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रक्षा मंत्री नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के 16 रक्षा उपक्रमों के वार्षिक कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे

रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह 1 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के 16 रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक कार्य-निष्पादन की समीक्षा करेंगे। इस दौरान नई स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और निर्यात को बढ़ावा देने के महत्व पर विशेष बल दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के सात रक्षा उपक्रमों – हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई), बीईएमएल और मिधानी (एमआईडीएचएएनआई) – के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी पर प्राप्त लाभांश के चेक रक्षा मंत्री को सौंपेंगे।

इस अवसर पर राजनाथ सिंह चार पुस्तकों का विमोचन करेंगे। इनमें ‘आत्मनिर्भर डीपीएसयू – आत्मनिर्भरता की दिशा में डीपीएसयू की यात्रा’; ‘दिशा (डीआईएसएचए)’- रक्षा प्रौद्योगिकियों और आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं के संबंध में विद्यार्थियों को व्यावहारिक जानकारी देने के लिए डीपीएसयू की एक पहल है; ‘एचएएल का आधुनिकीकरण रोडमैप’ तथा ‘एचएएल का स्वदेशीकरण रोडमैप’ शामिल हैं।

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू का कार्य-निष्पादन सराहनीय रहा है। उनका कुल कारोबार 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू ने कुल 23,136 करोड़ रुपये का कर पश्चात संचयी लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। विशेष रूप से, 2025-26 में डीपीएसयू के निर्यात में  पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 151.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

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एनपीसीआई इंटरनेशनल और उज्बेकिस्तान के एनआईपीसी ने ‘यूजेडक्यूआर’ के माध्यम से पूरे उज्बेकिस्तान में यूपीआई भुगतान सक्षम करने के लिए साझेदारी की

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) ने 30 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली एचयूएमओ के संचालक ‘नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर जेएससी’ (एनआईपीसी) के साथ एक वाणिज्यिक समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी भारतीय यात्रियों को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय अंतर-संचालनीय क्यूआर कोड ‘यूजेडक्यूआर’ को अपने परिचित यूपीआई-सक्षम ऐप का उपयोग करके स्कैन करने और देशभर में व्यापारियों को त्‍वरित भुगतान करने की सुविधा देती है।

यह घोषणा भारत के प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा के दौरान की गई। यह समझौता भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और उज्बेकिस्तान के केंद्रीय बैंक (सीबीयू) सहित संबंधित वित्तीय नियामकों से औपचारिक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद किया गया है। इन नियामकों ने एचयूएमओ को सीमा-पार मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने के लिए एनआईपीएल PL के अधिकृत साझेदार के रूप में नामित किया है।

समझौते की प्रमुख बातें

  1. व्‍यापारियों द्वारा सार्वभौमिक भुगतान स्वीकृति:

सीबीयू द्वारा अनिवार्य एकीकृ‍त राष्‍ट्रीय क्‍यूआर अवसंरचना (यूजेडक्‍यूआर) के साथ एकीकरण से यूपीआई उपयोगकर्ताओं को उज्बेकिस्तान में खुदरा, आतिथ्‍य और सेवा क्षेत्र के व्‍यापारियों के यहां लगभग सर्वभौगिक भुगतान स्‍वीकृति की सुविधा मिलेगी।

  1. सुगम यात्रा अनुभव :

भारतीय पर्यटक, कारोबारी यात्री और विद्यार्थी अपने भारतीय बैंक खातों से सीधे व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) भुगतान कर सकेंगे। इससे विदेशी मुद्रा पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की समस्या कम होगी तथा अंतरराष्ट्रीय कार्ड या नकदी पर निर्भरता भी घटेगी।

  1. द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती:

यह पहल डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआईI) के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को आगे बढ़ाती है और दोनों देशों के व्यापक रणनीतिक एवं आर्थिक उद्देश्यों के अनुरूप है।

यूपीआई दस देशों में स्वीकार किया जाता है :

यूपीआई को वर्तमान में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में स्‍वीकार किया जाता है।

इससे भारतीय यात्रियों को विदेशों में यूपीआई के माध्यम से निर्बाध भुगतान करने की सुविधा मिलती है।

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ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तित करने की सदी पुरानी सीमा को पार कर लिया गया है, जिससे अति संवेदनशील तापमान संवेदन संभव हो गया है।

वैज्ञानिकों को एक ऐसा क्रिस्टलीय अर्धचालक मिला है जो तापमान के अंतर को विद्युत वोल्टेज में परिवर्तित करता है जो भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों में वर्णित वोल्टेज से लगभग एक हजार गुना अधिक है।

उत्पन्न होने वाला थर्मोइलेक्ट्रिक वोल्टेज इतना अधिक होता है कि यह उन मानों के बराबर होता है जो आमतौर पर केवल तरल इलेक्ट्रोलाइट्स और आयनिक जैल में देखे जाते हैं, ठोस पदार्थों में नहीं, विशेष रूप से एकल-क्रिस्टलीय पदार्थों में।

इस खोज ने ठोस पदार्थों में इस प्रभाव की सीमा के बारे में दशकों पुरानी धारणा को बदल दिया है और अति संवेदनशील तापमान सेंसर, हीट डिटेक्टर और क्वांटम सेंसिंग उपकरणों की एक नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त किया है।

जब दो अलग अलग  पदार्थों के बीच के जोड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है जबकि दूसरे सिरे को ठंडा रखा जाता है, तो गतिशील आवेश वाहक गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर प्रवाहित होते हैं जिससे जोड़ के आर-पार वोल्टेज उत्पन्न होता है। इस घटना को सीबेक प्रभाव के नाम से जाना जाता है जिसकी खोज दो शताब्दी पहले हुई थी और यह तापमान सेंसर से लेकर अपशिष्ट ऊष्मा को बिजली में परिवर्तित करने वाले थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर तक की तकनीकों का आधार है।

दशकों से, सीबेक गुणांक के रूप में मापी जाने वाली इस वोल्टेज की मात्रा, क्रिस्टलीय ठोस में इस प्रभाव की ऊपरी सीमा को केवल कुछ मिलीवोल्ट प्रति केल्विन तक ही सीमित रखती है। अधिकांश धातुएँ प्रति केल्विन केवल कुछ दहाई माइक्रोवोल्ट (µV/K) का वोल्टेज उत्पन्न करती हैं जबकि अच्छे अर्धचालक भी शायद ही कभी कुछ सौ माइक्रोवोल्ट प्रति केल्विन से अधिक उत्पन्न करते हैं। केवल तरल प्रणालियाँ, जैसे कि आयनिक जैल और इलेक्ट्रोलाइट्स, जिनमें इलेक्ट्रॉनों के बजाय आवेशित आयन ऊष्मा का संचरण करते हैं, मिलीवोल्ट प्रति केल्विन की सीमा को पार करती हुई पाई गई हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की एक स्वायत्त संस्थान, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के शोधकर्ताओं के एक समूह ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय और बैंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के साथ मिलकर अब यह दिखाया है कि ठोस, एपिटैक्सियल क्रिस्टल में इस सीमा को तोड़ा जा सकता है।

प्रोफेसर बिवास साहा के नेतृत्व वाली टीम ने रेणुका करंजे और धीमही राव के साथ-साथ जेएनसीएएसआर से दीक्षा दाधिच और सौरव रुद्र, सिडनी विश्वविद्यालय से आशालाथा इंदिरादेवी कमलासनन पिल्लई और डॉ. मैग्नस गारब्रेक्ट और आईआईएससी से प्रोफेसर सुब्रतो मुखर्जी के सहयोग से अल्ट्राहाई-वैक्यूम मैग्नेट्रॉन स्पटरिंग का उपयोग करके मैग्नीशियम ऑक्साइड सब्सट्रेट पर स्कैंडियम नाइट्राइड (एससीएन), एक दुर्दम्य संक्रमण-धातु नाइट्राइड की पतली फिल्में विकसित कीं।

उन्होंने इनमें मैग्नीशियम मिलाया ताकि ऑक्सीजन डोपेंट से उत्पन्न होने वाले स्वाभाविक रूप से मौजूद मुक्त इलेक्ट्रॉनों की भरपाई हो सके। इससे एक ऐसा अर्धचालक बना जिसे अत्यधिक डोप किया हुआ और अत्यधिक संतुलित (एचडीएचसी) अर्धचालक कहा जाता है, एक ऐसा पदार्थ जिसमें धनात्मक और ऋणात्मक आवेश वाले डोपेंट परमाणु क्रिस्टल में लगभग समान संख्या में बेतरतीब ढंग से बिखरे होते हैं।

एक्स-रे विवर्तन और परमाणु-रिज़ॉल्यूशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी ने पुष्टि की कि फिल्में एकल-क्रिस्टलीय और एपिटैक्सियल बनी रहीं, जिसमें डोपेंट परमाणु समान रूप से वितरित थे और कोई द्वितीयक चरण या अवक्षेप नहीं थे।

इन एचडीएचसी एससीएन फिल्मों में, टीम ने सीबेक गुणांक का मान अकार्बनिक अर्धचालकों में आमतौर पर देखे जाने वाले मान से कई सौ से लेकर एक हजार गुना अधिक मापा, और यह पहले से ज्ञात अधिकतम सीमा से लगभग सौ गुना अधिक था (लगभग 200 नैनोमीटर मोटी फिल्म में कमरे के तापमान के पास -124.6 मिलीवोल्ट प्रति केल्विन से अधिक)। यह इसे तरल इलेक्ट्रोलाइट्स और हाइड्रोजेल और आयनिक जिलेटिन जैसे आयनिक चालकों से भी पहले से जुड़े दायरे से काफी ऊपर रखता है।

शोधकर्ताओं ने इस परिणाम को पूरी तरह से क्रिस्टलीय अर्धचालक के अंदर इलेक्ट्रोलाइट जैसी ऊष्माशक्ति के ठोस-अवस्था अनुरूप के रूप में वर्णित किया है।

एचडीएचसी एससीएन फिल्मों को पतला करने पर यह प्रभाव और भी मजबूत हो गया।

इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर बिवास साहा ने कहा कि जब हमने यह काम शुरू किया था तब हमारा लक्ष्य कोई रिकॉर्ड तोड़ना नहीं था बल्कि हम यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि अव्यवस्था और आवेश क्षतिपूर्ति स्कैंडियम नाइट्राइड में इलेक्ट्रॉनिक परिवहन को कैसे नया आकार देते हैं।इसके बजाय हमने पाया कि एक पूरी तरह से क्रिस्टलीय, एपिटैक्सियल, एकल-चरण अर्धचालक तरल इलेक्ट्रोलाइट की तरह ऊष्माविद्युत रूप से व्यवहार कर सकता है। यह वास्तव में आश्चर्यजनक था और इससे हमें पता चलता है कि ठोस पदार्थों में अत्यधिक ऊष्माविद्युत और संवेदन क्षमता प्राप्त करने के लिए इंजीनियर की गई अव्यवस्था एक काफी हद तक अनछुआ मार्ग है।

चित्र 1 : अत्यधिक डोपिंग और उच्च क्षतिपूर्ति वाले ScN के इलेक्ट्रॉनिक बैंड आरेख का योजनाबद्ध चित्रण, जो बोल्ट्जमैन सीमा से अधिक ऊष्माशक्ति प्रदर्शित करता है।

टीम ने दो क्रोमियम संपर्कों वाली एचडीएचसीएससीएन  फिल्म का उपयोग करके एक प्रारंभिक प्रोटोटाइप फोटॉन सेंसर बनाया है। एक संपर्क को लेजर से प्रकाशित करने पर उपकरण में एक सूक्ष्म, स्थानीयकृत तापमान अंतर उत्पन्न हुआ और परिणामस्वरूप वोल्टेज -102.4 मिलीवोल्ट प्रति केल्विन के सीबेक प्रतिक्रिया में परिवर्तित हो गया जो  प्रकाश पहचान के लिए पर्याप्त है और टीम का सुझाव है कि आगे अनुकूलन के साथ कमरे के तापमान के आसपास एकल-फोटॉन स्तर की पहचान के लिए भी उपयुक्त है। वोल्टेज प्रतिक्रिया तीव्र थी कई प्रकाश चक्रों में दोहराने योग्य थी और सामग्री को अपरिवर्तित छोड़ दिया। इस कार्य के आधार पर तापमान और फोटॉन पहचान के लिए थर्मोइलेक्ट्रिक पतली-फिल्म सामग्री और सेंसर पर टीम द्वारा एक भारतीय पेटेंट आवेदन दायर किया गया है।

चित्र 2 : (बाएं से दाएं) जेएनसीएएसआर टीम, प्रोफेसर बिवास साहा, सौरव रुद्र, दीक्षा दाधीच, रेणुका करंजे और धीमाही राव

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव और भारत सरकार और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा।

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के जल के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा की गई Team Bharat की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके। श्री शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र,  किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज के समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया!

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी  जल बंटवारे के समाधान के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

गृह मंत्री श्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।
07 जुलाई, 2026 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है
29 जून, 2026 को श्री अमित शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

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प्रधानमंत्री ने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर की सराहना की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज होने को असाधारण उपलब्धि बताया है। श्री मोदी ने कहा कि तेल की कीमतों में बढोत्तरी, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, यह उपलब्धि देश के लोगों की सामूहिक शक्ति और प्रतिकूल स्थिति से उभरने की क्षमता दर्शाती है।

श्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्‍स पर कहा:

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत की अनुकरणीय जीडीपी वृद्धि दर असाधारण उपलब्धि है।

यह वृद्धि हमारे लोगों की सामूहिक शक्ति से सुनिश्चित हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में बढोत्तरी और आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारत ने ऐसी वृद्धि हासिल की।

निराशावादी फिर गलत साबित हुए और भारत फल-फूल रहा है!

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एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आज बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन-एससीओ से इतर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई।

बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष के हाल के घटनाक्रमों पर भी बातचीत की और बदलती स्थिति पर अपने विचार साझा किए। श्री मोदी ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और भारत का रुख फिर दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीतिक उपायों से ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने नौवहन और वाणिज्यक स्वतंत्रता की रक्षा का आह्वान करते हुए इस बात पर बल दिया कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों सहित नागरिक और असैन्य ढांचे को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ सहित बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ भारत के घनिष्ठ सहयोग की तत्परता दोहराते हुए कहा कि वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पेज़ेशकियान का भारत में स्वागत करने को उत्सुक हैं।

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राष्ट्रपति, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के 18 परिसरों के संयुक्त दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

राष्‍ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्‍थान (निफ्ट) के 18 परिसरों के संयुक्‍त दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वस्त्र और परिधान क्षेत्र केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अंग नहीं है, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आजीविका का भी आधार रहा है। यदि पारंपरिक कारीगरों को सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो आने वाली पीढ़ियों को भी गर्व और विश्वास के साथ इस व्यवसाय से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की, कि विभिन्न निफ्ट केंद्रों ने ‘क्राफ्ट क्लस्टर पहल’ जैसे कार्यक्रमों को लागू किया है, जिनके माध्यम से उनके संबंधित क्षेत्रों के बुनकरों और कारीगरों को वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है तथा बाजारों से जोड़ा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारा देश पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ विश्व पटल पर अपनी भूमिका को विस्तार दे रहा है। फैशन टेक्नोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें विश्व स्तर पर भारत की भूमिका बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रयास में सभी विद्यार्थी स्मरण रखें कि उनकी सोच वैश्विक हो, लेकिन उनकी जड़ें अपनी मिट्टी और देश के सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ी हों। इस तरह वे न केवल सफल पेशेवर बनेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी अपना योगदान दे सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय उत्पाद बनाने चाहिए लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे पर्यावरण के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि अपने उत्पादों के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल का प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बचे हुए अंश को बेकार समझकर फेंकना नहीं चाहिए; बल्‍कि उसे नया रूप, नई उपयोगिता और नया मूल्य दिया जा सकता है। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि निफ्ट के नीति-निर्माताओं ने संधारणीयता और सामाजिक दायित्व को संस्थान की कार्ययोजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उन्‍होंने यह विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि निफ्ट वस्त्र और परिधान के क्षेत्र में संघारणीय भविष्‍य के अपने प्रयासों के अन्तर्गत सर्कुलर इकोनॉमी की विधाओं को व्यापक और लाभदायक बनाने के लिए प्रभावी कदम उठायेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस बात का उल्‍लेख किया कि निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिभाशाली युवा विद्यार्थियों से देश को बहुत अपेक्षाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया जिसमें प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र की प्रगति में योगदान करने का उचित अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता इस बात में निहित है कि उनके प्रयासों से किसी शिल्पकार को अपने शिल्प की मूल पहचान को बनाये रखते हुए अपनी उत्पादकता और आय बढ़ाने में कितनी सहायता मिलती है।

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एआरटीओ कार्यालय में छापा, 11 संदिग्ध दलाल पकड़े

डीएम के निर्देश पर प्रशासन-पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, नकदी और अभिलेखों के मिलान में भी मिलीं विसंगतियां*

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। एआरटीओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सोमवार को प्रशासन ने शिकंजा कस दिया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह एवं एडीसीपी दक्षिण सुमित सुधाकर राम टेके के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एआरटीओ कार्यालय परिसर में औचक छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर और उसके आसपास सक्रिय मिले 11 संदिग्ध दलालों को पकड़ा गया। सभी से पूछताछ के साथ उनकी भूमिका और एआरटीओ कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों से संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है।

संयुक्त टीम अचानक एआरटीओ कार्यालय पहुंची और परिसर में मौजूद लोगों का सत्यापन शुरू करा दिया। टीम ने वाहन पंजीकरण, वाहन पोर्टल, ड्राइविंग लाइसेंस एवं सारथी पोर्टल से संबंधित सेवाओं और कार्यप्रणाली की जांच की। परिसर में संदिग्ध रूप से मौजूद व्यक्तियों से उनके वहां आने का कारण और उनके द्वारा कराए जा रहे कार्यों के संबंध में पूछताछ की गई। इसी दौरान 11 संदिग्ध दलाल चिन्हित किए गए। अब यह पता लगाया जा रहा है कि वे आवेदकों के संपर्क में कैसे आते थे और कार्यालय में किस तरह उनके काम कराते थे। पुलिस

संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

कार्रवाई सिर्फ संदिग्ध दलालों की धरपकड़ तक सीमित नहीं रही। टीम ने वाहन पंजीकरण, स्वामित्व अंतरण, कर एवं शुल्क, वाहन फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग टेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले। कार्यालय में उपलब्ध नकदी का रजिस्टर, शुल्क प्राप्तियों और संबंधित अभिलेखों से मिलान कराया गया। प्रारंभिक जांच में नकदी और लेखा-अभिलेखों के मिलान में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। संबंधित रिकॉर्ड का दोबारा मिलान कर विसंगतियों के कारण और जिम्मेदारी का पता लगाया जा रहा है।

जांच का फोकस अब इस बात पर भी है कि संदिग्ध बिचौलियों की कार्यालय के भीतर पहुंच किस स्तर तक थी और क्या उन्हें किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी का संरक्षण या सहयोग मिल रहा था। यह भी जांचा जा रहा है कि कहीं आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया से सीधे सेवा देने के बजाय बिचौलियों के माध्यम से काम कराने की व्यवस्था तो नहीं पनप रही थी। जांच में किसी कार्मिक की मिलीभगत सामने आने पर उसकी भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाएगी।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया, समयसीमा और तय शुल्क पर सीधे उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। एआरटीओ कार्यालय में पकड़े गए संदिग्धों की भूमिका और सामने आई विसंगतियों की गहन जांच कराई जा रही है। किसी अधिकारी-कर्मचारी की बिचौलियों से मिलीभगत अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आई तो जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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न्यायालय के आदेश पर 36,580 किलोग्राम असुरक्षित भुना चना कराया गया नष्ट

औरामिन डाई की मौजूदगी के कारण घोषित हुआ था असुरक्षित, 33.48 लाख रुपये थी अनुमानित कीमत

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 36,580 किलोग्राम सीज भुना चना का विनष्टीकरण कराया। 33.48 लाख रुपये अनुमानित मूल्य के इस भुना चना को औरामिन डाई की उपस्थिति के कारण असुरक्षित घोषित किया गया था। नगर निगम के भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में तीन सदस्यीय समिति की निगरानी में इसे पर्यावरण अनुकूल तरीके से नष्ट कराया गया।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा 17 दिसंबर 2025 को की गई कार्रवाई के दौरान उक्त भुना चना सीज किया गया था। जांच में इसमें औरामिन डाई की उपस्थिति पाई गई, जिसके आधार पर इसे असुरक्षित घोषित किया गया। रेफरल प्रयोगशाला की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई थी।

सहायक आयुक्त (खाद्य)-द्वितीय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-1, कानपुर नगर में सरकार बनाम महेश कुमार गुप्ता से संबंधित दो वादों में सीज सामग्री के विनष्टीकरण के संबंध में न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को आदेश दिया था।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। इसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह एवं डॉ. देवेंद्र सिंह आजाद को सदस्य बनाया गया। समिति ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरण अनुकूल विनष्टीकरण के संबंध में दिशा-निर्देश मांगे।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस कार्य के लिए दो पंजीकृत एजेंसियों की जानकारी दी। संबंधित फर्म द्वारा इन एजेंसियों से संपर्क करने पर विनष्टीकरण के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम शुल्क बताया गया। फर्म ने शुल्क अधिक होने के कारण इसे वहन करने में असमर्थता जताते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का अनुरोध किया। इसके बाद नगर निगम से संपर्क कर भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में पर्यावरण अनुकूल विनष्टीकरण की व्यवस्था की गई।

समिति ने मौके पर पहुंचकर सीज सामग्री पर लगी सील की जांच एवं सत्यापन किया। सील सही पाए जाने के बाद उसे नियमानुसार हटाकर सामग्री विनष्टीकरण के लिए अवमुक्त की गई। निरीक्षण के दौरान कुछ सामग्री चूहों से क्षतिग्रस्त भी पाई गई। इसके बाद उपलब्ध 36,580 किलोग्राम भुना चना 23 अगस्त को नगर निगम के भौंती स्थित डंपिंग यार्ड में नगर निगम से अनुबंधित फर्म मेसर्स एनवायरमेंटल टेक्नो, आगरा के माध्यम से नियमानुसार नष्ट कराया गया।

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एबीडीएम से सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण को मिलेगी गति

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर*

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर नगर, दिनांक 24 अगस्त, 2026 आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), उत्तर प्रदेश सरकार के तत्वावधान में आज प्रातः 9:30 बजे कानपुर एवं झांसी मंडल का मंडल स्तरीय सम्मेलन होटल इटर्निटी, बैकुंठपुर, बिठूर (ताज होटल), कानपुर में आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम में सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण को गति प्रदान करना तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाना रहा।

सम्मेलन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, उत्तर प्रदेश अर्चना वर्मा (आईएएस) तथा सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं मिशन निदेशक, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, उत्तर प्रदेश रितु माहेश्वरी (आईएएस) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, उत्तर प्रदेश डॉ. मोहित सिंह ने एबीडीएम की प्रगति, उपलब्धियों तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने एबीडीएम के अंतर्गत आभा (ABHA) आईडी, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) एवं हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) सहित विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य पहलों की जानकारी दी।

वक्ताओं ने कहा कि आभा आईडी के माध्यम से नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखा जा सकता है। इससे मरीजों को बार-बार पुराने चिकित्सा दस्तावेज साथ ले जाने की आवश्यकता कम होगी तथा चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को मरीज के स्वास्थ्य संबंधी विवरण उपलब्ध कराने में सुविधा होगी। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से मरीजों एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी सहायता मिलेगी।

सम्मेलन में सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़ने, अधिक से अधिक आभा आधारित ओपीडी पंजीकरण कराने, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को बढ़ावा देने तथा जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर एबीडीएम की नियमित समीक्षा किए जाने पर विशेष जोर दिया गया। एबीडीएम के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी एवं पेपरलेस बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा की गई।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, कानपुर नगर अभिनव जे. जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कानपुर नगर डॉ. हरिदत्त नेमी, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, झांसी मंडल डॉ. आर.के. सोनी तथा अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानपुर मंडल डॉ. रेनू जोशी पंत सहित संबंधित अधिकारी, चिकित्सक, नर्सिंग होम के संस्थापक, प्रबंधक एवं निदेशक तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को केवल तकनीकी पहल तक सीमित न रखते हुए इसे जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।

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