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एस.एन.सेन बी वी पी जी कॉलेज में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल एवं बैंक प्लस के सौजन्य से मेगा प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन.सेन बी वी पी जी कॉलेज में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल एवं बैंक प्लस के सौजन्य से दिनांक 19.09.2024 दिन बृहस्पतिवार को मेगा प्लेसमेंट ड्राइव का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो सुमन एवं बैंक प्लस से आई हुई टीम ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। जानकारी देते हुए मीडिया प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया इस प्लेसमेंट ड्राइव में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट्स- सभी विषयों के 400 से अधिक छात्र छात्राओं ने पंजीकरण कराया एवं साक्षात्कार दिया। चयन के पश्चात छात्र छात्राओं की नियुक्ति कानपुर नगर के साथ साथ उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों के बैंकों/ ऐन.बी. एफ. सी. (एक्सिस बैंक/ ऐच डी ऐफ सी बैंक/कोटक बैंक आदि) में की जाएगी। बैंक प्लस से आई हुईएस टीम के इंचार्ज श्री गगन सिंह ने बताया कि जिन छात्राओं का चयन इस प्लेसमेंट ड्राइव में नहीं हो पाएगा वे ट्रेनिंग के लिए बैंक प्लस के संस्थान में सकेंगे । महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो.सुमन ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम छात्राओं का सर्वांगीण विकास करते हैं और इससे वे आर्थिक एवम बौद्धिक रूप से सुदृढ़ होते हैं। कार्यक्रम में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की इंचार्ज प्रो.गार्गी यादव,प्रो. निशा वर्मा, डॉ, कोमल सरोज , डॉ श्वेता रानी एवं समस्त शिक्षिकाएँ उपस्थित रहीं।

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गंगा बैराज के माध्यम से गंगा नदी की जल धारा प्रवाहित होने के कारण गंगा नदी कानपुर नगर की आबादी से सटकर बह रही

कानपुर 18 सितम्बर (सू0वि0) अधिशासी अभियन्ता, बैराज, निर्माण खण्ड-2, कानपुर, पंकज गौतम ने बताया कि कानपुर नगर में गंगा बैराज के माध्यम से गंगा नदी की जल धारा प्रवाहित होने के कारण गंगा नदी कानपुर नगर की आबादी से सटकर बह रही है। गंगा नदी के जल स्तर में वृद्धि के फलस्वरूप बैराज के नीचे गंगा नदी के बॉये तट पर स्थित ग्राम लोधवा खेड़ा (चौनपुरवा, धारमखेड़ा, देवनीपुरवा, नई बस्ती, मंगलपुरवा बड़ा, मंगलपुरवा छोटा, पहाडीपुर), कटरी शंकरपुर सराय (ग्राम गंगा बैराज नई बस्ती, नत्थापुरवा, रामनिहालपुर, मेघनपुरवा, कल्लूपुरवा) एवं उन्होंने कच्ची मडैया ग्रामों के लोगों और दॉये तट पर किनारे बसे हुये लोगों को एतद्वारा सूचित किया है कि आगामी दो दिवस में गंगा बैराज पर गंगा नदी का जल स्तर चेतावनी बिन्दु/स्तर 114.00 मीटर के ऊपर हो जाने की सम्भावना है।
उन्होंने उक्त ग्रामों/टोलों के नागरिकों से अपेक्षा है कि वे नदी के किनारों से दूर रहें और समय रहते तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जायें।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के पालघर में लगभग 76,000 करोड़ रुपये की लागत वाले वाढवण बंदरगाह की आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के पालघर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। आज की परियोजनाओं में लगभग 76,000 करोड़ रुपये की लागत से वाढवण बंदरगाह की आधारशिला रखना और लगभग 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास शामिल है। श्री मोदी ने लगभग 360 करोड़ रुपये की लागत से वेसल कम्युनिकेशन और सपोर्ट सिस्टम का राष्ट्रीय शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने मछली पकड़ने के बंदरगाहों के विकास, उन्नयन और आधुनिकीकरण, मछली लैंडिंग केंद्रों और मछली बाजारों के निर्माण सहित महत्वपूर्ण मत्स्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। उन्होंने मछुआरों के लाभार्थियों को ट्रांसपोंडर सेट और किसान क्रेडिट कार्ड भी वितरित किए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत संत सेनाजी महाराज को उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि देकर की। श्री मोदी ने अपने दिल की बात कही और वर्ष 2013 के उस समय को याद किया जब उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकित किया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि के सामने प्रार्थना करने के लिए सबसे पहले रायगढ़ किले का दौरा करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उसी ‘भक्ति भाव’ का आशीर्वाद मिला जिसके साथ उन्होंने अपने गुरु का सम्मान किया और देश की सेवा के लिए नई यात्रा शुरू की। सिंधुदुर्ग में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि शिवाजी महाराज केवल एक नाम, पूज्य राजा या महान व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक भगवान हैं। उन्होंने श्री शिवाजी महाराज के चरणों में झुककर विनम्र क्षमायाचना की और कहा कि उनकी परवरिश और उनकी संस्कृति उन्हें उन लोगों से अलग बनाती है जो भूमि के महान पुत्र वीर सावरकर का अपमान करने और राष्ट्रवाद की भावना को कुचलने का इरादा रखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “महाराष्ट्र के लोगों को वीर सावरकर का अपमान करने वालों से सावधान रहना चाहिए और इसके लिए उन्हें कोई पश्चाताप नहीं होना चाहिए।” श्री मोदी ने रेखांकित किया कि महाराष्ट्र का दौरा करने के बाद उन्होंने जो पहला काम किया वह अपने भगवान छत्रपति शिवाजी महाराज से माफी मांगना था। उन्होंने शिवाजी महाराज की पूजा करने वाले सभी लोगों से माफ़ी भी मांगी।

राज्य और देश की विकास यात्रा के लिए इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में महाराष्ट्र के विकास के लिए बड़े कदम उठाए हैं क्योंकि “एक विकसित महाराष्ट्र एक विकसित भारत के संकल्प का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।” राज्य के ऐतिहासिक समुद्री व्यापार का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि राज्य में तटीय निकटता के कारण विकास की क्षमता और संसाधन हैं, जिसमें भविष्य के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, “वाढवण बंदरगाह देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह होगा और दुनिया के गहरे पानी के बंदरगाहों में गिना जाएगा। यह महाराष्ट्र और भारत के लिए व्यापार और औद्योगिक विकास का केंद्र बन जाएगा।” प्रधानमंत्री ने वाढवण बंदरगाह परियोजना के लिए पालघर, महाराष्ट्र और पूरे देश के लोगों को बधाई दी।

दिघी पोर्ट औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के सरकार के हालिया फैसले का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह महाराष्ट्र के लोगों के लिए दोहरी खुशी का अवसर है। उन्होंने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज के साम्राज्य की राजधानी रायगढ़ में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दिघी बंदरगाह महाराष्ट्र की पहचान और छत्रपति शिवाजी महाराज के सपनों का प्रतीक बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन और इको-रिसॉर्ट को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे मछुआरा समुदाय को बधाई देते हुए कहा कि आज पूरे देश में मछुआरों से जुड़ी 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया है और 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया है। उन्होंने वाढवण बंदरगाह, दिघी बंदरगाह औद्योगिक क्षेत्र के विकास और मत्स्य पालन के लिए कई योजनाओं का उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि सभी विकास कार्य माता महालक्ष्मी देवी, माता जीवदानी और भगवान तुंगारेश्वर के आशीर्वाद से संभव हुए हैं।

भारत के स्वर्ण युग का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत अपनी समुद्री क्षमताओं के कारण सबसे मजबूत और समृद्ध देशों में गिना जाता था। श्री मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र के लोग इस क्षमता से अच्छी तरह वाकिफ हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने देश के विकास के लिए अपनी नीतियों और मजबूत फैसलों से भारत की समुद्री क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।” प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां तक ​​कि पूरी ईस्ट इंडिया कंपनी भी दरिया सारंग कान्होजी यागंती के सामने नहीं टिक सकी। श्री मोदी ने कहा कि पिछली सरकारें भारत के समृद्ध अतीत पर ध्यान देने में विफल रहीं।  प्रधानमंत्री ने कहा, “अब यह भारत नया भारत है। नया भारत इतिहास से सबक लेता है और अपने सामर्थ्य को पहचानता है, अपने गौरव को पहचानता है।” श्री मोदी ने कहा कि नया भारत गुलामी की बेड़ियों के हर निशान को पीछे छोड़ते हुए समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में नए मील के पत्थर लगा रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पिछले दशक में भारत के तट पर विकास में अभूतपूर्व तेजी आई है। उन्होंने भारत में बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, जलमार्ग विकसित करने और जहाज निर्माण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का उदाहरण दिया। श्री मोदी ने कहा, “इस दिशा में लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है”, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसके परिणाम भारत में अधिकांश बंदरगाहों की दोगुनी हैंडलिंग क्षमता, निजी निवेश में वृद्धि और जहाजों के पारगमन समय में उल्लेखनीय कमी के माध्यम से देखे जा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि इससे लागत कम होने से उद्योगों और व्यापारियों को लाभ हुआ है, जबकि युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “नाविकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ी हैं।” 

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज पूरी दुनिया वाढवण बंदरगाह की ओर देख रही है”, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दुनिया में बहुत कम बंदरगाह वाढवण बंदरगाह की 20 मीटर की गहराई की बराबरी कर सकते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि रेलवे और राजमार्ग संपर्क के कारण बंदरगाह पूरे क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को बदल देगा।  उन्होंने उल्लेख किया कि समर्पित वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर से इसकी कनेक्टिविटी और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से निकटता के कारण यह नए व्यवसायों और गोदामों के अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र से पूरे वर्ष कार्गो का आना-जाना रहेगा, जिससे महाराष्ट्र के लोगों को लाभ होगा।”

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ कार्यक्रमों के माध्यम से महाराष्ट्र द्वारा प्राप्त लाभों पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र का विकास मेरे लिए एक बड़ी प्राथमिकता है।” भारत की प्रगति में महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री ने विकास को रोकने की कोशिश करने वालों के प्रयासों पर खेद व्यक्त किया।

वाढवण बंदरगाह परियोजना को लगभग 60 वर्षों तक रोकने के लिए पिछली सरकार के प्रयासों पर अफसोस व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को समुद्री व्यापार के लिए एक नए और उन्नत बंदरगाह की आवश्यकता थी, लेकिन इस दिशा में वर्ष 2016 तक काम शुरू नहीं हुआ। श्री मोदी ने कहा कि फडणवीस के सत्ता में आने पर इस परियोजना को गंभीरता से लिया गया और वर्ष 2020 तक पालघर में एक बंदरगाह बनाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, सरकार बदलने के कारण परियोजना फिर से 2.5 साल के लिए रुक गई। प्रधानमंत्री ने बताया कि अकेले इस परियोजना में कई लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है और यहां करीब 12 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ने देने के लिए पिछली सरकारों पर भी सवाल उठाया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि जब समुद्र से संबंधित अवसरों की बात आती है तो भारत का मछुआरा समुदाय सबसे महत्वपूर्ण भागीदार है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के लाभार्थियों के साथ अपनी बातचीत का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने सरकारी योजनाओं और सेवा की भावना के कारण पिछले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में बदलाव पर प्रकाश डाला। यह बताते हुए कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में 80 लाख टन मछली का उत्पादन होता था, जबकि आज 170 लाख टन मछली का उत्पादन होता है। उन्होंने कहा, “केवल 10 वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना हो गया है।” उन्होंने भारत के बढ़ते समुद्री खाद्य निर्यात के बारे में भी बताया और दस वर्ष पहले के 20 हजार करोड़ रुपये से भी कम की तुलना में आज 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के झींगा निर्यात का उदाहरण दिया। श्री मोदी ने कहा, “झींगा निर्यात भी आज दोगुना से अधिक हो गया है”, उन्होंने इसकी सफलता का श्रेय नीली क्रांति योजना को दिया, जिसने लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायता की है।

मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन देने के सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने पीएम मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत हजारों महिलाओं की सहायता करने का उल्लेख किया। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकियों और उपग्रहों के बारे में बात की और आज वेसल कम्युनिकेशन सिस्टम के शुरू होने का उल्लेख किया जो मछुआरा समुदाय के लिए एक आशीर्वाद बन जाएगा। श्री मोदी ने घोषणा की कि सरकार मछुआरों द्वारा अपने परिवारों, नाव मालिकों, मत्स्य पालन विभाग और तट रक्षकों के साथ निर्बाध संपर्क स्थापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले जहाजों पर 1 लाख ट्रांसपोंडर स्थापित करने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे मछुआरों को आपातकाल, चक्रवात या किसी भी अप्रिय घटना के समय उपग्रहों की सहायता से संवाद करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने आश्वासन दिया, “किसी भी आपात स्थिति के दौरान लोगों की जान बचाना सरकार की प्राथमिकता है।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि मछुआरों के जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए 110 से अधिक मछली पकड़ने वाले बंदरगाह और लैंडिंग केंद्र बनाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कोल्ड चेन, प्रसंस्करण सुविधाओं, नावों के लिए ऋण योजनाओं और पीएम मत्स्य सम्पदा योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार तटीय गांवों के विकास पर अधिक ध्यान दे रही है जबकि मछुआरों के सरकारी संगठनों को भी मजबूत किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने हमेशा पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए काम किया है और वंचितों को अवसर दिए हैं, जबकि पिछली सरकारों द्वारा बनाई गई नीतियों ने मछुआरों और आदिवासी समुदाय को हमेशा हाशिये पर रखा है, देश के इतने बड़े आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए एक भी विभाग नहीं है। श्री मोदी ने कहा, “यह हमारी सरकार है जिसने मछुआरों और आदिवासी समुदायों दोनों के लिए अलग-अलग मंत्रालय बनाए हैं। आज, उपेक्षित आदिवासी क्षेत्र पीएम जनमन योजना का लाभ उठा रहे हैं और हमारे आदिवासी और मछुआरे समुदाय हमारे देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास दृष्टिकोण के लिए राज्य सरकार की प्रशंसा की और कहा कि महाराष्ट्र देश के लिए महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। महाराष्ट्र में कई उच्च पदों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्य के इतिहास में पहली बार मुख्य सचिव के रूप में राज्य प्रशासन का मार्गदर्शन कर रही सुजाता सौनिक, राज्य पुलिस बल का नेतृत्व कर रही पुलिस महानिदेशक रश्मी शुक्ला का उल्लेख किया। शोमिता बिस्वास राज्य के वन बल के प्रमुख के रूप में नेतृत्व कर रही हैं और सुवर्णा केवले राज्य के कानून विभाग के प्रमुख के रूप में दायित्व संभाल रही हैं। उन्होंने राज्य के प्रधान महालेखाकार के रूप में कार्यभार संभालने वाली जया भगत, मुंबई में सीमा शुल्क विभाग का नेतृत्व करने वाली प्राची स्वरूप और मुंबई मेट्रो के प्रबंध निदेशक के रूप में अश्विनी भिडे का भी उल्लेख किया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महाराष्ट्र में महिलाओं का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. माधुरी कानिटकर और महाराष्ट्र के कौशल विश्वविद्यालय के पहले कुलपति डॉ. अपूर्वा पालकर का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “इन महिलाओं की सफलताएँ इस बात का प्रमाण हैं कि 21वीं सदी की महिला शक्ति समाज को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है।” श्री मोदी ने कहा कि यह महिला शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है।

प्रधानमंत्री ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि यह सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की मान्यता के साथ काम करती है। श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र के लोगों के सहयोग से राज्य विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

महाराष्ट्र के राज्यपाल, श्री सी पी राधाकृष्णन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, श्री एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, श्री देवेन्द्र फडणवीस और श्री अजीत पवार, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशु पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह भी इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने वाढवण बंदरगाह की आधारशिला रखी। इस परियोजना की कुल लागत करीब 76,000 करोड़ रुपये है।. इसका उद्देश्य एक विश्व स्तरीय समुद्री प्रवेश द्वार स्थापित करना है जो बड़े कंटेनर जहाजों को आपूर्ति, गहरे ड्राफ्ट की पेशकश और बहुत-बड़े मालवाहक जहाजों को समायोजित करके देश के व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

पालघर जिले के दहानू शहर के पास स्थित वाढवण बंदरगाह भारत के सबसे बड़े गहरे पानी के बंदरगाहों में से एक होगा और पारगमन समय और लागत को कम करते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों से सीधा संपर्क प्रदान करेगा। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे से सुसज्जित, बंदरगाह में गहरी बर्थ, कुशल कार्गो हैंडलिंग सुविधाएं और आधुनिक बंदरगाह प्रबंधन प्रणाली शामिल होंगी। बंदरगाह से रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने, स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहित करने और क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में योगदान मिलने की संभावना है। वाढवण बंदरगाह परियोजना पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और कड़े पारिस्थितिक मानकों का पालन करने पर ध्यान देने के साथ सतत विकास प्रथाओं को शामिल करती है। एक बार चालू होने के बाद, बंदरगाह भारत के समुद्री संपर्क को बढ़ाएगा और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य पालन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया, जिसका उद्देश्य देश भर में क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और उत्पादकता को बढ़ावा देना है। इन पहलों से मत्स्य पालन क्षेत्र में पांच लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री ने लगभग 360 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल रोल आउट ऑफ वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम का शुभारंभ किया। इस परियोजना के अंतर्गत 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत और मोटर चालित मछली पकड़ने वाले जहाजों पर चरणबद्ध तरीके से 1 लाख ट्रांसपोंडर स्थापित किए जाएंगे। पोत संचार और सहायता प्रणाली इसरो द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक है, जो मछुआरों के समुद्र में रहने के दौरान दो-तरफ़ा संचार स्थापित करने में मदद करेगी और बचाव कार्यों में भी सहायता करेगी और साथ ही हमारे मछुआरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन की गई अन्य पहलों में रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम और बायोफ्लॉक जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के साथ-साथ मछली पकड़ने के बंदरगाह और एकीकृत एक्वापार्क का विकास शामिल है। मछली उत्पादन बढ़ाने, फसल कटाई के बाद प्रबंधन में सुधार और मत्स्य पालन क्षेत्र में शामिल लाखों लोगों के लिए स्थायी आजीविका बनाने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट प्रदान करने के लिए इन परियोजनाओं को कई राज्यों में लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने मछली पकड़ने के बंदरगाहों के विकास, उन्नयन और आधुनिकीकरण, मछली लैंडिंग केंद्रों और मछली बाजारों के निर्माण सहित महत्वपूर्ण मत्स्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इससे मछली और समुद्री भोजन की कटाई के बाद प्रबंधन के लिए आवश्यक सुविधाएं और स्वच्छ स्थितियां प्रदान करने की संभावना है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  नई दिल्ली के भारत मंडपम में जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में डाक टिकट और सिक्का जारी करेंगे।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में पांच कार्य सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जिला न्यायपालिका से संबंधित विषयों जैसे कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन, सभी के लिए समावेशी न्यायालय, न्यायिक सुरक्षा और न्यायिक कल्याण, मामला प्रबंधन और न्यायिक प्रशिक्षण पर विचार-विमर्श और चर्चा की जाएगी।

इस उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), भारत के अटॉर्नी जनरल, सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और भारतीय बार काउंसिल के अध्यक्ष भी भाग लेंगे।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कल नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अनुभव पुरस्कार 2024 प्रदान करेंगे

प्रधानमंत्री के निर्देश पर, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) ने मार्च 2015 में ‘अनुभव’ नामक एक ऑनलाइन मंच शुरू किया। यह सेवानिवृत्त होने वाले/सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अपनी सेवा अवधि के दौरान की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है।

28 अगस्त, 2024 को डीओपीपीडब्ल्यू 2016 में अपनी स्थापना के बाद से 7वें अनुभव पुरस्कार समारोह का आयोजन करेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक 6 समारोहों में 54 अनुभव पुरस्कार और 09 जूरी प्रमाण पत्र प्रदान किए जा चुके हैं।

इस वर्ष 22 मंत्रालयों/विभागों के लेख प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें से 5 अनुभव पुरस्कार और 10 जूरी प्रमाण पत्र कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा उत्कृष्ट लेखों के लिए प्रदान किए जाएंगे। यह पुरस्कार समारोह अभूतपूर्व है, क्योंकि कुल 15 पुरस्कार विजेताओं में से 33 प्रतिशत महिला कर्मचारी हैं, जो ‘अनुभव’ के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। यह शासन में उनकी बढ़ती भूमिका और योगदान को दर्शाता है। डीओपीपीडब्ल्यू 15 पुरस्कार विजेताओं की व्यावसायिक उपलब्धियों का समारोह मनाने और उन्हें रेखांकित करने के लिए एक लघु फिल्म और प्रशस्ति पुस्तिका भी जारी करेगा।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग 28 अगस्त, 2024 को विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में 55वीं सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श (पीआरसी) कार्यशाला का आयोजन करेगा ।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग, सुशासन के एक हिस्से के रूप में, सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को सेवानिवृत्ति प्रक्रिया में सुविधा प्रदान करने के लिए, पूरे देश में सेवानिवृत्ति-पूर्व परामर्श (पीआरसी) कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। भारत सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभ के लिए आयोजित की जा रही यह कार्यशाला, पेंशनभोगियों के ‘जीवन को सुगम बनाने’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस कार्यशाला में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभों और पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया से संबंधित सुसंगत जानकारी प्रदान की जाएगी।

सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए सुचारू बदलाव की सुविधा के लिए, भविष्य पोर्टल, एकीकृत पेंशनर्स पोर्टल, सेवानिवृत्ति लाभ, पारिवारिक पेंशन, सीजीएचएस नियम, आयकर नियम, अनुभव, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, निवेश के अवसर आदि पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सभी सत्रों को सेवानिवृत्त लोगों को अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और सेवानिवृत्ति से पहले भरे जाने वाले फॉर्म के बारे में जागरूक करने और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मिलने वाले लाभों के बारे में जानकारी देने के लिए तैयार किया गया है।

विभिन्न निवेश मोड, उनके लाभ और योजना पर एक विस्तृत सत्र आयोजित किया जाएगा ताकि सेवानिवृत्त लोग समय रहते अपने रिटायरमेंट फंड के निवेश की योजना बना सकें। सीजीएचएस प्रणाली, सीजीएचएस पोर्टल, प्रदान की जाने वाली सुविधाओं के साथ-साथ सीजीएचएस लाभ प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं पर भी एक विस्तृत सत्र आयोजित किया जाएगा।

पीआरसी कार्यशाला के दौरान “बैंकों की प्रदर्शनी” आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है, जिसमें सभी 18 पेंशन वितरण बैंक भाग लेंगे। प्रतिभागियों को पेंशनभोगियों से संबंधित सभी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैंक सेवानिवृत्त लोगों को पेंशन खाता खोलने और उनके लिए उपयुक्त विभिन्न योजनाओं में पेंशन कोष का निवेश करने के बारे में भी मार्गदर्शन करेंगे।

उम्मीद है कि 31.03.2025 तक सेवानिवृत्त होने वाले लगभग 1,200 अधिकारियों को इस पूर्व-सेवानिवृत्ति परामर्श (पीआरसी) कार्यशाला से अत्यधिक लाभ होगा। विभाग सुशासन के हिस्से के रूप में ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन करना जारी रखेगा, ताकि केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक सहज और आरामदायक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके। विभाग उन्हें सरकार द्वारा की जा रही पहलों के बारे में अद्यतन रखने के लिए सभी प्रयास कर रहा है ताकि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी सभी लाभों का लाभ उठा सकें।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग 28 अगस्त, 2024 को नई दिल्ली में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 11वीं राष्ट्रव्यापी पेंशन अदालत का आयोजन करेगा।

पेंशनभोगियों की शिकायतों का निवारण सरकार के लिए उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। पेंशनभोगियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए पेंशन अदालतों का आयोजन डीओपीपीडब्ल्यू द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कई हितधारकों को मौके पर ही निवारण के लिए एक ही प्लेटफार्म पर लाया जाता है। देश भर में आयोजित सभी पेंशन अदालतों में 17,760 (74 प्रतिशत निवारण दर) मामलों का समाधान किया गया।

11वीं पेंशन अदालत में लंबे समय से लंबित वरिष्ठ नागरिकों के पेंशन मामलों के समाधान पर ध्यान दिया जाएगा। पेंशन अदालत में गृह मंत्रालय, रक्षा वित्त विभाग, वाणिज्य मंत्रालय, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, रेल मंत्रालय आदि सहित 22 मंत्रालय/विभाग भाग लेंगे। मंत्रालयों से संबंधित 298 मामलों पर चर्चा की जाएगी।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने पेंशनभोगियों और बुजुर्ग नागरिकों के लिए एक साझा एकल खिड़की पोर्टल प्रदान करने के लिए भविष्य मंच को आधार के रूप में उपयोग करते हुए एक “एकीकृत पेंशनभोगी पोर्टल” विकसित किया है। भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया पहले से ही अपने पेंशन पोर्टल को एकीकृत पेंशनभोगी पोर्टल के साथ एकीकृत कर रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया कल इस वर्ग में शामिल हो जाएगा। वर्तमान में, इन बैंकों द्वारा 4 सुविधाएं अर्थात् मासिक पेंशन पर्ची, जीवन प्रमाण पत्र की स्थिति, पेंशनभोगी का फॉर्म 16 जमा करना और भुगतान किए गए पेंशन बकाया का देय और आहरित विवरण प्रदान की जा रही हैं। इसका लक्ष्य एकीकृत उपयोगकर्ता अनुभव के लिए सभी पेंशन संवितरण बैंकों को इस पोर्टल के साथ एकीकृत करना है।

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पीएम गतिशक्ति के तहत नेटवर्क योजना समूह की 77वीं बैठक में छह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया

पीएम गतिशक्ति पहल के तहत नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) की 77वीं बैठक का कल नई दिल्ली में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अपर सचिव श्री राजीव सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजन किया गया। इस बैठक में रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की छह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन परियोजनाओं का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) में उल्लिखित एकीकृत योजना के सिद्धांतों के साथ उनकी अनुरूपता के लिए किया गया। इन परियोजनाओं का मूल्यांकन और उनके अनुमानित प्रभाव नीचे विस्तार से दिए गए हैं।

गुजरात में हजीरा-गोथंगम नई रेल लाइन

गुजरात में यह एक ग्रीनफील्ड परियोजना है, जिसमें गोथांगम को हजीरा से जोड़ने वाली 36.35 किलोमीटर लम्‍बी ब्रॉड गेज (बीजी) डबल लाइन का निर्माण शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य सेक्शन क्षमता को बढ़ाना और प्रमुख उद्योगों तथा एक प्रमुख कार्गो हब हजीरा बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। थोक और कंटेनरयुक्त कार्गो की कुशल आवाजाही में सहायता मिलने से यह परियोजना क्षेत्रीय आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करेगी। इससे सड़क यातायात में कमी आने और रेल परिवहन के लिए कार्गो के मॉडल में बदलाव के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होने की उम्मीद है।

असम में बिलासीपारा – गुवाहाटी रोड

असम में 4-लेन राष्‍ट्रीय राजमार्ग-17 में एक रणनीतिक सड़क के उन्नयन में चिरकुटा (बिलासीपारा) और तुलुंगिया के बीच 44.56 किलोमीटर लम्‍बा हिस्सा शामिल है। यह परियोजना असम को पश्चिम बंगाल, मेघालय और जोगीघोपा और रूपसी में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और गुवाहाटी हवाई अड्डों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को जोड़ते हुए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाएगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा और यात्रा में कम समय लगेगा जिससे इस क्षेत्र में भीड़भाड़ कम होने की उम्मीद है।

नासिकमहाराष्ट्र में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी)

इस परियोजना में महाराष्ट्र के नासिक में 109.97 एकड़ में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) का विकास शामिल है। इस ग्रीनफील्ड परियोजना को सड़क और रेल परिवहन को एकीकृत करने, लॉजिस्टिक्स दक्षता को बेहतर बनाने, लागत कम करने और कार्गो समेकन, भंडारण तथा सीमा शुल्क मंजूरी जैसी सुविधाएं प्रदान करके क्षेत्रीय उद्योगों की सहायता करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस परियोजना से वर्ष 2029 से प्रति वर्ष 3.11 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो का रख-रखाव होने का अनुमान है।

बिहटा हवाई अड्डेपटना बिहार में नए सिविल एन्क्लेव का विकास

इस परियोजना के तहत बिहार में एक ब्राउनफील्ड परियोजना में पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से 28 किलोमीटर दूर बिहटा एयरफील्ड में एक नए सिविल एन्क्लेव का विकास शामिल है। यह परियोजना पटना हवाई अड्डे पर क्षमता की कमी को पूरा करेगी। परियेाजना के तहत प्रति वर्ष 5 मिलियन यात्रियों को संभालने के लिए एक नए टर्मिनल भवन का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना में ए-321 विमानों के लिए 10-बे एप्रन का निर्माण भी शामिल है, जिसका उद्देश्य बढ़ते हुए यात्री यातायात को समायोजित करना और क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार करना है।

बागडोगरा हवाई अड्डेसिलीगुड़ी, (पश्चिम बंगाल) में नए सिविल एन्क्लेव का विकास

इस परियोजना में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के बागडोगरा हवाई अड्डे पर एक नए सिविल एन्क्लेव के विकास से जुड़ी एक ब्राउनफील्ड परियोजना शामिल है। इसके विस्तार में प्रति वर्ष 10 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता के साथ एक नए टर्मिनल भवन और 10 विमानों के लिए एक एप्रन का निर्माण भी शामिल है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण “चिकन नेक” क्षेत्र में स्थित, बागडोगरा हवाई अड्डा देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। इसका विस्तार क्षेत्र की बढ़ती कनेक्टिविटी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहुत आवश्यक है।

अंडमान एवं निकोबार की गैलेथिया खाड़ी में अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट का विकास

यह अंडमान एवं निकोबार केन्द्र शासित प्रदेश में ग्रेट निकोबार द्वीप पर गैलेथिया खाड़ी में एक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (आईसीटीपी) विकसित करने वाली एक परिवर्तनकारी परियोजना है। 44,313 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य ग्रीनफील्ड पहल के साथ खाड़ी की रणनीतिक स्थिति और गहरे पानी का लाभ उठाना है। उम्मीद है कि यह बंदरगाह भारतीय बंदरगाहों और क्षेत्र के पड़ोसी देशों से ट्रांसशिपमेंट कार्गो को संभालेगा, जिससे भारत की समुद्री व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

 

एनपीजी ने पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य से सभी छह परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जिनमें मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर का एकीकृत विकास, आर्थिक और सामाजिक बदलाव के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी, इंटरमॉडल कनेक्टिविटी और परियोजनाओं का समन्वित कार्यान्वयन शामिल है। इन परियोजनाओं से राष्ट्र निर्माण, परिवहन के विभिन्न साधनों को एकीकृत करने और पर्याप्त सामाजिक-आर्थिक लाभ एवं जीवन को आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रों के समग्र विकास में योगदान मिलेगा।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेन्नई में कलैग्नार एम करुणानिधि की जन्म शताब्दी के अवसर पर स्मारक सिक्का जारी किया

रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त, 2024 को चेन्नई में तमिलनाडु के पांच बार के पूर्व मुख्यमंत्री कलैग्नार एम करुणानिधि की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक स्मारक सिक्का जारी किया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में, उन्हें देश के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक नेता, भारतीय राजनीति के दिग्गज, एक सक्षम प्रशासक, सामाजिक न्याय के समर्थक और एक सांस्कृतिक दिग्गज बताया।

रक्षा मंत्री ने जनता की भलाई के लिए तमिलनाडु के पूर्व मुख्य मंत्री के योगदान का स्मरण करते हुए कहा, “तमिल पहचान में गहराई से शामिल होने के बावजूद, थिरु करुणानिधि ने कभी भी क्षेत्रवाद को राष्ट्र की एकता को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने समझा कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत विविध आवाजों और पहचानों को समायोजित करने की क्षमता में निहित है। राज्य के अधिकारों पर उनका आग्रह संघ के भीतर सत्ता के अधिक संतुलित और न्यायसंगत वितरण का आह्वान था। संघवाद के प्रति यह प्रतिबद्धता भारतीयता का एक प्रमुख पहलू है। भारत की विविधता इसकी ताकत है और संघीय संरचना इस विविधता को एक एकीकृत ढांचे के भीतर पनपने की अनुमति देती है।”

श्री राजनाथ सिंह ने कलैग्नार करुणानिधि को एक ऐसा नेता बताया जिनकी राष्ट्रीय शासन में भूमिका और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की वकालत ने भारतीय लोकतंत्र पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि भारतीय पहचान की समावेशी प्रकृति तिरु करुणानिधि की नीतियों में परिलक्षित होती है, जो हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि महिलाओं और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहायता मिले।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “कलैग्नार करुणानिधि महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर समुदायों के अधिकारों के लिए एक प्रखर समर्थक थे। उन्होंने ऐसे सुधारों का नेतृत्व किया, जिन्होंने लैंगिक समानता को प्रोत्साहन दिया और महिलाओं को सशक्त बनाया। उनकी सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला कानून बनाया और उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कृषि मजदूरों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कल्याण बोर्ड बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका काम एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि किसी राष्ट्र की प्रगति का असली माप इस बात में निहित है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।”

तिरु करुणानिधि को एक कुशल प्रशासक बताते हुए श्री राजनाथ सिंह ने उनके कार्यक्रम ‘मनु निधि थित्तम’ का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने जिला अधिकारियों को हर सप्ताह एक दिन केवल लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया था। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। उनकी दृष्टि केवल तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने माना कि किसी एक राज्य की प्रगति समग्र रूप से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देती है। उनका कार्य आत्मनिर्भरता और प्रगति की भारतीय भावना का प्रमाण है। उनकी विरासत यह याद दिलाती है कि क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग है। यह सहकारी संघवाद के विचार का सबसे अच्छा उदाहरण है।”

रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र और सहकारी संघवाद की शक्ति में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है, बल्कि यह लोगों को यह आशा भी दे रहा है कि लोकतंत्र विकास प्रदान करता है और लोगों को सशक्त बनाता है।

श्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु दोनों में रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने के निर्णय का उदाहरण बताते हुए इस बात पर बल दिया कि विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पक्षपातपूर्ण राजनीति से परे है। उन्होंने कहा, “इन गलियारों का उद्देश्य घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इन्हें निवेश आकर्षित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और भारत में रक्षा उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” उन्होंने दक्षिण भारत के साथ उत्तर और पश्चिम भारत के सांस्कृतिक एकीकरण का उत्सव मनाने के उद्देश्य से काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम पहल पर भी प्रकाश डाला।

रक्षा मंत्री ने कलैग्नार करुणानिधि को एक विपुल लेखक, कवि और नाटककार बताया, जिनके कार्यों ने तमिल साहित्य और सिनेमा को समृद्ध किया। उन्होंने कहा, “तमिल भाषा और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उनके प्रयास उनके इस विश्वास पर आधारित थे कि किसी की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना और उसका उत्सव मनाना व्यापक भारतीय पहचान के लिए आवश्यक है।“ यह कार्यक्रम तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें मुख्यमंत्री श्री एमके स्टालिन और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेन्नई में नवनिर्मित अत्याधुनिक भारतीय तटरक्षक बल समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के भवन का उद्घाटन किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त, 2024 को तमिलनाडु के चेन्नई में नवनिर्मित अत्याधुनिक भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से पुदुचेरी में क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र का भी शुभारंभ किया।  समुद्री बचाव समन्वय केंद्र चेन्नई बंदरगाह परिसर में और क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र पुदुचेरी में तटरक्षक एयर एन्क्लेव में स्थित है। इन इमारतों की स्थापना मजबूत समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपात स्थिति में कुशल प्रतिक्रिया प्रदान करने, समुद्री सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए की गई है।

समुद्री बचाव समन्वय केंद्र

इस अत्याधुनिक समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के निर्माण का उद्देश्य समुद्र में संकट में फंसे नाविकों और मछुआरों के लिए समुद्री बचाव कार्यों के समन्वय एवं प्रभावशीलता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है। यह जीवन की रक्षा करने और गंभीर परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। यह केंद्र स्थलीय और उपग्रह प्रणालियों के माध्यम से संकट की निगरानी के लिए नवीनतम उपकरणों के साथ स्थापित किया गया है और बचाव विमानों, जहाजों और अन्य के साथ खोज एवं बचाव प्रक्रियाओं में विशेषज्ञता वाले भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के उच्च प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा चेतावनी के वास्तविक समय प्रबंधन के लिए उन्नत संचार प्रणालियों और अन्य सुविधाओं से सुसज्जित है।

क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र

क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र का यह प्रतिष्ठान हिंद महासागर क्षेत्र में तटीय राज्यों से सटे समुद्री जल में समुद्री प्रदूषण, विशेष रूप से तेल और रासायनिक प्रदूषण को समाप्त करने की कार्रवाई के समन्वय के लिए अपनी तरह का पहला केंद्र है। इस केंद्र के निर्माण की घोषणा पहली बार रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 22 नवंबर, 2022 को कंबोडिया में आयोजित पहली भारत-आसियान बैठक के दौरान की थी।

इस केंद्र की स्थापना का नेतृत्व भारतीय तटरक्षक बल के पूर्वी क्षेत्रीय मुख्यालय ने चेन्नई बंदरगाह के परिसर में किया था। इसमें एक आपातकालीन सहायता केंद्र है जो समुद्री तेल प्रदूषण की घटनाओं की निगरानी के लिए भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों द्वारा चौबीसों घंटे कार्रवाई के लिए उपलब्ध रहेगा। यह केंद्र बंदरगाहों, तेल प्रबंधन एजेंसियों, सरकारी संगठनों और निजी प्रतिभागियों जैसे विभिन्न संगठनों को प्रदूषणरोधी कार्रवाई की तकनीकों में प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। यह समुद्र में तेल प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए मित्र देशों के कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण में वास्तविक समय तेल रिसाव परिदृश्यों के अधिकतम जोखिम के लिए विभिन्न तेल प्रबंधन उपकरणों की वास्तविक तैनाती शामिल होगी।

भारतीय तटरक्षक बल एयर एन्क्लेव

यह सुविधा भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और पुदुचेरी और तमिलनाडु के दक्षिणी तट पर समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एयर एन्क्लेव चेतक और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन से सुसज्जित होगा। ये दोनों हेलीकॉप्टर स्वदेश निर्मित हैं और जमीन से तथा समुद्र में गश्त करने वाले तटरक्षक जहाजों से समुद्री गश्त, खोज एवं बचाव तथा ऐसे अन्य अभियानों को पूरा करने में सक्षम हैं।

इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के गणमान्य व्यक्ति और मित्र देशों के अतिथि सम्मिलित हुए।

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गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की लगभग ₹1003 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) की लगभग ₹1003 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम से पहले केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अहमदाबाद के थलतेज में ‘ऑक्सीजन पार्क’ का उद्घाटन किया और वेजलपुर में ‘मिशन 3 मिलियन ट्री योजना’ के तहत वृक्षारोपण किया। वहीं, उन्होंने मकरबा में नवनिर्मित स्विमिंग पुल एवं जिम का भी उद्घाटन किया।

AMC के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज अहमदाबाद शहर में जिन विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया है, उनमें ₹730 करोड़ के विकास कार्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र और बाकी कार्य दो अन्य लोकसभा क्षेत्रों में किए गए हैं। श्री अमित शाह ने कहा कि लोकसभा सांसद के तौर पर पिछले पांच साल के उनके कार्यकाल में एक भी साल ऐसा नहीं बीता जिसमें म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और गुजरात सरकार ने गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र में एक वर्ष में ₹5,000 करोड़ के विकास कार्य नहीं किए हों। उन्होंने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र विकास के नए-नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है।

अमित शाह ने कहा कि आज हुए लोकोपयोगी कार्यों के तहत गांधीनगर लोकसभा में 21 परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ जबकि चार परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, वहीँ दो अन्य लोकसभा क्षत्रों में 18 परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ और दो के शिलान्यास हुए हैं। इनमें स्वच्छता से संबंधित, जन स्वास्थ्य से जुड़े काम, बच्चों को अच्छा प्लेटफॉर्म देनेवाले संस्थान की शुरुआत और पर्यावरण की रक्षा के लिए ऑक्सीजन पार्क के लोकार्पण जैसे विकास शामिल हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने आने वाली पीढ़ियों के लिए 100 दिनों में 30 लाख पेड़ लगाने का संकल्प किया है। उन्होंने कहा कि इस सराहनीय अभियान के साथ वे बहुत ही करीब से जुड़े हुए हैं। हर सोसाइटी के चेयरमैन, सेक्रेटरी, हर गांव के सरपंच, हर म्युनिसिपल काउन्सिलर और अन्य प्रबुद्ध जन को उन्होंने इस बारे में पत्र लिखे हैं और फ़ोन भी किए। श्री शाह ने अहमदाबाद के निवासियों से विनती की कि वह अपने परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार अपनी सोसाइटी, आसपास की खाली जमीन या बच्चों के स्कूल में पेड़ लगाएं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में हम जितनी कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं, उसके बदले हमें उतनी ही ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए पेड़ लगाने चाहिए। श्री शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वोर्मिंग – ये दोनों आज पृथ्वी और मानव के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हैं। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश की जनता से ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मां यदि जीवित हों तो उन्हें साथ रखकर वृक्षारोपण करें और यदि दिवंगत हो तो उनकी तस्वीर साथ रखकर वृक्षारोपण करना चाहिए। मातृऋण से मुक्त होने का इससे अच्छा कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता और ना ही इससे बड़ा कोई रास्ता हो सकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद के निवासियों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चाहे कितने भी ऑक्सीजन पार्क बनाए, कितने भी मियावाकी जंगल बनाए, चाहे जितने पेड़ लगाए, लेकिन अगर हर अहमदाबादी एक पेड़ लगाएगा तो इनकी संख्या कई गुना अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हम सबको हमारी जिम्मेदारी समझकर एक पेड़ लगाने का काम अवश्य करना चाहिए। पेड़ जब तक हमारी ऊँचाई से अधिक न हो जाए तब तक एक बच्चे की तरह उसका ध्यान रखकर इस काम को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का एक पेड़ माँ के नाम यह सिर्फ़ एक नारा नहीं है, यह जन आंदोलन है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 60 वर्ष बाद देश में किसी एक व्यक्ति को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने का काम किया है और यह सौभाग्य श्री नरेन्द्र मोदी जी को मिला है। इसमें अहमदाबाद का भी योगदान है, अहमदाबाद की तीनों लोक सभा सीटें नरेन्द्रभाई की झोली में रख दी गई जबकि गुजरात ने 25 सीटें दी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अहमदाबाद का भविष्य के अनुकूल विकास और विकसित अहमदाबाद हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद सम्पूर्ण विकसित शहर बनेगा, बिना धुएं का शहर होगा, हर एक घर में शौचालय वाला शहर बनेगा और हर एक के पास आरोग्य कार्ड होगा। अगले दो साल में हम ऐसा शहर बनाने का संकल्प पूरा करेंगे और अहमदाबाद को पूरे देश के शहरों में शीर्ष क्रम में लाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने सुंदर स्वीमिंग पुल, जिम बनाए हैं और साथ ही योग सिखाने की अच्छी व्यवस्था की है। इनके अलावा सुन्दर तालाब और ऑक्सीजन पार्क भी बनाए गए हैं।

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प्रज्ञा परिवार द्वारा कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि एवं IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता, प्रज्ञा परिवार द्वारा कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि, कानपुर पूर्व भाग एवं IMA के सहयोग से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन
आज IMA, कानपुर के सहयोग से प्रज्ञा परिवार (संबद्ध अखिल विश्व गायत्री परिवार) श्याम नगर कानपुर द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर में कुल 56 यूनिट रक्तदान हुआ। सर्वप्रथम भारत माता के चित्र एवं परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा के चित्र पर माल्यार्पण एवम दीपक प्रज्वलन कर गायत्री परिवार के उप जोन समन्वयक आर सी गुप्ता, जिला समन्वयक आर पी लाल ने रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कुटुंब प्रबोधन के सह प्रांत संयोजक, विनोद शंकर दीक्षित(विशिष्ट अतिथि) ने रक्तदान के फायदे बताकर लोगों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया।
प्रज्ञा परिवार ने सभी रक्तदानियों को “रक्तदानी कर्ण” की उपाधि वाला प्रमाण पत्र दिया। कर्ण ने कभी भी अपने दरवाजे से किसी को खाली हाथ नहीं जाने दिया। प्रज्ञा परिवार भी जरूरत पड़ने पर जरूरतमंद के लिए रक्तदान की व्यवस्था करता है।
IMA की ओर से सभी रक्तदानियों को उपहार स्वरूप मिल्टन की बोतल एवं प्रमाण पत्र दिया गया।राष्ट्र सेवा के अंतर्गत प्रज्ञा परिवार प्रत्येक 15 अगस्त एवं 26 जनवरी या पास के रविवार को रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहता है। रक्तदान शिविर में सहयोग करने वालों में प्रमुख रूप से चेयरमैन अशोक कुमार पांडे, अध्यक्ष आर जे मिश्रा, अजय अग्रवाल, सुनील विश्वकर्मा, दिवाकर दीक्षित , शिवानंद गुप्ता, अच्छेलाल, सुरेश चंद्र जोशी, प्रमोद मिश्रा, लाल प्रताप सिंह, अनिल त्रिपाठी आदि थे।
लोहिया भवन के ट्रस्टी अमित कुमार जैन को रक्तदान शिविर हेतु निशुल्क स्थान देने पर धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

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सम्पादक, मुद्रक, स्वामी ~अतुल दीक्षित 

संपर्क सूत्र ~ 9696469699

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