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ट्राइफेड ने आदिवासियों के उद्यमिता विकास के लिए रिलायंस रिटेल, एचसीएल फाउंडेशन और तोराजामेलो इंडोनेशिया के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

आदिवासी सशक्तिकरण की दिशा में ट्राइफेड कई दूरदर्शी कदम उठा रहा है और आदिवासियों को मुख्यधारा के सशक्तिकरण की ओर ले जा रहा है। ग्रामीण भारत के लाखों आदिवासियों को राष्ट्रीय स्तर की मुख्यधारा में लाने तथा आदिवासी व्यवसायों की सुविधा दिलाने के लिए ट्राईफेड ने रिलायंस रिटेल, एचसीएल फाउंडेशन और तोराजामेलो इंडोनेशिया के साथ भागीदारी की है।

नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में 16 से 24 फरवरी 2025 तक आयोजित प्रमुख कार्यक्रम ‘आदि महोत्सव’ के दौरान 19 फरवरी को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए , जो बी2बी दृष्टिकोण के कार्यान्वयन और जनजातीय उत्पाद बाजार के संवर्धन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान ट्राइफेड के महाप्रबंधकों द्वारा क्रमशः रिलायंस रिटेल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री प्रदीप रामचंद्रन, एचसीएल फाउंडेशन की वैश्विक सीएसआर प्रमुख डॉ. निधि पुंढीर और इंडोनेशिया के तोराजामेलो की सीईओ सुश्री अपर्णा सक्सेना भटनागर के साथ देश भर में आदिवासी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं पर ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री आशीष चटर्जी की उपस्थिति में किया गया।

रिलायंस रिटेल के साथ समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य रिलायंस रिटेल को थोक में जनजातीय उत्पादों की आपूर्ति करना है; यह सहयोग जनजातीय उत्पादों की स्थायी सोर्सिंग पहल, ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार में भी सहायता करेगा।

एचसीएल फाउंडेशन जनजातीय कारीगरों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करने में सहायता करेगा, ताकि क्षमता निर्माण और नए प्रशिक्षण प्रदान करके उत्पाद पोर्टफोलियो को बढ़ाया जा सके और उनके विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से मौजूदा उत्पादों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

टोराजामेलो के साथ सहयोग से इंडोनेशिया में भारतीय जनजातीय उत्पादों के लिए अंतर्राष्ट्रीय विपणन और बिक्री चैनलों का विस्तार करने में सहायता मिलेगी। इससे न केवल भारतीय जनजातीय कारीगरों के लिए नए बाजार खुलेंगे बल्कि कारीगरों के बीच एक अद्वितीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

ट्राइफेड बड़े महानगरों और राज्य की राजधानियों में आदिवासी मास्टर कारीगरों और महिलाओं को सीधे बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए “आदि महोत्सव – राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव” का आयोजन कर रहा है। महोत्सव का विषय “उद्यमिता, आदिवासी शिल्प, संस्कृति, भोजन और वाणिज्य की भावना का उत्सव” है, जो आदिवासी जीवन के मूल लोकाचार का प्रतिनिधित्व करता है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 16 फरवरी 2025 को श्री जुएल ओराम, केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री, श्री दुर्गा दास उइके, केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री सुश्री बांसुरी स्वराज, संसद सदस्य, नई दिल्ली और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इस महोत्सव का उद्घाटन किया।

इस और कई अन्य उपक्रमों के साथ, ट्राइफेड इन समुदायों के आर्थिक कल्याण को सक्षम करने और उन्हें मुख्यधारा के विकास के निकट लाने के अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।

ट्राइफेड के बारे में :

* ट्राइफेड भारत सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत एक संगठन है, जो जनजातीय उत्पादों के विपणन विकास के माध्यम से जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए समर्पित है।

रिलायंस रिटेल के बारे में :

*रिलायंस रिटेल एक भारतीय खुदरा कंपनी है और रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी है। 2006 में स्थापित, यह राजस्व के मामले में भारत में सबसे बड़ा खुदरा विक्रेता है। इसके खुदरा आउटलेट खाद्य पदार्थ, किराने का सामान, परिधान, जूते, खिलौने, गृह सुधार उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कृषि उपकरण और इनपुट प्रदान करते हैं। वर्ष 2023 तक, इसके 7,000 शहरों में 18,000 स्टोर स्थानों पर 245,000 से अधिक कर्मचारी थे।

एचसीएल फाउंडेशन के बारे में:

*एचसीएल फाउंडेशन (एचसीएलएफ) की स्थापना 2011 में भारत में एचसीएल टेक की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी शाखा के रूप में की गई थी। यह एक मूल्य-संचालित, गैर-लाभकारी संगठन है जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की दिशा में योगदान देने में कामयाब होता है, जो दीर्घकालिक टिकाऊ कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों और समुदायों के जीवन को प्रभावित करता है।

तोराजामेलो के बारे में:

* टोराजामेलो  का उद्देश्य स्वदेशी ग्रामीण समुदायों में महिलाओं पर केंद्रित एक स्थायी पारिस्थितिकी प्रणाली बनाकर निर्धनता को कम करना है। टोराजामेलो एक नैतिक फैशन लाइफस्टाइल ब्रांड है जो बी2वी और बीटूसी दोनों ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करते हुए इंडोनेशिया की कहानियों को दुनिया के सामने पेश करता है। टोराजामेलो द्वारा अहाना की स्थापना 2023 में एक आंदोलन के रूप में की गई थी, जो स्थानीय रूप से चयनित ब्रांडों और उत्पादों द्वारा सक्षम उत्तरदायी उपभोग को व्यापक रूप से अपनाने के लिए समर्पित है।

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सरकार मुंबई विश्वविद्यालय में ‘अंबेडकर पीठ’ और छात्र सुविधाएं स्थापित करेगी: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘संविधान अमृत महोत्सव’ में कहा

भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज मुंबई विश्वविद्यालय में आयोजित ‘संविधान अमृत महोत्सव’ में एक सभा को संबोधित किया। अपने मुख्य भाषण में डॉ. कुमार ने संविधान के प्रमुख निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर से प्रेरित सामाजिक न्याय, समानता और सशक्तिकरण के आदर्शों को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

डॉ. कुमार ने वंचितों के उत्थान तथा डॉ. अंबेडकर के समावेशी विकास और समानता के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए निरुपित की गई अनेक पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ” डॉ. अंबेडकर के योगदान और राष्ट्र के लिए उनके दृष्टिकोण पर शोध को बढ़ावा देने के लिए सरकार अन्य विश्वविद्यालयों की तरह ही मुंबई विश्वविद्यालय में ‘अंबेडकर पीठ’ स्थापित करेगी।” उन्होंने छात्रों की सहायता के लिए विश्वविद्यालय में दो नए छात्रावास स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वंचित समुदायों के छात्रों की तैयारी में सहायता करने की सरकार की पहल के तहत मुंबई विश्वविद्यालय में एक समर्पित कोचिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह कदम अन्य संस्थानों में इसी तरह के केंद्रों के सफल कार्यान्वयन को देखते हुए उठाया जा रहा है।

डॉ. कुमार ने अपने संबोधन में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत भारत के युवाओं से अपील की कि वे मादक पदार्थों के सेवन से निपटने में अग्रणी भूमिका निभाएं और न केवल खुद की बल्कि अपने समुदायों की भी रक्षा करें।

मुंबई विश्वविद्यालय से डॉ. भीमराव अंबेडकर के गहरे जुड़ाव, जहां उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की पर विचार करते हुए डॉ. कुमार ने कहा, “इसी संस्थान में एक छात्र से लेकर हमारे संविधान के निर्माता बनने तक की डॉ. अंबेडकर की यात्रा भारत के लिए उनके दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता का प्रमाण है। उनके कार्य ने केवल कानूनी ढांचा ही प्रदान नहीं किया, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की भी परिकल्पना की जो आज भी सरकार की नीतियों की मार्गदर्शक शक्ति है।”

डॉ. कुमार ने कहा कि संविधान केवल मौलिक अधिकारों की ही गारंटी नहीं देता, बल्कि कर्तव्यों पर भी जोर देता है। उन्होंने कहा, “हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि जब हम अपने अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हमें समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समान रूप से अपनाना चाहिए। डॉ. अंबेडकर के सपनों के लोकतंत्र को सही मायने में साकार करने के लिए यह संतुलन आवश्यक है।” केंद्रीय मंत्री ने डॉ. अंबेडकर के इस विश्वास को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त की कि “सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र अधूरा है” और इन आदर्शों को पूरा करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहरायी ।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव श्री अमित यादव ने अपने संबोधन में कहा, “यह आयोजन भारत के कानूनी और सामाजिक विकास में मुंबई विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर इस विश्वविद्यालय से निकले सबसे बेहतरीन नेताओं में से थे, जिन्होंने न केवल यहां डिग्री हासिल की, बल्कि अध्यापन भी किया और अपने पीछे बदलाव की विरासत छोड़ गए।.”

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री चंद्रकांत पाटिल, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक श्री अनिल कुमार पाटिल भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक शामिल हुए।

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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के लिए पायलट चरण के दूसरे राउंड के शुभारंभ के साथ आवेदन एक बार फिर आमंत्रित किये जा रहे हैं

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) पायलट चरण के दूसरे राउंड के शुभारंभ के साथ आवेदन एक बार फिर आमंत्रित किये जा रहे हैं। हले राउंड में 6 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त होने के बाद, दूसरे राउंड में भारत के 730 से अधिक जिलों में स्थित शीर्ष कंपनियों में 1 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

तेल, गैस और ऊर्जा; बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, यात्रा और आतिथ्य, ऑटोमोटिव, धातु और खनन विनिर्माण और औद्योगिक, तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता सामान (एफएमसीजी) और कई अन्य क्षेत्रों की 300 से अधिक शीर्ष कंपनियों ने भारतीय युवाओं को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने, पेशेवरों के साथ नेटवर्क बनाने और अपनी रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए हैं।

पात्र युवा अपने पसंदीदा जिले, राज्य, क्षेत्र, इलाके के आधार पर इंटर्नशिप की तलाश कर सकते हैं और उन्हें चुन सकते हैं तथा अपने निर्दिष्ट वर्तमान पते से अनुकूलन योग्य दायरे में इंटर्नशिप फ़िल्टर कर सकते हैं। दूसरे राउंड में, प्रत्येक आवेदक आवेदन की अंतिम तिथि तक अधिकतम तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकता है।

दूसरे राउंड के लिए, देश भर में 70 से अधिक आईईसी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें अधिकतम इंटर्नशिप के अवसर वाले जिलों में कॉलेज, विश्वविद्यालय, आईटीआई, रोजगार मेले आदि शामिल हैं, जो इन इंटर्नशिप के लिए आवश्यक योग्यता के आधार पर हैं। इसके अलावा, अवसरों के एकत्रीकरण और युवाओं के लिए प्रासंगिकता के आधार पर कई प्लेटफार्मों और प्रभावशाली लोगों के जरिये राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल अभियान चल रहे हैं।

पात्र युवा यहां आवेदन कर सकते हैः: https://pminternship.mca.gov.in/

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की अगुवाई में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना भारत की युवा आबादी की क्षमता का दोहन करने के लिए उन्हें भारत की शीर्ष कंपनियों में 12 महीने की सशुल्क इंटर्नशिप प्रदान करके तैयार की गई है।

यह योजना 21 से 24 वर्ष की आयु के ऐसे व्यक्तियों को लक्षित करती है, जो वर्तमान में किसी भी पूर्णकालिक शैक्षणिक कार्यक्रम या रोजगार से जुड़े हुए नहीं हैं। यह योजना उन्हें अपने करियर को शुरू करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।

प्रत्येक इंटर्न को 5,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त 6,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। प्रत्येक इंटर्नशिप प्रासंगिक प्रशिक्षण और पेशेवर अनुभव (कम से कम छह महीने) का संयोजन होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उम्मीदवार सीखें और अपने कौशल को व्यावहारिक स्थितियों में भी लागू कर सकें।

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आपसी प्रेम] सद्भाव और भाईचारे का पर्व है ‘होली’!-डा0 जगदीश गांधी]

होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है होली भारत के सबसे पुराने पर्वों में से एक है। होली की हर कथा में एक समानता है कि उसमें ‘असत्य पर
सत्य की विजय’ और ‘दुराचार पर सदाचार की विजय’ का उत्सव मनाने की बात कही गई है। इस प्रकार होली लोक
पर्व होने के साथ ही अच्छाई की बुराई पर जीत, सदाचार की दुराचार पर जीत व समाज में व्याप्त समस्त बुराइयों के
अंत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता व दुश्मनी को भूलकर एक-दूसरे के गले
मिलते हैं और फिर ये दोस्त बन जाते हैं। किसी कवि ने होली के सम्बन्ध में कहा है कि – नफरतों के जल जाएं सब
अंबार होली में। गिर जाये मतभेद की हर दीवार होली में।। बिछुड़ गये जो बरसों से प्राण से अधिक प्यारे , गले मिलने
आ जाऐं वे इस बार होली में।।
भारतीय संस्कृति का परिचायक है होली
होली को लेकर देश के विभिन्न अंचलों में तमाम मान्यतायें हैं और शायद यही विविधता में एकता, भारतीय
संस्कृति का परिचायक भी है। उत्तर पूर्व भारत में होलिकादहन को भगवान कृष्ण द्वारा राक्षसी पूतना के वध दिवस के
रूप में मनाया जाता है तो दक्षिण भारत में मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कामदेव को तीसरा नेत्र खोल
भस्म कर दिया था। तत्पश्चात् कामदेव की पत्नी रति के दुख से द्रवित होकर भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित
कर दिया , जिससे प्रसन्न होकर देवताओं ने रंगों की वर्षा की। इसी कारण होली की पूर्व संध्या पर दक्षिण भारत में
अग्नि प्रज्ज्वलित कर उसमें गन्ना , आम की बौर और चन्दन डाला जाता है। यहाँ गन्ना कामदेव के धनुष , आम की
बौर कामदेव के बाण, प्रज्ज्वलित अग्नि शिव द्वारा कामदेव का दहन एवं चन्दन की आहुति कामदेव को आग से हुई
जलन हेतु शांत करने का प्रतीक है।
प्रभु के प्रति अटूट भक्ति एवं निष्ठा के प्रसंग की याद दिलाता है यह महान पर्व
होली पर्व को मनाये जाने के कारण के रूप में एक मान्यता यह भी है कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यपु नाम
का एक अत्यन्त बलशाली एवं घमण्डी राजा अपने को ही ईश्वर मानने लगा था। हिरण्यकश्यपु ने अपने राज्य में
ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था। प्रह्लाद की
ईश्वर भक्ति से कुद्ध होकर हिरण्यकश्यपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए , परंतु भक्त प्रह्लाद ने ईश्वर की भक्ति का
मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती।
हिरण्यकश्यपु के आदेश पर होलिका प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से उसे अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई।
किन्तु आग में बैठने पर होलिका तो जल गई परंतु ईश्वर भक्त प्रह्लाद बच गये। इस प्रकार होलिका के विनाश तथा
भक्त प्रह्लाद की प्रभु के प्रति अटूट भक्ति एवं निष्ठा के प्रसंग की याद दिलाता है यह महान पर्व।
प्रहलाद ने बचपन में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया था
यह परमपिता परमात्मा की इच्छा ही थी कि असुर प्रवृत्ति तथा ईश्वर के घोर विरोधी दुष्ट राजा हिरण्यकश्यप
के घर में ईश्वर भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ। प्रहलाद ने बचपन में ही प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लिया था।
निर्दयी हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे प्रहलाद से कहा कि यदि तू भगवान का नाम लेना बंद नहीं करेंगा तो मैं तुझे आग
में जला दूँगा। उसके दुष्ट पिता ने प्रहलाद को पहाड़ से गिराकर , जहर देकर तथा आग में जलाकर तरह-तरह से घोर
यातनायें दी। प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकष्यप से कहा कि पिताश्री यह शरीर आपका है इसका आप जो चाहे सो

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करें , किन्तु आत्मा तो परमात्मा की है। इसे आपको देना भी चाहूँ तो कैसे दे सकता हूँ। प्रहलाद के चिन्तन में भगवान
आ गये तो हिरण्यकश्यप जैसे ताकतवर राजा का अंत नृसिंह अवतार के द्वारा हो गया। इसलिए हमें भी प्रहलाद की
तरह अपनी इच्छा नहीं वरन् प्रभु की इच्छा और प्रभु की आज्ञा का पालन करते हुए प्रभु का कार्य करना चाहिए।
सभी धर्मों के लोग मिलकर मनाते हैं होलिकोत्सव
होली जैसे पवित्र त्योहार के सम्बन्ध में सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने अपने ऐतिहासिक यात्रा
संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का
उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं अपितु मुसलमान लोग भी मनाते हैं। इसका सबसे प्रामाणिक
इतिहास की तस्वीरे मुगलकाल की हैं और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। इन तस्वीरों में
अकबर को जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर को नूरजहाँ के साथ होली खेलते हुए दिखाया गया है। शाहजहाँ के समय
तक होली खेलने का मुगलिया अंदाज ही बदल गया था। इतिहास में वर्णन है कि शाहजहाँ के जमाने में होली को ‘ईद-
ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी’, रंगों की बौछार, कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह शाह जफर के बारे में प्रसिद्ध है कि
होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाते थे।
प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परम्परा को बनाये रखने की आवश्यकता
होली रंगों का त्योहार है, हँसी-खुशी का त्योहार है। लेकिन होली के भी अनेक रूप देखने को मिलते हैं।
प्राकृतिक रंगों के स्थान पर रासायनिक रंगों का प्रचलन, नशेबाजी की बढ़ती प्रवृत्ति और लोक-संगीत की जगह फिल्मी
गानों का प्रचलन इसके कुछ आधुनिक रूप है। पहले जमाने में लोग टेसू और प्राकृतिक रंगों से होली खेलते थे।
वर्तमान में अधिक से अधिक पैसा कमाने की होड़ में लोगों ने बाजार को रासायनिक रंगों से भर दिया है। वास्तव में
रासायनिक रंग हमारी त्वचा के लिए काफी नुकसानदायक होते हैं। इन रासायनिक रंगों में मिले हुए सफेदा, वार्निश,
पेंट, ग्रीस, तारकोल आदि की वजह से हमको खुजली और एलर्जी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए होली
खेलने से पूर्व हमें बहुत सावधानियाँ बरतनी चाहिए। हमें चंदन , गुलाबजल , टेसू के फूलों से बना हुआ रंग तथा
प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की परंपरा को बनाये रखते हुए प्राकृतिक रंगों की ओर लौटना चाहिए।
होली पर्व का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण ही है-
होली पर्व के पीछे तमाम धार्मिक मान्यताएं, मिथक, परम्पराएं और ऐतिहासिक घटनाएं छुपी हुई हैं पर
अंततः इस पर्व का मुख्य उद्देश्य मानव-कल्याण ही है। लोकसंगीत, नृत्य, नाट्य, लोककथाओं, किस्से – कहानियों
और यहाँ तक कि मुहावरों में भी होली के पीछे छिपे संस्कारों , मान्यताओं व दिलचस्प पहलुओं की झलक मिलती है।
होली को आपसी प्रेम एवं एकता का प्रतीक माना जाता है। होली हमें सभी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे को गले
लगाने की प्रेरणा प्रदान करती है। इसके साथ ही रंग का त्योहार होने के कारण भी होली हमें प्रसन्न रहने की प्रेरणा
देती है। इसलिए इस पवित्र पर्व के अवसर पर हमें ईर्ष्या , द्वेष , कलह आदि बुराइयों को दूर करके आपसी प्रेम ,
सद्भाव और भाईचारे को बढ़ाना चाहिए। वास्तव में हमारे द्वारा होली का त्योहार मनाना तभी सार्थक होगा जबकि
हम इसके वास्तविक महत्व को समझकर उसके अनुसार आचरण करें। इसलिए वर्तमान परिवेश में जरूरत है कि इस
पवित्र त्योहार पर आडम्बरता की बजाय इसके पीछे छुपे हुए संस्कारों और जीवन-मूल्यों को अहमियत दी जाए तभी
व्यक्ति , परिवार , समाज और राष्ट्र सभी का कल्याण होगा।
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जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने थाना समाधान दिवस, शिवराजपुर में जनता की समस्याओं का निस्तारण किया

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने आज थाना समाधान दिवस, शिवराजपुर में जनसुनवाई की। जनसुनवाई के दौरान वार्ड नंबर 3 शिवराजपुर निवासी लोकेश ने शिकायत किया कि उसकी जमीन पर कुछ लोगों द्वारा निर्माण कार्य नहीं होने दिया जा रहा है, इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित को मौके पर जाकर निस्तारण के निर्देश दिएl परशुराम ने शिकायत किया कि कुछ लोग उनके प्लॉट पर निर्माण कार्य नहीं होने दे रहे हैं इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित को जांच कर आख्या देने के निर्देश दिएl यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कल शिवराजपुर में जमीनी रंजिश के चलते लड़ाई में 10 लोग घायल हो गए थे जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित लेखपाल, राजस्व निरीक्षक व अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि रामप्रसाद ने जो कथित तौर पर दो बीघा जमीन कब्जा की है उसे बिना कोर्ट के आदेश के कब्जा मुक्त कराना संभव नहीं है, कब्जा की गई जमीन को जांच करके धारा 134 के आधार पर ही हटाया जा सकता है l

उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि नगर पालिका व PWD की जमीन पर कब्जा ना हो, अगर कब्जा हो भी गए हैं तो इस पर जिलाधिकारी ने पिछले 10 वर्ष पूर्व जो भी लेखपाल व अधिशासी अधिकारी तैनात थे उनकी जवाबदेही भी तय करते हुए उन पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिएl

उन्होंने उपजिलाधिकारी बिल्हौर रश्मि लांबा को जनमानस की समस्याओं का समय से निवारण हेतु निर्देश दिएl
इस दौरान शिवराजपुर निवासी देवेंद्र पांडेय गुटखा खाकर पहुंच गया , इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उस पर ₹200 का जुर्माना लगवायाl

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज के एन एस एस स्वयंसेवकों ने “शिविरों” से लाभान्वित हुए स्थानीय निवासियों से फीडबैक लिया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर *आयोजक:* क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर (एनएसएस इकाई)

*विषय:* पूर्व में आयोजित तीन एकदिवसीय और सात दिवसीय शिविरों के लाभार्थियों से फीडबैक प्राप्त करना तथा परमारपुरवा क्षेत्र की समस्याओं को नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करना।

*प्रातःकालीन सत्र* क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर* की *एनएसएस इकाई* द्वारा *परमारपुरवा की जुग्गी बस्ती* में अंतिम *एकदिवसीय शिविर* का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक शिविर स्थल पर पहुंचे और परियोजना कार्य के अंतर्गत *पिछले तीन एकदिवसीय एवं सात दिवसीय शिविरों* से लाभान्वित हुए स्थानीय निवासियों से फीडबैक लिया।

*वार्ड 16, परमारपुरवा* के निवासियों ने एनएसएस इकाई द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और बताया कि वे शिविरों से अत्यधिक लाभान्वित हुए हैं। सभी ने आयोजित गतिविधियों की सकारात्मक समीक्षा दी। *कॉलेज के प्रधानाचार्य श्री जोसेफ डेनियल* ने स्वयंसेवकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने एनएसएस इकाई द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा करते हुए एक प्रेरणादायक भाषण दिया। एनएसएस इकाई की *कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल* के मार्गदर्शन में और *प्रधानाचार्य डॉ. जोसेफ डेनियल* के नेतृत्व में *परमारपुरवा क्षेत्र की समस्याओं* को *कानपुर नगर निगम* के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इनमें मुख्य रूप से *सीवरेज व्यवस्था* एवं *तालाबों की साफ-सफाई* शामिल थीं।

नगर निगम ने एनएसएस इकाई द्वारा दिए गए आवेदन को स्वीकार किया। इस प्रकार, एनएसएस इकाई का यह *एकदिवसीय शिविर सफलतापूर्वक संपन्न* हुआ।

*समापन सत्र एवं निष्कर्ष*

स्वयंसेवकों ने इस शिविर में *निःस्वार्थ सेवा* का अनुभव किया और अपनी *सामूहिक मेहनत* पर गर्व महसूस किया। उन्होंने टीम वर्क की सराहना की और इस पूरे कार्यक्रम में *आर्यन जायसवाल एवं आयुष कुमार* के नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताया। उनके योगदान के बिना यह कार्यक्रम सफल नहीं हो पाता।

इस प्रकार, *क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की एनएसएस इकाई* का यह एकदिवसीय शिविर *सकारात्मक प्रभाव* छोड़ते हुए संपन्न हुआ।

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कानपुर मण्डल की चतुर्थ पेंशन अदालत (90वीं) का आयोजन मार्च में होगा

कानपुर नगर, 21 फरवरी, (सू0वि0)* अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन कानपुर मण्डल मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया है कि उ0प्र0 सरकार के सेवानिवृत्त/मृत राजकीय सेवकों के सेवानवृत्तिक लाभों से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान हेतु मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2024-25 की कानपुर मण्डल की चतुर्थ पेंशन अदालत (90वीं) का आयोजन माह मार्च, 2025 के चतुर्थ सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अतः कानपुर मण्डल के जनपदों से ऐसे सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों से अपेक्षित है कि वह निम्नवत प्रारूप पर अपना वाद पत्र तीन प्रतियों में पंजीकृत डाक से अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, कलेक्ट्रेट कम्पाउण्ड, कानपुर मण्डल, कानपुर को ऐसे भेजें कि वह दिनांक 05 मार्च, 2025 तक प्राप्त हो जाये। उक्त तिथि के पश्चात प्राप्त वाद पत्रों को पेंशन अदालत में नहीं रखा जायेगा।

उन्होंने बताया है कि वादी से यह भी अपेक्षित है कि अपने वाद पत्र की एक प्रति अपने संबंधित कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष जहां अन्तिम तैनाती के समय कार्यरत थे, को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दें। पेंशन अदालत में किसी न्यायालय/शासन द्वारा निर्णीत मामले तथा किसी माननीय न्यायालय/शासन स्तर पर विचाराधीन एवं नीतिगत मामलों से संबंधित वाद पत्र पर विचार नहीं किया जायेगा। पेंशन अदालत में केवल पूर्णतः राजकीय कार्मिकों के प्रकरण ही स्वीकार किये जायेंगे।

उन्होंने बताया है कि सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों से की वह प्रार्थी का नाम (पदनाम सहित), पिता/पति का नाम, कार्यालय जहां से सेवानिवृत्त हुये हैं, विभागाध्यक्ष का नाम, जन्म तिथि, सेवा में आने की तिथि, मृत्यु/से0नि0 तिथि, कार्यालयाध्यक्ष को पेंशन स्वीकृति/पुनरीक्षण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की तिथि (साक्ष्य सहित), कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रकरण पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी को भेजे जाने की तिथि, पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी द्वारा आपत्ति का विवरण यदि कोई उठाया गया हो (प्रति संलग्न करे), यदि आपत्ति का उत्तर भेजा गया हो,तो विवरण दें (प्रति भी संलग्न करें), पेंशन अदालत से जो राहत चाहते हों, उसका विवरण औचित्य सहित दें, पत्र व्यवहार का पता (पिन कोड सहित), कोषागार का नाम जहां से पेंशन प्राप्त करते हों, अथवा चाहते हों, मैं भलीभांति समझता हूं/समझती हूं कि नीतिगत मामले अदालत में नहीं सने जायेंगे काननी मामले जैसे उत्तराधिकारी/संरक्षक प्रमाण पत्र के विवाद एवं कोर्ट केसेज से संबंधित मामले आदि पेंशन अदालत में नहीं उठाये जायेंगे। इसके अतिरिक्त यदि किसी मामले में शासन स्तर पर विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्णय हो चुका है एवं संविदा मामले भी नहीं सने जायेगें। न्यायालय में विचाराधीन मामले भी तब तक ग्राहय नहीं होंगे जब तक कि याची द्वारा शपथ पत्र के साथ यह घोषणा न की जाये कि वह न्यायालय से बाहर समझौता चाहता है तथा अपना वाद पापस लेने हेतु सहमत है।

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मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता ‘बोली – बानी’ (मातृभाषाओं का त्यौहार) 21 फरवरी अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी को क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्रांगण में उतारते हुए हिंदी विभाग द्वारा मातृभाषाओं में अभिव्यक्ति का विराट उत्सव ‘बोली बानी’ महाविद्यालय के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। विभिन्न बोलियों और मातृभाषाओं में विविध विधाओं में जैसे गीत, नृत्य, कविता, वक्तव्य, संस्मरण आदि का शानदार प्रदर्शन न केवल छात्र-छात्राओं ने किया, अपितु कॉलेज के अध्यापकों ने भी इसमें बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया।
इस कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र श्रीवास्तव थे, विशिष्ट अतिथि इतिहास विभाग की सूफिया शहाब तथा विशेष अतिथि कॉलेज की उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य जोसेफ डेनियल ने की ।
अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न प्रदान करके किया गया तथा विभागीय स्वागत हिंदी के शोधार्थी अर्जित पाण्डेय ने कन्नौजी बोली में किया। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य ने 21 फरवरी की महत्ता स्पष्ट करते हुए इस दिन मातृभाषा दिवस को मनाने का कारण बांग्ला भाषा में स्पष्ट किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं द्वारा दी गईं एक के बाद एक मोहक प्रस्तुतियों की श्रृंखला सज गई। गरिमा, शाल्वी व साक्षी ने पंजाबी नृत्य किया, आकृति व ओजस्विनी ने राजस्थानी ‘कालबेलिया’ किया तो तन्वी ने मराठी ‘लावणी’ पर प्रस्तुति दी। तनिष्का ने राजस्थानी नृत्य किया तो वर्षा ने भोजपुरी छठ पूजा के गीत पर मोहक नृत्य किया और स्वस्तिक ने नेपाली गीत पर एकल नृत्य किया। साथ ही शरद ने राजस्थानी, तनिष्का ने अवधी व शिवा ने भोजपुरी में एकल गीत प्रस्तुत किए तथा नेहा, उपासना व अंजलि ने अवधी में भांवर गीत प्रस्तुत किया। वैष्णवी ने वंशीधर शुक्ल की अवधी की कविता तथा आदर्श, अब्दुल व पूजा ने क्रमशः हरियाणवी , उर्दू व बंगाली में मातृभाषा के प्रति अपने विचार प्रकट किए।
इसके उपरांत मंच सभी की प्रस्तुतियों के लिए खोल दिया गया। इस खुले मंच पर अनेक सुन्दर प्रस्तुतियाँ शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों आदि ने दीं। तदोपरांत विशेष अतिथि प्रो. श्वेता चंद ने भी एक कविता प्रस्तुत की। साथ ही विशिष्ट अतिथि सूफ़िया शहाब ने उर्दू में अपने विचार व्यक्त किए। सारस्वत अतिथि प्रो. दिनेशचंद्र श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भोजपुरी में सबको संबोधित किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. जोसेफ़ डेनियल ने अपनी मातृभाषा मलयालम में बात करते हुए सभी को अपने देश और उसकी भाषाई विविधता के प्रति गर्व महसूस करने के प्रति प्रेरित किया।
धन्यवाद ज्ञापन हिंदी की शोधार्थी गौरांगी मिश्र द्वारा अवधी बोली में दिया गया। समस्त कार्यक्रम का कुशल संचालन अरुणेश शुक्ल द्वारा अवधी में किया गया। सुंदरम, कांची, प्रज्ञा, विख्यात, अंजलि, नेहा ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी और कर्मचारी-गण उपस्थित रहे और बोलियों की विविधता का आनंद लिया।

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विकास की गति को बढ़ावा देने वाला बजट है सर्वव्यापी : केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र

कानपुर 17 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता केंद्रीय बजट विषय पर कानपुर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार दादानगर में आयोजित संगोष्ठी में केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार खटिक ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की । इस दौरान सांसद रमेश अवस्थी सहित बड़ी संख्या में उद्यमी, व्यापारी व चार्टर्ड अकाउंटेंट ने विशेष रूप से शिरकत की। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डाक्टर वीरेंद्र कुमार खटिक ने कहा कि सरकार आम लोगो के लिए क्या कदम उठा रही है और क्या लाभकारी योजनाएं चला रही है इसको आम जनमानस को रूबरू कराने के मकसद से संपूर्ण देश में अलग अलग स्थानों पर संगोष्ठियां आयोजित की जा रही है । उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बजट विकास की गति को बढ़ावा देने वाला बजट है , इससे देश का परिदृश्य बदला है । मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार के मुताबिक 2013-14 में अनुसूचित जाति कल्याण वर्ग का बजट जो 4031 करोड़ पर था , वह इस बार 10378 करोड रुपए का रखा गया है । यह दर्शाता है की मोदी जी की अगुवाई वाली सरकार सभी के लिए कितनी गतिशील और प्रयत्नशील है । उन्होंने कहा कि लोगों में अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है । शिक्षा का क्षेत्र हो या रेलवे हो । कृषि की बात हो या एमएसएमई सेक्टर हो चाहे मध्यम वर्ग । सरकार सभी की सुख सुविधाओं का ध्यान रख रही है इसलिए यह साफ़ तौर पर कहा जा सकता है की इस बार का बजट सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी बजट है

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में विविधवर्णी आयोजन “वासंतिक” आयोजित

कानपुर 17 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर भारत में वसंत एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसी को क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्रांगण में उतारते हुए हिन्दी विभाग का विविधवर्णी आयोजन “वासंतिक” 17 फरवरी 2025 को सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। पूर्णतः शास्त्रीय आधार पर आयोजित इस नृत्य, संगीत, कला व कविता के अभिनव सहमेल में कॉलेज के छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपनी प्रतिभा का सुन्दर प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुश्री सूज़ी जोसेफ़ थीं और विशिष्ट अतिथि प्रो. श्वेता चंद थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य जोसेफ़ डेनियल ने की।
‘वासंतिक’ की शुरुआत वाद्य वृंद की राग यमन पर सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुई और फिर महाप्राण निराला द्वारा रचित ‘वर दे वीणावादिनी’ के गान व नृत्य प्रस्तुति ने वसन्त की आभा बिखेर दी। इसी क्रम में ‘देव’ की कविता का पाठ अर्जित द्वारा, वसन्त से संबंधित विविध गीत, कथक नृत्य, सबद गान ने पूरे वातावरण को रागमय, अनुरागमय और रंगमय बना दिया। शास्त्रीय गायन में पारंगत अंकित श्रीवास्तव (पूर्व छात्र) ने वसन्त ऋतु पर अत्यंत सुन्दर प्रस्तुतियाँ दीं। साथ ही राहिल अहमद, सुप्रिया दास, तनिष्का वाजपेई और अनाया ने भी बसंत की बहार को गीतों द्वारा उकेरा। रसायनशास्त्र विभाग की प्रो. मीतकमल ने भी सबद गायन प्रस्तुत कर वसन्त का प्रभाव द्विगुणित किया। कथक के शास्त्रीय पारंपरिक नृत्य की मोहक प्रस्तुति अभिज्ञा चतुर्वेदी (पूर्व छात्रा) और अनया मिश्र ने दी तथा तन्वी, उर्वशी, साक्षी, शाल्वी, चहक, सृष्टि ने शास्त्रीय नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों द्वारा सभी को प्रभावित किया। वादन में राग यमन और राग हंसध्वनि तबले पर उदित, बांसुरी पर हर्षित, हारमोनियम पर राहिल और ढफली पर शरद ने प्रस्तुत कर वसन्त का मधुर समां बाँध दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारी सूज़ी जोसेफ़ ने सभागार में उपस्थित सभी छात्र छात्राओं का न केवल उत्साहवर्धन किया अपितु वसंत के सांस्कृतिक एवं लौकिक पक्ष की भी चर्चा की। अध्यक्षीय भाषण कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल द्वारा प्रदान किया गया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभाशीष देते हुए महाविद्यालय में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महत्ता और इनमें प्रतिभागिता का महत्त्व छात्रों को समझाया।
‘वासंतिक’ कार्यक्रम के अंतर्गत फूलों की रंगोली प्रतियोगिता सभागार के मुख्य द्वार पर सम्पन्न हुई इसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया। रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिवांग शुक्ला ने, द्वितीय स्थान तनिष्का चौरसिया ने और तृतीय स्थान कांची त्रिपाठी ने तथा सांत्वना पुरस्कार लावण्या , सृष्टि मिश्रा एवं फैरी ने प्राप्त किया। फूलों की रंगोली प्रतियोगिता ने जहाँ कॉलेज में ‘वासन्तिक’ की उद्घोषणा कर दी थी, वहीँ छात्रों ने बहुत मेहनत से पूरे सभागार का श्रृंगार फूलों से करके वसन्त को कॉलेज के आँगन में उतार दिया। अंजलि, अनंत, सुन्दरम, कांची, विख्यात, प्रज्ञा, फैरी ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। कार्यक्रम का कुशल संचालन गौरांगी मिश्र (शोध छात्रा) द्वारा किया गया। ‘वासन्तिक’ छात्रों की ऊर्जा व उत्साह से उल्लासमय और आनंदमय बन गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी और कर्मचारी-गण उपस्थित रहे।

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