Breaking News

Health

बिना डिग्री के चल रहे है हॉस्पिटल

भारतीय स्वरूप संवाददाता नेवादा कौशाम्बी, नेवादा ब्लॉक के अंतरगत एक ऐसा हॉस्पिटल जहां इन दिनों बिना किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर के इंटर पास एक महिला जिसको कभी उस हॉस्पिटल की देख रेख के लिए रखा गया था। कुछ दिन बाद उस महिला और डॉक्टर के बीच दोस्ती बढ़ी और उस डॉक्टर की अहमियत घटती गई और चाय पिलाने वाली सहायक डॉक्टर बन बैठी।

कहानी यही नहीं खत्म होती डॉक्टर साहब अपने अपयश को देखते हुए उस हॉस्पिटल को छोड़ कर पीपल गांव चले गए और वह महिला डॉक्टर उस हॉस्पिटल के नाम पर गरीब और अनपढ़ मरीजों से मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया। फर्जी
एक्स रे के आधार पर आपरेशन से लेकर प्रसव तक की बीड़ा उठा लिया।
बात हो रही है यस हॉस्पिटल तिल्हापुर मोड़ नेवादा रोड डॉक्टर सीमा कुशवाहा की

Read More »

भारत को विश्व का आध्यात्मिक गुरु बनाने के लिए नशे के विरुद्ध एकजुट होना ही होगा…ज्योति बाबा

दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यक्रम में ज्योति बाबा मोस्ट इंस्पायरिंग आइकॉन ऑफ़ द ईयर अवार्ड 25 से फिल्म एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर द्वारा सम्मानित

नशे में मातृशक्ति – स्वस्थ परिवार की संकल्पना कैसे पूरी होगी…. ज्योति बाबा

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर/दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख सोसाइटी योग ज्योति इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक एवं इंडिया बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड,एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा को नशा मुक्ति के क्षेत्र में पिछले 35 वर्षों से निरंतर कार्य करने के लिए मोस्ट इंस्पायरिंग आइकॉन ऑफ़ द ईयर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है आपको यह सम्मान दिल्ली के रेडिसन ब्लू होटल प्लाजा महिपालपुर दिल्ली में दिया गया। इस अवसर पर ज्योति बाबा ने पूरे देश के सम्मानित लोगों के साथ फिल्म एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर एवं फिल्म एक्टर डिनो मौरिया के सम्मुख यह जोर देकर कहा कि यदि भारत को 2047 में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा होना है तो हमें भारत के बचपन को राष्ट्रीयता से ओतप्रोत करते हुए नशा,प्रदूषण,कुपोषण,हिंसा ,प्लास्टिक और बाल बंधुवा मजदूरी से बचाना ही होगा और इन सब के पीछे कहीं ना कहीं मुख्य कारण नशा है इसलिए नशे के विरुद्ध एकजुट हो,यही सनातन की सच्ची सेवा है तभी परिवार बचेगा,समाज बचेगा,राष्ट्र बचेगा।नेशनल लेवल पर चयनित होने की जैसे ही खबर देश के नशा मुक्ति सेनानियों को हुई थी उनमें खुशी की लहर जाग उठी थी,क्योंकि अब देश की जनता नशे के विरुद्ध लामबंद हो रही है क्योंकि दिल्ली में शराब पॉलिसी के विरुद्ध बहुत बड़ी संख्या में लोगों ने वोट किया है बिहार के बाद मध्य प्रदेश में भी 18 जिलों में पूर्ण शराब पर प्रतिबंध लगने जा रहा है। इस अवसर पर बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर, एक्टर डिनों मौरिया विशेष रूप से अवार्ड सेरेमनी के चीफ गेस्ट थे,उन्होंने युवाओं से देश हित में काम करने का आवाहन किया। साथ ही इस मौके पर देश के प्रमुख इंडस्ट्रीज,एंटरप्रेन्योर्स, लीडरशिप,स्टार्टअप एवं सोशल एक्टिविस्ट विशेष रूप से भाग लेकर कार्यक्रम को उच्च गरिमा प्रदान की। इन सभी क्षेत्रों में पूरे देश से 100 लोगों का चयन किया गया है। समाज सेवा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख एशिया बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा का मेरिट के आधार पर चयन कर सम्मानित किया गया। जैसे ही हाल में ज्योति बाबा का नाम पुरस्कार के लिए पुकारा गया पूरे शिवाजी हॉल के सभी लोगों ने खड़े होकर के तालियों के साथ स्टैंडिंग ओवेशन दी,ऐसा लगा मानो पूरा हॉल एक सुर में ज्योति बाबा के कामों को सराह रहा हो। योग ऋषि डॉक्टर ओमप्रकाश आनंद ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा शिष्य श्री श्री ज्योति बाबा आज नशा मुक्ति के क्षेत्र में विशिष्ट कार्यों हेतु राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। नशा मुक्ति युवा भारत के लिए ज्योति बाबा का जोश जुनून और जज्बा नौजवानों के लिए प्रेरणा की बात है। पीयूष रंजन सनातनी ने जोर देकर कहा कि श्री श्री ज्योति बाबा को इससे पूर्व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड,एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड,प्रदेश रत्न,भारत सेवा श्री सम्मान समेत सैकड़ो पुरस्कार नशा मुक्ति युवा भारत अभियान के लिए प्राप्त हो चुके हैं राष्ट्रीय कार्यक्रम पंचतारा होटल रेडिसन ब्लू प्लाजा दिल्ली में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के बीच ज्योति बाबा को दिया गया, यह पुरस्कार मोस्ट इंस्पायरिंग आईकॉनिक इयर अवॉर्ड मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान ज्योति बाबा का नहीं,यह सम्मान देश के सभी नशा मुक्ति सेनानियों को समर्पित है।आपको राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हेतु संस्था योग ज्योति इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह,प्रमुख संयोजक डॉक्टर प्रवीण,आनंद जी महाराज, हरेंद्र मूर्ति जी, डा.ओम प्रकाश आनंद जी,पीयूष रंजन मिश्रा,शैलेंद्र श्रीवास्तव एडवोकेट,नवीन गुप्ता, गिरधर गर्ग,श्रवण कुमार,प्रदीप बिश्नोई,राकेश गुप्ता,विकास गौड़ एडवोकेट,रोहित कुमार,स्वामी अमिताभ,किशोर भाई,पंकज सिंह एवं गीता पाल जी ने हर्ष व्यक्त किया है। एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स के नेशनल चीफ चंद्रशेखर आजाद एवं सनातन महासभा के डॉ प्रवीण एवं पूरे देश की टीम ने अपने नेशनल ब्रांड एंबेसडर ज्योति बाबा को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी है।

Read More »

कैंसर की विभिन्न अवस्थाओं का संकेत देने वाला सामान्य बायोमार्कर कैंसर के शीघ्र निदान के लिए नॉन इनवेसिव तरीके की संभावना प्रदान करता है

शोधकर्ताओं ने अग्नाशय और ग्लायोमा कैंसर जैसे कैंसरों में कुछ सामान्य मेटाबोलाइट्स की पहचान की है जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की ग्लायल कोशिकाओं में विकसित होते हैं, जो सार्वभौमिक कैंसर बायोमार्कर के रूप में उनकी संभावना का सुझाव देते हैं। यह कैंसर के शुरुआती निदान के साथ-साथ कैंसर के लिए चिकित्सीय रणनीतियों के लिए एक नॉन इनवेसिव तरीके की संभावना प्रदान करता है।

अग्नाशय और ग्लायोमा जैसे आक्रामक कैंसर का अक्सर देर से निदान किया जाता है और रोग का आसानी से पूर्वानुमान नहीं लग पाता है। इसलिए कैंसर निदान और उपचार में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने के लिए नॉन इनवेसिव, विश्वसनीय कैंसर बायोमार्कर की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से अग्नाशय और ग्लायोमा जैसे आक्रामक कैंसर के लिए, जिनमें शुरुआती पहचान के तरीकों की कमी है। ट्यूमर-व्युत्पन्न मेटाबोलाइट्स के वाहक के रूप में नैनो मैसेंजर (एक्सोसोम), ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट (टीएमई) का पता लगाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली के वैज्ञानिकों की एक टीम, जिसमें सुश्री नंदिनी बजाज और डॉ. दीपिका शर्मा शामिल हैं, ने अग्नाशय के कैंसर, फेफड़े के कैंसर और ग्लायोमा कैंसर सेल लाइन से प्राप्त एक्सोसोम में मेटाबोलाइट्स की पहचान की है, जो संभावित सार्वभौमिक बायोमार्कर प्रदान करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप नैदानिक ​​प्रयोज्यता में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट (टीएमई) के भीतर चयापचय संबंधी अंतःक्रियाओं की अंतर्दृष्टि लक्षित उपचारों के लिए एक आधार प्रदान करती है।

शोधकर्ताओं ने नैनोपार्टिकल ट्रैकिंग एनालिसिस (एनटीए), इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (ईएम), वेस्टर्न ब्लॉट (डब्ल्यूबी), फूरियर ट्रांसफॉर्मेड इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एफटीआईआर), अनटार्गेटेड लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-टेंडेम मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एलसी-एमएस/एमएस) और न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) को मिलाकर एक बहु-तकनीक का उपयोग किया, जिससे पारंपरिक एकल-विधि अध्ययनों को पार करते हुए एक्सोसोम का व्यापक लक्षण प्रदान किया गया। यह अध्ययन कैंसर निदान, व्यक्तिगत चिकित्सा और कैंसर प्रगति तंत्र की हमारी समझ को आगे बढ़ाता है।

पहचाने गए ये मेटाबोलाइट्स ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट (टीएमई) में अनियमित मार्गों को उजागर करते हैं, साथ ही यह भी जानकारी देते हैं कि कैंसर किस प्रकार बढ़ता है और गैर-आक्रामक और सटीक कैंसर का पता लगाने और चिकित्सीय लक्ष्य निर्धारण को सक्षम बनाते हैं।

नैनोस्केल पत्रिका में प्रकाशित शोध से लक्षित उपचारों की ओर अग्रसर हो सकता है जो ट्यूमर में अनियमित चयापचय मार्गों को बाधित करते हैं, उपचार की प्रभावकारिता को बढ़ाते हैं और संभावित रूप से दुष्प्रभावों को कम करते हैं। यह प्रगति रोगी के परिणामों में उल्लेखनीय रूप से सुधार कर सकती है, विशेष रूप से व्यक्तिगत, सटीक चिकित्सा दृष्टिकोणों के माध्यम से।

Read More »

पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार

भारतीय स्वरूप संवाददाता डॉ योगेंद्र और डॉ दीक्षा को पीडब्ल्यूए ने किया सम्मानित पीडब्ल्यूए के लोकसेवा सम्मान से नवाजे गए वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह और युवा डॉ दीक्षा कटियार  >  निःशुल्क कंसल्टेंसी और औषधियों के वितरण में जनहितकारी योगदान के लिए सराहा, बोले डॉक्टर समाज में जीवन रक्षक डॉक्टर समाज में लोगों के लिए जीवन रक्षक के रूप में देखे जाते हैं। समाज में अपने कर्तव्यों और निस्वार्थ सेवा के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले दो चिकित्सकों को  वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश(पीडब्ल्यूए) के लोकहित में चले एक माह निशुल्क सेवा ड्राइव में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सम्मानित किया  है। पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश द्वारा वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ योगेंद्र सिंह यादव और डॉ दीक्षा कटियार को लोकसेवा के लिए सम्मान पत्र  प्रदान किया। पीडब्ल्यूए की ओर से वरिष्ठ  सामाजिक कार्यकर्ता संजय कटियार ने डॉक्टर्स को सम्मान पत्र भेंट किया और लोकहित में उनकी सेवा और सहयोग की सराहना की गई। पीडब्ल्यूए के महासचिव पंकज कुमार सिंह ने बताया कि समाज में असहाय और निर्धनों के लिए मदद में डॉक्टर्स ने अहम भूमिका निभाई है,साथ ही इनके द्वारा निशुल्क औषधीय वितरण में सहयोग भी दिया गया है। डॉक्टर्स ने अपने चिकित्सकीय पेशे के एक हिस्से में पीडब्ल्यूए के साथ जुड़कर लोकहित में गरीब असहायों की मदद में अपना योगदान दे रहे हैं।  उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में गायत्रीपुरम गली नम्बर 3 कल्याणपुर में एक स्थाई निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा क्लिनिक भी संचालित किया जा रहा है जहाँ असहाय और निर्धनों के स्वास्थ्य सेवा के लिए मदद दी जाती है। वार्ता में विपिन पटेल, अजय सिंह, प्रदीप सिंह, सुमित शर्मा आदि रहे।

Read More »

भारत का 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान

7 दिसंबर, 2024 को भारत तपेदिक (टीबी) को खत्म करने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाएगा। तपेदिक एक ऐसा रोग है, जो देश भर में लाखों लोगों को प्रभावित करना जारी रखे हुए है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा हरियाणा के पंचकूला में इस महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान का आधिकारिक रूप से शुभारंभ करेंगे। इस अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से असुरक्षित आबादी के लिए टीबी के मामलों का पता लगाने, निदान में होने वाली देरी को कम करने और उपचार के परिणामों को बेहतर बनाते हुए टीबी के खिलाफ़ लड़ाई को तेज़ करना है। यह अभियान 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 347 जिलों में टीबी को समाप्‍त करने और टीबी मुक्त राष्ट्र बनाने की भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है।

राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी): टीबी मुक्त भारत का विजन

यह 100 दिवसीय अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के व्यापक ढांचे का अंग है, जो टीबी उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी) 2017-2025 से संबद्ध है। एनएसपी टीबी के मामलों में कमी लाने, निदान और उपचार की क्षमताओं को बेहतर बनाने और इस रोग के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को दूर करने पर केंद्रित है। यह महत्वाकांक्षी पहल 2018 के टीबी उन्मूलन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा निर्धारित विजन को प्रतिबिम्बित करती है, जिसमें उन्होंने 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया था।

एनटीईपी के तहत भारत में टीबी के मामलों में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यहां टीबी के मामलों की दर में वर्ष 2015 में प्रति 100,000 की आबादी पर 237 मामलों की तुलना में वर्ष 2023 में प्रति 100,000 की आबादी पर 195 मामलों के साथ 17.7 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसी तरह, टीबी से संबंधित मौतों में वर्ष 2015 में प्रति लाख की आबादी पर 28 मौतों से 2023 में प्रति लाख की आबादी पर 22 मौतों के साथ 21.4 प्रतिशत तक की कमी आई है। पिछले पांच वर्षों में, टीबी के मामलों की सूचना देने में लगातार वृद्धि हुई है, जैसा कि निम्नलिखित आंकड़ों में देखा जा सकता है:

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003DG8L.png

कोविड-19 के बाद भारत ने एनटीईपी के जरिए टीबी उन्‍मूलन के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं, जो एनएसपी के साथ लगातार संबद्धता बनाए हुए है। 2023 की प्रमुख उपलब्धियों में लगभग 1.89 करोड़ स्‍प्‍यूटम स्मीयर परीक्षण और 68.3 लाख न्यूक्लिक एसिड एम्‍प्‍लीफीकेशन परीक्षण शामिल हैं, जो स्वास्थ्य सेवा स्तरों में नैदानिक पहुंच का विस्तार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

विकसित हो रहे चिकित्सकीय अनुसंधान के अनुरूप, एनटीईपी ने व्यापक देखभाल पैकेज और विकेन्द्रीकृत टीबी सेवाएं शुरू की हैं, जिनमें अब दवा प्रतिरोधी टीबी (डीआर-टीबी) के रोगियों के लिए अल्‍पकालीन मौखिक उपचार तक व्यापक पहुंच शामिल है। यह कार्यक्रम अलग तरह की देखभाल के नजरिए और जल्‍द निदान को प्रोत्‍साहन देने के माध्‍यम से कुपोषण, मधुमेह, एचआईवी और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी स्वास्थ्य की सहवर्ती स्थितियों से निपटने पर विशेष ध्‍यान देते हुए उपचार में होने वाली देरी को कम करने और देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाने पर बल देता है। टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) तक पहुंच में महत्‍वपूर्ण विस्तार के साथ निवारक उपाय भी एनटीईपी की रणनीति का केंद्र बने हुए हैं। इनकी बदौलत अल्‍पकालिक उपचार वालों सहित टीपीटी प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 15 लाख हो गई है।

टीबी और स्वास्थ्य की अन्य स्थितियों के बीच परस्पर क्रिया को पहचानते हुए एनटीईपी ने कुपोषण, मधुमेह, एचआईवी और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी समस्‍याओं से निपटने की दिशा में कदम उठाए हैं। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर किए जा रहे इन प्रयासों का उद्देश्य टीबी रोगियों को अधिक समग्र सहायता प्रदान करना है, अंततः उनके उपचार के परिणामों को बेहतर बनाना है।

उच्च जोखिम वाली आबादी के लिए निदान और उपचार को बढ़ाना

100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान का मुख्य उद्देश्य विशेषकर सबसे असुरक्षित समूहों के लिए निदान और उपचार सेवाओं को मजबूत बनाना है। इनमें दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोग, हाशिए पर रहने वाले समुदाय तथा मधुमेह, एचआईवी और कुपोषण जैसी सह-रुग्णता से पीडि़त व्यक्ति शामिल हैं। यह अभियान उन्नत निदान तक पहुंच में सुधार और उपचार शुरू होने में देरी को कम करने के लिए डिज़ाइन की गई विशेष रणनीतियों के साथ अत्‍यधिक बोझ वाले क्षेत्रों को लक्षित करेगा।

यह अभियान टीबी सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सहायक रहे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के व्यापक नेटवर्क सहित मौजूदा स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे का लाभ उठाएगा। इसके अलावा, स्क्रीनिंग के प्रयास उच्च जोखिम वाले समूहों पर केंद्रित होंगे और स्वास्थ्य संबंधी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष देखभाल पैकेज शुरू किए जाएंगे।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image004784L.png

यह पहल टीबी के रोगियों को बेहतर पोषण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली नि-क्षय पोषण योजना के माध्यम से पोषण सहायता का भी विस्तार करेगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने टीबी रोगियों के निकट संपर्क में रहने वालों को व्यापक देखभाल और सहायता दिलाना सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सहायता पहल प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएमटीबीएमबीए) को एकीकृत किया है।

रणनीतिक हस्‍तक्षेप

राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) तपेदिक (टीबी) से निपटने और समूचे भारत में टीबी के परिणामों में असमानताओं को दूर करने की व्यापक रणनीति के केंद्र में है। इस रणनीति के तहत, कई प्रमुख हस्तक्षेप किए जा रहे हैं, जिनमें मामलों का पता लगाने में सुधार, निदान में देरी में कमी और विशेष रूप से असुरक्षित समुदायों के लिए बेहतर उपचार परिणाम शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य एनटीईपी को मजबूत बनाना और पूरे देश में टीबी उन्‍मूलन के लिए अधिक न्यायसंगत और प्रभावी दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है, जैसे:

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image005RG1J.png

इन प्रयासों से टीबी के मामलों, नैदानिक कवरेज और मृत्यु दर जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में सुधार होने की संभावना है, जिससे भारत टीबी उन्‍मूलन के अपने लक्ष्य के करीब पहुंच जाएगा।

वित्तीय सहायता और सामुदायिक सहभागिता: टीबी के खिलाफ लड़ाई को सशक्त बनाना

टीबी उन्मूलन की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता चिकित्सकीय हस्तक्षेपों से कहीं बढ़कर है। नि-क्षय पोषण योजना के माध्यम से सरकार ने 1 करोड़ लाभार्थियों को सहायता देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए लगभग 2,781 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसके अतिरिक्त, नई पहलों के तहत आशा कार्यकर्ताओं, टीबी चैंपियनों (विजेताओं) और नि-क्षय साथी मॉडल के तहत पारिवारिक देखभाल करने वालों सहित उपचार में सहायता देने वालों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह सहायता नेटवर्क रोगियों को चिकित्सकीय और भावनात्मक दोनों तरह से निरंतर देखभाल मिलना सुनिश्चित करता है।

2022 में पीएमटीबीएमबीए की शुरुआत व्यापक सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए टीबी के खिलाफ लड़ाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई । टीबी के रोगियों की मदद करने के लिए 1.5 लाख से ज़्यादा नि-क्षय मित्र (सामुदायिक समर्थक) पहले ही इस प्रयास में शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों ने भी जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया है, जो टीबी को समाप्‍त करने की दिशा में जमीनी स्तर पर हो रहे सामूहिक प्रयास को दर्शाता है।

टीबी उन्मूलन दिशा में भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता

टीबी को जड़ से खत्म करने के प्रति भारत का दृष्टिकोण केवल राष्ट्रीय प्रयास भर नहीं है; यह वैश्विक लक्ष्यों के साथ भी संबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, भारत टीबी को एसडीजी की 2030 की समय सीमा से पांच साल पहले ही 2025 तक खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

टीबी उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अंतर्राष्ट्रीय घोषणाओं जैसे कि, गांधीनगर घोषणापत्र के प्रति इसके समर्थन में भी स्पष्ट होती है, जिस पर डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्रियों द्वारा अगस्त 2023 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस क्षेत्रीय संकल्‍प का उद्देश्य क्षेत्र में 2030 तक टीबी के खिलाफ लड़ाई को बनाए रखना, तेज करना और नई राह निकालना है।

आगे की राह: 2025 तक टीबी का उन्मूलन

टीबी मुक्त राष्ट्र की दिशा में भारत की यात्रा में यह 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए निदान, उपचार और सहायता सेवाओं को बढ़ाकर, भारत 2025 तक टीबी को समाप्त करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण के लिए मंच तैयार कर रहा है। निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक सहभागिता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ, टीबी मुक्त भारत – तपेदिक से मुक्त भारत – का सपना साकार हो सकता है।

इस उद्देश्य के प्रति संकल्‍पबद्धता स्वास्थ्य संबंधी न्‍यायसंगतता, सामाजिक न्याय और सतत विकास के व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करती है। जिस तरह भारत टीबी के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक कदम उठा रहा है, यह इस बात को साबित करते हुए दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर रहा है कि सहयोग, नवाचार और दृढ़ संकल्प के बल पर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटा जा सकता है।

Read More »

शी-बॉक्स पोर्टल, एक ऑनलाइन प्रणाली है जिसे ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013’ (एसएच अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बेहतर कार्यान्वयन में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में शी-बॉक्स पोर्टल लॉन्च किया है, जो एक ऑनलाइन सिस्टम है जिसे ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ (SH अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बेहतर कार्यान्वयन में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अधिनियम संबंधित सरकार को इसके कार्यान्वयन की निगरानी करने और दर्ज किए गए और निपटाए गए मामलों की संख्या पर डेटा बनाए रखने का अधिकार देता है।

शी-बॉक्स पोर्टल मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर में विभिन्न कार्यस्थलों पर गठित आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) से संबंधित सूचनाओं का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध केंद्रीकृत संग्रह उपलब्ध कराना है, चाहे वे सरकारी हों या निजी क्षेत्र के और साथ ही एक संपूर्ण एकीकृत शिकायत निगरानी प्रणाली भी। इसमें प्रत्येक कार्यस्थल के लिए एक नोडल अधिकारी को नामित करने का प्रावधान है, जिसे शिकायतों की वास्तविक समय निगरानी के लिए नियमित आधार पर डेटा/जानकारी का अद्यतन सुनिश्चित करना होता है।

पोर्टल पर शिकायत एक पीड़ित महिला या शिकायतकर्ता की ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज की जा सकती है। यदि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति स्वयं पीड़ित महिला है, तो उसे अपने मूल विवरण जैसे कि उसकी कार्य स्थिति, नाम, फोन नंबर और ईमेल दर्ज करके पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। यदि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति कोई अन्य व्यक्ति है, तो उसे अपना नाम, शिकायतकर्ता के साथ संबंध और शिकायतकर्ता की ओर से अंडरटेकिंग के साथ-साथ पीड़ित महिला/शिकायतकर्ता की कार्य स्थिति, नाम, फोन नंबर और ईमेल दर्ज करके पोर्टल पर लॉग इन करना होगा। अपने रोजगार की स्थिति के आधार पर शिकायत दर्ज करने वाले व्यक्ति को उस कार्यस्थल के आईसी/एलसी का चयन करना होगा जहां वे शिकायत दर्ज करना चाहते हैं। यदि पीड़ित महिला का आईसी या एलसी पोर्टल पर पंजीकृत है, तो शिकायत स्वचालित रूप से जमा हो जाएगी और संबंधित आईसी/एलसी को भेज दी जाएगी। यदि किसी कार्यस्थल का आईसी पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है, तो पोर्टल पर शिकायतकर्ता से उस कार्यस्थल का विवरण प्राप्त करने तथा उस आईसी का शीघ्र पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र और जिले के राज्य नोडल अधिकारी और जिला नोडल अधिकारी को सूचित करने के लिए एक ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है।

शी-बॉक्स पोर्टल में केंद्र/राज्य/संघ राज्य स्तर और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों के लिए निगरानी डैशबोर्ड है, जिससे उन मामलों की संख्या जो निर्धारित समयसीमा से परे हैं, निपटाए गए और लंबित मामलों की संख्या देखी जा सकती है। शिकायतकर्ता के लिए भी अपनी शिकायत की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसी तरह की सुविधा बनाई गई है। इसके अलावा, पोर्टल में किसी विशेष मंत्रालय/विभाग/राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/निजी क्षेत्र/जिले के आईसी/एलसी के संबंध में रिपोर्ट तैयार करने की सुविधा है, ताकि पर्यवेक्षी अधिकारियों द्वारा बेहतर निगरानी और निर्धारित समय-सीमा का पालन किया जा सके।

शी-बॉक्स पोर्टल पर दर्ज की गई कोई भी शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल के आईसी या जिले के एलसी के पास पहुंचती है, जैसा भी मामला हो। पोर्टल को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह गोपनीयता बनाए रखने के लिए शिकायतकर्ता के विवरण को छुपाता है। आईसी/एलसी के अध्यक्ष के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति दर्ज की गई शिकायत का विवरण या प्रकृति नहीं देख सकता है।

शी-बॉक्स पोर्टल का निर्माण ‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013’ के प्रावधानों के अनुसार किया गया है। अधिनियम के तहत जांच के लिए 90 दिन का समय निर्धारित है।

यह जानकारी आज महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

Read More »

फ्लोरोजेनिक जांच के उपयोग से एचआईवी जीनोम की स्पष्ट पहचान की नई तकनीक विकसित की गई

शोधकर्ताओं ने फ्लोरोमेट्रिक जांच द्वारा एचआईवी-जीनोम व्युत्पन्न जी-क्वाड्रप्लेक्स के चार जुड़े हुए न्यूक्लियोटाइड्स स्ट्रिंग वाले असामान्य और विशिष्ट डीएनए संरचना की खोज के लिए नई तकनीक विकसित की है। इससे  एचआई वायरस का सटीकता से पता लगाया जा सकता  है।

ह्यूम्न इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस टाइप 1 (एचआईवी-1) एक रेट्रोवायरस है जो प्रतिरोध हीनता जनित सिंड्रोम एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) के लिए जिम्मेदार है।  मानव स्वास्थ्य के लिए यह दुनिया भर में खतरा बना हुआ है। आम तौर पर एचआईवी की जांच  में शुरुआती संक्रमण का पता नही चल पाता और क्रॉस-रिएक्टिविटी के कारण यह मिथ्या सकारात्मकता का जोखिम बढ़ा सकता है। इस वायरस की आरंभिक पहचान की अन्य जांच में अल्प संवेदनशीलता और दीर्घकालीन प्रक्रिया चलती है। मौजूदा न्यूक्लिक एसिड-आधारित जांच सामान्य तौर पर डीएनए सेंसिंग जांच के उपयोग से गलत पॉजिटिव रिपोर्ट देती हैं जिससे गैर-विशिष्ट और लक्षित एम्पलीकॉन के बीच अंतर जानना मुश्किल हो जाता है। इस संदर्भ में, विशिष्ट न्यूक्लिक एसिड अनुक्रमों की पहचान और लक्ष्यीकरण से झूठी पॉजिटिविटी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इसलिए, अब आणविक जांच विकसित होने से रोगजनक जीनोम में असामान्य अद्वितीय न्यूक्लिक एसिड जीक्यू संरचनाओं की भली-भांति पहचान हो सकती है और सटीक नैदानिक जांच के विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने नई जांच ​​तकनीक विकसित की है जिसे जीक्यू टोपोलॉजी-टारगेटेड रिलायबल कंफॉर्मेशनल पॉलीमॉर्फिज्म (जीक्यू-सीआरपी) प्लेटफॉर्म कहा जाता है। आरंभ में  इसे सार्स – कोव 2 जैसे रोगजनकों के फ्लोरोमेट्रिक पता लगाने के लिए विकसित किया गया था। अब  इस उपयोगी प्लेटफ़ॉर्म को एचआईवी  की जांच के लिए सफलतापूर्वक अनुकूलित किया गया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिको सुमन प्रतिहार, वसुधर भट एस.वी., कृति के. भागवत, थिमैया गोविंदराजू ने 176-न्यूक्लियोटाइड युक्त जीनोमिक सेगमेंट के रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन और एम्पलीफिकेशन विधि द्वारा एचआईवी-व्युत्पन्न जीक्यू डीएनए का जीक्यू टोपोलॉजी पता लगाने की प्रस्तुति दी।

संबंधित अध्ययन एनालिटिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया है जिसमें जीक्यू संरचना में डीएसडीएनए के पीएच-मध्यस्थ, सुगम, एकल-चरण मात्रात्मक संक्रमण को दिखाया गया है। इसमें बेंज़ोबिस्थियाज़ोल-आधारित फ्लोरोसेंट जांच (टीजीएस64) का उपयोग कर वायरस का पता लगाया जाता है। यह एचआईवी की विश्वसनीय जांच की पद्धति प्रदान करता है।

यह शोध अध्ययन हाल के वर्षों में विकसित अधिकांश अन्य जांच के विपरीत विशिष्ट और असामान्य न्यूक्लिक एसिड-लघु अणु पारस्पारिकता के आधार पर विशिष्ट नैदानिक पद्धति है।

इस आणविक पहचान प्लेटफ़ॉर्म को मौजूदा न्यूक्लिक एसिड आधारित डायग्नोस्टिक प्लेटफ़ॉर्म में शामिल किया जा सकता है, जिससे अनुक्रम विशिष्ट पहचान से उत्पन्न विश्वसनीयता और बढ़ेगी।

यह मौजूदा प्रवर्धन-आधारित तकनीकों की समस्या भी कम कर सकता है, गैर-विशिष्ट प्रवर्धन से उत्पन्न होने वाले भ्रामक-पॉजिटिव परिणामों और लक्षित जीक्यू (गैर-विहित न्यूक्लिक एसिड अनुरूपता) का स्पष्ट रूप से पता लगाने में सहायक हो सकता है।

जीक्यू-आरसीपी आधारित प्लेटफ़ॉर्म को बैक्टीरिया और वायरस सहित विभिन्न डीएनए/आरएनए आधारित रोगों का पता लगाने के लिए व्यावहारिक रूप से अपनाया जा सकता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001SL34.png

Read More »

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धन्वंतरि जयंती और 9वें आयुर्वेद दिवस पर 12,850 करोड़ रुपये से अधिक लागत की अनेक स्वास्थ्य परियोजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज धन्वंतरि जयंती और 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में 12,850 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई स्वास्थ्य परियोजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये पहल पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को पर्याप्त बढ़ावा देती हैं, जो देश भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री के मिशन के अनुरूप है। उल्लेखनीय रूप से, इनमें से सात परियोजनाएं श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) से संबंधित हैं, जिनसे श्रमिकों और उनके परिवारों के एक बड़े हिस्से को लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के इंदौर में ईएसआईसी अस्पताल का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया और देश भर में छह अतिरिक्त ईएसआई अस्पतालों की आधारशिला रखी। ये परियोजनाएं कुल 1,641 करोड़ रुपये की हैं और इनसे लगभग 55 लाख ईएसआई लाभार्थियों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति पर प्रकाश डाला और इसकी तुलना पिछले छह-सात दशकों की सीमित उपलब्धियों से की। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में हमने रिकॉर्ड संख्या में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित होते देखे हैं।” आज के अवसर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में अस्पतालों का उद्घाटन किया गया।

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के नरसापुर और बोम्मासंद्रा, मध्य प्रदेश के पीथमपुर, आंध्र प्रदेश के अचितपुरम और हरियाणा के फरीदाबाद में नए मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मेरठ में नए ईएसआईसी अस्पताल पर काम शुरू हो गया है और इंदौर में एक नए अस्पताल का उद्घाटन किया गया है।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिसने स्वास्थ्य सेवा को भारत की विकास रणनीति की आधारशिला के रूप में एकीकृत किया है।

डॉ. मांडविया ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वास्थ्य को विकास से जोड़ा है और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ स्वास्थ्य मॉडल तैयार किया है जो सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्य सेवा सुलभ, सस्ती और हर नागरिक के लिए उपलब्ध हो।”

पिछले दशक के दौरान ईएसआईसी की सेवाओं में पर्याप्त वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. मंडाविया ने कहा, “ईएसआईसी नेटवर्क 2014 में 393 जिलों से बढ़कर अब देश भर में 674 जिलों तक पहुंच गया है। जहां 2014 से पहले 2 करोड़ से कम परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा से लाभान्वित होते थे, वहीं आज यह संख्या लगभग दोगुनी होकर लगभग 4 करोड़ परिवार हो गई है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “इसी तरह, पिछले 10 वर्षों में ईएसआईसी लाभार्थियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, जो 2014 में 8 करोड़ से बढ़कर अब 2024 में लगभग 15 करोड़ हो गई है। यह श्रमिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा में सुधार के सरकार के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।”

डॉ. मंडाविया ने बताया कि आने वाले दिनों में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के साथ मिला दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह एकीकरण ईएसआईसी लाभार्थियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल पहुंच का विस्तार करेगा, जिससे वे देश भर में एबी-पीएमजेएवाई पैनल वाले अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे।

आज जिन छह नए ईएसआई अस्पतालों की आधारशिला रखी गई, उनमें आधुनिक सुविधाएं और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी:

  1. बोम्मासंद्राकर्नाटक – 200 बिस्तरों वाला ईएसआई अस्पताल
  2. नरसापुरकर्नाटक – 100 बिस्तरों वाला ईएसआई अस्पताल
  3. पीथमपुरमध्य प्रदेश – 100 बिस्तरों वाला ईएसआई अस्पताल
  4. मेरठउत्तर प्रदेश – 100 बिस्तरों वाला ईएसआई अस्पताल
  5. अचुतापुरमआंध्र प्रदेश – 30 बिस्तरों वाला ईएसआईएस अस्पताल
  6. फरीदाबादहरियाणा – 500 अतिरिक्त बिस्तरों के साथ उन्नत ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, इसकी क्षमता 650 से बढ़कर 1150 बिस्तरों तक हो जाएगी

इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश के इंदौर में 300 बिस्तरों वाले जिस ईएसआईसी अस्पताल का प्रधानमंत्री ने उद्घाटन किया है, उसे भविष्य में 500 बिस्तरों तक विस्तारित किया जा सकेगा।  इसका फायदा लगभग 14 लाख बीमित लोगों और लाभार्थियों को मिलेगा।

इन ईएसआईसी स्वास्थ्य सुविधाओं में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर कॉम्प्लेक्स, गहन चिकित्सा इकाइयां, लेबर रूम कॉम्प्लेक्स, एनआईसीयू, पीआईसीयू और उन्नत इमेजिंग सेवाओं जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। प्रत्येक सुविधा केंद्र अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से लैस होगा, जिसमें लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट, सीएसएसडी/टीएसएसयू इकाइयां और नर्स कॉल सिस्टम शामिल हैं, जो आउटपेशेंट (ओपीडी) और इनपेशेंट (आईपीडी) दोनों तरह की सेवाएं प्रदान करेंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे पी नड्डा, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

Read More »

वायरल प्रोटीन खंडों से हाइड्रोजैल बनाने की अनोखी विधियों से दवा उपलब्धता में सुधार होगा

एसएआरएस-सीओवी-1 वायरस से केवल पांच अमीनो एसिड के छोटे प्रोटीन खंडों का उपयोग करके हाइड्रोजैल बनाने का एक नया तरीका खोजा गया है, जो लक्षित दवा उपलब्धता में सुधार और दवा के दुष्प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है।

दीर्घकालिक और संक्रामक रोगों में बढ़ोतरी के कारण, शोधकर्ता लगातार उपचार की प्रभावशीलता में सुधार के लिए दवा की उपलब्धता के नए तरीकों की तलाश कर रहे हैं। हाइड्रोजैल को उनके सूजन व्यवहार, यांत्रिक शक्ति और जैव-संगतता के गुणों के कारण दवा उपलब्धता के लिए उपयुक्त माना जाता है।

छोटे पेप्टाइड-आधारित हाइड्रोजैल में कई तरह के अनुप्रयोगों के लिए अपार संभावनाएं हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने इन प्रणालियों के जेलेशन को नियंत्रित करना बहुत चुनौतीपूर्ण पाया है, क्योंकि पेप्टाइड अनुक्रम में किया गया मामूली बदलाव भी स्व-संयोजन तंत्र और जेलेशन प्रवृत्ति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

वायरस के संयोजन और विमोचन में एसएआरएस सीओवी ई प्रोटीन की संलिप्तता के बाद, कोलकाता में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान बोस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि इसमें अंतर्निहित स्व-संयोजन गुण हाइड्रोजैल के विकास में योगदान दे सकते हैं।

बोस इंस्टीट्यूट में रासायनिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनिरबन भुनिया और उनकी टीम ने इस संभावना का पता लगाया और उपयोगी जेल सामग्री बनाने के एक नये तरीके की खोज की।

हाल ही में प्रतिष्ठित जर्नल स्मॉल (विली) में प्रकाशित एक पेपर में, प्रो. भुनिया और भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास रियो ग्रांडे वैली, यूएसए और इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस, कोलकाता के उनके सहयोगियों ने दर्शाया कि एसएआरएस सीओवी-1 वायरस के केवल पांच अमीनो एसिड को पुनर्व्यवस्थित करके, अद्वितीय गुणों वाले पेंटापेप्टाइड्स से बने जैल बनाए जा सकते हैं। इनमें से कुछ गर्म होने पर जैल बनते हैं और कुछ अन्य कमरे के तापमान पर जैल में परिवर्तित हो जाते हैं।

इस अनूठी खोज से अनुकूलन योग्य हाइड्रोजैल जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रगति हो सकती है। इससे लक्षित दवा उपलब्धता में सुधार हो सकता है, जिससे दवा के दुष्प्रभावों को कम करके उपचार प्रभावकारिता को बढ़ाया जा सकता है।

यह हाइड्रोजैल सामग्री ऊतक इंजीनियरिंग में क्रांति ला सकती हैं, संभावित रूप से अंग पुनर्जनन में सहायता कर सकती हैं। ये जैल घाव भरने के उपचार को भी आगे बढ़ा सकते हैं और अनुसंधान के लिए अधिक सटीक रोग मॉडलिंग को सक्षम बना सकते हैं।

 

Read More »

प्रधानमंत्री धन्वंतरि जयंती और 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य क्षेत्र से सम्बंधित 12,850 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई परियोजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे

धन्वंतरि जयंती और 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली में लगभग 12,850 करोड़ रुपये की लागत वाली स्वास्थ्य क्षेत्र से सम्बंधित विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ, उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य कवरेज का विस्तार शुरू करेंगे। इससे सभी वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आय को महत्व दिये बिना स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री देशभर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री कई स्वास्थ्य संस्थानों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

प्रधानमंत्री भारत के पहले अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के दूसरे चरण का उद्घाटन करेंगे। इस चरण में, एक पंचकर्म अस्पताल, औषधि निर्माण के लिए एक आयुर्वेदिक फार्मेसी, एक खेल चिकित्सा इकाई, एक केंद्रीय पुस्तकालय, एक आईटी और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सेंटर और 500 सीटों वाला ऑडिटोरियम शामिल है। श्री मोदी मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और सिवनी में तीन मेडिकल कॉलेजों का भी उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, पश्चिम बंगाल के कल्याणी, बिहार के पटना, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, मध्य प्रदेश के भोपाल, असम के गुवाहाटी और नई दिल्ली विभिन्न एम्स में सुविधा और सेवा विस्तार का उद्घाटन करेंगे, जिसमें एक जन औषधि केंद्र भी शामिल होगा। प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और ओडिशा के बरगढ़ में एक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भी उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश के शिवपुरी, रतलाम, खंडवा, राजगढ़ और मंदसौर में पांच नर्सिंग कॉलेजों, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, तमिलनाडु और राजस्थान में 21 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों और नई दिल्ली स्थित एम्स तथा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में अनेक सुविधाओं और सेवा विस्तारों की आधारशिला भी रखेंगे।

प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन करेंगे और हरियाणा के फरीदाबाद, कर्नाटक के बोम्मासंद्रा और नरसापुर, मध्य प्रदेश के इंदौर, उत्तर प्रदेश के मेरठ और आंध्र प्रदेश के अचुतापुरम में ईएसआईसी अस्पतालों की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं से करीब 55 लाख ईएसआई लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री विभिन्न क्षेत्रों में सेवा सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को विस्तार देने के प्रबल पक्षधर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने वाली ड्रोन प्रौद्योगिकी के अभिनव उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री 11 तृतीयक स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में ड्रोन सेवाओं का शुभारंभ करेंगे। उत्तराखंड में एम्स ऋषिकेश, तेलंगाना में एम्स बीबीनगर, असम में एम्स गुवाहाटी, मध्य प्रदेश में एम्स भोपाल, राजस्थान में एम्स जोधपुर, बिहार में एम्स पटना, हिमाचल प्रदेश में एम्स बिलासपुर, उत्तर प्रदेश में एम्स रायबरेली, छत्तीसगढ़ में एम्स रायपुर, आंध्र प्रदेश में एम्स मंगलगिरी और मणिपुर में रिम्स इंफाल इसमें शामिल हैं। श्री मोदी एम्स ऋषिकेश से हेलीकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का भी शुभारंभ करेंगे, इससे तेजी से चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में मदद करेगी।

प्रधानमंत्री यू-विन पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। यह टीकाकरण प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाकर गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को लाभान्वित करेगा। यह गर्भवती महिलाओं और जन्म से 16 वर्ष तक के बच्चों को 12 वैक्सीन-निवारणीय बीमारियों के खिलाफ जीवन रक्षक टीकों का समय पर दिया जाना सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री संबद्ध और स्वास्थ्य पेशेवरों और संस्थानों के लिए एक पोर्टल भी लॉन्च करेंगे। यह मौजूदा स्वास्थ्य पेशेवरों और संस्थानों के केंद्रीकृत डेटाबेस के रूप में कार्य करेगा।

प्रधानमंत्री देश में स्वास्थ्य सेवा इको-सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई पहलों की भी शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री ओडिशा में भुवनेश्वर के गोथापटना में एक केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री ओडिशा के खोरधा और छत्तीसगढ़ के रायपुर में योग और प्राकृतिक चिकित्सा के दो केंद्रीय अनुसंधान संस्थानों की आधारशिला रखेंगे। श्री मोदी चिकित्सा उपकरणों के लिए गुजरात के एनआईपीईआर अहमदाबाद, थोक दवाओं के लिए तेलंगाना के एनआईपीईआर हैदराबाद, फाइटोफार्मास्युटिकल्स के लिए असम के एनआईपीईआर गुवाहाटी और एंटी-बैक्टीरियल एंटी-वायरल दवा खोज और विकास के लिए पंजाब के एनआईपीईआर मोहाली में चार उत्कृष्टता केंद्रों की आधारशिला भी रखेंगे।

प्रधानमंत्री चार आयुष उत्कृष्टता केंद्रों का शुभारंभ करेंगे, जिनके नाम हैं भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में मधुमेह और उपापचयी विकारों के लिए उत्कृष्टता केंद्र; आईआईटी दिल्ली में रस औषधियों के क्षेत्र में स्टार्ट-अप समर्थन तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के समाधान और उन्नत तकनीकी समाधान के लिए टिकाऊ आयुष उत्कृष्टता केंद्र, केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयुर्वेद में मौलिक और अनुवाद सम्बंधी अनुसंधान के लिए उत्कृष्टता केंद्र; और जेएनयू, नई दिल्ली में आयुर्वेद और प्रणाली चिकित्सा पर उत्कृष्टता केंद्र।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए गुजरात के वापी, तेलंगाना के हैदराबाद, कर्नाटक के बेंगलुरु, आंध्र प्रदेश के काकीनाडा और हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में चिकित्सा उपकरणों और बल्क दवाओं के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत पांच परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। ये इकाइयां महत्वपूर्ण बड़ी मात्रा में दवाओं के साथ-साथ बॉडी इम्प्लांट और क्रिटिकल केयर उपकरण जैसे उच्च-स्तरीय चिकित्सा उपकरणों का निर्माण करेंगी।

प्रधानमंत्री देशभर के लिए, “देश का प्रकृति परीक्षण अभियान” भी शुरू करेंगे, जिसका उद्देश्य नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। श्री मोदी जलवायु परिवर्तन के अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए अनुकूलन रणनीति तैयार करने के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राज्य-विशिष्ट कार्य योजना भी शुरू करेंगे।

*****

Read More »