कानपुर 10 जुलाई भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में पहले आओ पहले पाओ की नीति द्वारा प्रवेश प्रक्रिया चल रही है ।बी. ए., बी . एस. सी.(ZBC) , बीबीए, बीसीए, बीकाम, एम. ए. -हिन्दी , समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र,अर्थशास्त्र, कला, मनोविज्ञान,कक्षाओं में प्रवेश हेतु आवश्यक समस्त सुविधाएं एक ही स्थान पर महाविद्यालय सभागार में उपलब्ध हैं, प्रेक्षागृह में प्रवेश समिति के अतिरिक्त बैंक प्रतिनिधि ऑनलाइन फ़ीस जमा करने हेतु उपलब्ध हैं साथ ही महा विद्यालय प्रतिनिधि फी स्लिप तथा एडमिशन नंबर के प्रिंटआउट देने हेतु अलग से कंप्यूटर प्रिंटर सेटअप के साथ उपलब्ध हैं । प्रवेश समिति छात्राओं की समस्याओं के निस्तारण हेतु सुबह 10 बजे से सांय 3 बजे तक निरंतर उपलब्ध है। प्रवेश प्रक्रिया को सुलभ बनाने हेतु एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है जिसपर प्रति छात्रा १५ रूपये का खर्च महाविद्यालय वहन कर रहा है।
महाविद्यालय में छात्राओं को सुरक्षित तथा उत्तम शैक्षिक वातावरण प्रदान किया जाता है जहां उन्हें सीखने के नित नए अनुभव मिलते हैं। उन्नत प्रयोगशाला, प्लेसमेंट सेल,काउंसलिंग सेल आदि छात्राओंको रोज़गार के अवसर प्रदान करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु वर्तमान समय में आवश्यक रणनीति पर शिक्षिकाओं द्वारा छात्राओं को निर्देशन प्रदान किया जाता है।
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प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के वारंगल में लगभग 6,100 करोड़ रुपये की विभिन्न ढांचागत विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी
उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यद्यपि तेलंगाना अपेक्षाकृत नया राज्य है और इसने अपने अस्तित्व के केवल 9 वर्ष ही पूरे किए हैं, लेकिन तेलंगाना और यहां के निवासियों का भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा, “तेलुगू लोगों की क्षमताओं ने हमेशा भारत की क्षमताओं का विस्तार किया है। प्रधानमंत्री ने भारत को विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में तेलंगाना के नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अवसरों की वृद्धि में विश्वास व्यक्त किया, क्योंकि विश्व भारत को निवेश के केन्द्र के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा “विकसित भारत के लिए बहुत-सी उम्मीदें हैं।”
प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के तीसरे दशक में स्वर्णिम काल के आगमन को स्वीकार करते हुए कहा कि आज का नया युवा-भारत, ऊर्जा से परिपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास के क्षेत्र में भारत का कोई भी हिस्सा पिछड़ना नहीं चाहिए। उन्होंने पिछले 9 वर्षों में तेलंगाना के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार को रेखांकित किया। उन्होंने आज शुरू की गई विभिन्न परियोजनाओं के लिए तेलंगाना के लोगों को बधाई दी। इन परियोजनाओं पर 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।
प्रधानमंत्री ने नए लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नए तरीके खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि भारत में तेज गति से विकास पुराने बुनियादी ढांचे के साथ संभव नहीं है। यह देखते हुए कि खराब कनेक्टिविटी और महंगी लॉजिस्टिक लागत व्यवसायों की प्रगति में बाधा डालती है, प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा विकास की गति और पैमाने में कई गुना वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, इकोनॉमिक कॉरिडोर और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जो एक नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो लेन को चार और चार लेन के राजमार्गों को छह लेन के राजमार्गों में परिवर्तित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि तेलंगाना के राजमार्ग नेटवर्क में 2500 किलोमीटर से 5000 किलोमीटर तक दो गुना वृद्धि देखी जा सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कार्य विकास के विभिन्न चरणों में है। उन्होंने हैदराबाद-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर, चेन्नई-सूरत इकोनॉमिक कॉरिडोर, हैदराबाद-पणजी इकोनॉमिक कॉरिडोर और हैदराबाद-विशाखापत्तनम इंटर कॉरिडोर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से तेलंगाना आसपास के आर्थिक केंद्रों को जोड़ रहा है और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है।
आज जिस नागपुर-विजयवाड़ा कॉरिडोर के मंचेरियल-वारंगल खंड की आधारशिला रखी गई है, उसके बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के साथ तेलंगाना को आधुनिक सुविधा से पूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जबकि मंचेरियल और वारंगल के बीच की दूरी को भी कम करेगा और यातायात की समस्याओं को समाप्त करेगा। यह क्षेत्र कई आदिवासी समुदायों का निवास है और लंबे समय से उपेक्षित रहा है। श्री मोदी ने कहा कि यह कॉरिडोर राज्य में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को नया दृष्टिकोण प्रदान करेगा और करीमनगर-वारंगल खंड को चार लेन का बनाने से हैदराबाद-वारंगल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क और वारंगल सेज के लिए कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि तेलंगाना में कनेक्टिविटी के बढ़ने से राज्य के उद्योग और पर्यटन को सीधे लाभ हो रहा है क्योंकि तेलंगाना में विरासत केंद्रों और आस्था स्थलों की यात्रा अब अधिक सुविधाजनक हो रही है। उन्होंने कृषि उद्योग और करीमनगर के ग्रेनाइट उद्योग का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार के प्रयासों से उन्हें सीधे सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा, ”चाहे किसान हो या मजदूर, छात्र हों या व्यावसायिक, सभी लाभान्वित हो रहे हैं। युवाओं को उनके घर के पास ही नए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।
मेक इन इंडिया अभियान और विनिर्माण क्षेत्र युवाओं के लिए किस प्रकार रोजगार का स्रोत बन रहा है, इस विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने देश में विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए पीएलआई योजना का उल्लेख किया। श्री मोदी ने बताया कि इस योजना के तहत तेलंगाना में 50 से अधिक बड़ी परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं और जो लोग अधिक विनिर्माण कर रहे हैं उन्हें सरकार से विशेष सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष रक्षा निर्यात में भारत के एक नया रिकॉर्ड बनाने का उल्लेख भी किया। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात 9 साल पहले लगभग 1000 करोड़ रुपये का था, वह अब 16,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। उन्होंने हैदराबाद स्थित भारतीय डायनामिक्स लिमिटेड का उल्लेख किया और कहा कि यह भी लाभान्वित हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय रेल द्वारा विनिर्माण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान और नए मील के पत्थर स्थापित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ वंदे भारत रेलगाड़ियों के बारे में चर्चा की और कहा कि भारतीय रेलवे ने हाल के वर्षों में हजारों आधुनिक कोच और लोकोमोटिव का निर्माण किया है। आज काजीपेट में रेलवे विनिर्माण इकाई की आधारशिला के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय रेलवे का कायाकल्प है और काजीपेट मेक इन इंडिया की नई ऊर्जा का हिस्सा बनेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रत्येक परिवार किसी न किसी रूप में लाभान्वित होगा। अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह सबका साथ, सबका विकास है’। उन्होंने विकास के इस मंत्र पर तेलंगाना को आगे ले जाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर तेलंगाना की राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन, केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी और सांसद श्री संजय बंदी भी उपस्थित थे।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री ने 5,550 करोड़ रुपये से अधिक की 176 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में नागपुर-विजयवाड़ा कॉरिडोर का 108 किलोमीटर लंबा मंचेरियल-वारंगल खंड शामिल है। यह खंड मंचेरियल और वारंगल के बीच की दूरी को लगभग 34 किलोमीटर कम कर देगा। इस प्रकार यात्रा का समय कम होगा और एनएच-44 और एनएच-65 पर यातायात व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-563 के 68 किलोमीटर लंबे करीमनगर-वारंगल खंड को वर्तमान दो-लेन से चार-लेन में अपग्रेड करने की आधारशिला भी रखी। इससे हैदराबाद-वारंगल औद्योगिक कॉरिडोर, काकतीय मेगा टेक्सटाइल पार्क और वारंगल में एसईजेड के लिए कनेक्टिविटी में सुधार करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने काजीपेट में रेलवे विनिर्माण इकाई की आधारशिला रखी। 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाली आधुनिक विनिर्माण इकाई में रोलिंग स्टॉक विनिर्माण क्षमता में वृद्धि होगी। यह नवीनतम प्रौद्योगिकी मानकों और सुविधाओं जैसे माल डिब्बों की रोबोटिक पेंटिंग, अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक सामग्री भंडारण और प्रबंधन के साथ एक संयंत्र में उपलब्ध होगी। इससे स्थानीय क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा और आस-पास के क्षेत्रों में अधीनस्थ इकाइयों के विकास में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने वाराणसी, उत्तर प्रदेश में 12,100 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रावण के पवित्र महीने की शुरुआत, भगवान विश्वनाथ और मां गंगा के आशीर्वाद और वाराणसी के लोगों की उपस्थिति से जीवन धन्य हो जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों शिव भक्त ‘जल’ चढ़ाने के लिए वाराणसी आ रहे हैं और कहा कि शहर में रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्रियों का आना निश्चित है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों के आतिथ्य सत्कार पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जो भी वाराणसी आ रहा है, हमेशा सुखद अहसास के साथ वापस लौटेगा।” उन्होंने जी20 के प्रतिनिधियों का स्वागत करने और पूजा स्थलों के परिसरों को स्वच्छ और भव्य बनाए रखने के लिए काशी के लोगों की प्रशंसा की।
उन्होंने लगभग 12,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिनका आज शिलान्यास किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह काशी की प्राचीन आत्मा को बरकरार रखते हुए उसे नया शरीर प्रदान करने के हमारे संकल्प का विस्तार है।” उन्होंने परियोजनाओं के लिए लोगों को बधाई दी।
प्रधानमंत्री विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के साथ पूर्व में संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले संवाद के दौरान योजनाएं जमीनी स्तर तक नहीं जुड़ चुकी थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने लाभार्थियों के साथ संवाद और बातचीत की एक नई परंपरा शुरू की है, जिसका अर्थ है ‘सीधे लाभ के साथ-साथ प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया।’ उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप विभागों और अधिकारियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “आजादी के इतने वर्षों के बाद लोकतंत्र का असली लाभ सही मायने में सही लोगों तक पहुंचा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि लाभार्थी वर्ग सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के सबसे सच्चे रूप का उदाहरण बन गया है क्योंकि सरकार हर योजना में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का प्रयास करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दृष्टिकोण के साथ कमीशन चाहने वालों, दलालों और घोटालेबाजों को खत्म करने में मदद मिली है जिससे भ्रष्टाचार और भेदभाव खत्म हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में सरकार ने सिर्फ एक परिवार और एक पीढ़ी के लिए ही काम नहीं किया है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया है। उन्होंने पीएमएवाई का उदाहरण दिया जहां 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पक्के घर सौंपे गए हैं और साथ ही बताया कि आज उत्तर प्रदेश में लाभार्थियों को 4 लाख पक्के घर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मकानों की स्वामी महिलाएं हैं, जिनके नाम पर पहली बार संपत्ति की रजिस्ट्री हुई है। उन्होंने कहा, “ये घर सुरक्षा की भावना पैदा करते हैं और घरों के मालिकों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।” उन्होंने कहा कि इन पक्के मकानों से महिलाओं को वित्तीय रूप से सुरक्षा मिलेगी।
सरकारी योजनाओं के प्रभाव को सामने रखते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना भी केवल 5 लाख रुपये के मुफ्त इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई पीढ़ियों को प्रभावित करती है, क्योंकि चिकित्सा व्यय पीढ़ियों को गरीबी और कर्ज में धकेल सकता है। उन्होंने कहा, “आयुष्मान योजना गरीबों को इस नियति से बचा रही है। इसीलिए, मैं मिशन मोड में हर गरीब तक कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इतनी मेहनत कर रहा हूं।” आज के कार्यक्रम में एक करोड़ साठ लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड के वितरण की शुरुआत हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा, “एक राष्ट्र के संसाधनों पर सबसे बड़ा दावा गरीब और वंचित लोगों का होता है।” उन्होंने 50 करोड़ जन धन खातों और मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के ऋण जैसे वित्तीय समावेशन के कदमों का उल्लेख। इससे गरीबों, दलितों, वंचितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और महिला उद्यमियों को लाभ हुआ है।
प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि का भी उल्लेख किया और कहा कि भले ही अधिकांश स्ट्रीट वेंडर पिछड़े समुदायों से आते हैं, लेकिन अतीत की सरकारों ने कभी भी उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया और केवल उन्हें परेशान किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना से अब तक 35 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं और आज वाराणसी में 1.25 लाख से अधिक लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “गरीबों के लिए आत्म-सम्मान मोदी की गारंटी है।”
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की बुनियादी बेईमानी पर प्रकाश डाला, जिसके कारण धन की लगातार कमी बनी रही। उन्होंने कहा कि आज, “चाहे गरीब कल्याण हो या इंफ्रास्ट्रक्चर, बजट की कोई कमी नहीं है। करदाता वही, व्यवस्था वही, बस सरकार बदल गई है। इरादे बदले तो नतीजे भी सामने आए हैं।” अतीत की घोटालों और कालाबाजारी की खबरों की जगह नई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की खबरों ने ले ली है। उन्होंने इस बदलाव के उदाहरण के तौर पर मालगाड़ियों के लिए विशेष ट्रैक से संबंधित परियोजना ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 2006 में जिस परियोजना की परिकल्पना की गई थी, उसमें 2014 तक एक भी किलोमीटर लंबा ट्रैक नहीं बन पाया। बीते 9 साल में, परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया गया है और इस क्षेत्र में मालगाड़ियों का परिचालन हो रहा है। उन्होंने कहा, “आज भी दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से नए सोननगर सेक्शन का उद्घाटन किया गया है। इससे न केवल मालगाड़ियों की गति बढ़ेगी बल्कि पूर्वांचल और पूर्वी भारत में रोजगार के कई नए अवसर पैदा होंगे।”
देश की तेज गति से चलने वाली ट्रेनों की आकांक्षा को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि भले ही देश में पहली बार राजधानी एक्सप्रेस लगभग 50 साल पहले चली थी, लेकिन आज तक यह केवल 16 रूट पर ही चल सकी है। उन्होंने शताब्दी एक्सप्रेस का उदाहरण भी दिया जो 30-35 साल पहले शुरू हुई थी लेकिन वर्तमान में केवल 19 रूट पर चल रही है। प्रधानमंत्री ने वंदे भारत एक्सप्रेस का उल्लेख किया और बताया कि यह ट्रेन 4 साल की छोटी अवधि में 25 रूट पर चल रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “बनारस को देश की पहली वंदे भारत ट्रेन मिली थी।” उन्होंने बताया कि आज गोरखपुर से गोरखपुर-लखनऊ और जोधपुर-अहमदाबाद रूट पर दो नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई है। श्री मोदी ने कहा, “यह वंदे भारत देश के मध्यम वर्ग के बीच इतनी सुपरहिट हो गई है और इसकी मांग बढ़ती ही जा रही है।” उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब वंदे भारत देश के हर कोने को जोड़ देगी।
पिछले 9 वर्षों में काशी से संपर्क को बेहतर बनाने के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे रोजगार के कई नए अवसर पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि काशी में 7 करोड़ पर्यटक और श्रद्धालु आए, जो एक वर्ष के भीतर 12 गुना वृद्धि है। इससे रिक्शा चालकों, दुकानदारों से लेकर ढाबों और होटलों में काम करने वाले लोगों और बनारसी साड़ी उद्योग के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा हुए। उन्हें यह भी कहा कि इससे मल्लाहों को बहुत लाभ हुआ और उन्होंने शाम को गंगा आरती के दौरान नावों की संख्या पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “आप लोग इसी तरह बनारस का ख्याल रखते रहिए।”
संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने आज की परियोजना के लिए सभी को बधाई दी और विश्वास जताया कि बाबा के आशीर्वाद से वाराणसी की विकास यात्रा आगे भी जारी रहेगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल सुश्री आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य और श्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री श्री महेंद्र नाथ पांडे, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एस पी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों सहित कई अन्य उपस्थित रहे।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन-सोन नगर रेलवे लाइन को समर्पित किया। 6760 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई गई नई लाइन माल की तेज और अधिक कुशल आवाजाही की सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने राष्ट्र को तीन रेलवे लाइनें भी समर्पित कीं, जिनका 990 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से विद्युतीकरण या दोहरीकरण किया गया है। इनमें गाजीपुर शहर-औंरिहार रेल लाइन, औंरिहार-जौनपुर रेल लाइन और भटनी-औंरिहार रेल लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश में रेलवे लाइनों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण को हासिल करने में मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने एनएच-56 के वाराणसी-जौनपुर खंड के चार लेन चौड़ीकरण को राष्ट्र को समर्पित किया, जिसे 2,750 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है और इससे वाराणसी से लखनऊ के लिए सफर आसान और तेज हो गया है।
वाराणसी में जिन कई परियोजनाओं का उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे उनमें 18 पीडब्ल्यूडी सड़कों का निर्माण और नवीनीकरण; बीएचयू परिसर में अंतर्राष्ट्रीय गर्ल्स हॉस्टल भवन का निर्माण; सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) – ग्राम करसरा में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र; पुलिस स्टेशन सिंधौरा, पीएसी भुल्लनपुर, फायर स्टेशन पिंडरा और सरकारी आवासीय विद्यालय तरसदा में आवासीय भवन और सुविधाएं; आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन भवन; मोहन कटरा से कोनिया घाट तक सीवर लाइन और रमना गांव में आधुनिक सेप्टेज प्रबंधन प्रणाली; 30 डबल साइड बैकलिट एलईडी यूनिपोल; एनडीडीबी मिल्क प्लांट रामनगर में गाय के गोबर पर आधारित बायो-गैस संयंत्र; और दशाश्वमेध घाट पर एक विशेष फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी शामिल हैं। फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी से गंगा नदी पर श्रद्धालुओं को नहाने की सुविधा मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया, उनमें चौखंडी, कादीपुर और हरदत्तपुर रेलवे स्टेशनों के पास दो लेन वाले तीन रेल ओवर ब्रिज (आरओबी); व्यासनगर- पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रेल फ्लाईओवर का निर्माण; और पीडब्ल्यूडी की 15 सड़कों का निर्माण एवं नवीकरण शामिल है। इन परियोजनाओं को लगभग 780 करोड़ रुपये की कुल लागत से विकसित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत 550 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली 192 ग्रामीण पेयजल योजनाओं की आधारशिला भी रखी। इससे 192 गांवों के 7 लाख लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों के पुन: डिजाइन और पुनर्विकास की आधारशिला भी रखी। पुनर्विकसित किए गए घाटों में सार्वजनिक सुविधाएं, प्रतीक्षा क्षेत्रों, लकड़ी भंडारण, अपशिष्ट निपटान और पर्यावरण-अनुकूल दाह संस्कार के प्रावधान होंगे।
जिन अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई उनमें दशाश्वमेध घाट के फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी की तर्ज पर वाराणसी में गंगा नदी पर छह धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर फ्लोटिंग चेंजिंग रूम जेटी और सीआईपीईटी परिसर करसरा में छात्रों के छात्रावास का निर्माण शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश में लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि के ऋण, पीएमएवाई ग्रामीण घरों की चाबियां और आयुष्मान भारत कार्ड भी वितरित किए। इससे 5 लाख पीएमएवाई लाभार्थियों का गृह प्रवेश, पात्र लाभार्थियों को 1.25 लाख पीएम स्वनिधि ऋण का वितरण और 2.88 करोड़ आयुष्मान कार्ड का वितरण शुरू हो जाएगा।
जून, 2023 के लिए सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 1,61,497 करोड़ रुपये रहा; साल-दर-साल के आधार पर 12% की वृद्धि दर्ज की गई
जून, 2023 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 1,61,497 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें से सीजीएसटी 31,013 करोड़ रुपये है, एसजीएसटी 38,292 करोड़ रुपये है, आईजीएसटी 80,292 करोड़ रुपये (माल के आयात पर एकत्र 39,035 करोड़ रुपये समेत) है और उपकर 11,900 करोड़ रुपये (माल के आयात पर एकत्र 1,028 करोड़ रुपये समेत) है।
सरकार ने आईजीएसटी से सीजीएसटी के रूप में 36,224 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के रूप में 30269 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। नियमित भुगतान के बाद, जून 2023 के महीने में केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिए 67,237 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 68,561 करोड़ रुपये है।
जून 2023 महीने का राजस्व पिछले साल के इसी महीने के जीएसटी राजस्व से 12% अधिक है। इस महीने के दौरान, घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से प्राप्त राजस्व पिछले वर्ष के इसी महीने के दौरान इन स्रोतों से प्राप्त राजस्व से 18% अधिक है।
यह चौथी बार है, जब सकल जीएसटी संग्रह 1.60 लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार कर गया है। वित्त वर्ष 2021-22, वित्त वर्ष 22-23 और वित्त वर्ष 23-24 की पहली तिमाही के लिए औसत मासिक सकल जीएसटी संग्रह क्रमशः 1.10 लाख करोड़ रुपये; 1.51 लाख करोड़ रुपये और 1.69 लाख करोड़ रुपये है।
नीचे दिया गया चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व के रुझान को प्रदर्शित करता है। तालिका-1 जून 2022 की तुलना में जून 2023 के महीने के दौरान एकत्रित जीएसटी के राज्य-वार आंकड़े दिखाती है और तालिका-2 जून’2023 में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्राप्त/भुगतान किये गए आईजीएसटी के एसजीएसटी हिस्से को दिखाती है।

जून 2023 [1] के दौरान जीएसटी राजस्व की राज्यवार वृद्धि
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | जून’22 | जून’23 | वृद्धि (%) |
| जम्मू और कश्मीर | 371.83 | 588.68 | 58% |
| हिमाचल प्रदेश | 693.14 | 840.61 | 21% |
| पंजाब | 1,682.50 | 1,965.93 | 17% |
| चंडीगढ़ | 169.7 | 227.06 | 34% |
| उत्तराखंड | 1,280.92 | 1,522.55 | 19% |
| हरियाणा | 6,713.89 | 7,988.18 | 19% |
| दिल्ली | 4,313.36 | 4,744.11 | 10% |
| राजस्थान | 3,385.95 | 3,892.01 | 15% |
| उत्तर प्रदेश | 6,834.51 | 8,104.15 | 19% |
| बिहार | 1,232.06 | 1,437.06 | 17% |
| सिक्किम | 256.37 | 287.51 | 12% |
| अरुणाचल प्रदेश | 58.53 | 90.62 | 55% |
| नगालैंड | 33.58 | 79.2 | 136% |
| मणिपुर | 38.79 | 60.37 | 56% |
| मिजोरम | 25.85 | 55.38 | 114% |
| त्रिपुरा | 62.99 | 75.15 | 19% |
| मेघालय | 152.59 | 194.14 | 27% |
| असम | 972.07 | 1,213.05 | 25% |
| पश्चिम बंगाल | 4,331.41 | 5,053.87 | 17% |
| झारखंड | 2,315.14 | 2,830.21 | 22% |
| ओडिशा | 3,965.28 | 4,379.98 | 10% |
| छत्तीसगढ | 2,774.42 | 3,012.03 | 9% |
| मध्य प्रदेश | 2,837.35 | 3,385.21 | 19% |
| गुजरात | 9,206.57 | 10,119.71 | 10% |
| दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव | 349.70 | 339.31 | -3% |
| महाराष्ट्र | 22,341.40 | 26,098.78 | 17% |
| कर्नाटक | 8,844.88 | 11,193.20 | 27% |
| गोवा | 428.63 | 480.43 | 12% |
| लक्षद्वीप | 0.64 | 21.86 | 3316% |
| केरल | 2,160.89 | 2,725.08 | 26% |
| तमिलनाडु | 8,027.25 | 9,600.63 | 20% |
| पुदुचेरी | 182.46 | 210.38 | 15% |
| अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 22.36 | 35.98 | 61% |
| तेलंगाना | 3,901.45 | 4,681.39 | 20% |
| आंध्र प्रदेश | 2,986.52 | 3,477.42 | 16% |
| लद्दाख | 13.22 | 14.57 | 10% |
| अन्य क्षेत्र | 205.3 | 227.42 | 11% |
| केंद्र क्षेत्राधिकार | 143.42 | 179.62 | 25% |
| कुल | 103317.18 | 121433.52 | 18% |
जून 2023 में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को दी गई आईजीएसटी के एसजीएसटी हिस्से की धनराशि
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | धनराशि (करोड़ रुपये में) |
| जम्मू और कश्मीर | 417.85 |
| हिमाचल प्रदेश | 222.35 |
| पंजाब | 961.45 |
| चंडीगढ़ | 122.21 |
| उत्तराखंड | 221.64 |
| हरियाणा | 1,153.80 |
| दिल्ली | 1,136.95 |
| राजस्थान | 1,554.76 |
| उत्तर प्रदेश | 3,236.11 |
| बिहार | 1,491.33 |
| सिक्किम | 39.30 |
| अरुणाचल प्रदेश | 105.43 |
| नगालैंड | 61.38 |
| मणिपुर | 49.88 |
| मिजोरम | 55.95 |
| त्रिपुरा | 84.46 |
| मेघालय | 86.75 |
| असम | 743.95 |
| पश्चिम बंगाल | 1,503.81 |
| झारखंड | 304.92 |
| ओडिशा | 409.84 |
| छत्तीसगढ़ | 366.81 |
| मध्य प्रदेश | 1,606.95 |
| गुजरात | 1,571.56 |
| दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव | 27.97 |
| महाराष्ट्र | 3,484.55 |
| कर्नाटक | 2,688.90 |
| गोवा | 162.97 |
| लक्षद्वीप | 4.80 |
| केरल | 1,415.11 |
| तमिलनाडु | 1,873.31 |
| पुदुचेरी | 184.21 |
| अंडमान व निकोबार द्वीप समूह | 24.33 |
| तेलंगाना | 1,621.37 |
| आंध्र प्रदेश | 1,159.88 |
| लद्दाख | 28.68 |
| अन्य क्षेत्र | 82.97 |
| कुल | 30,268.53 |
डीआरआई ने पकड़े गए विदेशी नागरिक के शरीर से एनडीपीएस कैप्सूल निकाले
अवैध रूप से नशीले पदार्थों की तस्करी के सामान्य तरीकों में से एक बॉडी पैकिंग है। नशीले पदार्थों के तस्कर आम तौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट या अन्य छिद्रों के भीतर दवाओं को निगलते हैं या डालते हैं। लगातार पैकेजिंग की चालबाजियों में हो रहे सुधार और तस्करों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अत्याधुनिक तकनीक के कारण ऐसे ड्रग पैकेटों का पता लगाना मुश्किल हो गया है। निदान में देरी और अनुचित कदम उठाने से बॉडी पैकर्स के लिए विनाशकारी शारीरिक परिणाम हो सकते हैं और कभी कभार हालात बॉडी पैकर्स के लिए जानलेवा भी हो सकते हैं।
आगे की जांच अभी चल रही है।
प्रधानमंत्री ने ‘चिकित्सक दिवस’ के अवसर पर समस्त चिकित्सक समुदाय के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया:
“#DoctorsDay के अवसर पर, मैं समस्त चिकित्सक समुदाय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। अत्यंत अभूतपूर्व समय में भी, चिकित्सकों ने उच्चतम स्तर के साहस, निस्वार्थता और दृढ़ता का उदाहरण पेश किया है। उनका समर्पण उपचार से परे है, यह हमारे समाज को आशा और शक्ति देता है।”
विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना (आईएन) और फ्रांसीसी नौसेना (एफएन) साझेदारी में समुद्री अभ्यास
विशाखापत्तनम से प्रस्थान पर, एफएस सुरकॉफ ने आईएन जहाजों राणा और सुमेधा के साथ विभिन्न समुद्री अभ्यास किए, जिसमें सामरिक युद्धाभ्यास, समुद्र में पुनःपूर्ति (आरएएस) दृष्टिकोण, लड़ाकू विमानों के खिलाफ वायु रक्षा और क्रॉस डेक हेलीकॉप्टर संचालन शामिल रहे। अभ्यास का समापन दोनों नौसेनाओं के बीच घनिष्ठ मित्रता की पुष्टि करते हुए जहाजों के बीच एक पारंपरिक विदाई स्टीमपास्ट के साथ हुआ। एफएस सुरकॉफ़ की भारत यात्रा भारतीय नौसेना और फ्रांसीसी नौसेना के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक है।
इससे पूर्व इसी वर्ष एफएस ला फेयेट, एक फ्रिगेट और एफएस डिक्सम्यूड, एक मिस्ट्रल-क्लास आक्रामक श्रेणी के जहाज ने 10 से 11 मार्च 2023 तक एक निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री के साथ एक साझेदारी अभ्यास में भाग लिया था।
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा, उभरते युद्ध परिदृश्य में सैन्य क्षमता विकास की आवश्यकता
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएसएम), अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) , सेना मेडल (एसएम), विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) ने उभरते युद्ध परिदृश्य में सैन्य क्षमता विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है। वह नये डीआरडीओ भवन में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज द्वारा संयुक्त रूप से ‘टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सेंसर-डिसीजन-शूटर सुपीरियॉरिटी’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार और प्रदर्शनी में 30 जून, 2023 को सम्मानित अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
जनरल चौहान ने अपने संबोधन में नवीनतम संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकियों के एकीकरण सहित कई सेंसर और शूटर क्षमताओं में तालमेल और पारदर्शिता हासिल करने में सशस्त्र बलों की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।
सीडीएस ने कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ युद्ध की गति को संभव बनाने के लिए ओओडीए (ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड, एक्ट) चक्र को उच्च गति का होना चाहिए। जनरल चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि क्षमता विकास एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि थिएटराइजेशन के साथ पारस्परिकता और एकीकरण कई गुना बढ़ जाएगा।
सीडीएस ने कहा कि अंतरिक्ष, साइबर और ईडब्ल्यू प्रौद्योगिकियों की आधारभूत समझ सभी युद्ध सेनानियों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने भविष्य के युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए विचार-मंथन करने और एक-दूसरे की आवश्यकताओं की आपसी समझ की खातिर सेवाओं, वैज्ञानिकों, उद्योग और शिक्षाविदों को एक साथ लाने के लिए डीआरडीओ और सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के प्रयासों की सराहना की।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत भी समारोह में शामिल हुए। डॉ. समीर वी. कामत ने अपने संबोधन में कहा कि सेंसर के प्रसार के साथ, नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर भविष्य के युद्धक्षेत्र परिदृश्य में एक वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेटवर्क की सुरक्षा सर्वोपरि है और समय पर सुरक्षित जानकारी प्रसारित करना एक आवश्यकता है। उन्होंने एआई-संचालित स्वायत्तता की महत्ता को भी रेखांकित किया।
सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल सुनील श्रीवास्तव, अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) **** (सेवानिवृत्त), तीनों सेनाओं के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, डीआरडीओ वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि सेमिनार में शामिल हुए। सेमिनार में रणनीतिक और मल्टी डोमेन अवेरनेस पर विभिन्न ‘विषय वस्तु विशेषज्ञों’ द्वारा सूचना साझा करना: नेटवर्क और संचार, विश्लेषण, खुफिया और निर्णय लेना, त्वरित और मल्टी-डोमेन टारगेटिंग पर चर्चा की गई।
सेमिनार ने सैन्य विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रबुद्ध जनों को इस विषय पर विचार-मंथन करने और सभी हितधारकों के लिए विभिन्न कार्रवाई योग्य बिंदु उपलब्ध करने का अवसर प्रदान किया।
Read More »किसानों के लिए विशेष पैकेज की घोषणा
सीसीईए ने किसानों को करों और नीम कोटिंग शुल्कों को छोड़कर 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम की बोरी की समान कीमत पर यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूरिया सब्सिडी योजना को जारी रखने की मंजूरी दे दी है। पैकेज में तीन वर्षों के लिए (2022-23 से 2024-25) यूरिया सब्सिडी को लेकर 3,68,676.7 करोड़ रुपये आवंटित करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यह पैकेज हाल ही में अनुमोदित 2023-24 के खरीफ मौसम के लिए 38,000 करोड़ रुपये की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के अतिरिक्त है। किसानों को यूरिया की खरीद के लिए अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी और इससे उनकी इनपुट लागत को कम करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में, यूरिया की एमआरपी 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम यूरिया की बोरी है (नीम कोटिंग शुल्क और लागू करों को छोड़कर) जबकि बैग की वास्तविक कीमत लगभग 2200 रुपये है। यह योजना पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से वित्तपोषित है। यूरिया सब्सिडी योजना के जारी रहने से जारी रहने से यूरिया का स्वदेशी उत्पादन भी अधिकतम होगा।
लगातार बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर उर्वरक की कीमतें कई गुना बढ़ रही हैं। लेकिन भारत सरकार ने उर्वरक सब्सिडी बढ़ाकर अपने किसानों को उर्वरक की अधिक कीमतों से बचाया है। हमारे किसानों की सुरक्षा के अपने प्रयास में, भारत सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को 2014-15 में 73,067 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2022-23 में 2,54,799 करोड़ रुपये कर दिया है।
नैनो यूरिया इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
2025-26 तक, 195 एलएमटी पारंपरिक यूरिया के बराबर 44 करोड़ बोतलों की उत्पादन क्षमता वाले आठ नैनो यूरिया संयंत्र चालू हो जाएंगे। नैनो उर्वरक पोषकतत्वों को नियंत्रित तरीके से रिलीज करता है, जो पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता को बढ़ता है और किसानों की लागत भी कम आती है। नैनो यूरिया के उपयोग से फसल उपज में वृद्धि हुई है।
देश 2025-26 तक यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर बनने की राह पर
वर्ष 2018 से 6 यूरिया उत्पादन यूनिट, चंबल फर्टिलाइजर लिमिटेड, कोटा राजस्थान, मैटिक्स लिमिटेड पानागढ़, पश्चिम बंगाल, रामागुंडम-तेलंगाना, गोरखपुर-उत्तर प्रदेश, सिंदरी-झारखंड और बरौनी-बिहार की स्थापना और पुनरुद्धार से देश को यूरिया उत्पादन और उपलब्धता के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है। यूरिया का स्वदेशी उत्पादन 2014-15 के 225 एलएमटी के स्तर से बढ़कर 2021-22 के दौरान 250 एलएमटी हो गया है। 2022-23 में उत्पादन क्षमता बढ़कर 284 एलएमटी हो गई है। नैनो यूरिया संयंत्र के साथ मिलकर ये यूनिट यूरिया में हमारी वर्तमान आयात पर निर्भरता को कम करेंगे और 2025-26 तक हम आत्मनिर्भर बन जाएंगे।
धरती माता की उर्वरता की बहाली, जागरूकता, पोषण और सुधार हेतु प्रधानमंत्री कार्यक्रम (पीएम-प्रणाम)
धरती माता ने हमेशा मानव जाति को भरपूर मात्रा में जीविका के स्रोत प्रदान किए हैं। यह समय की मांग है कि खेती के अधिक प्राकृतिक तरीकों और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित/सतत उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। प्राकृतिक/जैविक खेती, वैकल्पिक उर्वरकों, नैनो उर्वरकों और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने से हमारी धरती माता की उर्वरता को बहाल करने में मदद मिल सकती है। इस प्रकार, बजट में यह घोषणा की गई थी कि वैकल्पिक उर्वरक और रासायनिक उर्वरक के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘धरती माता की उर्वरता की बहाली, जागरूकता, पोषण और सुधार हेतु प्रधानमंत्री कार्यक्रम (पीएम-प्रणाम)’ शुरू किया जाएगा।
गोबरधन संयंत्रों से जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास सहायता (एमडीए) के लिए 1451.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
आज के अनुमोदित पैकेज में धरती माता की उर्वरता की बहाली, पोषण और बेहतरी के नवीन प्रोत्साहन तंत्र भी शामिल है। गोबरधन पहल के तहत स्थापित बायोगैस संयंत्र/संपीड़ित बायो गैस (सीबीजी) संयंत्रों से उप-उत्पाद के रूप में उत्पादित जैविक उर्वरक अर्थात किण्वित जैविक खाद (एफओएम)/तरल एफओएम /फास्फेट युक्त जैविक खाद (पीआरओएम) के विपणन का समर्थन करने के लिए 1500 रुपये प्रति मीट्रिक टन के रूप में एमडीए योजना शामिल है।
ऐसे जैविक उर्वरकों को भारतीय ब्रांड एफओएम, एलएफओएम और पीआरओएम के नाम से ब्रांड किया जाएगा। यह एक तरफ फसल के बाद बचे अवशेषों का प्रबंध करने और पराली जलाने की समस्याओं का समाधान करने में सुविधा प्रदान करेगा, पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखने में भी मदद करेगा। साथ ही किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान करेगा। ये जैविक उर्वरक किसानों को किफायती कीमतों पर मिलेंगे।
यह पहल इन बायोगैस/सीबीजी संयंत्रों की व्यवहार्यता बढ़ाकर चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए गोबरधन योजना के तहत 500 नए अपशिष्ट से धन संयंत्र स्थापित करने की बजट घोषणा के क्रियान्वयन की सुविधा प्रदान करेगी।
टिकाऊ कृषि पद्धति के रूप में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से मृदा की उर्वरता बहाल हो रही है और किसानों के लिए इनपुट लागत कम हो रही है। 425 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) ने प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन किया है और 6.80 लाख किसानों को शामिल करते हुए 6,777 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। जुलाई-अगस्त 2023 के शैक्षणिक सत्र से बीएससी तथा एमएससी में प्राकृतिक खेती के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार किए गए है।
मृदा में सल्फर की कमी को दूर करने और किसानों की इनपुट लागत को कम करने के लिए सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) की शुरुआत की गई।
पैकेज की एक और पहल यह है कि देश में पहली बार सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) की शुरुआत की जा रही है। यह वर्तमान में उपयोग होने वाले नीम कोटेड यूरिया से अधिक किफायती और बेहतर है। यह देश में मिट्टी में सल्फर की कमी को दूर करेगा। यह किसानों की इनपुट लागत भी बचाएगा और उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ किसानों की आय भी बढ़ाएगा।
प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र (पीएमकेएसके) की संख्या एक लाख हुई
देश में लगभग एक लाख प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र (पीएमकेएसके) पहले ही कार्यरत हैं। किसानों की सभी जरूरतों के लिए एक ही जगह पर उनकी हर समस्या के समाधान के रूप में यह केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
लाभ
आज की अनुमोदित योजनाएं रासायनिक उर्वरकों का सही उपयोग करने में मदद करेंगी, जिससे किसानों के लिए खेती की लगने वाली लागत कम हो जाएगी। प्राकृतिक/जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नैनो उर्वरक और जैविक उर्वरक से हमारी धरती माता की उर्वरता बहाल करने में मदद मिलेगी।
1) बेहतर मृदा स्वास्थ्य से पोषकतत्व दक्षता बढ़ती है तथा मृदा एवं जल प्रदूषण में कमी होने से पर्यावरण भी सुरक्षित होता है। सुरक्षित तथा स्वच्छ पर्यावरण से मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
2) फसल के अवशेष जैसे पराली जलाने से वायु प्रदूषण का मसला हल होगा तथा स्वच्छता में सुधार होगा और पर्यावरण बेहतर होगा तथा साथ ही अपशिष्ट से धन सृजन में भी सहायता मिलेगी।
3) किसान को ज्यादा लाभ मिलेंगे– यूरिया के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा क्योंकि किफायती कीमतों पर उपलब्ध रहेगा। जैविक उर्वरकों (एफओएम/पीआरओएम) भी किफायती कीमतों पर उपलब्ध होंगे। कम कीमत वाली नैनो यूरिया तथा रासायनिक उर्वरकों के कम प्रयोग और ऑर्गेनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग से किसानों के लिए इनपुट लागत भी कम हो जाएगी। कम इनपुट लागत के साथ स्वस्थ मृदा तथा पानी से फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ेगी। किसानों को उनके उत्पाद से बेहतर लाभ मिलेगा।
सरकार ने चीनी सीजन 2023-24 के लिए गन्ना किसानों को चीनी मिलों द्वारा देय गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य को मंजूरी दी
इसके अतिरिक्त, गन्ना किसानों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से सरकार ने यह भी निर्णय किया है कि उन चीनी मिलों के मामलों में कोई कटौती नहीं होगी जहां रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है। ऐसे किसानों को चालू चीनी सीजन 2022-23 में 282.125 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर आगामी चीनी सीजन 2023-24 में गन्ने के लिए 291.975 रुपये प्रति क्विंटल प्राप्त होंगे।
चीनी सीजन 2023-24 के लिए गन्ने के उत्पादन की लागत 157 रुपये प्रति क्विंटल है। 315 रुपये प्रति क्विंटल की रिकवरी दर पर यह एफआरपी उत्पादन लागत से 100.06 प्रतिशत से अधिक है। चीनी सीजन 2023-24 के लिए एफआरपी वर्तमान चीनी सीजन 2022-23 की तुलना में 3.28 प्रतिशत अधिक है।
मंजूरी की गई एफआरपी चीनी मिलों द्वारा चीनी सीजन 2023-24 ( 1 अक्टूबर, 2023 से आरंभ ) में किसानों से गन्ने की खरीद के लिए लागू होगी। चीनी सेक्टर एक महत्वपूर्ण कृषि- आधारित सेक्टर है जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों की आजीविका को और उनके आश्रितों तथा चीनी मिलों में प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों के अतिरिक्त कृषि श्रमिकों एवं परिवहन सहित विभिन्न सहायक कार्यकलापों से जुटे लोगों को प्रभावित करता है।
एफआरपी का निर्धारण कृषि लागत और मूल्य आयोग ( सीएसीपी ) की अनुशंसाओं के आधार पर और राज्य सरकारों तथा अन्य हितधारकों के साथ परामर्शकरने के बाद किया गया था। चीनी सीजन 2013-14 के बाद से सरकार द्वारा घोषित एफआरपी के विरण इस प्रकार हैं :

पृष्ठभूमि :
वर्तमान चीनी सीजन 2022-23 में, चीनी मिलों द्वारा 1,11,366 करोड़ रुपये के मूल्य लगभग 3,353 लाख टन गन्ने की खरीद की गई जो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की फसल की खरीद के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। सरकार अपने किसान- हितैषी कदमों के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगी कि गन्ना किसानों को उनका बकाया राशि समय पर प्राप्त हो जाए।
पिछले पांच वर्षों में जैव ईंध क्षेत्र के रूप में इथेनौल के विकास ने गन्ना किसानों और चीनी सेक्टर की भरपूर सहायता की है क्योंकि गन्ने/चीनी को इथेनौल में बदलने से भुगतान में तेजी आई है, कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं में कमी आई है तथा मिलों के पास कम अधिशेष चीनी की वजह से फंडों की रुकावट कम हुई है जिससे अब वे किसानों के गन्ने बकाया का समय पर भुगतान करने में सक्षम हो गई हैं। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान, लगभग 20,500 करोड़ रुपये का राजस्व चीनी मिलों/डिस्टिलरियों द्वारा सृजित किया गया है जिसने उन्हें किसानों के गन्ने बकाया का भुगतान करने में सक्षम बनाया है।
पेट्रोल के साथ मिश्रित इथेनौल ( ईबीपी ) कार्यक्रम ने विदेशी मुद्रा की बचत करने के साथ साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी सुदृढ़ बनाया है और आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम कर दी है जिससे पेट्रोलियम सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को अर्जित करने में मदद मिली है। 2025 तक, 60 एलएमटी से अधिक अतिरिक्त चीनी को इथेनौल में बदलने का लक्ष्य है जिससे चीनी की उच्च इनवेंटरी की समस्या का समाधान होगा, मिलों की तरलता में सुधार होगा जिससे किसानों के गन्ना बकाया का समय पर भुगतान करने में सहायता मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवर भी सृजित होंगे। पेट्रोल के साथ इथेनौल के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और वायु की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
सरकार की सक्रिय और किसान हितैषी नीतियों के कारण किसानों, उपभोक्ताओं के साथ साथ चीनी क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों के हितों को भी बढ़ावा मिला है और चीनी को किफायती बनाने के द्वारा पांच करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों और सभी उपभोक्ताओं की आजीविका में सुधार हुआ है। सरकार की सक्रिय नीतियों के फलस्वरूप, चीनी सेक्टर अब आत्म निर्भर बन गया है।
भारत अब वैश्विक चीनी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि यह विश्व में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। चीनी सीजन 2021-22 में, भारत चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक देश भी बन गया है। ऐसी उम्मीद की जाती है कि भारत वित्त वर्ष 2025-26 तक विश्व में तीसरा सबसे बड़ा इथेनौल उत्पादक देश बन जाएगा।
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