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कानपुर की शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर की शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पुस्तक की भेंट अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर चौधरी केहर सिंह एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा बड़ौत बागपत द्वारा मेडिसिटी हॉस्पिटल बड़ौत के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु विभिन्न राज्यों से आए 111 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से आमंत्रित उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ सरसौल की सहायक अध्यापिका शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को प्रदेश के राज्य मंत्री कृष्ण पाल मालिक के द्वारा अंग वस्त्र , स्मृति चिन्ह , प्रशस्ति पत्र पोर्टफोलियो एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम में श्री धर्मेंद्र कुमार आईएएस विनीत राठी उपनिदेशक प्रवर्तन निर्देशालय, राघवेंद्र सिंहजिला विद्यालय निरीक्षक बागपत, मनोज मालिक, नवनीत पाठक, डॉक्टर राजेंद्र कुमार, विजय तोमर सीओ बड़ौत, एवं डॉ. रघुनाथ सिंह जी की गरिमामाई उपस्थिति रही।
डॉ. अंजनी अग्रवाल ने अपनी लिखित पुस्तक,” प्रेरक द्वार” (बाल कहानी संग्रह) भी भेट की। जिसकी सभी ने भूरी भूरी प्रशंसा की।

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महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर मिशन शक्ति फेज़–5 के अंतर्गत आज कॉलेज परिसर में महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस दौरान छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी गई। साथ ही एनसीसी कैडेट्स एवं अन्य छात्राओं ने पुलिस टीम के साथ मिलकर सेल्फ डिफेंस, ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा नुक्कड़ नाटक जागरूकता अभियान में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।

इस अवसर पर छात्राओं को सभी महिला हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जागरूक किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में छात्राओं के नाम भी दर्ज किए गए ताकि भविष्य में “नारी शक्ति अभियान” को और सशक्त बनाते हुए समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया जा सके।

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गोवा में पर्पल फेयर-2025 का शुभारंभ समावेशी, प्रतिभा और सशक्तीकरण का उत्सव

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट – सेलिब्रेटिंग डायवर्सिटी के तीसरे संस्करण का उद्घाटन किया और एक समावेशी और सुलभ समाज के प्रति गोवा की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव दिव्यांगजनों की प्रतिभा और क्षमता को प्रदर्शित करते हुए सशक्तीकरण का प्रतीक बन गया है। “समावेशी सोच” पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन अब केवल लाभार्थी नहीं माने जाते। वे पेशेवरउद्यमी और समाज में सक्रिय योगदानकर्ता हैं। उन्होंने बहुप्रतीक्षित पर्पल फेयर-2025 पर कहा कि पर्पल फेयर न केवल प्रतिभा और समावेशिता का जश्न मनाता है बल्कि सामाजिक धारणा में एक बड़े बदलाव भी दर्शाता है – दिव्यांगता को एक सीमा के रूप में देखने से लेकर क्षमतायोगदान और उद्यमिता को मान्यता देने तक।

गोवा के समाज कल्याण मंत्री सुभाष फल देसाई ने कहा कि समावेश कोई दान-पुण्य का कार्य नहीं है; यह एक आंदोलन और शासन का सिद्धांत है जो गरिमा, स्वतंत्रता और मान्यता दिलाता है। इस तरह के उत्सव समावेशन को आनंदमय, सार्थक और दृश्यमान बनाते हैं।

इस अवसर पर केन्द्रिय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री विश्व स्तर पर सबसे सक्रिय और लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं, जो देश के विकास और प्रत्येक समुदाय के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों (एससीपीडी) की उभरती भूमिका के बारे में बताया। पिछले कुछ वर्षों में  दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों ने 50 हजार से ज़्यादा शिकायतों का निपटारा किया है, जिनकी संतुष्टि दर अच्छी रही है, और हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसलों ने उनके आदेशों की विश्वसनीयता को और मज़बूत किया है। उन्होंने सामाजिक आउटरीच कार्यक्रमों, 50 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों और सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा करने वाली मोबाइल अदालतों सहित अभिनव पहलों पर प्रकाश डाला।

यह महोत्सव समावेशी शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, विकलांग व्यक्तियों की प्रतिभा, उद्यमशीलता और योगदान का जश्न मनाता है, तथा एक ऐसे समाज को प्रेरित करता है जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और अवसर के साथ प्रगति कर सके।

दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त श्री गुरुप्रसाद पावस्कर ने इस महोत्सव को “दिव्यांग व्यक्तियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और लचीलेपन को प्रदर्शित करने के लिए एक अनूठा मंच” बताया।

श्री प्रमोद सावंत, मुख्यमंत्री, गोवा; डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री; श्री रामदास अठावले, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री; श्री श्रीपद नाइक, नवीन नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, गोवा सरकार; श्री सदानंद शेत तनावड़े, सांसद (राज्यसभा); श्री सुभाष फल देसाई, दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री, गोवा; श्री राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग; डॉ. वी. कैंडावेलौ, गोवा के मुख्य सचिव; श्री प्रसन्ना आचार्य, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोवा; श्री शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक; श्री गुरुप्रसाद पावस्कर, दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त, गोवा; तथा श्री ताहा हाजीक, सचिव, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, गोवा, उपस्थित गणमान्य व्यक्ति थे।

राष्ट्रीय दिव्यांगजन रोजगार संवर्धन केंद्र (एनसीपीईडीपी), सक्षम, बुकशेयर, डीएआईजी, राइजिंग फ्लेम, संयुक्त राष्ट्र भारत, विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी),  भारत सरकार और विकलांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त के कार्यालय, गोवा में राजदूत सादिया बंदोदकर, साक्षी काले, ज़ेरिफ़ शेख, मंजू शर्मा, ललित पारगी, महादेव सावंत, क्रुणाल ठाकुर, केवाई वेंकटेश, जोसेफ, अंजलि व्यास, ज़मीर ढाले, धन्य रवि, संतोष वाणी, दीपश्री नरेंद्र, सुनील सहस्रबुद्धे, आरती बत्रा, प्रज्ञा सिंह, रक्षिता शेखर, निधि गोयल, जीजा घोष, उमेश सालगर और माया रानावरे भी उपस्थित थे।

यह कार्यक्रम गोवा के समाज कल्याण निदेशालय के दिव्यांगजन मामलों के राज्य आयुक्त, एंटरटेनमेंट सोसाइटी द्वारा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस समारोह में सुश्री मनमीत कौर नंदाअतिरिक्त सचिव श्री राजेश शर्मासंयुक्त सचिवसुश्री ऋचा शंकरडीडीजीदिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग , श्री प्रवीण कुमार, सीएमडी, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ), श्री पीपी अंबष्ट, डिप्टी सीसीपीडी, एनसीपीटी राज्य आयुक्तोंएनजीओ प्रतिनिधियोंमीडिया कर्मियों और विशेष आमंत्रितों सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया!

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सार्वजनिक अभिलेख सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला हैं: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने सुशासन माह के अंतर्गत, नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में सुशासन और अभिलेख 2025″ नामक एक प्रदर्शनी का आयोजन किया । इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया, जो सुशासन और अभिलेखीय संरक्षण के बीच तालमेल की खोज के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन की शुरुआत है। यह प्रदर्शनी 12 अक्टूबर 2025 तक जनता के लिए खुली रहेगी !अपने उद्घाटन भाषण में, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला के रूप में सार्वजनिक अभिलेखों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया । उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटलीकरण परियोजनाओं में से एक को लागू करने में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के अग्रणी प्रयासों की सराहना की और कहा कि अब तक 15 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

प्रदर्शनी में दुर्लभ और महत्वपूर्ण अभिलेखीय अभिलेखों का एक संग्रह प्रदर्शित किया गया है जो पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी पहलों के तहत संरक्षित और व्यवस्थित ये अभिलेख प्रशासनिक दक्षता और अपनी दस्तावेजी विरासत के संरक्षण, दोनों को बनाए रखने के राष्ट्र के संकल्प को दर्शाते हैं। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल रूप से उपलब्ध है। वेबसाइट लिंक : https://nationalarchives.nic.in/sausaasana-aura-abhailaekha-2025

2021 और 2025 के बीच, 75,500 से अधिक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की समीक्षा की गई और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में स्थानांतरित कर दिया गया-जो देश की रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणालियों को मजबूत करने और महत्वपूर्ण सार्वजनिक जानकारी के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रदर्शनी में विभिन्न मंत्रालयों के योगदानों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने भारत के प्रशासनिक ढाँचे और विकास पथ को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, आदि के अभिलेखीय अभिलेख भी शामिल थे।

प्रमुख प्रदर्शनियां निम्नलिखित ऐतिहासिक क्षणों पर केन्द्रित थीं:

  • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की शुरूआत
  • जनरल एस.एच.एफ.जे. मानेकशॉ को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया
  • पंचायती राज और विजय दिवस समारोह पर गृह मंत्रालय की पहल प्रदर्शनी में भारत के दो सबसे सम्मानित नेताओं –  अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने शासन, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास में भारत के विकास को आकार दिया। अभिलेखीय तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से, प्रदर्शनी ने समावेशी विकास, युवा सशक्तिकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा देने में उनकी स्थायी विरासत को उजागर किया।

1891 में स्थापित, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार देश की दस्तावेजी विरासत का संरक्षक है, जिसमें 34 करोड़ से ज़्यादा सार्वजनिक अभिलेख संग्रहित हैं। इसके विशाल संग्रह में दुर्लभ पांडुलिपियाँ, संधियाँ, विधायी दस्तावेज़ और प्रशासनिक रिपोर्टें शामिल हैं—जो भारत के शासन, नीतिगत विकास और सामाजिक परिवर्तन के बारे में अद्वितीय जानकारी प्रदान करती हैं।

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक श्री संजय रस्तोगी ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान के आधुनिकीकरण एवं जन-जन तक पहुँच की दिशा में चल रही पहलों पर प्रकाश डाला। संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने राज्य और अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागारों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया और बोर्न डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण में राष्ट्रीय अभिलेखागार की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

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इस प्रदर्शनी के माध्यम से, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अभिलेखीय संरक्षण और सुशासन के बीच संबंध को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रदर्शित अभिलेखों ने भारत के प्रशासनिक विकास — चुनावी और न्यायिक सुधारों से लेकर अवसंरचनात्मक और नीतिगत प्रगति तक — की बहुमूल्य जानकारी प्रदान की, जिससे एक पारदर्शी, जवाबदेह और दूरदर्शी शासन प्रणाली सुनिश्चित करने में दस्तावेज़ीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

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भारत के महाकाव्य महाभारत का राष्ट्रीय टेलीविजन पर नवीन स्‍वरूप में प्रसारण

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Mahabharat12QCI.JPGकलेक्टिव मीडिया नेटवर्क ने भारत के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य ‘महाभारत’ के एक अभूतपूर्व एआई-आधारित पुनर्कल्पना के प्रसारण की घोषणा की है। इस श्रृंखला का विशेष डिजिटल प्रीमियर 25 अक्टूबर 2025 को वेव्स ओटीटी पर होगा। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से हर रविवार सुबह 11:00 बजे दूरदर्शन पर इसका प्रसारण होगा। यह श्रृंखला भारत और दुनिया भर के डिजिटल दर्शकों के लिए वेव्स ओटीटी के माध्यम से एक साथ उपलब्ध होगी।

अपनी तरह का यह पहला सहयोग भारत के सार्वजनिक प्रसारक की विरासत और देशव्यापी पहुंच को अगली पीढ़ी के मीडिया नेटवर्क के रचनात्मक नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए, इस श्रृंखला में महाभारत महाकाव्‍य के व्‍यापक स्‍वरूप, उसके पात्रों, युद्धक्षेत्रों, भावनाओं और नैतिक दुविधाओं को सिनेमा के पैमाने और अद्भुत यथार्थवाद के साथ फिर से तैयार किया गया है। यह परियोजना मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की भावना को मूर्त रूप देती है और यह दर्शाती है कि कैसे विरासत और नवाचार एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी इस सहयोग पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि प्रसार भारती हमेशा से ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व की गाथाओं को हर भारतीय घर तक पहुंचाता रहा है। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के पुनः प्रसारण ने हमें याद दिलाया कि ये कथाएं परिवारों और पीढ़ियों को कितनी गहराई से एक साथ जोड़ती हैं। यह एआई-आधारित पुनर्कल्पना में भागीदारी दर्शकों को भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक का नए सिरे से अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही इसमें परंपरा का सम्मान करते हुए कहानी बताने की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। यह आधुनिक प्रसारण में विकास और विरासत के एक साथ आने की अभिव्यक्ति है।

कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक और समूह सीईओ, विजय सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि लाखों भारतीयों की तरह, वह भी हर रविवार को टेलीविजन पर क्लासिक महाभारत देखकर बड़े हुए हैं। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारी कल्पना और संस्कृति से हमारे जुड़ाव को आकार दिया। महाभारत के साथ, हमारी आशा है कि आज की पीढ़ी को इसके माध्‍यम से एक ऐसा भावपूर्ण अनुभव दिलाना है जो उनके लिए गहन और एकीकृत भाव से परिपूर्ण हो और इसे आज की तकनीक की संभावनाओं के माध्यम से दिखाया गया है। यह भक्ति और प्रगति के साथ मिलकर कुछ ऐसा तैयार करने के संदर्भ में है जो न सिर्फ गहराई से परंपरा में निहित हो अपितु साहसपूर्वक दूरदर्शी भी हो।

प्रसार भारती का आधिकारिक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, वेव्स, भारत की संस्कृति, समाचार और मनोरंजन के समृद्ध ताने-बाने को एक डिजिटल मंच पर लाता है। वीडियो-ऑन-डिमांड, लाइव इवेंट और टीवी, रेडियो, ऑडियो और पत्रिका सामग्री के व्यापक संग्रह के साथ, वेव्स ने अपनी विश्वसनीय, परिवार-अनुकूल और बहुभाषी पेशकशों के साथ तेज़ी से लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया है। समावेशिता, नवाचार और विरासत के स्तंभों पर निर्मित, यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक कहानी कहने की कला के साथ भारत की कालातीत विरासत को जोड़ता है। कलेक्टिव एआई महाभारत के साथ इसका सहयोग इस बात का उदाहरण है कैसे तकनीक और परंपरा मिलकर शक्तिशाली, समकालीन आख्यान रच सकते हैं जो भारत और दुनिया भर के दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित होते हैं

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प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने सितंबर, 2025 के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पर 38वीं रिपोर्ट जारी की

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने सितंबर, 2025 के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) की 38वीं मासिक रिपोर्ट जारी की। उक्त रिपोर्ट में लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा निपटान की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रदान किया गया है।

सितंबर 2025 में शिकायतों के मासिक निपटान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई जो अगस्त 2025 में 62,216 से बढ़कर सितंबर 2025 में 82,790 हो गई। सितंबर, 2025 के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पोर्टल पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित शिकायतों की संख्या 1,74,587 है। 30 सितंबर, 2025 तक 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1000 से अधिक लंबित शिकायतें हैं।

यह रिपोर्ट सितंबर, 2025 में केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पोर्टल के माध्यम से केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पर पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं का डेटा प्रदान करती है। सितंबर, 2025 में विभिन्न माध्यमों से केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पर कुल 78,353 नए उपयोगकर्ता पंजीकृत हुए हैं, जिनमें से 13,613 पंजीकरण उत्तर प्रदेश से हैं। फीडबैक कॉल सेंटर ने सितंबर, 2025 में कुल 81,937 फीडबैक एकत्र किए  जिनमें से 32,982 फीडबैक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किए गए।

उक्त रिपोर्ट सितंबर, 2025 में कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से दर्ज शिकायतों का राज्यवार विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है और यह 5 लाख से ज़्यादा सीएससी पर उपलब्ध है, जो 2.5 लाख ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) से जुड़ा है। सितंबर, 2025 में कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से कुल 8,722 शिकायतें दर्ज की गईं।

रिपोर्ट में सेवोत्तम योजना के अंतर्गत पिछले चार वित्तीय वर्षों में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रशिक्षित अधिकारियों की कुल संख्या भी दी गई है। वित्त वर्ष 2022-23 और वित्त वर्ष 2025-26 के बीच, कुल 946 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 31,462 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

क्र. सं. वित्तीय वर्ष प्रशिक्षण आयोजित प्रशिक्षित अधिकारी
1 2022-23 280 8,496
2 2023-24 236 8,477
3 2024-25 314 10,533
4 2025-26 (30 सितंबर, 2025 तक) 116 3,956
कुल 946 31,462

सितंबर, 2025 के मुख्य बिंदु निम्नलिखित है:

  1. सामान्य मुख्य अंश
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लोक शिकायत मामलों की वरिष्ठ स्तर की समीक्षा की सुविधा के लिए एक समर्पित समीक्षा मॉड्यूल चालू किया गया है जो 6 जून 2025 से प्रभावी है।
  • प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने सफलता की कहानी पुस्तिका, प्रभावी शिकायत निवारण: परिवर्तन की 100 वृतांत” प्रकाशित की है , जिसमें केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पहल के अंतर्गत सर्वोत्तम प्रणालियों पर प्रकाश डाला गया है।
  • फीडबैक कॉल सेंटर ने सितंबर, 2025 में कुल 81,937 फीडबैक एकत्र किए जिनमें से 32,982 फीडबैक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किए गए।
  1. केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पर लोक शिकायतों की स्थिति
  • सितंबर, 2025 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 82,082 लोक शिकायत मामले प्राप्त हुए और 82,790 लोक शिकायत मामलों का निवारण किया गया।
  • शिकायतों के मासिक निपटान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो अगस्त 2025 में 62,216 से बढ़कर सितंबर 2025 में 82,790 हो गई।
  • सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 24,814 लोक शिकायत मामले दर्ज किए गए, इसके बाद केरल में 7,710 लोक शिकायत मामले दर्ज किए गए।

3. केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली पर लंबित लोक शिकायतों की स्थिति

  • 30 सितंबर, 2025 तक 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1000 से अधिक लंबित शिकायतें हैं।
  • 30 सितंबर, 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1,74,587 लोक शिकायत मामले लंबित हैं।

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राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण परिषद की 7वीं बैठक दिल्ली में संपन्न

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राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण परिषद की 7वीं बैठक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में 09 अक्तूबर को परिषद के अध्यक्ष सुशील जे. सिंघी की अध्यक्षता में हुई। परिषद की लगातार दुबारा अध्यक्षता ग्रहण करने पर सिंघी को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग के संयुक्त सचिव संजीव ने बधाई दी। श्सजीव ने स्वागत संबोधन में परिषद के सदस्यों को भी बधाई देते हुए व्यापारिक समुदाय के हितों को प्रोत्साहित करने के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता की सराहना की।

 संजीव ने आगंतुकों का ध्यान भारतीय अर्थव्यवस्था में खुदरा व्यापार की अहम भूमिका की ओर आकर्षित किया। उन्होंने राष्ट्रीय खुदरा व्यापार नीति बनाने के लिए परिषद के सदस्यों से जमीनी स्तर के व्यापारियों की व्यापक भागीदारी पर ध्यान देते हुए समावेशी एवं व्यावहारिक सुझाव देने को कहा।

बैठक में ‘वोकल फॉर लोकल’ अर्थात स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग पर भी जोर दिया गया। इस मुहिम का ध्येय स्वदेशी उद्यमों का समर्थन और स्थानीय स्तर पर विनिर्मित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत में बने माल की खरीद—बिक्री प्रोत्साहित करने की अपील के अनुरूप’गर्व से कहो, ये स्वदेशी है’ नारे वाला पोस्टर भी जारी किया गया। इस अभियान को फैलाने के लिए परिषद के सभी सदस्यों ने इसके दूत बनने का संकल्प किया ताकि समाज में इस गहराई तक पैठाया जा सके।

परिषद के अध्यक्ष श्री सुनील जे. सिंघी ने अपने संबोधन में जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधारों के तहत उसकी दरों में हाल में की गई कटौतियों की सराहना की। यह सुधार 22 सितंबर, 2025 से लागू लागू किए गए हैं। उन्होंने व्यापारियों के नेतृत्व में देशव्यापी अभियान ‘जीएसटी बचत उत्सव’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जीएसटी सुधारों के जरिए अप्रत्यक्ष कर ढांचे का कायाकल्प करने के लिए व्यापारीगणों की ओर से आभार ज्ञापन बताया। उनके अनुसार जीएसटी दरों में कटौती ने उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों, दोनों को गहन लाभ एवं बचत का अवसर प्रदान किया है।

परिषद के अध्यक्ष सिंघी ने बताया कि जीएसटी सुधारों से तमाम आवश्यक एवं उपभोक्ता वस्तुएं खरीदना अब अधिक सुलभ हो रहा है। जीएसटी दरों में कटौती से छोटी कार के खरीदारों को करीब 70,000 रूपए तक बचत हो रही है जबकि स्टेशनरी, पोशाकों, जूते—चप्पलों एवं दवा खरीदने पर 07 से 12 प्रतिशत तक बचत का फायदा उपभोक्ताओं को मिल रहा है। स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा पॉलिसी अब जीएसटी से मुक्त हो गई हैं। इससे उनकी खरीद पर सीधे 18 प्रतिशत बचत हो रही है। इसी तरह ट्रैक्टर खरीदने पर अब करीब 40,000 रूपए बचत हो रही है क्योंकि इस पर जीएसटी की दर को 12 एवं 18 प्रतिशत से घटा कर 05 फीसद की मामूली दर तक सीमित किया गया है। कुल मिलाकर 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दर घटाई गई है जिससे नई जीएसटी प्रणाली में खाद्य सामग्री से लेकर रोजमर्रा उपयोग की वस्तुएं, कृषि यंत्र, पोशाक, दवा एवं वाहन तक अधिक सुलभ हो गए हैं।

 

परिषद के अध्यक्ष सिंघी ने सरकारी नियमन प्रक्रियाओं और उनके पालन संबंधी व्यवस्थाओं को सरल करने,वित्तीय सहायता एवं बुलनयादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार व्यवसाय के उपयुकत वातावरण बनाने की हरचंद कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि व्यापारिक संघों एवं संदस्यों द्वारा दिए गए ज्ञापनों को समुचित कार्रवाई के लिए संबंद्ध मंत्रालयों को प्रेषित भी किया जा रहा है। उन्होंने खुदरा एवं व्यापारिक सेक्टर के लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी फैलाने तथा उनका लाभ उठाने को सुगम बनाने के संबंध में भी भागीदारों से सुझाव मांगे।

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एनपीएस और एपीवाई का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) ₹16 लाख करोड़ के पार पहुंचा

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) आज ₹16 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। भारत की पेंशन यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होते हुए, इसके ग्राहकों की संख्या भी बढ़कर 9 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।

पीएफआरडीए ने एनपीएस को सुदृढ़ करने और पेंशन समावेशन को व्यापक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। इसमें 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) शामिल है, जो निवेश के बेहतर विकल्प प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, एनपीएस प्लेटफॉर्म वर्कर्स मॉडल, जो गिग श्रमिकों को कवर करता है, और एनपीएस ओवरहॉल पर एक परामर्श पत्र भी जारी किया गया है, जिसमें सेवानिवृत्ति की उपयुक्तता को बेहतर करने के लिए ग्रेडेड पेआउट और लचीले एन्युइटी विकल्पों का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, लक्षित आउटरीच अभियान का उद्देश्य किसानों, एमएसएमई श्रमिकों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों और अन्य अनौपचारिक क्षेत्र के प्रतिभागियों तक पहुंच का विस्तार करना है। यह पीएफआरडीए के समावेशन, लचीलेपन और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है।

इस उपलब्धि के साथ, पीएफआरडीए सभी भारतीयों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध है।

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वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम हेतु व्यापक अभियान संचालित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर 10 अक्टूबर जनपद कानपुर नगर में वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु विभिन्न गतिविधियाँ संपन्न कराई गईं। जिला मलेरिया अधिकारी के निर्देशन में सरसौल ब्लॉक के ग्राम पौहर में संयुक्त टीम द्वारा वाहक जनित रोगों पर नियंत्रण हेतु की जा रही गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह, सहायक मलेरिया अधिकारी भूपेन्द्र सिंह तथा मलेरिया निरीक्षक मंजीत यादव द्वारा ग्राम सेमरझाल, ब्लॉक सरसौल का भ्रमण किया गया।

भ्रमण के दौरान घर-घर स्वच्छता की स्थिति का निरीक्षण किया गया। किसी भी घर में बुखार के रोगी नहीं पाए गए। एक इंडिया मार्क हैंडपंप के प्लेटफॉर्म की अनुपस्थिति पाई गई, जिसकी जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी को अवगत करा दी गई है। ग्राम निवासी राम प्रकाश गुप्ता द्वारा आयुष्मान कार्ड न बनने की समस्या बताई गई, जिसे शीघ्र समाधान हेतु संबंधित विभाग को सूचित किया गया है।

ग्राम वासियों को संचारी एवं वाहक जनित रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। लोगों को अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, कूड़ा-करकट का निस्तारण करने, तथा घर के अंदर या बाहर जलभराव न होने देने के लिए प्रेरित किया गया।

इसी क्रम में जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा ग्राम तिलसहरी खुर्द का भी भ्रमण किया गया, जहाँ नालियों में लार्वीसाइडल दवा का छिड़काव, कूलर, गमले एवं अन्य जल पात्रों की जांच कर सोर्स रिडक्शन की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों को मच्छरों से बचाव के लिए प्राकृतिक मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करने एवं शरीर को अधिकतम रूप से कपड़ों से ढके रखने की सलाह दी गई।

ग्रामों में स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए गए, जिनमें कुल 12 सामान्य रोगियों का उपचार कर औषधि वितरित की गई। 2 रोगियों की मलेरिया एवं 2 रोगियों की डेंगू जांच की गई, जिनकी सभी रिपोर्टें निगेटिव प्राप्त हुईं।

इसके अतिरिक्त क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, इंडोर स्पेस स्प्रे, लार्वानाशक छिड़काव एवं एण्टमोलॉजिकल सर्वेक्षण जैसी गतिविधियाँ संचालित की गईं।

जनमानस को संचारी रोगों से संबंधित सूचना देने या जानकारी प्राप्त करने हेतु यू.एच.एम. चिकित्सालय परेड स्थित कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर 0512-2333810 अथवा 9335301096 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही नगर निगम स्थित कंट्रोल रूम में हेल्पलाइन नंबर 0512-2526004 एवं 0512-2526005 भी सक्रिय हैं, जिन पर सूचना प्राप्त होने पर संबंधित क्षेत्र में तत्काल कार्रवाई की जाती है।

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बॉलीवुड के स्वर्णिम युग पर आधारित नाट्य प्रस्तुति “सपने (मिडिल क्लास)” का भव्य आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर: क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में आज बॉलीवुड के स्वर्णिम युग पर आधारित नाट्य प्रस्तुति “सपने (मिडिल क्लास)” का भव्य आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम Sameeksha Creations Mumbai के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका लेखन और निर्देशन प्रो. विभांशु वैभव ने किया।

यह नाटक 70 और 80 के दशक के बॉलीवुड सिनेमा को समर्पित एक भावनात्मक और मनोरंजक प्रस्तुति रही, जिसमें मध्यम वर्गीय परिवारों के संघर्ष, सपने और सामाजिक यथार्थ को हास्य, भावनाओं और नाटकीयता के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया।

कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन (Lighting of the Lamp) से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने उद्घाटन संबोधन में कहा —“हमें गर्व है कि क्राइस्ट चर्च कॉलेज कला और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए ऐसे विशेष आयोजनों की मेज़बानी करता है। ‘सपने (मिडिल क्लास)’ ने हमारे छात्रों और शहर के दर्शकों को स्वर्णिम युग की यादों से जोड़ा।” इसके पश्चात मुख्य अतिथि प्रो. विभांशु वैभव ने अपने संबोधन में कहा कि यह नाटक उस वर्ग की कहानी है जो सपनों के साथ जीता है, संघर्ष करता है, और हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

संयोजक प्रो. मीत कमल ने बताया —“हमारा उद्देश्य इस नाटक के माध्यम से 70s–80s के बॉलीवुड युग और उस दौर की संवेदनाओं को दर्शकों तक पहुँचाना था।”

कार्यक्रम का समापन डॉ. एरिक विल्सन द्वारा प्रस्तुत वोट ऑफ थैंक्स से हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, अध्यापकगण, विद्यार्थियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कॉलेज के विभागों के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ तथा गणमान्य अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

नाटक का सारांश : ‘सपने (मिडिल क्लास)’

नाटक की शुरुआत 70–80 के दशक की फ़िल्मों के मशहूर गीतों और संवादों से होती है, जिन्हें सूत्रधार कांची ने अपने अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति से जीवंत किया।

इसके बाद कहानी एक ही मोहल्ले के तीन मध्यमवर्गीय परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है —

पहले परिवार में अम्मा (वैष्णवी) अपने तीन बेटों और एक बेटी के साथ रहती हैं —

 • पहलवान (हर्षित), जो कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर माँ का सपना पूरा करना चाहता है।

 • चंदू (डॉक्टर), जो अपने ठाट-बाट और घमंड में रहता है।

 • रवि, जो धर्मेंद्र जैसा अभिनेता बनने का सपना देखता है।

रवि का साथी पप्पू पान वाला (सुंदरम) उसका सच्चा मित्र है, जबकि फोटोग्राफर (बृजेश) उसकी हर अदा का दीवाना है।

रवि का प्रेम संबंध मोहल्ले के श्रीवास्तव जी (आदर्श) की बेटी बिब्बो (तनिष्का) से है।

बिब्बो का भाई अमर (उमर) अमिताभ बच्चन का प्रशंसक है और खुद अभिनेता बनना चाहता है। उसका प्रेम संबंध चतुर्वेदी की बिटिया सिब्बो (तन्वी) से है।

अमर का साथी मुन्ना कट्टेवाला (विक्रांत) उसके हर कारनामे में साथ देता है।

घर में छोटू (हर्ष) और रामभक्त (प्रणव) अपनी मासूमियत और हास्य से दर्शकों को बाँधे रखते हैं।

माँ (अनुष्का) चिंतित रहती है कि बड़ी बेटी बिन्नो (अंजलि) की शादी अब तक नहीं हुई।

तीसरा परिवार बिन्नो को देखने आता है — उनका बेटा (अब्दुल) बिना कुछ कहे लौट जाता है, लेकिन बाद में बिन्नो की शादी उसी युवक से करा दी जाती है और वह “घरजमाई” बन जाता है। इसी बीच मोहल्ले में बिब्बो और रवि की प्रेमकहानी चाची (कांची) और पंडिताइन (ओजस्विनी) के ज़रिए फैल जाती है। फिर मोंटी बदमाश (शिवा) द्वारा बिन्नो से छेड़छाड़ की घटना होती है। जब यह बात अमर तक पहुँचती है, तो वह रवि, मुन्ना और पप्पू पानवाले के साथ मिलकर मोंटी की हत्या कर देता है।

इसके बाद गुल्लो प्रधान (अंकित) सभी पुरुषों को दोषी ठहराकर जेल भिजवा देता है, जिससे पूरा मोहल्ला मर्दविहीन हो जाता है।

अंतिम दृश्य में पहलवान की पत्नी बड़की बहू (सानिया) का बेटा बड़ा होकर दीवार पर लगे धर्मेंद्र के पोस्टर को फाड़ देता है — जो प्रतीक है अमिताभ के नए युग और नए सपनों की शुरुआत का।

इसी दृश्य के साथ नाटक का समापन होता है — पुराने युग की समाप्ति और नई पीढ़ी के संघर्षशील सपनों की शुरुआत के प्रतीक के रूप में।

दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय, संवादों और मंच सज्जा की जोरदार सराहना की।

नाटक ने यह सशक्त संदेश दिया —

“हर वर्ग के अपने सपने होते हैं, जो संघर्षों के बावजूद जीवित रहते हैं — और यही जीवन की असली सुंदरता है।”

कार्यक्रम में कॉलेज के विद्यार्थी, शिक्षकगण और दर्शक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और सभी ने नाटक की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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