश्यकता को पूरा करने वाले भविष्य के लिए तैयार रोजगार की भूमिका, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। सीटीएस के तहत भी उभरती प्रौद्योगिकियों में नौकरी की भूमिकाओं की मांग को पूरा करने के लिए नए युग के पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं।
  3. राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमों और मानकों की स्थापना करने वाले एक व्यापक नियामक के रूप में स्थापित किया गया है।
  4. एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त पुरस्कार देने वाले निकायों से उम्मीद की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यता विकसित करेंगे और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के व्यवसाय के राष्ट्रीय वर्गीकरण 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ उनका खाका तैयार करेंगे और उद्योग मान्यता प्राप्त करेंगे।
  5. प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) लागू कर रहा है। इन पहल का उद्देश्य आईटीआई छात्रों को औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।
  6. राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) से जुड़े पाठ्यक्रमों में ऑन जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) और रोजगार योग्यता कौशल के घटक भी हैं।
  7. डीजीटी ने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत राज्य और क्षेत्रीय स्तरों पर संस्थानों के लिए उद्योग संबंध सुनिश्चित करने के लिए आईबीएम, सिस्को, फ्यूचर स्किल राइट्स नेटवर्क (पूर्ववर्ती क्वेस्ट एलायंस), अमेजॉन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) और माइक्रोसॉफ्ट जैसी आईटी टेक कंपनियों के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  8. एनएसडीसी, बाजार आधारित कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्रदाताओं को सहायता प्रदान करता है जो उद्योग की मांग के साथ कौशल पाठ्यक्रमों को सहयोग और संरेखित करते हैं।
  9. एनएपीएस के तहत प्रशिक्षुता प्रशिक्षण और प्रशिक्षुता कार्यक्रम शुरू करने के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ जुड़ाव बढ़ाने को बढ़ावा दिया जाता है।
  10. भारत सरकार ने दस देशों जैसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इजराइल, ताइवान, ऑस्ट्रिया, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल और फिनलैंड के साथ प्रवासन और गतिशीलता समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन देशों में मांग के साथ कौशल को संरेखित करने के लक्ष्य से यह किया गया है।
  11. भारत सरकार ने विदेशों में कुशल श्रमिकों की मांग को पूरा करने के लिए 30 कौशल भारत अंतर्राष्ट्रीय केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है।

 

यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमिता (एमएसडीई) मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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कोयले का उत्पादन

देश में कोयले की अधिकांश मांग स्वदेशी उत्पादन/आपूर्ति के माध्यम से पूरी की जाती है। कोयले की वास्तविक मांग 2022-23 में 1115.04 एमटी थी जो 2023-24 में बढ़कर 1233.86 मिलियन टन (एमटी) हो गई। कोयले की बढ़ती मांग के मुकाबले घरेलू कोयले का उत्पादन भी बढ़ा है। 2023-24 में घरेलू कोयला उत्पादन 11.65 प्रतिशत बढ़कर 997.26 एमटी हो गया, जो 2022-23 में 893.19 एमटी था।

स्वदेशी स्रोतों के माध्यम से कोयले की भविष्य की मांग को पूरा करने और कोयले के गैर-आवश्यक आयात को कम करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन अगले कुछ वर्षों में सालाना 6-7% बढ़कर 2029-30 तक लगभग 1.5 बिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है।

कोल इंडिया लिमिटेड की वॉशरी के प्रदर्शन में गिरावट और इस्पात क्षेत्र में धोए गए कोकिंग कोयले की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने धोए गए कोकिंग कोयले की क्षमता बढ़ाने के लिए पुरानी वॉशरी के मुद्रीकरण का मार्ग अपनाया है। इसके अनुरूप सरकार ने ‘डब्ल्यूडीओ मार्ग के माध्यम से कोकिंग कोयले का उपयोग करने वाले इस्पात’ के नाम के साथ गैर-विनियमित क्षेत्र लिंकेज नीलामी के तहत एक नए उप-क्षेत्र के निर्माण को मंजूरी दी है। अनुबंध की पूरी अवधि के लिए चिह्नित खदानों से दीर्घकालिक कोयला लिंकेज के आश्वासन के साथ नए उप-क्षेत्र के निर्माण से कोकिंग कोयला वॉशरी का मुद्रीकरण होगा। इससे देश में धोए गए कोकिंग कोयले की उपलब्धता में वृद्धि होगी। यह भी उम्मीद की जाती है कि नए उप-क्षेत्र से देश में इस्पात उद्योग में घरेलू कोकिंग कोयले की खपत बढ़ेगी।

कोकिंग कोयले के आयात के स्थान पर इस्पात क्षेत्र द्वारा कोकिंग कोयले के वर्तमान घरेलू सम्मिश्रण को वर्तमान 10-12% से बढ़ाकर 30-35% किया जाएगा। कोयला मंत्रालय ने राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 में अनुमानित घरेलू कोकिंग कोयले की मांग को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2022 में मिशन कोकिंग कोल की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत कोयला मंत्रालय द्वारा किए गए परिवर्तनकारी उपायों के बाद घरेलू कच्चे कोकिंग कोयले का उत्पादन 2030 तक 140 एमटी तक पहुंचने की संभावना है।

भारत सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र के लिए कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के रूप में 8500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है। स्वीकृत योजना में 8500 करोड़ रुपये के कुल प्रोत्साहन भुगतान के साथ तीन श्रेणियों के तहत परियोजनाएं शामिल हैं।

  • श्रेणी I, 4050 करोड़ के प्रावधान के साथ सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के लिए है। वे वित्त पोषण सहायता के लिए प्रस्ताव पेश कर सकते हैं और तीन चयनित परियोजनाओं को अधिकतम 1350 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी वीजीएफ के रूप में कम हो, प्राप्त होगा।
  • श्रेणी II, ₹3850 करोड़ के साथ, निजी क्षेत्र और सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों दोनों के लिए उपलब्ध है, जिसमें अधिकतम अनुदान 1000 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी वीजीएफ के रूप में कम है।
  • श्रेणी III, प्रदर्शन या लघु-स्तरीय परियोजनाओं के लिए ₹600 करोड़ आवंटित करती है, जिसमें प्रति परियोजना अधिकतम परिव्यय 100 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी कम हो।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही सूर्य प्रताप को खेल मंत्री ने किया सम्मानित।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोही एवं मानव अधिकार कार्यकर्ता सूर्य प्रताप को माननीय खेल मंत्री उत्तर प्रदेश ने किया सम्मानित

भारतीय स्वरूप संवाददाता, बाल और महिला अधिकारी अधिकारों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले सूर्य प्रताप मिश्र पुत्र महेंद्र प्रताप मिश्र को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ” उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च युवा पुरूस्कार 2023 से नवाजा था।

18 मार्च 2024 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आर्थिक सहयोग से दुनिया की चौथी ऊँची चोटी एवं अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो (लगभग 20 हजार फ़ीट ) पर सूर्य ने बतौर युवा पर्वतारोही ने भारतीय ध्वज ‘तिरंगा’ फहराकर प्रदेश व देश का मान बढ़ाने के लिये उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री श्री गिरीश चंद्र यादव ने सम्मानित किया।
इनकी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल लखनऊ से हुई और सैनिक स्कूल मे पढ़ाई के दौरान भारत स्काउट गाईड के नेशनल एडवेंचर संस्थान पंचमढ़ी (मध्य प्रदेश ) से नेशनल एडवेंचर प्रोग्राम मे A ग्रेड हासिल किया ,एवं झारखण्ड एडवेंचर ट्रेवल अकेडमी एवं नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तराखंड से पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, पैराशेलिंग एवं अन्य एडवेंचर प्रोग्राम को A ग्रेड से उत्तीर्ण किया!
लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक करने के दौरान NCC मे C सर्टिफिकेट हासिल किये! भविष्य मे अन्य 6 महाद्वीपो के सर्वोच्च पर्वत शिखरो पर भारतीय तिरंगा फहरा अपने जनपद व देश का मान बढ़ाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण व बाल संरक्षण हेतू पुरे विश्व को सन्देश देना चाहते है!

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पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, बेवजह बदसलूकी न हो इसका रखें ध्यान : पुलिस कमिश्नर

कानपुर प्रेस क्लब ने सौंपा ज्ञापन, पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी, एसीपी व समस्त थाना प्रभारियों को दिए निर्देश*

भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित पर दर्ज हुए मुकदमों व गिरफ्तारी के बाद निष्पक्ष जांच व बेवजह पत्रकारों का उत्पीड़न न हो इस मुद्दे को लेकर बुधवार को कानपुर प्रेस क्लब के प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से मुलाकात की। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष सरस बाजपेई व महामंत्री शैलेश अवस्थी की तरफ से पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन भी सौंपा गया। प्रतिनिधि मंडल ने कमिश्नर से मांग की कि प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच हो। पत्रकारों के घरों पर बेवजह छापे न मारे जाएं। जरूरी हो तो पूछताछ के लिए अवगत करा दिया जाए ताकि किसी पत्रकार की बेवजह छवि न खराब हो। इसके साथ ही फील्ड पर काम कर रहे पत्रकारों का उत्पीड़न और बेवजह बदसलूकी न की जाए। मंगलवार रात कल्याणपुर थाना क्षेत्र में कवरेज के दौरान एक पत्रकार से की गई बदसलूकी से भी पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया। इसपर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने तत्काल समस्त जोन के डीसीपी, एसीपी और सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि बेवजह किसी पत्रकार से बदसलूकी न की जाए। अगर पत्रकारों से अभद्रता की शिकायतें मिलीं तो यह ठीक नहीं होगा। पत्रकार लोकतंत्र के स्तम्भ हैं, उन्हें अपना काम करने दिया जाए। ज्ञापन देने वालों में पूर्व महामंत्री कुशाग्र पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव सारस्वत, कोषाध्यक्ष सुनील साहू, वरिष्ठ मंत्री मोहित दुबे, मंत्री शिवराज साहू, कार्यकारिणी सदस्य कौस्तुभ शंकर मिश्रा, गगन पाठक, दीपक सिंह, मयंक मिश्रा, उत्सव शुक्ला, नौशाद खान, अंकित शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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यूनियन बजट – 2024 में युवा एवं महिलाओं के कौशल विकास एवं रोजगार हेतु किए गए विशेष प्रावधान

कानपुर 29 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में एनएसएस वालंटियर्स एवं अन्य छात्र छात्राओं को बजट 2024 में युवाओं के कौशल विकास , रोजगार एवं महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष रूप से किए गए प्रावधानों पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वॉलिंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता की तथा अपने-अपने विचार रखें। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया , एवम् स्किल इंडिया आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए छात्राओं को बताया गया कि किस प्रकार से युवा खासकर महिलाएं एवं युवतियां किस प्रकार से , कहां से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं तथा अपना रोजगार (स्टार्टअप) प्रारंभ कर स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं तथा अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर देश के आर्थिक विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज ने जागरूकता अभियान चलाकर नशा मुक्त भारत बनाने का संदेश दिया

कानपुर 26 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आज दिनांक 26 जुलाई 2024 को एन एस एस वॉलिंटियर्स के द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा जागरूकता अभियान चलाकर नशा मुक्त भारत बनाने का संदेश आम जन जन तक पहुंचाया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने स्लोगन राइटिंग, डिबेट पोस्टर मेकिंग आदि प्रतियोगिताएं की। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। वॉलिंटियर्स के द्वारा लोगों को नशे से होने वाली हानि जैसे रोड एक्सीडेंट्स तथा गंभीर रोगों कैंसर , टीवी, फेफड़ों के अन्य रोग, त्वचा संबंधी रोग तथा विभिन्न प्रकार की एलर्जी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी गई ।

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भारतीय मजदूर संघ का 70 वां स्थापना दिवस संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, “भारतीय मजदूर संघ” के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर 23 जुलाई को निर्माणी गेट पर कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना के संबंध में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर ऑर्डनेन्स पैराशूट निर्माणी कानपुर के गेट पर सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ के महासचिव श्री साधू सिंह ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ के स्थापना के पूर्व कई ट्रेड यूनियन संगठन देश में कार्य कर रहे थे लेकिन यह श्रम संगठन कर्मचारियों के बीच में राष्ट्रीय विचारधारा से अलग हो चुके थे। कुछ संगठन अंतर्राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे और एक संगठन सरकार का पिछलग्गू था। ऐसे में कर्मचारियों में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रेरित करने हेतु एक गैर राजनीतिक संगठन की आवश्यकता थी। इसी भावना को लेकर 23 जुलाई 1955 को भोपाल में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की गई। स्थापना के समय केवल नौ लोग ही इसके संस्थापक थे। भारतीय मजदूर संघ ने शून्य से अपना काम प्रारंभ किया आज भारतीय मजदूर संघ पहले स्थान पर प्रतिस्थापित है और राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारतीय मजदूर संघ किसी राजनीतिक विचारधारा से ओतप्रोत नहीं है। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर निरंतर अपना कार्यक्रम चला रहा है। आज भारतीय मजदूर संघ की सभी उद्योगों में और सभी प्रदेशों में यूनियन और महासंघ कार्यरत है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज ट्रेड यूनियन आंदोलन काफी कमजोर हुआ है। हमें और अधिक काम करना है। केंद्र में और राज्यों में किसी भी दल की सरकार हो उसकी परवाह किए बगैर हम अपना कार्य कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा के नाम पर जो पेंशन की सुविधा प्राप्त थी उसे समाप्त कर नई पेंशन प्रणाली लागू की गई। इसमें कर्मचारियों का अहित हुआ है। उन्हें गारंटीड पेंशन स्कीम के अंतर्गत लाने के लिए हमारे आंदोलन जारी है और कर्मचारियों को जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे। इसी प्रकार आज देश में बेरोजगारी की समस्या अपने चरम पर है। सरकार संविदा कर्मचारियों और ठेका कर्मचारियों को बढ़ावा दे रही है जिनका शोषण सर्वाधिक है। इसलिए हमारी मांग है कि केंद्र राज्य कर्मचारियों के लाखों रिक्त स्थानों को अविलंभ भर जाए। इसी प्रकार कर्मचारियों के वेतन भत्तो को संशोधित करने के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग को लेकर हम आंदोलन रत हैं। रक्षा क्षेत्र में आयुध निर्माणियों का निगमीकरण किया जा चुका है, कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षित रहें अर्थात सेवा निवृत के समय तक उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके लिए भी हमारा आंदोलन चल रहा है। हम मांग कर रहे हैं कि प्रसार भारती की तरह कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सरकार ने मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देना बंद कर रखा है वह फिर से प्रारंभ किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि आज हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी माननीय बाल गंगाधर तिलक और माननीय चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म दिवस है उनके महान कार्यों को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं में साधू सिंह, शिव कुमार शर्मा,  निर्मल कुमार, सुधीर त्रिपाठी, सचिन वर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, प्रेम कुमार, जय यादव, दीपक यादव, वीरेंद्र यादव, संजीव कश्यप, अजय जयसवाल आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता श्री सचिन वर्मा ने की।

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दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में एक पेड़ मां के नाम तथा पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ अभियान के अंतर्गत किया गया पौधारोपण

दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवकों द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत वृहद पौधारोपण किया गया । इस वर्ष की थीम “पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ” के आधार पर समस्त वॉलिंटियर्स एवं प्राध्यापिकाओं ने पौधारोपण करते हुए निरंतर प्रयास से पेड़ो को बचाए रखने हेतु संकल्प लिया । इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार मातृ वाटिका का निर्माण भी किया गया। लगाए गए पौधों में मुख्यतः सागौन , आम , जामुन इमली, नीम , पीपल , पाखड़ , नींबू इत्यादि रहे। इस अवसर पर कुछ पौधे मातृ वाटिका में लगाए गए तथा कुछ पौधे छात्राओं को वितरित किए गए ताकि वह अपने घर, आंगन या प्रांगण में वह पौधा लगाकर उसकी रक्षा करें तथा उसे पाल पोसकर बड़ा करें।
इस अभियान के अंतर्गत आज यह दूसरा चरण था जिसमें कुल 50 पौधे लगाए गए प्रथम चरण में भी 50 पौधे स्वयं सेविकाओं को लगाने हेतु वितरित किए गए थे। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो वंदना निगम में छात्राओं को वृक्ष लगाने तथा उनकी सुरक्षा करने के महत्व के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। इस अवसर पर महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग, रसायन शास्त्र विभाग, भूगोल विभाग की समस्त प्राध्यापिकाओं समेत आइक्यूएसी इंचार्ज प्रो सुगंधा तिवारी एवं अलका श्रीवास्तव उपस्थिति रही। राष्ट्रीय सेवा योजना की 56 छात्राओं के द्वारा मातृ वाटिका के निर्माण में सक्रिय योगदान किया गया।

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