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गुजरात के नर्मदा जिले में केवडिया, स्टैच्यु ऑफ यूनिटी में आदि बाजार- आदिवासी संस्कृति और व्यंजन की भावना का एक उत्सव, का शुभारम्भ हुआ

आदि बाजारों- आदिवासी संस्कृति और व्यंजन की भावना के एक उत्सव की श्रृंखलाओं के क्रम में 26 मार्च, 2022 को गुजरात के नर्मदा जिले में एकता नगर, केवडिया, स्टैच्यु ऑफ यूनिटी में एक अन्य बाजार का उद्घाटन किया गया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के ट्राइफेड द्वारा आयोजित 11 दिवसीय प्रदर्शनी की शुरुआत 26 मार्च को हुई और यह 5 अप्रैल तक चलेगी। इसका उद्घाटन गुजरात सरकार में जनजातीय विकास, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्रीमती निमिषाबेन सुथार ने की। इस अवसर पर गुजरात सरकार में उच्च और प्रौद्योगिकी शिक्षा, विधायी एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. कुबेरभाई मनसुखभाई दिंडोर, ट्राइफेड के चेयरमैन श्री रामसिंह रथवा और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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प्रतिष्ठित स्मारक स्टैच्यु ऑफ यूनिटी में हो रही 11 दिवसीय जीवंत प्रदर्शनी में 100 से ज्यादा स्टॉलों के माध्यम से जैविक आदिवासी उत्पाद और दस्तकारी के सामानों का प्रदर्शन किया जाएगा और ये देश के 10 से ज्यादा राज्यों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस अवसर पर बोलते हुए, श्रीमती निमिषाबेन सुधार ने कहा, “यह मुख्य रूप से भारत के पहले उप प्रधानमंत्री भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयास ही थी, जो भारत एक रूप में अस्तित्व में है। देश को समावेशी और एकजुट बनाना उनकी मुख्य महत्वाकांक्षाओं में से एक थी। दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचा यह महान स्मारक उनके मूल्यों- राष्ट्रीयता, आध्यात्मिकता और संस्कृति का एक प्रमाण है, जिनका सरदार पटेल ने समर्थन किया और जिनके लिए वे हमेशा खड़े रहे। साथ ही यह जिला मुख्य रूप से एक आदिवासी क्षेत्र है। मुझे यह देखकर खासी खुशी है कि एक आदि बाजार- आदिवासी जीवन, संस्कृति और परम्पराओं का उत्सव- इस आदिवासी बहुल बाजार में होगा और चहुंमुखी विकास को बढ़ावा देगा। मैं आप सभी को शुभकामनाएं देती हूं। ”ट्राइफेड के चेयरमैन श्री रामसिंह रथवा ने उद्घाटन के दौरान कहा, “मैं खुश हूं कि ट्राइफेड भारत के आदिवासियों की आजीविका बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। आदि बाजार से देश भर में बड़ी संख्या में लोगों तक आदिवासी संस्कृति के प्रसार में सहायता मिलेगी। यह खासी भीड़भाड़ वाला और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के कारण इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायता मिलेगी।

 

”11 दिन चलने वाले इस महोत्सव में देश के 10 राज्यों के जनजातीय हस्तशिल्प, कला, चित्रकलाओं, कपड़े, आभूषणों का प्रदर्शन किया जाएगा।30 मार्च और 8 अप्रैल, 2022 के बीच एक अन्य आदि बाजार ओडिशा के राउरकेला में सेल प्रदर्शनी मैदान में आयोजित किया जाएगा। आदिवासी जीवन के मूलभूत स्वभाव का प्रतिनिधित्व करने वाले ये आदि बाजार ट्राइफेड द्वारा वंचित आदिवासियों की आजीविका में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं, जो पिछले दो साल में खासी प्रभावित हुई है। आदि बाजार एक ऐसी पहल है, जिससे इन समुदायों के आर्थिक कल्याण और उन्हें मुख्यधारा के विकास के नजदीक लाने में सहायता मिलती है।

 

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एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर का पांचवां दिन

कानपुर 29 मार्च, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवे दिन का आरंभ एस एच ओ कैंट एरिया अर्चना सिंह, समाज सेविका विजयेता श्रीवास्तव तथा एन एस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. चित्रा सिंह तोमर के द्वारा मां सरस्वती की दीप पूजा, प्रार्थना तथा पुष्प अर्पण से किया गया। शिविर के प्रथम सत्र में मिशन शक्ति टीम में एस एच ओ छावनी अर्चना सिंह, सिपाही दीक्षा सिंह, प्रताप भानु त्रिपाठी, महेश गुर्जर ने ग्रामीण महिलाओं की घरेलू हिंसा से संबंधित समस्याओं, गांव में शराब पीकर उत्पात करने वाले लड़कों से संबंधित समस्याओं का समाधान किया। पुलिस टीम के द्वारा त्वरित व तात्कालिक समस्याओं के समाधान हेतु मोबाइल नंबर दिया गया तथा ये विश्वास ग्रामीण महिलाओं को दिलाया गया कि पुलिस उनके साथ है और अब गांव की सुरक्षा हेतु पुलिस गश्त बढ़ा दी जाएगी। एन एस शिविर का यह सत्र महिलाओं के घरेलू एवम् सामाजिक जीवन में सार्थक परिवर्तन लाने की दिशा में सराहनीय प्रयास था। एन एस एस प्रोग्राम ऑफिसर ने सभी अथितियों तथा ग्रामीण महिलाओं का शिविर में स्वागत करते हुए सहयोग हेतु उनका आभार व्यक्त किया। शिविर के द्वितीय सत्र में डॉ. मोनिका शुक्ला के निर्देशन में ग्रामीण महिलाओं के लिए सिलाई कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं के ग्रुप बनाकर ब्लाउज, कुर्ता आदि की कटिंग व सिलाई का अभ्यास करवाया गया। एन एस एस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. चित्रा सिंह तोमर ने शिविर के दोनों ही सत्र में आवश्यकतानुसार अपना महत्त्वपूर्ण निर्देशन प्रदान किया। डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. अनामिका, श्रीमती चेतना त्रिपाठी ने शिविर के सफल आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अंत में स्वयं सेविकाओं द्वारा शिविर में फल वितरण किया गया। राष्ट्रगान के साथ पांचवे दिन के शिविर का समापन किया गया।

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केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लाल किले में भव्‍य दस दिवसीय ‘लाल किला महोत्सव-भारत भाग्य विधाता’ का उद्घाटन किया

दस दिवसीय लाल किला महोत्सव – भारत भाग्य विधाता, 17वीं शताब्दी के प्रतिष्ठित स्मारक, लाल किला, नई दिल्ली में कल से शुरू होगा। 25 मार्च से 3 अप्रैल 2022 तक आयोजित होने वाला यह उत्सव रोजाना सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। इस महोत्सव में “मातृभूमि” -प्रोजेक्शन मैपिंग शो, यात्रा – 360° तल्लीन कर देने वाला अनुभव होगा। इसके अलावा एक सांस्कृतिक परेड, खाओ गल्ली, रंग मंच में लाइव प्रदर्शन, भारत के नृत्य, अनोखे वस्त्र, खेल मंच और खेल गांव तथा योग सहित मशगूल कर देने लायक कई तरह के अनुभव होंगे। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी कल सुबह 10 बजे लाल किले में महोत्सव का उद्घाटन करेंगी। यह घोषणा संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्रीमती उमा नंदूरी ने आज नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग में की। इस अवसर पर डालमिया ग्रुप के सीईओ श्री आनंद भारद्वाज के साथ पर्यटन मंत्रालय में अपर महानिदेशक सुश्री रूपिंदर बराड़; भारतीय पुरातत्‍‍व सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय में निदेशक श्री अजय यादव भी उपस्थित थे। श्रीमती नंदूरी ने यह भी कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के तहत संस्कृति मंत्रालय द्वारा भारत भाग्य विधाता का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लाल किला उत्सव देश की विरासत का उत्सव मनाने के लिए है और भारत भाग्य विधाता के तहत भारत के हर हिस्से की संस्कृति को दिखाया जाएगा। पर्यटन मंत्रालय की अपर महानिदेशक सुश्री रूपिंदर बराड़ ने कहा कि सरकार की एक विरासत अपनाओ पहल के माध्यम से लाल किले को उसके पुराने गौरव में पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत भाग्य विधाता सभी की भारत की विविधता की सराहना करने में मदद करेगा। उन्होंने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि दुनिया भर में पर्यटन के पुनर्जीवित होने के साथ, यह एक महत्वपूर्ण घटना होने जा रही है और पर्यटकों को भारत में आकर्षित सकारात्मक संकेत भेजती है। लाल किले के “स्मारक मित्र”, डालमिया भारत लिमिटेड के साथ संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने आजादी का अमृत महोत्सव के एक भाग के रूप में इस भव्‍य कार्यक्रम की परिकल्पना की है। लाल किला महोत्सव – भारत भाग्य विधाता आगंतुकों के लिए एक समृद्ध सांस्कृतिक दावत का वादा करता है और इसका उद्देश्य विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्‍वपूर्ण होती हैः राष्ट्रपति कोविन्द

राष्ट्रपति  कोविन्द ने कहा है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्‍वपूर्ण होती है। वे आज (24 मार्च, 2022) गांधीनगर में गुजरात विधान सभा के सदस्यों को सम्बोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभा के सदस्य अपने क्षेत्रों के और राज्य के प्रतिनिधि होते हैं; लेकिन इस बात का महत्‍व अधिक है कि लोग उन्हें अपना भाग्य विधाता मानते हैं। लोगों की आशायें और आकांक्षायें उनसे जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की इन आकांक्षाओं को पूरा करना सभी जन प्रतिनिधियों के लिये सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये।

उन्होंने कहा कि वे उस समय गुजरात विधान सभा सदस्यों को सम्बोधित कर रहे हैं, जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी और उसका अमृत महोत्सव मनाने के लिये गुजरात से बेहतर स्थान और क्या हो सकता है। गुजरात क्षेत्र के लोग स्वतंत्र भारत की अलख जगाने में अग्रणी रहे हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में, दादाभाई नौरोजी और फिरोज शाह मेहता जैसी हस्तियों ने भारतीयों के अधिकारों के लिये आवाज उठाई थी। उस संघर्ष को गुजरात के लोग लगातार मजबूत करते रहे, जो फलस्वरूप महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत की स्वतंत्रता की पराकाष्ठा को पहुंचा।राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने न केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नेतृत्व प्रदान किया, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को नई राह भी दिखाई, नये विचार और नया दर्शन दिया। आज विश्व में जहां भी किसी प्रकार की हिंसा होती है, तो बापू के मंत्र ‘अहिंसा’ का महत्‍व समझ में आने लगता है।राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात का इतिहास अनोखा है। यह महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि है तथा इसे सत्याग्रह की भूमि कहा जा सकता है। सत्याग्रह का मंत्र पूरी दुनिया में उपनिवेश के विरुद्ध अचूक अस्त्र के रूप में स्थापित हो गया है। बारडोली सत्याग्रह, नमक आंदोलन और दांडी मार्च ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम को न केवल नया आकार दिया, बल्कि प्रतिरोध की अभिव्यक्ति तथा जन आंदोलन की पद्धति को नये आयाम भी दिये।राष्ट्रपति ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत को एकता के सूत्र में बांधा और प्रशासन की आधारशिला रखी। नर्मदा के किनारे स्थित उनकी प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है तथा उनकी स्मृति के प्रति यह कृतज्ञ राष्ट्र का अकिंचन उपहार है। भारतवासियों के मन में उनका कद तो इससे भी बड़ा है।राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति से इतर, गुजरात ने सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। आध्यात्मिक रूप से देखा जाये तो नरसिंह मेहता की इस भूमि का बहुत प्रभाव है। उनका भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीर पराई जाने रे” तो हमारे स्वतंत्रता संघर्ष का गान बन गया था। इस भजन ने भारतीय संस्कृति के मानवीय पक्ष का भी प्रसार किया। राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात के लोगों की उदारता, भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषता है। सभी वर्गों और समुदायों के लोग प्राचीन काल से ही यहां भाईचारे की भावना के साथ रह रहे हैं।राष्ट्रपति ने इस बात का भी उल्लेख किया कि गुजरात ने आधुनिक काल में विज्ञान के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान किया है। जहां डॉ. होमी जहांगीर भाभा को भारतीय परमाणु कार्यक्रम का पितामह कहा जाता है, वहीं भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय विज्ञान, विशेषकर भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान का युगद्रष्टा माना जाता है।राष्ट्रपति ने कहा कि 1960 में जब गुजरात अस्तित्व में आया था, तब से वह अपने उद्यम और नई सोच के आधार पर विकासपथ पर बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्वेत क्रांति गुजरात की भूमि पर ही शुरू हुई थी और उसने पोषण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है। आज भारत दूध के कुल उत्पादन और खपत में विश्व में पहले स्थान पर है। गुजरात की दूध सहकारितायें इस सफलता की जनक हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है, जिसका उद्देश्य गुजरात की सफलता तथा सहकारी संस्कृति के लाभों का देशभर में विस्तार करना है।राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात विधान सभा ने राज्य के आमूल विकास के लिये कई क्रांतिकारी कदम उठाये हैं। गुजरात पंचायत विधेयक, 1961 और गुजरात अनिवार्य बुनियादी शिक्षा अधिनियम, 1961 के जरिये स्थानीय स्व-शासन तथा शिक्षा में प्रगतिशील प्रणाली स्थापित की गई थी। गुजरात अकेला ऐसा राज्य है, जहां गुजरात अधोसंरचना विकास अधिनियम, 1999 को विधान सभा ने पारित किया था, ताकि अवसंरचना में निवेश तथा विकास को प्रोत्साहित किया जा सके। गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2017 को विधान सभा ने पारित किया, जो भविष्य को देखते हुये कानून को दिशा देने के संदर्भ में महत्‍वपूर्ण है। उन्होंने गुजरात की वर्तमान और पूर्व की सरकारों तथा गुजरात विधान सभा के वर्तमान और पूर्व सदस्यों की प्रशंसा की कि उन सभी ने गुजरात की बहुपक्षीय प्रगति में योगदान किया है।राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से विकास के गुजरात मॉडल को अनुकरणीय माना जा रहा है, जिसे देश के किसी भी राज्य और क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। साबरमती रिवर-फ्रंट शहरी रूपांतरण का प्रभावशाली उदाहरण है। साबरमती और उसके रहने वालों के बीच के रिश्ते को एक नया आयाम मिला है, वहीं पर्यावरण भी सुरक्षित हो गया है। यह देश के उन शहरों के लिये भी अच्छा उदाहरण बन सकता है, जो नदी किनारे आबाद हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुये देश के उज्ज्वल भविष्य के लिये सार्थक कदम उठायें। इसलिये 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शती मना रहा होगा, तो उस समय की पीढ़ी अपने देश पर गर्व करेगी। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत सरकार, राज्य सरकारें तथा समस्त देशवासी भारत के शताब्दी वर्ष को स्वर्ण युग बनाने के लिये एक साथ विकास पथ पर आगे बढ़ते रहेंगे।

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई कोदोमबनी द्वारा गोद लिए गए गांव काकोरी में पोषक आहार वितरण

कानपुर 8 मार्च, भारतीय स्वरूप संवाददाता, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज की एन एस एस इकाई कोदोमबनी द्वारा गोद लिए गए गांव काकोरी में पोषक आहार वितरण कार्यक्रम किया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में एन एस एस प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर ने महिला दिवस के इस अवसर पर अपने विचार प्रस्तुत कर महिलाओं को जागरूक किया इस अवसर पर डॉ मोनिका शुक्ला एवं श्रीमती रीता आदि शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं, एन एस एस यूनिट से लगभग 30 वालंटियर ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया , एन एस एस प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर के व्याख्यान के उपरांत महिलाओं को पोषक आहार का वितरण किया गया तदोपरांत उन्हें स्वास्थ एवं स्वच्छता से संबंधित शपथ दिलाई गई कार्यक्रम में काकोरी की सभी महिलाओं एवं बच्चों ने भाग लिया

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दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम , लखनऊ में वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता, लखनऊ 3 मार्च को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम , लखनऊ में वार्षिकोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य महोदया प्रोफेसर अर्चना राजन जी ने की कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में श्री नरेंद्र शंकर पांडे  (सलाहकार,गृह मंत्रालय, भारत सरकार )एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती मीरा पांडे जी उपस्थित रहे सर्वोच्च अंक प्राप्त मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया साथ ही वर्ष पर्यंत आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजई प्रतिभागियों को भी मुख्य अतिथि के कर कमलों से प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए इस अवसर पर महाविद्यालय की समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ नेहा जैन की पुस्तक “कार्यशील महिलाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन “का विमोचन किया गया महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका एवं इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रियंका शर्मा की पुस्तक “social history in modern india”का भी विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ  इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे

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मजबूत लोकतंत्र

लोकतंत्र मतलब जनता द्वारा जनता के लिए निर्धारित व्यवस्था। जनता द्वारा निर्धारित व्यक्ति संरक्षक की भूमिका निभाता है। अच्छा बुरा सोच कर उनके हितों को ध्यान में रखता है। इस चुनावी बयार में ही लोकतंत्र की मजबूती का भान होता है। एक वक्त था जब नेता शब्द सम्मानजनक माना जाता था। वो देश – समाज के लिए समर्पणभाव रखता था लेकिन जैसे-जैसे सत्ता में नेताओं की पकड़ मजबूत होती गई वैसे वैसे उनकी सोच, समझ, सलीका और शैली भी बदलती गई। आज के नेता अपने वैचारिक स्तर से नीचे गिर गए हैं। चुनाव, घोषणा – पत्र और सभाओं में दिए के प्रलोभनों द्वारा जनता को बरगलातें हैं लेकिन जनता भी इनको समझ चुकी है। फ्री की चीजों को लेने के बाद वो भी नेताओं जैसा ही व्यवहार करने लगी है। नेताओं के वादों पर से अब लोगों का भरोसा उठ गया है। आज नेताओं को दल बदलने में जरा भी वक्त नहीं लगता। जो नेता पहले अन्य दल की बुराई कर रहे थे दल बदलते ही पुराने दल का विरोध करने लगते हैं। निजी हितों के लिए व्यापारियों की तरह खुलेआम सौदेबाजी खरीद-फरोख्त करते हैं। इनका मकसद अच्छा बुरा सोचे बिना जैसे भी बने सिर्फ अपना कार्य सिद्ध करना होता है।
गौरतलब है कि कोरोना काल में जो भी नियम कानून बने वह बस जनता के लिए ही थे। चुनावी रैलियों पर यह नियम नहीं लागू हुये। तो सरकार कौन सी सोशल डिस्टेंसिंग की बात कर रही थी। जहां लोगों को मरने के लिए आमंत्रित किया जा रहा था। शादी समारोहों में लोगों की उपस्थिति पर संख्या निर्धारित कर दी गई, स्कूल – कॉलेज बंद कर दिए गए लेकिन चुनावी क्षेत्रों में कोरोना का कहीं असर नहीं दिखाई देता था। सरकारी घोषणाएं, मंत्रियों के मुस्कुराते चेहरे और अखबार के विज्ञापनों में आंकड़ों में विकास नजर आ जाता है तो फिर आज का युवा रोजगार क्यों मांग रहा है? वो क्यों परेशान है? यदि समस्याएं खत्म हो गई है तो आंदोलन क्यों हो रहे हैं? जनता का पैसा चुनाव प्रचार, रैलियों और विज्ञापनों में खर्च हो जाता है और बचा कुचा घपला कर भगोड़े ले जाते हैं और जनता को मुफ्त नाम का लॉलीपॉप थमा दिया जाता है।
हम सरकार चुनते हैं तो यह जरूरी नहीं हो जाता कि सरकार के हर निर्णय का समर्थन किया  जाये। हमारे घर का मुखिया पिता होता है और उसके द्वारा लिया हुआ निर्णय अंतिम निर्णय होता है। मगर जब वह गलत निर्णय या तानाशाही करता है तो पुत्र, पुत्री और पत्नी द्वारा विरोध के स्वर उठने लगते हैं। उसे चेताया जाता है कि आपका यह निर्णय सही नहीं है। कुछ यही बात लोकतंत्र के प्रतिनिधि पर भी लागू होती है सरकारें आयेंगी और जायेंगी लेकिन जनता को सही गलत का फर्क समझ में आना चाहिए और आज लोकतंत्र की यही मांग भी है। –प्रियंका वर्मा महेश्वरी

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स्मार्ट सिटी कानपुर द्वारा शहर में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं पानी और बिजली की बचत के लिए जल आपूर्ति स्काडा की 21 करोड़ रूपये की परियोजना शुरू

भारतीय स्वरूप संवाददाता, स्मार्ट सिटी कानपुर द्वारा शहर में पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं पानी और बिजली की बचत के लिए जल आपूर्ति स्काडा (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) की 21 करोड़ रूपये की परियोजना शुरू की गई है

इस परियोजना के माध्यम से शहर में अधिक से अधिक ‘‘जल आपूर्ति’’ और ’’जल संरक्षण’’ संभव होगा और उसका बेहतर उपयोग हो सकेगा। आज आयुक्त ने जल संस्थान, बेनाझाबर में स्थापित नए कन्ट्रोल रूम और नियंत्रण कक्ष के द्वारा (वाटर फिल्ट्रेशन बेड) में जल आपूर्ति स्काडा परियोजना का निरीक्षण किया और कंट्रोल रूम के कार्यप्रणाली की समीक्षा कीl

इस कंट्रोल रूम के द्वारा जल आपूर्ति प्रणाली का प्रभावी और कुशल संचालन और बेहतर रखरखाव किया जा सकेगा।

निरीक्षण के महत्वपूर्ण बिंदु और परियोजना के तथ्य इस प्रकार हैं-

1. यह स्मार्ट सिटी द्वारा शुरू की गई एक विशेष परियोजना है जो कानपुर शहर में अधिक से अधिक ‘‘जल आपूर्ति’’ ’’जल संरक्षण’’ सुनिश्चित करने में मदद करेगीl

2. यह परियोजना प्रदेश की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें सभी प्लांटस को एक ही स्थान से संचालित व मॉनीटर किया जा सकता है जिससे किसी भी समस्या या खराबी का संज्ञान लेकर तत्काल मरम्मत किया जा सकता है।

3. पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण (SCADA) एक नियंत्रण प्रणाली है जिसमें उच्च स्तरीय प्रक्रिया पर्यवेक्षी प्रबंधन के लिए कंप्यूटर, नेटवर्क डेटा संचार और ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) शामिल हैं। जिनसे जल प्रवाह का मापन भी सम्भव है।

4. परियोजना में 100 एम0एल0डी0 का एक व 200 एम0एल0डी0 का रॉ वाटर पम्प हाउस बनाया गया है जिसकी 06 जोनल पम्पिंग स्टेशन से आपूर्ति की जायेगी।

5. गंगा बैराज पर 200 एम0एल0डी0 के तीन वाटर ट्रीटमेन्ट प्लान्ट स्थापित किये गये है। तीनो प्लांटस के रॉ वाटर पम्प से पानी निर्गत होने के बाद पानी की बड़ी से बड़ी अशुद्धियों को रोक कर साफ किया जाता है। साफ पानी को ‘‘क्लीयर वाटर पम्प हाउस’’ में भेजा जाता है। ‘‘क्लीयर वाटर पम्प हाउस’’ से पम्पिंग के माध्यम से पूरे शहर में जलापूर्ति की जायेगी, जिसका बेनाझाबर जल-कल बिल्डिंग स्थित कन्ट्रोल रूम से नियंत्रण किया जा सकता है। बेनाझाबर स्थित 200 व 80 एम0एल0डी0 प्लांटस में नये प्रकार के वाल्वस का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। अन्य प्लांटस व जोनल पम्पिंग स्टेशन का कार्य भी जल्दी ही पूर्ण कर लिया जायेगा।

6. SCADA परियोजना कार्यान्वयन के लिए IIT कानपुर मुख्य सलाहकार/पर्यवेक्षण है।

7. इस परियोजना से बड़ी मात्रा में पेयजल संरक्षण और उसकी बेहतर और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी तथा बिजली की खपत में काफी हद तक कमी हो जायेगीl

8. इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी जल निगम और जल संस्थान है तथा डेवलपर योकोगावा इण्डिया लि0 कंपनी हैl

9. आयुक्त ने एजेंसी को पहले चरण का कार्य मार्च अन्त तक, द्वितीय चरण के कार्य सितम्बर-2022 तक तथा तृतीय चरण के कार्य को मार्च-2023 तक पूरा करने के निर्देश दिये गये।

आयुक्त ने स्मार्ट सिटी, जल निगम, जल संस्थान, आईआईटी कानपुर टीम के नोडल अधिकारी और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को साप्ताहिक आधार पर एक साथ बैठने और कार्य प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

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एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा एक सेमिनार का आयोजन

कानपुर 24 फरवरी एस. एन. सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया, कार्यक्रम का शुभारंभ वीएलसीसी से आए हुई हेड ऑफ इंस्टीट्यूट कु. प्राची , स्किन एक्सपर्ट कु.आस्था, मेक अप आर्टिस्ट कु.अनामिका, श्री गौतम जी, प्रबंध समिति के सचिव श्री पी के सेन, प्राचार्या डॉ. निशा अग्रवाल तथा कार्यक्रम प्रभारी डॉ.गार्गी यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया, वीएलसीसी से आई हुई टीम ने छात्राओं को मेकअप, हेयर कटिंग, न्यूट्रीशन के क्षेत्र में किस तरह से अपना करियर बनाए इस बारे में विस्तार से बताया। साथ ही छात्राओं को कैंपस में ही हेयरकट और मेकअप का डेमो भी दिया। वीएलसीसी से आई हुई वहां की हेड ऑफ इंटीट्यूट, प्राची जी ने कन्वेंशनल और नॉन कन्वेंशनल करियर के बारे में विस्तार से बताया। प्राचार्या डॉ. निशा अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत महाविद्यालय में स्थापित ट्रेंनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा छात्राओं के ज्ञानवर्धन, विकास और रोजगार से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम करवाता रहेगा जिससे छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो सके। कार्यक्रम का संचालन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की प्रभारी डॉ. गार्गी यादव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निशा वर्मा ने किया। कार्यक्रम में प्लेसमेंट सेल की सदस्य डॉ. कोमल सरोज व समस्त प्रवक्ताए और छात्राएं उपस्थित रही।

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केन्द्रीय गृह मंत्रीअमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक बैठक में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक बैठक में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। बैठक में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल तथा जम्मू और कश्मीर प्रशासन और सेना सहित भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना की जिससे पिछले कुछ वर्षों में जम्मू और कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई है। आतंकी घटनाएँ 2018 में 417 से घटकर 2021 में 229 हो गई हैं, जबकि सुरक्षा बलों के शहीद हुए कर्मियों की संख्या 2018 में 91 से कम होकर 2021 में 42 हो गई है।

गृह मंत्री ने सुरक्षा ग्रिड को और अधिक मज़बूत करने के निर्देश दिये ताकि सीमा-पार घुसपैठ शून्य हो और आतंकवाद का उन्मूलन हो सके।

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